रविवार, 20 जनवरी 2019

Let us say ‘sorry!’


Let us say ‘sorry!’



We often heart others by words and actions in our day to day dealings. This complicates our relationship and makes life more difficult. We can easily solve many problems by accepting our mistakes and saying, Sorry! Problem arises when we fail to have a balanced view towards happenings in life arising mainly due to our inability to listen the views of others. Everybody is just trying to express his sense of belongingness to this universe. If we accept that and develop a sense of togetherness, this world can certainly be a far better place to live in.
Whether we are in the office or on road, the situation often takes ugly turn mainly due to lack of tolerance and the other side reacts violently which was never expected. For example, if a person parks his vehicle wrongly near his flat, his neighbour indulges in fierce fighting which may sometimes end in killing of one of the two persons fighting. We can avoid confrontation in most of such cases just by listening peacefully to the grievances of the other side and by keeping self-control. If we have tolerance and keep cool and try to listen the views of the other side, many untoward incidents can be avoided. We may live happily by developing understanding with our neighbours. Confrontation does not lead anywhere. We must learn the art of saying sorry, if we really want to win others.
There are situations when both sides seem to be taking correct positions. In fact, both of them may be right and still their views may be diametrically opposite to each other and entirely conflicting. It is absolutely essential that a middle path is found out in such situations. The question is how to adjust with the situation so that they could live together in harmony without causing any disturbance to others. It is always wise to develop feeling of oneness which can be better expressed by acceptance of mistakes on our part which might have been committed willingly or unwillingly. If that resolves the situation and helps in restoration of peace, one should not hesitate in doing so.
God gave us ability to speak so that we can make others understand our feelings. He also gave us capacity to hear so that we can listen to the views of others. Then he also gave us eyes to be able to see the vast universe in which we are living. This world can certainly be a better place to live in if we make a proper use of these three abilities given to us by God. 
We often apply our minds while confronting day to day problems. That is required also. But there are situations when we need to apply our heart more than the mind and that alone can help sort out differences with others. Many times, we see people fighting for small issues. This happens because their ego gets involved. No one wants to backtrack from his stated position. The result is that even a small issue gets complicated. It is why we often involve third person who may see things independently and try to resolve it by following the middle path. It is quite possible that both the sides could be right in their view but they are unable to find a mutually acceptable solution. That can happen only if we accept others view and try to find out middle path and adjust with the situation.
Happiness in life cannot be achieved only through bookish knowledge. It needs a practical approach to things. We do not lose much rather gain much more if we consider the problems of others with human angle and keep our individual ego aside while doing so. This makes a lot of difference and can bring out unexpected results. We should consider problems of life from others viewpoint. Management of conflict by adopting a reasonable and mutually acceptable solution is key to peaceful living. It is quite possible that we may be looser for the time being but nothing is costly if that gives us peace in life. We cannot enjoy unless we live in peace and harmony with the nears and dears. Can we imagine a situation where we shall be dancing alone? It cannot bring real happiness at all. We always desire to share our moments of joys with others. We can do this only if we maintain cordial relation with them.

गुरुवार, 17 जनवरी 2019

मकान मालिक आ किरायादार


मकान मालिक आ किरायादार





आइ-काल्हिक युगमे लोकक ठेकान निरंतर बदलैत रहैत अछि । नौकरी पेशाक लोकक बदली होइत रहैत अछि । व्यापारीसभ सेहो अपन शहर बदलैत रहैत छथि । गाम-घरक लोक सेहो आस-पासक शहरमे अपन घर बना लेने छथि । जिनकासभकेँ भगवान बेसी  संपदा देने छथिन  से सभ  कै-कैटा घर बनेने रहैत छथि। जाहिर छैक कि फाजिल घरक ओ की करताह,किराया लगेताह वा बंद रखताह । घरकेँ बंद रखनाइ सेहो कोनो लाभकर समाधान नहि अछि ,तथापि किछुगोटे किरायादारक संगे झंझटमे नहि पड़ए चाहैत छथि आ घरकेँ बहुत-बहुत दिन धरि खालिए छोड़ि दैत छथि । ई बात सही अछि जे कै बेर किरायादारक संगे  मकान खाली करेबाक हेतु ,किंवा किराया वसूलीमे दिक्कति भए जाइत अछि मुदा तकर माने तँ ई नहि जे सदिखन सएह होइत रहत । फेर अहाँ जहन गाम-घर छोड़िकए बाहर जाएब तँ किरायाक मकान चाहबे करी,अपन मकान कतए-कतए बनबैत रहब । किरायाक मकान भेटैत रहए आ दुनू पक्षकेँ ठीकसँ समय बितनि ताही उद्यश्यसँ देशभरिमे किराया नियंत्रण कानून बनल अछि आ लागुओ अछि ।
मकान मालिक आ किरायेदारक बीचमे समस्या बहुत पुरान अछि । समस्याक जड़िमे मकानक अभाव आ बढ़ैत किराया अछि । मकान मालिक चाहैत रहैत छथि जे हुनकर किराया बढ़ैत रहनि आ जखन ओ चाहथि मकान खाली भए जानि । कहक माने जे एहन नहि होइक जे किराएदार मकानपर अबैध कब्जा कए लिअए,किराया सेहो नहि दिअए । मुदा किरायदारक समस्या सेहो मानबीय दृष्टिसँ देखब बहुत जरूरी अछि । मकान मालिक बेर-बेर जँ मकान काली करबैत रहताह तँ ओकरा नाना प्रकारक समस्या होएब स्वभाविक। बच्चासभक इसकूल,अपन कार्यालय आ बढ़ैत खर्छा सभमे तालमेल बैसाएब मोसकिल भए जाइत अछि । कानून एहि समस्यासभकेँ समाधान करैत बीचक रस्ता निकालबाक प्रयास करैत अछि । मुदा कै बेर ई संभव नहि भए पबैत अछि । दुनू पक्ष एक-दोसरसँ सामंजस्य नहि बैसा पबैत छथि आ मोकदमाबाजी धरि बात चलि जाइत अछि । जँ मकान मालिक दबंग अछि तँ जबरदस्ती सेहो करैत अछि । बदमासकेँ लगा कए किरायेदारक समान कै बेर बाहर फेकि देल जाइत अछि ,आदि,आदि ।
महानगर जेना कोलकाता,मुम्बइ, दिल्लीमे हालत आओर बहुत खराब अछि । कैटा किरायेदार मुख्य व्यापारिक स्थानमे पाँच-दस रुपया किराया दैत छथि आ पचासो सालसँ अड़ल छथि,मकान खाली नहि कए रहल छथि। मकानक हालत जर्जर भए चुकल अछि । मकान मालिक मोकदमा ठोकने छथि । मुदा तैँ की? किरायेदारसभ आपसमे संगठन बना कए तकर प्रतिवाद करैत रहैत छथि,मुदा मकान खाली हेबाक कोनो संभावना नहि लगैत अछि । जौँ ओ मकानसभ आइ-काल्हि किरायापर लेल जाएत तँ किराया लाखोमे भए सकैत अछि । उदाहरणस्वरुप जँ कनाटप्लेस दिल्लीक कोनो दोकान साबिक किरायापर चलि रहल अछि तँ किओ किएक खाली करत? जँ ओ ओहिठाम किरायापर मकान वा दोकान आब लेबए जाएत तँ किराया कतेक बढ़ि जाएत,सोचबो मोसकिल अछि । आनो महानगरसभमे तेहने हालत अछि । अस्तु,मकान मालिकसभक चिंता सेहो वाजिब अछि । आखिर लोक संपत्तिकेँ एहिलेल तँ नहि कीनलक जे ओकरा एहि तरहक घनचक्करमे गमा देल जाए? मुदा उपाय की अछि?
जीवनमे भोजन,वस्त्र,आवास मौलिक आवश्यकता मानल जाइत अछि । भोजन.वस्त्रक बाद रहए लेल घर तँ चाहबे करी । लोको पुछैत अछि जे अपनेक कोन गाम घर भेल? माने जे घर आदमीक परिचय थिक। ग्रामीण परिवेशमे तँ अखनो घर माने अपन घर बूझल जाइत छैक ,कारण ओहिठाम किरायाक मकान ने उपलव्ध होइत अछि आ ने लोक लैत अछि । गाममे लोकक पुस्तक-पुस्त  गुजरि जाइत छैक । एकहिठाम लोक जीवन भरि रहि जाइत अछि । पहिलुका समयमे ई बात सही छलैक । मुदा आब परिस्थिति बदलि गेल अछि । पढ़ाइ-लिखाइ,नौकरी,व्यापार हेतु लोक गाम-घरसँ बाहर होइत छथि । ई संभव नहि थिक जे सभ शहरमे अहाँ अपन घर बनेने फिरी । तैँ किरायापर मकान लेब जरुरी भए जाइत अछि । 
छोट शहरमे किरायाक मकान आशानीसँ भेटि जाइत अछि,किराया सेहो कम होइत छैक आ मकान मालिक  जखन-तखन खाली करए सेहो नहि कहैत छैक । मुदा पैघ शहरमे खास कए महानगरमे हालत  दोसर अछि । मुम्बइमे तँ ई हाल अछि जे एकहि कोठरीमे कतेको गोटे कहुनाक किरायापर गुजर करैत छथि । ऊपरसँ मकान मालिककेँ पगड़ी सेहो दिऔक,मासे-मासे किराया तँ चाहबे करी । रहि-रहि कए मकान मालिक दुलत्ती मारिते रहत,जाहिसँ अहाँ ई नहि बिसरि जाइ जे मकान किरायापर लेल गेल अछि आ किछुदिनक बाद खाली करहि पड़त । अस्तु,किरायेदारक हालत कै बेर बहुत  चिंताजनक भए जाइत अछि । मुदा समाधान की अछि? सभ आदमी मकान नहि कीनि सकैत छथि । किरायापर मकान लेनाइ एकटा मजबूरी रहैत छैक । एहि विषयमे कतेकोबेर न्यायलयमे मामिला कएल गेल । एहि विषयपर उच्चतम न्यायलय पर्यंत कतेको फैसला देलक । ओहिसभसँ किछु सुधारो भेलैक अछि।

मकान मालिक आ किरायादारमे झंझट सामान्यतः होइते छैक दूइएटा बात लेल :-१.किराया बढ़बए हेतु,२.मकान खाली करेबाक हेतु । आओर छोट-मोट समस्यासभ सेहो भए सकैत छैक जेना मकानकेँ मरम्मति केनाइ,किराया बकिऔता भए गेनाइ ,आदि-आदि । एहि समस्यासभसँ निपटए हेतु दुनू पक्ष मकान किरायापर लेबए- देबएसँ पहिनहि आपसमे किरायाक एकरारनामा बनबैत छथि । जौँ लीजक अवधि सालभरिसँ कम अछि तँ ओकरा निवंधित करबाक जरुरी नहि अछि अन्यथा एकर निवंधन सब-रजिष्ट्रारक ओहिठाम कराएब कानूनी बाध्यता अछि । जौँ किरायाक एकरारनामा बनल अछि तँ लीजक तय अवधिमे किरायाक ओहि मकानक सभ विषय-वस्तु तकरे अनुसार चलत चाहे ओ किराया बढ़ेबाक गप्प होइक,मकान खाली करेबाक गप्प होइक वा किरायाक भुगतान करब होइक । जँ किरायाक एकरारनामा नहि बनल अछि ,किंवा लीजक अवधि बीति गेल अछि तँ मकान मालिक आ किरायेदारक बीचमे स्थानीय सरकार द्वारा बनाओल गेल किराया नियंत्रण कानूनक अनुसार विवादक निर्णय होएत ।
किरायेदारक हेतु ई बहुत जरुरी अछि जे ओ तय किराया समयसँ मकान मालिककेँ दैत रहथि । किराया नहि देनाइए अपना-आपमे मकान खाली करेबाक हेतु प्रयाप्त कारण भए सकैत अछि । यदि मकान मालिक किराया नहि लैत छथि तँ किराया मुद्रादेशसँ पठाओल जा सकैत अछि । यदि सेहो संभव नहि होइत अछि तँ किराया नियंत्रण अधिकारीक ओहिठाम आवेदन दए किराया जमा करा देबाक चाही । सामान्यतः एहन परिस्थिति तखने होइत अछि जखन कि मकान मालिक मकान खाली कराबए चाहैत छथि ।
जँ मकान मालिक आ किरायेदारक विवाद आपसमे नहि सोझराइत अछि तँ दुनूमे सँ किओ किराया नियंत्रण अधिकारीक पास आवेदन दए अपन समस्या राखि सकैत छथि । उदाहरणस्वरुप,जँ मकान मालिक मकान खाली करबए चाहैत छथि तँ तकर कारण दैत मकान खाली करबा सकैत छथ । सामान्यतः मकान खाली करेबाक हेतु प्रमुख कारण मे किराया नहि देब,मकान मालिककेँ स्वयं मकानक आवश्यकता भए सकैत अछि। जँ किरायेदारकेँ अपन मकान छनि  तँ किरायाक मकान काली करेबाक ओ मजगूत आधार बनि जाइत अछि । मकान मालिक किराया निर्धारणक हेतु सेहो ओतहि अर्जी दए सकैत छथि ।
देश भरिमे सभ राज्य अपन-अपन किराया नियंत्रण कानून बनओने अछि । कैटा राज्यमे ऐहि कानूनक अधीन आबएबला मकानक किरायाक सीमा तय कएल अछि । संगहि राज्य वा केन्द्र सरकार ,स्थानीय निकायक मकानसभ सेहो एहि कानूनसँ बाहर अछि । कैटा राज्यमे नव निर्मित मकान किंवा धर्मार्थ कार्यरत संस्थाक मकान सेहो एहि कानूनक अधिकार क्षेत्रसँ बाहर राखल गेल अछि । विभिन्न राज्यक कानूनमे समरूपता होइक जाहिसँ ई कानून सर्वग्राही भए सकए आ सामान्य लोक एकर सुविधा सरलतासँ लए सकए,ताहि हेतु १९९२मे संसद द्वारा मॉडल किराया नियंत्रण कानून पास कएल गेल जे सब राज्यक लेल छल । मॉडल अधिनियममे किरायेदारीक विरासतपर मौजूदा प्रावधानमे सँ किछुकेँ संशोधित करबाक प्रस्ताव छल आओर किरायाकएकटा सीमा सेहो निर्धारित कएल गेल जाहिसँ बेसी भेलापर किराया नियंत्रण लागू नहि होएत। तकरबाद दिल्लीमे ओहि आधारपर १९९७मे कानून बनबो कएल जे स्थानीय व्यापारी वर्गक विरोधक कारण लागू नहि कएल गेल।
मकान मालिकक आ किरायेदारक बीच संवंध मधुर रहए आ कोनो मतभेद भेलापर सुगमतासँ तकर समाधान भए जाए ताहि हेति ई आवश्यक अछि जे दुनू पक्ष मकानकेँ किरायादारी प्रारंभ हेबासँ पहिने स्पष्ट प्रावधानक संगे किरायाक लीज एग्रीमेन्ट( किरायाक एकरारनामा) उचित मूल्यक स्टांप पेपरपर हस्ताक्षरित करथि। ओहिमे सभ बात जेना किराया कतेक होएत,मकान कतेक दिन किरायापर रहत,मकानक मरम्मति केना की हएत, मकान कहिआ खाली करए पड़त,स्पषटतासँ लिखल रहए । जौँ सालभरिसँ अधिक हेतु किरयापर मकान लेल जाइत अछि तँ एकरारनामाक निवंधन सेहो कराएब जरुरी अछि । एहिमे दुनू पक्षकेँ हितक समाधान भए जाइत अछि । अस्तु, मकान किराया लेबए वा देबएसँ पूरव उपरोक्त बातसभकेँ ध्यानमे रखैत कानून सम्मत किरायाक एकरारनामा बना लेबाक चाही आ तकर अनुवंधकेँ दुनू पक्षकेँ पालन करैत रहक चाही जाहिसँ सुख- शांति बनल रहए । ई सभ बात जँ ठीकसँ कएल गेल अछि तँ मकानकेँ किरायापर देबामे कोनो हर्जा नहि छैक।

रविवार, 13 जनवरी 2019

कार्यस्थानपर यौन उत्पीड़न


कार्यस्थानपर यौन उत्पीड़न



देशक लगभग आधा जनसंख्या महिला अछि । कोनो देश अपन आधा जनसंख्याकेँ मुख्यधारामे सामिल केने बिना समुचित विकास नहि कए सकैत अछि । निश्चय समयक संग बदलैत परिवेशमे महिला सशक्तीकरणक आवाज जोरसोरसँ उठैत रहल अछि तथापि व्यवहारमे ओ बात नहि आबि सकल जे हमर संविधानक निर्माता समानताक अधिकारक व्यवस्था करैत काल सोचने होएताह । तकर कतेको कारण भए सकैत अछि । शिक्षासँ लए कए नौकरी धरिमे भेदभाव होइत रहल अछि । कैठाम तँ एकहि काज करबाक हेतु महिला कर्मचारीकेँ कम वेतन देल जाइत रहल अछि । एहि तरहक तमाम असुविधाक अछैत महिला लोकनि जँ काज करितो छथि तँ कार्यस्थानपर तरह-तरहक परेसानी होइत रहल अछि । तकर सिकाइतो होइत रहल अछि । मुदा कानूनमे एहन कोनो व्यवस्था पहिने नहि छल जे महिलाक  यौन उत्पीड़नक मामिलाकेँ अपराधक श्रेणीमे राखैत आ  एहन परेसानीक कानूनी निवारणक हेतु भारतीय दंड संहिता 1860क धारा 354 एकमात्र विकल्प रहि जाइत छल । 3 अप्रैल, 2013 सँ लागू आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013 क द्वारा भारतीय दंड संहितामे धारा 354A,354B,354C, आ354D जोड़ल गेल अछि जाहिसँ  यौन अपराधकेँ अलग श्रेणीमे राखि  तकर व्याख्या तँ कएले गेल अछि संगहि तकरा हेतु तीनसँ सात सालधरिक जहल आ जुर्मानाक दंड देल जा सकैत अछि ।
माननीय उच्चतम न्यायलय द्वारा   विशाखा बनाम राजस्थान राज्य ((JT 1997 (7) SC 384),क मामलामे कामकाजी महिलाक कार्यस्थानपर यौन उत्पीड़न रोकबाक हेतु  आ दोषी व्यक्तिकेँ दंडित करबाक हेतु विस्तृत दिशा निर्देश जारी केलक । तकर बादे साल 2013 में कार्यस्थल पर महिलाक  यौन उत्पीड़न अधिनियम केँ संसद द्वारा पारित कएल गेल छल।  जाहि संस्थामे दससँ अधिक लोक काज करैछ ओकरापर ई अधिनियम  लागू होइत अछि ।  ई  कानून कार्यस्थल पर महिलाक यौन उत्पीड़नकेँ अवैध घोषित केलक अछि ।  यौनउत्पीड़न के विभिन्नप्रकारकेँ चिह्नित  केलक अछि, आ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़नक स्थिति मे सिकाइत आ तकर निवारण करबाक व्यवस्था केलक अछि। एहि कानूनमे निस्तारणक हेतु जरूरी नहि अछि जे महिला ओहीठाम काज करैत हो जतए एहन घटना भेल । कार्यस्थल कोनो कार्यालय/दफ्तर भए सकैछ,चाहे ओ  निजी संस्थान हो वा सरकारी।  
माननीय उच्चतम न्यायलय विशाखा बनाम राजस्थान राज्य ((JT 1997 (7) SC 384),क मामलामे कामकाजी महिलाक कार्यस्थानपर यौन उत्पीड़न रोकबाक हेतु  आ दोषी व्यक्तिकेँ दंडित करबाक हेतु निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी केलक-
नियोक्ताकेँ ई कानूनी दायित्व अछि जे कार्यस्थानपर कोनो कामकाजी महिलाकेँ यौन उत्पीड़नसँ वचाओल जाए आ जँ एहन घटना भइए जाइत अछि तँ तकर उचित निदान करबाक एवम् दोषी व्यक्तिकेँ दंडित करबाक त्वरित आ सही व्यवस्था करए । ताहि हेतु यौन उत्पीड़नक निम्नलिखित व्याख्या कएल गेल-

१.शारीरिक संपर्क आ छेड़खानी,

२.यौन संपर्क हेतु आग्रह,

३.कामुक गप्प-सप्प,

४.अश्लीलतापूर्ण चित्र आदिक प्रदर्शन,

५.कोनो प्रकारक शारीरिक, मौखिक वा गैर मौखिक व्यवहार,

आंतरिक सिकाइत समिति:

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध, और निवारण) अधिनियम, 2013क धारा 4 के तहत प्रत्येक नियोक्ताकेँ ई कानूनी दायित्व अछि  जे ओ अपना ओहिठाम आंतरिक सिकाइत समितिक गठन करए । दस वा एहिसँ अधिक कर्मचारीकेँ काजपर रखनिहार मालिक नियोक्ता एहि कानूनी दायित्वक निर्वाह करबाक हेतु वाध्य छथि अन्यथा हुनका पचास हजार धरि जुर्माना कएल जा सकैत अछि । कानूनमे इहो प्रावधान अछि जे प्रत्येक जिलामे एकटा स्थानीय सिकाइत समितिक गटन कएल जाएत । जतए कतहु आंतरिक सिकाइत समिति नहि अछि वा नहि गठित कएल जा सकैत अछि ओहिठाम कार्यरत महिला एहि तरहक सिकाइत स्थानीय सिकाइत समितिक समक्ष कए सकैत छथि ।

 आंतरिक सिकाइत समितिमे निम्नलिखित व्यक्ति सामिल कएल जाएत-

१. वरिष्ठ स्तर पर कार्यरत महिला  पीठासीन अधिकारी हेतीह ,

२.दूटा एहन कर्मचारी जिनका कानूनक जानकारी होनि आ जे सामाजिक कार्य करबाक हेतु प्रतिवद्ध होथि,

३.गैर सरकारी संगठनक प्रतिनिधि

एहि समितिक कमसँ कम आधा सदस्य महिला हेतीह आ एकर अध्यक्ष सेहो महिले भए सकैत छथि । कानूनमे इहो प्रावधान अछि जे किओ सदस्य तीनसालसँ बेसी एकर सदस्य नहि रहताह ।

स्थानीय सिकाइत समितिः

स्थानीय सिकाइत समितिमे निम्नलिखित परिस्थितिमे सिकाइत कएल जाएत-

१.जखन सिकाइत नियोक्ताक खिलाप कएल जाएत,

२.जखन दससँ कम कर्मचारी हेबाक कारण ओहि संस्थामे आंतरिक सिकाइत समितिक गठन नहि भए सकैत अछि,

३.घरेलु नौकर द्वारा कएल गेल सिकाइत,

स्थानीय सिकाइत समितिक संरचना निम्नलिखित होएतः-

१.सामाजिक क्षेत्रमे काज केनिहारि एहन महिला जे महिलाक कल्याण हेतु प्रतिवद्ध होथि अध्यक्ष भए सकैत छथि,

२.ब्लाक तहसील,तालुका,नगरपालिकामे कार्यरतमहिला कर्मचारी सदस्य भए सकैत छथि,

३.महिलाक कल्याण काजमे रूचि रखनाहरि एहन दूटा महिला जिनका कार्यक्षेत्रमे यौन उत्पीड़नक गहन जानकारी होनि सदस्य भए सकैत छथि,

४.जिला स्तरपर समाज कल्याण वा महिला एवम् वाल विकासक काजसँ जुड़ल अधिकारी पदेन सदस्य हेतीह,

सिकाइत करबाक समय सीमाः

एहि कानूनक तहत सिकाइत घटित घटनाक तीन महिनाक भीतरे हेबाक चाही । जँ एकहि संगे  कैटा घटना भेल अछि तँ एहि अवधिक गणना एहि प्रकारक अंतिम घटना घटित हेबाक तिथिसँ होएत । जँ आंतरिक सिकाइत समितिकेँ लगैछ जे पीड़ित महिला बाजिब कारणसँ समयपर सिकाइत नहि कए सकल तँ एहि अवधिकेँ आओर तीन महिना धरि बढ़ाओल जा सकैत अछि,मुदा ताहिसँ बेसी एकरा नहि बढ़ाओल जाएत। कहक माने जे पीड़िताकेँ चाही जे एहि समय सीमाक भीतर लिखित सिकाइत आंतरिक सिकाइत समितिसँ करए।

सिकाइत के करत?

सामान्यतः पीड़ित व्यक्ति तय समय सीमाक भीतर संबंधित समितिक समक्ष लिखित सिकाइत करतीह। जौँ पीड़ित शारीरिक रूपसँ सिकाइत करबामे सक्षम नहि अछि तँ ओकर बदलामे ओकर संबंधी,मित्र वा सहकर्मी सिकाइत कए सकैत अछि ।  घटनाक जानकारी रखनिहार किओ उपरोक्त व्यक्तिसभक संगे सिकाइत कए सकैत अछि । जँ पीड़ित व्यक्तिक मृत्यु भए गेल होइक तँ ओहि घटनाक जानकारी रखनिहार किओ व्यक्ति ओकर उत्तराधिकारीक सहमतिसँ सिकाइत कए सकैत अछि ।

अंतरिम आदेश

आंतरिक सिकाइत समितिक द्वारा जाँचक क्रममे  अंतरिम आदेश दए  दुनू पक्षमेसँ ककरो दोसर कार्यालयमे स्थानान्तरित कए सकैत अछि, पीड़ित महिलाकेँ  तीन महिना धरि छुट्टी दए सकैत अछि,पीड़ित महिलाकेँ  ओकरा आओर तंग नहि कएल जा सकए ताहि हेतु उचित व्यवस्था कए सकैत अछि
आंतरिक सिकाइत समिति मामलाक दुनू पक्षक आपसी सहमतिसँ समाधानक अवसर दए सकैत अछि मुदा ओहिमे टाकाक लेन-देनक गप्प नहि होइक । मुदा जँ से संभव नहि होइत अछि तँ ९० दिनक भीतर समिति सिकाइतक जाँच कए अपन प्रतिवेदन नियोक्ताकेँ देत जाहि आधारपर सिकाइत सावित भेलापर आरोपित व्यक्तिपर विभागीय नियमानुसार आ से नहि भेलापर निम्नलिखित कारवाइ नियोक्ता कए सकैत छथि-

लिखित माफी

चेतावनी

पदोन्नति/प्रमोशन या वेतन वृद्धि रोकब

परामर्श या सामुदायिक सेवाक   व्यवस्था करब

नौकरी सँ निकालि देब

जौँ जाँच-पड़तालक बाद समितिकेँ ई पता चलैत अछि जे  सिकाइत झूठ अछि तँ सिकाइत केनहारि महिलाक खिलाफ विभागीय कारवाइक अनुशंसा कए सकैत अछि जाहिकेँ तहत ओकरा चेतावनी ,लिखित माफी,पदोन्नति रोकब वा नौकरीसँ निकालबाक कारबाइ कएल जा सकैत अछि ।

उपरोक्त कानूनक धारा १३क अनुसार जाँच समिति प्रारंभिक जाँचमे जौँ सिकाइतकेँ प्रथम दृष्टया सही पबैत अछि तँ एकार अनुशासन समितिकेँ विस्तृत जाँचक हेतु पठाओल जाएत । मेधा कोतवालक मामलामे माननीय उच्चतम न्यायलय ई व्यवस्था देलक अछि जे जाँच समितिक रिपोर्ट  अंतिम मानल जाएत आ ताहि आधारपर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई कएल जाएत ।
सरकारी विभागमे उपरोक्त कानूनी व्यवस्थाकेँ लागू करबाक पर्याप्त तंत्र विकसित कएल गेल अछि मुदा अखनहु निजी क्षेत्रमे एकरा ठीक ढ़ंगसँ लागू करबाक हेतु सक्रियताक अभाव अछि जाहिसँ अपूर्णीय क्षति भए रहल अछि । भारतीय संविधान द्वारा प्राप्त समानताक अधिकारक की माने रहि जाइत अछि जखन कि देशक आधा महिला आवादी अपन आस्तित्व ओ सम्मानक रक्षा नहि कए सकए?
कार्यस्थानमे महिला कर्मचारीक संग यौन दुर्व्यवहारकेँ रोकबाक हेतु माननीय उच्चतम न्यायलयक दिशानिर्देश आ संसद द्वारा पारित कानूनक अछैत महिला कर्मचारी सभक एहि प्रकारक समस्याक अंत नहि भए सकल तँ तकर कारण मूलतः हमरा लोकनिक समाजक पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना आ ताहि सँ उत्पन्न पुरुष श्रेष्ठताक भाव अछि। अस्तु,एहि समस्याक निदानक हेतु जरूरी अछि जे पुरुषक मोनमे महिलाक प्रति सम्मानक भावना हो । जे देश हजारों बर्खसँ नारी शक्तिक प्रतिरूप दुर्गा माताक आराधना करैत रहल अछि ताहिठाम से भाव होएब कोनो कठिन नहि हेबाक चाही ।


ब्रह्मस्थानक इसकूल


ब्रह्मस्थानक इसकूल



जीवनक किछु घटना मोनपर अमिट निसान बना दैत अछि ,जे रहि-रहि कए मोन पड़ैत रहैत अछि । जकर प्रभाव संपूर्ण व्यक्तित्वपर परैछ । एहने घटना छल हमरसभक नेन्नामे गामक ब्रह्मस्थानक इसकूल गेनाइ।
 गाममे सभसँ पछबारी कात पोखरिक भीरपर पीपरक गाछ छल। ओ गामक ब्रह्म बाबा छलाह आ छथिहो । अखनो ओतए लोकसभ कबुलाक बाद दुधक ढार दैत अछि । सालमे एकबेर ओतए महादेवक पूजा होइते अछि । आब तँ नबाह सेहो प्रायः सभसाल होइत अछि। कालक्रमे ओहिठाम काली मंदिरक निर्माण भए गेल अछि । दीयाबातीक दिन ओतए बेस धूमधामसँ कालीक पूजा कएल जाइत अछि । पहिने ओहिठाम खोपड़ीमे एकटा इसकूल चलैत छल जाहि मे गामभरिक नेन्नासभ प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करैत छल । ओ इसकूल स्वर्गीय पण्डित अदिष्ट नारायण झा(बच्चू बाबू) व्यक्तिगत रूपसँ चलबैत छलाह । ओहि इसकूलक जतेक प्रशंसा कएल जाए से कम होएत ,कारण  ओकरे बदौलत हमसभ शिक्षाक प्रथम अध्याय पूर्ण कए सकलहुँ ।
 गामक तीस-चालिसटा नेन्नासभ ओहि इसकूलमे पढ़ैत छलाह । एक-एक विद्यार्थीपर मास्टर साहेबक नजरि रहैत छलनि । कोनो विद्यार्थी जँ पढ़ाइमे कोताही केलक किंवा इसकूलमे कोनो अनुशासनहीनता केलक तँ ओकर सिकाइत माता-पिता धरि अवश्य होइत छलैक मुदा विद्यार्थीक शारीरिक दण्ड देबाक प्रथा ओतए नहि छल ।
हमरा मोन पड़ैत अछि जे एकदिन हम इसकूल नहि गेल रही । ओहि समय हम दूसरा वा तीसरा किलासमे रहल  होएब । मास्टर साहेब इसकूलक चारिटा विद्यार्थीकेँ हमरा आनबाक हेतु पठओलथि । इसकूलक विद्यार्थी हमरा लेबए अएलाह अछि,से जानि हम बारीमे केराक गाछसभक बीचमे नुका गेल रही । फेर हमरा ताकल गेल आ ओ सभ लादि कए हमरा इसकूल लए गेलाह । रस्ताभरि ओ सभ हमरा रहि-रहि कए बिठुआ कटैत रहलाह ,जाहिसँ हम परेसान होइत रहलहुँ ।  ओ सभ हमरा ओना लादि कए किएक लए गेलाह से नहि बुझि रहल छी । भए सकैत अछि जे हम ओना जेबासँ मना कए देने होइऐक । पाछू-पाछू हमर बहिन गेल रहथि जाहिसँ मास्टर साहेब हमरा मारथि नहि । जे-से, मुदा ओ घटना एखनधरि हमरा मोनमे गड़ल अछि।
ब्रह्मस्थानक ओहि इसकूलमे मात्र एकहिटा शिक्षक छलाह-बच्चूबाबू(स्वर्गीय पण्डित अदिष्ट नारायण झा ) । कतेक नियम-निष्ठासँ ओ नेन्नासभकेँ पढ़बैत छलाह तकर वर्णन करब मोसकिल । भोरे प्रार्थनासँ इसकूलक कार्यक्रम प्रारंभ होइत छल । विद्यार्थीसभक हाजिरी लेल जाइत छल । एकहि खोपरीमे चारिटा किलास कोना चलैत छल आ एक्केटा मास्टर एकहि संगे चारू किलासक नेन्नासभकेँ कोना सम्हारैत छलाह से सोचि आश्चर्य लगैत अछि । मुदा एतबा मोन अछि जे हमसभ इसकूलमे निरंतर व्यस्त रहैत छलहुँ । कोनो प्रकारक अनुशासनहीनताक सबाले नहि छल । कहिओ काल गीत-नाद सेहो होइत छल । इसकूलसँ छुट्टीक पहिने खाँति सामुहिक रूपसँ सभ विद्यार्थी दोहरबैत छलाह। निरंतर चलैत एहि अभ्याससँ हमरासभक खाँति कंठाग्र भए गेल छल जे आगा चलि कए अंकगणितमे बहुत सहायक भेल ।
इसकूलक महत्वपूर्ण कार्यक्रममे छल-शनिदिनक शनिचरीक कार्यक्रम । सभ विद्यार्थी अपन-अपन घरसँ अरबा चाउर अनैत छलाह,गुंड़ अनैत छलाह आ  इसकूलमे ओकरासभकेँ पानिमे फुलाकए पूजाक हेतु प्रसाद बनाओल जाइत छल, तकर बाद पूजा कएल जाइत छल । एकमुठ्ठी पूजाक प्रसादक सभ विद्यार्थीकेँ देल जाइत छल । इसकूलक सभविद्यार्थीक एहिमे सहभागिता रहैत छल । ओहिदिन इसकूलक चहल-पहल देखएबला रहैत छल । आब सोचैत छी जे एतके छोट कार्यक्रम आ एतेक कम लागतमे केना विद्यार्थीसभ एतेक आनंन्दित होइत चलाह,उत्सव मनबैत छलाह?  एकटा आओर जे मनोरंजक कार्यक्रम होइत छल से गणेश चतुर्थीक अवसरपर विद्यार्थीसभ द्वारा गाममे घुमि-घुमि कए ठाम-ठाम "गणेशजी,गणेशजी करे कराम...करैत पूजाक हेतु चंदा एकठ्ठा करब । धियापूताक मोन -कोनो कनीकोटा नव बातमे सभ प्रशन्न भए जाइत छल । आइ-काल्हि जकाँ बेसी सुविधा संपन्न आ अपेक्षाबला समय तँ रहैक नहि । तैँ जएह-सएहसँ बच्चासभ आनंदित भए जाइत छल ।
आइ -काल्हिक सुविधा संपन्न इसकूलक हिसाबे तँ ब्रह्मस्थानक ओहि इसकूलमे किछु नहि रहैक । घरक नामपर एकटा फूसक खोपड़ी रहैक । बैसबाक हेतु माटि रहैक । खेलेबाक हेतु सेहो पर्याप्त जगह नहि रहैक । ओहि इसकूलमे  मास्टरकेँ लिखबाक हेतु बोर्डो नहि छल । कोनो पुस्तकालय नहि छल । अभिवावकसभ सेहो शुभानअल्ला। के पढ़ि रहल अछि,के नहि ,नेन्ना इसकूल गेल कि नहि तकरो साइते ध्यानमे रहैक । तखन रहैक कि जे ओ इसकूल सालक साल चलैत रहल आ कैटा बहुत प्रतिभाशाली व्यक्तिक सृजन केलक? ओहिमे छलैक एकटा अद्भुत व्यक्तित्वक शिक्षक-बच्चूबाबू। साधारण लिबासमे , हाथमे एकटा डायरी लेने ओ नित्य समयपर इसकूल पहुँचि गाम-घरक नेन्नासभमे ज्ञानक ज्योति जगबैत रहैत छलाह। हमरा मोन नहि पड़ैत अछि जे ओ कहिओ कोनो विद्यार्थीकेँ मारि-पीट केने होथि,प्रताड़ित केने होथि । कहि ने हुनकर बातमे कोन जादू छल जे नेन्नासभक मोनकेँ घींचि लैत छल । खेल- खेल मे चारि किलास हमसभ मात्र दूसालमे पास कए गेल रही । शिक्षाक प्रति एहन समर्पण आइ-काल्हि डिबिआ लए कए ताकब तँ नहि भेटत। दुखक बात अछि जे एहन समर्पित व्यक्तिकेँ समाजसँ किछु नहि भेटल । ओ एकतरफा अपन काजमे लागल रहलाह जाहिसँ गामक कतेको विद्यार्थीक जीवन बनि गेल जाहिमे हमहु सामिल छी ।
जा धरि बच्चू बाबू अपन प्रयाससँ इसकूल  चला सकलाह ताबे ओ इसकूल चलल । बादमे आर्थिक विवशतासँ मजबूर भए ओ गाम छोड़ि कलकत्ता चलि गेलाह । ओ इसकूल टुटि गेल । नेन्नासभ आस-पासक दोसर इसकूलसभमे चलि गेल । बादमे ओ गाम घुरि अएलाह । तखन गामक संस्कृत विद्यालयमे शिक्षक भए गेलाह । मुदा दुर्भाग्यक बात जे ओहि संस्कृत विद्यालयमे विद्यार्थीसँ बेसी मास्टरे छलाह आ खानापूरीक हेतु जहाँ-तहाँसँ विद्यार्थीक नाँओ लिखि देल जाइत छल । विद्यार्थीसभ कै बेर उत्तरमध्यमाक साटीफिकीट लेबाक हेतु ओहि ठामसँ परीक्षाक फार्म भरैत छलाह आ पासो भए जाइत छलाह । कहि नहि आब ओहि संस्कृत विद्यालयक की हाल अछि?
इसकूलमे विद्यादानक अतिरिक्त गाम-घरमे होबएबला पूजा-पाठमे सकृय रहैत छलाह । कोनो शुभ काजक हेतु दिन तकेबाक होअए तँ बेसी लोक हुनके ओतए जाइत चल कारण  ओ बहुत व्यवहारिक रुखि रखैत छलाह आ दिन तकबामे ग्रह,नक्षत्रक संगहि लोकक सुविधाक पर्याप्त समावेश करैत छलाह । कोनो विषयपर वाद-विवादमे अपन पक्ष बहुत जोरदार ढ़ंगसँ रखैत छलाह । एकबेर हमर गाम अरेरक उच्चारण की सही अछि ताहि विषयपर हुनका चौकपर जबरदस्त वाद-विवाद करैत देखने रहिअनि जे अखनो मोन पड़ैत रहैत अछि। सही मानेमे ओ वहुआयामी व्यक्तित्वक बहुत विनम्र आ विद्वान व्यक्ति छलाह जे जीवन पर्यन्त कोनो-ने-कोनो रूपमे समाजक सभदिन सेवा करिते रहलाह ।
दूसाल पूर्व माऐक श्राद्धक कर्म करबाक हेतु हम ब्रह्मस्थान जाइत छलहुँ । बेर-बेर पुरना समय मोन पड़ैत छल। आब समय बदलि गेल । गामक ब्रह्मस्थानमे काली मंदिर बनि गेल । लगीचेमे सरकारी प्राथमिक विद्यालय खुजि गेल । ओहिमे कैटा मास्टरक बहाली भेल अछि । गामक कतेको विद्यार्थिसभ ओहिठाम पढ़ैत छथि । सरकारी योजनाक तहत ओहि विद्यालयमे दुपहिरआक भोजन सेहो भेटैत अछि । तथापि आब ने ओ रामा ने ओ खोटाला । एतेक सुविधाक अछैतो ओहिठाम ओ चुहचुही नहि बुझाएल । अफसोचक बात अछि जे  लोक सभ बच्चूबाबू सन परोपकारी विद्वानक किछु  नहि कए सकल। से जे होइक मुदा हुनकर उपकारसँ हमहीटा नहि,अपितु ओहिसमयक अनेको विद्यार्थीक जीवन बनि गेल ।  से सभ हुनका कहिओ नहि बिसरि सकत । हमरा अखनो मोन अछि जे वृहस्पतिदिन कए हमर दरबाजापर ओ हमरा भट्ठा धरओने रहथि। हमर माता-पिता सहित पितामह ताहि समय ओतए रहथि आ कतेक प्रशन्न भेल रहथि । एहन महान विभूतिक स्मृतिकेँ सत-सत नमन!




गुरुवार, 10 जनवरी 2019

अपसकुन आ अंधविश्वास


अपसकुन आ अंधविश्वास



ओना समाजमे बहुत बातमे बहुत परिवर्तन भेल अछि । आधुनिक विज्ञान जीवक अर्थे बदलि देलक अछि । घरे बैसल दिल्ली,पटना आ कतए-कतएक दृष्यसभ सद्यः देखल जा रहल अछि । मोबाइल फोन कि आबि गेल, सौंसे  दुनियाँ लोकक पाकिटमे  सीमटि गेल अछि । एकटा समय छल जे लोक रातिमे एगारह बजे फोनक बूथपर जा कए सस्त फोन करैत छल । आओर आब की हाल अछि?  फोन तँ लगभग  मुफ्त भए गेल अछि । एतेक तरहक बात भेल हछि मुदा  लोकक मानसिकता खास कए ग्रामीण क्षेत्रमे ओहिने अछि । अखनो जँ घरसँ निकलैत काल किओ छीक देलक तँ लोक आपस ई कहि कए भए जाइत अछि  जे अपसकुन भए गेल। जँ बिलारि रस्ता काटे देलक तँ लोक आगा नहि बढ़त,आपस भए जाएत । एहने प्रकारक कतेको प्रकारक मान्यता अछि जे गाहे-बगाहे समाजमे ओहिना जड़ि जमओने अछि ।
अपसकुनक मान्यताक आधार की अछि से कहब मोसकिल । मुदा  ई तँ तय अछि जे परंपरासँ आबि रहल मान्यता थिक जकर कोनो वैज्ञानिक आधार नहि ताकल जा सकैत अछि । जेना अहाँ आगा बढ़लहुँ आ पाछासँ किओ टोकि देलक तँ मोनमे अपसकुनक भय होमए लगैत अछि । तहिना जँ बिलारि बामासँ दहिना रस्ता काटि देलक तँ लोक ओकरा अशुभ मानए लगैत अछि । जँ कतहुँ जेबासँ पहिने छिक्का भए गेल तँ कनी काल लोक ठहरि जाएत तखने आगू बढ़त । एहि तरहक अनेको मान्यता लोकक मोनमे बैसल छैक जे मूलतः अंधविश्वासपर आधारित लगैत अछि ।
जहिना अपसकुनक चर्चा होइत अछि तहिना सकुनोक अपन स्थान छैक। किछु घटना विशेषसँ एकरा लोक जोड़ि दैत अछि । जेना जँ कतहु यात्रापूर्व किओ जल भरल कलश लए सामनेमे ठाढ़ छथि तँ एकरा शुभ मानल जाइत अछि । यात्राक समय जँ नीलकंठ देखा गेल तँ ओ मंगलकारी मानल जाइत अछि । कतहु जेबासँ पहिने दही खेनाइ शुभ भेलैक । एहि तरहेँ नाना प्रकारक किंवदंती कहू,अंधविश्वास कहू, लोकमे प्रचलित अछि जकरा गाहे-वगाहे लोक अनुसरणो कए रहल अछि ।
बात जँ एतबे धरि रहैत तखन तँ कोनो बात नहि । जकरा जे नीक लगैक, करए । मुदा कै बेर इहो देखल जाइत अछि जे एहि तरहक अंधविश्वासक कारणे कैटा निर्दोष लोक तबाह भए जाइत छथि । कैटा विधवा अकारण सामाजिक अपमान ओ प्रतारणाक शिकार भए जाइत छथि । कै बेर तँ एहन पटिदारी प्रतिशोधक कारणसँ कएल जाइत अछि । जौँ ककरो परेसान करबाक अछि वा कोनो ओलि चुकेबाक अछि तँ ओकरा डाइन घोषित कए दिऔक। तकरबाद तँ ओकर जिनगी नर्क भइए कए रहत । काने-कान सौंसे गाममे ई बात फैल जेबामे कोनो समय नहि लगैत अछि । अकारण अंधविश्वास वा शंकाक कारण  निर्दोष लोक अपमानित होइत रहैत छथि । काज-तिहारमे हुनका नहि बजाओल जाइत अछि आ जँ गेबो केलीह तँ किओ हुनका उचित संमान नहि दैत अछि । किो हुनका हाथे चाह-पान नहि लेत। हुनका ओहिठाम जलखै नहि करए चाहत । जौं ओ आङन आबि गेलीह तँ हंगामा भए जाएत । छैक ने जुलूम?
अपसकुनक कोनो हाथ-पैर नहि होइत अछि । ई लोकक मोनमे बसैत अछि आ तकर निवारण मोनेमे भए सकैत अछि । कतहु-ने-कतहु मनुक्खक अज्ञानता सेहो एकर कारण अछि । असलमे लोकक मोनमे अनेरे सक रहैत छेक किंवा भए जाइत छैक जे ई करब तँ ओ भए जाएत ,आदि,आदि । जीवनक प्रति वैज्ञानिक रुखि भेनहि एहि तरहक अंधविश्वाससँ मुक्ति दिआ सकैत अछि । अपसकुनक जड़ि अंधविश्वासमे होइत अछि । कै बेर पढ़ल-लिखल लोकसभ सेहो एकर चपेटमे आबि जाइत छथि। जखने हम ककरोपर आंखि मूनि कए विश्वास करए लागब तँ एहन समस्या उतपन्न भए जेबाक पूरा संभावना रहैत अछि । तेँ जरूरी अछि जे हम कोनो बात, चाहे ओ केहनो पैघ आदमी ने कहने होइ,तखने मानी जखन अपन मोन तकर स्वीकृति दिअए । कहक माने जे अपन आँखि-कान खोलि कए राखब जरूरी अछि नहि तँ कखनो खत्तामे खसि सकैत छी ।
सामान्यतः ई देखल जाइत अछि जे गाम-घरमे जँ ककरोसँ झगड़ा भेलेक किंवा दिआदी कुन्नह भेलेक तँ ओकरा घरक महिला केँ डाइन घोषित कए देत । तरह-तरहक खिस्सासभ गढ़ि देत । "हुनका तँ अष्टमीक रातिमे नङटे नचैत देखलिअनि ,ओ तँ सावर मंत्र सिद्द कए लेने छथि,जँ हुनका हाथे चाह पीब तँ गेले घर छी, हे आर जे करब से करब हुनकर नोत नहि मानब ,आदि,आदि ।” मुदा एहिसभक पाछा आओर किछु  नहि अपितु ओहि महिला किंवा ओकर परिवारसँ ओलि चुकाएब मूल लक्ष्य रहैत अछि । एकबेर जे किओ डाइन घोषित भए गेल तखन ओकरा सालक साल एहि अपमान आ अघोषित सामाजिक  बहिष्कारक सामना करए पड़ैत अछि । एहि तरहक अनेको घटना गाम-घरमे  घटित होइत रहैत अछि,निर्दोष लोक अकारण प्रताड़ित होइत रहैत छथि आ तकर कोनो निराकरण नहि भए पबैत अछि ,कारण लोकक मोनमे कतहु-ने-कतहु अपनो डर पैसल रहैत छैक-"की पता बात सहिए होइक?"
गाम-घरमे अखनो झाड़-फूकक  खूब चलन अछि । ककरो साँप कटलक आ लोक चटिबाहकेँ पकड़ि अनैत अछि । ओ चटिबाहो चाटी चलबए लगैत अछि । जकरा जीवाक भेलेक से जीवि गेल,मरकबाक भेलेक,मरि गेल । ई एकटा संयोगे होइत अछि । जँ ढोंढ़ कटलक तँ जीबि जाएत ,जँ गहुमन वा एहने कोनो विषधर साँप केठलक तँ गेल घर छी । आब ई सभ जनैत अछि जे साँपक डाक्टरी इलाज भए सकैत छैक,तरह-तरहक दबाइक निजात भेल अछि मुदा सभठाम,सदिखन ओ उपलव्धो नहि रहैत अछि,फेर अधिकांश लोक अखनो पुरने अंधविश्वासकेँ धेने अछि । पहिने गाममे जँ ककरो किछु चोरी भए गेलैक तखनो चटबाहकेँ बजाओल जाए,बट्टा चलैक आ ओ एमहर-ओमहर घुसकए लगैक ,किंवा घुसकाओल जाइक आ कहल जाइक जे चोर ओही बाटे भागल अछि । ततबे नहि,कै बेर निर्दोष लोकक नामो लगा देलि जाइक । यद्यपि समय बहुत बदलल अछि मुदा अखनो लोकक कै बेर गंभीर बिमारीक इलाजक हेतु एहन झाड़-फूक करबए पहुँच जाइत छथि । हमरा अधीनस्थ एकटा चतुर्थ श्रेणीक कर्मचारी कै माससँ कार्यालयसँ अनुपस्तित रहैत छलाह । एकदिन अचानक ओ हाजिर भेलाह । हम पुछलिऐक॒-"एतेक दिनसँ कतए छलह?"

"सर! ऊपरी हवा लागि गेल छल । बहुत प्रयास केलहुँ मुदा जाने नहि छोड़ैत छल।"

अहीं कहू एहन लोकक की कएल जा सकैत अछि? भए सकैत अछि जे ओ भगल केने होइक,वा सहिएमे अंधविश्वासक शिकार रहल हो। एहि तरहक घटना तँ होइते रहैत अछि । लोकक मोनमे गड़ल अंधविश्वासक कम हेबाक नामे नहि लैत अछि ।
अपसकुनसँ बचबाक हेतु लोक तरह-तरहक अंधविश्वाससँ ग्रसित भए तकर निवारणक तरह-तरहक प्रयास करैत छथि । कतेको गोटे तांत्रिकसभक ओहिठाम पहुँचि जाइत छथि आ कतेको तरहक दुर्गतिमे पड़ि जाइत छथि । अपनासभमे कोनो काज करबका हेतु दिन तकेबाक प्रथा अछि । कतहि कोन दिन जाइ ,कखन जाइ,अधपहरा देखि कए जाइ ,एहि तरहे तरह-तरहक विध-विधानक कारण लोकक समय ओ शक्तिक नष्ट तँ होइते अछि संगहि समाजमे एकटा गलत संदेश सेहो जाइत अछि । आब ई समस्या कम भेल अछि जरूर मुदा अखनो समाप्त नहि भेल अछि । एहि प्रसंगेमे एकटा सरदारजी सँ भेल बातक उल्लेख करैत छी । गप्प-सप्पक क्रममे एकदिन ओ कहलाह जे हुनकासभमे बिआह रविदिनक दूपहर बारह बजे गुरुद्वारामे होइत छेक । ताहि लेल फराकसँ कोनो शुभदिनक प्रतीक्षा नहि कएल जाइत छेक । जँ नीक दिने बिआह केलासँ जीवन सुखी रहैत तँ किओ सरदार जीबे नहि करैत। हुनकर ई बात बहुत वैज्ञानिक बुझना जाइत अछि । हम ई नहि कहैत छी जे अपन आस्थाक प्रश्नपर विवाद ठाढ़ करू, मुदा व्यर्थक बातसभ जेना अपसकुनक भय  किंवा किंवदंतीक आधारपर अंधविश्वाससँ अपना आ आस-पासक समाजकेँ मुक्त करू । एहिसँ निश्चय जीवन बेसी अर्थपूर्ण होएत ।