अयोध्या लखनउक यात्रा
हम
ओहि दिन ग्रेटर नोएडा स्थित घरे मे रही। चारूकात लगैक जेना कर्फ्यु लागल छैक।
पुलिसक जीप रहि-रहि कए आवासीय कालोनीसभमे घुमि रहल छल। बीच-बीचमे ओकर सायरन सेहो बाजि
रहल छलैक।किछु बुझेबे नहि करए जे बात की छैक? हमरा नहि रहल गेल। टीवी खोललहुँ तँ
देखैत छी जे उच्चतम न्यायालय अयोध्या राम मंदिर केसमे अपन निर्णय सुना रहल छल।
निर्णय की भेल छल से तँ आब सौंसे दुनिआ जनैत अछि। निर्णयक कारण देशक माहौल खराप
नहि होअए आ आपसी सद्भावना बनल रहि जाए,कोनो अप्रत्याशित घटना नहि घटए ताहि लेल
उचित ओरिआन सरकार केने छल।मुदा,किछु गड़बड़ नहि भेल। शांति व्यवस्था बनल
रहल।कालक्रममे अयोध्यामे भव्य राम मंदिर बनल आ तकर उद्घाटनो भेल।शुरूमे तँ ओहिठाम दर्शनक लेल भयाओन भीड़
रहैत छल। एतेक तीर्थयात्रीकेँ ओतए उचित व्यवस्था करब बहुत कठिन काज छल। कहिओ काल
गड़बड़ीक समाचारसभ सेहो अबैत रहल। हमरोसभकेँ ओहिठाम जएबाक इच्छा छल। मुदा,एतेक
भीड़मे से संभव नहि बुझाएल।तेँ सोचलहुँ जे जखन ओहिठाम भीड़ कम होएत तखने जाएब
जाहिसँ नीकसँ दर्शन भए सकत।हमसभ ओहि शुभ दिनक प्रतीक्षा करए लगलहुँ।एहि बीचमे बहुत
समय बीति गेल। अयोध्यामे राम मंदिरक काज पूरा भए गेल। ओकर ऊपरमे धाजा फहरा गेल। “आबो
तँ हमसभ ओतए जाइ”-ई बात हमर श्रीमतीजी कहलनि।
“कहि
तँ सही रहल छी?”
“तखन
तकैत की छी?टिकट कटाउ ।”
हमरासभ
आपसी विमर्शक बाद टिकटक ओरिआनमे लागि गेलहुँ। भेल जे जखन अयोध्या जएबे करब तखन
वापसीमे लखनउओ घुमि लेब।ओहिठाम केन्द्र सरकारक होलीडेहोम छैक। ओहिमे रहबाक जोगार
करए लगलहुँ।संयोगसँ बारह फरबरीसँ सोलह फरबरी धरि,पाँच राति ओहिठाम रहबाक आनलाइन आरक्षण
भए गेल। कहबाक काज नहि जे सरकारक होलीडे
होममे रहबाक बहुत नीक ओरिआन रहैत छैक,सेहो बहुत कम दामपर।एसी दू बेडक कोठरीक लेल मात्र
तीन सए रूपया देबाक होइत छैक।कतहु-कतहु तँ आर कम छैक।जेना कि पटनामे एहने कोठरीक
लेल मात्र १८० रूपया प्रतिदिन देबाक होइत छैक। भीआइपी कोठरीक लेल नओ सए रूपया
लगैत छैक। ओहिमे दूटा बड़ी-बड़ीटा कोठरी होइत छैक।तकर हमरासभकेँ काज नहि रहए।मात्र
दू गोटेक लेल तीन सए बला कोठरी एकदम पर्याप्त छल।हम सभसँ पहिने लखनउमे रहबाक
आरक्षण आनलाइन करबा लेलहुँ। तकर सूचना हुनका दए देलिअनि। आब प्रश्न छल जे पहिने
लखनउमे रहब कि सोझे अयोध्या चलि जाएब आ वापसीमे लखनउ घुमैत-फिरैत ग्रेटर नोएडा
वापिस भए जाएब?
“अयोध्या
राम मंदिरमे दर्शन करब हमरसभक मुख्य उद्येश्य अछि।तेँ पहिने सोझे ओतहि चलब। ओहिठाम
दर्शन आ भ्रमण केलाक बाद लखनउमे ठहरब आ वापिस ग्रेटर नोएडा चलि आएब।”-ओ कहलथि।
“ठीक
छैक।”
हम
ओही हिसाबसँ आनन्दविहारसँ अयोध्या जएबाक लेल वंदे भारत ट्रेनमे टिकट लए लेलहुँ।
ओना आनन्दविहारसँ ओ ट्रेन छओ बाजि कए दस मिनटपर खुजैत छैक। तकरा पकड़बाक लेल घरसँ पाँच
बजेक आसपास निकलब जरूरी छल। पाँच बजे
प्रस्थान करबाक माने भोरे चारि बजे उठबाक छल। जाड़क मासमे भोरे चारि बजे
उठि कए नित्यकर्म करब आ यात्राक लेल तैयार होएब मोसकिल बुझाइत छल। मुदा
हनुमानजीकेँ ऊपर सभकिछु छोड़ि निश्चिन्त भए गेलहुँ।
आब
अयोध्या जएबाक समय लगचिआ रहल छल। हमसभ अपन यात्राक लेल जरूरी सामानसभ सरिआ रहल
छलहुँ ।ओहीक्रममे किछु जरूरी काजसँ एडब्लुएचओ सोसाइटी स्थित दोकानसँ काज कए लौटति
रही कि ओहिठामक मंदिर समितिक अध्यक्ष भेटि गेलाह। ओ हमरा जनैत छथि। ओ कहलनि –
“हमर
सोसाइटीमे मंदिरमे भगवानसभक प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम आठ फरबरीसँ सोलह फरबरी २०२६क
बीचमे आयोजित अछि। अपने ओहिमे एकदिन यजमान बनबाक लेल अपन सहमति दिअ। ”
“मुदा,हमरा
तँ अयोध्याजी जएबाक कार्यक्रम अछि।”
“कहिआ?”
“दस
तारीखक भोरे।”
“कोनो
बात नहि। अहाँ नओ तारीखक लेल यजमान बनि जाउ।खंडुरीजीकेँ अपन नाम लिखा दिअनु।”
हम
श्रीमतीजीकेँ एकर सूचना देलिअनि। ओ सहर्ष एहि लेल अपन सहमति देलनि आ कहलथि-
“लगैत
अछि भगवानक अपना सभपर विशेष कृपा छनि। ओ चाहैत छथि जे अयोध्याजी जएबासँ पहिने हमसभ पूर्णतः सात्विक भए जाइ।”
“बातो
सही। कारण हमरा दुनू बेकतीकेँ एक दिन पहिने व्रत,फलहार कए प्रायश्चित समारोहमे
सामिल होमए पड़ल।दोसरो दिन फलाहरेपर दिनभरि रहए पड़ल।साँझमे सिद्ध अन्न,मुदा
पूर्णतः सात्विक,बिना प्याजु,लहसुनकेँ भोजन करबाक छल।”
हमसभ
यथासाध्य एहि नियमसभक पालन करैत आठ आ नओ
फरबरीक आयोजित प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रममे सामिल भेलहुँ।ओहिठाम तीनटा मूल्यवान
किताबसभ सेहो मोफतमे भेटल।किताबसभ स्थानीय लोकसभ द्वारा निःशुल्क वितरण करबाक लेल
देल गेल छल। मुदा,बादमे व्यवस्थामे किछु परिवर्तन भेल आ मोट-मोट किताबसभ ओहिठामसँ
हटा देल गेल।हमसभ तँ अपन पसिंदक किताबसभ लए ओकरा अपन झोरामे राखि लेने रही।
प्रायश्चित
प्राणप्रतिष्ठासँ
पूर्व एक दिन पहिने प्रायश्चित कार्यक्रमक उद्येश्य यज्ञमे सामिल भए रहल जजमानलोकनिकेँ
सभ तरहेँ शुद्ध करब छल।एहि कार्यक्रममे सामिल होएबाक लेल हमसभ भोरे नओ बजे
कार्यक्रमस्थलपर पहुँचि गेल रही। मुदा,ताबे बहुत कम लोक आयल रहथि। अस्तु,किछु
विलंबसँ ई कार्यक्रम प्रारंभ भेल। लगभग साढ़ै बारह बजे ई कार्यक्रम समाप्त भेल।तकर
बाद हमसभ वापसि अपन घर आबि गेलहुँ।आइ आब किछु नहि करबाक छल। दोसर दिन फेर नओ बजे
हमसभ ओहिठाम पहुँचलहुँ।आइ पाँचटा परिवार
जजमान लेल नामित रहथि।मुदा,कार्यक्रम शुरू होएबा धरि मात्र तीनटा परिवार
आबि सकल रहथि।हमरा बगलमे एकटा ओकील साहेब सपरिवार जजमान रहथि। पंडितजी हमरा सामने
रहथि आ हमरा पूजाक विधि-विधान बुझबथि आ हम तदनुकूल काज करी। मुदा ओ ओकील साहेबपर
उचित ध्यान नहि दए पाबथि।तकर मूल कारण रहैक जे ओ कनी फटकी बैसल रहथि।ओ अपन
उपेक्षासँ बहुत परेसान भए गेलथि आ चिकरि उठलथि-
“ई
की भए रहल अछि?हमसभ एहिठाम व्यर्थ बैसल छी। हमरा नीकसँ पूजा नहि कराओल जा रहल
अछि।ई तँ अन्याय अछि।”
“अहाँकेँ
सेहो ललका डोरीसँ बान्हि देल गेल अछि। अहाँकेँ पूजाक बरोबरि फल भेटबे करत।”
“यदि
से बात छैक तखन सभगोटेकेँ एहिना ललका डोरीसँ बान्हि दिअनु आ पंडितजी आगूसँ अपने
सभक लेल पूजा करथु।मुदा,से तँ ओ करैत नहि छथि। एहि स्पष्ट भेदभावक लेल हुनका
प्रायश्चित करबाक चाहिअनि।”
“हमरासभसँ
गलती भेल।”-मुख्यपंडितजी स्थितिक गंभीरता बूजि तुरंत एकटा पंडितजीकेँ हुनको सामने
बैसा देलनि। तकर बाद हुनको कोनो सिकाइति नहि रहलनि।पूजाक कार्यक्रम लगभग तीन घंटा
चलल।तकर बाद हमसभ अपन घर वापस आबि फलाहार केलहुँ।रातिमे सात्विक भोजन केलहुँ आ
भोरे अयोध्या जएबाक लेल झोरासभकेँ ठीक करबामे लागि गेलहुँ।
यद्यपि
वंदे भारत ट्रेन दिल्लीसँ अयोध्या जएबाक लेल बहुत सुगम आ बढ़िआँ ट्रेन अछि,मुदा
एकर आनन्दविहार टीसनसँ खुजबाक समय(भोरे छओ बाजि कए दस मिनट) सही नहि अछि।जाड़क मासमे ओहि ट्रेनकेँ हमर घरसँ
पकड़बाक लेल भोरे पाँच बजे प्रस्थान करब जरू अछि। मुदा हमसभ एहि लेल अवधारि लेने
रही। भेल जे शुरूएमे कनी दिक्कति होएत बादमे फएदे फएदा रहत।कारण हमसभ दूपहर अढ़ाइ
बजे अयोध्याजी पहुँचल रहब।तकर बाद मंगले दिन कए हनुमानगढ़ीमे दर्शन करब।यदि बहुत
थाकि गेल रहब तँ आओर स्थानसभ जाएब।भगवान रामक जन्मस्थानपर नवनिर्मित मंदिरपर दोसरे
दिन जाएब,से तँ पहिनेसँ निर्धारित छल।तकर बादे कोनो आनठाम जाएब।
ओहि
दिन भोरे हम साढ़तीन बजे उठि गेलहुँ। हमर श्रीमतीजी तँ पहिने उठि कए बैसल रहथि। हम
पुछलिअनि तँ ओ कहलथि—
“हम
तँ राति भरि बैसले रहि गेलहुँ। निठ्ठाहे निन्न नहि भेल।”
हमसभ
जल्दी-जल्दी तैयार भए गेलहुँ।चारि बजे भोरे तँ चाह पीबि रहल छलहुँ।स्नान,ध्यान तँ
भइए गेल रहए।तकर बाद हमसभ कनी काल हीटरपर हाथ सेकलहुँ कि घंटी बाजल-टन-टन-टन।माने
वाहनचालक आबि गेल। आब कोन चिंता? ठीक साढ़ेचारि बजे भोरे हमसभ आनन्दविहार टीसनक
लेल अपन कारसँ प्रस्थान केलहुँ।
रस्ता
एकदम खाली छल। रातुक वातावरण अकनो छलहे। कतहु-कतहु कार,टैक्सी,मोटर साइकिलसँ अबैत
-जाइत यात्रीलोकनि देखा जाथि।कतहु कोनो अवरोध नहि रहबाक कारण हमसभ पैंतालिसे
मिनटमे नन्दविहारटीसनक मुख्यद्वारिपर पहुँचि गेलहुँ।हमसभ बहुत आसानीसँ सामानसभ
सहित अपन ट्रेन पकड़बाक लेल चिन्हित प्लेटफार्मपर पहुँचि गेलहुँ।तकर बीस मिनटक बाद
वंदे भारत ट्रेन हुंकार भरैत टीसनपर लागि गेल।हमरसभक डिब्बा नंबर बीस सभसँ अंतमे
छल। ओही हिसाबसँ हमसभ प्लेटफार्मपर बैसले रही।तेँ बिना कोनो असुविधाकेँ हमसभ
ट्रेनमे अपन सीटपर पहुँचि गेलहुँ।
वंदे भारत ट्रेन
ओना
अयोध्या जाए बला वंदे भारत ट्रेनमे चढ़बाक लेल हबाइ यात्रासँ बेसीए तत्परताक
प्रयोजन भेल छल। कारण ट्रेन भोरे छओ बाजि कए दस मिनटपर आनन्दविहारसँ खुजबाक रहैक।
ताहि लेल हमसभ पहिनेसँ बहुत तैयारी केने रही।तेँ समयसँ पहिने करीब सबा पाँच बजे
हमसभ टीसन पहुँचि गेलहुँ। ट्रेनकेँ छओ नंबर प्लेटफार्मपर लगबाक रहैक। पहिने तँ
चिंता होअए जे ओहिठाम कोना पहुँचब।संगमे बहुत भारी बैग छल।छोट-छोट कैकटा सामान से
छल। ऊपरसँ श्रीमतीजीकेँ घुटनामे समस्या से रहैत छनि। आइ-काल्हि कनीक अनुकूल भेल
छनि।विदति केलासँ कहीं बढ़ि ने जानि। मुदा हमसभ सुरक्षित आ बहुत आरामसँ जल्दीए
प्लेटफार्म नंबर छओपर एस्कलेटरक सहायतासँ पहुँचि गेलहुँ।एकटा कूली कइए लेने रही। ओ
हमरासभकेँ लेने देने सही जगहपर ठाढ़ कए देलक।कनीके कालमे अत्यंत नूतन सजल-धजल
डिब्बाबला ट्रेन आबि कए प्लेटफार्मपर लागि गेल। हमरासभक डिब्बा नंबर बीस सभसँ पाछू
रहए।हमसभ जल्दीए अपन-अपन सीटपर जा कए बैसि गेलहुँ। सामान नीचाँ राखि देल गेलैक। आब
की? लागि रहल छल जेना एकटा महत्वपूर्ण किला फतह भए गेल अछि।
वंदे
भारत ट्रेनक डिब्बा नंबर बीसक सीट सख्या ३८,३९पर हमसभ बैसि गेल रही। ऊपरमे बैग
राखि देल गेलैक। यात्रीसभ अपन-अपन सीटपर बैसि गेलथि। ठीक छओ बाजि कए दस मिनटपर ट्रेन
खुजि गेल। हमसभ भोरुका चाह नहि पीने रही। जलखै तँ करबाक नहि छल,कारण आइ
हमरालोकनिकेँ मंगलक उपास छल। थोड़बे कालक बाद जखन आर यात्री लोकनिक लेल जलखै परसा
रहल छलहुँ,हमहूँ चाहक आग्रह केलिऐक।से ओ सहर्ष पूरा केलक।हमसभ यथेष्ट मात्रामे चाह
पीबि संतुष्ट भेलहुँ। डिब्बा नंबर बीस अंतिम डिब्बा छल आ ओहिमे मात्र एक्केटा
अंग्रेजी स्टाइलक पैकाना रहैक। पैखानाक बाहर सभ कोठरीमे एकटा सफाइकर्मी तैनात कएल
गेल छल।करीब सएटा यात्रीक बीचमे एक्केटा पैखाना रहैक। आन डिब्बासभमे दूटाक पैखाना रहैक।
मुदा प्रायः ट्रेनक अंतिम डिब्बा होएबाक कारण एहि डिब्बामे एक्केटा अंग्रेजी पैखाना रहैक। हम कैक बेर ओहिठाम धरि
जाइ आ वापस भए जाइ।कारण सदिखन केओ ने केओ ओहिमे बैसले रहैत छलाह। पैखानाक बाहर
सदिखन किछुगोटे पाँतिमे ठाढ़ रहैत छलाह। तेहन हालतिमे की करितहुँ?वापिस अपन सीटपर
चलि आबी।आखिर साढ़ि एगारह बजे बरदाससँ बाहर बुझाएल। भोरे साढ़े चारि बजे डेरा
छोड़ने रही।तखनसँ पाँच घंटा समय बीति गेल छल। तेँ आब अनिवार्य भए गेल छल। संयोगसँ एहि
बेर पैखाना खाली छल।हम तुरंत भीतर चलि
गेलहुँ। अंग्रेजी स्टाइलक पैखाना ततनीटा छल जे ओहिमे बैसएमे बहुत असौकर्य भए रहल
छल। संक्रमणक डर सेहो भए रहल छल। मुदा कएल की जा सकैत छल?वापिस सीटपर आबि बहुत
आश्वस्त लागि रहल छल।ट्रेन सरपट भागि रहल छल। दुनू दिसक प्राकृतिक दृश्य देखैत
जाउ,आगू बढ़ैत जाउ।शुरूमे तँ यात्रा बहुत नीक लागि रहल छल।मुदा,जेना-जेना समय
बीतल,आब बैसनाइ मोसकिल लागि रहल छल।हमर श्रीमतीजी तँ बहुत परेसान बुझेलीह। ओ
कहलीह-
“आब
दोबारा एहि ट्रेनसँ यात्रा नहि करब।आठ घंटा लगातार बैसल रहि यात्रा करब सुखद अनुभव
नहि अछि।”
ठीक
दू बाजि कए पचीस मिनटपर ट्रेन अयोध्या कैंट टीसनपर पहुँचि गेल।हमसभ सामान सहित
बाहर निकललहुँ। बड़ी काल चललाक बाद हमसभ प्लेटफार्मसँ बाहर भेलहुँ। ओहिठाम कैकटा
टैक्सी,आटो बलासभ घेरि लेलक।हम सभसँ पहिने होटल श्रीरामइनक व्यवस्थापकसँ संपर्क
केलहुँ,ओहि स्थानक सही जनतब प्राप्त केलहुँ ।तकर बाद एकटा आटोसँ होटलक लेल
प्रस्थान केलहुँ। अफसोचक बात जे स्थानीय होइतहुँ आटो बलाकेँ होटलक जनतब नहि रहैक।
ओकरा कैक बेर व्यबस्थापकसँ गप्प करओलिऐक। तइओ ओ भुतलाइते रहल।आखिर हमसभ किछु
विलंबसँ होटल पहुँचि सकलहुँ।
होटल
श्रीरामइनक जानकारी हमरा श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्टक वेबसाइटसँ भेटल छल।ओतए उपलब्ध फोन
नंबरपर हम फोन केने रहिऐक।फोनपर होटलक संचालक दूबेजी गप्प केने रहथि।ओ सुपरडीलक्स
कोठरीक दू हजार प्रतिदिन किराया कहने रहथि,जखन कि आनलाइन बुकिंग लेल बहुत अधिक
किरायासभ देखबामे आएल छल। हम तुरंत अपन कार्यक्रमक अनुसार एकटा कोठरी आरक्षित
करबाक आग्रह केलिअनि जे ओ मानि गेलथि।जखन अयोध्या जएबाक समय लगचिआ रहल छल तखन हम
फेर हुनकासँ एहि बातक पुष्टि केलहुँ। तकर बादे हमसभ अयोध्याक लेल प्रस्थान केने
रही। अयोध्या कैंट ट्रेनसँ उतरबाक बाद टेम्पुसँ भूतलाइत-तुतलाइत हमसभ आखिर होटल पहुँचिए गेलहुँ। मुख्य सड़कसँ
कनी हटि कए ओ होटल छल।दुबेजीक स्थानपर एकटा दोसर सज्जन हमरासभकेँ भेटलाह।दूबेजी
कोनो बिआह कार्यक्रममे सामिल होएबाक लेल गेल रहथि।हुनका एबजमे एकटा दोसर व्यक्त हमरा लोकनिक स्वागत केलनि आ कोठरीक
कुंजी देलनि।बादमे ओएह अयोध्या यात्रामे हमर मार्गदर्शकक काज केलनि।हम एहि बातसँ
चकित रही जे होटलमे कोठरीक कुंजी देबासँ पहिने ओकर खातामे हमर पता आदि किछु नहि
लिखल गेल,ने हमरासँ कोनो परिचय पत्र मांगल गेल।हम एहि विषयमे पुछबो केलिऐक तँ ओ कहलनि
–“कोनो बात नहि।अहाँ अपन पता आदि विवरण ह्वाट्सअपसँ पठा देब। ”एहि बातपर बेसी
माथापच्ची करब ठीक नहि बुझाएल।भेल जे भए सकैत अछि जे बादेमे ओ कएल जाइत होइक।मुदा
जएबा काल धरि से सभ किछु नहि देखाएल।जाइत काल हम उचित भुगतान केलहुँ आ अपन सामान
लए कए होटलसँ बिदा भए गेलहुँ।
हमसभ
जल्दीए अपन आवंटित कोठरी संख्या ११२मे पहुँचि गेल रही।ओहि कोठरीमे हमरसभक सामानसभ
पहुँचा देल गेल।ओ कोठरी बेस अइल-फइल छल। कोठरीसँ संबद्ध शौचालयमे सभ सुविधा छल। पलंग,गद्दा
सभ एक नंबर। मुदा,फ्रीज,एसी,टीवी नदारद छल। “इएह छी सुपरडिलक्स कोठरी?”हम मोने-मोन
सोचलहुँ। फेर भेल जे हमरासभकेँ दुइए दिन तँ रहबाक अछि।भगवान रामक दर्शन भए
जाए।हनुमानगढ़ी सहित आर-आर प्रसिद्ध स्थानसभ देखि ली।हमरसभक उद्येश्य पूर्ण भए
जाएत।तेँ हमसभ कोठरीसँ बेसी मार्गदर्शकक जोगारमे लागि गेलहुँ।
हमसभ
ओतए किछु काल विश्राम केलहुँ ।तकर बाद हनुमानगढ़ी जएबाक व्योंतमे लागि गेलहुँ।
मार्गदर्शकजीसँ पहिने गप्प भइए गेल छल। ओ कहलनि जे मंगल होएबाक कारण आइ हनुमान
गढ़ीमे बहुत भीड़ होएतैक,मुदा दू सए टाका खर्च केलापर हम अहाँकेँ आसानीसँ दर्शन
करा देब।दू सए टाका आटोबलाकेँ सेहो देबाक होएत। हमसभ तुरंत तैयार भए गेलहुँ।कारण
ओहिठामक भीड़क बारेमे पहिनेसँ बूझल छल। हमरासभ मंगलक उपास से केने रही।समयसँ दर्शन
भए जाएत तँ आगू परना करबामे सेहो नीक रहत।
हमसभ
साढ़े चारि बजे होटलसँ मार्गदर्शकजीक संगे हनुमानगढ़ी दर्शन लेल आटोसँ बिदा
भेलहुँ आ घंटा भरिसँ पहिने मानस भवनमे भोजन लेल पहुँचि गेलहुँ।कहब जे एतेक जल्दी
से सभ भेल केना? तँ सुनि लिअ। हमरासभकेँ मार्गदर्शकजी हनुमानगढ़ी मंदिरक पाछू बाटे
अनलनि आ इसारासँ आगी बढ़ि जएबाक लेल
कहलनि। किछुए सीढ़ी चढलाक बाद हमसभ हनुमानजीक सामने पहुँचि गेलहुँ। मुदा हमसभ
भीड़क उल्टा दिससँ आएल रही।एकाध गोटे टोकबो केलनि। मुदा जेना-तेना आगू बढ़ि
गेलहुँ।कनीके चललाक बाद हमसभ मुख्य भीड़मे सामिल छलहुँ।सभ हनुमानजीक जयकारा लगा
रहल छलाह।हमहूँ हनुमानजीक ठीक सामने पहुँचि श्रद्धापूर्वक हुनकर प्रार्थना
केलहुँ।हमर श्रीमतीजी तँ संगे रहबे करथि। दस मिनटक भीतरे हमरसभक काज भए गेल छल।
हमसभ आब थाकिओ गेल रही।तेँ आर ठाम नहि जाए,सोझे अपन होटल वापस पहुँचि गेलहुँ।एहि
तरहेँ हनुमान गढ़ीमे मंगल दिन कए हनुमानजीक दर्शन करबाक स्वप्न साकार हुनके कृपासँ
संपन्न भेलासँ हमसभ अतिशय प्रसन्न संतुष्ट
रही।
प्रात
भेने हमसभ सात बजे श्रीराम जन्मभूमि मंदिरपर जएबाक कार्यक्रम बनओने रही।मुदा,भोरे
उठलाक बाद होटलमे पानिक आपूर्ति वाधित बुझाएल। होटलक व्यवस्थापककेँ फोन केलिअनि ।
ओ प्रयासो केलनि।मुदा,पानिक आपूर्ति शुरू होएबामे
एकघंटा समय लागि गेल। हमसभ सात बजेक बाद आठ बजे धरि राममंदिर लेल बिदा भए
सकलहुँ। कोठरीसँ होटल परिसरमे बाहर गेलाक बाद एकटा आटो लागल देखाएल।
“हमसभ
तँ टैक्सीक बात केने रही।”
“टेक्सीसँ
बढ़िआँ इएह रहत।कारण बहुत ठाम गली बाटे जएबाक होइत छैक। ताहि लेल आटो बेसी उपयुक्त सबारी होइत अछि।”
“मुदा
एहि लेल दू हजार रूपया भरि दिनक तँ बेसी होएत।हमरा दुपहरिए धरि घुमा देथि , हम
ताहि लेल आठ सए देबनि।बादमे देखल जेतैक।”
“जे
अहाँक विचार।”
हमसभ
मार्गदर्शकजीक संगे आटोसँ बिदा भए गेलहुँ। मुदा,बादमे ओहि आटो बला आ मार्गदर्शक,दुनूक
व्यवहार बहुत नीक बुझाएल।संगे ओसभ हमरालोकनिकेँ मंदिरे-मंदिरे बहुत नीकसँ दर्शन
करबैत रहल। तेँ श्रीमतीजीक परामर्शपर ओही आटोकेँ दिनभरि लेल राखि लेलहुँ।संगमे
मार्गदर्शकजी तँ रहबे करथि।एहिमे किछु पैसा जरूर खर्च भेल,मुदा ओ सभ बहुत नीकसँ
हमरासभकेँ अयोध्या आ लगपासक प्रमुख स्थानसभक दर्शन करा देलक,जे अन्यथा संभवतः संभव
नहि होइत।
रामजन्मभूमि मंदिर
एहनो
दिन हेतैक जे हमसभ सद्यः रामजन्मभूमिपर बनल श्रीरामक मंदिरमे स्थापित हुनकर दर्शन
करब,से के सोचि सकैत छल? जुग-जुगसँ एहि मंदिरक लेल अनेक प्रयास कएल गेल।कतेको बेर
युद्ध लड़ल गेल। कतेको लोक अपन प्राण गमा देलनि। सालक-साल देशक विभिन्न न्यायालयमे
एहि विषयक मोकदमा चलैत रहल। ततबे नहि,सालक-साल सौंसे देशमे एहि मंदिरक निर्णक लेल
आंदोलन कएल गेल।मुदा,समाधान उच्चतम न्यायालयक निर्णयक बादे संभव भेल।तकर बाद तँ
ओहिठाम मंदिर निर्माणक प्रक्रिया जे शुरू भेल से सालों चलैत रहल। जनबरी २०२४मे एहि
मंदिरक भूतलमे भगवान रामक वालरूपकेँ समारोहपूर्वक स्थापित कएल गेलनि। तकर बाद तँ
ओहिठाम दर्शन करबाक लेल लोक जे हुजुम लागल से वर्णन करब मोसकिल थिक। हमसभ एहन भीड़मे
दर्शन नहि करबाक निर्णय केलहुँ। जखन भीड़ कम भए गेल आ ऊपरो तलसभमे मंदिर बनि गेल,मंदिरक
मंडपपर ध्वज विधिवत फहरा गेल,तखन हमसभ ओहिठाम जएबाक लेल कार्यक्रम बनाबए लगलहुँ। ताही सोचक परिणाम छल जे आइ हमसभ अयोध्यामे
रामजन्मभूमिपर बनल श्री राम मंदिर परिसरमे पहुँचि गेल छी। मार्गदर्शकक इच्छानुसार
हम श्रीमतीजीक लेल एकटा ह्वील चेयर बुक करओलहुँ। नियमानुसर हम हुनका संगे जा सकैत
छलहुँ। ओना हमरा बुझल छल जे सत्तरि सालसँ बेसीक लोककेँ एकटा सहायकक संगे त्वरित
दर्शनक व्यवस्था छैक। हम ई बात मार्गदर्शकजीकेँ कहलिअनि तँ बजलाह-
“जखन
अहाँकेँ त्वरित दर्शन भइए रहल अछि तखन चिंताक कोन बात छै?”
हम
निश्चिंत भए ह्वीलचेयरक संगे-संगे बिदा
भेलहुँ। सचमुचकेँ कतहु कोनो भीड़ नहि छल। ओहुना ओहि दिन सामान्यो पाँतिमे बहुत कम
लोक देखेलथि। भूतलमे बनल श्री रामक ममूर्तिक दर्शनतँ बहुत नीक जकाँ भए गेल।
तकर
बाद हमसभ मंदिरक प्रथम तलपर पहुँचलहुँ। सामनेमे रामपरिवारक अद्भुत दृश्य देखि
अचंभित रही। लागि रहल छल जेना भगवान श्रीराम सपरिवार सामनेमे सिंहासनपर विराजमान
छथि, हमरालोनिकेँ आशीर्वाद दए रहल छथि। हमसभ बहुत मोनसँ प्रार्थना केलहुँ अत्यंत संतुष्टिक संग ओहिठामसँ वापसि भेलहुँ।वापसी
काल ओहि पुलिसकेँ बेर-बेर धन्यवाद देलिऐक।
ओहिठामसँ
नीचाँ उतरलाक बाद देबालपर रामराज्याभिषेकक भव्य
जीवंत चित्र उकेरल गेल छल।ई दृश्य देखि हमरा अश्रुपात होमए लागल।मोनमे भेल
जे भगवान रामक संगे कतेक अन्याय भेलनि,कतेक कष्ट ओ सहलनि?केहन अनुपम ओ क्षण रहल
होएत जखन की ओ लंका विजयक बाद जानकीजीक संग अयोध्यामे राजा बनि रहल छलाह।असलमे
संपूर्ण राम मंदिर परिसर,ओहिठाम बनल मंदिरसभ आ तकर भीतरमे स्थापित मूर्तिसभ
अवर्णनीय अछि,अद्भुत अछि ।फटकीएसँ ऐहि मंदिरक गगनचुंबी धाजा देखाइत अछि। ओकरा
देखिते मोन गर्वसँ भरि जाइत अछि।लगैत अछि जे अयोध्या आबि हमरालोकनिक जीवन सफल भए
गेल।एकटा चीर अभिलाषा बहुत नीकसँ आइ पूर्ण भए
गेल।
सरयू नदीमे नौकायान
रामजन्मभूमि
मंदिरमे दर्शनक बाद हमसभ सोझे सरयू नदीक घाटपर पहुँचलहुँ।सरयू नदीक साफ,स्वच्छ जल
देखि मोन प्रसन्न भए गेल। ओहिठाम पर्यटन विभागक जहाज लागल छलैक।किछु मोटर नाओसभ
सेहो लागल रहैक। पर्यटन विभागक जहाजक किरया साढ़े तीनसए रहैक,फेर ओ देरीसँ खुजितैक।मोटर
नाओ सएटाकामे घुमा दैत आ तुरंते खुजबो करितैक।तेँ हमसभ मोटरनाओपर बैसि
गेलहुँ।ओहिमे किछु यात्री पहिनेसँ बैसल रहथि।हमसभ बैसलहुँ आ नाओ खुजि गेल। तकर बाद
तँ आनन्दे-आनन्द छल। चारू दिस अद्भुत दृश्य छल।सरयू नदीक दोसर दिसक दृश्यसभ देखा
रहल छल।आगू-पाछु चलैत नाओ सभ ।हमसभ बहुत फटकी धरि ओहि नाओमे घुमैत रहलहुँ ।लगभग
आधाघंटाक बाद वापस ओतहि आबि गेलहुँ जाहिठामसँ बिदा भेल रही। तकर बाद आटोबला आ
मार्गदर्शकजीक संगे आगूक भ्रमणपर बिदा भेलहुँ।एगारह बाजि रहल छल। भेल यदि जलखै करए
लागब तखन मंदिरसभ बंद भए जाएत।तेँ पहिने से काज कए ली तकर बाद एक्के बेर भोजने कए
लेब। सरयओनदी घाटसँ बाहर होइते हमसभ सीताक रसोइ गेलहुँ। ओहिठाम निरंतर भंडारा चलैत रहैत अछि। एकटा बाबाजी हमरासभसँ सटि
गेलाह। पहिने तँ भंडाराक बारेमे बतबैत रहलाह ।तकर बाद ओहिमे किछु योगदान करबाक लेल
प्रेरित करैत रहलाह। सामनेमे एकटा बृद्ध बाबा जप करैत बैसल रहथि। ओ हमरासभकेँ ओहि
बाबा लग बैसा देलाह,फेर अपन खाता खोलि कए कहए लगलाह-
“एहिमे
भंडाराक लेल योगदान केनिहारसभक विवरण लिखल जाइत अछि। अपने जे इच्छा होअए से कए कए
सकैत छी।कोनो बन्हौट नहि अछि।”
आब
कहू।सामने बृद्ध बाबाजी जप कए रहल छथि।हमसभ मंदिरमे बैसल छी। ओ खाता खोलने तैयार
छथि। माने स्पष्ट छल।मुदा,हमरासभकेँ से सभ किछु करबाक तँ नहि छल।तेँ चुचाप उठि
गेलहुँ।हुनकर मोन कोनादनि भए गेलनि।माहौल देखि श्रीमतीजी कहलनि-
“किछुओ
दए दिऔक।”
हम
अपन जेबीसँ सएटाका निकालि ओहिठाम राखि देलिऐक आ बिदा भए गेलहुँ। ओहिसँ पूर्व
सीताकुंड देखलहुँ।कहल जाइत छैक जे सीताजी एहीमेसँ जल निकालि भानस करैत छलीह। हुनकर
रसोइक सामानसभ सेहो किछु राखल देखाएल।सामने एकटा भवनक निर्माण भए रहल छल। पता लागल
जे राम मंदिर आंदोलनमे मारल गेल कारसेवक लोकनिक स्मारक ओहिमे बनाओल जा रहल
अछि।ओहिठामसँ बाहर निकलि हमरा लोकनि कनक भवन,वाल्मीकि रामायण भवन,दसरथ भवन गेलहुँ।
वाल्मीकि रामायण भवनक विशेषता ई अछि जे ओकर देबालसभपर संपूर्ण वाल्मीकि रामायण
लिखल अछि। आगू दिस कोनमे मोटाक-मोटा रामनाम लिखल रजिष्टरसभ राखल छल। असलमे ओ
रामनाम बैंकक नामसँ जानल जाइत अछि।देश भरिसँ रामनाम लिखि-लिखि भक्तलोकनि स्थानीय
संपर्कक माध्यमसँ रामनाम बही ओहिठाम पठबैत छथि।ई अपना-आपमे अद्भुत बुझा रहल छल।
लोकक श्रद्धा आ भक्तिक अनुपम दृष्टान्त ओतए हमरालोकनिक सामनेमे उपस्थित छल।
आटो
बला आ मार्गदर्शकजी बीच-बीचमे देखाइत मंदिरसभक बारेमे बतबैत रहैत छलाह।बारह बजै
बला छलैक।सभठाम जल्दी-जल्दी जाइ,कारण थोड़बे कालमे मंदिरसभक कपाट बंद भए जाएत।बीच-बीचमे एकाधटा आर
महत्वपूर्ण मंदिरसभ देखैत-सुनैत हमसभ वापसीमे मानस भवन पहुँचलहुँ। मानस भवन बेस
विस्तृत अछि। ओहिमे रहबाक सुविधा सेहो छैक। एसी डबल बेड कोठरीक एक दिनक किराया
२१०० छैक। मुदा,हमसभ तँ पहिनेसँ दोसर ठाम
रहि रहल छलहुँ। ओहिठाम सात्विक भोजनक उत्तम प्रबंध रहैत अछि। तेँ हमसभ अयोध्यामे
बेसी काल ओतहि भोजन करी।ओतए जनकपुरसँ आएल एकटा मैथिल परिवार सेहो भोजन करैत छलाह।
ओ सभ ओहीठाम ठहरल रहथि।अयोध्याजीमे जनकपुरसँ आएल मैथिल परिवारकेँ देखि बहुत नीक
लागल।हुनकासभसँ कनीकाल बतिएबो केलहुँ।भोजनोपरांत अपनसभ अपन डेरापर पहुँचि
गेलहुँ।आटोबलाकेँ तीन बजे आबए कहि देलिऐक जाहिसँ आर-आर स्थानसभ देखि सकब।
हमसब
तीन बजे आटोसँ अयोध्या भ्रमणक दोसर खेपपर निकलबाक योजना बनओने रही। ताही हिसाबसँ
हमसभ तैयार भए कोठरीसँ बाहरो भेलहुँ।मुदा आटोबला अखन रस्तेमे छल। ओ बीस मिनट
देरीसँ पहुँचल।अबिते कहलक-
“ततेक
थाकि गेल रही जे भोजन करिते सुता गेल।”
“कोनो
बात नहि।कनी-मनी आगू-पाछू होइते रहैत छेक।”
तकर
बाद हमसभ मार्गदर्शकजीक संगे सभसँ पहिने गुप्तार घाट पहुँचलहुँ। ओहिठामक परिचय
देबाक काज नहि अछि। तथापि,एतबा कहि दैत छी जे राम भरत,शत्रुघ्न आ समस्त
अयोध्यावासीलोकनिक संगे एतहि जलसमाधि लेने रहथि।एहिसँ पूर्व लक्ष्मण प्राणायाम कए
अपन प्राण परित्याग कए देने रहथि।कतेक दुखद रहल होएत ओ दिन।मुदा जे भावी छल से
भेल। किछु साल पूर्व धरि ओ स्थान बहुत सुनसान रहैत छल। मुदा,आब से बात नहि बुझाएल।
ओहिठाम बहुत रास नाओसभ लागल छल।ऊपर बहुत रास छोट-मोट दोकानसभ देखाएल। यात्रीसभसँ
स्थान भरल छल। सामने ऊपरमे एकटा प्राचीन मंदिर अछि। हमसभ ओहिठाम थोड़े काल रहलहुँ,फोटो
घिचओलहुँ आ वापसि बिदा भए गेलहुँ। कनीके आगू गेलाक बाद एकटा छोटसन मंदिर देखाएल। स्थानीय
लोकसभ कहलनि जे ओतए भगवान रामक खराम राखल छल।तकर बादे ओ सरयूमे जलसमाधि लेल
प्रस्थान केलथि।हमसभ ओहिठाम गेलहुँ। भीतरमे एकटा पादुकाक निसान जरूर देखाएल।
ओहिठाम बहुत कम लोक भेटलथि।हमसभ थोड़े कालक बाद अत्यंत उदास मोनसँ ओहिठामसँ बिदा
भए गेलहुँ।
आब
हमसभ नन्दीग्राम बिदा भेलहुँ। सूर्यास्त लगीच छल। जाड़ बढ़ि रहल छल।हम टोपी
नहि अनने रही। तेँ आटोपर चलबामे कनी बेसी परेसानी लागि रहल छल। मुदा,कएल की जाइत? जेना-तेना
बरदास करैत आगू बढ़ैत गेलहुँ। नन्दीग्रामेमे लंका विजयक बाद अयोध्या लौटलापर भरतसँ
रामक पहिल बेर भेंट भेल रहनि।ओहिठाम भरत मंदिर अछि। ओहिमे हमसभ दर्शन केलहुँ।
कनीके फटकी एकटा छोटसन मंदिर अछि।कहल जाइत अछि जे ओहीठाम बनल सुरंगसँ भरत अयोध्या
जाइत छलाह। एतेक ऐतिहासिक स्थानपर कोनो बेसी आकर्षक किछु नहि देखाएल।आब राति शुरू
भए गेल छल।होइत छल जे जल्दी डेरा वापिस भए जाइ। मुदा रस्ता तँ कम होइत नहि। सूर्यघाटपर
साढ़े छओ बजेसँ लेजर शो होइतए। ठीक ओही समय हमसभ तए पहुँचिओ गेल रही। आखिर टिकट
लेलहुँ आ दुनूगोटे उचित स्थानपर जा कए
बैसि गेलहुँ।हमसभ ततेक थाकि गेल रही जे ओहिठाम बनल सूर्यमंदिरमे भीतर नहि जा
सकलहुँ।बाहरेसँ प्रणाम कए लेलहुँ। थोड़बे कालमे लेजर शो प्रारंभ भेल जे आधा घंटा
धरि चलैत रहल। कार्यक्रम बहुत आकर्षक आ ज्ञानवर्धक छल।
लेजर शो समाप्तिक बाद हमसभ सोझे डेरा दिस बिदा भेलहुँ।
फेर मानसभवन लग आटो रूकल।हमसभ तहि भोजन केलहुँ आ डेरा आवि रात्रि विश्रामक
तैयारीमे लागि गेलहुँ।
भोरे
उठि-सुठि हमसभ अपन सामानसभ सरिएलहुँ। नित्यक्रमसँ निवृत भए ओलापर कार बूक करओलहुँ ।ठीक
साढ़े सात बजे हमसभ लखनउक लेल कारसँ प्रस्थान केलहि।हमसभ चाह रस्तेमे पीअब,से वाहन
चालककेँ कहि देने रहिऐक। आधाघण्टाक बाद वाहन चालक सड़कक कातमे बनल चाहक प्रसिद्ध
ढाबा लग कार रोकि देलक।हमसभ बहुत नीक चाह पीलहुँ आ लखनउ दिस आगू बढ़ि
गेलहुँ।रस्तामे अयोध्याजीक यात्रासँ जुड़ल प्रसंग स्मरण करैत बेर-बेर आनन्दित होइत
रहलहुँ। धन्य रहथि राम जे हजारों हजारों वर्षक बादो अखनहु धरि लोकक मोनमे सद्यः
विराजमान छथि,आराध्य छथि। धन्य छथि ओ सभ जे एहन महापुरुषक जन्मस्थानपर लाखक लाख
लोकक स्वप्नकेँ साकार करओलथि।
८।३।२०२६
लखनउ प्रवास
हमरालोकनि
एगारह बजे लखनउक होलीडे होम पहुँचि गेलहुँ।टेक्सीबलाकेँ आनलाइन भूगतान केलहुँ। स्वागतीकेँ अपन कागज देखलिऐक। ओ तुरंत हमरसभक
सामान कमरा नंबर १०८मे पहुँचबा देलाह।बेस सुसज्जित सभ तरहेँ सुबिधापूर्ण कोठरी देखि हमरा लोकनिक
मोन प्रफुल्लित भए गेल।हमसभ कनी काल विश्राम केलहुँ आ श्री कौशल किशोर मिश्रजी(हमर
पितिऔत भातिज) केँ फोन लगओलहुँ। ओ लखनउमे
बहुत दिनसँ रहैत छथि । मोतीलाल नेहरु
इंजिनीयरिंग कालेज,इलाहाबादसँ सिभिल इंजिनीयर छथि। उत्तरप्रदेस सरकारमे अधीक्षण अभियंताक पदसँ
सेवानिवृत्त केलाक बादो कार्यरत छथिहे।हुनकासँ फोनपर गप्प भेल। हुनकर पड़ोसी) जे
मधुबनी लग सीमा गामक छथि,बहुत दुखित छलखिन।हुनकर हृदयक शल्यक्रिया ओही दिन होएबाक
छलनि।अस्तु,ओ आइ तँ नहि आबि सकताह।काल्हि जरूर अओताह,से कहलनि।
हमसभ
भोजनक बाद कनी काल विश्राम केलहुँ ।तकर बाद हमसभ आटोसँ डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक
परिवर्तन स्थल देखबाक लेल बिदा भेलहुँ।ओहीठाम गोमती नदीक
कातमे रिभरफ्रांट बनल अछि जतए साँझमे घुमबाक लेल बहुत लोकसभ अबैत छथि।सटले
फूडपार्क सेहो अछि। आटो बला पुछलक जे अहाँसभ पहिने केमहर जाएब?हमसभ पहिने रिभरफ्रांट
देखबाक लेल आटोसँ उतरि गेलहुँ। गोमती नदीक काते-काते बनल पार्कमे लोकसभ घुमैत छथि,विश्राम
करैत छथि। हमहूँसभ कनी काल ओहिठाम घुमलहुँ।तकर बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक
परिवर्तन स्थल चलि गेलहुँ। ओहिठाम प्रवेशक लेल टिकट लेबए
पड़ैत छैक। टिकट लेलाक बाद हमसभ भीतरमे पैरे-पैरे यथासाध्य घुमैत रहलहुँ। ओहीमे
एकदिस बड़ीटा सामियाना लागल छल। पता लागल जे काल्हि ओहिमे बड़का साहित्यिक
कार्यक्रम होमए बला छैक।ई पार्क मात्र एक
स्थापत्य चमत्कार नहि अछि।अपितु, ई समता, न्याय आओर
मानवाधिकारक भावनाक प्रतीक सेहो अछि।अम्बेडकर पार्कक निर्माण उत्तर प्रदेशक पूर्व
मुख्यमंत्री श्रीमती मायावतीक कार्यकालमे भेल छल। एहि पार्ककेँ बनाबक मुख्य उद्येश्य भारतक ओहि
महान नेता लोकनिक सम्मान करब थिक जे
सामाजिक न्याय, समानता आ दलित अधिकारक लिए संघर्ष
केलनि।एहिमे प्रमुख छथि- डॉ. भीमराव अंबेडकर, कांशीराम,
नारायण गुरु, ज्योतिबा फुले, आदि।
डॉ.
भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल अद्भुत अछि। हमसभ यथासाध्य एहिमे घुमलहुँ।थोड़े काल सुस्तेबो
केलहुँ आ तकर बाद आटोसँ फूडपार्क दिस बिदा भेलहुँ। काते-काते दूबगली अनेक प्रकारक
भोजन,जलखैसभक दोकान देखबामे आएल। ओहीमे बीचमे एकटा बिहारी व्यंजनक दोकान सेहो
देखबामे एल।मुदा,ओहिठाम,आमिष भोजन सामग्री भेटैत छल। तेँ हमसभ वापस भए गेलहुँ। बेसी
आमिष सामग्री बला दोकानेसभ देखाएल। शुरूएमे एकटा निरामिष चाटक दोकान छल। मुदा,हमसभ किछु खेलहुँ नहि। ओहिठामसँ सोझे अपन डेरा वापिस भए गेलहुँ।
आइ
तेरह फरबरी २०२६ अछि।हमसभ स्नान-ध्यान,जलखैक बाद कौशलजीक प्रतीक्षा कए रहल छलहुँ।
ओ कहने रहथि जे आइ अओताह,मुदा अएबाक समय नहि कहने रहथि। करीब एकघंटा धरि हुनकर
प्रतीक्षा केलाक बाद श्रीमतीजी कहलनि –
“एना
तँ हमसभ बैसले रहि जाएब।”
“तखन?”
“तखन
की,हमसभ कतहु घुमबाक लेल निकलि जाइ।हुनकर बाट कतेक काल तकैत रहबनि।”
“बात
तँ सही कहि रहल छी।मुदा ओ कहने छथि।अएबे करताह।यदि हमसभ निकलि जाएब आ ओ बीचेमे आबि
गेलाह तखन?”
“तखन
हमसभ वापस चलि आएब।हमसभ कोनो ततेक फटकी तँ जा नहि रहल छी।”
“बेस।बातो
सही छैक।हुनका निश्चित समय कहबाक चाहै छलनि।तखन ओहि हिसाबे हमसभ अगिला कार्यक्रम
बनबितहुँ। चलू,निकलि जाइत छी।बादमे देखल जेतैक।”
आखिर
हमसभ बाहर भए गेलहुँ। कनीके फटकी एकटा टेम्पो बला(शाहजाद) ठाढ़ छल।हम ओकरा पुछलिऐक-
“हमसभ
लखनउक मुख्य-मुख्य स्थानसभ घुमए चाहैत छी।तूँ चलबह?”
“किएक
ने जाएब?हमर तँ काजे इएह अछि।”
“केमहर
जेबहक आ कतेक किराया लेबहक?”
ओ
एकसुरे पुरान लखनउक दर्शनीय स्थानसभक नाम गना गेल। रुमी दरबाजा,शाही
तालाब,सतखपे,नौबतखाना,हनुमान मंदिर,इमामबाड़ा,भूल-भुलैया,,,।
“से
तँ बुझलहुँ,मुदा किरया कतेक लगतैक?”
“चलू
ने।जे वाजिब बुझाए से दए देबैक।”
“फरिछएल
बात नीक होइत छैक।”
“अखन
बिदा होइत छी तँ दू-तीन बजे धरि वापस आबि सकब। सात सए रूपया दए देबैक।”
“ठीक
छैक।”
हमसभ
आटोपर बैसि गेलहुँ।रूमी दरबाजा,शाही तलाब,सतखपे,नौबतखाना देखलाक बाद हमसभ हनुमान
मंदिर पहुँचलहुँ। प्रयागराज जकाँ ओतहु खधिआमे सुतल हनुमानजी छथि।हुनका प्रणाम कए
हमसभ ओतए बैसले छलहुँ कि कौशलजीक फोन आएल-
“कहाँ
छीऐ?हमसभ अहींक डेरापर आएल छी।”
“हमसभ
तँ अहाँक एकघंटा बाट तकलहुँ।तकर बाद भेल जे कनी घुमि ली।”
“हम
तँ कहने रही जे काल्हि आएब,,,।”
आब
हुनका की कहितिअनि।
“अहाँ
ओतहि रहू।हमसभ आबि जाइत छी।”
“हमही
आबि जाइत छी।”
“कतेक
समय लागत?”
“हमरा
आधा घंटा लागत।ताबत ओतहि रहब।”
हमरासभकेँ
भेल जे आधा घंटा ओहीठाम बैसल की करब?सटले बुद्धपार्क रहैक ।ओहिठाम जा कए बैसि
गेलहुँ। एक-पाँच-सात मिनट भेल होएत की
हुनकर फोन आबि गेल।
“कतए
छी?हमसभ तँ हनुमान मंदिर आबि गेल छी।”
“ओहिठामसँ
सटले बुद्धपार्कमे बैसल छी।”
ओ
एहिपर किछु-किछु फुसफुसेलनि।फेर कहैत छथि-
“आब
ओतहि रहब।हमसभ आबि रहल छी।”
हम
हुनकर परेसानी बुझि रहल छलिअनि।चिंता आटोबलाक सेहो छल।यदि कौशलजी अपना संगे चलबाक
आग्रह केलनि तखन कोना की होएत?
“जे
हेतैक,देखल जेतैक।”
हमसभ
पार्कसँ बाहर भेले छलहुँ कि कौशलजी बड़काटा कारपर बैसल देखेलाह।मोन आनन्द भए गेल।हमरासभकेँ
देखिते ओ कारसँ नीचाँ उतरि गेलाह,प्रणाम केलनि आ भेंट होएबाक सुयोगपर बहुत
प्रसन्नता व्यक्त केलनि। हमरा तकबामे,डेरासँ ओहिठाम धरि पहुँचबामे,फेर हमरा लोकनि द्वारा
स्थान बदलि लेबाक कारण जे हुनका परेसानी
भेल रहनि से हुनकर आकृतिपर झलकि रहल छलनि।मुदा हम आब कइए की सकैत छलहुँ?हँ,एतबा
ध्यानमे आएल जे आगूसँ हमहीं हुनकासँ समय पक्का कए लेब जाहिसँ हुनका एहन परेसानी फेर
नहि होनि।ओ आग्रह केलनि जे हमसभ हुनका संगे कारपर बैसि जाइ।हमसभ बात आटो बलाकेँ
कहलिऐक।ओ सहर्ष तैयार भए गेल।कहलक-
“कोनो
बात नहि।बाँकीक जगहसभ काल्हि घुमि लेब।अखन अहाँ किछु टाका दए दिअ।”
हम
ओकरा तीन सए रूपया दए देलिऐक ।ओ प्रसन्नतापूर्वक से राखि लेलक ।हमसभ कौशलजीक संगे
हुनकर कारपर बैसि अपन डेरा वापस बिदा भेलहुँ।रस्तामे लखनउक प्रसिद्ध हनुमान मंदिर
छल।हमसभ ओतए उतरि हुनकर दर्शन केलहुँ,प्रसाद चढ़ेलहुँ आ वापस अपन डेरा दिस बिदा भए
गेलहुँ।कौशलजी हमरासभकेँ डेरा पहुँचा कए वापस चलि गेलाह।हम बहुत आग्रह केलिअनि जे संगे
चलथि,कमसँ कम चाह पीबि लेथि।मुदा हुनका अपन पोताकेँ इसकुलसँ अनबाक रहनि।
“फेर
आएब।”- से कहैत ओ कारपर सबार भए गेलाह। हमसभ अपन डेरा पहुँचि गेलहुँ।जाइत-जाइत
हुनकर वाहन चालक हमरासभक कोठरीमे बड़ीटा मधुरक डिब्बा राखि गेल।हम बड़ी काल धरि
कौशलजी,हुनकर शिक्षा आ उपलब्धिक विषयमे सोचैत रहि गेलहुँ। ओ जखन प्रयागराजमे
मोतीलाल नेहरु इंजिनीयरिंग कालेजमे पढ़ैत रहथि तखन हमसभ ओतहि कर्मचारी चयन आयोगमे
कार्यरत रही आ १७ नयाममफोड़गंजमे रहैत रही। ओ बरोबरि हमरासभक ओहिठाम अबैत
रहथि।हमहूँ कहिओ काल हुनकर छात्रावास जाइत रही। तहिआसँ आब कतेक समय बीति
गेल।बीच-बीचमे कहिओ काल भेंट होइत रहल।एतेक दिनक बाद फेर भेंट भेलाक बादो ओहिना आपकता,ओहने
सिनेह हुनकामे देखबामे आएल।आइ ओ किछु जल्दीमे रहथि।नीकसँ गप्पसप्प नहि भए सकल।
काल्हि फेर अओताह,से कहि गेल छथि। से सोचि आनन्दमे रही।अपन कोठरीमे पहुँचि गेल
रही।
“आब
आइ किछु आर नहि,बस विश्राम।”
“ठीक
छैक।”
आइ
लखनउमे हमरसभक तेसर दिन छल। कौशलजीकेँ फोन केलिअनि। ओ चारि बजेक आसपास अओताह।
“तखन
हमसभ घुमि लैत छी।”
“ठीके
कहलहुँ।”
आटोबलाकेँ
फोन लगओलहुँ। ओ नओ बजे धरि आबि जाएत। हमसभ ताबत जलखै कए लेलहुँ। बाहर निकलले छलहुँ
कि स्वागत कक्षसँ सटले ओएह आटोबला ठाढ़ देखाएल।हमसभ प्रसन्नतापूर्वक काल्हि बाँकी
रहि गेल स्थानसभ देखबाक लेल बिदा भए गेलहुँ।हमसभ इमामबाड़ा आ भूलभुलैया काल्हि
बाहरेसँ देखने रही।ओहिठाम फोटो घिचओने रही। आइ शुक्र दिन छलैक। ओहिठाम नमाजीसभक
बहुत भीड़ हेतैक।रस्तासभ जल्दीए बंद भए जेतैक। फेर ओहिसभमे बहुत रास सीढ़ी चढ़बाक
छैक जे हमर श्रीमतीजीकेँ कष्टकारी हेतनि,साइत पारो नहि लगतनि।तखन?बाहरेसँ हमसभ
घुरि गेलहुँ। थोड़बे फटकी म्युजियम छल।हमसभ ओहिठाम गेलहुँ। ओहिठामम मिर्जा वाजिद
अली शाहक खिस्सा सुनलहुँ। मिर्जा वाजिद अली शाह ( ३० जुलाई १८२२ – १ सितम्बर १८८७)
अवधक एगारहम आ अंतिम राजा छलाह। ओ ९ वर्ष धरि(१३ फरवरी १८४७ सँ ११ फरवरी १८५६) एहि पद पर रहलाह ।कहल जाइत अछि जे हुनका अंग्रेज
घेरि लेने छलनि,मुदा एहि लेल भागि नहि सकलाह जे पनही पहिरेबाक लेल आदमी नहि आबि
सकल।के अबैत?सभ तँ अपन जान बचबएमे लागल छल। आखिर ओ पकड़ि लेल गेलाह ।ई भेलैक
नबाबी। म्युजियममे मार्गदर्शक गजब व्यक्तित्वक लोक छलाह। एहन विनम्र आ गरिमापूर्ण
व्यवहार,बजबाक अद्भुत शैली लखनउएमे देखल जा सकैत अछि।ओहिमे राखल चित्रकलासभक ओ
विस्तारसँ वर्णन केलनि। हमसभ तकर खूब आनन्द लेलहुँ।ओहि चित्रसभमे ई विशेषता छल जे
जेमहरे घुमबै तेमहरे ओकर मुँह घुमि जाइत छलैक। से एकटा,दूटा चित्रमे नहि।सभमे इएह
हाल छल। अंतमे,हम मार्गदर्शकजीकेँ हुनकर शुल्क देलिअनि जे ओ बिना कोनो ना-निकुरकेँ
राखि लेलनि आ बहुत आदरपूर्वक हमरासभकेँ ओहिठामसँ बिदा केलनि।ओ एहि बातसँ बहुत
प्रसन्न भेल रहथि जे बच्चामे हमसभ दाहा देखए अपन गामक हाटपर जाइत छलहुँ,जे हमरा
ओहिठामक लोकसभ दाहापर कबुलामे बद्धी चढ़बैत छलाह,जे हमरा टोलक लोकसभ दाहाक लेल
चंदा सेहो दैत छलाह। ओ उत्सुकतामे पुछलाह-
“कतए
घर भेलैक अपनेक?”
“बिहारक
मधुबनी जिला।”
“मधुबनीक
लोक होइते छथि एहने नीक।”
हुनकर
प्रशंसासँ हम दंग छलहुँ। बाहरे लखनउ!
”ओहिठामसँ
वापसीमे हमसभ एकटा प्रसिद्ध दोकानपर किछु कपड़ासभ कीनलहुँ आ वापस अपन डेरा चल अबैत
रहलहुँ। आटोबलाकेँ चारि सए रूपया देलिऐक।ओ बहुत प्रसन्न।एहि तरहेँ हमरा लोकनिक
ओकरासँ सातसए रूपयामे पुरना लखनउ घुमबाक करार पूरा भए गेल।ओहो खुस, हमहूँसभ प्रसन्न।
साँझमे निर्धारित समयपर कौशलजी पहुँचलाह।
चारि
बाजि रहल छल।हमसभ कौशलजीक प्रतीक्षा कए रहल छलहुँ। आइ हुनका कोनो परेसानी नहि
होनि,हमसभ अपन डेरापर समयपर उपलब्ध रही ताहि लेल पहिने सँ साकंछ छलहुँ। हम हुनका
फोनो कए देलिअनि जाहिसँ कोनो प्रकारक दुबिधा नहि रहए। ओ समयसँ आबि रहल छथि,से
जानकारी भेटि गेल छल। होलीडे होममे हुनका लेल कथीसँ स्वागत कएल जाइत।तथापि, चाहक
लेल कहि देने रहिऐक। समयसँ ओ आबि गेलाह। हमसभ हुनका अपन डेरापर देखि बहुत प्रसन्न
रही। आब की?शुरू भेल तरह-तरहक गप्प-सप्प। हुनकर धिआ-पुताक बारेमे विस्तारसँ
जानकारी भेटल।ओना किछु-किछु तँ बुझले रहए।हुनकर आर्थिक संपन्नता आ बच्चासभक कुशल-समाचार
जानि बहुत आनन्द भेल। लगभग दू घंटा धरि हुनकर सानिध्यक फएदा हमसभ उठबैत रहलहुँ। ओ
आब वापस अपन घर जेताह। जाइत-जाइत अपना ओहिठाम आएबाक लेल हकार दैत गेलाह। मुदा
हमरासभ लग आब एक्केटा दिन बाँचल छल। हमसभ प्रात भेने चंद्रिका भगवतीक दर्शन करबाक
लेल बिदा भेलहुँ।आइ शिवराति छलैक।तेँ मंदिरमे बहुत भीड़ रहैक। तथापि,हमसभ नीकसँ
दर्शन केलहुँ आ साँझ पड़ैत-पड़ैत अपन डेरा
वापस आबि गेलहुँ।काल्हि लखनउसँ दिल्ली
वापस होएबाक छल। तेँ ओहि दिन कोनो आर कार्यक्रम नहि छल।दुपहरामे लगीचेक एकटा
प्रसिद्ध भोजनालयमे हमसभ लखनवी बिरियानी खेलहुँ।हमरासभकेँ ओहिठाम
आटोबला(शाहजादा) लए गेल रहए। जाबे हमसभ
भोजन केलहुँ,ताबे ओ हमरासभक प्रतीक्षा करैत रहल।तकर बाद वापस डेरा पहुँचा देलक।किराया
पुछलिऐक तँ मात्र एकसए टाका मंगलक। हमरा लागए जे ओ बेसी कहत,कारण ओतेक काल धरि
प्रतीक्षा केने छल।मुदा,ओ उचितो किरायासँ कनी कमे लेलक।हमसभ ओकर सज्जनता, विनम्रतासँ
बहुत प्रभावित भेल रही।जाइत जाइत एकटा आर
घटना मोन पड़ि रहल अछि। भोरे टहलबाक क्रममे एकटा कोनटापर पराग दूधक पैकेट बेचैत
एकटा सज्जन भेटलाह।हम हुनका लगपासक एटीएमक जानकारी पुछलिअनि।ओ बता देलाह।मुदा कोनो
एटीएम काज नहि कए रहल छल।वापसीमे हुनका से कहलिअनि। ओ तरह-तरहक बात सभ बुझबए लगलाह
जे एटीएमसँ जानि कए खराप राखल जा रहल छैक,आदि,आदि।दोसर दिन फेर ओ देखेलाह।हम हुनका
कोनो नीक बिरियानी बला होटलक जानकारी पुछलिअनि। ओ कहलाह-
“हम
पछिला पचीस सालमे कहिओ होटलमे नहि खेने छी।तेँ एहि बारेमे हम किछु नहि कहि सकैत
छी।”हमरा हुनका बारेमे उत्सुकता बढ़ल।हम पुछलिअनि-
“अपने
कोन काज करैत छलहुँ?”
“छोट-छिन
सरकारी कारकून छलहुँ। हम कहिओ अधिकारीक दबाबमे नहि रहलहुँ।ठाँइ-पठाँइ जबाब दए
दिऐक।परिणाम भेल जे जाही पदसँ नौकरी शुरू केलहुँ ताहीसँ सेवानिवृत्त भए गेलहुँ। किछु
साल पूर्व एक्सीडेन्ट भए गेल।तकर बाद समयपूर्व स्वेच्छा सेवानिवृत्ति लए लेलहुँ।
आब इएहसभ करैत छी।गुजर भइए जाइत अछि।”
हमरा
हुनकर स्वभाव बुझबामे आब कोनो भांगठ नहि छल। हम मुस्काइत आगू बढ़ि गेलहुँ।
दिन भरि विश्रामक बाद हमसभ रातिमे काशी विश्वनाथ
एक्सप्रेससँ दिल्ली वापसी होएब। ट्रेन
बहुत विलंबसँ चलि रहल छल।ताहि हिसाबे दस बजे रातिक आसपास ओकरा लखनउ टीसनपर अएबाक
चाही। मुदा,१३९ नंबरपर फोन कएलापर पता लागल जे ट्रेन लखनउ सही समयपर पहुँचत। हम
से जानि चकित रही।मुदा भेलैक सएह।सही समयपर ट्रेन आबि गेल छल। ट्रेनक प्लेटफार्म
अंतिम समयमे बदलि गेल रहैक,जाहिसँ कनी परेसानी भेल।ओही क्रममे एकटा ग्रैजुअट
कूलीसँ भेंट भेल।ओ गजब व्यक्ति छलाह।एतेक शिक्षित रहितहुँ वर्षोंसँ कूलीक काज कए
रहल छलाह।हम हुनकर फोटो खिचलहुँ आ परिचय सेहो पुछलिअनि।मुदा ओ आर किछु कहबासँ मना
कए देलाह।“बस एतेक प्रयाप्त छैक।की करब बेसी बूझि कए…?”
आब
हमर सभक लखनउ प्रबासक अंत भए रहल छल। लखनउ सहर,एहिठामक खानदानी लोकसभ,स्वादिष्ट
भोजन आ कौशलजीक अपनत्व नहि बिसरल जा सकैत अछि।
हमसभ ट्रेनमे बैसि गेल छलहुँ। ट्रेन लखनउ प्लेटफार्मसँ सही समयपर घुसकए
लागल। मोने-मोन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामकेँ स्मरण करैत हमरा लोकनि वापस
दिल्ली बिदा भए गेलहुँ।
रबीन्द्र
नारायण मिश्र
१८।४।२०२६







