मैथिलीमे हमर प्रकाशित पोथी

मैथिलीमे हमर प्रकाशित पोथी

शनिवार, 30 दिसंबर 2017

घोलफचक्का



घोलफचक्का



गामक लोक की की ने देखलक। मुदा दू-चारि वर्षसँ जे सभ गाममे भए रहल छल से एकदम अप्रत्याशित छलैक। गाममे नव-नव गुलंजर रोज-रोज उठैत रहैक।

रबि दिन गाममे हाट लगल रहैक। सभ पुरुष हाट करए गेल रहए। अरूण बाबू सपरिवार गाम आएल छलाह। हुनकर भाए मोहन बाबू बेश अगरजित छलाह। मैट्रिक पास केने छलाह। ओना, खेत-पथार बहुत तँ नहि रहैन मुदा गुजर होयबामे कोनो दिक्कत नहि होइक। गाम घरक झगड़ा फड़िछाबए-मे ओस्ताद छल मुदा अपना घरक झगड़ा नहि फड़िछा पबैत छलाह। घरवाली बड्ड तेज छलखिन। गोर-नार दप-दप। बी.ए.पास केने छलखिन। बाप बड़ गरीब छलखिन मुदा बड़ विवेकी। हुनकर एक मात्र कन्या छलखिन शीला जिनक विवाह मोहन बाबूसँ भेल छलनि। मुदा विआहक बाद हुनका लोकनिक आन्तरिक मतभेद बढ़ले चल जाइत छलनि। परिणामत: शीला बड़ दुखी ओ उदास रहैत छलीह।

अरूण बाबू बहुत दिनक बाद आएल छलाह। दुनू भाए आपसमे गप्प-सप्प करैत छलाह कि क्यो स्त्रीगण रिक्सापर आएल आ ओकरा संगे दोसर स्त्रीगण घरसँ बहरायल आ रिक्सापर बैस चुप्पे चल जाइत रहैक।

किछु कालक बाद मोहन बाबू आँगन गेलाह तँ घरक जिंजीर बन्द छल। आँगन सुन्न। कतहुँ क्यो नहि। मोहन बाबू गुम्म। ने हुनका आगा सुझनि आ ने पाछाँ। की करी, की नहि करी किछु फुराइते ने छलनि। क्रमशःई गप्प सौसे गाम पसरि गेल।

ई घटना कोनो नव नहि छल। एक मास पहिने एकटा एहने घटना भेल जे पूरा इलाकाकेँ झकझोड़ि देलक। पूरबरिया गामवाली बड़ सात्विक छली। दुरागमनसँ पहिने बिधबा भए गेल छलीह। तहिआसँ आइ धरि सात वर्ष बीति गेल। मुदा कतहुँ हुनक चर्चा नहि भेल।रोज प्रात: चारिये बजे उठि जाइत छली। गामक सभ लोक सूतले रहए कि अन्हरिएमे नहा-सोना कए पूजा-पाठ करए लगैत छलीह। सम्पूर्ण शरीर तेजमय।

मुदा किछु दिनसँ दर्द दर्दक शिकायत करैत छलीह। लोककेँ होइक जे पेटमे अल्सर भए  गेलनि अछि। लाजे ओ किछु बजथिन नहि। अन्ततोगत्वा पढ़ुआ काका नहि मानलखिन। हुनका जबरदस्ती अस्पताल लए गेलखिन । डाक्टर अस्पतालमे भरती कए देलकनि। ओकरा भरती करा कए पढ़ुआ काका किछु पैसा-कौड़ी जोगार करए गाम आपस अयलाह। प्रात:काल अस्पताल पहुँचला तँ रोगीक कतहुँ पत्ते नहि। डाक्टर साहेब कहलखिन जे हुनक देर रातिमे कन्या भेलनि । पता नहि रोगी केतए चल गेलीह मुदा बच्चा सुरक्षित राखल अछि।

सौंसे इलाकामे गर्द पड़ि गेल एहि बातक।  

ओना तँ गाम-घरक लोक बेश नेम-टेमबला। मुदा बेशी लोकक  मोन सिआह । क्यो ककरोसँ कम नहि मुदा भीतरे-भीतर सभकेँ धून पकड़ने जा रहल होइक तहिना बुझैत। मुदा इलाकामे एक्के बिहाड़ि। स्त्रीगण सभ घोघ उठाबए लेल बेहाल। बेटा सभक बापक कुंजी छिनए लेल बेहाल। पुतोहु सभ सासुक गट्टा पकड़ए लेल बेहाल। घरे-घरे भिन्नक हाबा से जोरगर बहल अछि जे बयन परसैत परसैत सभ परेशान। घरे-घर कै-कैटा चूल्हा भए गेलैक अछि। खैर ई तँ जे भेलैकसे भेलैक। मुदा सभसँ आश्चर्य ओहि दिन भेल जहन पुरुषोत्तम बाबूक घरवाली हनहनायल थाना पहुँचि गेलैक। ओकरा देखए लेल चौगामका हजारो लोक जमा भए गेल। करमान लागल लोक आ तैयो दनदनाइत दरोगाजीक ऑफिसमे प्रवेश कए गेल।

दरोगाजी पुलिसकेँ आदेश देलखिनजे भीड़केँ भगा दौक आ अपने ओहि कन्याक इजहार लेबए लगलाह। सँए-बहुमे गम्भीर मतभेद भए गेल छलैक। घरवाली कनिक्को रौ सहए वाली नहि छलैक। बाते-बातमे दुनू व्यक्तिमे मारि -पीट भए गेलैक। घरवाली थानामे आबि कए एफआइआर कए देलकैक-

हमारा जान का खतरा है।

तकर बाद ओ पकड़लक रिक्सा आ मधुबनी चल गेलि । बहुत दिनक बाद सुनल गेल जे ओ एकटा छोट जातिसँ बिआह कए लेलक अछि।

गाममे ओझा-गुनी आ भगैतक चर्चा अखनो जोर पकड़ने छल। फुदरक घरवालीकेँ हाथक चाटी चलैत छलैक आ कनेक-मनेक मंत्र-तंत्र सेहो ओ जनैत छल। मुदा एहि बेर अष्टमीक दिन बेस ताल भए गेलैक। ओकर घरवाली साफे बकए लगलैक। खुलि कए देवी खेलाय लगलैक। गाम-गामक भगता आएल। मुदा ककरो बुते देवी नहि पकड़मे अयलैक। गाममे ओहि दिन पछवारि गामक ओझाजी आएल छलाह। हुनको तंत्रे-मंत्र बेस जोरगर छलनि। दौड़ल-दौड़ल लोक हुनका बजौने आएल।

ओझाजी अयलाह। अनुष्ठान भरि राति भेलैक। देवी बन्‍हेबे नहि करैक। अन्ततोगत्वा भोरुकबा रातिमे आबि कए ओ देवी पकड़मे अयलैक। गटागट बाजए लगलैक-

एक मास धरि अनुष्ठान कर। ई कर ओ कर नहि तँ सौंसे गामकेँ पीस कए धए देबौक। इत्यादि-इत्यादि...।

औ बाबू! आब तँ सौंसे गौवा ओझाजीक अनुनय-विनय करए लागल। ओझाजी अपन भाव बढ़बए लगलाह-  

हमरा तँ ओतए जेबाक अछि। ई करबाक अछि, ओ करबाक अछि। हम परसू जेबे करब। एक्को दिन नहि रूकि सकैत छी।

बड्ड मुश्किलसँ ओ रूकलाह। रोज साँझसँ देवीक अनुष्ठान घरमे शुरू होइक आ भोर धरि चलैत रहैक। ओहि अनुष्ठानक दौरान ओतए ककरो आयब मनाही छलैक। देवी रहि-रहि कए गरजै-

सभकेँ देखबौ। एक-एककेँ देखबौ...!”

फूहर बाबू बाहर दरबाजापर सभ सुनैत रहैथ आ देवीक आराधना करैत-करैत औंघा जाथि। ओमहर ओझाजी अनुष्ठानमे लीन।

अनुष्ठानक अन्तिम दिन छल। निशब्द राति। ओझाजी आ फूहरक घरवाली अनुष्ठानमे लीन। सभ क्यो औंघाइत छल। एही समयमे दुनू देवी-देवता एकाएक गायब। गामसँ पूब दिस सड़क छलैक। से पकड़ने-पकड़ने ने जानि कतए चल गेल।

भोर भेने गाममे फेर एकटा गुलंजर छुटि गेल।

गाममे आब की की ने अछि। इंजीनियर, प्रोफेसर आ बीए-एमए केर तँ गप्पे जाए दियऽ।

इंजीनियर साहेबक पत्नी। बेस अपडेट छलखिन। शहरसँ गाम पैर नहि दैत छलखिन। ओहि दिन शहरसँ कतौ बाहर यात्रापर गेल छलाह। दूध देबए वास्ते दोसर गामक लोक अबैत छलनि। ओहि दिन मेम साहेब ओकरा अन्दरे बजा लेलखिन। आ कहि नहि की की गप्प करैत रहलीह। किछु कालमे घर अन्दरसँ बन्द भए गेलैक। फेर जे ई क्रम चलल से चलिते रहल। अन्ततोगत्वा ई गप्प इंजिनियर साहेबकेँ कान धरि सेहो गेलनि। एक दिन वो एहि सभहक प्रत्यक्षदर्शी सेहो भेलाह। हुनका रहल नहि गेलनि। आ ओकरे संगे ओकरा घरसँ विदा कए देलनि ।

गामक लोक बेश टेटियाह। एकदम नियमसँ रहब आ नियमसँ जीब। भोरे उठि कए पैखाना करबसँ लए कए सुतबाक काल धरि मंत्रोच्चार करैत रहताह। गरीबक घर कोनो अधलाह काज भेल नहि कि ओकरा चट्टे बारि देताह। मुदा धनिक लेल सातटा खूनो माफ।

प्रोफेसर साहेबकेँ घरवालीसँ नहि पटलनि। तलाकक मोकदमा डायर भए गेल। घरक लोकमे सँ क्यो कनियाँक पक्षधर नहि भेलैक। तलाक पास भए गेलैक। प्रोफेसर साहेब धराक दए दोसर बिआह केलाह। ओहिसँ बच्चो भेलनि ओ ओहि बच्चाकेँ विआहो भए गेलैक।

सोचियौक कतए अछि गामक ओ सभ्यता सभ। तैयो हमरा लोकनि ठढ़का चानन करिते छी। अपनाकेँ पदनधोत बुझिते छी। धुत तोरी-के..!

गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

गाम




 


गाम


गाममे बहुत गोटे अनचिन्हार भए गेल छल। धिया-पुता सभ जे धरिया पहीरने घुमैत रहैत छल, से सभ फुटि कए जबान भए गेल छल आ बुढ़-पुरान लोक क्रमश: विदा भए रहल छलाह। क्रमिक किन्तु अनवरत परिवर्तन प्रकृत्तिक नियमक पराक्रमसँ सभ प्रभावित छल।

लोचन बाबा, तिला बाबू, बुढ़िया काकी सभ एक-एक कए चल गेलाह। बहुत कम पुरना लोक बँचि गेल छल। मुदा ई गप्प हमरे किएक एतेक परिछायल बुझा रहल छल। गाममे बहुत लोक अछि। सभक समक्ष ई घटना भेलैक अछि आ होइत रहलैक अछि। प्राय: समयक अन्तरालक कारण बारह वर्षक अवधिक कारण हमरा बेसी अन्तर बुझा रहल अछि। छोटो-छोटो घटना सभ एकटा आकार ग्रहण कए लेने अछि।

पोखरिक भीरपर बैसल हम यैह सभ सोचि रहल छलहुँ, गामसँ बहुत किछु निपत्ता भए गेल छल। दुपहर रातिमे गुलचनमा चौकीदारक जबरदस्त आबाज-

जगले रहब। यौ ऽऽऽ।

दुपहरिया रातिमे घरे-घर घुमि जाइत छल। आ चिकरैत-

फल्लाँ बाबू छी औऽऽऽ।

भोरुकबा उगैत त्रिकण्ठ बाबाक परातीक स्वर सौंसे गामकेँ भोर हेबाक सूचना दैत आ किछु कालक बाद बाद झमा झम, झमाझम, टन-टन टनटन घड़ी-घण्टा सुनबामे अबैत। मन्दिरपर बाबा भगवानक आरती करितथि। भोरे-भोर  सभ ठिठुरैत मन्दिरसँ बाहर होइतथि।

फेर भोर भेल छल। मुदा १२ वर्षक अन्तराल छल।

हम ओहिना ओही पोखरीक भीरपर गेल रही। की भए गेल? सात बाजि गेल। घड़ी-घण्टाक स्वर नहि, प्रातीक एकहुटा आखर नहि सुनायल। चौकीदारक कतहुँ कोनो पता नहि। जे पोखरि हरियर कंचन पानिसँ भरल रहैत छल सैह उजारसन लगैत छल।

यैह सभ सोचि रहल छलहुँ कि बड़ी जोरसँ हल्ला भेल। जैह-सैह चौक दिस दौग रहल छल। कै गोटासँ पुछलिऐक। क्यो किछु कहबा लेल तैयार नहि छल। ककरा फुर्सति छलैक। सभ अफसियाँत..!

हल्ला जोर पकड़ने जा रहल छल।

ताबे देखबामे आयल जे १५-२० गोटे लाठी-भाला लेने गरजैत आगाँ बढ़ि रहल छलाह। ओमहरसँ मरर कका अयलाह।

की भेलैक मरर कक्का?”

लड़ाइ भए गेलैक अछि। कैक दिनसँ तनातनी छलैक, मुदा आइ फैसला भए कए रहत।

मुदा झगड़ाक कारण?”- हम पुछलियैक।

अहाँ बाबू बाहर रहैत छी। अहाँ की बुझबैक। अहिठामक हवा विचित्र अछि। अनीनमा क बेटा गोवर्धन बाबूक प्रौत्रक काज नहि गछलक। बस कि गोवर्धन बाबू पुरनका अबाज देलखिन्ह। छौड़ा अरि गेल। लाठी पकड़ि लेलक। ताहिपर वो किछु बजलाह-

“कि छौड़ा लेने लाठी मारि देलक। ओहि दिनसँ समा बन्हा रहल अछि।”

ओ बाजिये रहल छलाह कि ठाँय- ठाँयक आबाज भेल। कनिके कालमे थानामे तीनटा लाश पड़ल छल। लोक जहाँ-तहाँ भागि रहल छल।

दू-तीन दिन धरि एकरे चर्चा होइत रहल। गामक बहुत रास जबान सभ भागि गेल। कहाँ दनि बहुत गोटेपर वारन्ट भए गेल छलैक।

साँझ भए गेल छल। गामसँ बहुत रास लोक भागि गेल छल। मन्दिरपर एसगर बैसलरही कि मरर कका पहुँचलाह।

की बाबू, किएक गुम-सुम छी?”

आउ, मरर कका।

मरर कका बैसलाह। गामक एकटा वृद्धतम लोकमेसँ अवशेष मरर कका ओहि गाममे बहुत किछु देखलाह आ कहि नहि की की आओर देखताह।

आओर गामक की हाल?”

गामक की हाल रहत। समय बहुत बदलि गेल। आब तँ हमरा लोकनि चलबे करी ओहीमे कल्याण।

धिया-पुता की कए रहल छथि?”

सभ कमाइ छथि। सबहक परिवार फराक-फराक छनि।

अहाँ ककरा संगे छी?”

ककरा संगे रहब? हम तँ पेण्डुलम भए गेल छी। एक-एक मासक पार लगैत अछि। जहिआसँ अहाँक काकी स्वर्गवासी भेलीह तहिया घिघरी काटि रहल छी। आँखिमे मोतिआबिन्द भए गेल अछि। साँझ परितहि अन्हार भए जाइत अछि। फेर गप्प हैत।

ई बजैत-बजैत ओ उठि गेलाह।

१२ वर्ष पहिनहि मरर ककाक समय मोन पड़ि रहल छल। गामक प्रतिष्ठित लोकमेसँ छलाह। सभ बालक प्रतिभाशाली एवम् होनहार। साँझे-साँझ नित्य ओहि मन्दिरपर कीर्तन होइत छल आ मरर कका अवश्य ओहिमे रहितथि।

कनिककाल आओर बैसल रहलहुँ। आठ-दसटा अधवयसू सबहक हल्ला बुझायल। सड़कपर सभ गरिअबैत आगा बढ़ि रहल छल। सभ तारी पीबि कए बुत्त रहए।

काते-कात गामपर पहुँचलहुँ। मोन थाकल लागि रहल छल। सुति रहलहुँ।

भोर भेने पोखरि दिसि जाइत रही। गामक अन्तिम छोरपर पाँच-सातटा छोट-छोट खोपड़ी ओहिना-क-ओहिना छल। अपरिवर्तित। कतेक गोटे धनिक भेल, कतेक गरीब भए कए गामसँ बिलटि गेल मुदा वो सभ ओहिना-क-ओहिना बाँसक बासन बनेबामे तल्लीन छल। ओकर बच्चा सभ ओहिना उघार, माटिमे लेटा रहल छल। यैह सभ सोचि रहल छलहुँ कि फोकना डोम हमरा देखलक। चीलमक सोंट लगा कए खोंखैत बाजि उठल-

परिणाम मालिक, कहिआ अलियै?”

तीन दिन भए गेलैक। आ हम आगा बढ़ि गेलहुँ।

पोखरि दिसिसँ आबि स्नान-ध्यान कएल। मधुबनी जेबाक छल। कनिके आगा बढ़ल छलहुँ कि फूटरक मायक कनबाक आबाज सुनलहुँ। खोपड़ी तर बैसल कानि-कानि किछु कहि रहल छेलीह। हमरा देखि सोर पारि लेलीह।

की भेल काकी? किएक कानि रहल छी?”

की कहूँ, अपना घरक बात बजैत संकोच होइत अछि। तीन साँझसँ घरमे किछु नहि भेल अछि। हमरा लोकनि दुनू गोटे फराक छी। मालिकसँ दसटा टका मंगलिअनि तँ गरजि उठलाह।

ई कहैत-कहैत ओ ठोह पारि कए कानय लगलीह। हमरा नहि रहि भेल। हुनका प्रणाम कय आगा बढ़ि गेलहुँ।

हे भगवान! की भए गेल एहि गामकेँ? मनुष्यता जेना भागि गेल। जतै देखू उलटे हबा बहि रहल छल।

रिक्सासँ मधुबनी जाइत रही। यैह सभ सोचैत-सोचैत निन्न परि गेल। रिक्सा आर.के.कालेजसँ आगा छल। एतबेमे तिलक भाइ नजरि पड़लाह। मुदा टोकबाक साहस नहि भेल। कहि नहि की की आओर सुनय पड़य। दिन भरि मधुबनीमे रहलहुँ। साँझ भए रहल छल। मुदा गाम जयबाक साहस नहि भए रहल छल।

दू दिन धरि मधुबनियेमे रहि गेलहुँ। साँझमे टहलैत काल मन्दिर गेल रही। भगवतीक दर्शन कएल। घाटपर बैसल रही। साँझो उत्तर दिसि बड़ नीक घर सभ नजरिमे आबि रहल छल। मोन भेल घुमी। आगा बढ़लहुँ। सुन्नर-सुन्नर सुसज्जित घर।

पीच रोड। स्ट्रीट लाइट। छोटी पटना लागि रहल छल। बारह साल पूर्व ओहिठाम खत्ता छल। बाढ़िक समयमे समुद्र भय जाइत छल वो जगह। चारूकातक गामसँ श्रीमान लेाकनिक जमघट भए गेल छल ओहिठाम। संयोगसँ अपना गामक देबन बाबू नजरिमे अयलाह। घरक दरबज्जासँ निकलि रहल छलाह। कहि उठलाह-

कहिआ अयलह?”

कहलियनि-

चारि-पाँच दिन भेल।

गप्प आगा बढ़ए लागल। कहलाह-

की कहैत छह?

आब गाम रहए-जोकर नहि रहल। तँए एहीठाम एकटा छोट-छीन घर बना लेलहुँ। कोठरीसँ बड़की भौजी आबाज देलीह-

ठाढ़ किएक छी? अहाँक तँ अपन घर अछि।

घरमे प्रवेश करितहि छगुन्तामे पड़ि गेलहुँ। सोफासेट - टीभी, डाइनिंग टेबुल ..की की नहि छल।

गप्प-सप्प होइत रहल। चाह-जलखै सभ भेल।

गप्पक क्रममे पुछलिअन्हि-

मरर ककाकेँ एतहि किएक नहि राखि लैत छिऐन?”

काकी तर-दए बाजि उठलीह-

हुनका गाम छुटिते नहि छन्हि! की करी?”

मरर ककाक ज्येष्ट पुत्र देबन भाइ बड़ प्रतिभाशाली छलाह। मुदा एक युगक अन्तराल पिता पुत्रकेँ धारक दू कातपर राखि देने छल।

रातिक आठ बाजि गेल छल।

हम हुनका सभसँ विदा लए पुन: मधुबनीक डेरापर चल गेलहुँ। रास्ता भरि अपन गाम आ काली मन्दिरक आगूक खत्तामे भेल एक युगक अन्तरालक परिवर्तन मोनमे बेर-बेर अबैत रहल। गामकेँ की भए गेल? हे भगबान!  कोन भूत एकरा धए लेलक? लोक एना किएक कए रहल अछि? काली मन्दिरक चभच्चा छोटी पटना भए गेल। गाम एना किएक रहि गेल। गाम माने की? संघर्ष, शोषण, ईर्ष्या, द्वेषक अतिवाद।

छुट्टी समाप्त भए रहल छल। रेलगाड़ीपर बिदा भेलहुँ। अपन संघर्ष स्थली दिसि- जहिठामसँ दूरीक कारण चन्द्रमाक धरातल जकाँ अपन गाम सुन्नर   लागए लगैत अछि।

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

  क्रान्ति बिसर्जन




 


क्रान्ति बिसर्जन


सौंसे गामक नवतुरिया सभ एकटा मिटिंग केलक। वैकवाड किलासक लोकक तथाकथित आक्रमकताक पुरजोर विरोध करबाक दृढ़ निश्चय कएल गेल।

नेमी बाबू गामक गामक नामी लोक छलाह। चारू बेटा एक-सँ-एक पोस्टपर छलखिन। सभ कमासुत। वो बैसारमे बीचमे बमकि उठलाह-

जतेक जे जुलुम भए रहल अछि ओहिमे बड़के लोकक हाथ अछि। छोटका लोकक ई साहस जे हमरा लोकनिक हरबाही छोड़ि दिए। खबासिनी सभ आँगन एनाइ छोड़ि देलक। ई सभ छोटका लोकक करनामा नहि थिक अपितु एहि समस्त काजमे सुधीर बाबूक प्रगतिशील बिचारक पुत्र बेचनक हाथ थिक। अमता सभकेँ भाषण दए-दए सनका देलक अछि।

जब तक भूखा इन्सान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा आदि-आदि नारा के सिखौलक?”

चारू कातसँ थपड़ी पड़य लागल। तय भेल जे सुधीर बाबूकेँ उपराग देल जाए। संगे ईहो तय भेल जे गामक कोनो खबासकेँ आर्थिक सहायता नहि नहि देल जाए।

सभ विसर्जित भेल। सौंसे रास्ता लोक अर्र-बर्र बजैत चल जाइत रहल।

बेचन बेस फनैत छलाह। मिटिंगक एक-एक बात घरे बैसल पता लगा लेलाह। एमहर मिटिंग खतम भेल ओ ओमहर फेर नारा बुलन्द भेल-

जब तक भूखा इन्सान रहेगा, धरतीपर तूफान रहेगा...।

सौंसे गाम डोलि गेल। कारण ओहि स्वरमे पर्याप्त शक्ति प्रस्फुटन भए रहल छलैक। चारू कातसँ एक्के बात जे बभना सभकेँ रास्तापर आनके है। जान रहे कि जाए।

एहि जिनाइसँ मरबे नीक। एवम्-प्रकारेण गाम एकटा सिभिल नाफरबानीक दृश्य देखि रहल छल। एक दिस गामक उच्च वर्णक धनीक, सशक्त लोक सभ दोसर दिस छोटका लोक सभ खाली देह, खाली पेट लेने बमकि रहल छल-

“…धरतीपर तूफान रहेगा।

छोटका लोकमे आघात प्रतिघातक सरिपहुँ शक्ति नहि छल। जहिआसँ वो सभ अवाज बुलन्द केलक तहिआसँ कतेको घरमे डिविया नहि बरल। कतेको राति कोराक बच्चा भुखले सूतल। मुदा तैओ ओ सभ कोनो वाभनक खेत जोतए नहि गेल...।

ओहि दिन हाट लागल रहैक। दामोदर बाबू हाट करए जाइत छलाह। गामक सभसँ धनीक लोक दमोदर बाबू। हाटे-हाट तरकारी उठौना अबैत छल। मुदा जहिआसँ छोटका लोक सभ हड़तालपर चल गेल छल तहिआसँ अपने गमछामे तरकारी बान्हि कए दमोदर बाबू लबैत छलाह। तरकारी लए कए उठहिपर छलाह कि निरसमनापर नजैर पड़लैन। मुदा टोकलकन्हि नहि। कए बेर बजौलखिन-

निरसमना..? निरसमना..?”

मुदा ओ अन्ठिया कए चल जाइत रहल।

दामोदर बाबूकेँ नहि रहि भेलनि। झटकि कए आगू बढ़ि ओकर गट्टा पकड़ि लेलखिन।

एतबेमे औ बाबू जतेक ओकर दियादवाद सभ छलैक सभ दमोदर बाबूकेँ घेरि लेलक। दामोदर बाबू जेना-तेना जान लए कए भगलाह। रास्ता भरि प्रतिशोधक आगिसँ धधकैत रहलाह।

ओहि घटनाक १५ दिन भए गेल छल। दामोदर बाबू इलाकाक १५टा नामी-गामी पहलवानकेँ जमा कए लेने छलाह। बारह बजे रातिमे सभ पलहवान निरसमनाक घर घेरि लेलक ओ निरसमनाक घरसँ निकलैत देरी खाम्ही लगा बान्हि ओकरा मुँहमे गोइठा ठुसि देलक। निरसनमा निस्सहाय, ओतएसँ देखैत रहल। ओकर आँखिक समाने ओकर घरवाली चिकरैत रहल। मुदा निरसनमा हाथ-पैर पटकि कए रहि गेल। असगर वो १५टा दैत्यक सामना नहि कए सकल। भोर भेलापर ओकर घरवाली बीच आँगनमे बेहोस पड़ल रहैक निरसनमा धारक कातमे बेहोश छल।

सौंसे गाममे हल्ला भए गेलैक। बेचन दौड़ल अएलाह। ओ गरजि उठलाह। मुदा जे हेबाक छल से भए गेल छल। अमतटोलीक सभ लेाक एकट्ठा भए गेल। बेचन फेर नारा देलकै-

धरती पर तूफान रहेगा..!”

अहि नाराक कोनो प्रतिकृया निरसनमा ओ ओकर घरवालीपर नहि पड़लैक। ओ दुनू गोटे ओहिना बेसुध ठामहि पड़ल छल।

गामक बुढ़ सभ ओहि घटनाक बारेमे सुनलक आ अनठिया देलक। गामक लेल ओ कोनो नव बात नहि छलैक। हँ, एतवा अवश्ये जे वर्तमान परिपेक्ष्यमे ई घटना एकटा दुस्साहस सन लगैत छल। मुदा एकर बाद फेर नारा कहिओ नहि सुनाइ पड़लैक।

धरती पर तूफान रहेगा।केर संकल्प जेना केतहुँ दहा गेलैक। ओहि घटनाक बाद अमता सबहक बैसारी भेल रहैक। सभसँ सीनीयर माइन्जन बमकि उठल छल नवतुरियापर। मालिक लोकनिक वो बेस चमचा छल। गरजि कए कहलक-

तोरा लोकनिकेँ गिरगिटिआ नचैत छौ। एतेटा जिनगी ईहे मालिक लोकनिक संग बिता देलिऐक। कहिओ कोनो झगड़ा-दन नहि भेलैक। खबासिनी आँगन सभमे काज करैत रहलैक। कहिओ कोनो बातक शिकायत नहि केलक। मुदा ई छौड़ा सभ अगिआ-बेताल बनल हेँ!”

कोनो नवतुरियाकेँ साहस नहि भेलैक जे माइन्जनक विरोधमे किछु बाजए। सभ चुप्प भए एकदम गुम्मी लादि देलक। मिटिंग खतम भेलैक। ओ दोसरे दिनसँ ई स्वर खुजए लगलैक। गामक बड़का लोकमे हरिअरी अयलैक। सभ कियो दामोदर बाबूक प्रशंसा करैत छल। सरिपहुँ दामोदर बाबू बड़ नीक लोक छथि। आदि-आदि...। 

आ फेर ओहि दिनसँ पनिभरनी सभ गिरहथक ओहिठाम काज केनाइ सेहो शुरू कए देलक। सौंसे गाममे फेर ओहिना चहल-पहल रहए लागल...।

बेलाहीवालीकेँ तीनटा बेटी छलैक। तीनू ३टा मालिकक अँगनामे काज करैत छलैक। सभ सासुर बसि आएल छलैक। मुदा गरीबक की सासुर आ की नैहर? ककरो बास सासुरमे नहि भेलैक आ सभ कए वर्षसँ माइये लए कए रहैक। कहि नहि कैटा धिया-पुता छलैक तीनू बहिनकेँ।

मुदा सबहक धिया-पुता गोर-नार। देखैमे सुन्नर तँ छलैहे। बेस तेजो सभ छलैक। बेलाहीवालीकेँ लोक चुटकी मारै जरूर मुदा ओकरा लेल धनसन। ओ अपनो तँ ओही रास्तासँ गुजरल छल। बेलाहीवाली अपना समयमे सुन्दरि छल। ओकरापर दामोदर बाबूक नजैर गरि गेलनि। ओकर बिआह अपन खबाससँ करा देलनि। खबास शुरूए-सँ नंगराइत छल।

एक दिन हल्ला भेलैक जे तेतरि तर केदनि सभ ओकरापर आक्रमण कए देलकै जाहिमे ओ गम्भीर रूपसँ धायल भए गेल। बादमे मास दिन जेना-तेना खेपि ओ स्वर्गवासी भए गेल। तहियेसँ बेलाहीवाली दामोदर बाबूक क्षत्रछायामे पोसाइत रहल। बेलाहीवालीकेँ ओकर बादो कैटा धिया-पुता होइत रहलैक। मुदा कैक बेर गाममे गुल्लर उठलैक।

दामोदर बाबूकेँ चला-चलती रहनि। के बाजत हुनकर विरोधमे।

बेलाहीवालीक तीनू बेटीकेँ ई गप्प बूझल छलैक। ओ सभ अपन आचरणोमे एहि बातकेँ पुष्टसँ स्पष्ट कए रहल छल। दामोदर बाबूकेँ तीनटा पुत्र छलखिन। आ तीनू फराक। तीनू बहिन तीनू मालिकक घरमे काज करए।

काज तँ जे से ओहुना ओकरा सभहक आयब-जायब रहिते छैक। मुदा बेलाहीवाली असगरे ओहि टोलमे हो से गप्प नहि। सौंसे अमतीटोलीक एक-एक लोक एकटा अपन इतिहास छैक, एकटा खिस्सा सबहकनामक संगे जुड़ल छैक। ओना ई सभ ततेक सामान्य घटना भए गेल छलैक जे ककरो विशेष ध्यान ओमहर जेबाक प्रश्ने नहि छलैक।

ओहि दिन अमतटोलीमे बेस हल्ला भेलैक।

ओना सामान्यत: ओहि टोलमे हल्ला होइते रहैत छलैक। तेँ ककरो ध्यान ओहि हल्लापर नहि जाइक। पुरवारि गामवाली उत्तरवरिया टोलक एकटा बभना छौड़ाक संगे कतहुँ रातिमे भागि गेल छलैक। ओना काना-फुसी तँ होइते रहैत छलैक। मुदा गप्प एतबा धरि बढ़ि गेल अछि, तकर अन्दाज ककरो नहि रहल होयतैक। भरि दिन टोलमे एही बातक चर्चा होइत रहलैक।

एवम्-प्रकारेण सौंसे गाम पुरनका लोकपर फेर सरकए लागल। मुदा बेचनक आत्मा एहि सभ गप्पसँ दुखी छल। ओकर मोनमे क्रान्तिक आगि सुनगि रहल छल। एम.ए. पास छल अर्थशास्त्र लए कए। आर्थिक परिपेक्ष्यमे गरीब सबहक सामाजिक शोषण ओकरा बड़ पैघ जुलुम लगैत छलैक। मुदा वो लड़त ककरा वास्ते। क्यो ओकर गप्प सुनबाक हेतु तैयार नहि छलैक।

गरीब सभ दाना-दानाक मोहताज छल। ओकरा रोटी चाही से जेना हो। ने ओकरा हेतु कोनो सामाजिक मान्यताक कोनो महत्व छलैक आ ने नैतिकताक ओकरा छुति छलैक। मात्र रोटीटा चाही। मुदा बेचन बुझैत छलैक जे ओ सभ भूखक आवेशमे रोटीमे जहर मिला कए गिरि रहल अछि। समाजक नामी लोक सभ जे प्रतिष्ठाक पात्र मानल जाइत छथि, तिनके लोकनिक आचरण देखि वो क्षुब्ध छल।

मुदा कइये की सकैत छल? असगर वृहस्पतियो झूठ। जे शोषित वर्ग छलैक तकरा लेल धनसन। ओ सभ ओहीमे रमि गेल छल। मालिक सबहक नेकरम करबमे। दूटा रोटी खाएब ओ मालिकक हबस पूरा करब। सभ एकटा सामान्य घटना भए गेल छल। ओकरा सभ हेतु ने देशक आजादी कोनो रंग अनने छल आ ने बेर-बेर होमय बला चुनाव सभ।

अलबत्ता जखन चुनाव होइत छलैक तँ लॉडस्पीकरक आवाजसँ ओसभ एक बेर चौंक जरूर जाइत छल। छोटका जातिक नेता सभ माइन्जन लए कए घरे-घरे राति भरि घुमैक। सभकेँ पाँच-दसटा रूपैया दैक ओसभकेँ नीकसँ सीखाबैक जे कतए भोँटक मोहर मारबाक छैक। साइकिल छाप, तराजू छाप, घोड़ा छाप आदि-आदि। एकटा रोचक प्रसंग होइत छलैक चुनाव ओकरा सभ लेल। मुदा कैकबेर जाधरि अमतटोलीक लोक सभ मतदान खसबए जाइत छलैक ताधरि ओकर सबहक भोँट खसि पड़ल रहैत छलैक। ओ सभ मतदान केन्द्रपर जमा भीड़क तमासा देखि कए आपस भए जाइत छल। कोनो प्रतिकृया नहि।

स्त्रीगण सभ अपनामे गप्प करैत-

गे दाइ, हमरा तँ बड़ डर लगै रहइ। कोना कए मोहर मारितिऐ। कहीं हाकिम पकड़ि लइत।

किछु स्त्रीगण सभ अहिना गप्प-सप्प करैत छलैक कि पैट्रोलींग करैत पुलिसक जीप भीड़क कारणे ओतहि ठाढ़ भए गेलैक। सभ क्यो जान-बेजान भागल। बाह रे मतदाता! बेचन ई सभ देखि रहल छल्‍। ओकर मोन कसमसा रहल छलैक। मुदा की करए। एहिना कहि नहि, कैक बेर चुनाव अयलैक, गेलैक। मुदा ओकरा सबहक लेल धनसन।

एवम्-प्रकारेण सौंसे गाम दू खण्डमे बँटल रहल। शोषक ओ शोषितक बीच एहन सौममस्य देखि बेचन क्षुब्ध छलाह। ओ सोचलाह जे एकबेर फेर प्रयास कएल जाए।

रातिक ९ बाजल रहैक। ओ अमता सबहक घरे-घर घुमि गोर-मिटी कए अपन घर लोटि रहल छलाह। बभनटोली ओ अमतटोलीक बीचमे नान्हिटा कलम छलैक। धराम-धराम। चारू दिसिसँ बेचनक कपारपर लाठी बरसए लागल।

आब बोलो बड़ा चला है हीरो बनने। यह कालेज नहीं है। गाम है।

पता नहि की की बजलै वो। आ परिणामत: बेचन धारासाही भए गेलाह। सौंसे गाममे हल्ला भए गेल। अमता सभ नि:सहाय भए ओहिना अपन-अपन मालिकक काजपर चलि गेल। बेचनक लाश ओहिना एसगर राति भरि पड़ल छलैक। भोर भेने दामोदर बाबू थानामे रपट लिखा अएलाह।

मामला रफादफा भए गेल। ओहि गामक क्रान्तिक स्वर सभ दिनक लेल गुम्म भए गेल।     

२०.९.१९८३

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

सनकल




 


सनकल


नहरिक काते-काते वो चल जाइत छल। फाटल-चीटल नुआसँ देहक लज्जावरण दैत दुनू हाथे दुनू बच्चाकेँ कोरतर दबने एक सुरे बढ़ल जाइत रहए। जेठक ठहा-ठही रौद। चारूकात कतहुँ क्यो नहि। मुदा ओ अपसियाँत भेल बढ़ले जाइत छलै। कि भेलै ओकरा से नहि कहि? प्राय: ओ सासुरसँ रूसि गेल छल। थाकल, ठेहियाएल वो पाकड़िक छाहरि देखि बसि गेल। ओकर आँखिसँ नोर झर-झर खसय लागल। के पोछत ओकर नोर? सुनैत छल जे सासुरमे लोककेँ बड़ सुख होइत छैक। सासु-ससुर, दिओर, दियादिनी सभ छलै ओकरा। मुदा सभ जेना जन्मी दुश्मन रहैक ओकर। ओकर अनेरे खिदांस करब जेना ओकरा सभक धर्म रहैक। खेबो-पीबोक ओकरा कष्टे छलैक। घरबला कमासुत छलैक। मुदा भैयारीमे सभसँ छोट होयबाक कारण परिवारक ऋृण ओकरापर बहुत रहैक।  भाए सभ गरीबीमे छलैक। तेँ जे चारि-कौरी कमाइतो छल से कैठाम बँटि जाइत छलैक। स्त्रीसँ ओकरा प्रेम तँ छलैक मुदा कालक प्रभाव ओकरो नहि छोड़लकै। समय बीतलासँ ओकरा सौन्दर्य-सौष्ठव कम भए गेल छलैक आ ओकर ध्यान क्रमश: कोनो आन स्त्रीपर केन्द्रित होमए लागल छलैक। ओ स्त्री सुन्नरि तँ छलै, संगहि ओकरामे आधुनिकताक पुट सेहो छलैक, आंगिक चमत्कार छलैक आ यौवनक मादकता ओकरा आकर्षणक केन्द्र बना देने छलैक...।

कोना-ने-कोना यैह बात सभ ओकरा कानमे पड़लैक जे ओकरा पचाओल नहि भेलैक। दरिद्राक भार फराक, तंदुरूस्ती घटैत से छलैक आ ओमहर घरबलाक उपेक्षापूर्ण आचरण...।

मोन जेना बेरक्त भए गेल रहैक आ तँए एक दिन वो सासुरसँ काँखक तर बच्चाकेँ दबने भागि गेल।

नैहर धनिक तँ छलै मुदा भाए सबहक राज। बाप मरि गेलै आ माए सेहो बुढ़ भए गेल छलैक। क्यो घरमे मोजर नहि करइ। मुदा बेटीक तँ की नहिरे की सासुरे। आ तँए भागल-भागल जखन वो नैहर पहुँचल तँ चारूकात गामक नव-पुरान लोक ओकरा घेरि लेलक।

किछु सुनलिऐ? फलनमाक बेटी सासुरसँ भागि अयलैक अछि।

इत्यादि-इत्यादि, जकरा जे फुराइक से बाजैत छलै। आर वो हतप्रभ बीच अँगनामे ठाढ़ रहए। के खोंइछ खोलत आ के पटिया ओछा कऽ बैसय कहतैक। अपने घरमे वो पराया बनल छल। क्यो सहारा नहि बुझाइ।

ताबतमे प्राण दाइ कतहुँसँ एलखिन आ कहलखिन-

दूर जाइ जाउ। केहन पाथर भए गेलहुँ अहाँ लोकनि...! बेटी डाटी छइक आइ आयल, काल्हि चल जायत। तकर अनादर किऐक करैत जाइत छी।

कैटा कनियाँ सभ आबि गेल छलैक ओहि आँगनमे। तीनटा ओकर  भाए छलैक। भरि-भरि दिन वो जेठकाकेँ कोरा खेलबैत रहैत छलैक। जाड़क मासमे रौदमे तेल लऽ देह मलैत रहए आ कनेको जहाँ बच्चाकेँ सर्दी होइक तँ जेना ओकर प्राण सन्न दय रहि जाइत रहैक। मुदा आइ चारि-पाँच दिन अयला ओकरा भए गेल छलैक आ ताधरि जेठकासँ टोका-चाली नहि भेलैक।  भाए सभ तीनू तीन ठाम भए गेल छलैक आ माएकेँ तीनू गोटे मिलि कऽ फराक खोड़िस दैत छलैक।

हारि कऽ जखन ओकरा कोनो  भाए नहि पुछलकै तँ माएक संगे रहए लागल।माए तँ माए होइत छैक किने। रहि-रहि कऽ नोरक धार बहाबए लगैत छलैक। उच्च सुनैत छलैक आ तेँ ओकरासँ जे खुलि कऽ गप्पो करैत सेहो नहि होइक। कारण जे ओकर बात कनियाँ सभ सुनबाक हेतु टाट लागल रहैत छलैक। कहबी जे छैक जे गेलहुँ नेपाल आ कर्म गेल संगे। सैह परि ओकरो भेलैक। सासुरमे सासु, ननदि आ दियादिनी तँ नहिरामे ई कनियाँ सभ ओकर जानक जपाल भए गेल छलैक। तैयो माए लऽ कऽ छल। अहिठाम किछु आजादी तँ छलैक।

सैह की हाल अछि ओकरा सन-सन हजारो कन्याक जकरामे सासुर ने नहिरे- क्यो कतहुँ सहारा नहि होइत छैक?”

सैह सभ सोचैत रहए। सोन दाई सोन दाई, सौंसे गाममे सोर रहैत छलैक। गोर नार दप-दप छल वो। सिलाइ-कढ़ाइ सभ गुण ओकरामे छलैक। मुदा गुणसँ की हो? टाकाक विआह होइत छैक। बाप धनिक तँ छलैक मुदा कंजूस छलखिन। बेटीक भाग नहि देखलखिन आ एकटा साधारण लोकसँ ओकर विआह करा देलखिन सौंसे गाम छिया-छिया कहलकै।

सैह हौ, लोचनो बाबू, विचार घोरि कऽ पीबि गेलाह। बेटीक भविष्यक कनियोँ विचार नहि केलाह। पाई तँ अबैत जाइत रहैत छैक।

इत्यादि-इत्यादि। बेटा सबहक भविष्यक चिन्ता जबरस्त छलनि। की होयत की नहि? बेटी तँ दोसर धर चल जाइत छैक। आकरासँ वंशक रक्षा तँ नहि होइत छैक। मुदा बेटा तँ कुलक आधार छैक। सैह सभ हुनकर पुरनका मिजाज सोचैत रहैत छल।

सासुरमे दरिद्रा चरम सीमापर छलैक। सभ दियादिनी मरूआ कूटए। रोटी ठोकए। धनकुट्टी करए। द्विरागमनक पन्द्रह-बीस दिन धरि तँ ओकरा क्यो किछु नहि कहलकै। मुदा कालक्रमे सभक व्यवहार कठोर होइत गेलैक। पटिदारी छलैक किने। चारूकात सभ ओकरे निशाना बनाबए लागल।

गे मैयो भरि दिन बैसल रहतौ जेना फरफेसरक बहु हो..!”

घरबला जाबत काल रहैक ताधरिक क्यो ओकरा किछु नहि कहितै। ओकरा काजपर जाइते फेर वैह रामा वैह खटोली। ओकरा बासन छुआओल गेल आ क्रमश: ओ पार लगा कऽ चौका-बासनक काज करए लागल। मुदा ओहि घरमे तँ पटिदारी छलैक। जेठकी दियादिनी बड़ क्रूड़ छलैक। ओकर इच्छा जे कुटनी-पिसनीमे सेहो पार लगौक। किछु दिनक बाद ओकरा सन्तान हेबाक सम्भावना भेलैक। मुदा ताहिसँ की? भानस-भात, कुटनी-पिसनी आ ताहिपर सँ सासु ओ ससुर तथा दियादिनी सबहक कटाह गप-सप्प।

सुनैत-सुनैत ओकर दम फुलैत छल। मुदा करए की? ककरा कहितै अपन दुख। चारूकात अन्हारे-अन्हार बुझाइक। जकर घरोबला ओकर पक्षमे नहि होइक ताहि स्त्रीगणक भगबाने मालिक होइत छैक आ सैह परि ओकरो छलैक। ओना, नवमे ओकर घरबला बड़ आव-भाव रखलकै। नव-नव कपड़ा-लत्ता सभ चीज आनि-आनि दैत छलैक।

मुदा ओकरा ध्यान जेना क्रमश: हटैत गेलैक। ओ एसगरे हकासलि-पियासलि भरि दिन आ दुपहर राति धरि काज करैत रहैत छल। क्यो एहन नै भेटलैक जकरा अपन मोनक भाव कहितै, जकरा लग मोन भरि कनितै। नैहरसँ कौओ पर्यन्त नहि अयनिहार।

उपाय तँ छलैक। मुदा बोराक आम आ बेरोमे मिथिलामे कोनो अन्तर नहि छैक। साँठि देनहि कल्याण। आ जँ एक बेर ककरो गारामे बान्हि देलियन्हि तँ फेर जन्म भरिक लेल निचैन भए जाउ। धन्यवाद कही मिथिलाक समाजकेँ जे एखनो धरि अपन स्त्री समाजकेँ एतेक निरघीन जीबन वितयबाक हेतु मजबूर कऽ दैछ। 

यैह सभ बात ओकर मोनमे उठैत रहैत छलैक।

ओमहर ओकर  भाए सभ अपनामे भिन्न-भिनाउज कऽ लेलकै आ सभ अपना-अपनीक धन जमा करैत छलैक। सभकेँ कोठा छलैक। जहिया ओ नैहरसँ कनैत विदा भेल छल तहियो ओकर बापकेँ कोठा छलैक। मुदा अखन तँ ओकरा बुझाइत जेना दोसर ठाम आबि गेल हो। चारूकात पोखरिया-पाटन छलैक। सैह, धन एतेक आ मोन कतेक छोट छै। ओकर  भाए सबहक ठीके छै कहबी जे टाक आगू लोक सभ सम्बन्ध बिसरि जाइत अछि।

किछु दिन नैहरमे रहलाक बाद ओकर सासुरक लोक अयलैक। बड़ उपरागा-उपरागी भेलैक। आ ओकरा फेर लोक सासुर लय गेलैक। मुदा एहिबेर तँ ओकर सासु बाढ़निये नेने ओकर स्वागत केलक। एवम्-प्रकारेण आनो-आनो लोकक आचरण ओकरा प्रति कठोर होइत गेलैक। ओकर गहना सभ बेचि देल गेल रहैक आ वो क्रमश: अकान ओ सुन्न भेल जाइत छल।

एक दिन ओकरा ने आगू फुराई आ ने पाछू आ दिमाग बिजलीक करेन्ट जकाँ फेल कऽ गेलैक। ओ फेर भागल नैहर। एहि प्रकारे नैहर-सासुर वो कैबेर केलक। सभठाम ओकरा उपेक्षा भेटैत छलैक। नैहरोसँ ओकर मोन उचटि गेल रहैक। तेँ वो सोचलक जे बरे लग चली। जेना-तेना हराइत-भुतियाइत वो बरक डेरापर पहुँचलतँ जे देखलक से देखि कऽ गुम्मे रहि गेल।

भोरक समय छलैक ओकर घरबला कोनो दोसर स्त्रीक संग एसगर घरमे रहैक। ओ चोट्टे घुमि गेल आ भागल भागल-भागल नहि जानि वो कतए गेल।

एमहर ओकर खोज-पुछारि होमए लगलैक आ कएक दिनक बाद एकटा टीशनपर ओकरा लोक बैसल किछु-किछु रखने फाटल-चिटल कपड़ा पहिरने देखलक। ओ ठहाका भरि कऽ हँसैत छलैक- जेना समस्त समाजपर वो हँसि रहल हो। ओकरा ने कथुक लाज छलैक आ ने धाक। मुदा लोक सभ कहए लगलैक जे वो एकदम सनकि गेल छल। आ ओ एकदम गुम्म भए गेलैक। तकर बाद फेर कहियो ककरोसँ नहि बजलकै।