मैथिलीमे हमर प्रकाशित पोथी

मैथिलीमे हमर प्रकाशित पोथी

शनिवार, 16 दिसंबर 2023

जय महाकाल

 

जय महाकाल

 

कोरोनाक आक्रमणक बाद कैकसाल धरि हमरा लोकनि घरेमे बंद रहलहुँ । कोरोना कम भए गेलाक बादो ओकर भय बनल रहल । ओकरा मोनसँ हटबामे सेहो किछु समय लागल। पछिला साल बहुत  सोच-बिचारक बाद हम दुनू बेकती प्रयागराज गेल रही। ओहिठामसँ चित्रकुट सेहो घुमल रही। प्रयागराजसँ सटले मेजा तहसीलमे एनटीपीसीक कारखानाक आवासीय परिसरमे सेहो हमसभ रहल रही। तकर बादसँ घरेपर छलहुँ। अस्तु,मोन बहुत दिनसँ कतहु घुमबाक हेतु व्यग्र छल। आखिर हमसभ महाकालेश्वर,ओमकारेश्वरक दर्शन करबाक मोन बनेलहुँ । ताहि हेतु इन्दौरमे रहबाक जोगार सरकारी होलीडे होममे भए गेल। रेलक टिकट सेहो कटि गेल। एतेकक बादो चिंता भए जाए जे जाइत-जाइत स्वास्थ्य अनुकूल रहि सकत कि नहि? आखिर ओ दिन आबिए गेल। हमसभ बाइस जुलाइक चारि बजे टैक्सीसँ नईदिल्ली टीसन बिदा भए गेलहुँ । ट्रेन छुटबाक समय पौने सात बजेसँ एकघंटा पहिने हम दुनू बेकती टीसन पहुँचि गेलहुँ ।

टीसनपर पहुँचलाक बाद एकटा कुली ठीक केलहुँ । टीसनपर यदि कुलीकेँ पता लागि जाइत छैक जे यात्री एसीफस्ट कोचसँ जेताह तँ ओकर दर दुगुन्ना तँ भइए जाइत छैक । तथापि दुसए टाकामे हमरसभक बात बनि गेल। आगू-आगू सामानसभक संग कुली आ तकर पाछू-पाछू हम दुनू बेकती बिदा भेलहुँ । अजमेरी द्वारि दिसक एस्कलेटरपर पहिने ओ आ तकरबाद हमसभ पैर रखलहुँ। देखिते-देखिते कुली कतएसँ कतए चलि गेल। हम आ श्रीमतीजी संगे रही। एस्कलेटरपर हुनकर पैर ठीकसँ नहि बैसि सकलनि। परिणाम भेल जे आधासँ ऊपर गेलाक बाद हुनकर पैर पिछड़ि गेलनि। हम अकचका गेलहुँ । ओ एस्कलेटरपर भसिआइत बुझेलीह। रच्छ भेल जे कहुना कए ओ ओकर रेलींगकेँ थामि लेलीह। यदि से नहि होइत तँ ओ पाछू भरे खसितथि आ पता नहि की होइत? साइत एकटा बड़का ग्रहसँ सस्तेमे छुटकारा भए गेल। हमसभ प्लेटफार्म नंबर आठपर पहुँचि गेलहुँ ।

ट्रेन प्लेटफार्मपर लागल छल । हमरा सामनेमे एसी वनक कोच संख्या एचवन छल। मुदा अखन ओहिमे पैसबाक अनुमति नहि छलैक। ओकर सफाइ चलि रहल छलैक। बाहर बहुत गर्मी छलैक। तेँ हम प्रयास केलहुँ जे जल्दीसँ ओहि डिब्बामे चलि जाइ। ताहि हेतु ओहिमे कार्यरत एकटा कर्मचारीकेँ आग्रह केलिऐक । ओ सहमति दए देलक। हमदुनू बेकती ट्रेनक ओहि डिब्बामे पैसि गेलहुँ आ अपनसीटपर चलिओ गेलहुँ । मुदा ताबते आरो यात्रीसभ सेहो ओहि डिब्बामे पैसि जेबाक दुराग्रह करए लागल। ओहिठाम कार्यरत कर्मचारीसभ से मना कए देलकैक। तकर बाद हल्ला शुरु भए गेल।

अहाँ हिनकासभकेँ तँ जाए देलिअनि। हमसभ किएक नहि जाएब? हमरो तँ टिकट अछि।

आखिर एकटा कर्मचारी हमरा कहलक-

अहाँसभ बाहर चलि जाउ । दोसर यात्रीसभ परेसानी कए रहल अछि। जखन डिब्बा चलबाक हेतु तैयार भए जेतैक तखन फेर चलि आएब।

एहनो कतहु भेलेक अछि? हमसभ बूढ़ छी। बाहर दम फुलि रहल छल। तोरेसभक कहलाक बाद हमसभ एहिठाम अएलहुँ अछि। हमरासभकेँ टिकट अछि,एही डिब्बामे जेबाक अछि,तखन एतए बैसिओ गेल छी,फेर बाहर निकलबाक कोन बात भेलैक?”

मुदा ओ सभ अड़ि गेल। तखन हमहूँ धमकी देलिऐक।

बेस तँ हम रेलमंत्रीकेँ सिकाइत करैत छी। आखिर हमरालोकनि वरिष्ठ नागरिक छी। उचित टिकट लेने छी आ एही ट्रेनसँ एही डिब्बामे जेबोक अछि। तखन किएक उतरि जाउ?”

रेलमंत्रीक नाम सुनितहि ओसभ सकदम भए गेल। हमरासभक आगूक परदा घिचि देलक। हमहुँसभ निचेनसँ बैसि गेलहुँ ।

आखिर ट्रेनक डिब्बा खुजल। यात्रीसभ धराधर अपन-अपन सीटपर बैसि गेलाह। हमसभ तँ पहिनहिसँ बैसिए गेल रही। हमरा कोच संख्या एचवनमे शायिका संख्या सात आ नव रहए। दुनू निचुलके सीट छल। ऊपरक एकटा यात्री आबि गेल रहथि। दोसर यात्री मथुरासँ ट्रेन पकड़ताह,से बात टीटी बजलाह।

 नियत समय सात बाजि कए पन्द्रह मिनटपर ट्रेन खुजल। हमसभ बहुत प्रसन्न रही। ट्रेन थोड़बे कालमे अपन गतिसँ चलि रहल छल। टीटी अएलाह। हमरसभक नाम पुछलथि । बस एतबे। किछु आर नहि । थोड़े कालक बाद भोजनक आदेश देल गेल। एकटा यात्री तँ आनलाइन भोजनक आदेश देने रहथि। तेँ हुनकर भोजन मथुरामे ट्रेनमे आबि सकलनि। ताबे तँ हमसभ भोजन कए निश्चिन्त भए गेल रही। रेल भोजनालयसँ  देल गेल हमर सभक भोजन बहुत साधारण छल। हमरा अफसोच होअए जे हमहूँ किएक ने आनलाइन भोजनक जोगार कए लेलहुँ?

राति भरि चललाक बाद ट्रेन निश्चित समयसँ एक घंटा पहिने पौने छओ बजे इन्दौर पहुँचि गेल। पन्द्रह मिनटमे आटोसँ हमसभ केन्द्र सरकारक होलीडे होम पहुँचि गेलहुँ। ओहिठाम मुख्यद्वारिपर कार्यरत चौकीदार हमरासभकेँ भीतर आबए देलक। स्वागत कक्षमे केओ नहि छल। हम ओकरा पुछलिऐक-

एहिठाम केओ आदमी नहि अछि की?”

ओ उत्तर दैत अछि-

हम अहाँकेँ आदमी नहि बुझाइत छी की?”

ओकरा आब की कहितिऐक? हमरा चुप देखि ओ बाजल-

सात बजे मनेजर अएताह। अहाँ चाही तँ हुनका मोबाइलपर फोन कए दिअनु।

हुनकर मोबाइल नंबर आ नाम एकटा कागजपर लिखि कए स्वागत कक्षमे साटि देल गल छल। हम हुनका ओहि मोबाइल नंबरपर फोन केलिअनि । ओहो ओएह बात कहलाह-

सात बजे धरि अहाँसभ ओतहि बैसू। तकर बादे हम आबि सकब। ओना कोठरी साढ़ेदस बजेसँ पहिने नहि भेटि सकत। कारण ओ नओ बजे धरि खाली हेतैक आ तकर बाद ओकर सफाइ कएल जाएत।

हम सामनेमे राखल सोफापर बैसि गेलहुँ । ताबतेमे एकटा आर परिवार पहुँचि गेलाह। ओहोसभ दिल्लीएसँ आबि रहल छलाह। थोड़ेकाल हुनकासभसँ गप्प-सप्प केलहुँ । नित्यकर्मसँ निवृत भेलहुँ। ताबतमे कैंटिन खुजि गेलैक। हमसभ भोरुका चाह दू-दू कपक पीलहुँ । चाह पीलाक बाद मोन कनीक आश्वस्त भेल। ताबे होलीडे होमक मनेजर आबि गेल रहथि। हुनकेसँ एकटा ट्रैभेल एजेंटक मोबाइल नंबर लेलहुँ। हम ओकरा फोन करैत छी-

हमरा लोकनिकेँ दस बजेक आसपास महाकालेश्वर, उज्जैन जेबाक अछि। टैक्सीक जोगार भए सकत की?”

किएक ने।

कतेक टाका लगतैक?”

एकतीस सए । ओहिमे गेनाइ, ओहिठाम प्रमुख स्थानसभ घुमनाइ आ वापस इन्दौर आएब सामिल अछि।

हम कहलिऐक-

ठीक छैक। अहाँ टैक्सी बलाकेँ पठाउ।

हमसभ एहि बातसँ बहुत प्रसन्न रही जे एतेक आसानीसँ टैक्सीक जोगार भए गेल। थोड़बे कालक बाद टैक्सी बलाक फोन आएल । ओ दस बजे पहुँचि जाएत । हम सभ सोचलहुँ जे उज्जैन पहुँचिए कए छिप्रा नदीमे स्नान करब।  दस बाजहि बला छल कि मनेजर हमरासभकेँ कोठरी संख्या १०१मे पहुँचा देलाह। हमसभ अपन सामान ओतए राखि बाहर निकलले छलहुँ कि टैक्सी बला सेहो पहुँचि गेल। एकटा झोरामे धोती,कुरता,अंगपोछा,सारी आदि राखि हमसभ टैक्सीमे बैसि गेलहुँ । टैक्सी अपन गंतव्य दिस बिदा भेल। वाहनचालक बहुत मधुर स्वरमे गबैत हनुमान चालीसा बजा रहल छलाह। बाहर मौसम बहुत सुखद छल। मेघ लागल छल। कतहु कोनो परेसानी नहि छल। टैक्सी तीव्र गतिसँ अपन गंतव्य महाकालक दरबार दिस बढ़ि रहल छल ।

महाकाल मंदिर

हमसभ बारह बजेक आसपास उज्जैन पहुँचि गेलहुँ। सभसँ पहिने  छिप्रा नदीक घाटपर पहुँचलहुँ। चप्पल कारेमे राखि देने रहिऐक । कारसँ उतरि नदीक घाट धरि जेबामे बहुत कष्ट भेल कारण  सौंसे पातर-पातर पाथरक टुकड़ीसभ पसरल छल जाहिपर पैर रखितहि गड़ैत छल । छिप्रा नदीक पानि तँ जुड़सीतलक कादोसँ बेसी मैल छल। ओहि पानिमे नहा कए की शुद्ध होएब? अपना मोने सोचलहुँ। तथापि हम दुनू बेकती बेरा बेरी पानिमे कहुना कए डुबकी लगओलहुँ । ओहिठाम आसपासमे बड़ी-बड़ीटा मरल माछसभ  पड़ल छल जकर दुर्गन्धसँ ओतए रहब बहुत मोसकिल बुझाइत छल। संभवतः नदीमे बेसी पानि बढ़ि गेलापर माछसभ बाहर  खसि पड़ल आ ओतहि मरि गेल। जल्दीसँ स्नान कए हमसभ कार लग पहुँचलहुँ । लगीचेमे महाकाल भैरवक मंदिर छल। हमसभ ओतए भैरवक दर्शन करबाक हेतु पाँतिमे लागि गेलहुँ। मुदा ओ पाँति की छल बुझू लोकसभ जिलेबी जकाँ घुमि रहल छल। पाँच सएसँ बेसीए लोक ओतए पाँतिमे लागल छलाह। बहुत नहू-नहू लोक आगू बढ़ैत छल। थोड़े-थोड़े कालपर सेहो बंद भए जाइत छल। हालति देखि हमरा तँ बहुत चिंता होइत छल।

कहि नहि कखन धरि दर्शन होएत?”-हम हुनका बेर-बेर कहिअनि।

 महाकालेश्वरक दर्शन सेहो करबाक अछि। पता नहि कोना की होएत? एनामे केना दर्शन होएत?”-हम दुनू बेकती आपसमे गप्प करैत रही। मुदा आब कएले की जा सकैत छल? पाँतिक बीचसँ वापसो होएब संभव नहि छल। हमरा सभकें   मैथिलीमे गप्प करैत सुनि सामनेमे भेटि गेलाह समस्तीपुरक मैथिल परिवार। ई थिक अपन भाषाक चमत्कार ! हुनकासँ  गप्प कए मोन कनी हल्लुक तँ भेबे कएल । आब हमसभ मुख्यमंदिरपर आबि गेल रही। लगीचेमे मुर्दा धह- धह जरि रहल छल। सौंसे ओकर धुआं पसरि रहल छल। भक्त लोकनिक जयकारा सेहो चलिए रहल छल,,,। जय श्रीकाल भैरव,,,! संभवतः ई दृश्य मोनमे ज्ञान उत्पन्न कए सकैत छल। व्यर्थक लालसासँ मोनमे उचाट उत्पन्न कए सकैत छल। मुदा से होइत कहाँ अछि?  लोक ओतहु भैरव बाबासँ अपन अनेक कामनाक प्राप्तिक हेतु प्रार्थना करैत रहैत अछि।

लगभग दू घंटा पाँतिमे घुमैत रहि गेलाक बाद हमसभ भैरव मंदिरक गर्भगृह लग पहुँचलहुँ । मंदिरमे भैरवक आगूमे मोसकिलसँ एकमिनट समय भेटल। मोने-मोन हुनका प्रणाम कए आगू बढ़ि गेलहुँ । ताबे हमसभ बहुत थाकि गेल रही। वर्षासे जोर पकड़ि लेने छल। ओतए ठाढ़ प्रहरीकेँ हम मदति करबाक गोहार लगेलहुँ । हमरासभपर ओ दया केलक । ओ हमरासभकेँ पाछू बाटे निकालि देलक जाहिसँ वापसीमे फेरसँ पाँतिमे नहि लागए पड़ल। मुदा बाहर निकलितहि वर्षामे फँसि गेलहुँ । ओहिठामसँ जूता स्टैंड धरि जाएब पराभव भए गेल छल। कहुना कए भिजैत-तितैत हमसभ जूता स्टैंड पहुँचलहुँ । अपन-अपन जूता-चप्पल लेलहुँ । ओहिठामसँ भिजिते आगू बढ़ि वाहनचालककेँ ताकि रहल छलहुँ कि छत्ता लेने ओ देखाएल । मुदा ताबे तँ हमसभ नीकसँ भिजि गेल रही। ओही हालतिमे हमसभ टैक्सीमे बैसि महाकाल मंदिर दिस बढ़ि गेलहुँ ।

महाकालक नित्य भोरे ब्राह्मीमुहुर्तमे भस्म आरती कएल जाइत छनि। पहिने ऐहि लेल ओहिराति सभसँ पहिने जरल मुर्दाक भस्मक उपयोग होइत छल। मुदा आब गोइठासँ बनाओल गेल भस्मसँ भस्म आरती होइत अछि। एकरा देखबाक हेतु आननलाइन बुकिंग सेहो होइत अछि । मुदा साओन मासमे दर्शनार्थीक भीड़केँ देखैत ई सुविधा बंद कए देल गेल अछि। अस्तु, महाकालक दर्शनक हेतु हम शीघ्रदर्शनक आनलाइन टिकट कीनने रही। मंदिर परिसरमे द्वारि संख्या चारिसँ हमरासभकेँ एहि टिकटक संगे आगू जेबाक छल। हमसभ एही द्वारिसँ आगू बढ़ैत छी। कतहु कोनो परेसानी नहि,कोनो पाँति नहि । हमसभ धराधर मंदिरमे भीतर धरि प्रवेश कए गेलहुँ। बहुत नीकसँ महाकाल महादेवक दर्शन केलहुँ । तकर बाद मंदिरसँ बाहर अएलाक बाद हमसभ प्रसाद कीनबाक हेतु द्वारि संख्या एक लग बनल खिड़कीपर गेलहुँ । सए रुपयाक दरसँ यथेष्ट लड्डूक पैकेट कीनलहुँ । हमसभ तकर बाद अपन वाहनमे वापस जेबाक दिसामे बढ़लहुँ । एतेक आसानीसँ दर्शन भए जाएत से नहि सोचने रही। जहिना भैरव मंदिरमे भीड़ छल तहिना एहिठाम एकदम सपाट रस्ता। लगैत अछि महाकाल हमरालोकनिपर विशेष दया केलनि। संभवतः शीघ्रदर्शनक टिकट रहबाक कारण परेसानीसँ बचलहुँ । महाकालक दर्शनक बाद हमसभ बहुत संतुष्ट छलहुँ। आब आर कतहु जेबाक प्रयोजन नहि बुझा रहल छल । ओना वाहनचालक आर मंदिरसभक चर्च केलक । मुदा हमसभ आब कतहु नहि गलहुँ । सोझे वापसी यात्रा हेतु टैक्सीमे बैसि गेलहुँ ।

इन्दौर

हमसभ अपन यात्राक मुख्यालय इन्दौर बनओने रही। कतहु जाउ,किछु करू घुरि कए वापस तँ घरे आएब। संयोगसँ एहि यात्रामे हमरा सरकारी होलीडे होममे जगह भेटि गेल छल जे सभ तरहेँ सुखद छल । ओतए सभ आवश्यक सुविधा छल। भोजन,जलखै,चाहक ओरिआन तँ छलहे। तेँ हमसभ वापस ओहिठाम आबि गेलाक बाद बहुत आराममे रहैत छलहुँ । जेना अपने घरमे होइ। आइ हमरा लोकनिक इन्दौरमे दोसर दिन छल। सोम दिन हेबाक कारण शिव मंदिरसभमे अथाह भीड़ हेबाक संभावना छल। तेँ हमसभ आइ आनठाम नहि जा कए स्थानीय भ्रमण करबाक निर्णय केलहुँ । भोरे जलखै चाहक बाद हमसभ ओही टैक्सीसँ नगर भ्रमण करए बिदा भेलहुँ ।

इन्दौर सहर पछिला कैकसालसँ सफाइक मामिलामे  संपूर्ण देशमे प्रथम आबि रहल अछि। एहू साल सएह भेलैक । जखन इन्दौर सहरमे घुमि रहल छलहुँ तँ व्यवहारिक रूपसँ प्रत्यक्ष अनुभव भेल जे वस्तुतः ई सहर अतिशय स्वच्छ अछि । सदिखन सफाइ करबाक हेतु तत्पर कर्मचारीसभ। स्थानीय लोकोसभ ओहिना कान ठाढ़ केने । रोडपर तरकारीक दोकान बला सभ जाइत काल एक-एकटा खढ़ उठाबैत देखलहुँ । तकर बाद ओहि स्थानकेँ बाढ़निसँ साफ करैत देखलहुँ । ओ जखन दोकान बंद कए चलि तँ सड़क चिक्कन ,चमचम करैत छल,ओहिना जेना भोरमे रहल होएत। कतहु केओ सड़कपर अकर-बकर वस्तु नहि फेकैत। कोना ने औअलि आओत ई सहर?मोनमे होअए जे आन-आन सहरमे ई गुण लोकमे किएक ने अबैत छनि?

इन्दौर सहर भ्रमणक क्रममे हमसभ सभसँ पहिने खजराना गणेश मंदिर पहुँचलहुँ । ई मंदिर अहिल्याबाई होल्कर बनओने छलीह। मुख्य मंदिरमे गणेशजीक भव्य प्रतिमा स्थापित अछि। लगपासक छोट-छोट मंदिरमे आन-आन देवतासभक मूर्ति स्थापित छनि। कहल जाइत अछि जे  एहिठाम लोकसभ जे किछु अभिलाषाक कामना करैत छथि से प्राप्त होइत छनि। मंदिरमे दर्शन केलाक बाद हमसभ थोड़ेकाल ओतहि बैसलहुँ । ओहिठामसँ हमसभ पहुँचलहुँ अन्नपूर्णा मंदिर । एहि मंदिरमे अन्नपूर्णाक मूर्ति स्थापित अछि। चारूकात अतिशय स्वच्छ परिसरक बीचमे चम-चम करैत अन्नपूर्णाक मंदिर देखैत बनैत छल । हमसभ बहुत नीकसँ दर्शन केलहुँ । लगैत छल जेना एकटा बहुत पवित्रस्थानमे पहुँचि गेल छी।

सहरमे घुमैत-घुमैत हमसभ राजवाड़ा पहुँचलहुँ । राजवाड़ा महल मध्य प्रदेश राज्यक इन्दौर शहरमे अवस्थित एक राजमहल छी । ई महल लगभग 200 साल पहिने बनल छल । एहि महलक वास्तुकला फ्रेंच, मराठा आ मुगल शैलीक अनेक रूप आ वास्तुकला शैलीक मिश्रण अछि । सात मंजिला एहि भवन मे निचला तीन मंजिला संगमरमरक बनल छल । ऊपरका चारि मंजिला सागौनक लकड़ीक सहायतासँ बनल छल । राजबादा ९१८ फीट लंबा आ २३२ फीट चौड़ा एहि भवनक प्रवेश द्वार ६.७० मीटर ऊँच अछि, जकर संरचना हिन्दू शैलीक महल जकाँ अछि । राजवाड़ा अपन इतिहास मे तीन बेर जरि चुकल अछि आ 1984 मे अंतिम बेर लागल आगि मे एकरा भारी नुकसान पहुंचल छल। आइ मात्र बाहरी भाग अक्षुण्ण अछि। ओहि महलमे घुमलाक बाद बाहर आबि हमसभ किछु फोटो घिचलहुँ । कैकबेर ओहि विशाल महलकेँ देखैत रहलहुँ आ तकर बाद आगू बढ़ि गेलहुँ ।

इन्दौर गेलहुँ आ ओहिठामक छप्पन दोकानमे जा कए मनपसिंद हलझप्पी नहि केलहुँ तँ की केलहुँ? इन्दौरक   पोहा जिलेबी,पानी पुरी,दही पुरी,खोपरा पट्टी,गोंदक लड्डु,कचौरी आ पान बहुत प्रसिद्ध अछि। पोहा जिलेबी तँ भोरे-भोर सहरमे सभठाम भेटि जाएत । हमसभ दुपहरिआमे छप्पन दोकान लग पहुँचलहुँ । एकपाँतिसँ दुनूकात छोट-छोट दोकानसभमे अनेक प्रकारक भोजन सामग्रीसभ उपलब्ध छल। हमसभ थोड़ बहुत खेलहुँ । तकर बाद आगू बढ़ि गेलहुँ। तकर बाद हमसभ पहाड़ीपर बनल जैनसभक प्रसिद्ध तीर्थस्थल गोमतगिरि गेलहुँ। ओतए चौबीसो तीर्थांकरकेँ समर्पित चौबीसटा संगमरमरक मंदिर अछि। गोमतेश्वरक एक्कैस फीट उँच मूर्ति सेहो आकर्षणक केन्द्र अछि। रविदिन कए ओहिठाम आगन्तुक लोकनिकेँ दालबाटी खेबाक अवसर भेटैत छनि। साँझमे ओहि पहाड़ीपरसँ सूर्यास्तक दृश्य बहुत मनोरम होइत अछि। परंतु,हमसभ ओ दृश्य नहि देखि सकलहुँ ।

अहिल्याबाई होल्कर इन्दौरक नामसँ जुड़ल छथि। ओ बहुत धार्मिक प्रबृतिक छलीह । ओ संपूर्ण भारतमे प्रसिद्ध मंदिरसभक जीर्णोद्धार करओलीह। नव मंदिर,धर्मशाला सभक स्थापना सेहो करओलीह। एहिमे काशीविश्वनाथ मंदिर,वाराणसी,सरयू घाटपर निर्मित राम मंदिर,बद्रीनाथ,द्वारकाधीस,केदारनाथ,ओंकारेश्वर,आ रामेश्वरममे  मंदिर,धर्मशाला आदिक स्थापना करबओलथि।

ओमकारेश्वर मंदिर

सोमदिन इन्दौर भ्रमणक बाद मंगलदिन हमसभ भोरे ओमकारेश्वर महादेवक दर्शनक हेतु बिदा भेलहुँ । मंगल दिन रहबाक कारण हम दुनू बेकती उपासमे रही। तेँ की? मोनमे ततेक उत्साह छल जे उपासक कारण कनिको परेसानी नहि बुझाएल । रस्तामे हमसभ एकठाम चाह जरूर पीलहुँ । तकर बाद वाहनचालक चलबैत रहल अपन वाहन आ हमसभ लैत रहलहुँ ओहि सुंदर मौसममे पहाड़ी यात्राक आनन्द। आकासमे मेघ उमरि-घुमरि रहल छल । हबा से मंद-मंद बहि रहल छल। दुनू दिस पहाड़ी आ बीच-बीचमे बोल बम करैत कमरथुआसभ आगू बढ़ैत जा रहल छल। एहन सुखद यात्रा होएत तकरा हमर कनिको अनुमान नहि छल। अपितु,हमरा कनी-मनी डरो होइत रहए। पता नहि पहाड़ी सड़कपर वाहन कोना चलत,आदि,आदि । मुदा से सभ किछु नहि छल। लागि रहल छल जेना चारूकातसँ आनन्दक वर्षा भए रहल अछि। एहि तरहेँ लगातार दू घंटा वाहन चलैत रहलाक बाद पहुँचि गेल ओमकारेश्वर। 

सभसँ पहिने हमसभ नर्मदा नदीक घाटपर गेलहुँ । नदीमे कातेमे बेरा-बेरी स्नान केलहुँ । किछु फोटो सेहो खिचलहुँ। तकर बाद ओमकारेश्वर मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । हमरासभकेँ शीघ्र दर्शन करबाक टिकट छल। तथापि मंदिरक द्वारिएपर एकटा पंडा प्रस्ताव देलाह-

हमरा संगे चलू । हम नीकसँ महादेवक गर्भगृहमे दर्शन करा देब। महादेवपर जलो ढरबा देब।

मुदा हमरासभक लगमे तँ शीघ्रदर्शनक टिकट अछि?”

तेँ की? ओहिसँ अहाँ महादेवपर जल थोड़े ढारि सकब। हम तँ अहाँकेँ जलाभिषेक करा देब। गर्भगृहमे तुरंत पहुँचा देब।

हमरा कतेक भुगतान करए पड़त?”

एगारह सए।

हम एतेक टाका नहि देब।

ओहि पंडासँ बहुत मोसकिलसँ जान बचा कए हमसभ आगू बढ़लहुँ । थोड़बे फटकी गेल होएब कि एकटा युवक पंडा फेर ओहने प्रस्ताव लए उपस्थित भए गेलाह । हम हुनका कहलिअनि

पाँचसए टाका दए सकैत छी। एहिसँ बेसी किछु नहि।

ओ तैयार भए गेलाह । तकर बाद ओ आगू-आगू आ हमसभ पाछू-पाछू जा रहल छलहुँ । हमर श्रीमतीजीक हाथमे शीघ्रदर्शन बला पर्ची छलनि। से देखि कए एकटा सेवादार ओहि युवक पंडाकेँ टोकलकैक-

हिनकासभकेँ तँ शीघ्र दर्शनक टिकट छनि।

हाथसँ इसार दैत ओ आगू बाजल-

हिनकासभकेँ ओहि बाटे लए जाहुन।

तकर बाद पंडा रस्ता बदललक। हमहूँसभ ओकर पाछू-पाछू चलैत रहलहुँ । बहुत संकीर्ण सीढ़ीनुमा रस्तामे लोक ठसल छल। मोसकिलसँ पाँच मीटर आगू मंदिरमे प्रवेश करबाक द्वारि छल। मुदा ओतए पहुँचबे पराभव लागि रहल छल। ऊपरसँ लोकसभ बजैक जे बारह बजेक बाद  एक घंटाक हेतु मंदिर बंद भए जाएत । हमसभ एहि बातसँ आर चिंतित रही । मुदा से नहि भेल। थोड़बे कालक धक्कम-धुक्कीक बाद हमसभ ओंकारेश्वर मंदिरक द्वारिसँ भीतर पैसि गेलहुँ । पैसि तँ गेलहुँ,मुदा आगू-पाछू लोकसभ लगैत छल पिचि देत। दर्शनक तँ भगवाने मालिक । आखिर जेना-तेना ओ पंडा लोटामे जल लेने आगू-आगू आ हमसभ ओकर पाछू-पाछु महादेवक आगूमे पहुँचि गेलहुँ। बेरा-बेरी महादेवपर जल ढारलहुँ , प्रणाम केलहुँ  आ आगू बढ़ि गेलहुँ।

महादेवक दर्शन कए हमसभ बाहर भेले छलहुँ कि पंडा हमरा हमर हाथ पकड़ि कए किछु मंत्र पढ़ए लगलाह। जाबे हम किछु सतर्क होइतहुँ ताबे तँ ओ बहुत आगू बढ़ि गेल रहथि। हम पुछलिअनि-

ई की भए रहल अछि?”

अन्नदान । कमसँ कम एगारह सएक दान ।

फेर ओएह बात? हम तँ अहाँकेँ पाँच सए गछने छी। बस ओतबे देब।

श्रीमतीजीक इसारा पाबि हम एक सए आर हुनका दए फारकत भेलहुँ । जानमे जान आएल। दुनूगोटे कनिक हटि कए सुस्तेलहुँ । किछु फोटो सेहो खिचल गेल। तकर बाद आगू बढ़ि गेलहुँ।

अफसोच आ दुखक बात अछि जे एतेक पैघ धर्मस्थानमे एहन कुव्यवस्था किएक अछि?पंडासभ एना किएक करैत अछि जे दर्शानार्थीसभ हतप्रभ रहि जाइत छथि। संबंधित व्यवस्थापकलोकनिकेँ एहिपर ध्यान देबाक प्रयोजन अछि। ओमकारेश्वर महादेव एकादश ज्योतिरलिंगमे मानल जाइत छथि। कतए कतएसँ लोक हुनकर दर्शन करए हबैत छथि। लोकसभक श्रद्धामे कोनो कमी नहि अछि। सोमदिनक तँ ओहिठाम जाएब आ दर्शन करब बहुत मोसकिल काज अछि । मुदा जाहि स्तरक व्यवस्था हेबाक चाही से नहि बुझाएल। महाकालेश्वर मंदिरमे तँ एकर कैक गुणा बेसी नीक व्यवस्था देखबामे आएल। ई एकटा महज संयोग छल कि एहिना चलैत अछि से तँ नहि कहल जा सकैत अछि। हमसभ एहि बातसँ बहुत प्रसन्न रही जे दू दिनक भीतर दूटा प्रसिद्ध ज्योतिरलिंग महादेवक दर्शन भए सकल। कतेको सालसँ सोचैत छलहुँ,से सपना पूर्ण भेल। निश्चित रूपसँ ई महादेवक कृपेसँ संभव भेल ।

माहेश्वर

ओंकारेश्वर महादेवक दर्शनक बाद हमसभ माहेश्वर बिदा भेलहुँ । अहिल्याबाइ होल्करक समयमे इन्दौरक शासन माहेश्वरसँ कएल गेल छल । हमसभ माहेश्वरमे अहिल्याबाइक महल आ लगपासमे बनल मंदिरसभ देखलहुँ । हुनकर महलकक भूतलपर ओसाराक ठीक सामने नर्मदा नदी छथि। कहल जाइत अछि जे अहिल्याबाई नित्य राज-काज शुरु करबासँ पहिने ओतए ठाढ़ भए नर्मदाक दर्शन करैत छलीह । तकर बादे ओ राजकाजमे हाथ लगाबथि। कनीके हटि कए अखंड दीप जरैत अछि। कहल जाइत अछि जे ओ एगारहटा दीप पाँच हजार साल सँ जरि रहल अछि। दीप जरि तँ रहल छल अबस्से मुदा पाँच हजार सालक बातक पुष्टि के करत?

माण्डू(माण्डवगढ़)

हमसभ  महाकालक दर्शन कए लेने रही। ओंकारेश्वर महादेवक दर्शन सेहो कए लेने रही । लौटतीमे माहेश्वर सेहो भए आएल रही। इन्दौर सहरक प्रमुख-प्रमुख स्थान सेहो घुमि लेने रही। हमरासभ लग आबो किछु समय छल। वापसी रेल टिकट २८ जुलाइक छल। सत्ताइस जुलाइक हमसभ माण्डू जेबाक निर्णय केलहुँ । ओही टैक्सीबलासँ गप्प पक्का कए लेलहुँ । सत्ताइस जुलाइक भोरे साढ़े सात बजे हमसभ माण्डू बिदा भए गेलहुँ । माण्डु इन्दौरसँ सतानबे किलोमीटर फटकी अछि। ई सहर पहाड़ीपर अवस्थित अछि। पर्यटकलोकनि ओहिठामक वर्षाक आनन्द लेबाक हेतु बहुत उत्सुक रहैत छथि। माण्डू  धार जिलाक वर्तमान मण्डव क्षेत्रमे एक प्राचीन सहर अछि । ई पश्चिमी मध्य प्रदेशक मालवा आ निमार क्षेत्रमे अवस्थित अछि । एकर चारू कात पाथरक देबाल अछि जाहि पर दरवाजा (गेटवे) बिंदीदार अछि । इन्दौरसँ माण्डुक रस्ता बहुत नीक अछि। बादमे किछु पहाड़ी रस्ता भेटल जतए टेक्सीकेँ कनी सावधानीसँ चलेबाक प्रयोजन रहैत अछि। लगभग साढ़ेदस बजे हमसभ माण्डु पहुँचि गेल रही। इन्दौरसँ बिना जलखै केने हमसभ बिदा भए गेल रही। तेँ माण्डु पहुँचि हमसभ सभसँ पहिने किछु जलखै केलहुँ । तकर बाद घुमए बिदा भेलहुँ । संयोगसँ एकटा बहुत नीक मार्गदर्शक(गाइड) भेटि गेलथि। एक हजार रुपयामे ओ सौंसे घुमा देताह ,से कहलथि।

रानी रुपमती आ सुल्तान बाज बहादुरक दुखान्त प्रेमकथा

सुल्तान बाज बहादुर माण्डू क अंतिम स्वतंत्र शासक छलाह | एकबेर जखन ओ सिकार करए निकलल रहथि तँ नर्मदा नदीक कातमे एकटा वालिकाकेँ अपन संगीसभक संगे खेलाइत देखलथि। ओ बहुत मधुर स्वरमे गाबि रहल छलि। बाज बहादुर स्वयं संगीतप्रेमी छलाह। ओ ओहि वालिकाक मधुर संगीतसँ ततेक प्रभावित भेलाह जे ओकरासँ बिआह करबाक प्रस्ताव दए देलनि। ओ वालिका एहि सर्तक संग बिआह करबाक हेतु तैयार भए गेलि जे ओ कोनो एहन महलमे रहतीह जतएसँ अपन प्रिय नदी नर्मदाक नित्य दर्शन कए सकथि। तकर बाद हुनकर बिआह सुल्तान बाज बहादुर संगे भेलनि। तकर बादे रेवाकुण्डक निर्माण भेल छल। रानी नित्य रानीरुपमती मंडपक नामसँ बादमे प्रख्यात पहाड़ीक चोटीपर बनल मूलतःसेनाक अवलोकन चौकीसँ बाज बहादुरक महल आ नर्मदा नदीक दर्शन करैत छलीह।

हमसभ जखन रानीरूपमतीमंडप दिस जाइत रही तखनहु रेवाकुण्ड लग दूटा मुर्दा जरि रहल छल। अचानक वर्षा शुरु भए गेल। हमसभ थोड़ेकाल ओहीमे रहि गेलहुँ । वर्षा समाप्त भेलाक बाद हमसभ गाइडक संगे निचाँ उतरलहुँ। वर्षाक समयमे ओहिठामक मौसम बहुत सुखद भए गेल छल। आकास जेना धुआँ सँ भरि गेल होइक। कहल जाइत अछि जे कैकबेर खराप मौसममे रानी रूपमती नर्मदा दर्शन नहि कए पाबथि । माण्डुक मौसम बेसी काल तेहन रहैत छल जे धुंधक कारण रानी नर्मदा नदीक दर्शन नहि कए पाबथि। तकर विकल्पक रूपमे  रेवाकुण्डेक दर्शनसँ ओहि संकल्पक पूर्ति करथि।

रानी रुपमती आ सुल्तान बाज बहादुरक प्रेमकथा अकबरक माण्डुपर आक्रमणक कारण संकटमे पड़ि गेल। अकबर अधम खानकेँ माण्डू  पर कब्जा करबाक लेल पठा देलनि | सुल्तान बाज बहादुर मुगल सेनाक मोकाबिला नहि कए सकलाह आ युद्धमे हारि गेलाह। अधम खान रानी रूपमतीकेँ कब्जा करए चाहलक । रानी एहि परिस्थितिकेँ बूझि आत्महत्या कए लेलनि। एहि तरहेँ सुल्तान बाज बहादुर आ रानी रूपमतीक प्रेमकथाक दुखद अंत भए गेल ।

हिन्दोला महल

हिन्दोला महल या ‘स्विंगिंग पैलेस’ ऐतिहासिक खंडहर माण्डू  किलाक उत्तरी भागमे रॉयल एन्क्लेवक हिस्सा छैक । संभवतः ई 15वीं शताब्दीक अंतक छैक आ सुल्तान घियाथ शाह (1469-1500) क शासनकालमे एक दर्शक हॉलक रूपमे बनाओल गेल रहैक, जे अपन भोगवादी जीवनशैलीक लेल प्रसिद्ध छल ।

जहाज महल

ई ऐतिहासिक स्थान ओहि युगक कारीगरक अकल्पनीय काज थिक । चारू कात पहाड़ी आ हरियर जंगलसँ घेरल. आश्चर्यजनक, अद्भुत दृश्य अछि। जहाज महल एना बनाओल गेल अछि जेना ओ पानिमे हेलि रहल होअए। ओकर दू दिसमे पोखरि अछि आ दू दिसमे कृतिम पोखरि बनाओल गेल अछि। एहि तरहें ई महल चारू दिससँ पानिसँ घेराएल रहैत अछि । दूटा झीलक बीचमे ठाढ़ भव्य, सदियो पुरान जाहाज महल बहुत  गजब अछि। ऊपरसँ देखलापर लगैत अछि जेना ओ जलसँ चारूदिससँ घेराएल एकटा जहाज अछि। अपन परावर्तन पर बहैत माण्डू  के जाहाज महल एहन जहाज जकाँ लगैत अछि जे चलए बला अछि। दू टा कृत्रिम झील मुंज पोखरि आ कपूर पोखरिक बीच बनल ई एक सए बीस मीटर नमगर ‘जहाज महल’ एकटा सुरुचिपूर्ण दू मंजिला महल अछि । खुजल मंडप, पानि पर लटकल बालकनी आ खुजल छत के संग जहाज महल एकटा शाही सुख शिल्पकपाथरमे कल्पनाशील मनोरंजन अछि। जहाज महलक निर्माण अद्भुत अछि।  रानीक स्नानगृहमे तरह-तरहक ओरिआनसभ कएल गेल छल ।  ई महल प्राचीन समयमे जल संरक्षणक हेतु कएल जा रहल प्रयासक एकटा अद्भुत उदाहरण अछि। ओहिठाम वर्षाक पानिकेँ जल संरक्षण द्वारा बचा कए राखल जाइत छल जाहिसँ ओहिठामक निबासीकेँ साल भरि पानिक दिक्कति नहि होनि ।

कहल जाइत अछि जे सुल्तान बाज बहादुर संगीतसभाक आयोजन ओहि भवनमे कराओल करथि। ओहि भवनक विशेषता अछि जे ओकर कोनो कोनमे यदि केओ किछु बाजत तँ ओ ध्वनि एकदम मौलिक रूपमे भवनक कोनो स्थानसँ सुनाइत अछि। हमसभ स्वयं एहि प्रयोगकेँ केलहुँ । हमरसभक गाइड एक कोनपर ठाढ़ भए गीत गओलथि आ हमसभ ओहि भवनक एकदम दोसर कोनटापर ठाढ़ भए ओकरा साफ-साफ सुनि सकलहुँ,सेहो एकदम स्पष्ट आ मधुर स्वर जेना कि माइक लागल होइक । कहि नहि ई ओरिआन केना कएल गेल छल?

होशांग शाहक कब्र, गुंबददार संगमरमरक मकबरा, आओर विशाल जामी मस्जिद  सेहो एहिठामक  प्रमुख भवन अछि ।

माण्डुक इमलीक नामसँ जानल जाइत अफ्रीकन फलक स्थानीय नाम खोरासानी इमली छैक जाहि कारणसँ एकर जड़ि खोरासान (प्राचीन फारस)क प्राचीन भूमिमे छैक । कहल जाइत अछि जे एहि फलक बीज मिस्रक खलीफा न॑ १४वीं सदीमे माण्डू क सुल्तानकेँ उपहारमे देने छलाह । ओतए ठाम-ठाम एहि फलकेँ बिकाइत देखलिऐक । पर्यटकसभ उत्सुकतासँ एकरा कीनितो छलाह आ ओकर छोट-छोट डुकड़ी खाइतो छलाह।

माण्डुमे प्रमुख-प्रमुख एतिहासिक स्थानसभ देखलाक बाद हमसभ इन्दौर वापस बिदा भेलहुँ । एहि बेर वाहनचालक नव रस्तासँ जा रहल छल जाहिमे पहाड़ नहि छलैक। सोझ-सपाट रस्तापर तीव्रगतिसँ टैक्सी अपन गंतव्य दिस बढ़ि रहल छल। सड़कक दुनूकात हरिअरी भरल छल। दुर-दूर धरि हरिअर कंचन बाध-बोन देखि ककर मोन हर्षित नहि होएत?ऊपरसँ पानिसे टिपिर-टिपर खसि रहल छल।

आब इन्दौर मात्र अड़तीस किलोमीटर बाँकी छल कि वाहनचालक गुगलनक्साक चक्करमे रस्ता बदलि लेलक । ओ दहिना दिस आगू बढ़ि गेल । तकर बाद तँ शुरु भेल गामे-गाम घुमैत पातर-पातर सड़कक यात्रा । रहि-रहि कए ग्रामीणसभसँ सही रस्ता पुछए पड़ैत छलैक। जतए कतहु चौबटिआ रहैक ताहिठाम तँ खास कए मोसकिल होइत छल। साइत हमरासभकेँ ओहि इलाकाक गामसभ देखब लिखल छल। से हमसभ नीकसँ देखलहुँ । मुदा परेसानो भेलहुँ । आखिर वाहनचालक आठ किलोमीटर एहि तरहेँ चललाक बाद फेरसँ फोरलेन सड़कपर वापस आबि सकल। हमसभ बहुत हल्लुक अनुभव कए रहल छलहुँ । टैक्सी फेरसँ अपन पुरना गति धए लेने छल। हमसभ एक बेर फेरसँ निश्चिन्त भावे यात्राक आनन्द लैत आगू बढ़ि रहल छलहुँ । एतबेमे एकटा नीकसन ढाबा देखाएल। हमसभ भुखल तँ रहबे करी। ओहिठाम नीकसँ भोजन केलहुँ । तकर बाद इन्दौर दूर नहि छल। मोसकिलसँ चालीस मिनटक बाद हमसभ अपन डेरापर पहुँचि गेलहुँ ।

इन्दौर आ आसपासक हमरासभक यात्रा सुखद बनबएमे वाहनचालकक बहुत योगदान छल। ओ एकटा समांग जकाँ सदिखन हमरासभक संगे लागल रहल । कतहु कोनो परेसानी नहि होमए देलक। स्नान करबासँ लए कए दर्शन करबा धरि ओ छाँह जकाँ हमरासभक संग दैत रहल। हमसभ अचानक ट्रैबेल एजेन्सीक माध्यमसँ ओकरा संपर्कमे आएल रही। मुदा पहिले दिन ओकर व्यवहारसँ हमसभ बहुत प्रभावित भेल रही् तकर बाद तँ शेष सभदिन ओकरेसँ सोझे संपर्क करी। ओ बहुत उचित किरायामे हमरा लोकनिकेँ सुरक्षित यात्रा करबैत रहल। ताहि हेतु ओ निश्चित रूपसँ धन्यवादक पात्र अछि। असलमे  कतबो किछु बेकाल समय भए गेलैक अछि,मुदा अखनहु नीको लोक अछिए । तेँ ई दुनिआ चलि रहल अछि आ चलैत रहत। एकटा अज्ञात सहरमे एकदम अपरिचित ओहि वाहनचालकक व्यवहारसँ से अनुभव पक्का भेल ।

अठ्ठाइस जुलाइक भोरेसँ हमसभ वापसी यात्राक तैयारीमे लागि गेल रही। स्नान-ध्यानक बाद अतिथिगृहक सामने अवस्थित पिपलेश्वर महादेवकेँ प्रणाम कए हमसभ जलखै केलहुँ । तकर बाद थोड़ेक विश्राम सेहो भेलैक। समानसभ बाकसमे राखि लेल गेल । दूपहरिआमे भोजन केलाक बाद घंटा भरि फेरसँ विश्राम केलहुँ। तकर बाद अतिथि गृहक हिसाब-किताब कएल गेल। आवश्यक भूगतान केलहुँ आ हमसभ इन्दौर रेलवे टीसन दिस बिदा भए गेलहुँ । एक बेर फेर रस्ते-रस्ते इन्दौर सहरक सफाइसँ हमसभ मंत्रमुग्ध छलहुँ । जेना सौंसे सहर निश्चय कए लेने होथि जे  सहरकेँ स्वच्छ राखबाक अछि। तखनहि ई संभवो भए रहल अछि। मात्र सरकारी प्रयाससँ ई संभव नहि भए सकैत छल। मोनमे ईहो होइत छल जे देशक आन-आन सहरसभ किएक ने एहिना स्वच्छतामे औअलि आबि सकैत अछि? किएक ने? मुदा ताहि हेतु सभगोटेकेँ इन्दौरबासीसभसँ प्रेरणा लेब जरूरी अछि।

 

रबीन्द्र नारायण मिश्र

mishrarn@gmail.com

m-9968502767















 

 

 

 

 

 

 

 

 


शुक्रवार, 15 दिसंबर 2023

वृंदावनक कुंज गलीमे!

 

वृंदावनक कुंज गलीमे!

 

लगभग पन्द्रह साल पहिने हमसभ मथुरा-वृन्दावन गेल रही। तकर बाद कतेक समय बीति गेल। हम सेवानिवृत्त भए गेलहुँ । ग्रेटर नोएडामे अपन मकानमे बसि गेलहुँ । मुदा वृन्दावन जेबाक योग नहि बनल जखन कि ग्रेटर नोएडासँ वृंदावन मात्र १२६ किलोमीटर दूर अछि।  एहि बीचमे कोरोना काल जेहन बीतल से कहबाक काज नहि। आखिर  एमहर आबि कए घुमबाक कार्यक्रम बनल। सात सितम्बरक कृष्णाष्टमी छल। तेँ छओसँ आठ सितम्बर धरि छोड़ि नओ सितम्बर २०२३क आरक्षित टैक्सीसँ हमसभ भोरे सात बजे मथुरा-वृन्दावनक हेतु बिदा भेलहुँ । हमसभ तीनगोटे संगे रही-हम,हमर श्रीमतीजी आ हमर सारि पूनम  । पूनम किछुदिन पूर्व हरिद्वारक जेबाक क्रममे आएल छथि। तेँ खास कए ई कार्यक्रम बनल। बहुत प्रयाससँ परिचितक माध्यमसँ एकटा टैक्सीक जोगार कएल गेल जे छओ हजारमे  हमरासभकेँ पूरा यात्रा करओताह,मथुरा,वृन्दावन घुमेबो करताह आ वापस ग्रेटर नोएडा लेने अएताह । रातिमे हमसभ वृन्दावनेमे रहब। ताहि हेतु हम प्रभुपाद आश्रममे आनलाइन आरक्षण करओने रही। प्रभुपाद आश्रम इसकान वृन्दावनसँ जुड़ल अतिथिगृह अछि। ओना इसकान वृन्दावनसँ जुड़ल कैकटा अतिथिगृहसभ अछि। मुदा हमरा एहीमे आरक्षण भेटल, दोसर अतिथिगृहसभ भरि चुकल छल ।

अपना भरि बहुत ओरिआन कए हमसभ वृन्दावन-मथुराक यात्रापर बिदा भेल रही। बहुत उत्साहितो रही। मौसमसे बहुत नीक छल। अकासमे मेघ घुमि रहल छल। हबा सुखद छल। हमसभ जखन सात बजे भोरे टैक्सीमे बैसलहुँ आ टैक्सी पूर्णगतिसँ हाइवेपर आगू बढ़ल तँ आनन्दक वर्णन नहि कएल जा सकैत अछि। सड़कपर बहुत कम वाहन चलि रहल छलैक । वाहन चालक उत्साहमे बहुत जोरसँ स्थानीय भजन बजा तेज गतिसँ गाड़ी चलबए लगलाह । थोड़े काल तँ हमसभ बरदास केलहुँ ,मुदा बरदासोक सीमा होइत छैक। आखिर हमर श्रीमतीजी ओकरा टोकलखिन-

अबाज कनी कम करू ।

तथापि वाहन चालकपर कोनो खास असरि नहि पड़ल । बहुत कालक बाद ओ एहि बातपर ध्यान देलक। अबाज कनी कम भेल । हमसभ बहुत विश्रान्तिक अनुभव केलहुँ ।

रस्तामे डेढ़घंटा चललाक बाद एकटा ढाबापर टैक्सी रुकल। हमसभ चाह-पान केलहुँ । कनी काल सुस्तेलहुँ आ फेर बिदा भेलहुँ । तकर आधाघंटाक बाद हमसभ वृंदावनक सीमामे पहुँचि रहल छलहुँ । ओना हमर योजना छल जे आइ मथुराक जन्मभूमि आ ओहिठामक अन्यप्रमुख मंदिरसभक दर्शन केलाक बाद वृंदावनमे अपन होटलमे विश्राम करब आ साँझमे मौका भेटत तँ वृंदावनमे सेहो प्रमुख मंदिरसभमे दर्शन करब। मुदा वाहन चालक अपन मनमरजीक लोक छल। ओ टैक्सीकेँ प्रेममंदिर लगक टैक्सी स्टैंडमे ठाढ़ कए देलक आ इसारासँ कहलक-

सामनेमे प्रेम मंदिर अछि। अहाँसभ एतहि उतरि जाउ, कारण ओतए टैक्सी नहि जा सकत।

 हमसभ की करितहुँ? टैक्सीसँ उतरि एकटा आटो केलहुँ जे हमरासभकेँ प्रेममंदिरक लगीच धरि लए जाइत। मुदा ओ तँ जिलेबी जकाँ घुमि रहल छल। आखिर हम ओकरा टोकलिऐक-

कतए जा रहल छह? प्रेम मंदिर तँ सामने देखा रहल छल।

ओतहि जा रहल छी। ओकर दोसर द्वारिसँ मंदिर जाएब बेसी आसान थिक।

थोड़ेकाल घुमा कए ओ प्रेममंदिरक दोसर द्वारिसँ बहुत फटकीए आटो ठाढ़ कए देलक। आब आर आगू नहि जा सकत। हमसभ आटोसँ उतरि गेलहुँ । ओकरा डेढ़ सए रुपया देलिऐक। तकर बाद बहुत काल पैरे चलए पड़ल। आटो केलाक कोनो फएदा नहि बुझाएल।

थोड़ेकाल पैरे चलबाक बाद हमसभ प्रेममंदिर पहुँचि गेल रही। प्रेममंदिरक निर्माण कृपालुजी महराज करओने छलाह। एगारहसाल धरि एकहजार मजदूर एकर निर्माणमे लागल रहल । एकर निर्माणमे अनुमानतः एकसए पचास करोड़ रुपया खर्च भेल छल। ई मंदिर परिसर चौवन एकड़मे पसरल अछि। मंदिरक आधारशिला कृपालुजी महराज द्वारा १४ जनबरी २००१क राखल गेल छल। एकर निर्माण कृपालुजी द्वारा बनाओल गेल जगद्गुरु कृपालु पृषत (जेकेपी) द्वारा कएल गेल छल। मंदिरक उद्घाटन समारोह कृपालुजी महराजक उपस्थितिमे १५सँ सत्तरह फरबरी २०१२क संपन्न भेल छल। एहि मंदिरक प्रथम तलपर राधागोबिंद आ दोसर तलपर श्रीसीताराम विराजित छथि। मंदिरक बाहरी देबालपर राधाकृष्णक लीलाकेँ शिल्पांकित कएल गेल अछि। मंदिरक भितरी देबालपर राधाकृष्ण आ कृपालुजी महराजक झाँकी बनाओल गेल अछि। संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय लगैत रहैत अछि। मंदिर परिसरमे राधाकृष्णक गोवर्धन पर्वतक सजीव झाँकी बनाओल गेल अछि। मंदिर साढ़पाँच बजे भोरे खुजि जाइत अछि आ बारह बजे धरि खुजल रहैत अछि। तकर बाद पाँचबजे साँझसँ साढ़े आठ बजे राति धरि खुजल रहैत अछि। एहि बीच हजारों भक्तलोकनि एतए दर्शनक हेतु अबैत जाइत रहैत छथि।

प्रेममंदिरक ऊँचाइ एकसए पचीस फीट ऊँच,लम्बाइ एकसए नब्बे फीट आ चौड़ाइ एकसए अठ्ठाइस फीट अछि। करीब एकघंटा भरि हमसभ मंदिर परिसरमे रहलहुँ। ओहिठामक प्रमुख दर्शनीय निर्माणसभ देखलहुँ । मंदिरे परिसरमे घुमि हमसभ बहुत संतुष्ट छलहुँ । तकर बाद हमसभ बाहर निकललहुँ । वाहनचालककेँ फोन केलिऐक । ओ कहलक-

अहाँसभ बाँके बिहारी मंदिर चलू। हम ओतहि पहुँचि रहल छी। प्रेम मंदिरक रस्ता बंद छैक।

जखन हमरासभकेँ पैरे सभठाम जेबाक होएत तखन तोरा रखबाक फएदा की अछि?”

हम की करू? सरकारी आदेश छैक। किछु नहि कएल जा सकैत अछि।

किछु तँ प्रयास करहक। हमसभ तोरा अनने छी जे मदति करबह। मुदा तूँ तँ सोझे हाथ ठाढ़ कए देलह।

आइ शनिदिन छलैक। पता लागल जे आइ आ काल्हि वृंदावनमे स्थानीय प्रशासनक आदेशसँ टैक्सीकेँ भितर नहि जाए देल जाइत छैक। भितर किछु हद धरि आटो जाएत,तकर बाद पैरेटा जा सकैत छी। इएह बात वाहनचालक सेहो कहैत छल। मुदा ओकर बातपर हमरा विश्वास नहि होअए। भेल जे ओ बहन्ना बना रहल अछि।

आखिर ओ हमरासभकेँ पगलाबाबा मंदिर जेबाक हेतु कहलक । ओहो ओहिठाम आबि रहल अछि। ओतहि भेटि जाएत। हमसभ पगलाबाबा मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । बड़ीकाल पैरे चललाक बाद एकटा आटो भेटल। ओ हमरासभकेँ पगला बाबा मंदिरक सामने पहुँचा देलक। थोड़ेकलामे हमर वाहनचालक सेहो ओतहि पहुँचि गेल रहए। ओकरा ओतहि रहबाक हेतु कहलिऐक आ हमसभ पगलाबाबा मंदिरमे दर्शन हेतु प्रवेश केलहुँ।

पगलाबाबाक बहुत रुचिकर खिस्सा अछि। कहल जाइत अछि जे ओ जज छलाह। हुनकर न्यायालयमे एकबेर एकटा महाजन कोनो गरीब ब्राह्मणक विरुद्ध मोकदमा केलकनि जे ओ ओ हुनकर कर्जा वापस नहि कए रहल छथि। जखन कि ओ महाजनकेँ सभटा कर्जा वापस कए चुकल रहथि तथापि ओ हुनका तंग कए रहल छनि आ कर्जा बाँकी कहि रहल छनि। असलमे भेल ई रहैक जे ओ गरीब ब्राह्मण महाजनक कर्जा किस्त-किसत वापस करैत रहैत छलाह। जखन अंतिम किस्त जमा करए गेलाह तखन ओ महाजन अदालती नोटिस पठा देलक जे अखन धरि ओ कर्जा वापस नहि केलक अछि आ ओकरापर कानूनी कारबाइ होएत। ओ गरीब ब्राह्मण न्यायालयमे जज साहेब लग गोहार लगओलक जे ओ तँ सभटा कर्जा वापस कए चुकल अछि। जज साहेब पुछलखीन-

अहाँ कोनो गबाह आनि सकै छी जे अहाँक बातकेँ समर्थन कए सकथि।

किएक नहि। हमर गबाहीश्री बांके बिहारीजी देताह।

हुनकर पता की छनि? ”-जज साहेब पुछलखिन।

बांके बिहारी वल्द वासुदेव, बांके बिहारी मंदिर वृंदावन।

जज साहेब श्रीबांके  बिहारीजीक नामसँ नोटिस निकालि देलखिन। ओ गरीब ब्राह्मण ओहि नोटिसकेँ श्रीबांके  बिहारीजीक मूर्ति लग राखि देलक आ बाजल-

बांके बिहारी! अहाँकेँ गबाही देबाक हेतु कचहरीमे अएबाक अछि।

निश्चित तिथिपर एकटा बूढ़ आबि कए न्यायालयमे गबाही देलक आ ओहि ब्राह्मणक कथनक समर्थन केलक। जज साहेब महाजनक खाताक जाँच  केलनि तँ ओहिमे सभटा विवरण देखलनि ,बस नामटा बदलि देल गेल छल।  जज साहेब एहि बातसँ संतुष्ट भए महाजनक मोकदमाकेँ खारिज कए देलनि। तकर बाद जज साहेब ओहि ब्राह्मणसँ श्रीबांके  बिहारीजीक पता पुछलखीन।

ओ तँ यत्र-तत्र-सर्वत्र छथि।

कहल जाइत अछि जे तकर बाद जज साहेब नौकरी छोड़ि कए श्रीबांके  बिहारीजीकेँ ताकए लगलाह। अंतमे ओ वृंदावन आबि गेलाह आ ओतहि हुनकर मृत्यु भेलनि। तहिएसँ लोक हुनका पगला बाबक नामसँ जानि रहल छनि। हुनकर समाधिस्थल ओही मंदिर परिसरमे अछि। ओ मंदिर दसमंजिला अछि आ ओहिमे राधाकृष्णक भव्य मूर्ति स्थापित कएल गेल अछि। तकरे नीचाँमे पगला बाबाक मूर्ति सेहो अछि।

पगला बाबाक मंदिरमे दर्शन कए बहुत प्रेरणा भेटल। मोनमे बहुत शांति भेल। तकर बाद हमसभ मंदिरक द्वारिसँ बाहर भए अपन-अपन जूता-चप्पल तकलहुँ आ वाहन चालककेँ फोन लगओलहुँ । ओ कनीके फटकी टाढ़ छल। मौसम से खराप छलैक। मेघ लागल छलैक आ बीच-बिचमे पानि टिपिर-टिपिर खसैत छलैक। रस्तासभकेँ घेर-बेर सेहो छलैहे। हम वाहन चालककेँ होटल चलबाक हेतु कहलिऐक। मुदा ओ श्रीबांके  बिहारीजीक मंदिर लग जेबाक प्रयासमे लागि गेल। ताहि हेतु कहि नहि कोन-कोन रस्तासँ हमरा लोकनिकेँ घुमबैत रहल। लगभग आधाघंटा टैक्सीमे घुमैत रहलाक बाद हमसभ श्रीबांके  बिहारीजी मंदिर लग पहुँचलहुँ । पानि सेहो भए रहल छलैक । पौने बारह बाजि रहल छलैक। हम वाहन चालककेँ पुछलिऐक-

मंदिर आब खुजल होएत कि नहि?”

ई मंदिर सदिखन खुजले रहैत अछि।

ओकर बातपर विश्वास कए हमसभ पैरे बिदा भेलहुँ । नालासभक गटरक दुर्गंधयुक्त पानि सौंसे रस्तापर बहि रहल छल। भिजैत-तितैत हमसभ ठेहुन भरि पानिमे आगू बढ़ैत गेलहुँ । कहि नहि कतेकटा ओ गली छल? पानि हेबाक कारण कोनो गति बाँचल नहि छल। हमसभ बहुत नीकसँ भिजि चुकल रही। एहनो हालतिमे आगू बढ़ैत गेल रही। एहि उम्मीदमे जे भगवानक दर्शन भए जाएत। मुदा जखन मंदिरक आगू पहुँचलहुँ तँ पता लागल जे ओ बंद भए गेल अछि। एहि बातसँ हमरासभकेँ बहुत निराशा भेल। अपना भरि पंडासभकेँ बहुत गोहरओलिऐक। मुदा ओहोसभ असमर्थ छल। हमरा सन-सन सैकड़ों लोक ओहिना वापस जा रहल छलाह। हारि कए हमहूँसभ भिजैत-तितैत वापस भए गेलहुँ । वाहन चालककेँ बहुत फझ्झति केलहुँ जे ओ गलत सूचना देलक जाहि कारणसँ हमसँ एतेक दिक्कतिमे पड़ि गेलहुँ । ओ की बजैत? सहनशील मुदा मूर्ख सन आदमी छल ओ। आब हमसभ करबे की करितहुँ? ओहने हालतिमे होटल हेतु बिदा भेलहुँ ।

वृंदावनमे ठहरबाक हेतु हम इसकानक प्रभुपाद आश्रममे दूटा कोठरी आरक्षित करबओने रही।  इसकानक आन अतिथिगृहसभ भरि गेल रहैक। वृंदावनमे बेसीगोटेकेँ एहि अतिथिगृहक बारेमे जनतब नहि रहैक। मुदा हमसभ जेना-तेना ओहिठाम पहुँचि गेलहुँ । सभगोटे नीकसँ भिजि गेल रही। जल्दी सँ जल्दी कोठरीमे जाए चाही जाहिसँ अपन-अपन वस्त्र बदलि सकी आ कनी आश्वस्त होइ। ओहि अतिथिगृहक नाम बहुत आकर्षक छल,मुदा व्यवस्था ततबे झूस । स्वागतीकेँ अपन परिचय देलिऐक,कागज देखेलिएक । ओ एकटा आदमीकेँ संग कए देलाह। हमरासभकेँ खाली कोठरीसभ देखबए लगलाह।

भूतलपर कोनो कोठली खाली नहि अछि। प्रथम तलपर एकटा कोठरी खाली अछि। दोसर तलपर सेहो एकटा कोठरी खाली अछि।

मुदा हमसभ तँ एकहिठाम दुनू कोठरी चाहब।

तखन तेसर तलपर चलू। ओहिठाम दूटा कोठरी अगल-बगल खाली अछि।

हमसभ तेसरतलपर पहुँचलहुँ । ओहिमे दूटा कोठरी एकठाम भेटि गेल। मुदा कोठरीसभमे  फोन नहि छल। स्वागतीसभ संपर्क करबाक हेतु स्वयं नीचाँ जाएब अनिवार्य। ओहि अतिथि गृहमे लिफ्ट नहि छल। पैरे तेसर तलसँ नीचाँ अएनाइ-गेनाइ होइत छल। चाहोक जोगार नहि छल। सभकिछु बाहरसँ मंगाउ अथवा बाहरे जा कए जलखै-चाह करू। हमसभ आब कइए की सकैत छलहुँ? अपन-अपन वस्त्र बदललहुँ। कनी काल सुस्तेलहुँ आ इसकान मंदिर हेतु बिदा भए गेलहुँ । ओहिठाम हमसभ भोजनो केलहुँ । इसकान मंदिरमे बहुत नीकसँ दर्शन भेल। देशी-विदेशी भक्त लोकनि भाव विभोर भए हरे कृष्ण! हरे कृष्ण!क कीर्तन निरन्तर करैत छलाह। ओहिठाम भोजन केलाक बाद हमसभ अपन-अपन चप्पल-जूता  ताकए लगलहुँ । असलमे मंदिरमे प्रवेश करैत काल जूता रखबाक एकटा स्थान देखाएल छल। ओतहि हमसभ अपन-अपन चप्पल-जूता राखि देलिऐक । मुदा वापसीमे ओ स्थान भेटबे नहि करए। मंदिर परिसरमे कैकटा  एहन-एहन स्थान छल। ओहिसभठाम जा कए पुछबो करिऐक। मुदा अपनो लागए जे हमरसभक चप्पल-जूता कतहु आर राखल अछि। मंदिर परिसरक अनेक बेर चक्कर लगेलाक बाद अंततोगत्वा  ओ स्थान भेटिए गेल जतए हमसभ अपन चप्पल-जूतासभ रखने रही। तकर बाद मोन बहुत हल्लुक लागल छल।

इसकान मंदिरसँ निकलि हमसभ बाँकेबिहारी मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । श्री हरिदास स्वामी उदास वैष्णव छलाह  । हुनक भजन-कीर्तन सँ प्रसन्न भए श्रीबांके  बिहारीजी निधिवन सँ प्रकट भेलाह । स्वामी जी श्रीबांके  बिहारीजीक निधिवनमे बहुत दिन धरि सेवा करैत रहलाह  । श्रीबाँके बिहारी मंदिरक निर्माण सन् १८६२ मे भेल। तकर बाद हुनका ओतय आनि कए स्थापित कयल गेलनि । श्रीबांके  बिहारीजी मंदिरमे मात्र शरद पूर्णिमाक दिन वंशीधरन करैत छथि। श्रावण तृतियाक दिन मात्र ठाकुर जी झूला पर बैसैत छथि आ जन्माष्टमीक दिन मात्र हुनकर मंगला आरती होइत छनि। जिनकर दर्शन मात्र सौभाग्यशाली व्यक्तिकेँ होइत  अछि  आ चरण दर्शन मात्र अक्षय तृतीयाक दिन होइत अछि। कहल जाइत अछि जे श्रीबाँके बिहारीजी रास करबाक हेतु रातिमे निधिवन चलि जाइत छथि। तेँ हुनकर  प्रातःकाल मंगला आरती नहि कएल जाइत छनि ।

इसकान मंदिर पहुँचबाक हेतु आ ओहिठामसँ आगूक यात्राक हेतु हमसभ आब आटोक उपयोग कए रहल छलहुँ । टैक्सीकेँ अतिथिनिवासेमे छोड़ि देलिऐक । कारण ओकरा भितरी मार्गपर कतहु लइए नहि जा सकैत छलहुँ । बांकेबिहारी मंदिर परिसर लग हमसभ आटोसँ उतरि पैरे बिदा भेलहुँ । कनीकाल चललाक बाद एकटा विचित्र घटना भेल। हमर सारिक कान्हपर ऊपरसँ एकटा वानर कुदि गेलनि। ओ विद्युत गतिसँ हुनकर नाकपरसँ चश्मा उठा लेलकनि आ ऊपर कुदि कए लगीचक घरक छतपर चढ़ि गेल। ओ एहि बातसँ बहुत परेसान भए गेलथि । ई घटना ततेक फुरतीसँ घटित भेल जे हम जाबे किछु बुझलिऐक ताबे तँ बानर चश्मा छिनि कए जा चुकल छल । थोड़बे कालमे एक-दूगोटे आएल। ओ कहलक-

हमसभ चश्मा वापस आनि देब। मुदा ताहि हेतु तीनसए रुपया लागत।

ओ मानि गेलखिन। ओ सभ वानरकेँ तरह-तरहक भोजन सामग्री फेकए लागल। वानर भोजन करएमे व्यस्त भए गेल आ चश्मा ओतहिसँ खसा देलक। रच्छ भेल जे चश्मा टुटल नहि। तकर बाद सौंसे लोकसभकेँ कहैत सुनिऐक-

अपन-अपन चश्मा आ झोरा बचा कए राखब। वानर पड़िकल अछि। लुटि लेत।

चश्मा भेटि गेलाक बाद हमसभ बहुत विश्रान्तिक अनुभव केलहुँ । ओहिठामसँ जूता-चप्पल रखबाक हेतु स्थान ताकि रहल छलहुँ कि हमर सारि पछुआ गेलथि। कतहु देखेबे नहि करथि। आब तँ हमसभ बहुत परेसान भए गेलहुँ । मोबाइलपर फोन केलिअनि। एकटा निजगुत स्थान बतओलिअनि । कनी कालक बाद ओ ओहिठाम देखेलीह। भेलैक ई जे ओ एकटा भिखमंगाकेँ किछुटाका देबए लगलखिन । ताबतेमे कैकटा भीखमंगा घेरि लेलकनि। सभ टाका मांगए लगलनि। आब हिनका तँ बहुत मोसकिल भए गेलनि। एकदम एसगरि पड़ि गेल रहथि । हमरसभक फोनक बाद ओ कहुना कए जान बचा कए ओहिठामसँ निकलि सकलीह। एहि तरहेँ थोड़बे कालमे हुनका संगे दूटा दुर्घटना भए गेलनि। तेँ ओ बहुत परेसान जकाँ बुझाथि। खैर ! जे हेबाक छलैक से भए गेलैक।

हमसभ बांकेबिहारी मंदिर परिसर पहुँचि गेल रही। एकटा पंडासँ गप्प भेल । ओ पाँचसएसए रुपया लए हमरासभकेँ शीघ्र दर्शन करेबाक जोगार केलक। मंदिरमे भयाओन भीड़ छलैक। तथापि पंडितजीक सहयोगसँ हम तँ बहुत नीकसँ दर्शन कए सकलहुँ । मुदा ओ सभ बहुत प्रयासक बादो भगवानक दर्शन नीकसँ नहि सकलथि। जेना-तेना हमसभ मंदिरसँ वापस अएलहुँ । सभसँ पहिने अपन-अपन जूता-चप्पल तकलहुँ । पंडितजी कहथि जे लोकसभक नित्य हजारो चप्पल-जूता छुटि जाइत अछि, कारण ओहिठाम प्रवेश करबाक द्वारि आ मंदिरसँ निकलबाक द्वारि फराक-फराक अछि। जाहिठाम लोक सामान्यतः अपन जूता रखैत अछि वापसीमे ओहिबाटे बहराइत नहि अछि आ भुतला जाइत अछि। हड़बड़ीमे ओकरसभक जूता ओतहि रहि जाइत छैक जे मंदिर प्रशासन द्वारा फेकि देल जाइत अछि।

वृंदावनमे  बांकेबिहारी मंदिर बहुत प्रमुख मंदिर मानल जाइत अछि। एहिठाम दोसर प्रयासेमे सही,दर्शन केलाक बाद हमसभ बहुत संतुष्ट रही,सभटा परेसानी बिसरि गेल रही।

श्रीबांके  बिहारीजीक दर्शनक बाद हमसभ निश्चिन्त भावे अपन बासा दिस बिदा भए गेल रही। थोड़बे कालमे हमसभ प्रभुपाद आश्रम पहुँचि गेल रही । ओतए वाहनचालक हमरसभक स्वागत केलक । 

राति भरि ओहिठाम विश्रामक बाद दोसर दिन भोरेहमसभ ओहि ठामसँ मथुराक हेतु बिदा भेलहुँ । डेरामे चाहोक ओरिआन नहि छल। तेँ रस्तामे चाहक दोकान तकैत रहलहुँ । मुदा ओतेक भोरे बेसी दोकानसभ बंदे रहए। बहुत मोसकिलसँ एकठाम चाह बनैत देखाएल। ओही बीच वर्षासे शुरु भए गेल छल । तेहनेमे हमसभ टैक्सीएमे बैसल चाह पीलहुँ । तकर बादजे बिदा भेलहुँ तँ कृष्ण जन्मस्थाने लग पहुँचलहुँ । ओहिठाम अपन समानसभ टैक्सीएमे छोड़ि हमसभ जन्म मंदिर  परिसर दिस बिदा भेलहुँ । अखनहु वर्षा भइए रहल छल। हमसभ भिजैत जन्मस्थान मंदिरक मुख्यद्वारिपर पहुँचलहुँ । मुदा हमरासभ लग छोट-छोट झोरा छल,मोबाइल फोन छल । ओकरा वापस टैक्सीमे राखए  पड़ल । अन्यथा ओकरा लाकरमे राखि सकैत छलहुँ । एही उपक्रममे हमसभ बहुत नीकसँ भिजि गेलहुँ । ओहने हालतिमे हमसभ जन्मस्थान मंदिर परिसरमे प्रवेश केलहुँ । थोड़ेकालक बाद जखन बाहर होमए लगलहुँ तँ हुनका पुछलिअनि-

जन्मस्थान मंदिर कतए अछि?”

ओएह जे कनीकटा स्थान छल, जाहि बाटे हमसभ बहरेलहुँ अछि, सएह अछि जन्मस्थान !”

मोन बहुत दुखी भए गेल। भगवान कृष्णक जन्मस्थानक एहन गति भेल अछि?”

आक्रान्तासभ कृष्ण भगवानक जन्मस्थानपर बनल मंदिरकेँ तोड़ि देलक । बादमे स्वतंत्रताक बाद भेल समझौताक अनुसार कनीकटा स्थान भेटल जाहिठाम दर्शन कए लोकसभ संतोष कए लैत छथि।

कनीके फटकी बिरलाजी द्वारा बनाओल गेल राधाकृष्णक मंदिर अछि। हमसभ ओहिठाम राधाकृष्णक भव्य मूर्तिक दर्शन केलहुँ । तकर बाद बाहर निकललहुँ । वाहन चालक पार्किंगमे टैक्सी लगओने छल। हमरसभक मोबाइल सेहो ओहीमे राखल छल। ओकरा तकैत हम पार्किंगमे गेलहुँ । मुदा ओहिठाम टैक्सी नहि छल। आब तँ बहुत चिंतामे पड़ि गेलहुँ । एकरा केना ताकल जाएत? अछता-पछता कए आगू बढ़ि रहल छलहुँ कि वाहनचालक टैक्सीके एमहर-ओमहर  घुमबैत देखाएल। असलमे देरी भए जेबाक कारणसँ ओहो परेसान भए गेल छल आ हमरासभकेँ ताकि रहल छल। हमसभ टैक्सीमे बैसलहुँ आ द्वारिकाधीश मंदिर दिस बिदा भेलहुँ । मंदिरसँ कनीके फटकी पुलिस रस्ता बंद केने छल। आगू टैक्सी नहि जा सकत ।- वाहन चालक बाजल। हम नीचाँ उतरि पुलिसबलाकेँ आग्रह केलिऐक,अपन परिचय देलिऐक। ओ मानि गेल । हमसभ टैक्सीलेने भितर चलि गेलहुँ । मंदिरसँ कनीके फटकी एकटा पंडाजी भेटलाह् । हुनकासँ बात ठीक भए गेल। टैक्सीक पार्किंगोक जोगार ओएह कए देलखीन । तकर बाद हमरासभके संगे बिदा भेलाह। रस्तामे फूल-प्रसाद आर किछु-किछु हमरासभकेँ कीनबा देलाह । हुनके सहयोगसँ हमसभ द्वारिकाधीश मंदिरमे बहुत जल्दीए नीकसँ दर्शन कए लेलहुँ। तकर बाद हमसभ पंडितजीक संगे विश्राम घाट पहुँचलहुँ । कहल जाइत अछि जे भगवान कृष्ण कंसकेँ मारलाक बाद एतहि विश्राम केलथि । जमुनाजीपर बनल ओ घाट बहुत प्रसिद्ध अछि। ओहिठाम पंडितजी हमरासभकेँ लेने गेलाह । घाटपर उपस्थित पंडासभ तरह-तरहसँ पूजा करेबाक हेतु व्यग्र छलाह । मूल उद्येश्य एतबे जे आगन्तुकलोकनिसँ अधिक सँ अधिक टाका टानि ली। जेना-तेना ओहिठाम पूजा केलाक बाद हमसभ टैक्सी लग वापस पहुँचलहुँ । पंडितजी तँ पहिने निकलि गेल रहथि। मुदा एकटा अपन आदमी हमरा संगे लगा देने रहथि जे टैक्सीक पार्किंग धरि हमरासभकेँ पहुँचा देलक। ओकरा गछल टाका देलिऐक आ हमसभ टैक्सीसँ वापस बिदा भेलहुँ । रस्तामे मथुराक प्रसिद्ध पेरा,पैठा कीनलहुँ । आब हमसभ वापस दिल्ली बिदा हेबाक उपक्रममे रही कि रस्तेमे बिरला मंदिर देखाएल मंदिर खुजले छल। हमसभ ओहिठाम सेहो दर्शन केलहुँ । बहुत नीकसँ दर्शन भेल । थोड़बे कालक बाद सेवादारसभ चिचिआ रहल छल-

जल्दी निकलैत जाउ । मंदिर बंद हेबाक समय भए गेल अछि।

हमसभ जल्दीए बाहर भए गेलहुँ । मंदिरक मुख्यद्वारि लग खाली स्थान छल। हमसभ बहुत भिजि गेल रही । भेल जे अपन-अपन वस्त्र बदलि ली। ताहि हेतु झोरासँ अपन-अपन दोसर वस्त्र निलालहुँ आ ओकरा पहिरबाक उपक्रममे छलहुँ कि प्रहरीसभ झगड़ा करए लागल। हमहूँ बहुत जोरसँ डाँटि देलिऐक -

तोरासभकेँ कनीको मनुष्यता नहि छह। देखि रहल छह जे हमसभ भिजल छी। संगमे स्त्रीगणसभ से छथि। वस्त्र बदलितहि हमसभ एहिठामसँ अपने चलि जाएब। बहुत मोकसिलसँ हम आ हमर श्रीमतीजी तँ अपन-अपन वस्त्र बदलि सकलहुँ । संकोचवश हमर सारि ओहिना भिजले सारी पहिरने रहि गेलीह। घंटो एहि अवस्थामे रहबाक कारण ओ बादमे बहुत जोर दुखित भए गेलीह । दिल्ली पहुँचलाक बाद कैकदिन धरि हुनकर इलाज होइत रहलनि तखन जा कए ओ स्वस्थ भेलीह।

मंदिरसभक बाहर बहुत मैलसभ रहैत अछि। मंदिरमे दर्शनकक व्यवस्था सेहो ठीक नहि अछि। शनि-रविक तँ सौंसे घराबंदी कए देल जाइत अछि जाहिसँ अहाँ अपन कार नहि लए जा सकैत छी। बहुत सुधारक प्रयोजन अछि। हमरा बुझेबे नहि करए जे अपन घरक एतेक शांति छोड़ि अनेरे वृंदावन-मथुरामे फसाद करए लोक किएक जाएत? ओहिठाम तँ मात्र हंगामा अछि,चारूकात लालची पंडासभक गीधदृष्टि जे कखन ककरासँ कतेक बेसी टाका झिटि ली। सभठाम पैसा फेकू तमासा देखू बला बात अछि। निश्चय ई स्थिति बहुत दुखद अछि। ई कोना पुण्य काज कहल जाएत? संबन्धित व्यक्तिसभकेँ एहिसभपर सोचबाक चाही जे हिन्दू धर्मक एहन प्रतिष्ठित धर्मस्थलक एहन दुर्गति किएक अछि?आशा करैत छी जे सरकार/धार्मिक संस्थानसभ एहिसभ दिशामे काज करत आ भविष्यमे जखन हमसभ फेर ओहिठाम जा सकब तखन बहुत उत्तम परिस्थिति देखबामे आओत ।

एहि तरहेँ हमरसभक दू दिनक वृंदावन यात्राक अंत भेल। हमसभ अपन घर वापस आबि कए बहुत आश्वस्त छलहुँ । वृंदावन-मथुराक एहि यात्रामे बहुत गंजन भेल छल। एक तँ मौसम बहुत खराप छल । हमसभ अनेक बेर भिजि गेलहुँ । दोसर वाहनचालक छल तँ सोझ मुदा ओकरा ओहिठामक कोनो जनतब नहि रहैक । ऊपरसँ ओ कैकबेर गलत जानकारी दैत रहल जाहिसँ हमरासभकेँ परेसानी बढ़ल । अगर ओ बाँके बिहारी मंदिरक बंद हेबाक समयक गलत जनतब नहि दैत तँ हमसभ जे अनेरे भिजैत ओहिठाम गेलहुँ आ वापस भेलहुँ ,ओहिसँ तँ बचि सकैत छलहुँ । इसकान मंदिरक प्रभुपादआश्रमक आवास सेहो ठीक नहि छल। चाहो नहो भेटैत छल ओहिठाम , आर सुविधाक तँ बाते कोन? एहिसभक अछैत हमसभ प्रसन्न रही जे मथुरा-वृंदावनक प्रमुख-प्रमुख मंदिरमे हमसभ दर्शन कए सकलहुँ ।

 

 

रबीन्द्र नारायण मिश्र

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