रविवार, 11 अगस्त 2019

अष्टयाम आ नबाह


अष्टयाम आ नबाह



सन्१९६२ भारत चीनक युद्धक हेतु प्रसिद्ध अछि । ओहि समयमे हमसभ मिडिल इसकूलसँ सातमा पास कए हाइ इसकूल इकतारामे आठमामे नाम लिखओने रही । सौंसे देश चीनक खिलाफ सनसन करैत छल । अपन देशक सामरिक आ आर्थिक सामर्थ्य सीमित छल । चीनक सेना बढ़िते जा रहल छल। गाम-गाम लोक रेडिओक समाचार सुनबा हेतु आतुर रहैत छल । मुदा समाचार सुनि लोकसभक लोलपर फुफरी पड़ैत छल। ओही समयमे गाम-गाम ई हवा बहि गेल जे प्रलय होबए बला अछि । एहि बातक चीनसंगे  भेल युद्धसँ किछु लेना-देना नहि रहैक । मुदा ई घटना ओही लग-पासक हेबाक कारण तकर चर्च होएब स्वभाविक ।

गामक-गाम नबाह,अष्टयाम, यज्ञ  होबए लागल । नाना-प्रकारक अनुष्ठान होइत रहल। तात्पर्य इएह छल जे प्रलयक भविष्यवाणी फेल भए जाइक । हमसभ तँ नेना रही । ओतेक बात नहि बुझिऐक । मुदा लोकसभक मोन आशंकित देखि चिंता तँ हेबे करए जे कहि नहि की होएत,किओ बचत की सभ दहि-बहि जाएत। कहि नहि एहन भविष्यवाणी केनहार के छलाह आ हुनकर की उद्येश्य छलनि? जे छलाह मुदा समाजमे हरकंप तँ भइए गेल छल ।

कोनो आसन्न महान संकटसँ निजात पएबाक हेतु गामक-गाममे अष्टयाम आ नबाहक प्रकारक कीर्तन करबाक उजाहि उठि गेल  छल । हमरा गाममे तँ अष्टयाम आ नबाहक जेना बाढ़ि आबि गेल छल । साइते कोनो घर रहल होएत जतए अष्टयाम नहि भेल । व्रह्मस्थानमे नबाह भेल छल । गाम-गामसँ कीर्तनिआँसभ झुंड बना-बना अपन समयपर रंग-विरंगक सुर-तान दैत कीर्तन करैत छलाह । हमरा मोन पड़ैत अछि जे जमुआरी,बिचखाना,पौना, झोंझी आ कहि नहि कुन-कुन गामक लोकसभ ढ़ोलक,झालि, हरमुनिआ लेने अबैत छलाह आ दू-तीन घंटाक अपन पारमे  अनेकानेक सुर-तान दैत निर्धारित मंत्रकेँ  गबैत रहैत छलाह । बाल्टीक-बाल्टी सरबत घोरल जाइत छल आ कीर्तनिआँसभकेँ कीर्तन समाप्तिक बाद पिआओल जाइत छल । एकटा मंडलीक समय समाप्त हेबासँ पहिने दोसर मंडली तैयार रहैत छल जाहिसँ नवाह संकीर्तन अवाध्य चलैत रहए,खंडित नहि होअए।

संकीर्तनक मंत्रकेँ फिल्मी गानाक तर्जपर गेनाइ आ कीर्तनमे घुमैत काल अनेकानेक प्रकारक नृत्य भंगिमा सेहो कैटा मंडली द्वारा कएल जाइत छल । एकटा झालि बजओनिहार सामनेक दोसर झालि बजओनिहारक झालिपर झालि रखबाक हेतु उनटि जाइत छलाह । झालिपर- झालि बजाकए फेर पूर्वबत भए जाइत छलाह । धीया-पूतासभ एहि दृष्यसभसँ बहुत प्रभावित  रहैत छलाह आ घंटो कार्यक्रमकेँ देखैत रहैत छलाह । जमुआरीक मंडली एहि हेतु नामी छल । एहि मंडलीमे हमर पिताजीक एकटा कर्मचारी स्वर्गीय कीर्तन सिंहकेँ कीर्तन करैत देखि हमरा बहुत नीक लगैत छल । कहि नहि सकैत छी जे गाम-गामसँ अनेकानेक कीर्तन मंडलीकेँ अबैत-जाइत देखि नेनासभकेँ कतेक प्रशन्नता होइत छल। नबाह एक हिसाबे ग्रामोत्सव होइत छल ।

एहन माहौल भए गेल रहैक जे हमसभ चारि-पाँचटा नेनासभ मिलि कए अपने ओसारापर अष्टयाम शुरु कए देने रही । बादमे जखन बाबूजीकेँ पता चललनि तँ ओ बहुत असमंजसमे रहथि । हमसभ कोनो खराप काज तँ नहि करैत रही जे सोझे रोकि देल जाइत,मुदा समस्या रहैक जे दूपहर रातिमे ओकरा कोना आगू ससराओल जाएत । लग-पासक धीया-पूतासभकेँ हम जा-जा कए बजाबी मुदा सभठाम लोकसभ किछु -ने-किछु दिक्कतिबला गप्प करथि कारण राति बढ़ल जाइत छल,लोकसभ नीन्नसँ मातल छल । ऊपरसँ जाढ़क मास छलैक । सीरक छोड़ि कए कीर्तन करए के अबैत? हारि कए आधा रातिमे कीर्तन बंद करए पड़ल । मोसकिलसँ तीन-चारिटा छौंड़ासभ  मिलि कए एकटा टेबुलक चारूकात घुमि-घुमि कए अष्टयाम करए चलल रही । टेबुलक बीचमे भगवानसभक फोटो राखि देने रहिऐक । एक हिसाबे ई धीया-पूतासभक खेल छल । असलमे किछुदिनसँ लगातार गाममे यत्र-तत्र  एहन कीर्तनसभ होइते रहल छल जकर प्रभाव नेनासभक माथापर पड़ल हेतैक ,सएह बुझा रहल अछि। अष्टयामक संकल्प अधूरा रहि गेल । एहिबातक दुख कैगोटेकेँ भेलनि आ थोड़ेक दिनक बाद फेरसँ विध-विधानसँ अष्टयामक आयोजन हमरसभक दरबाजापर भेल । कहि नहि सकैत छी जे हम आ हमर संगीसभ एहि बातसँ कतेक खुश भेल रही ।

अष्टयामक प्रभाव भेल कि नहि भेल से तँ नहि कहब मुदा ओहि साल कोनो तेहन आफद नहि आएल जकर आशंकासँ गामक-गाम लोकसभ अष्टयाम,नवाह,यज्ञसभ करए लागल रहथि। हँ,ओहिसाल एकटा बात जरूर भेल। की भेल? मोन पड़ि रहल अछि की? नहि, तँ सुनू । गामक-गाम आम खूब फड़ल रहए । कलमसभमे आमक पथार लागि गेल रहए । आम  खाइत-खाइत लोकसभ जहन थाकि गेलाह तँ धरिआक -धरिआ अमोट पाड़ल गेल । अखनो मोन पड़ैत अछि जे कलमसभमे कतेक चुहचुही रहैत छल ।

नेनाक बाते किछु आओर होइत छैक । कलममे आमक रखबारी करबाक हेतु मचान बनाओल गेल छल ।  हमहु अपन संगीसभक संगे आमक रखबारीक बहाना बनाकए कलममे रातिभरि रहि जेबाक जोगारमे रही । मुदा बाबूजीकेँ बहुत चिंता भेलनि आ राति बढ़ैत देखि लालटेन लेने कलम पहुँचि गेलाह । हारि कए हमसभ घर आपस भए गेलहुँ।

गाम-गाममे अष्टयाम आ नवाह अखनो होइते अछि । हमरा गाममे तँ नियमित रूपसँ सालमे एकबेर नवाह होइते अछि । मुदा जे उजाहि सन् १९६२मे उठल रहए से फेर कहिओ देखबा-सुनबामे नहि आएल । आब तँ ओ बात बहुत पुरान भए गेल । मुदा अखनो कीर्तनसभक प्रतिध्वनि माथक कोनो कोनमे ओहिना होइत रहैत अछि जेना की ई कल्हुके गप्प होइक ।

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