शनिवार, 29 जुलाई 2017

भूमिका





 


भूमिका



१२ नवम्‍बर २०१६ कार्तिक शुक्ल त्रयोदशीक सायंकाल पू. माता दयाकाशी देवीक देहावशानक बाद मोन तेतेक दुखी ओ अशान्‍त भऽ गेल जेकर वर्णन असम्‍भव। लगभग चारि मास धरि राति-राति भरि निन्न नहि भेल। कहियो काल भोरुपहरमे आँखि लगैत छल, ओहो थोड़बे कालक लेल। सगर राति ओहिना माने टकटकीए-मे...। सम्‍पूर्ण दिनचर्या अस्‍तव्‍यस्‍त भऽ गेल। एहेन मानसिक स्‍थितिसँ उवरबामे ऐ आलेख सबहक सहारा भेटल। ई आलेख सभ हमर जीवनक बेकतीगत अनुभव ओ सोचपर आधारित अछि। भऽ सकैए हम जे अनुभव कएल वा तेकरा लिखबाक जे प्रयास कएल, बहुतो गोटे ताहिसँ ओही क्षेत्रमे, ओही विषयपर श्रेष्‍टतर होइथ।

गाम-घरसँ लऽ कऽ भारतक राजधानी–दिल्‍ली–धरिक प्रवासक क्रममे अनेकानेक तरहक घटना घटल, अनेकानेक बेकती सभसँ मदैत भेटल, अनेको लोकक सहयोगसँ जीवनमे बढ़बाक अवसर प्राप्‍त भेल। ऐ क्रममे केतेको बेकतीक चर्च प्रस्‍तुत पोथीमे भेलो अछि, आ केतेको गोटे छुटबो केलाह। जीवनक यात्रामे जे जेतए आ जइ रूपे भेटला हम हुनकासँ किछु-ने-किछु सीखबाक प्रयास कएल। एहेन अनेको लोक छैथ जे एकतरफा अपन विचार तथा काजसँ मदैत करैत रहला, हम ओइ सभ बेकतीक प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्‍यक्त करैत स्‍पष्‍ट कऽ रहल छी जे ऐ पोथीमे बहुत रास बात छुटि गेल अछि। भऽ सकैए आगाँ ओइ छुटल प्रसंग सबहक वर्णन करबाक सौभाग्‍य भेटए आ हम ओइ सभ प्रसंगकेँ क्रमश: समावेश कऽ सकी।

शुरूक २५-२६ वर्ष हम गामेमे वा गामक आसेपासमे रहलौं। पछाति भारत सरकारक केन्‍द्रीय सचिवालय सेवामे नौकरी भेलाक बाद दिल्ली ओ गामक बीच तारतम्‍य बैसाएब ओ बनौने रहब, क्रमश: कठिन होइत चल गेल। यद्यपि गामपर पू. मायकेँ रहबाक कारण गामक आबा-जाही निरन्‍तर बनल रहल। कालक्रमे हमर तमाम मित्रमण्‍डलीक मत छल जे सेवा निवृत्तिक बाद दिल्‍ली वा दिल्‍लीक आसे-पास रहब बेसी नीक। परिवारोमे सभ बेकतीक एकमतसँ यएह राय छल। ओना, लगभग चालीस बर्खक बाद आब दिल्ली घर जकाँ भऽ गेल अछि। बच्‍चा सभ अहीठाम छैथ। सभ सुविधा अहीठाम अछि, सेवा निवृत्तिक पछातियो ओहिना व्‍यस्‍तता बनले अछि। दिल्‍लीमे एतेक दिन रहलाक बादो गाम-घरक उद्वेग तँ अबिते अछि। रहि-रहि कऽ घटित घटना क्रम सभ बिजलोका जकाँ माथमे चमैक जाइत अछि। चमकबो केना ने करत, आखिर अपन लोक तँ अपने होइत अछि किने, अपन गाम अपने होइत छै किने। आ एकर कोनो विकल्‍पो तँ नहियेँ होइ छइ।

ऐ पुस्‍तकक विभिन्न आलेखमे यथासाध्‍य बिना किनको कष्‍ट देने अनेको घटना-क्रमकेँ प्रेषित करबाक प्रयास कएल अछि। तथापि जँ केतौ कोनो रूपे किनको कनिक्को मनमे आक्षेप बुझबामे आबए तँ ओ मात्र संयोग भऽ सकैत अछि, तथापि क्षमा चाहब।

हमर समस्‍त आलेखक प्रथम पाठक हमर पत्नी श्रीमती आशा मिश्रक निष्पक्ष राय सँ बहुत मदति भेटल । प्रत्येक आलेखके ओ धियानसँ पढलथि एवम् ओहिमे   गुणात्मक सुधार केलथि, जइसँ ऐ आलेख सभकेँ सही दिशा भेटल ।हुनकर अभूतपूर्व योगदान अछि ।ऐ पोथीक Forward लिखनिहार डॉ. विनय कुमार चौधरीजी आर.एम.कॉलेज सहरसाक समाजशास्‍त्र विभागक प्रोफेसर छैथ, हमर अभिन्न मित्र, शुभचिन्‍तक छैथ। ओ स्‍वयंमे एकटा संस्‍था छैथ। सहरसामे रहि केतेको समाजिक काजसँ जुड़ल छैथ। अनेको पोथीक लेखक छैथ। हुनका प्रति आभार जे ओ Forward लिखबाक कष्‍ट केलैन। हम मैथिलीमे लिखी ऐ लेल डॉ. जयकान्‍त मिश्रजी बहुत बेर कहैत रहै छला। हलॉंकि प्रसंगवश ई बात कएकटा आलेख सभमे विस्‍तारसँ आएलो अछि। वर्तमानमे हमर ग्रामीण ओ मित्र डॉ. कमला कान्‍त भण्‍डारी तथा डॉ. कैलास कुमार मिश्र निरन्‍तर उत्साहित करैत रहलाह। ऐ पोथीक कल्‍पना किन्नौं साकार नहि होइत जँ श्री उमेश मण्‍डलजी (बेरमा, निर्मली) धनधोर परिश्रमक संग हमर हस्‍तलिखित पाण्‍डुलिपि सभकेँ स्‍वच्‍छ प्रति प्रस्‍तुत करबामे सुलभ नहि भऽ सकितैथ। मैथिली भाषाक हुनकर गहन ज्ञानक लाभ ऐ आलेख सभकेँ परिस्‍कृत करबामे भेटल, ऐ लेल  हम हृदयसँ धन्‍यवाद एवम्‍ आशीर्वाद दइ छिऐन।

अन्‍तमे माता-पिता एवम्‍ समस्‍त श्रेष्‍ठ जनकेँ सादर प्रणाम करैत ई पोथी अपने लोकनिक सम्मुख प्रस्‍तुत करैत अपार हर्ष भऽ रहल अछि।


सादर...।




  रबीन्द्र नारायण मिश्र

ग्रेटर नोएडा, २५ जुलाई २०१७























पू. स्वर्गीय माता दयाकाशी देवीक

स्‍मरणमे ई पोथी सादर ससिनेह समर्पित



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शनिवार, 22 जुलाई 2017

तिरुअनन्‍तपुरम

 

 

तिरुअनन्‍तपुरम

दिल्‍लीसँ ९ बजे रातिमे हम सभ वायुयानसँ त्रिवेन्‍द्रम हवाइ अड्डापर उतरलौं। ऐ यात्रामे लगभग तीन घन्‍टा समय लागल। बेस पैघ जहाज रहइ जइमे तीन साएसँ बेसी यात्री एकसंग सवार रहैथ। बीचमे कोचीमे सेहो जहाज उतरल छल। बहुत रास यात्री ओहूठाम उतरला, मुदा काफी मात्रामे सवारो भेला, थोड़बे कालक यात्राक पछाइत त्रिवेन्‍द्रम पहुँच गेला। त्रिवेद्रम हवाइ अड्डापर उतरैत जहाज समुद्रक ऊपर जे भ्रमण करैत रहल, ओ दृष्‍य बहुत विहंगम छल..!
त्रिवेन्‍द्रम हवाइ अड्डापर उतरलापर देखलौं जे ओइ जहाजसँ कएटा वीआइपी सेहो उतरलैथ। हुनका लोकनिक स्‍वागतक नाराक बीच हम सभ अपन गन्‍तव्‍य स्‍थानपर अर्थात् केरल सरकारक अतिथि गृह विदा भऽ गेलौं।
केरल भारतक एकटा प्रान्‍त अछि। एकर राजधानी तिरुवनन्‍तपुरम अर्थात् त्रिवेन्‍द्रम अछि। मलयालम एकर मुख्‍य भाषा थिक। हिन्‍दू, मुसलमानक अलाबा ईसाइ सेहो काफी मात्रामे एतए रहै छैथ। अपन सांस्‍कृतिक ओ भाषा वैशिष्‍ट्यक कारण दक्षिणक चारि राज्‍यमे एकर फराक पहिचान अछि।
पौराणिक कथाक अनुसार परशुराम अपन फरसा समुद्रमे फेकि देला, जइसँ ओही अकारक भूमि समुद्रसँ बाहर निकैल गेल ओ केरलक प्रादुर्भाव भेल। कहल जाइत अछि जे चेट स्‍थल: कीचड़ ओ अलम प्रदेश शब्‍दक योगसँ चेरलम शब्‍द बनल जे बादमे केरल बनि गेल। बहुत दिन तक ई भू-भाग चेरा राजाक अधीन छल, ओहू कारणसँ एकरा चेरलम आ बादमे केरलम नाम पड़ल।
केरलक प्राकृतिक सौन्‍दर्य अद्भुत अछि। तँए एकरा ईश्वरक अपन घर सेहो कहल जाइत अछि। समशीतोष्‍ण मौसम प्रचूर वर्षा, प्राकृतिक सौन्‍दर्य, सघन वन, समुद्र घट ओ चालीससँ अधिक नदी, सभ मिलि एकरा सचमुच पृथ्‍वीपर स्‍वर्गक रूप देने अछि।
केरल भारतक दक्षिणी छोरपर अरब सागर ओ पच्‍छिमी घाटीक ५००-२७०० मीटर ऊँचाइपर अवस्‍थित अछि। केरलकेँ तीन भागमे विभाजित कएल गेल अछि- तटीय निचला इलाका, उपजाउ मिडलैण्‍ड आ हाइलैण्‍ड्स। केरलक निचला भागमे अन्‍तहीन वैकवाटर ओ चौआलिसटा नदी अछि। मिडलैण्‍ड्स काजू, नारियल, अकीका अखरोट, केरा, चाउर, अदरक, कारी मिर्च, कुसिआरक संग-संग आर-आर बहुत रास वनस्‍पतिक हेतु प्रसिद्ध अछि। जंगली हाइलैण्‍ड्स चाय, कॉफी, रबर, मसाला सबहक बगान ओ वन्‍यजीव सबहक लेल प्रसिद्ध अछि।
केरलक शान्‍त समुद्र तट, नाना प्रकारक वन्‍यजीव, आकर्षक वैकवाटर, एवम्‍ आनन्‍ददायक वैकवाटर सभ जगत प्रसिद्ध अछि। सड़क मार्गसँ यात्रा केलापर केरलक मनोरम प्राकृतिक छटाक बेहतर आनन्‍द लेल जा सकैत अछि। 
दक्षिनी केरल अलेप्‍पीक वैकवाटरसँ तमिलनाडूसँ सटल दक्षिनी सीमाक तटीय क्षेत्र शामिल अछि। केरलक राजधानी त्रिवेन्‍द्रम, कोवलम ओ वरकला समुद्रीय तट एवम्‍ प्रतिष्‍ठित वैकवाटर ऐ क्षेत्रमे पड़ैत अछि।
१९८० ईस्‍वीसँ पूर्व केरलमे बहुत कम पर्यटक अबैत छल। ओकर बाद स्‍थानीय सरकार लोकक भागीदारीसँ जबरदस्‍त प्रचार-प्रसार केलक जइसँ पर्यटक लोकनिक आवागमन बढ़ल। बहुत रास पर्यटक स्‍थल सबहक बेवस्‍था छोट-मोट कारोबारी सबहक हाथमे देल गेल जेना कि केरलक प्रसिद्ध वैकवाटर सभमे ९० प्रतिशत भागीदारी छोट-मोट कोरोबारी सबहक अछि। पहाड़सँ लऽ कऽ समुद्र तट तक पर्यटकक आराम ओ सुविधाक निरन्‍तर चेष्टा कएल गेल। परिणामत: केरलमे पर्यटकक आकर्षण बढ़िते गेल।
केरलक राजधानी त्रिवेन्‍द्रम हम कएक बेर गेल छी। त्रिवेन्‍द्रममे कम खर्चमे सुरूचि पूर्ण ओ स्‍वादिष्‍ट भोजन उपलब्‍ध अछि। राज्‍य पर्यटन निगमक अतिथि गृहमे भोजन, जलखै आ चाह-पानक सुविधा तँ अछिए, आस-पासक केतेको ठाम इडली, बारा,कॉफी ओ चाह उपलब्‍ध रहैत अछि। भाषाक समस्‍या ओतेक जटिल नहि जेतेक की तामिलनाडूमे। अधिकांश लोक हिन्‍दी बुझैत अछि।
हमर रहबाक बेवस्‍था केरल सरकारक अतिथि गृहमे छल जेकर जेतेक प्रशंसा कएल जाए से कम होएत। सभ सुविधासँ परिपूर्ण अतिथि गृहक शुल्‍क सेहो कमे अछि। कएकटा पैघ राजनेता सभ ओइठाम अबैत-जाइत रहैत छैथ, तॅँए कएक बेर ओतए स्‍थल भेटब आसान नहि रहैत अछि।
यात्राक क्रममे हम ओइ ठामक प्रसिद्ध पद्मनाम मन्‍दिर पहुँचलौं। पद्मनाम मन्‍दिर दुनियाँक कोनो धर्मक कोनो मन्‍दिरसँ धनिक अछि। बेसुमार सोना, चानी, जवाहरात ओइठाम सैंकड़ो सालसँ राखल अछि। कहल जाइत अछि जे ओइ सम्‍पैतमे अधिकांश ओइठामक राजा सबहक योगदान छैन जे अपनाकेँ पद्मनाम भगवानक दास बुझैत छला। दोसर बात जे सुनबामे आएल ओ ई जे स्‍थानीय राजा आक्रमणमे लूट-पाटसँ बँचेबाक हेतु अपन समस्‍त मूल्‍यवान वस्‍तु मन्‍दिरक तहखानामे रखबा देलखिन। जे जेना भेल होइ मुदा ओइ मन्‍दिरमे अकूट सम्‍पैत भरल अछि, जे राखल-राखल व्‍यर्थ भेल अछि। लोककेँ तँ तखन बुझबामे एलै जखन उच्‍चतम न्‍यायालयक आदेशपर पाँचटा तहखाना खोलल गेल ओ ओइमे राखल गेल अमूल्‍य वस्‍तु सबहक गणना होमए लागल। जेतेक वस्‍तु हिसाव-किताव भेल तेकरे मूल्‍य लाखो कड़ोरमे भऽ जेबाक अनुमान अछि। छठम तहखाना धार्मिक किम्‍ववंतीक कारण नहि खोलल गेल। कहबी छै जे ओकरा जे खोलत से जीवित नहि रहत। हम जखन ओइ मन्‍दिरमे गेल रही तँ उपरोक्‍त समाचार सभ आबि गेल रहैक मुदा केतौ किछु बाहरसँ सुनबामे नहि आएल, आ नहियेँ किछु देखाएल।
पद्मनाम मन्‍दिरमे पहुँचलाक बाद सभसँ पहिने सर्ट-पैन्‍ट निकालि कऽ धोती पहिरए पड़ल। धोती ओहीठाम मन्‍दिर प्रबन्‍धक द्वारा उपलब्‍ध करौल जाइत अछि। तेकर बाद पक्‍तिवद्ध भऽ दर्शन होइत अछि। चूँकि हमरा जोगार छल, अस्‍तु भीआइपी दर्शन करबाक मौका भेटल । सभसँ आगू एकदम गर्भ गृहमे जा कऽ पद्मनाम भगवानक दर्शनक सौभाग्‍य हमरा भेटल।
संयोगसँ भारत सरकारक सेवा निवृत सचिव सेहो दर्शन करए गेल छेली। हम हुनका संगे काज केने रही। चूँकि ओ पाछाँ रहैथ, तँए हम हुनका नहि देख सकलयैन। ओहो केरल सरकारक अतिथि गृहमे ठहरल रहैथ। ओइठाम स्‍वागत कक्षमे हुनकासँ भेँट भेल। ओ कहली जे पद्मनाम मन्‍दिरमे हमरा देखने छेली। त्रिवेन्‍द्रम यात्राक सन्‍दर्भमे गप-सप्‍पक बाद हम सभ अपन-अपन कक्षमे चलि गेलौं।
पद्मनाम मन्‍दिरमे विष्‍णु भगवान आनन्द सयनम मुद्रामे आदि शेष नागपर पड़ल छैथ। ओ ओइठामक राजवंशक कुल देवता मानल जाइत छैथ।
३ जनवरी १७५०क त्रावणकोरक महाराजा महाराज श्री अनीझुम थिरूनाल त्रावणकोर राज्‍यकेँ भगवान पद्मनाम स्‍वामीकेँ समर्पित कए स्‍वयंकेँ हुनकर दासक रूपमे घोषित कए देला। तेकर बादे ओ स्‍वयं ओ हुनकर उत्तराधिकारी श्री पद्मनाम दासक उपाधि ग्रहण कए लेलैथ। ऐ प्रकारेण त्रावणकोर सम्‍पूर्ण राज्‍य भगवान पद्मनाम स्‍वामीक समर्पित भऽ गेल। श्री पद्मनाम दासक उपाधि प्राप्‍त करक हेतु राजकुलक नवजात शिशुकेँ प्रथम जन्‍म दिवसपर श्री पद्मनाम मन्‍दिरक मोटक्कालमण्‍डपमपर राखि कऽ जलाभिषेक कएल जाइत अछि। तेकर बादे ओ श्री पद्मनाम दासक उपाधि रखबाक पात्र मानल जाइ छैथ।
त्रावणकोरक अन्‍तिम महाराजा मार्तण्‍ड वर्माक जन्‍म २२ मार्च १९२२ केँ भेलैन। हुनकर पिताक नाओं रवि वर्मा ओ माता संथु पारवथी वयी (कनिष्‍ठ महारानी) छेलैन। ९१ वर्षक उमेरमे १६ दिसम्‍बर २०१३ केँ हुनकर मृत्‍यु भऽ गेल। हुनकर मृत्युक बाद ओइ राजवंशक प्रतीकात्मक उपस्‍थिति समाप्‍त भऽ गेल। सन्‍ १९७१क संविधान संशोधनक बाद राजा/महाराजा सबहक उपाधि समाप्‍त भऽ गेल। तँए त्रावणकोरक कानूनी शासक तँ केरल सरकार भऽ गेल आ महाराजाकेँ मन्‍दिरक देख-भालक कानूनी अधिकारपर प्रश्‍नचिन्‍ह लागि गेल। केरल उच्‍च न्‍यायालय ऐ विवादमे अही तरहक बेवस्‍था देलक।
महाराजा मार्तण्‍ड वर्मा सन्‍ १९४७ मे स्‍वतंत्रताक समयमे त्रावणकोरक भारतमे विलयक अन्‍तिम गवाह छला। कहल जाइत अछि जे त्रावणकोरक राज परिवार ओकरा स्‍वतंत्र राष्‍ट्र रखबाक पूरजोर प्रयास केलक, जे अन्‍ततोगत्‍वा सफल नहि भेल आ त्रावणकोर भारतक हिस्‍सा बनि गेल।
स्‍वतंत्राक बाद बदलल महौलमे राज परिवारक अनेको सदस्‍य राज्‍यसँ बाहर जाए सामान्‍य नागरिक जकाँ जीवन-यापन करए लगलाह। महाराजा मार्तण्‍ड वर्मा सेहो सपरिवार बंगलोर चलि गेला। सन् १९९१मे महाराजा चिथिर लरुनलक मृत्‍युक समय जनतामे जवरदस्‍त सहानुभूति देखल गेल। तेकर बादे मार्तण्‍ड वर्माकेँ लोक महाराजा कहए लागल।
पद्मनाम मन्‍दिरक सामने बनल राज महलक चोटीपर घड़ी मेघान मणिक नामसँ जानल जाइत अछि। ई करीब साए साल पुरान अछि। ई प्राचीन समयक अभियांत्रिक चमतकारक नमूना अछि। घड़ीक आकर्षण ओइमे राक्षसक मुखैटाक संगे-संग दुनू कात विद्यमान बकरा अछि। जहाँ घन्‍टा पुरैत अछि, राक्षस अपन मुँह खोलैत अछि। आ दुनू बकरा ओकर गालपर चाटी मारैत अछि, जइसँ घण्‍टाक जोरदार स्‍वर निकलैत अछि आ राक्षस अपन मुँह बन्न कऽ लैत अछि। जेतेक बाजल रहैत अछि तेतेक बेर ओ क्रिया दोहराइत अछि। कहक माने जँ चारि बजतै तँ चारि चमेटा ओइमे राक्षसकेँ दुनू बकरा मारतै आ चारि बेर घण्‍टाक अबाज सुनैमे औत। अछि ने चमतकारी यन्‍त्र? मुदा आब ओ घड़ी केतेको सालसँ खराप पड़ल अछि।
पद्मनाम स्‍वामी मन्‍दिरक सामने कुथीरमलिका पैलेश म्‍युजियम अछि। ऐ महलक निर्माता त्रावणकोरक  महाराजा स्‍वाथी थीरुनल बलराम वर्मा छला। ओ महान कवि, समाज सुधारक, गायक एवम्‍ राजनेता छला। ऐ संग्रहालयमे नाना प्रकारक अमूल्‍य पेंटिंग सभ राखल अछि। ऐ संग्रहालयकेँ सोम दिन छोड़ि कऽ कोनो दिन प्रात: साढ़े आठ बजेसँ एक बजे आ तीन बजेसँ साढ़े पाँच बजेक बीचमे देखल जा सकैत अछि। प्रति वर्ष ४ सँ १३ जनवरीक बीचमे ओइठाम महाराजा स्‍वाथी थीरुलक स्‍मृतिमे संगीत उत्‍सव मनौल जाइत अछि।
महलसँ मन्‍दिर जएबाक गुप्‍त मार्ग अछि जइ बोटे महाराजा नित्‍य पद्मनाम मन्‍दिरमे पूजा अर्चना करैत छलाह। अखनो भोरक एक घन्‍टा समय भगवानक पूजाक हेतु महाराजाक हेतु आरक्षित अछि। महाराजा पूजा कऽ लइ छैथ तखने आम जनताकेँ मन्‍दिरमे प्रवेशक अनुमति भेटैत अछि।
राजमहलमे तरह-तरह केर वस्‍तु सभ (जे महाराजाकेँ भेँटमे देल जाइत छल) राखल अछि। महलक अधिकांश हिस्‍सा बन्‍द पड़ल अछि। कहल जाइत अछि जे ऐ महलक निर्माणक थोड़बे दिनक बाद महाराजाक मृत्‍यु भऽ गेल। तँए एकरा अशुभ बुझि महलकेँ छोड़ि राज परिवार आनठाम रहए लागल।
सायं काल हमरा लोकनि त्रिवेन्‍द्रमक कोवलम समुद्र तटपर गेलौं। दूर-दूर तक देखाइत स्‍वच्‍छ जल, दीर्घ समुद्र तट ओ दूरगामी क्षितिजक अद्भुत दृश्‍य उत्पन्न करैत अछि। समुद्र तटपर प्रकाश स्‍तम्‍भ दूरेसँ देखल जा सकैत अछि।
सूर्यास्‍तक छटा ओ अकासक मनमोहक रंग समुद्रतट प्रेमीकेँ सबहक आनन्‍दकेँ पराकाष्‍ठा (Climex) पर पहुँचा दैत अछि। केतेको बेकती समुद्रतट पर साइकिल चलेबाक आनन्‍द लैत देखबामे एला।
प्रात भेने हमरा लोकनि वर्कला समुद्र तटपर गेलौं। ओइठामसँ अरब सागरक अद्भुत दृष्‍य देखलौं। ओही क्रममे त्रिवेद्रमक दछिनबरिया भागमे अवस्‍थित पूवार नामक गाम सेहो देखए गेलौं। ओइठाम वैकवाटर ओ टापूक संगम स्‍थल हेबाक कारण पर्यटककेँ अद्भुत आनन्‍दक अवसर प्रदान करैत अछि।
त्रिवेन्‍द्रमसँ कन्‍याकुमारी रोडसँ जेबाक रस्‍तामे पद्मनाम पैलेश दर्शनीय थिक। ई वस्‍तुत: आजुक तामिलनाडूमे पड़ैत अछि, मुदा ऐ महलक बेवस्‍था एवम्‍ शासन केरल सरकारक अधीन अछि।
पद्मनामपुरम पैलेश १६ मी शताब्‍दीक शानदार लकड़ीक महल थिक। १५५० सँ ई १७५० तक रहल त्रावणकोरक राजा लोकनिक ई महल छल। ई वस्‍तु कलाक केरलक स्‍वदेशी शैलीक उत्‍कृष्‍ट नमूना अछि। प्राचीन आंतरिक अंदरुनी रोझवेड नक्‍काशी ओ मुर्तिकला सजाबटसँ भरल अछि। महलमे १७म ओ १८म शदीक भित्ति चित्र शामिल अछि। महोगनीमे संगीत धनुष, रंगीन अभ्रकक संग खिड़की, चीनी नक्काशीक संग शाही कुर्सी, अद्भुत आकर्षण उत्‍पन्न करैत अछि। राजमाताक महलमे ९० अलग-अलग प्रकारक पुष्‍प डिजाइनक संग लकड़ी ओ सौगानक नक्काशीदार छत आकर्षणक केन्‍द्र अछि।
पर्यटककेँ पद्मनाम पैलेश देख कऽ आनन्‍द तँ होइते छैन जे तत्‍कालिन राज घरानाक वैभवक पराकाष्‍ठाक सद्य: प्रमाण सेहो देखबामे अबैत अछि। महलक विभिन्न भागमे घुमैत-घुमैत हम सभ थाकि गेलौं। बाहर आबि कऽ थोड़ेकाल धरि छाहैरमे सुस्‍तेलौं आ तेकर पछाइत कन्‍याकुमारी दिस विदा भेलौं।


बुधवार, 19 जुलाई 2017

इच्‍छा पत्र(Will)




 


इच्‍छा पत्र

मृत्‍यु अवश्‍यंभावी थिक। एक-ने-एक दिन सभ बेकती ऐ दुनियासँ सभ किछु छोड़ि कऽ चल जाइत अछि। जीवन भरिक स्‍वअर्जित एवम्‍ पैत्रिक सम्‍पैत अहीठाम रहि जाइत अछि। सवाल अछि जे ऐ तरहेँ छोड़ल गेल सम्‍पतिक की हएत? ओकर मलिकाना हक केकरा भेटत..?

केतेक बेर ऐ प्रश्नक उत्तर तकबामे वर्षो लागि जाइत अछि। लोक आपसेमे लड़ि जाइत अछि। भाइ-भाइक दुश्मन भऽ जाइत अछि। आब तँ भाइक अलाबा बहिनो सभ ऐ युद्धमे कुदि जाइत अछि, खास कऽ तखन जखन सम्‍पतिक मूल्‍य ज्‍यादा हो, शहरी सम्‍पैत किंवा गामो-घरक सड़कक कातक सम्‍पैत सभ फसादक जड़ि भऽ रहल अछि। केतेको ठाम छोट-छोट विवाद लऽ कऽ अहंक टकराव भऽ जाइत अछि। कोनो पक्ष सुनैले तैयार नहि। तखन की हएत? जँ मृत्त बेकती इच्‍छा पत्र (Will) कऽ गेल छैथ तँ विवाद नहि हएत, नहि तँ सालक-साल मोकदमा चलत, जइसँ कोट-कचहरीक चक्कर लगबैत रहू एवम्‍ वकीलकेँ फीस थम्‍बैत रहियौ...।

हमरा एकटा नामी वकील कहलैन जे एकटा छोट सन जमीन–जेकर मूल्‍य ७-८ लाख हेतइ–तैपर दू भैयारीमे विवाद छइ, अहंकारवश कियो हटए लेल तैयार नहि। जबकि एक भाँइ सात लाख टका फीसक रूपमे हमरा दऽ चूकल अछि। एतबे नहि, एक-आध लाख आरो भेटबे करत।

...कहक माने जे सम्‍पतिक जेतेक मूल्‍य होइत से वकील साहैब असूलि चूकल छैथ। तैयो लड़ाकू भैयारीमे सँ कियो पाछू हटैले तैयार नहि अछि..! ऐ तरहक लड़ाइमे कएक टा पुस्‍तैनी मकान खण्‍डहर भऽ जाइत अछि। अस्तु ई जरूरी ओ नितान्‍त आवश्‍यक अछि जे जिनका कोनो प्रकारक–माने चल वा अचल–सम्‍पैत अछि, से मृत्‍युक पूर्व इच्‍छा पत्र बना लेथि, कारण मृत्‍युक तारिखकेँ के जनैत अछि?

जँ कोनो बेकती मृत्‍युसँ पूर्व इच्‍छा पत्र (वसीयत) कऽ कऽ जाइ छैथ तँ हुनकर सम्‍पतिक हस्‍तान्‍तरण स्‍वत: ओइ बेकतीकेँ भऽ जाएत जेकरा सम्‍बन्‍धित इच्‍छा पत्रमे सम्‍पतिक अधिकारी बनौल गेल रहत। ओ बेकती माता, पिता, पुत्र, पुत्री, भाए, बहिन, भातिज, मित्र वा कियो अन्‍य भऽ सकैत छैथ। परन्‍तु जँ सम्‍पतिक मालिक बिना इच्‍छा पत्र बनौने मरि जाइ छैथ (Intestate) तखन ओइ सम्‍पतिक हस्‍तान्‍तरण आकि बँटबारा कानूनक अनुसार कोर्ट द्वारा होइत अछि। ऐ प्रक्रियामे सालो लागि सकैत अछि। खास कऽ जखन सम्‍बन्‍धित पक्ष परस्‍पतर विरोधी दाबा करैत हो। यदि सम्‍बन्‍धित पक्ष समझदार हुअए, आपसमे रजामन्‍दी होइक तखन ऐ तरह सम्‍पतिक निपटान असानीसँ भऽ जाएत। मुदा केतेको बेर सम्‍पतिकेँ मूल्‍यवान होइक कारणे बहिन वा बेटीक हक नहि देबाक कारण किंवा अहंक टकरावक कारण सम्‍पतिक बँटबारा/हस्‍तान्‍तरण परिवारिक कलह केर कारण भऽ जाइत अछि। अस्‍तु उचित ओ आवश्‍यक थिक जे जँ अहाँकेँ सम्‍पैत अछि तँ तेकर मृत्‍योपरान्‍त निस्‍तारण हेतु Will अबस्‍स करी।

वसीयत कोनो बेकती द्वारा मृत्‍युक बाद ओकर स्‍वअर्जित सम्पतिक उत्तराधिकारीक बारेमे कानूनी घोषणा अछि जे ओइ बेकतीक जीवनकालमे बदलल वा रद्द भऽ सकैत अछि। मृत्‍युक बाद ओ लागू भऽ जाइत अछि। पैतृक सम्‍पतिक बारेमे वसीयत नहि कएल जा सकैत अछि। अस्‍तु वसीयत द्वारा स्‍वअर्जित सम्‍पतिक उत्तराधिकारी तय कएल जा सकैत अछि।

भारतीय उत्तराधिकार कानून १९२५क धारा-२ (एच) मे वसीयतक कानूनी व्‍याख्‍या कएल गेल अछि। उपरोक्‍त कानूनक धारा ५क अनुसार वसीयत वा बिना वसीयतक स्‍वअर्जित सम्‍पितक बेवस्‍था कएल गेल अछि।

वसीयत केनिहारक उमर कम-सँ-कम २१ वर्ष हेबाक चाही। मानसिक रूपसँ स्‍वस्‍थ हेबाक चाही तथा बिना कोनो दबाबमे वसीयत करक चाही, ऐ सभ बातकेँ ओइमे उल्‍लेख करक चाही।

इच्‍छा पत्र वसीयत केनिहारक जीवन कालमे कखनो ओकरा द्वारा बदलल जा सकैत अछि, संशोधित कएल जा सकैत अछि। मुदा वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बाद ओ तुरन्‍त लागू भऽ जाइत अछि। वसीयतक हेतु जरूरी अछि जे वसीयतकर्त्ता दबाबसँ नहि, अपितु स्‍वेच्‍छासँ वसीयतमे अपन सम्‍पतिक वितरण करए। ओइ बेकतीकेँ मानसिक रूपसँ स्वस्थ होएब जरूरी अछि जइसँ ओ निर्णय लेबक स्‍थितिमे हो।

भारतमे इच्‍छा पत्र तैयार करबाक विधि बहुत असान अछि। सादा कागजपर बिना कोनो स्‍टाम्‍प पेपरक इच्‍छा पत्र टंकित कएल जा सकैत अछि। मुदा हस्‍तलिखित इच्‍छा पत्र केतेको कानूनी विवादमे लाभकारी भऽ सकैत अछि। वसीयतकर्त्ताकेँ इच्‍छा पत्रक प्रथम पैरामे स्‍पष्‍ट करक चाही जे ओ स्‍वेच्‍छासँ बिना कोनो दबाबक पूरा होशोहवासमे वसीयत कऽ रहल अछि। तेकर बाद समस्‍त सम्‍पतिक एक-एक कऽ फराक-फराक वर्णन हेबाक चाही। सम्‍पैत सबहक तत्‍कालीन मूल्‍य स्‍पष्‍टत: इच्‍छा पत्रमे लिखबाक चाही। तमाम बहुमूल्‍य कागजात रखबाक स्‍थान ओइमे स्‍पष्‍टतासँ लिखल जाए जइसँ समयपर ओ सभ ताकल जा सकए।

वसीयतक भाषा सरल हेबाक चाही। वसीयतकर्त्ताक पूरा नाम लिखबाक चाही। वसीयतक सम्‍पतिक स्‍पष्‍ट विवरण हेबाक चाही। प्रस्‍तावित कानूनी उत्तराधिकारीक पूरा नाम हेबाक चाही। अन्‍तमे दूटा गवाहक नाम व पताक संग ओकर हस्‍ताक्षर हेबाक चाही। गवाह सामान्‍यत: ओहन बेकतीकेँ बनाबक चाही जे वसीयतकर्त्तासँ उम्रमे छोट होथि। यदि गवाहक मृत्‍यु पहिने भऽ जाइत अछि तँ फेरसँ वसीयत बना कऽ नव गवाहक हस्‍ताक्षर कराबक चाही।

इच्‍छा पत्रमे हस्‍ताक्षरक संग तारिख अबस्‍स लिखबाक चाही। जँ एकसँ अधिक बेर इच्‍छा पत्र बनौल गेल तँ अन्‍तिम इच्‍छा पत्र लागू होइत अछि। बढ़िया हएत जे अन्‍तिम इच्‍छा पत्रमे पूर्व इच्‍छा पत्र सभकेँ निरस्‍त करबाक चर्च होइक। इच्‍छा पत्रकेँ जस-के-तस लागू करबाक हेतु बिसवासपात्र एवम्‍ जानकार बेकतीकेँ निष्‍पादक (Executor of will) बनाबक चाही जइसँ वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बाद वसीयतकेँ बिना लाइ-लपटक अमलीजामा देल जा सकए। वसीयतकर्त्ताकेँ चाही जे केकरो निष्‍पादक (Executor) नामित करैसँ पूर्व ओकर सहमति लऽ लेल जाए।

वसीयतकर्त्ताकेँ दूटा गवाहक समक्ष हस्‍ताक्षर करक चाही। गवाहक पूरा नाम, पता सहित ओकर हस्‍ताक्षर जरूरी अछि। गवाह जँ चिकित्‍सक होइ तँ बढ़ियाँ जइसँ ओ स्‍पष्‍ट करत जे वसीयतकर्त्ता दिमागी रूपसँ स्‍वस्‍थ अछि। गवाह ओ निष्‍पादक अलग-अलग बेकती हेबाक चाही। वसीयतमे सम्‍पतिक हकदार गवाह नहि भऽ सकै छैथ। वसीयतक प्रत्‍येक पृष्‍ठपर संख्‍या लिखल जेबाक चाही एवम्‍ गवाह एवम् वसीयतकर्त्ताक स्‍पष्‍ट हस्‍ताक्षर हेबाक चाही। अन्‍तमे कुल पृष्‍ठ संख्‍या लिखल हेबाक चाही।

ऐ प्रकारसँ तैयार वसीयतकेँ राखी केतए? कारण वसीयतक काज तँ ओइ बेकतीक मृत्‍युक बादे पड़ैत अछि आ तखन ओ ऐ विषयमे किछु कहक स्‍थितिमे नहि रहैत अछि। अस्‍तु वसीयतक दूटा मूल ओ हस्‍ताक्षरित प्रति बनाबी तँ बढ़ियाँ। एकटा प्रति बैंक लॉकरमे ओ दोसर प्रति निष्‍पादक वा तेहेन विश्वस्‍त बेकतीक संग रहक चाही। असलमे चाही तँ ई जे तमाम चीज, वस्‍तु, वसीयत, पासवर्ड आदिक जानकारी एकटा डायरीमे लिखि कऽ छोड़ि दी जइसँ मृत्‍युपरान्‍त अहाँक वारिसकेँ परेशानीसँ बँचौल जा सकए। एकबेर वसीयत केलाक बाद आवश्‍यकता भेलापर पूरक वसीयत द्वारा मूल वसीयतमे संधोधन कएल जा सकैत अछि। मुदा बेर-बेर एहेन केलासँ वसीयतकेँ बदैल कऽ नव वसीयत कऽ लेब ज्‍यादा बढ़ियाँ होइत अछि। वसीयतकेँ निबन्‍धित कराबक आवश्‍यकता नहि अछि, मुदा जँ वसीयत द्वारा कोनो समाजसेवी संस्‍था (Chariable Organisation) केँ धन देबाक हो तखन वसीयतकेँ निबन्‍धित कराएब जरूरी अछि।

जेना कि पहिने चर्च कऽ चूकल छी, वसीयत सम्‍बन्‍धित वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बादे लागू होइत अछि। जँ ओइमे स्‍पष्‍टता नहि रहत तँ मृत बेकती तेकर व्‍याख्‍या करक हेतु घुरि नहि औत। तँए वसीयतक भाषा सरल, स्‍पष्‍ट ओ बाध्‍यकारी हेबाक चाही। किन्‍तु-परन्‍तुसँ बँचबाक चाही। ओइ परिस्‍थितिक विचार हेबाक चाही जेकर घटित हेबाक संभावना जीवनमे बनल रहैत अछि। वसीयत केलाक बादो सम्‍पतिक मालिककेँ मृत्‍युसँ पूर्व ओकर निपटान करबाक अघिकार बनल रहैत अछि।

कोनो बेकती जे कानूनी रूपसँ सम्‍पैत रखबाक अधिकारी अछि, वसीयतमे सम्‍पैत पाबक अधिकारी भऽ सकैत अछि। ओ नवालिग, भगवानक मूर्ति, कोनो तरहक कानूनी बेकती (Junstic person) भऽ सकैत छैथ। यदि कोनो नवालिगकेँ वसीयत द्वारा सम्‍पतिक उत्तराधिकारी धोषित कएल जाइत अछि तखन वसीयतकर्त्ता द्वारा अभिवावक नियुक्‍ति जरूरी अछि जे ऐ तरहेँ देल गेल सम्‍पतिक ओकरा वालिग हेबाकाल धरि बवस्‍था करताह।

हिन्‍दू उत्तराधिकार कानून १९५६ क धारा ३०क अनुसार स्‍वअर्जित चल वा अचल सम्‍पतिक वसीयत द्वारा उत्तराधिकारी तय कएल जा सकैत अछि। वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बाद वसीयतमे उल्‍लिखित उत्तराधिकारी सम्‍बन्‍धित न्‍यायालय द्वारा प्रोवेटक हेतु प्रार्थना कएल जाएत। प्रोवेट न्‍यायालय द्वारा आम प्रमाणित वसीयत थिक। प्रोवेट कोनो वसीयतक कानूनी रूपसँ पक्का हेबाक निर्णायक प्रमाण थिक। यदि कोनो उत्तराधिकारी द्वारा वसीयतकेँ कानूनी चुनौती देल जाइत अछि तँ सम्‍बन्‍धित पक्षकेँ नोटिस जारी हएत, सभ अपन पक्षमे न्‍यायालयमे राखि सकैत अछि। आ सबहक बातक विचारक बादे न्‍यायालय प्रोवेट जारी करत।

न्‍यायालय प्रोवेट जारी करबासँ पूर्व सुनिश्चित करैत अछि जे वसीयतपर दस्‍तखत वास्‍तवमे वसीयतकर्त्ताक अछि ओ गवाह सभ वसीयतक समय मौजूद छल। वसीयत द्वारा हस्‍तान्‍तरित सम्‍पतिक मालिकाना हकपर प्रोवेट कोर्ट विचार नहि करैत अछि। ओ तँ मात्र एतबे तय कऽ दैत अछि जे वसीयत (इच्‍छा पत्र) सही अछि कि नहि। वसीयतमे प्राप्‍त सम्‍पतिक मालिकाना हकपर सिविल न्‍यायालयमे सम्‍पतिक सम्‍बन्‍धित पक्षकार द्वारा चुनौती देल जा सकैत अछि। कहक माने जे जँ वसीयतमे देल गेल सम्‍पैतपर वसीयतकर्त्ता पूर्ण अधिकार नहि अछि, ओ सम्‍पैत ओकर स्‍वअर्जित नहि अछि आ तखनो ओकरा वसीयत द्वारा दऽ देल गेल अछि तखन ओकरा सम्‍बन्‍धित पक्षकार द्वारा सिविल न्‍यायालयमे चुनौती देल जा सकैत अछि।

सारांश जे इच्‍छा पत्र द्वारा सम्‍पतिक हस्‍तांतरण हेतु जरूरी अछि जे सम्‍बन्‍धित सम्‍पैत स्‍वअर्जित होइक। इच्‍छा पत्रक भाषामे कोनो ओझर नहि होइक। तइ लेल बढ़ियाँ होएत जे इच्‍छा पत्र (वसीयत) कोनो योग्‍य अधिवक्‍ता द्वारा तैयार करौल जाए, जइसँ इच्‍छाकर्त्ताक मृत्‍युक बाद ओइ सम्‍पतिक हस्‍तांतरणमे कोनो विवाद नहि होइक। विवादसँ बँचैक लेल तँ इच्‍छा पत्र बनौले जाइत अछि। तँए ओकरा स्‍पष्‍ट ओ कानूनी रूपसँ पक्का हएब बहुत जरूरी अछि।

समयक कोन ठेकान। भविसक झंझट तय कऽ जाउ। अपन अर्जित सम्‍पतिक वसीयत (इच्‍छा पत्र) बना कऽ राखि दियौ आ चैनक बंशी बजाउ।  


२३.०६.२०१७

बुधवार, 12 जुलाई 2017

नवका पोखरि


नवका पोखरि



“हर-हर महादेव।

जानह हे महादेव!

हमरा मोनमे किछु छ: पाँच नहि अछि।

तूँहीं जानह हे महादेव..!”

अहाँकेँ जे बुझाए मुदा हम तँ अपना भरि सभकेँ सभ दिन केलिऐ...।

आ हम केकरा नहि केलिऐ...?”

पंचमुखी महादेवपर जल ढारैतकाल महिला सभ आपसमे अहिना चिरौरी करैत रहैत छलीह...।

एक हाथ महादेवक निर्मालपर आ दोसर हाथे जल ढारि रहल महिला सभ बीच-बीचमे मौका पबिते फदका पढ़ए लागथि। जे किओ आएल, महादेवक ऊपरसँ जल ढारलक। जाड़ होइत आकि गरमी, सभ मौसममे जलढरी अनवरत चलैत रहैत छल। रच्छ छल जे दुपहरियामे ई भीड़ कम भए जाइत रहैक जाहिसँ महादेव चैनक अनुभव करैत हेताह। कम-सँ-कम घरेलू तथा पारिवारिक झमेल सभ सुनबासँ तँ मुक्ति होइते रहनि।

चारि बजे भोरेसँ नवका पोखरिपर स्‍नानार्थी सभ टपकए लगैत छल। ओहिमे नियमित पाँच गोटे टोलसँ अबैत छलाह जाहिमे तीन गोट महिला छलीह। टाइमक सोलहन्नी पाबन्द। भोरे-भोर हर-हर महादेव!’ किछु वृद्ध नवका पोखरिक कोनपर बसल परिवारमे सँ सेहो भोरे स्नान करएबला लोक सभमे सामिल रहिते छलाह।

स्नान, ध्यान आओर आराधनाक संग महादेवक अनवरत जलढरी चलैत रहैत छल, आ ताहिसंग गपाष्टक जे आनन्द छल, तकर वर्णन नहि कएल जा सकैत अछि। कहि नहि, महादेवकेँ ई सभ कतेक पसिन्न पड़ैत हेतनि! मुदा लोक सभ तँ तृप्त लगिते छलाह। सभ अपना-आपमे मगन, सभ अपने-आपमे आनन्दित।

ओहि समयमे पोखरि-इनार खुनाएब बहुत मान-मर्यादाक बात बुझल जाइत छलैक। ओना, गाममे पहिनेसँ कएटा पोखरि रहैक, जाहिमे तीनटा पोखरि तँ हमरा सबहक टोलेमे बुझू। तकर अलाबा कुट्टी लगक पोखरि सेहो। तथापि आओर पोखरि खुनाओल गेल, तकर तात्‍पर्य बुझल जा सकैत अछि...।

नवका पोखरि प्राय: सभसँ बादमे बनल छल तेँ ओकरा नवका पोखरि कहल जाइत अछि। पोखरिक दच्छिनबरिया महारपर मन्दिरक संग रंग-रंगक फूल सभ लगाओल गेल छल। जेना-चम्पा, भालसरी, कामिनी, करबीर, अड़हुल इत्यादि। चम्पा, करबीर आ अड़हुलक बड़का-बड़का गाछ छल।

हमर पित्ती–स्व. वंगट मिश्र– नवका पोखरिक दिन-राति देख-रेख करैत छलाह। नवका पोखरिक दच्छिनबरिया महारपर भगवान शिवक पंचमुखी मूर्तिबला मन्दिर छल। नवका पोखरि तथा ओहिठामक मन्दिरक निर्माण हमर सबहक समस्त दियाद सभ मिलि कए केने रहथि।

न्दिरक प्राण-प्रतिष्ठा हमर पितामह–स्व. श्रीशरण मिश्र–द्वारा भेल रहए। पोखरिक जाइठ देबएकालक खिस्सा सभ हम सभ बच्चामे सुनिऐ। सम्पूर्ण परिसरक सफाइ स्व. वंगट काका करैत छलाह। वंगट काका असगरे जीवन पर्यन्त ओहि काजकेँ पूर्ण भक्ति-भावसँ करैत रहलाह। कहिओ थाकैथ नहि। निस्वार्थ, स्वान्त: सुखाय एहि काजकेँ करैत ओ तत्‍कालिके समाजक नहि अपितु अखनो समाजक बीच दृष्टान्त छथि। माघक भयानक ठंढ हो आकि जेठक तप्त रौद ओ देहपर एकटा गमछा मात्र रखैत छलाह। अपना समयक नामी पहलमान सेहो रहथि। नवका पोखरिक उत्तरबरिया महारपर अखाड़ा छल। ओहिठाम युवक सभकेँ कुश्तीक प्रशिक्षण दैत छलाह, डंड बैसक करैत छलाह। किलोक- किलो आखाड़ाक माटि देहमे औंसने घामसँ तर-बत्तर भए जाइत छलाह। तकर बाद बड़का खर्ड़ासँ सम्पूर्ण परिसरकेँ अपने हाथे साफ करैत छलाह। प्रात: स्नान करएबला लोक सभकेँ तरह-तरह क हिदायत दैत रहैत छलखिन। पोखरिक पानि स्‍चच्छ बनल रहए, ताहि लेल सतत सतर्क रहैत छलाह। पोखरिमे साबुनसँ कपड़ा खिचनाइ मना छल, एहि लेल ऊपरमे ब्यवस्था छल। ओहि समयमे किओ-किओ पोखरिमे साबुनसँ कपड़ा खींच लेथि, मुदा जँ पकड़ल गेलाह तँ भगवाने मालिक।

नवका पोखरिक दिन-प्रति-दिनक देख-रेखक सम्पूर्ण दायित्व ताजीवन वंगट काका बिना कोनो स्वार्थक उठओने छलाह। घन्‍टो ओहि परिसरक विकासक हेतु काज करैत रहलाह। हुनका बाद ओहि स्थानक पूर्ति नहि भए सकल, भइयो नहि सकैत छल।

वंगट काकाक गाम भरिमे धाख रहनि। कोनो पर-पंचैतीमे हुनका अबस्स बजाओल जाइत रहनि। धिआ-पुता कुश्ती लड़ए, खेती-बाड़ी करए, माल-जालक सेवा करए, महींस राखए जाहिसँ डोलक-डोल शुद्ध दुधक सद्य: लाभ होइक–ताहि विचारक पोषक छलाह। कए दिन हुनका बाबूसँ विवाद भए जाइत छलनि। विवादक मुद्दा रहैत छल जे पढ़ाइ-लिखाइ करब सार्थक थिक आकि निरर्थक? आब किओ सुनत तँ हँसत। मुदा वंगट काका ऊत्साहसँ बाजथि-

पढ़ो पूत चण्‍डी, जासे चले हण्‍डी।

कहक सारांश- खेती-बाड़ी करू, एहिमे सद्य: लाभ अछि। पढ़ाइ-लिखाइमे कहिआ की होएत से के देखलक!

गाममे किओ लुंगी पहीरलक तँ ओ जोरदार विरोध करथि। समय बीतलाक बाद आब कहल जा सकैत अछि जे पढ़ाइ-लिखाइक समर्थन करब सही छल, विरोध गलत। गाममे वा कतहु जे पढ़लक-लिखलक से आगू भए गेल। ओहू समयमे किछु गोटे कहथि-

पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नबाब।

निश्चित रूपसँ ओ सभ अग्रसोची रहथि।

न्दिरक आगूमे धर्मशाला छल। फूसक दरबज्जानुमा घर जे चारूकातसँ खुजल छल। किओ थाकल-ठेहियाएल पथिक ओतए रहि सकैत छलाह। ओ समस्त परिवारक अतिथि होइत छलाह। हुनकर सभटा ब्यवस्था होइत छल। हमरा मोन पड़ैत अछि जे एकबेर एकटा महात्मा आएल रहथि। ओ बाजैथ नहि। सिलेटपर लिखि कए अपन इच्छा, अपन मन्तव्य प्रकट करथि। हुनकासँ भेँट करक हेतु लोकक करमान लागल रहैत छल। सौंसे देह विभुति रमौने, जौरक डोराडोरि पहिरने, जटा जूट धारी भेष हुनक आकर्षणक केन्द्र रहनि।

गाम-घरमे एहन साफ-सुथरा रमणीक पार्कनुमा स्थान भेटब कठिन। ओना तँ खेत-पथार सभ हरियर कंचन रहिते अछि, थाल-कादोक अपन स्वाद सेहो छइहे, मुदा ताहू माहौलमे जे अध्यात्मिक, सांस्कृतिक केन्द्रक रूपमे नवका पोखरिक ब्यवस्था छल आ बहुत दिन धरि जेना चलैत रहल ओ बेमिसाल कहल जा सकैत अछि।

नवका पोखरिक निर्माणमे हमरा लोकनिक परिवारक समस्त लोकक योगदान छल। नवका पोखरि परिवारक गौरवसँ जुड़ल छल। ककरो कुटुम्ब अबितथि तँ नवका पोखरिपर हुनका अबस्स आनल जाइत।

ओहिठाम स्नान, ध्यान होइत,गप्प-सराका चलैत। धर्मशालामे बैस कए आराम सेहो कएल जा सकैत छल। वंगट काका नित्य दुपहरियामे ओहिठाम धर्मग्रन्‍थ पढ़थि। सायंकाल भगवान शिवक आरती-पूजाक संग नाचारी सेहो गाओल जाइत छल। ओहिमे नियमित अनेको वृद्ध लोकनि भाग लेथि।

बादशाह बाबा शिव मन्दिरक पूजाक बहुत दिन धरि ब्यवस्था देखैत रहलाह। सायंकालक नाचारीमे ओ हमर बाबा आओर वंगट काका तँ रहिते छलाह जे हुनका संगे कएटा आओर वृद्ध सभ सेहो नाचारी गायनमे भाग लए सुर-मे-सुर मिलबैत छलाह। बाबा कतए सुतल छी औ! बालक वनमे कतए-सँअएला, किओ नहि हुनकर सथिया...। आदि नाचारीक स्वर अखनो हमर कानमे गुंजित होइत रहैत अछि।

नवका पोखरिक भालसरी गाछक छाहरिमे हम कतेको दिन बैस कए प्रतियोगिता परीक्षा-सबहक तैयारी करैत रही। कतेको दिन हम अपन मित्र सभक संग साँझक समयमे ओतए बैस गप्प-सप्प करी, भविष्यक योजना बनाबी। स्वच्छ, निर्मल वातावरणमे गाम-घरक झंझटिसँ दूर नवका पोखरिपर बैस कए एकटा स्वर्गीय आनन्द होइत छल। हम नियमित भोर-सॉंझ ओहिठाम जाइत रही।

प्राय:काल नित्यकर्म-स्नान, पूजा आओर व्यायाम आदि ओतहि होइत छल। नित्य सायंकाल गप्प-सप्प करबाक हेतु कएक गोटा भेट जाथि। पूजा-पाठ तँ होइते छल। संग-संग एकटा स्वस्थ मनोरंजनक तथा अध्यात्मिकताक अनुभूति सेहो ओहिठाम होइत छल।

गाममे हमरा फरिखमे जँ ककरो देहान्त होइत तँ ओकर श्राद्धक्रर्म ओहीठाम होइत छल। हमर बाबा आओर बाबूक श्राद्ध-कर्म सेहो ओहीठाम भेल छलनि। वैदिकी श्राद्ध-क्रर्ममे बछराकेँ दागल गेल। ओकर करूण क्रन्दन अखन धरि हमरा रोमांचित करैत रहैत अछि। हमरा विचारासँ ई अमानवीय प्रयोग अछि, एहिसँ स्वर्गक सीढ़ी किओ केना चढ़त से हमर समझसँ बहार अछि? आओर जे अछि से अछि, मुदा ई काज औअल दर्जाक क्रूड़ता अछि। एकटा जीवित प्राणीकेँ सरी धीपा कए दागि देब, कतहुसँ मनुष्‍यता नहि थिक। नहि चाही एहन स्वर्ग, जाहि हेतु एकटा निरीह, निर्दोष जीवक संग क्रूड़ताक पराकाष्ठा कएल जाए। ओहुना आब गाम-घरमे एकर विरोध भए रहल अछि, कारण साँढ़ द्वारा जजाति चरि गेलासँ क्षतिक संग अन्यान्य कारण सभ सेहो अछि।

नवका पोखरिसँ हमर बाबाकेँ बहुत सिनेह रहनि। जीवनक अन्तिम समय धरि ओ नवका पोखरि अबस्स जाइत छलाह। हाथमे छड़ी लेने रोडपर चलैत एक बेर हुनका एकटा साइकिलबला टक्कर मारि देने रहनि। ओहू अबस्थामे एक्के हाथे साइकिलकेँ घिसिएने-घिसिएने अपन दरबज्जापर लए आएल रहथि।

सम्भवत: १९६७-६८ इस्‍वीक गप्प थिक। हमरा लोकनि नवका पोखरिपर पुस्तकालय बनेबाक हेतु बैसार केलहुँ। गामक तमाम गणमान्य लोक सभ बैसारमे रहथि। ओहिसँ पूर्व गाममे एकटा पुस्तकालय बहुत पहिनेसँ छल, जे कोनो कारणसँ अव्यस्थित भए गेल छल। एक समयमे ओ पुस्तकालय गामक प्रतिष्ठित संस्थान छल। १९६२क चीन-भारत युद्धक समाचार सुनबाक हेतु ओहिठाम सौंसे गामक लोक जमा होइत छल। सटले खादी भण्डार छल ओ धिआ-पुताक खेल-धूपक सामग्री सेहो छल। मुदा की भेलैक जे सभ गतिविधि कमश: ठप्प जकाँ भए गेल। नव पुस्तकालय बनेबाक बैसारमे किछु प्रवुद्ध लोकक विचार रहनि जे ओही पुस्तकालयकेँ जीर्णोद्धार कएल जाए। यद्यपि हम सभ ओहि प्रस्तावक समर्थन नहि केने रही, मुदा आब लगैत अछि जे ओ सही बिचार छल। नवका पोखरिक धर्मशालामे पुस्तकालयक स्थापना हेतु प्रयासकेँ आगू बढ़बैत कएकटा बैसार आओर भेल। पुरान पुस्तक सभ घरे-घरसँ ताकि-हेरि कए आनल गेल। पुस्तक सभ रखबाक हेतु लकड़ीक रैक बनाओल गेल।

पुस्तकालयक उद्घाटन हेतु डा. सुभद्र झाजीकेँ आमंत्रित कएल गेल। ओहि समयमे सेवा निवृत भए ओ गामेमे रहए लागल रहथि। हाथमे बेंत लेने, मिरजई पहीरिने ओ पुस्तकालयक उद्धघाटन कार्यक्रममे आएल रहथि। हमरा लोकनि हुनकासँ किछु बजबाक आग्रह कएल। ओ कहलाह जे भाषण करब हुनका एकदम पसिन नहि अछि। तथापि ओ अपन बात कहैत पुस्तकालयक संचालनमे होबएबला व्यवहारिक असुविधा सबहक वर्णन करैत अपन जीवनक अनेकानेक अनुभवक चर्चा सेहो केलनि। ओ पुस्तकालय अल्‍पजीवी भेल। संसाधनक अभावमे किछुए दिनक बाद सभ किछु ठप्प पड़ि गेल।

नवका पोखरि अपना-आपमे एकटा संस्था छल। अध्यात्मिकताक संग ग्रामीण संस्कारकेँ सेहो प्रज्‍वलित केने रहैत छल। मुदा सभ खिस्साक कतहु-ने-कतहु आ कहुना-ने-कहुना अन्त होइते अछि। नवको पोखरिक संग सेहो सएह भेल। जहिना प्रत्येक मनुक्खक जीवनमे उत्था-पतन होइत अछि तहिना एहि संस्थाक संग सेहो भेल। जखन वंगट काका स्वर्गीय भए गेलाह तकर पश्चात किओ एहन व्यक्ति नहि भेल जे नवका पोखरिक संग हुनका जकॉं एकरुप भए सकए। ककरो ओ रूचियो नहियेँ रहए। जाहि फुलबाड़ीमे एकटा पात नहि खसल भेटैत छल से क्रमश: कूड़ा, कर्कटसँ भरल रहए लागल।

पोखरिक देख-रेख सेहो ढील भए गेल। ततेकटा परिवार एहि पोखरि आओर लगपासक परिसरक हिस्सेदार छथि जे एकर एक स्वरमे रक्षा ओ विकास करबाक बजाय आपसेमे कचर-बचर होइत रहल। ढनमनाइत, ढनमनाइत मन्दिर खसि पड़ल। पोखरि सबहक व्यापारीकरण भए गेल। पोखरिक पानि स्नान करए जोगर नहि रहि गेल। कालान्तरमे किछु युवक लोकनिकेँ एहिपर ध्यान गेलनि। जाहिसँ मन्दिरक जीर्णोद्धारक प्रयास भए रहल अछि। आओर-आओर सकारात्मक प्रयास भए रहल अछि।

न्दिर भगवानक घर थिक, जतए लोक अपन-अपन अहंकारक विसर्जन कए ईश्वरक शरणमे पहुँचैत अछि। अस्तु एकर पुनर्निर्माण ओ रखरखावमे जँ एहि बातक ध्यान राखल गेल जे ओ परिवार विशेषक नहि अपितु समस्तस्थावान लोकनिक वस्तु बनि सकए, तँ निश्चय ई कल्याणकारी होएत आ नवका पोखरि फेरसँ अपन गौरव प्राप्त कए सकत।





Life is an opportunity

Life is an opportunity   Millions of people have come and gone but nobody remembers them. Only a few persons like Vyas, Shankarachary,Vi...