शनिवार, 31 मार्च 2018

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005




घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005







घरेलू हिंसा  की थिक ?



आम तौर पर घरेलू हिंसा मात्र घरमे मारि-पीट बूझल जाइत अछि।  सही मानेमे बालिका क अरमान केँ दबा देब ,घरक अंदर परिवारक सदस्‍य द्वारा रोज-रोज मानसिक प्रताड़ना  देब, तामसमे ओकर परसल भोजन फेँकि देब , ओकरा संगे गार-मारि करब, ओकर इच्छाक विरुद्ध ओकर पढ़ाइ रोकि देब , सेहो घरेलू हिंसाक रूप अछि। एकर अलावा यौन उत्‍पीड़न सेहो भारी हिंसा अछि, जाहि हेतु आम तौर पर दूरक रिश्‍तेदार वा पड़ोसक लोग जिम्‍मेदार होइत अछि। एहनमे जखन बालिका विरोध करैत अछि, तँ बदनामीक हवाला दए ओकर मुँह बंद कए देल जाइत अछि। एहि तरहक प्रतारणा नैहर,सासुर सभठाम होइत अछि। 

घरेलू हिंसा  पारिवारिक संवंधक परिपेक्ष्यमे एहन व्यवहार ओ संवंधसँ जुड़ल अछि जे अपन जीवन संगीपर अधिकार जताबए एवम् मनमाना नियंत्रण करबाक हेतु कएल जाइत अछि। प्रताड़ना मनोवैज्ञानिक,शारीरिक,भावात्मक,आर्थिक,किछु भए सकैत अछि। घरेलू हिंसा विवाहित किंवा आपसी सहमतिसँ प्रेम संवंधसँ जुड़ल जोड़ी, ककरो संगे भए सकैत अछि ।


घरेलू हिंसाक कारण की थिक ?

घरेलू हिंसाक प्रारंभ तखने होइत अछि जखन बालिका अपने माए-बापसँ खिलौना मांगैत अछि। हमर समाज ओकरा नेन्नेसँ  कमजोर बनबैत अछि। जखन बेटा छोट रहैत अछि, तँ हम ओकरा हाथमे बैट-बाल वा स्‍पोर्टस क सामान दैत छी, जाहिसँ ओ शारीरिक आओर मानसिक रूपसँ मजगूत बनैत अछि। मुदा बालिकाक खेलक हेतु गुड्डा-गुडि़या वा चूल्‍हा बर्तन बला खेलौना देल जाइत अछि जाहिसँ ओ शारीरिक आओर मानसिक रूपसँ कमजोर होइत चलि जाइत अछि। एकर संगे भावनामे भसिआएल चल झाइत अछि। अब बालिका  जेना- जेना पैघ होइत अछि घरक पाबंदी आओर समाजक यातना ओकरापर हावी होइत चलि जाइत अछि। दाम्पत्य जीवनमे घरेलू हिंसाक कारण हीन भावना,ईर्ष्या,क्रोधपर नियंत्रणक अभाव, जीवनसंगीसँ शिक्षा किंवा सामाजिक परिवेशमे न्योन होएब किछु भए सकैत अछि।

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 किएक लागू करए पड़ल ?

घरेलू हिंसाक अनगिनत घटना हमर देशमे होइत अछि, मुदा महज सौ-पचास दर्ज होइत अछि, ओहो चरम पर पहुँचलाक  बाद। कतेकोठाम बालिकासभ साँझक बाद घरक अपेक्षा सड़कपर अंजान लोकसंग रहब ज्यादा सुरक्षित अछि कारण घरमे अपन लोक द्वारा बेसी दुर्घटना, हत्या आओर हिंसा करबाक संभावना रहैत अछि, बालिका जखन रस्ता पर बहराइत अछि, तँ ओकरा पता नहि होइछ कि शहरक  चकाचौंधमे ओकरा संगे कखन कोनठाम छेड़खानी भए जाएत । बात अगर गामक करी तँ बालिका सुन्न रस्ता पर जएबासँ डराइत अछि मुदा ओहि डरक की करी, जकर जड़ि घरक अंदर होइत अछि आओर बालिकाक संगे पैघ होइत अछि। ओहि डरक की करी जे ओकरा जनमिते ओकर माथामेमे बैसि जाइत अछि आओर आधा जिनगी धरि रहैत अछि।

घरेलू हिंसा क बात करैत काल ऑनर किलिंगक घटनासभकेँ फराक नहि कए सकैत छी। ऑनर किलिंगक बीज असलमे घरेलू हिंसा अछि। किएक तँ कोनो माए-बाप, भाए, काका कखनो सेहो अपनी बेटी वा बहिनके, सोझे मारि नहि देत, ओहिसँ पूर्व नाना प्रकारक यातना ओकरा देल जाइत अछि ।

एकटा सांख्यिकीय गणनाक अनुसार :

(i)नित्य चारिटा महिला, एकटा पुरुष, आओर पाँचटा बच्चा घरेलू हिंसाक कारण अकाल मृत्युक शिकार भए जाइत छथि।

(ii)अपन जीवन कालमे प्रत्येक चारिटामेसँ एकटा महिला घेरलू हिंसाक शिकार भए जाइत छथि।

(iii)२०-२४ बर्खक महिलाक उपर घरेलू हिंसाक सभसँ बेसी खतरा रहैत अछि।

(iv)२००५ ई०मे कएल गेल एकटा सर्वेक अनुसार ओहि सालमे ३८९१०० महिला आओर ७८१८० पुरुष अपन जीवनसंगी द्वारा कएल गेल घरेलू हिंसाक शिकार भेलथि।

 तदनुसार, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 स्त्री क सुरक्षा, ओ स्त्रीक अधिकारक अधिक प्रभावी ढंगसँ लागू करबाक हेतु आनल गेल ।


एहि अधिनियमकेँ पारित करएसँ पहिने कानूनी स्थिति की छल?

(i)             घरेलू हिंसा कानूनमे कोनो स्पष्ट मान्यता नहि छल,
(ii)           (आईपीसी की 498 ए) क तहत घरेलू हिंसाक संपूर्ण अवधारणा विवाहित स्त्रीपर कएल गेल क्रूरताक धरि सीमित छल,
(iii)         दुखसंतप्त बहिन, माए, बेटी वा अविवाहित स्त्री एहिमे सामिल नहि छल,

(iv)          प्रताड़ित भेलापर विवाहित स्त्रीकेँ सीमित विकल्प छल: तलाक लए लिअए वा  धारा 498 ए क अनुसार मोकदमा करए,

घरेलू हिंसा दू प्रकारक होइत अछिःआपराधिक आओर गैर-आपराधिक:

आपराधिक घरेलू हिंसा:

 बिना सहमतिकेँ शारीरिक संपर्क जेना यौन उत्पीड़न,लात मारब, अनावश्यक पछोड़कए भयभीत करब, कंप्यूटर हैकिंग, आपराधिक अलगाव

गैर-आपराधिक घरेलू हिंसा:

मित्र वा आन सामाजिक सरोकारीसँ संपर्क बाधित करब,टेलीफोनक संपर्क नहि होमए देब,

घरेलू हिंसा कानूनक तहत कोनो पीड़ित महिलाजे अपराधिक संगे रहैत छथि,एहि कानूनक अनुसार मोकदमा कए सकैत छथि।

घरेलू हिंसाक सबसँ खराब प्रभाव ओहि परिवारक छोट बच्चासभ पर होइत छैक।

 एकटा सर्वेक अनुसार:

प्रति घंटा ११५टा बच्चा घरेलू हिंसाक शिकार भए जाइत अछि।

कलहपूर्ण परिवारक ९०% बच्चा अपन माएकेँ बापक हाथे पिटैत देखैत अछि।

११सँ २० बर्खक बएसक हत्यारोपी  बच्चा ६० % मामलामे माएके पिटनाहर बापक हत्या कए दैत अछि।

कलहपूर्ण वातावरणमे रहएबला बच्चा १५०० गूना अधिक उपेक्षित वा प्रताड़ित रहैत हछि।

बच्चा वातावरणक उपज होइत छथि,एहने बच्चा बादमे जाकए घरेलू हिंसा करैत छथि वा ओकर शिकार भए जाइत छथि।

घरेलू हिंसा अधिनियमक धारा२(क्यु):

घरेलू हिंसा अधिनियमक धारा२(क्यु)क तहत मात्र पुरुष अपराधीक खिलाफ कार्रबाइक प्रावधानके असंबैधानिक घोषित करैत सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और रोहिंटन एफ नरीमन  पीठ निर्णय देलक जे एहि कानूनक तहत महिला अपराधीकक खिलाफ सेहो मोकदमा चलि सकैत अछि।माननीय न्यायाधिश लोकनिक कहब छनि:

स्त्रीगणक खिलाफ कतेकोबेर स्त्रिए साजिसक तहत काजकए घरेलू हिंसामे सामिल होइत छथि, तेँ एहि कानूनक उपरोक्त धारा कानूनक मूल उद्दयेश्यसँ भुतिआ गेल लगैत अछि, तेँ ओकरा कानूनसँ हटा देल जाइत अछि।

घरेलू हिंसा कानूनक तहत केना मदति लेल जा सकैत अछि?

(१) कोनो प्रकारक हिंसासँ वचाव हेतु आदेश प्राप्त करब,

(२) निवास करबाक अधिकारक हेतु आदेश प्राप्त करब,

(३) मौद्रिक राहत

(४) कस्टडी ऑर्डर

(५) क्षतिपूर्तिक हेतु आदेश

(६)अंतरिम आओर एकपक्षीय आदेश

सुरेश बनाम जयबीर(२००९):

सुरेश बनाम जयबीर(२००९)क मामलामे न्यायलय ई आदेश देलक जे घरेलू हिंसा कानूनक धारा 12  उपखंड (1)   तहत आवेदनक निपटारा करैत अंतरिम आदेशमे न्यायिक दंडाधिकारी गुजाराक हेतु अन्तरिम राहत दए सकैत अछि।

प्रथम श्रणी न्यायिक दंडाधिकारी वा महानगर दंडाधिकारीक ओतए सिकाइत कएल जा सकैत अछि:

(१) जतए दोषी व्यक्ति रहैत हो,

(२) जतए अपराध कएल गेल होइक,

(३) जतय प्रताड़ित व्यक्ति रहैत हो,

न्यायिक दंडाधिकारीक समक्ष सिकाइतक निपटान:

पीड़त व्यक्ति संरक्षण अधिकारी,पुलिस किंवा सेवा प्रदाता(कल्याण अधिकारी)क मदति लए सकैत छथि। हिनका लोकनिक कर्तव्य अछि जे पीड़त व्यक्तिक जरुरी मार्गदर्शन करथि एवम् न्यायलय द्वारा देल गेल मौद्रिक क्षतिपूर्तिक आदेशक पालन सुनिश्चित कराबथि। संरक्षण अधिकारीक दायित्व अछि जे वो प्रताड़ित व्यक्तिक सिकाइतक घरेलू हिंसा प्रतिवेदन(DIR) तैयार कए न्यायालयकेँ उपलव्ध कराबए। संगहिँ प्रताड़ित व्यक्तिकेँ सेवा प्रदाताक वारेमे उचित मार्गदर्शन दैक जाहिसँ ओ ओहि कानूनी सुविधाक लाभ उठा सकए। सेवा प्रदाता कोनो कंपनी, महिलाक कल्याण हेतु कार्यरत गैर सरकारी संगठन, भए सकैत अछि । सेवा प्रदाताक ई कर्तव्य थिक जे प्रताड़ित व्यक्तिकेँ कानूनमे निहित ओकर अधिकारक बारेमे जानकारी देथि एवम् कानूनी उपचार लेबाकक हेतु उचित व्वस्था करएमे ओकरा मदति करथि। पुलिसक कर्तव्य थिक जे ओ प्रताड़ित व्यक्तिकेँ संरक्षण अधिकारी एवम् सेवा प्रदाताक बारेमे जानकारी देथि।संगहिँ भारतीय दंड संहिताक अनुक्षेद ४९८() मे प्राप्त अधिकारक जानकारी सेहो देथि।

न्यायिक दंडाधिकारीक समक्ष पीड़िता द्वारा सिकाइत प्राप्त भेलाक तीनदिनक भीतर मामलामे सुनबाइक तारिख तय होएत। न्यायालयसँ समन भेटलाक दूदिनक भीतर संरक्षण अधिकारी तकर जानकारी प्रतिवादीकेँ देत। प्रतिवादीकेँ देल गेल समनक संग घरेलू हिंसा कानूनक धारा 12  उपखंड(३)क तहत सिकाइतक प्रतिलिपि सेहो देल जाएत। प्रतिवादी द्वारासे प्राप्त भेलाक बादे एकतरफा सुनबाइ भए सकैत अछि आ स्थाइ अन्तरिम आदेश कएल जा सकैत अछि। जरुरी बुझलापर न्यायलय एकतरफा सुनबाइ कए अन्तरिम आदेश दए सकैत छथि। न्यायिक दंडाधिकारी ६० दिनक भीतर एहन सिकाइतक निपटान करताह। हुनकर आदेशक खिलाफ संबंधित पक्ष ३० दिनक भीतर सेशन कोर्टमे अपील दाएर कए सकैत छथि।

प्रतिवादी द्वारा संरक्षण आदेश किंवा अंतरिम संरक्षण आदेशक पालन नहि करब संज्ञेय एवम् गैर जमनती अपराधक श्रणीमे अबैत अछि। हुनका ताहि कारणसँ एक साल धरि जेल किंवा बीस हजार रुपया जुर्माना भए सकैत अछि। जौं संरक्षण अधिकारी दंडाधिकारी द्वारा देल गेल आदेशक पालन करबामे बिना कोनो वाजिब कारणके आनाकानी करैत छथि तँ हुनको एहि तरहक दंड देल जा सकैत अछि मुदा ताहि हेतु विभागीय अधिकारीकेँ पूर्व अनुमति आवश्यक थिक। पीड़ित व्यक्तिकेँ संयुक्त परिवारक साझी निवासमे रहबाक हेतु न्यायलय निवास करबाक आदेश दए सकैत अछि भले ओहि घरमे  प्रतिवादीक हिस्सा होइक वा नहि होइक।

एस आर बतरा एवम् अन्य बनाम श्रीमती तरुना बतराक मामलामे उच्चतम न्यायालय ई फैसला देलक जे घरेलू हिंसा अधिनियमक धारा १७(१)क अनुसार प्रताड़ित महिला मात्र साझी आवासमे रहबाक हकदार  भए सकैत अछि। साझी आवासक माने पति द्वारा कीनल किंवा किरायापर लेलगेल घर अछि वा एहन साझी घर अछि जाहिमे पतिक हिस्सा होइक। कहक माने जे जाहि घरमे ओकर पतिकेँ कानूनी अधिकार नहि छैक ताहिमे प्रताड़ित व्यक्तिकेँ रहबाक अधिकार न्यायलय एहि कानूनक तहत नहि दए सकैत अछि।

घरेलू हिंसा रोकबाक समाधान :

घरेलू हिंसा रोकबाक एकटा समाधान ई भए सकैत अछि जे पति न्यायिक दंडाधिकारीक समक्ष सपथ-पत्र देथि जे ओ आगा अपन पत्नीक संग सम्मानपूर्ण व्यवहार करताह,एहन  किछु नहि करताह जाहिसँ ओकरा कोनो प्रकारक यंत्रणासँ फेर गुजरए पड़ैक,तकर संपूष्टिमे अपन संपत्तिकेँ गारंटी देथि जाहिसँ घरेलू हिंसाक पुनरावृति भेलापर ओकरा जब्त कए लेल जाएत।

उपसंहार

आपसी संबंध प्रेम,आदर,ईमान्दारी, एवम भावुक लगावसँ सराबोर हेबाक चाही। आपसी अविश्वाससँ हिंसा ओ  दुराचर बढै़त अछि,एहन दंपति निरंतर आशंकाग्रस्त रहैत छथि जाहिसँ जीवन नर्क भए जाइत अछि। जीवनक ई कटुसत्य अछि जे अहाँ दोसरकेँ नहि बदलि सकैत छी,हम अपनेटाकेँ बदलि सकैत छी। कमसँ कम एतबातँ कइए सकैत छी जे जाहि संबंधमे लज्जति नहि रहि गेल अछि,जतए अविश्वासक पराकाष्ठा पहुँचि गेल अछि, ओतए फसाद बढे़नाइ छोड़ि  कानून सम्मत तरीका अख्तिआर करी।

महिला संगठन सिर्फ जागरूकता पैदा कए सकैत अछि, पुलिस सिर्फ उत्‍पीड़न करएबलाकेँ जेल पठा सकैत अछि, कोर्ट सिर्फ न्‍याय दए सकैत अछि ,एहिमे सँ कोनो अहाँक घरक हालत ठिक नहि कए सकैत अछि,घरमे पैसि नित्य-प्रतिक समस्याक समाधान नहि कए सकैत अछि । अस्तु सिर्फ सोच बदलक जरूरत अछि ।



हम अपन भाग्यक मालिक छी, हम अपन आत्माक नायक छी


विलिअम हेलीक कविता “Invictus (अपराजेय)" सँ प्रेरणा लैत जीवनक दुखमय परिस्थितिसँ हारि नहि मानि नव ओ सुंदर जीवन जिबाक हेतु सचेष्ट रहैत पिड़ित व्यक्तिकेँ ई विश्वास बनौने रहक चाही जे सुंदर समय आवहिँबला अछि,अएबे करत।

§ Invictus



§ Out of the night that covers me,
Black as the pit from pole to pole,
I thank whatever Gods may be
For my unconquerable soul.

§ In the fell clutch of circumstance
I have not winced nor cried aloud.
Under the bludgeonings of chance
My head is bloody, but unbowed.

§ Beyond this place of wrath and tears
Looms but the Horror of the shade,
And yet the menace of the years
Finds and shall find me unafraid.

§ It matters not how strait the gate,
How charged with punishments the scroll,
I am the master of my fate:
I am the captain of my soul.



§ William Henley
























of the abuser.



abuse.


Life is an opportunity

Life is an opportunity   Millions of people have come and gone but nobody remembers them. Only a few persons like Vyas, Shankarachary,Vi...