रविवार, 29 अप्रैल 2018

जीवन संघर्ष


जीवन संघर्ष

रबीन्द्र नारायण मिश्र



(मिथिला मिहिर, पटना मे २५ जुलाइ १९८२क प्रकाशित)



(१)

सूर्य जे प्रातः उगल से विदा छल,

चिड़ै चुनमुन उतरि कऽ आकाशसँ,

निश्चिंत भावे गवै  छल-

"जे करी विश्राम ,दिन अवशेषपर अछि।"

(२)

मुदा ओ हाथसँ पाथर फोड़ै छल,

भोरेसँ संघर्षरत जीविका हित,

सोनितक विक्री करै छल,

कुहड़ितहुँ साँझो पड़ल ,धरि ओतहि छल।

(३)

पेट,अँतरी,पीठमे अंतर खतम छल,

दाँत झड़ि कए मुँहकेँ खधिआ केने छल,

आँखिमे धसना धसल छल,आहार बिनु,

हाड़ोक हड्डी गलि रहल छल।

(४)

से कहि रहल छल, बातमे पीड़ा भरल छल,

अतिशय तृषित मनदग्ध,देहक दुर्गति छल,

जे हमर जीवन कुटिल ओ क्लिष्ट केहन,

यद्यपि करी श्रम अनवरत, धरि हाल एहन

(५)

हे मनुज़ ! तोँ उठह, आबो आँखि खोलह,

देखह ने कोनो भेद अछि,प्रकृतिक कोनो आयाममे,

तद्यपि सुखक मारिचिकामे,विसरि जे तोँ मनुक्ख छह,

अपने सोनित मोहवश गट-गट पीवै छह।




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