सोमवार, 12 जून 2017

कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते   




 


कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते   


लगभग चालीस साल धरि केन्‍द्र सरकारक विभिन्न पदपर कार्य केलाक बाद सेवा निवृत्तसँ एकटा शून्‍यता सोभाविक छल। नौकरीक दौरान छुट्टी दिन छोरिकऽ लगभग १२ घन्‍टाक नियमित व्‍यस्‍तता रहैत छल।

केतेको गोटे ऐ परिवर्तनकेँ बर्दास्‍त नहि कऽ पबै छैथ वा कहू तँ नवीन परिस्‍थितिसँ सामंजस्‍य नहि बैसा पबै छैथ। परिणाम कए बेर बहुत घातक होइत अछि। एकटा सचिव स्‍तरक अधिकारी सेवा निवृत्त होइते हृदयाघातसँ मरि गेला। कुर्सी जेबाक संगे संग बहुत रास सुविधा सेहो चल जाइत अछि किने...। तेतबे नहि, अधीनस्‍थ कर्मचारीक जी-हुजुरी सेहो समाप्‍त भऽ जाइत अछि। मुदा ई सभ तँ भेनाइ अछिए। माने एक-ने-एक दिन सभ सेवा निवृत्त होइते अछि।

नौकरीक दौरानक अस्‍तव्‍यस्‍तता आब खतम अछि। बीतल समयक जखन सिंहावलोकन करै छी तँ लगैत अछि जे नौकरीक दौरान कएल गेल अधिकांश चिन्‍ता व्‍यर्थ छल। छोट-मोट बातपर अनुरंजित भऽ जाएब, अधिकारीक अप्रसन्नतासँ तनावमे आबि जाएब, व्‍यर्थ छल।

सभसँ चिन्‍ता तँ वार्षिक मूल्‍यांकन (ACR वा APAR) लऽ कऽ होइत छल। पता नहि अधिकारी की लिखि देताह..! भविष्‍य खराप भऽ जाएत..! अधिकारीक हाथमे सरकार एकटा एहेन अस्‍त्र दऽ देने अछि, जइसँ अधिनस्‍थ अधिकारी वा कर्मचारी बकड़ी भेल मेमियाइत रहै छैथ। जँ अहाँ हँ-मे-हँ मिलबैत रहलौं तखन तँ बड़ बढ़ियाँ रिपोर्ट पक्का अछि, नहि तँ भगवाने मालिक..! केतबो काज करब आ जँ अधिकारीक अहं केर परवाह नहि करब तँ गेले घर छी।

बहुत कम्‍मे अधिकारी होइ छैथ जे काजक प्रधानता दैत अधीनस्‍थक सेवाक मूल्‍यांकन करइ छैथ। ऐ सबहक हेतु नौकरीमे लोक परेशान रहैत अछि। हमहूँ कए बेर बहुत चिन्‍तित भऽ जाइत रही।

सरकारी सेवासँ निवृत्तिक पछाइत पूरा-के-पूरा ACR क बण्‍डल हमर आग्रहपर हमरा सरकार आपस कऽ देलक। एक दिन कने-मने उनटाक पढ़लौं। कएटा आश्चर्यजनक अनुभव भेल। तेकर बाद ओ ओहिना धएल अछि। कूड़ाक भाव बिका जाएत। ऐ लेल एतेक परेशान रहैत रही। सरकारी बेवस्‍थामे अधीनस्‍थक सेवाक मूल्‍यांकनक वर्तमान बेवस्‍था यद्यपि पहिनेसँ बेहतर ऐ मानेमे भेल अछि जे आब मूल्‍यांकनक प्रतिलिपि सम्‍बन्‍धित बेकतीकेँ दऽ देल जाइत छैइ। आ ओ चाहे तँ ओइमे सुधारक हेतु उच्‍च अधिकारीकेँ प्रतिवेदन दऽ सकैत छैथ। मुदा अखनो ई प्रकृया पूर्णतः पारदर्शी नहि अछि। जे अधिकारी प्रतिकूल टिप्पणि केलक, फेर तेकरेसँ राय लेब कोनो बहुत सार्थक नहि होइत अछि। ओ तँ सामान्‍यत: अपन कहल बातपर अड़ि जाइत छैथ। सरकारी सेवकक सेवा मूल्‍यांकनक समस्‍त बेवस्‍था मोटा-मोटी जी-हुजुरीपर आश्रित अछि आ ऐमे आमुलचुल सुधार जरूरीए नहि अनिवार्य थिक जइसँ इमानदार, कर्मठ बेकती निर्भिक भऽ अपन बात राखि सकैथ एवम्‍ राष्ट्रहितकेँ सर्वोपरि राखि काज करैथ। एहनो प्रसंग देखबामे आएल जे सेवा मूल्‍यांकन केनिहार अधिकारीपर गंभीर आरोप अछि, तथापि अधीनस्‍थ इमान्‍दार अधिकारीक चरित्र पंजिकाकेँ ओ बोरि देलैथ आ ओ(अधीनस्‍थ इमान्‍दार अधिकारी) तड़पैत रहि गेलाह। हेबाक की चाही, सुधार केना कएल जाए, तैपर अनेको बेर चर्चा होइत अछि मुदा ठोस निर्णय अद्यावधि नहि भऽ सकल तेकर मूल कारण वरिष्‍ठ अधिकारी अपन अधिकारमे कटौती नहि होमए देबए चाहै छैथ।

सरकारी सेवामे अधिकारीक निर्णय लेबाक प्रक्रिया बहुत जटिल अछि। अधिकारक बँटवारा आदम जमानासँ चलैत नियमक आधारपर होइत अछि। परिणामत: अधिकारीगण निर्णय लेबएमे ऐ बातक बेसी साकंक्ष रहै छैथ जे हुनकापर जिम्‍मेदारी नहि खसए, काज हौउ चाहे नहि हौउ। कारण सहियो काज कऽ कऽ फँसि गेलौं तँ जान बँचाएब पराभव भऽ जाइत अछि। तरह-तरह केर नियम ओ बेवस्‍थासँ बान्‍हल ऐ बेवस्‍थामे सुधार हेतु केतेको बेर प्रयास होइत रहल अछि, मुदा अखनो बहुत किछु संभव अछि।

छोटसँ पैघ सभ अधिकारीकेँ एक सीमामे अधिकार देल जाए जइसँ त्‍वरित निर्णय लेल जा सकए। मंत्रालय सबहक तँ ई हाल रहैत अछि जे छोट-सँ छोट मामलाकेँ सचिव स्‍तर तक पठा देल जाइत अछि। सामान्‍यत: संयुक्‍त सचिव तक तँ फाइल जेबे करैत अछि।

वर्तमानमे सरकारी नौकरीक जे स्‍थिति अछि, ओइमे कियो बेकती इमानदारीसँ जीबिटा सकैत अछि चाहे ओ केतबो बड़का अधिकारी हो। बहुत हेतइ आ भाग साथ देतइ तँ धिया-पुताकेँ पढ़ा लेत। एकटा घरो बना लेत, मुदा ई कहब जे ओ स्‍थितिमे आमूल चूल परिवर्तन आनि लेत से संभव नहि अछि। सरकारी नौकरीमे सेवाक एकटा अवसर अछि, व्‍यापार नहि अछि, से बुझि संतोषसँ जीवन-यापन कएल जा सकैत अछि।

हमर एकटा मित्र योजना आयोगमे सेवा निवृत्तिक बाद सलाहकारक काज करैत छला। जरूरी काज निपटा कऽ ओ अबस्‍स हमरा लग आबि जइतैथ। गप-सप्‍प करितैथ। केतेको तरहक सलाह हुनकासँ भेटैत। प्रशासनिक काजमे ओ माहीर छला। क्‍लिष्‍टसँ क्‍लिष्‍ट समस्‍याक सटीक समाधान तुरन्‍त उपस्‍थित कए दितैथ। बीचमे हुनका सुगर बढ़ि गेलैन। योग ओ प्राणायाम द्वारा एक माससँ अपन सुगरक स्‍तर सामान्‍य कए लेलाह। डाक्‍टरक परामर्शपर जाँच करबए गेल रहैथ। जाँचक रिपोर्ट साँझमे आनए गेलाह। घरक आसे-पास जाँचक लेब्रोट्री छेलइ।

रिर्पोट लऽ कऽ आपस अबैत रहैथ कि तेजसँ अबैत कोनो कार तेतेक जोरसँ टक्कर मारलक जे सात फूट ऊपर उठि गेलाह। खसलाह तँ कारक पहियासँ पीचा गेलाह। सड़कपर आधा घन्‍टा पड़ल रहैथ, खून बहैत रहल, कियो हाथ नहि लगाबए। के झंझैटमे पड़त। हलांकि मा. उच्‍चतम न्‍यायालयक आदेशानुसार मदैत केनिहारकेँ कोनो दाव-पेंचमे नहि देल जाएत, मुदा तैयोलोक पचड़ामे नहि पड़ए चाहैत अछि। संयोगसँ कौलेजक दूटा बालिका हुनका सड़कपर पड़ल, खूनसँ लथपथ देखलक। ओ सभ हुनक सड़कपर खसल मोबाइलकेँ उठौलक। ओइमे उपलब्‍ध कएक फोन नम्‍बरपर फोन केलक। संयोगसँ ओकर घर फोन लागि गेलइ। ओ फोनसँ पुलिसकेँ सेहो बजौलक आ पुलिसक सहयोगसँ ओकरा स्‍थानीय अस्‍पताल लऽ गेल। अस्‍पताल जाइत-जाइत बहुत देरी भऽ गेल छल। तथापि ओ सभ प्रयास करैत रहल। दू घन्‍टाक बाद हुनकर अस्‍पतालेमे देहान्‍त भऽ गेल। सुखी सम्‍पन्न लोक छला। मुदा किछु काज नहि आएल।

हमरा तँ तखन पता लागल जखन सप्‍ताह भरि ओ नहि एला तँ मोन औनाएल। हुनकर अधिकारीजी सँ सभटा बात पता लागल।

ई थिक समय। कखन की हएत, के जनैत अछि। ओ एकदम स्‍वस्‍थ छला। कहैथ जे हम कहियो दबाइ नहि खेलौं। मुदा अप्रत्‍याशित रूपेँ दुर्घटनाग्रस्‍त भऽ परलोक चलि गेला। कएक दिन हमरा रूममे योगाशन करैत कहैथ जे ऐसँ सूगरपर एकदम नियंत्रण भऽ जाइत अछि। हुनकर जीवन यात्रा अहिना समाप्‍त हेबाक छल। केतेको दिन धरि ऐ घटनाक दृश्‍य माथमे घुमैत रहल। आवेश आ लोभमे लोक छोट-छोट बातकेँ बतंगर कऽ लइ छैथ। जान लेबए, देबएपर बनि जाइत अछि, मुदा हाथ की अबैत अछि? अशान्‍ति, घृणा ओ प्रतिशोध कहियो समाधान नहि अनलक आ ने आनत।

हमरा ओ कएक बेर कहला जे थ्री इडिएट्स सीनेमा जँ नहि देखने होइ तँ अबस्‍स देख ली। कमसँ कम एको भाग अबस्‍स देख ली। हम सीनेमा बहुत कम देखै छी। ओ सीनेमा सेहो नहि देखने रही। अही उहापोहमे रही जे ओ ऐ सीनेमाकेँ देखबाक हेतु किए कहि रहल छैथ। ताबते हुनकर अकस्‍मात मृत्‍यु भऽ गेल। हम ओ सीनेमा देखबाक निश्‍चय कएल। घरेमे सीड़ी आनल गेल। सीनेमा निश्‍चय शिक्षाप्रद छल। एकर सारांश जे केकरो ऊपर अपनाकेँ थोपक नहि चाही। सबहक सोभाव, रूचि ओ प्रतिमा अलग-अलग होइत अछि। तद्दनुसार ओकरा स्‍वच्‍छं ओ स्‍वतंत्र विकासक अवसर हेबाक चाही। मुदा से कहाँ भऽ पबैत अछि। डिब्‍बा बन्‍द जिनगीक विडम्‍बना थिक। वर्तमान विकृति।

हमरा एलीगंज सी.जी.एच.एस.क डीसपेंसरीक प्रधान डाक्‍टर मेरठक किसान परिवारक छला। ओ कहैथ जे हुनका डाक्‍टर बनबाक कनिको इच्‍छा नहि रहैन। मुदा अभिभावक अड़ि गेला जे जँ पढ़बाक होइक तँ डाक्‍टर बनैथ नहि तँ पुस्‍तैनी पेशा खेती-बारीमे लागि जाथि। कहलाह जे हारि कऽ हम डाक्‍टरी पढ़लौं। बेकती ओ नीक छला, मुदा गपोड़ी रहैथ। मरीज सभ पाँतिमे ठाढ़ अछि आ ओ अन्‍दरमेजे मरीज अछि तेकरा संगे निश्चिन्‍तसँ गप मारि रहल छैथ। ओना, मरीजकेँ देखैथ बहुत धियानसँ, मुदा समय बहुत बर्बाद कऽ देथि। तेकर प्राय: मूल कारण ओइ पेशासँ उरूचि छल।

जीवन-यापन हेतु जएह-सएह काज लोक कऽ कऽ पेट भरैत अछि। अपन देशमे नौकरीक तेतेक सुविधा नहि अछि जे लोक इच्‍छानुसार अपन रूचिक धियान रखैत जीविकाक चुनाव करैथ। जेकरा जे काज भेटल से करैत जीवि जीविकोपार्जन करै छैथ।

माता तु पार्वती देवी, पिता देवो महेश्‍वर:। माता-पिता ओ समस्‍त श्रेष्‍ठजनक असीम अनुकंपा ओ कृपासँ जीवन यज्ञ आब अन्‍तिम चरणमे पहुँच गेल अछि। असलमे ऐ जीवन रूपी नावक पतवार परमात्‍माक हाथमे छैन। वएह छैथ खेबनिहार। हुनके कृपासँ लांगरो पहाड़ नांघि सकै छैथ, पंगुम्‍ लंघयते गिरिम्। सही मानेमे किछु पता नहि छल जे ई यात्रा केतसँ शुरू हएत आ केना अन्‍त हएत? जीवनमे तरह-तरह केर जे घटना देखल-सूनल ओहिसँ आँखि खुजि जाएब, भारी बात नहि। एकसँ एक पैघ योग्‍य एवम्‍ पदाशीन बेकती अकाल मृत्‍युक शिकार भऽ गेला। समस्‍त बेवस्‍था ठामहि धएले रहि गेल। गरीब-गुरबा सभ बिना कोनो सुविधोक, बिना दबाइए-दारूक वयोवृद्ध भऽ जाइ छैथ। कहबी छै जे आन्‍हर गाएकेँ राम रखबार। जँ सामर्थ्‍यवान भेनहि लोक जीवितो, तँ कियो गरीब ऐ दुनियाँमे रहबे ने करैत। मुदा प्रकृतिक बेवस्‍था विचित्र एवम्‍ क्रूड़ अछि। कोनो स्‍पष्‍ट नियम सभपर लागू नहि कएल जा सकैत अछि। जीवन भाग्‍य ओ पुरषार्थक बीच झुलैत रहैत अछि।



बच्‍चामे गाममे रही, ओहीठाम पढ़लौं-लिखलौं आ जबान होइते रोजी-रोटीक फिराकमे गाम-घरसँ अतिदूर दिल्‍ली चलि एलौं। एतेक दूर आबि गेलाक बाद अपनो दुख होइत छल। रहि रहि कऽ गाम, गामक लोक, माए, बाबू सभ मोन पड़ैत रहैत छला। जखन गाम जाइ आ आपसी यात्रामे माए-बाबूक वियोगसँ उपजल असीम कष्‍ट अविस्‍मरणीय भऽ जाइत छल। समय बीतैत गेल। ने आब ओ रामा ने ओ कोठाला। माए, बाबू स्‍वर्गीय भऽ गेलाह। कएटा ग्रामीण मित्र सेहो चल गेला। आब गाम जा कऽ के भेटत?

यहॉं कौन है तेरा, ऐ मुसाफिर जाएगा कहाँ?”

रोडक कातमे गरीब तिहारी कऽ कऽ राति बितबैत अछि। निद्रालीन रहैत अछि कि कियो अन्‍धधुन्‍ध गाड़ी चलौनिहार ओकरा कुचैल दइ छइ। ओकर प्राण चलि जाइ छै, ऐमे ओकर की दोख?

हे ओ तँ सड़कपर अनाथ, सुरक्षाहीन सुतल रहैत अछि, मुदा जे महलमे समस्‍त सुख-सुविधासँ लैस छैथ, ओहो भाग्‍यक उठा-पटकसँ मुक्‍त नहि छैथ।

जीवनमे अहाँकेँ की भेटल अहाँ की कऽ सकलौं आ अहाँक मित्र, गौंआँ आकि परीचित की कऽ सकल एकर तुलनात्‍मक विचार व्‍यर्थ अछि। दुखक कारण अछि। सभ अपन-अपन कर्म ओ प्रारब्‍धक चक्रसँ बान्‍हल अछि।

सारांश जे प्रारब्‍ध प्रवल होइछ। सुनहुँ भरत भावी प्रवल, विहुपि कहे मुनिनाथ हानि लाभ जीवन मरण, यश अपयश विधिहाथ। तेकर माने ई नहि जे हाथपर हाथ धऽ बैस जाइ आ सभटा भागेपर छोड़ि दी। हमरा-अहाँक हाथमे कर्तव्‍य कर्म करक अधिकार अछि, फल अपना हाथमे नहि अछि। अपनासँ जे बनि पड़ए...।

जीवनसँ की प्राप्‍त केलौं, की दऽ सकलिऐक, ई प्रश्‍न मोनमे आएब सोभाविक थिक। हमरा तँ लगैत अछि जेना जीवन अपन स्‍वत: निर्धारित गंतव्‍य दिस स्‍वयं चलैत रहैत अछि। लोक तँ मात्र निमित्त क्रियाशील अछि।

निमित्त मात्रं भव सब्यसाचिन।

निश्चित रूपसँ महत्‍वाकांक्षाक पथगामीकेँ कष्‍टेकष्‍ट अछि। लोक की कहत? ऐ बातक धमर्थनसँ अपन मौलिकतापर संकट ठाढ़ कऽ लेब केतेक उचित? सबहक अपन जीवन छै, अपना आपमे सभ महत्‍वपूर्ण अछि, जे प्राप्‍त अछि वएह कोनो तरहेँ कम किए अछि? किएक हम अनकापर भारी पड़बाक प्रयत्‍न कऽ अपना आपकेँ तनावग्रस्‍त केने रही? जीवनसँ हम की चाहै छी..?

असलमे ऐ प्रश्‍न सबहक उत्तर कियो आन नहि दऽ सकैत अछि। शान्‍तिक हेतु संतोष बहुत आवश्‍यक अछि। प्राप्‍तक आदर जरूरी अछि। सामान्‍यत: लोक धिया-पुताकेँ उच्‍च शिक्षाक हेतु चिन्‍तित रहिते छैथ। मुदा उच्‍च डिग्री प्राप्‍त केनाइए जीवनमे सफलताक मूलमंत्र होइत तँ सचीन तेन्‍दुलकर, विस्‍मिल्‍ला खान, पण्‍डित जसराज, ज्ञानी जैल सिंह सन-सन बेकती उपलब्‍धिक ओ मान-सम्‍मानक पराकाष्‍ठापर नहि पहुँचितैथ। तँए जीवनकेँ अपन सोभाव ओ रूचिकेँ अनुसारे संतुष्‍टि वोध संभव अछि।

प्रकृतिंम् यान्‍ति भूतानि

निग्रटं किम्‍ करिष्‍यति!

ग्रामीण वातावरणमे रहि कऽ बहुत उच्‍च महत्‍वाकांक्षा लऽ कऽ हमर पूज्‍य माता-पिता हमर पालन-पोषण केने रहैथ कहि नहि से केतेक धरि संभव भेल, मुदा जे भेल, जेना भेल सएह सोचि कऽ ईश्वरकेँ हृदयसँ धन्यबाद। जीवन स्‍वयंमे अद्भुत अछि। तुलनात्‍मकता केतौसँ उचित नहि।

हमरा अहाँक हाथमे अछिए की? अपन कर्तव्‍य यथासाध्‍य करक चाही, शेष ईश्वरपर छोड़ि दी, ऐसँ बढ़ियाँ जीवन-मंत्र किछु नहि।

कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते माफलेषु कदाचन्...।

१।६।२०१७

मंगलवार, 6 जून 2017

सेवा निवृत्ति  






 


सेवा निवृत्ति   


लगातार दिल्‍लीक विभिन्न कार्यालयमे पदास्‍थापनाक बाबजूद सरकारी घर वएह रहैत छल। तेकर कारण जे सरकारी आवास ताधैर नहि बदलैत अछि, जाधैर अहाँ ओइ घरक हेतु पात्रतासँ बाहर कार्यालयमे नहि चलि जाइ। अस्तु लेड़ी हार्डींग मेडिकल कौलेजसँ आपस केमिकल एवम्‍ पेट्रोकेमिकल मंत्रालयक नव निर्मित औषधि विभाग (Department of Pharmaceuticals) मे १९ अगस्‍त २००८ ई.केँ कार्य भार ग्रहण केलाक बादो हम लोदी कालोनीक ब्‍लॉक २१ क १०४ नम्‍बरक घरमे रहैत छेलौं। अप्रैल २००६ ई.सँ लगातार हम ऐ घरमे रहलौं। ओइ दौरान हम लेड़ी हार्डींग, औषधि विभाग आ अन्‍तमे योजना आयोगमे पदस्‍थापित भेलौं।

लोदी कालोनीक ऐ घरक गुणक वर्णन नहि कएल जा सकैत अछि। श्री विनोद दुआ प्रत्रकार अपन टीभी सो जायका इण्‍डियामे जोरवाग मार्केटसँ हमरो घरपर फोक्‍सीन मारैत कहने रहैथ जे ई सरकारी बाबू सबहक घर एतेक महग जगहपर बनल अछि जे मूल्‍यांकनक हिसाबसँ कैयो पुश्‍तमे एतेक कमा सकता कि नहि...।

हमर फ्लैटक ठीक सामने जोरवाग मोहल्‍ला प्रारम्‍भ होइत छल। ओइ मोहल्‍लामे एक समयमे ढोल बजा-बजा कऽ जमीन १०-१० हजारमे देल गेल रहइ। आइ कोनो मकानक दाम साए कड़ोरसँ साइते कम हेतइ। कएटा प्रसिद्ध आदमी सबहक घर ओइ मोहल्‍लामे अछि। जेना साहरुख खान, मायावती, अमिताभ बच्‍चनक बेटी, भूतपूर्व विदेश सचित सिव्‍वलजी (कपिल सिव्‍वल)क भाए। एहेन पैघ-पैघ लोकक पड़ोसमे हम सालक साल रहलौं। एकरा की कहबै? कम-सँ-कम धनसँ तँ ई सम्भव नहि छल। हम गाम छोड़लौं आ दिल्‍लीक नीकसँ नीक जगह सरोजिनी नगर, रामकृष्‍णपुरम, लोदी कालोनीमे जिनगी भरि समय बितेलौं। ऐ मोहल्‍ला सभमे लगबे नहि करइ जे दिल्‍लीमे छी। केतौ भीड़ भार नहि। कोनो प्रकारक हल्‍ला-गुल्‍ला नहि। आस-पासमे सुख-सुविधाक भरमार। कार्यालय लग। लोदी गार्डेन लग। अस्‍पताल लग

लोदी कालोनीक जे मकान (२१/१०४ लोदी कालोनी) हमरा भेटल छल, से पहिने भारतक भू.पू. उपराष्‍ट्रपतिक ओ.एस.डी. क आवास छल। हम सोचने रही जे ओइ घरमे सभटा काज करौने हेता मुदा ओ.एस. डी. साहैब किछु काज नहि करौने रहैथ।

हमर फ्लैटक छतपर तेतेक जगह रहै जे पचासो आदमी बैस कऽ भोजन कऽ सकै छल, लगमे चिन्‍मयानन्‍द मिसनक अतिरिक्‍त इण्‍डिया इस्‍लामिक सेन्‍टर, इण्‍डिया इन्‍टरनेशनल सेन्‍टर आ इण्‍डिया हैबिटाट सेन्‍टर छल।

ऐ सभ संस्‍थानमे निरन्‍तर उच्‍च कोटिक सांस्‍कृतिक, आध्‍यात्‍मिक, रचनात्‍मक कार्याक्रम सभ होइत रहै छल। कहियो काल लोदी गार्डेनमे घुमैत इण्‍डिया इन्‍टरनेशनल सेन्‍टरमे होमए-बला गान-बजान सभ ओहिना सुनबाक मौका भेट जाइत छल।

इण्‍डिया हैबिटाट सेन्‍टरमे सायंकाल तरह-तरह केर गीतनाद, नाटक, सीनेमा आदि-आदि तरहक सांस्‍कृतिक कार्याक्रम होइत रहैत छल।

ऐ सुविधा सबहक कारण लोदी कालोनीक २१ ब्‍लॉकक घर भेटब असान नहि छल। साढ़े सात सालक प्रतीक्षाक बाद हमरा ई घर भेटल छल, ओहो ऐ लेल जे ताधैर उच्‍चतम न्‍यायालय सरकारी आवास सबहक आबंटनक प्रक्रियाकेँ बहुत अधिक सुधारि देने छल, अन्‍यथा ओइठाम मात्र सिफारशी सभकेँ घर आबंटित होइत छल।

लोदी कालोनी सरकारक द्वारा हमरा आबंटित अन्‍तिम घर छल। ऐसँ पूर्व पुष्‍प बिहार सेक्टर  सात, सरोजिनी नगर, रामकृष्‍णपुरममे रहि चूकल रही। सच पुछी तँ हमरा दिल्‍लीमे सरकारी आवास तेते असानीसँ आ तेहेन तेहेन नीक ठाम भेटल जे लगबे ने कएल जे दिल्‍लीमे रहि रहल छी, जेतए किरायेदारकेँ किराया दैत-दैत दम छुटि जाइत अछि आ तैयो मकान मालिक ओकरा द्वेम दर्जाक बुझैत रहैत अछि। सरकारीमे मकानमे लोक साधिकार रहैत अछि, कियो टोकैबला नहि, उनटे जँ किछु टुट-फुट भेल तँ सी.पी.डक्‍यूडी पूछताछमे शिकायत करू, ठीके नहि हएत, बेहतर भऽ जाएत। ऐल-फइल ओ शान्‍त वातावरणमे रहैक सभ दिन आदत पड़ि गेलाक बाद दिल्‍लीमे आनठाम केना रहब ई चिन्‍ता सतैत घेरने रहैत छल।

डीडीएक स्‍कीम सभमे आवेदन दैत छेलिऐ मुदा परिणाम किछु नहि। लोकमे गलत, सही धारणा छल जे बिना हेरा-फेरीक डीडीएक फ्लैटमे आबंटन नहि अबैत अछि। २००८ ई.मे फेरसँ डीडीएक स्‍कीम आएल रहइ। दर्खास्‍त देबाक मन नहि होइत छल, कारण परिणाक प्रति निराशा भाव। मुदा हमर ग्रामीण ज्‍योतिष डॉ. राघवेन्‍द्रजी कहला जे अखन अहाँकेँ जमीन, मकानक योग अछि। सफलता भेट सकैए। तैयो मन छह-पाँच करैत रहए। एक दिन हमर मित्र (जे पेट्रोलियम मंत्रालयमे निदेशक छला) पूछला-

डीडीएक स्‍कीममे दर्खास्‍त देलौं की नहि?” 

हम कहलैन-

दर्खास्‍त दाइए कऽ की हएत? भेटत तँ नहियेँ..!”

ओ कहला-

जँ नहि दर्खास्‍त देबै तखन केतए-सँ भेटत? दर्खास्‍त नहि देबक माने तँ अपनेसँ अपनाकेँ प्रतियोगितासँ हटा देब हएत।

हुनकर ई बात हमरा जँचि गेल। अन्‍तिम तिथि नजदीक रहइ। कनाट प्‍लेसक आइसीआइ बैंक जा कऽ तुरन्‍त दर्खास्‍त भरलौं। प्राथमिक शुल्‍क (डेढ़ लाख रूपैआ) सेहो वएह बैंक आनन-फाननमे कर्ज दऽ देलक। आ हमर दर्खास्‍त लागि गेल।

चारि मासक बाद मंगल दिन, डीडीएक ओइ स्‍कीमक परिणाम आबक रहइ। चूँकि ओ मंगल दिन रहइ। हम बहुत आशावान रही। रातिक दस बजैत रहइ। कम्‍पूटरपर परिणाम तकैत रही। बहुत मुश्‍किलसँ डीडीएक वेवपेज खुजल। परिणाममे एकाएक अपन नाम देख जे आश्‍चर्य ओ प्रसन्नता भेल तेकर वर्णन शब्‍दातीत अछि। धिया-पुता सभकेँ उठेलौं। श्रीमतीजी सेहो उठि कऽ एली। घरमे हल्‍ला भऽ गेल। हमरा सभकेँ दिल्‍लीमे घर भऽ गेल।

मैट्रिकक परीक्षाक परिणामक बाद दोसर बेर हमरा एतेक प्रसन्नता भेल रहए। हमर पू. माय निरन्‍तर हमरा आशीर्वाद दैत रहै छेली। निश्चय ई हुनके आशीर्वादक परिणाम छल। धैर्य पूर्वक सही रस्‍तापर चलैत रहू तँ देर-सबेर भगवान जरूर मदैत करै छथिन। दू बेडरूमक ओ फ्लैट मेट्रो स्‍टेशनसँ सटले रहबाक कारण आओर आकर्षक छल।

बिना कोनो लन्‍द-फन्‍दक ओ इमानदार प्रयास मात्रसँ हमरा ओ फ्लैट आवंटित भेल। क्रमश: ओकर लिखा-पढ़ी पूरा भेल। लगभग साल भरिक बाद हमरा ओकर कब्‍जा भेटल आ रजिस्‍ट्री भेल। एवम्‍ प्रकारेण दिल्‍लीमे रहबाक जोगार भगवान कऽ देलाह।

लेडी हार्डींगसँ लौटलाक बाद हम केमिकल एवम्‍ पेट्रोकेमिकलसँ फुटि कऽ नव निर्मित औषधि विभागमे कार्यभार ग्रहण कएल। ओइ विभागक मंत्रीसँ लऽ कऽ नीचाँ धरि अधिकांश लोक बिहारक रहैथ। सचिव बिहारक रहैथ। संयुक्‍त सचिव पंजाब काडरक बेहद नीक बेकती छला। मुदा ओइ विभागमे बैसबाक जगहक घोर अभाव छेलइ। पुरान लोक सभ तँ कहुना-कहुना कऽ अपन जोगार कऽ लेलाह मुदा हम ओतए नव रही। हिन्‍दी विभागक संयुक्‍त निदेशकक संग बैसबाक हमर बंदोबस्‍त कएल गेल। हुनका ई गप एकदम नीक नहि लगलैन। ओइ रूमक कुंजी ओ देबे नहि करैथ। हमरा दिक्कत होइत छल। कएक बेर ओ बिलंबसँ आबैथ तँ हम हुनकर बाट तकैत रही।

एक दिन संयोगसँ ओ नहि आएल रहैथ आ रूमक कुंजी हमरा हाथ लागि गेल। संयुक्‍त सचिव महोदय कहला जे यएह मौका अछि। हुनकर परामर्शक अनुसार आन-फाननमे ओइ कुंजीक डुप्‍लीकेट बनौल गेल। तेकर बाद ओ आबैथ तइसँ पहिनहि हम रूपमे अपन कुर्सी धऽ ली। ओ आश्‍चर्य चकित भऽ पुछला जे आखिर हम रूप केना खोललौं। हम हुनका सभ बात कहलयैन। आब ओ कइए की सकै छला?

किछु दिनक बाद एकटा दोसर रुम खाली भेलै, तेतए बैसबाक बेवस्‍था भेल। संयुक्‍त सचिव महोदयक स्‍थानान्‍तरण भऽ गेल छल। हुनका स्‍थानपर जे संयुक्‍त सचिव एला से सोभावसँ कर्कष रहैथ। दिन-राति सबहक पाछाँ पड़ल रहैथ। अण्‍ड-वण्‍ड बजनाइ, धमकी देना तँ तकिया कलाम छेलैन। हुनका संगे समय बितनाइ बड़ा कष्‍टकर भऽ गेल छल।

औषधि विभागक जन औषधिक नामसँ दबाइक दोकान खोलबाक योजनाक अन्‍तर्गत सस्‍त दबाइ बिक्रीक हेतु प्रथम दोकान अमृतसरमे खुजबाक छल। तइले हम सभ अमृतसर गेल रही। औषधि विभागक तत्‍कालिन सचिव श्री अशोक कुमारजी बिहार काडरक आइ.ए.एस. अधिकारी छला। हुनका संगे विभागक आन अधिकारी सभ सेहो रहैथ। अमृतसरमे उपरोक्‍त उद्घाटन कार्यक्रममे पंजाब सरकारक स्‍वास्‍थ मंत्री सहित आर अधिकारी सभ सेहो रहैथ। कार्यक्रमक बाद हमरा लोकनि अमृतसरक स्‍वर्ण मन्‍दिरक दर्शन कएल। दर्शनक वी.आइ.पी. बेवस्‍था छल। सभ गोटाकेँ मन्‍दिरक तरफसँ सरोपा देल गेल जे बहुत सम्‍मानक गप मानल जाइत अछि।

स्‍वर्ण मन्‍दिरक बाद दुर्गिआना मन्‍दिर आ जालिआनाबाला बाग घुमलौं। जालिआनाबला बागमे देबाल सभपर गोली सबहक निशान अंग्रेज शासकक क्रूड़ताक स्‍मरण करबैत अछि। हजारो निर्दोष लोककेँ एकटा चारू तरफसँ बन्‍द स्‍थानमे घेरि कऽ गोलीसँ भुजि देल गेल। सैकड़ो आदमी प्राण बँचबैले इनारमे कुदि कऽ मरि गेल। ओ स्‍थान आब एकटा राष्ट्रीय स्‍मारक भऽ गेल अछि। प्रात भेने हम सभ बाघा वोर्डरपर गेलौं। ओइठाम सेहो हमरा सभकेँ भी.आइ.पी. सभ हेतु आरक्षित स्‍थानपर बैसबाक बेवस्‍था छल।

हम सभ चैनसँ भारतीय ओ पाकीस्‍तानी अधिकारी/सिपाहीक करतब देख दंग रही। नित्‍य सायंकाल ई काय्रक्रम ओयोजित होइत अछि। जइसँ दुनू देशक हजारो नागरिक दर्शक दीर्घामे बैसल रहै छैथ। ऐपर भारत जिन्‍दाबाद ओइ देशक समर्थनमे नारा लगैत रहैत अछि। कदम-ताल करैत भारतीय सीमा बल ओ पाकिस्‍तानी समकक्ष आगू-पादू होइ रहैत छैथ। झण्‍डाकेँ धीरे-धीरे निच्‍चाँ उतारैत छैन आ प्रवेश द्वारकेँ बन्‍द कऽ कऽ अपन-अपन देशक सिमानमे चलि जाइत छैथ। ऐ कार्यक्रमकेँ देखैत कएक बेर रोमांच भऽ जाइत अछि। राष्ट्र प्रेमसँ ओत्-प्रोत्‍ वातावरणमे अपन बहादुर सैनिक सबहक काज देखि  आत्म सम्‍मानसँ मन गद-गद भऽ जाइत अछि।

ओइ बीच विभागीय प्रशिक्षणक हेतु युरोप यात्राक अवसर भेटल जेकर विस्‍तारसँ वर्णन अलगसँ कऽ चूकल छी। किछु मासक बाद हमर प्रोन्नति उप सचिवमे भऽ गेल आ हमर पदस्‍थापना योजना आयोगमे भेल। १२ अप्रैल २०१० क हमर योजना आयोगमे पदभार ग्रहण कएल।

योजना अयोगक महौल अलग छल। ऐठाम पर्याप्‍त सुविधा छल। कोठरीक भरमार छल। पूरा योजना भवन योजना अयोगक छल, तँए औषधि विभागसँ बिल्‍कुल भिन्न स्‍थिति ऐठामक छल। दू-चारि दिनमे हमरा काज भेटि गेल, स्‍वतंत्र कोठरीमे सभ सुविधा छल। ऐ व्‍यापक परिवर्तनसँ मनमे बहुत प्रसन्नता भेल।

योजना आयोगमे पदस्‍थापित होइते क्रमश: काज हमरा दिस सरकए लागल। हाल ई भऽ गेल जे साल भरिक अन्‍दर प्रशासनक तीन चौथाइ काज हमरा अधीन भऽ गेल। तहूसँ नहि भेल तँ विभागाध्‍यक्ष बना देल गेलौं। विभागाध्‍यक्षक रूपमे योजना अयोगक कार्य संचालन हेतु चीज वस्तुक क्रय करबाक स्‍वीकृति देबाक होइत छल। नियमानुकूल ओ सही काजक हेतु चेष्‍टाशील हमरा लोकनि केतेको उपराग सुनैत छेलौं जे ई सामान नहि अछि तँ ओ चीज नहि अछि। तथापि काज शुद्ध आ सही होइ तेकरा वरीयता देल गेल।

कर्मचारी/अधिकारीक दैनिक स्‍थितिक आधारक माध्‍यमसँ वयोमेट्रिक्‍स द्वारा केन्‍द्र सरकारक कार्यालयमे शुरूआत हमहीं सभ योजना अयोगमे केलौं जे बादमे केन्‍द्र सरकारक सभ कर्यालयमे लागू भेल।

सरकारी काजमे कागजक किफायती उपयोगक सक्षम प्रयास हम सभ केलौं जे बादमे सरकारक प्रमुख नीति भऽ गेल। डिजीटल इण्‍डिया दिस ई सक्षम ओ जोरदार प्रयास छल, जेकरा अधिकांश लोक नहि बुझि सकलाह।

विभागाध्‍यक्षक काजसँ हम हटए चाहैत छेलौं जइले लिखित ओ मौखिक आग्रह बारंबार कएल, मुदा हमर नहि चलल। घोर अनिच्‍छा पूर्वक हम सामानक बेवस्‍था सम्‍बन्‍धी काज सभसँ पछड़ा लैत रहलौं।  

योजना आयोगमे हमर सेवाकालक अन्‍तिम समय बीतल। हम ऐ कार्यालयमे स्‍वेच्‍छासँ आएल रही, ऐ सोचि कऽ जे सेवाक अन्‍तिम किछु साल चैनसँ बीति जाएत, मुदा भेल उल्‍टा। तरह-तरह केर कोनो-ने-कोनो फसादकेँ सेरियाबैमे लागल रहलौं।

योजना अयोगमे पश्चिम बंगालक मुख्‍यमंत्री सुश्री ममता वनर्जीक उपाध्‍यक्ष संग बैसक छल। ओइ क्रममे पुलिसक भारी बंदोबस्‍त कएल गेल छल, कारण पं. बंगालक कोनो घटना लऽ कऽ मार्क्‍सवादी सभ सुश्री ममता वनर्जीक खिलाफ प्रदर्शन कए रहल छल। चारूकात जबरदस्‍त घेराबन्‍दी छल। योजना भवनमे अति विशिष्‍ट बेकतीक लेल अलगसँ द्वार छल। सामनेसँ दूटा द्वार छल जइमे एक बाटे लोक अन्‍दर होइत छल आ दोसर बाटे बाहर होइत छल। मार्क्‍सवादी लोकनिक प्रदर्शनक चलते सुश्री ममता वनर्जीक अति विशिष्‍ट लोकनिक हेतु आरक्षित द्वारसँ अन्‍दर एबाक छल मुदा ओ सामान्‍य लोक हेतु बनल द्वारसँ एबाक प्रयासमे मार्क्‍सवादी प्रदर्शन कारीसँ घेरा गेलीह। सुनबामे आएल जे हाथा-पाइ सेहो भऽ गेल। भगवान जानए एना किएक भेल। पश्‍चिम बंगाल सरकारक दिल्‍लीमे रेजीडेन्‍ट कमीश्‍नर श्री भास्‍कर खुल्‍वे, आइ.ए.एस. छला। गृहमंत्रालयमे ओ हमर अधिकारी रहि चूकल रहैथ। योजना अयोगक प्रोटोकॉलक विभाग सेहो हमरा अधिन छल, परन्‍तु ऐ मामलाक कोनो जानकारी हमरा नहि छल। प्रोटोकॉल एसीसटेन्‍टसँ सभ सोझे गप करैत रहल। जखन गड़बड़ी भेल तँ तरह-तरह केर बात भेल मुदा हमरा कोनो प्रकारसँ तंग नहि कएल गेल, कारण हमर गलती किछु नहि छल।



योजना आयोगक प्रमुख स्‍मरणीय घटनामे गुजरातक मुख्‍यमंत्रीक रूपमे आदरणीय श्री नरेन्‍द्र मोदीजीक योजना आयोग आएब छल। ओइ समय तक मोदीजीक भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री उम्‍मीदवार मनोनित नहि कएल गेल छल, मुदा भाजपाक चुनाव प्रचार समितिक अध्‍यक्ष ओ बनि गेल रहैथ। आदरणीय मोदीजी योजना आयोगक अन्‍दर एला तँ हम आसे-पासमे रही। ओइ समय टीभी पत्रकार सभ जे चित्र खिचलक से केतेको बेर बादोमे योजना अयोगक चर्च भेलापर लोक सभकेँ देखबामे अबइ। ओइ चित्रमे मोदीजीक बगलमे हम देखाइत रही। कए गोटा फोन करैत ओइ दृश्‍यक चर्चा करैत...।

आ. मोदीजी योजना आयोगमे पत्रकारसँ चर्चा करए चाहैत छला, जेकर अनुमति नहि देल गेल। जखन ओ लिफ्टसँ निच्‍चाँ भूतलपर एलाह तँ पत्रकार सबहक भीड़ लागि गेल रहए। ओही ठाम पत्रकारसँ गप करए लगलाह। जेना-तेना कुर्सी आनल गेल। आ. मोदीजीक लोक प्रियताक अन्‍दाज ओहीठामसँ लगौल जा सकैत छल। पत्रकारक भीड़ ओ आ. मोदीजीक संवादक आगू सभ बेवस्‍था फेल छल।

सालमे एकबेर योजना आयोग प्रधानमंत्रीक अध्‍यक्षतामे राष्‍ट्रीय विकास परिषद (National Devolopment Concil) क बैसार आयोजि करैत छल। ऐमे देशक सभ राज्‍यक मुख्‍यमंत्री सहित केन्‍द्र सरकारक प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री आ तमाम मंत्री, सचिव उपस्‍थित रहैत छला। प्रधानमंत्री भरि दिन ओइ बैसारमे उपस्‍थित रहैत छला।

कार्यक्रमक सफल आयोजन एकटा जबरदस्‍त चुनौती रहैत छल। सुरक्षासँ लऽ कऽ भोजन, जलपानक बेवस्‍था एकदम वारीकीसँ कएल जाइत छल। ऐमे भारी भरकम खर्चा होइत छल। ऐमे कएटा खर्चाकम कएल जा सकैत छल। हम ऐ तरहक प्रयास केलौं। सचिव, महोदया ऐ प्रस्‍तावकेँ सहर्ष मानि गेलीह जइसँ लाखोंक बचत भेल। प्रधानमंत्री ओ हुनका संगे भोजन करएबला किछु चुनिन्‍दा लोककेँ छोड़ि सबहक भोजनक एके रंगक बेवस्‍था भेल ऐमे लाखोक बचत भेल।

बैसक हेतु लगभग एक हजार महग बैग लेल जाइत छल। एकरा स्‍थानमे हमरा लेाकनि हाथसँ बनल जूटक  बैग कीनलौं जइमे ७-८ लाखक बचत भेल। ऐ बैगमे कागज-पत्तर सभ भरि-भरि बैसकमे भाग लेनिहार लोक सभकेँ देल जाइत छल। ओइ बेर जूटक बैगमे कागज सभ बैसकमे भाग लेनिहार लोक सभकेँ देल जाइत छल। ओइ बेरमे कागज सभ ओहिना पड़ल रहि गेल। पैछला साल तँ बैगक लूट भऽ जाइत छल। कारण ओ महग होइत छल।

सरकारी पैसाक दुरुपयोग रोकबाक छोटसँ-छोट प्रयास राष्‍ट्रक हेतु बहुत लाभकारी भऽ सकैत अछि। एक-एक बुन्‍दसँ पोखैर भरैत अछि, मुदा एहेन सोचैबलाकेँ प्रशंसा तँ छोड़ू, कए बेर जान बाँचब कठिन भऽ जाइत अछि। हमरो केतेको लोकक आलोचनाक शिकार होमए पड़ल। मुदा हमर वरिष्‍ठ अधिकारी सभ प्रसन्न छेली। काज नीकसँ सम्‍पन्न भेल। ताम-झामक तँ अधिकांश व्‍यर्थ छल, से साबित भेल।

योजना आयोगमे लगभग साढ़े तीन साल काज केलौं। ओइ अवधिमे भोजनावकाशक समयक आनन्‍दे अलग छल। हम सभ पाँच गोट अधिकारी एकट्ठा भऽ घन्‍टा भरि आस-पास घुमैत छेलौं, गप करैत छेलौं आ अन्‍तमे चाह पीबि कऽ सभा विसर्जित होइत छल। गर्मीमे जखन परा बहुत चढ़ि जाइ छल, टहलाइक कार्यक्रम स्‍थगित रहैत छल। मुदा गप-सप्‍प चलैत छल। चाह-कॉफी चलैत छल। ऐ बेसारमे तेतेक ऊर्जा भेटैत छल जे आगॉंक आधा दिनक काज करब असान भऽ जाइत छल।

ओइमे दूटा (डॉ. शरद पंत, डॉ. विजय वहादुर सिंह) भारतीय आर्थिक सेवाक निदेशक स्तरक अधिकारी छला। श्री के.एन. पाठकजी योजना आयोगमे निदेशक स्तरक अधिकारी छला। पहिने जे.एन.यू. बादमे लंदन स्कूल ऑफ इकानामिक्ससँ पढ़ल बहुत योग् विद्वान छैथ। वाककलामे अद्भुत महारथ हुनका अछि। श्री शंकर मुखर्जी केन्द्रीय सचिवालय सेवाक निदेशक स्तरक अधिकारी छला, आब सेवा निवृत्त भऽ गेल छैथ। सभ अपन-अपन क्षेत्रमे माहिर छला। तँए लंचक समय गप-सप् तँ हेबे करइ। तरह-तरह केर जानकारी सेहो भेट जाइक। एकटा अद्भुत आनन्दक समय छल।



क्रमश: सेवा निवृत्तिसँ ऐ बैसारमे भाँगठ होइत गेल। तथापि कहियो काल हम सभ भेँट-घाँट करैत रहलौं। आब तँ मात्र एक गोटे नौकरीमे बनल छैथ। शेष सभ सेवा निवृत्त भऽ एमहर-ओमहर भऽ गेला।

बिहार आ बादमे झाड़खण्‍ड काडरक आइ.ए.एस. अधिकारी श्रीमती निधि खरे हमर अन्‍तिम अधिकारी छेली। ओ कर्मठ, इमानदार ओ दृढ़ निश्‍चयी छेली। सही बातक हेतु ओ अडिग रूखि लैत छेली। मजगूतीमे हिमालय सन छेली। हुनकर असीम सद्भावना हमरापर रहलैन। ओ असगरे हमर सभ विरोधीकेँ शान्‍त कऽ दैत छेली। उच्‍च अधिकारीक मिटिंग सभमे हमर इमनदारी ओ प्रयासक पक्ष दृढ़तासँ रखैत छेली। परिणामत: कियो हमर किछु बिगाड़ि नहि सकल। हमरा लोकनि निश्चिन्‍त भऽ अपन काज करैत रहलौं।

एक समयमे ओ मधुबनीक कलक्‍टर छेली। हुनकर पति श्री अमित खरे, आइ.ए.एस. दड़िभंगाक कलक्‍टर छला। दुनू बेकती हमर कनिष्‍ठ पुत्र क्षितिजक विवाहक वाद दिल्‍लीमे आयोजित स्‍वागत समारोह (Reception) मे आएल रहैथ। श्रीमती निधि खरे सन अधिकारी आब कम होइत अछि। हमर हृदयमे हुनका प्रति अमिट आदर ओ श्रद्धाक भाव समस्‍त सेवा कालक एकटा अनुपम उपहार अछि।

सेवा निवृत्तिक समय आयोजित विदाइ समारोहक अध्‍यक्षा वएह केने रहैथ। हमर बहुत रास इष्‍ट-मित्र ओइ अवसरपर उपस्‍थित रहैथ। लगभग ३९ वर्ष ७ महिनाक सेवाक पछाइत हम सेवा निवृत्ति भऽ घर पहुँचलौं तँ हमर श्रीमतीजी हँसैत हमर स्‍वागत केने रहैथ। घरक वातावरण आनन्‍दमय छल।

एकटा महान जीवन यज्ञक मीठ-तीतक अनुभवक संग पूर्णाहतिपर आबि गेल छल आ चालीसो सालसँ किछु मास अधिके काज केलाक बाद घर बैस कऽ केना समए बीतत से चिन्‍ता हमरासँ बेसी हमर मित्र ओ अधिकारी सभकेँ रहैन। दिन भरि हम कार्यालयमे व्‍यस्‍त रहैत छेलौं, अन्‍त-अन्‍त तक दौड़ैत रहलौं, काजकेँ आनन्‍द पर्वक करैत रहलौं। यदि अत्‍यावश्‍यक नहि भेल तँ अवकाश नहि लेलौं, मुदा आब की हएत?

समस्‍या तँ ई वाजिव छल मुदा अप्रत्‍याशित नहि छल। सरकारी नौकरीसँ सेवा निवृत्ति तँ भेने छेलौं। ईश्वरक कृपासँ अन्‍त-अन्‍त तक हम परिश्रम करबाक स्‍थितिमे रहलौं आ अखनो छी। देखते-देखते चारि दसक समय बीति गेल। दड़िभंगा, जमशेदपुर, दिल्‍ली, इलाहाबाद आ फेर दिल्‍लीक सफरनामा अपन मंजिलपर पहुँच गेल छल। बच्‍चा सभ व्‍यवस्‍थित भऽ गेल रहैथ। बिआह-दान भऽ गेल रहैन। तखन चिन्‍ता कथीक..?  

एतेक दीर्घ यात्रा ठीक-ठाक निकैल गेल से सोचि ईश्वरकेँ कोटिश: धन्यवाद दैत आगाँक जीवनक व्‍यवस्‍थामे लागि गेलौं।

२१ सालक उम्रमे लगातार हम रोजी-रोटीक हेतु संघर्षशील रहलौं। किछु सोभाववस, किछु भाग्‍यवस हल्‍लुको चीज हमरा बिना संघर्षकेँ नहि भेटल।

३९ सालसँ अधिक समय बीति गेल। केतेक लोक आएल, गेल। मुदा किछु गोटे अमिट छाप छोड़ि गेलाह। किछु गोटे अविस्‍मरणीय भऽ गेलाह। नौकरीक दौरान भेँट भेल डॉ. विनय कुमार चौधरी (संप्रति प्रोफेसर, आर.एन. कौलेज सहर्षा), श्री संजीव सिन्‍हा (निदेशक पदसँ सेवा निवृत्त), हमर नाम धारी मिसरजी (गृहमंत्रालयक संगी, राजपत्रित पदसँ सेवा निवृत्त), श्री मदन मोहन सिन्‍हाजी (गृहमंत्रालयमे अवर सचिव पदसँ सेवा निवृत्त) लस्‍सा जकाँ जीवन भरि सटल रहला, निस्वार्थ उपकार करैत रहला, । एकरा पूर्व जन्‍मक देन नहि कहबै तँ की कहबै? अन्‍तमे योजना आयोगमे जे हमरा लोकनिक पाँच आदमीक लंचग्रुप बनल, तेकर जे सुखद छाप स्‍मृतिपर पड़ल, तेकरा की कहबै..?

२१ वर्षक आयुसँ गामसँ नौकरी करए निकललौं से निकलले रहि गेलौं। यद्यपि हम निरन्‍तर गाम, मधुबनी अबैत-जाइत रहलौं, मुदा नाममात्र। छुट्टीमे जखन जाइ तँ अधिकांश समय मधुबनीक मकानक काज करबैत रही। कहियो सीमटी लागि रहल अछि तँ कहियो पेटींग भऽ रहल अछि। किछु कऽ लिअ मुदा मधुबनी मधुबनी थिक। बेसी जेबी ढील करएबला किरायेदार कम भेटता। फेर हम तँ ओतए रही नहि। किरायासँ बेसी ऐ बातक चेष्‍टा रहैत छल जे आदमी फरिछाएल हो। से हम भाग्‍यवान रही।

मात्र तौल विभाग छोड़ि शेष तीनू किरायेदार वचन केर पक्का ओ साफ इरादाक आदमी निकललाह। ओइमे श्री नन्‍दलाल मिश्रजी (ड्मरी गामक) १३ वर्ष रहला। बिना कोनो लाइ-लपट-केँ रहला आ अन्‍तमे सेवा निवृत्तक बाद गाममे नव मकान बना कऽ चलि गेला। ओ एकटा समांग जकाँ हमर मकानक रक्षा केला।

गामपर स्‍व. माय रहैत छेली। हुनकर व्‍यवस्‍थाक क्रममे समय-समयपर हमरा गाम जाएब अनिवार्य छल। आब तँ मैयो नहि छैथ ई शून्‍यता के भरत? 

नौकरीसँ सेवा निवृत्त भऽ गेलौं। तथापि परिवारोमे आ अपनो इच्‍छा भेल जे दिल्‍ली वा आसे-पड़ोसमे रही।

एतेक दीर्घ समय नौकरीमे बीति गेल। तरह-तरह केर लोक आएल-गेल। विवाद आएल, समाप्‍त भऽ गेल। समयक प्रभावसँ सभ किछुक ढिकाना लागि जाइत अछि। आब सोचैत छी तँ बहुत रास बीतल बात सभ व्‍यर्थ लगैत अछि। मुदा सभ किछु अपने हाथमे नहि छइ। समय सभ किछु सीखा दइ छइ। कहबी छै जे जखन धोती पहिरै-जोकर होइत अछि तँ फाटए लगैत अछि।ई तँ जीवनक सत्‍य छइ। जीवन-यात्रामे जे कियो जइ रूपे संग भेल, सभकेँ कोटिष: धन्‍यवाद। ◌

Life is an opportunity

Life is an opportunity   Millions of people have come and gone but nobody remembers them. Only a few persons like Vyas, Shankarachary,Vi...