मैथिलीमे हमर प्रकाशित पोथी

मैथिलीमे हमर प्रकाशित पोथी

रविवार, 30 अप्रैल 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशनक चारिम खेपः

 


 

आइ ओहि घटनाक पाँच साल भए गेल। माएक पाँचम बरखी भए रहल छल। हमर मामा विधि-विधानसँ बरखीक व्यवस्था केने रहथि। सौंसे गामक ब्राह्मण भोजनक हेतु आमंत्रित रहथि। खूब नीक जकाँ काज भेल। थैह-थैह भए गेल। मुदा हमर मोन भोरेसँ उदास छल। काज करैत-करैत आँखि लागि गेल। सपना देखए लगलहुँ। लागल जेना माए आबि कए ठाढ़ छथि, कहि रहल छथि- श्रीकांत कथुक चिंता नहि करह। हम सदरिकाल तोरे लग छी।

एतेक बाजि ओ हमर हाथ धए लेलीह। लाल टुह-टुह भगवती सन हुनकर आकृति देखैत बनैत छल। हम हुनका साष्टांग प्रणाम करए उठलहुँ कि मामाकेँ माथसँ हमर हाथ टकरा गेल। ओ हमरे लग सुतल छलाह। मामा अकचकाक उठलाह- की भेल?”

 "माए…!" -एतबा बाजि हम बेसुध भए गेल रही। बैद बजाओल गेलाह। ओझा गुनी सेहो भेल। हम क्रमशः सामान्य होइत गेलहुँ। मुदा रहि-रहि कए माएक कहब मोन पड़ैत रहैत छल।

ओहि दिन इसकूलसँ आएल रही। दसमाक परिणाम आएल छल। हम प्रथम श्रेणीमे उतीर्ण केने रही । सौंसे मामागाममे हल्ला भए गेल छल। मामाक सभ प्रशंसा कए रहल छल। हम असारापर बैसल अखबार देखैत रही। ताबे माएक अबाज सुनाइ पड़ल, जेना कहि रहल छथि- श्रीकांत! हरि कतए अछि?"ताबते जोरकेँ हल्ला भेलैक। गाममे मारि भए गेल छलैक। कनीके कालमे मामा लहु-लुहान भेल पड़ल छलाह। हरि कोनो काजसँ बजार गेल छलाह। काज कए लौटि रहल छलाह। गामक लगीच आबि गेल छलाह कि चओरमे चारि-पाँचटा लठैतसभ घेरि लेलकनि आ दे दनादन,दे दनादन,लाठीक वर्षा कए देलक। ओ तँ रच्छ भेल जे कनीके कालक बाद इसकूलमे छुट्टी भेल आ चटिआसभकेँ अबैत देखि ओ सभ हरिकेँ ओही हालतिमे छोड़ि कए भागि गेल। मास्टर साहेबकेँ रक्तरंजित देखि चटिआसभ चिकरए-भोकरए लागल। लग-पास बहुत लोकक करमान लागि गेल। इसकूलसँ मास्टरसभ दौड़ल अएलाह। सभ छगुन्तामे छल। हरि सन निर्विवाद लोकपर एहन घातक प्रहार ! एना किएक भेल? के केलक?

हरिक बहुतरास जथा-पात महराजक सिपहसलारसभ नीलाम कए बेचि देने छल। रहि-रहि कए ओकरा ई बात ध्यान अबैत रहैत छल। एहि प्रकारसँ दरिद्र भेनिहार कोनो ओ एसगरे नहि छल। गाम-गाम एहन लोकसभ भरल छल जकर एहने इतिहास छल। गाहे-बगाहे ओ अपन आक्रोश व्यक्त करैत रहैत छलाह। एहिबातसँ कुपित भए जमींदारक लठैतसभ हुनकापर आक्रमण कए देलक।

हरिकेँ मारि कए तिनू बदमास लंक लागि कए भागि रहल छल। बीचमे धार छलैक। भादव मास छल। धारमे पानि भरल छल। धारमे कुदि गेल। ऊपरसँ मेघ बरसए लगलैक। तथापि ओसभ हेलि गेल आ पता नहि कतए जाए ऊपर भेल। पुलिस बहुत प्रयास केलकैक मुदा केओ नहि पकड़ाएल। पुलिससभ सभ घुड़ल आ हरिकेँ ओही जीप पर लादि कए अस्पताल लेने चलि गेल।

हरिकेँ ऊपर कएल गेल एहि घातक प्रहारक समाचार केना-ने-केना पुलिस मोहकमामे ऊपर धरि पहुँचि गेल। कहाँदनि जासूसी खबरि भेटलैक जे एहि घटनामे जन विद्रोहक संभावना अछि। एसपी, कलक्टर सभ दन-दन कए घटनास्थल पर पहुँचल। लोकसभकेँ पूछ-ताछ होमए लागल। केओ कोनो निजगुति बात नहि कहैक। एसपी तमसा गेल आ जएह सामने अबैक तकरे पकड़ि कए थाना लेने चलि गेल।

एहिबातसँ लोकमे आक्रोश आओर बढ़ि गेल जे पुलिसक उच्च अधिकारी निर्दोष लोकसभकेँ पकड़ि कए थानामे बंद कए देने अछि। गाम-गामसँ लोकसभ जुटए लागल। सभ मिलि कए थानाकेँ घेरि लेलक। ओहि भीड़मे कैकटा अगिमुत्तूसभ छल। ओसभ गोली-बारुदसँ लएस छल। दना-दन फटक्का फुटबाक अबाज भेलैक आ पुलिससभ लंक लागि कए भागल। थाना धू-धू कए जरए लागल। एसपी, कलक्टर सभ फेल भए गेलाह। किछु काल लेल एहन लगलैक जेना गुंडासभक राज भए गेल। पुलिस लगमे कमे लोक छलैक। केओ ई नहि सोचि सकल जे एकटा मामुली घटना एहन रुखि लए लेत। मुदा जे हेबाक से भए गेल रहैक।

एहि हंगामाक खबरि महराजक ओहिठाम धरि गेल। एहि घटनाक्रमसभसँ ओ बहुत विचलित छलाह। की पता काल्हि जा कए ई सभ राज-काजमे संकट ने ठाढ़ करए" -महराज सोचथि। अस्तु, ओ अपन सिपहसलारसभकेँ सरकारक उच्च अधिकारीसभ लग पठओलथि जाहिसँ एकरा नीकसँ दबा देल जाए। महराजक प्रयास कारगर भेल। महराज आओर हुनकर सिपहसलारक सह पाबि सरकारी महकमाक रुखि बहुत आक्रामक भए गेल। दूपहर राति धरि पुलिसक उच्च अधिकारीसभक बैसार होइत रहल। निर्णय भेल जे गौआँसभकेँ सबक सिखाओल जाए। रते-राती पुलिसबलकेँ गामपर छापामारीक हेतु पठाओल गेल। दूपहर रातिमे पुलिस सभ दन-दन करैत गाममे प्रवेश केलक। लुच्चा,लफंगासभ तँ पहिने घर धए लेने छल। मुदा पुलिसकेँ तँ लोकसभकेँ सबक सिखेबाक रहैक से जतए जे भेटलैक तकरा पकड़ने चलि गेल। दूटा पुलिसक जीपमे एगारह गोटेकेँ पकड़ि कए सोझे एसपी लग लेने चलि गेल। एसपी साहेब प्रसन्न भेलाह। सभकेँ रातिभरि राजपुरामे पुलिस हाजतमे राखल गेल। ओकरासभ पर दुनियाँ भरिक धारा लगा देल गेल। देशद्रोहसँ लए हत्याक प्रयासक धारा लगाओल गेल। पुलिसक क्रोधक क्रूड़तम प्रतिफल सामने छल।

हालति तेहन छल जे केओ- ककरो सुधि लेनहार नहि रहलैक। गाममे जे केओ बाँचल छल सभ भागल। मात्र स्त्रीगण, बच्चा ओ वयोबृद्ध लोकसभ गाममे रहि गेलाह। कालू भगता सेहो अन्दर छल। गाममे लोक सभ फुसफुसेबो करैक जे कहाँ गेलैक ओकर भगतै?तेहन छल तँ रोकि लैत पुलिसकेँ। बँचा लैत अपनोकेँ तखन ने?

मुदा कालू तँ जहलोमे अपन रस्ता पकड़ि लेलक। जहलक अधिकारीसभकेँ कोना-ने-कोना जाइते देरी मिला लेलक। साँझक नित्य ओकर भगतै होमए लागल। ओहूठाम कारनीसभक पाँति लागि गेल। की जहल, की गाम, कालू भगत अपन भगतैसँ सभकेँ गुम केने छल।

ई बात एसपी साहेबकेँ कान धरि पहुँचल। पहुँचैक रहैक । एसपी जेलरकेँ बजओलक। ओहि समयमे आओर केओ नहि छल।

"जहलमे की सभ भए रहल अछि?" -एसपी पुछलकैक।

"सरकार! झूठ नहि कहब। जहिआसँ ई भगता जहलमे आएल रोज रातिकँ हमर डेरामे भूत-प्रेत चक्कर लगा रहल अछि। काल्हि तँ हद्दे भए गेलैक?” -जेलर बाजल।

"की भेलैक? तोरा एहिना सभठाम भूते देखाइत रहैत छह? जहन नौकरी जेतह तखनसभ भूत झड़ि जेतह। अपन भाभटि जल्दी समटह।" -एतबा कहि एसपी साहेब जेलरकेँ ओतएसँ भगा देलकैक।

एसपी साहेबसँ डाँट खा कए जेलर अपन डेरा पहुँचले छल कि ओकर घरबाली सरकारी डेराक बाहरे ठाढ़ छलि।

"बाहर किएक ठाढ़ छी?" -जेलर बाजल।

"घर रहए जोकर नहि अछि"।

"की भेल?"

"अपने जा कए देखि लिअ।"

अन्दर जाइत जेलरकेँ माथा घुमए लगलैक। सौँसे घरमे अक्कर-बक्कर भड़ल छलैक। ओछाएन पर की- की ने फेकल छलैक। ततबे नहि भानस धरि नहि छोड़ने छलैक। मुँहथरे पर मरल कौआ खसल छलैक। ई सभ देखि कए जेलरक माथा सुन्न भए गेलैक।

जेलर बाबूकेँ किछु नहि फुराइक। ओमहर एसपी साहेबक ठेङा तँ एमहर भूत-प्रेतक आतंक। ओकरा तँ लगैक जे चिंतासँ हृदयाघात भए जेतैक। डेरामे घरबाली असगरे रहैत छलैक। जेलर बाबू अपने जेलक समस्यासभमे व्यस्त रहैत छलाह। जहिआसँ कालू भगता जहल आएल नित्य नव-नव फसाद होमए लागल। पुलिसक उच्च अधिकारी सेहो किंकर्तव्यविमूढ़ भए गेल रहथि। हुनकोसभकेँ मोनमे ई बात घुमए लागल- किछु बात तँ छैक अन्यथा जेलर बाबू एतेक परेसान किएक रहितैक?" मुदा सामना-सामनी जखन जेलर होथि तँ ओसभ ओकरे डाँटि देथि, कोनो आओर रस्तो नहि छलनि। सरकारी काज तँ चलेबाक छलनि। मुदा कालू भगत एसगरे सभपर भारी पड़ि रहल छल। सभसँ खराब हालति तँ जेलरबाबूक रहैक। जेलमे कालू भगताक डर,घरमे घरनी परेसान आ बाहर अधिकारीसभ कस्तन केने। कखनोक तँ मोन ततेक उचटि जाइक जे होइक जे फाँसी झूलि  जाए। फेर सम्हरए। डर होइक जे कहीं भूत-प्रेतक असरि तँ नहि भए रहल अछि।

जेलरक कमजोरी कालू भगता बूझि गेल। ओ तँ लोकक मोन तारि लेबामे माहिर छल। रहि-रहि कए ओ जेलर बाबूकेँ डराबए लागल। हद तँ तखन भए गेल जखन जेलरक सामनेमे कालू भगता महिला वार्डक कैदीसभकेँ झाड़-फूक शुरु कए देलक आ ओ मूकदर्शक बनल रहल। कालू भगता नीकसँ ओकरा अपन चांगुरमे लए लेलकैक। कालक्रमे कालूक प्रभावमे पूरा जहलक कैदी सभ आबि गेल। महिला कैदीसभ तँ आगूए-आगूए रहैत छल। ककरो साहस नहि होइक जे कालू भगतकेँ टोक देत। के अनेरे अनिष्ट बेसाहति? जेलरबाबू रोज कालीमाताकेँ प्रार्थना करथि जे ई कैदीसभ छुटि जाए। ओकीलोसभकेँ यथासाध्य उत्साहित करथि, मुदा तेहन-तेहन धारासभ लागल छल जे ककरो जमानति नहि होइक। जेलर माथ ठोकि लिअए?

घरबालीकेँ साहस दैक। हनुमान चालीसाक कैटा किताबसभ आनि कए सिरमामे राखि देलकैक। मुदा जेलरक घरबाली कोंढ़केँ कमजोर रहैक। ताहीबातक जेलरकेँ चिंता रहैक। कहीं एहन ने होइक जे ओ ड्युटी करैत रहए आ घरबालीक संगे किछु अनिष्ट भए जाइक। तेँ ओ सोचलक जे कालू भगताकेँ मिला कए राखल जाए। ओकर घरबाली केँ किछु भए गेलैक तँ के काज देत? q




 

Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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