बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

यूरोप यात्रा






भारत सरकारक प्रशिक्षण कार्यक्रमक अनुसार ३५ गोटेकेँ एक-संग युरोपक पाँच देश घुमबाक कार्यक्रम छल। सभगोटे सरकारक प्रथम श्रेणीक अधिकारी छलाह। सभक नेतृत्व एकटा महिला अधिकारीक हाथमे छल। सभ व्यक्तिमे विदेश देखबाक-घुमबाक आ रहबाक अवसरसँ मनमे असीम प्रसन्नता छल। सभगोटे अपन-अपन कागज-पत्तर सरिआबएमे लगलहुँ। पासपोर्ट सरकारी बनल। वीजा कार्यालयक तरफसँ बनि गेल। टीकट सरकार देलक। बस कपड़ा-लत्ता सरिआउ, किछु पाइ बेसी कए रखि सकी तँ राखि लिअ आ विदा होउ। ओना, किछु यूरो सरकारक तरफसँ जेब खर्चक हेतु सेहो देल गेल।

फ्रांसक राजधानी पेरिस लौटबा काल रस्‍तामे छल। सभकेँ इच्छा भेलैक जे ओकरो देखि सकी तँ  देखि ली। से प्रयासक बाद सम्‍भव भेलैक। आपसी यात्राक कार्यक्रममे दिन भरि पेरिस भ्रमण सामिल कएल गेल। पैंतीस आदमीक हुजुम एक्केठामसँ विदेश विदा छल। एकर आनन्द सोचल जाए सकैत अछि।

यूरोप भ्रमणक उपरोक्त कार्यक्रम असलमे प्रशिक्षणक अंग छल। अगस्त २००९ मे दू सप्‍ताहक हेतु कतेको दिनसँ तैयारी चलि रहल छल। विदेश यात्राक दौरान की करबाक नहि अछि, आ की करबाक अछि तकर सविस्‍तार चर्चा भेल। कोनो एहन काज नहि करबाक छलैक जाहिसँ देशक गरिमापर बट्टा लागए।

साँझक आठ बजैत-बजैत सभगोटे इन्दिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डापर पहुँचि गेल रही। सभहक जेबीमे अपन-अपन टीकट, पासपोर्ट आदि जरूरी कागजात छल। रातिक दू बजे करीब हवाई जहाजक उड़ान छल।

किछु गोटेकेँ मुम्बइसँ आगूक जहाज लेबाक रहनि तैँ ओ सभ फराक पहिनहि मुम्बइ चलि गेल रहथि। हम दिल्लीसँ सीधा फ्रैकफर्ट हवाई जहाजमे जाएबला समूहक संगे रही। दिल्ली हवाई अड्डापर सभ सहयात्री सभ जमा भए गेलहुँ। सुरक्षा जाँचक बाद हम सभ अन्दर आव्रजन खिड़कीपर ठप्‍पा लगेलहुँ। सभकेँ संगमे कोनो प्रतिबन्‍धित सामान नहि लए जेबाक चेतौनी पहिनहि दए देल गेल रहए। तैँ कोनो परेसानी नहि भेल। किछु कालमे बोर्डीग शुरू भए गेल आ हम सभ बेरा-बेरी सभ हवाई जहाजमे बैसि गेलहुँ।

हमरा लोकनिक प्रशिक्षण स्‍लोवेनियाँक लुबियाना स्‍थित आइ.सी.पी.ई. (Interational Centre for Public Enterprises) मे छल। एकर स्थापना २४ अप्रैल १९७४ ई.मे तत्‍कालीन यूगोस्‍लावीया सरकार द्वारा भेल। भारत, नेपाल, श्रीलंका सहित पन्द्रहटा आओर देशसभ एकर सदस्‍य छथि। एहि संस्थाक विकास यात्रामे भारतक बहुत योगदान अछि। वर्तमानमे आइ.सी.पी.ई. दुनिआ भरिक लोक हेतु विभिन्न प्रकारक विषय, खास कए आर्थिक विषयपर चर्चाक सघन माध्यम अछि। एहि संस्थाक स्थापनामे संयुक्‍त राष्ट्रसंघक संस्था नाम (Non Aligned Movement) क बहुत योगदान अछि। भारतक श्री सी सुव्रमन्यम एवम् श्री जी पार्थ सारथी बहुत दिन धरि एकर नायक, मार्ग दर्शक रहलाह। यूगोस्‍लावियाक विभाजनक बाद १९९२ ई.मे एहि संस्थाक देख-रेख स्‍लोवेनियाँ सरकारक अधीन आबि गेल। एहि संस्थाक प्रशासकीय प्रमुख महानिदेशक होइत छथि जे संस्थाक आमसभा द्वारा चारि वर्षक हेतु चुनल जाइत छथि। संम्‍प्रति डॉ. आनन्द एन अस्थाना ६ अप्रैल २०१५ सँ चारि सालक हेतु एहि संस्थाक महानिदेशक पदपर छथि।

दिल्लीसँ हवाई जहाज खुजल तँ  सोझे जर्मनीक फ्रैकफर्ट हवाई अड्डापर उतरल। सूर्योदय भए गेल छल। मुम्बइसँ आबएबला हमर संगी सभ सेहो ओतहि आबि कए हमरा लोकनिक प्रतीक्षा करैत छलाह। ओहिमे एक गोटेक सामानमे दारूक बोतल रहनि {जे ओ मुम्बइ हवाई अड्डापर कीनने रहथि}। फ्रैकफर्टमे ओ पकड़ल गेलाह आ हुनका बहुत परेसानी भेलनि। हुनका कहल गेल जे वा तँ  पीबि लिअ, वा ककरो दए दिऔक चाहे फेक दिऔक। संगे आगू नहि लए जा सकै छी। पता नहि, ओ तकर की समाधान केलनि।

 फ्रैकफर्ट दुनिआक पहिल हवाई अड्डा थिक। जर्मनीक ई वयस्तम हवाई अड्डा अछि। फ्रैकफर्टक टर्मीनल १A पर हमरा लोकनि स्‍लोवेनियाँक लुवियाना (Lajubljana) हेतु छोट सन हवाई जहाज पकड़लहुँ। घन्टा भरिमे ई यात्रा सम्पन्न भेल। रस्‍तामे सभ तरहक जलखै सेहो देल गेल।

यात्रासँ पूर्व हमरा सभहक एकटा संगी मार्गदर्शन करैत निम्नलिखित विषयपर ध्यान रखबाक परामर्श देलनि। (ओ कतेको बेर विदेश गेल रहथि आ विदेशमे दू साल काजो केने रहथि)

१. हाथक झोङामे एक सेट कपड़ा राखी जाहिसँ जँ चेकइन सामान देरीसँ पहुँचल तँ  काज आओत

२. चेकइन वैगपर अपन नाम, गन्तव्य स्थानक पता सहित फोन नम्बर लिखल जाए। ओहि बैगमे अपन परिचय पत्रक राखल जाए।

३. पासपोर्ट, हवाई जहाजक टिकट , विदेशी मुद्रा अपना संगे सुरक्षित स्थानपर राखल जाए।

४. उपरोक्त जरूरी कागजातक तीन प्रति वैगमे फराक-फराक स्थानपर राखल जाए।

५. नित्यप्रति प्रयोगक जरूरी दबाइ अपना संगे राखू।

६. होटल आदिमे अपन सामानपर ध्यान राखू, जाहिसँ ओ चोरि नहि भए जाए।

७. विदेशमे हमेशा दू वा अधिकक समहूमे रहू जाहिसँ जरूरी भेलापर मदति भए  सकए।

८. विदेशमे कीनल गेल सामानक रसीद संगे राखू, आव्रजन खिड़कीपर तकर काज पड़ि सकैत अछि।

९. अपना संगे छाता, हल्‍का ऊनी स्‍वेटर, आ कोट राखू।

उपरोक्त प्रशिक्षण ९ अगस्तसँ २३ अगस्त २००९क दौरान सम्‍पन्न हेबाक रहए। कार्यक्रम प्रारम्भसँ पूर्वहि हमरा लोकनिकेँ संस्थापनक महानिदेशकक तरफसँ इमेल भेटल जाहिमे संस्थानक बारेमे प्रारम्‍भिक जानकारीक अलाबा प्रशिक्षणक दैनिक कार्यक्रम छल। तहिक अनुसार माने कार्यक्रमक दौरान कोनो काजक हेतु श्री अश्विन श्रेष्ठ एवम् श्री उरोज जेबरसँ सम्‍पर्क करबाक छल।

९ अगस्त २००९ क लुवियाना हवाई अड्डापर हमरा लोकनिक स्‍वागत हेतुश्री श्रेष्ठजी (जे नेपाली मूलक छलाह आ स्‍लोविनियाँमे बसि गेल रहथि) आएल रहथि। दूटा नमगर-नमगर बसमे चढ़ि हमरा लोकनि संस्थानक हेतु विदा भेलहुँ। आधा घन्टामे हम सभ संस्थान पहुँचलहुँ जतए हमरा लोकनिक स्‍वागत डॉ. स्‍टेफन वोगडन सलेज, महानिदेशक केलाह। सभगोटेकेँ छात्रावासमे कोठरीक कुंजी देल गेल। प्रत्‍येक कोठरीमे दू गोटाक जगह छल। मात्र एक्केटा कोठरी छल जाहिमे एसगरे हमर एकटा संगी रहलाह।

कार्यक्रमक समन्‍वयक (महिला अधिकारी) केँ सेहो फराक कोठरी देल गेलनि। तकर पछाइत हमरा लोकनिकेँ चाइनीज भोजनालय- सांग हाइ, लुवियानामे दिनक भोजन कराओल गेल। छात्रावास साफ-सुथरा छल। कोठरी सभमे ए.सी. नहि रहए कारण ओहिठाम ओतेक गर्मी नहि पड़ैत अछि। सभ जरूरी समान ओहि कोठरीमे सुलभ छल।

संस्थानक भूतलपर रवीन्द्रनाथ टैगोर हॉलमे नित्य साढ़े सातसँ आठ बजेक बीचमे जलखै देल जाइत छल। जे ततेक जूश पीबए चाहथि से भेटनि। भारतीय शाकाहारी भोजन एकटा गुजराती ठेकेदार द्वारा देल जाइत छल। लगैत छल जेना अपने देशमे खा रहल छी। ओही हॉलमे रोजाना रात्रि भोजनक व्यबस्था सेहो रहैत छल आ दिनुका भोजना आन-आन ठाम। संस्थानक त्रुवार हॉलमे प्रशिक्षण भाषण होइत छल। समयसँ सभ प्रशिक्षणार्थी, ब्याखाता लोकनि उपस्‍थित भए  जाइत छलाह। चाह आ कौफीक हेतु दू बेर अवकाश होइत छल। चाह/कौफीक अलावा भरि पोख किसिम-किसिम केर बिस्‍कुटक व्यबस्था सेहो छल।

१० अगस्त २०१६क संस्थानक महानिदेशक द्वारा स्‍वागत भाषणक बाद ‍स्‍लोवेनियाँमे भारतीय राजदूत डॉ. भी.एस. शंषद्रि द्वारा भारत स्लोवेनियाँ सम्बन्धपर संक्षिप्त चर्चा कएल गेल। ओकर बाद स्‍लोवेनियाँक विदेश मंत्रालयमे महानिदेशक श्रीएन्‍ड्रेज वेन्‍डेज द्वारा स्‍लोवेनियाँ एवम् अर्थ संकट विषयपर भाषण भेल। भोजनोपरान्त प्रो. जोज ग्रिकर द्वारा Innovative Cross Border e-Region Development विषयपर भाषण भेल। 

रातिमे स्‍वागत आ रात्रि भोजनक कार्यक्रमक बाद सभगोटे विश्राम केलहुँ। भोरे उठि हम सभ लगपास टहलए निकललहुँ। आकाश स्वच्छ छल। वायुमण्‍डलमे कतहु प्रदूषण नहि। आकाशक तारा सभ चकमक देखल जा सकैत छल। हवामे जे निर्मलता छल ओकर अनुभव शब्‍दसँ नहि कएल जा सकैत अछि। मुदा ओतहु पार्कमे एक व्यक्तिकेँ पुरान-धुरान ओढ़ना ओढ़ने सुतल देखलहुँ। कहबी अछि जे गेलहुँ नेपाल, कपार गेल संगे..! स्‍लोवेनियाँ बहुत छोट सन देश अछि मुदा आर्थिक दृष्टिमे उन्नत देशमे अबैत अछि। ई देश यूरोपियन यूनियनक हिस्‍सा अछि आ ओहिठामक मुद्रा यूरो अछि। सभ किछुक अछैतो ओतहु अभागल लोक पार्कमे अनाथ जकाँ सुतल देखाएल, से देखि आश्चर्यमे पड़ि गेलहुँ।

११ सँ सोलह अगस्त २०१६ ई.क बीच स्‍लोवेनियासँ बाहर वियाना, म्युनिखबेनिस जेबाक कार्यक्रम छल। समस्त यात्रामे श्री अश्विन श्रेष्ठजी हमरा लोकनिक संगे रहथि। हुनका संगे एकटा मार्गदर्शक छल आ गाड़ीक चालक रहए जे अपना-आपमे मनोरंजक छल एवम् बहुत रास जानकारी दैत रहैत छल।

९ अगस्तक सायंकाल हमरा लोकनि सीटी सेन्‍टर घुमए गेलहुँ। सड़कपर चलएमे आनन्द आबि रहल छल। सड़कक काते-काते साइकिल चलेबाक हेतु फराक पाँति छल। यातायात नियंत्रण प्रणालीमे एहन व्यबस्था छल जे पदयात्री सड़क पार करबाक सूचना स्विच दबा कए दए सकैत छल।

यातायात नियंत्रणमे सेन्‍सर लागल छल। जाहि कार सभमे अनुमतिक चीप छल, तेकरा चेक प्‍वाइन्‍टपर अबिते रस्‍ता खुजि जाइत छल। शेष लोककेँ अपन कागजात देखबए पड़ैत छल। तकर बादे गाड़ी आगू बढ़ि सकैत छल। जँ सड़कपर यातायात नियमक उल्लंघन करैत पकड़ल गेलहुँ तँ  तुरन्त सायरन बजि उठैत छल आ ओहिसँ उवरक हेतु भारी जुर्माना ३० यूरो लगैत छल। सड़कक कातमे किंवा कोनो पार्कमे लघुशंका करब मना छल।

स्‍लोवेनियाँक सरकारमे विषय वस्तुकेँ विशेषज्ञ सभकेँ मंत्री, सचिव बनाओल जाइत छथि। सरकार बदललापर ओ सभ अपन पुरना काजपर आपस चलि जाइत छथि। यूरोपियन युनियनक सहभागी सभ राष्ट्रमे एक्के बिन्‍दुपर कर लेबाक परम्‍परा अछि। संसदक दू सदन अछि। राष्ट्रपति, मंत्रीक अलाबा नगरपालिका होइत अछि। ओहिठाम राज्य नहि अछि। शहरमे पानिक आपूर्तिक उत्तम व्यबस्था अछि। पद यात्रीक बहुत सम्‍मान कएल जाइत छल। यदि कारसँ चलैत व्यक्ति कोनो पद यात्रीकेँ देखथि तँ  तुरन्त गाड़ी रोकि कए सड़क पार करबाक आग्रह करथि।

११ अगस्त २००९ ई.क प्रात: ६ बजे बससँ सभगोटे आस्‍ट्रीयाक राजधानी वियानाक हेतु प्रस्थान केलहुँ। सभगोटेक आपसी सहमतिसँ ओहि विदेश कार्यक्रमक हम मुनिटर रही। सभसँ पहिने तैयार भए  आगू आबि कए आओरलोक सभकेँ शीघ्र चलबाक हेतु प्रेरित करी। समयक प्रति निष्ठा ओहिठाम बहुत आवश्‍यक छल, अन्यथा लोक हँसीक पात्र भए  जाइत छल।

वियाना आस्‍ट्रीयाक राजधानी थिक। एकर अवादी १.८ करोड़ अछि। आस्‍ट्रीयाक पूर्वी भागमे स्‍थित वियाना अनेको अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाक मुख्यालय अछि। २००१ ई.मे युनेस्‍को एकटा विश्व धरोहर घोषित केलक। वियानाकेँ संगीतक नगर सेहो कहल जाइत अछि। विश्व प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक- फ्राइड ओहीठाम जन्मल छलाह। वियाना दुनिआमे उच्च जीवन स्तरक हेतु प्रसिद्ध अछि। २००५ ई.क एक अध्ययनक अनुसार दुनिआक सर्वोत्‍कृष्ट रहए जोगर शहरमे एकर नाम आएल छल। अमेरिकाक सैन फ्रैसिस्‍को एवम् कनाडाक वानकोमेर एहि टक्करक आन शहर सभमे अछि। प्रति वर्ष ३.७ करोड़ पर्यटक एहि शहरमे भ्रमण हेतु अबैत छथि।

सायंकाल ५ बजे आस्‍ट्रीयामे भारतीय राजदूत श्री सौरभ कुमारसँ दूतावासमे हमरा लोकनिक भेँट भेल। सभगोटेसँ परिचयक बाद जलखैक व्यबस्था रहए। वियानक बारेमे आवश्‍यक जानकारी सेहो हुनका माध्यमसँ भेटल। भारत एवम् आस्‍ट्रीयाक पारस्परिक सम्बन्धक चर्चा करैत ओ स्पष्ट केलनि जे २००० भारतीय ओहि देशमे रहि रहल छथि। भारत भ्रमण हेतु वीजा देबामे कोनो देरी नहि होइत छल ओ अधिकांश लोककेँ ओही दिन वीजा भेटि जाइत छल। राजदूत महोदय हमरा लोकनि द्वारा पुछल गेल कतेको जिज्ञासाक उत्तर दैत रहलाह। दूतावासक बाद हमरा लोकनि नगर भ्रमण हेतु विदा भेलहुँ। ओहि क्रममे पुरना महल देखलहुँ जतएसँ ८०० साल धरि ओहि देशक शासन भेल छल। प्रधानमंत्री आवास एवम् संसद भवनकेँ एकदम लगीचसँ हम सभ देखलहुँ आ सुरक्षाकेँ जे ताम-झाम अपना देशमे अछि, से ओतए कतहु नहि बुझाएल। शहर एकदम स्वच्छ, मनोरम। लोकक अवादी बहुत कम। रस्‍तामे तँ  मोसकिलसँ किओ देखाइत। खेत सभ हरिअर कंचन। बीच-बीचमे कतहु-कतहु गाम सभ, छोट-छोट मुदा पक्काक घर सभ दर्शनीय दृश्‍य उत्पन्न करैत छल। सभ घरपर सौर ऊर्जाक उत्‍पादनक व्यबस्था छल। रस्‍ता भरि पवनचक्की द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्‍पादनक व्यबस्था देखाएल। यत्र-तत्र द्वितीय विश्व युद्धक स्मृति अवशेष भरल छल।

सड़कपर ३५टा भारतीय हुजुम जखन चलैत छल तँ  अभूतपूर्व दृश्‍य भए  जाइत छल। देशक प्राय: सभ राज्यक लोक हमरा सभहक संगे छलाह। अहिना सड़कपर चलैत काल वियानाक फूट-पाथपर एकटा पंजाबी दोकान केने छलाह। हमरा सभकेँ हिन्‍दीमे गप्प करैत सुनि बहुत प्रसन्न भेलाह। गप्प-सप्‍प्‍क क्रममे अपन परेसानी सभ व्यक्‍त करैत रहलाह।

सम्‍पूर्ण यूरोप एक दोसरसँ जुड़ल अछि। सड़कक माध्यमसँ पूरा यूरोप घुमि सकैत छी। एकाधिक प्रवेश वीजा भेटैत अछि। जहिना अपना देशमे एक राज्यसँ दोसर राज्य जाइत छी तहिना ओतए एक देशसँ दोसर देश घुमि सकै छी।

लगपासक घर सभमे फलक बगीचा छल। निच्‍चाँमे फल सभक पथार रहैत छल। सड़कक काते-काते हम सभ चली तँ  लोक सभ आश्चर्यचकित भए  देखैत रहैत छल। किओ-किओ कहैत जे ओ इण्‍डियाकेँ जनैत अछि किंवा इण्‍डिया गेलो अछि। मुदा सभहक मुखमण्‍डलपर एकटा सत्‍कारक भाव भेटैत छल जकरा बिसरब असम्‍भव...।

१२ अगस्त २००९क हमरा लोकनिक पहिल पड़ाव छल- यूनीडो (United Nations Industrial Developemant Organization) संयुक्त राष्ट्रसंघक अधीन यूनीडो अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर गरीबी निवारण हेतु औद्योगिकरणक विकास हेतु कार्यरत् अछि। जनवरी २०१७ धरि भारत सहित १६८ देश एहि संस्थाक सदस्‍य छथि। संस्थाक निदेशक द्वारा प्रस्तुतिकरणक क्रममे मूलत: वर्तमान बाजार आधारित परिवेशमे सरकार सभहक महत्व विषय उभरल।

११ अगस्तक दिनुका भोजन एकटा भारतीय भोजनालयमे छल। ओकर संचालक एकटा भारतीय युवक छलाह जे ओहिठाम होटल प्रबन्धन करबाक हेतु गेल रहथि आ पढ़ाइ पूरा कए भोजनालय चलबए लगलाह। ओ अपन प्रयासमे पूर्ण सफल छलाह। होटल खूब चलैत छल। उत्तम कोटिक भारतीय भोजनक व्यबस्था छल। मुदा दोसर दिन एकटा चाइनीज भोजनालयमे खेनाइक व्यबस्था छल। शाकाहारी लोकक संख्या आधा-आधी छल ओहिमे ६-७ टा तँ  कट्टर शाकाहारी छलाह। ..एकटा हाँड़ीमे भात राखल रहए। वैरा कहलकै जे आधा दिस तँ  अण्‍डा सहित भात अछि आ आधा बिना अण्‍डाबला।

ई बात सुनि कए हम आ हमर एकटा दच्‍छिन भारतीय मित्र कड़ा विरोध कएल, आखिर एहि बातक कोन गारंटी अछि जे एक्के हाँड़ीमे राखल दू तरहक भात उलटि नहि गेल होएत आ छूतिक तँ  बाते छोड़ू। हम सभ ४-५ गोटे भोजनपर सँ उठि गेलहुँ। ताहिपर आयोजक लोकनिक आग्रह भेल जे हम सभ कम-सँ-कम जूसे पीबि ली। मुदा बादमे ओकर भूगतान लए कए बिबाद भए  गेल जे मोसकिलसँ समटल।

शाकाहारी लोकनिकेँ सभठाम कष्ट बुझाए सिवाय भारतीय होटल सभमे। दोसर ठाम तँ  शाकाहारक सही माने घास-फूस बुझल जाइत छल। जँ अहाँ छाँटि सकब तँ  अहाँ जानी। भोजनक मामलामे सभसँ नीक व्यबस्था सलोविनयामे छल। ओहिठाम भोरक जलखै एवम् रात्रिक भोजन गुजराती होटलसँ व्यवस्‍थित छल तैँ अति रूचिकर रहैत छल। ओतहु दिनुका भोजनक हेतु चाइनीज भोजनालयक व्यबस्था छल जतए हमरा सन शाकाहारी प्राय: भूखले रहि जाइत छल। एहि आशामे जे रातिमे सभ सधा लेबैक। बाहर खाएब किंवा पानियोँ पीबि बड़ महग रहए। एकटा कौफीक हेतु तीन यूरो यानी भारतक लगभग २७० रूपैआ होइत छल जे बड़ महग बुझाइत। जखन-कखनो कोनो बैसक वा सरकारी कार्यक्रम होइत छल तँ  पानि, चाह, कौफी, बिस्‍कुटक व्यबस्था तँ  रहिते छल। नगर भ्रमणमे सेहो आयोजक द्वारा सीमित मात्रामे पानिक बन्द बोतल देल जाइत छल। ओहिसँ बेसी पीब तँ  कीनए पड़त। दाम-पुछू नहि। टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।

१२ अगस्त २००९क दुपहरियाक भोजनक बाद आइ.ए.ई.ए. (International Atomic Energy Agency) क निदेशक द्वारा भाषण छल। ओ भारतीय छलाह। ओहिठाम नौकरीसँ पहिने भारतीय प्रशासकीय सेवाक अधिकारी रहथि, आ तैँ भारतीय परिस्‍थितिसँ पूर्ण अवगत रहथि। ओ किसिम-किसिमसँ नाभिकीय ऊर्जाक रचनात्मक उपयोगक विषयपर अपन विचार रखैत एहि बातपर जोर दैत रहथि जे दुनिआमे जाहि प्रकारसँ ऊर्जाक प्रयोजन बढ़ि रहल अछि, ताहिमे नाभिकीय ऊर्जाक रचनात्मक प्रयोग अनिवार्य भए  गेल अछि। ततबे नहिकतेको प्रकारक चिकित्‍सीय जाँच एवम् उपचारमे सेहो एकर उपयोगिता महत्वपूर्ण अछि।भाषणक बाद प्रश्न पुछबाक परिपाटी छल जाहिसँ बढ़ियाँ बात ई छल जे यू.एन.ओ.क संस्थामे रहितो ओ भारतीय हितक प्रति बहुत संवेदनशील रहथि। आइ.ए.ई.ए.क मूल उद्देश्‍य शान्ति हेतु आणविकक शक्‍तिक प्रयोग थिक। एकर स्थापना संयुक्‍त राष्ट्र संघक स्‍वायत्व संस्थाक रूपमे सन् १९५७ ई.मे भेल।

वियानाक दर्शनीय स्थान सभमे महत्वपूर्ण अछि, हसवर्ग साम्राज्यक राज महल...। १२७९ ई.सँ लगातार कोनो-ने-कोनो राजाक शासन केन्द्र रहल ई महल संप्रति आस्‍ट्रीयाक राष्ट्रपतिक सरकारी आवास अछि। एहि महलमे नाना प्रकारक म्यूजियम केर अलावा आवासीय अपार्टमेन्‍ट सभ अछि। राजमहलक अन्दर सार्वजनिक पूजाक स्थान अछि जाहिठाम आम जनता आबि जा सकैत अछि। रबि दिन ओहिठाम संगीत कार्यक्रम सेहो आयोजित कएल जाइत अछि। राजमहलक अन्दर सीसी म्यूजियम अछि जे ९ बजेसँ सायं ५.३० बजे धरि आम जनता हेतु खुजल रहैत अछि। सीसी म्यूजियमक अन्दर ऑडियो टूरसँ बहुत रास जानकारी भेटैत अछि। महलक अन्दर पुरना खजाना एवम् ओहिमे राखल राजमुकुट ओ राजकीय वस्त्र सभ दर्शनीय थिक।

१३ अगस्त २००९ क आठ बजे हम सभ वियानासँ म्युनिख (जर्मनी) हेतु बस द्वारा प्रस्थान केलहुँ। लगभग पाँच बजे म्युनिख स्‍थित भारतीय कांसुलेट जेनरलक कार्यालय पहुँचलहुँ। ओहिपर फहराइत तिरंगा झण्‍डा फटकिएसँ देखा रहल छल। आपसी परिचयक बाद कांसुलेट जेनरल महोदय भारत-जर्मनीक आपसी सम्बन्ध एवम् वर्तमान आर्थिक परिवेशमे तकर महत्व पर सारगर्भित भाषण देलाह।

हुनकर कहब रहनि जे जर्मनी संगे भारतक पुरान सम्बन्ध रहल अछि। जर्मनीमे संस्कृत अध्ययन एवम् अनुसन्‍धानक अति प्राचीन इतिहास रहल अछि। दुनू देशकेँ जनतांत्रिक शासन पद्धतिक अलावा सांस्कृतिक एवम् नैतिक मूल्‍यमे अनुरुपता अछि। संगे ईहो कहब रहनि जे भारतीय द्वारा जर्मनीमे कएल गेल निवेशसँ तुलनात्मक दृष्टिये बेसी जर्मनकेँ नौकरी भेटल अछि ,भारतमे जर्मन निवेश द्वारा कम भारतीयकेँ जीविका भेटल अछि। ओ अतिशय आग्रही एवम् सरल स्वभावक लोक छलाह। कार्यक्रमक बाद चाह-पान भेल आ हमरा लोकनि होटलमे रात्रि विश्रामक हेतु चलि गेलहुँ।

१३-१४ अगस्तक रात्रिमे हम सभ म्युनिखमे रहलहुँ। होटल आलीशान छल। स्नानगृहमे छोट-सँ-पैघ नापक किसिम-किसिमकेँ तौलिआ राखल छल। कोठरीमे मिनीवार छल। पीबैबला घरेमे बैसल पीबि सकैत छल, मुदा सभहक पाइ जाएकाल चुकता करए पड़ैत। भोरक जलखैक ‍शुल्क नहि देबक रहए। जलखैक स्थान विशालकाय छल आ ओहिमे जलखैक सामानक भरमार छल। जे खाउ, जतेक खाउ। फल खाउ, फलक रस पीबू, अण्‍डा खाउ। ब्रेड सभहक तँ  ततेक किसिम रहए जकर वर्णन कठिन अछि।

म्युनिखक होटल सभहक साज-सज्जा वियानासँ बेसी नीक रहए। चाहक विन्यास सभमे भारतीय दार्जलींगक चाहक पुड़िया सभ सेहो रहए। लोक सभ सुन्दर नमगर ओ चुस्त  छल। बड़का-बड़का मौल सभमे वस्तुक भरमार छल। जे चाही लिअ, मुदा दाम भारतसँ बेसिए रहए। इलेक्‍ट्रॉनिक सामान सभहक भरमार रहएमुदा महग। तखन की लेल जाएअधिकांश लोक सनेस हेतु किसिम-किसिमक चॉकलेट सभ लेलक।

म्युनिखक वीयर हॉलमे हजारो आदमी एकठाम बैसि कए दारू पीबैत अछि। हमर किछु सहयोगी सभ उत्‍सुकतावश ओकरा देखबाक हेतु रातिमे गेलाह मुदा लौटला पछाइत अपसोच करैत रहथि जे बेकारे गेलहुँ। सम्‍पूर्ण वातावरण दुर्गन्धसँ भरल छल। हम आ हमर रूमेट ओहि समयकेँ सुतएमे उपयोग कए प्राय: बढ़िआँ निर्णय लेने रही। म्युनिखमे सालमे एकबेर वार्षिक वीयर उत्‍सव होइत अछि। प्राय: सितम्बरक मध्यसँ शुरू भए  अक्‍टुवरक प्रथम सप्‍ताह धरि चलैत अछि। एहिमे दुनिआ भरिसँ ६ करोड़सँ अधिक लोक भाग लैत अछि। वावेरियन संस्कृतिक ई एकटा महत्वपूर्ण अंग अछि। एहि उत्‍सवमे किसिम-किसिम केर खेल-धुप, नाना प्रकारक भोजनक अतिरिक्‍त मनोरंजनक अनेकानेक विकल्‍प सुलभ रहैत अछि।

१४ अगस्त २००९ ई.क प्रात:काल ९.३० बजेसँ जर्मनीक चैम्बर ऑफ कामर्स एण्‍ड इन्‍डस्‍ट्री ववारियाक सभा गृहमे संस्थानक अध्यक्षक भाषण छल।उपरोक्‍त संस्थाकेँ जर्मनीक लाखों कम्‍पनी सदस्‍य छल। पेरिसक सी.सी.आई.क बाद ई अपना तरहक संस्थानमे दोसर स्थानपर छल। जर्मनीक एकीकरण एवम् तकर प्रभावक विषयमे एहि बैसारमे विस्‍तारसँ चर्चा भेल। पच्‍छिमी जर्मनी अपेक्षाकृत अधिक समृद्ध अछि। पू. जर्मनीक आर्थिक स्‍थिति तखनो खास्‍ता-हाल छल। तैँ एकीकरणक बाद पच्‍छिमी जर्मनी दिसका लोक सभ एकीकरणसँ अप्रसन्नता व्यक्‍त करथि।

जर्मनीकेँ म्युनिखमे घुमैत हमरा लोकनि ओलम्‍पिक खेलक स्थान देखलहुँ। म्युनिखक तकनीकी संग्रहालय देखलहुँ। ओहिमे विद्युत उत्‍पादनक व्यवहारिक वर्णन छल। फराक-फराक तलपर नाना प्रकारक वस्तु सभ प्रदर्शनीक हेतु राखल छल। वायुयान, रेल, जल-जहाज सहित अनेकानेक वस्तुक जर्मनीमे अविष्‍कार एवम् प्रयोगक जानकारी लैत, देखैत चकविदरो लागि जाइत छल। निश्चय ओ सभ कतेको क्षेत्रमे हमरा सभसँ बहुत आगू छलाह। भए  सकैए जे लोक यूरोपक प्रति अनेकानेक धारणासँ पूर्वाग्रहित हो, परन्तु हमरा रस्ता, होटल, चौबटियामे कोनो अभद्र बात नहि देखाएल। ओहि तुलनामे तँ  दिल्ली किंवा लगपासक परिस्‍थिति अतिशय चिंताजनक अछि।

ओहिठामक लोक सभ कार्यक प्रति निष्ठावान एवम् परिश्रमी छथि। ततबे नहि, व्यर्थक बिबादसँ सेहो कोनो मतलब नहि। ओतेक दिनमे मात्र एक दिन वियानामे पुलिसक जत्‍था देखबामे आएल जे कोनो प्रर्दशनकेँ नियंत्रित कए रहल छल। अपना सभ ओहिठाम जकाँ यत्र-तत्र सर्वत्र पुलिसिया हुजुम किंवा सुरक्षाक तामझाम कतहु नहि देखबामे आएल। आस्‍ट्रीयाक प्रधानमंत्रीक घर धरि अपरिचित लोक सभ बेरोक-टोकक चलि जाइत छल। मंत्री सभ मेट्रोरेलसँ कार्यालय अबैत-जाइत छलाह।

भोरे-भोर कतेको कार्यालयमे लोक भरल आ कार्यरत भए  जाइत छलाह। साइकिल चला कए व्‍यायाम करब आम बात छल। साइकिलक हेतु सभठाम फराक रस्‍ता छल। सभसँ बेसी जे आकर्षक बात छल से ई जे लोक सभमे व्यर्थक अहंकार नहि छल। सरल एवम् सहज रूपेँ लोक व्यबहार करैत छल जकर अनुमान देखिए कए भए  सकैत अछि। ओहि सभ शहरमे जनसंख्या कम अछि। तैँ ओकरा व्यवस्‍थित करब किंवा ओकरा लेल व्यबस्था करब अपेक्षाकृत असान अछि। मुख्‍य शहरकेँ जँ छोड़ि दी तँ  बीचक रस्‍ता सभमे मोसकिलसँ लोक देखाइत। हँ! सप्‍ताहांतधरि दृष्टि अलग रहैत छल।

शुक्रक रातिमे दारुक दोकान पर माछी जकाँ लोक भनभनाइत रहैत छल। शनिक भोरे लगैत जेना पूरा अवादी शहर छोड़ि कए कतहु भागि रहल अछि। किओ कारसँ, किओ मिनी बससँ, किओ कारमे ट्राली लटकौने लोकक हुजुम देखाइत छल। लोकसभ सप्‍ताहांत बिताएब हेतु कोनो झील, कोनो रमणीय स्थान वा कोनो दोसर शहर जा रहल छल। झीलक लगपास लोक पटोटनि देने रौद सोंखैत रहैत छल। समुद्रमे अति तीव्र गतिसँ स्वचालित नाओ सभसँ लोक सभ जल क्रीड़ा करैत देखाइत। ओकर वेग आ ओहिमे सभ लोकक दुस्‍साहस प्रशंसनीय छल। गोटे लोक बड़ मोटाएल देखाइत छल, से देखि दुख ओ आश्चर्य होइत छल, जे एतेक सम्‍पन्न परिवेश रहितो ई सभ शारीरिक रूपसँ अक्षम जकाँ रहबाक कारण कतेको सुखसँ वंचित होएत।

१५ अगस्तक स्वतंत्रता दिवस समारोहक अवसरपर हमरा लोकनि पुन: भारतीय कन्‍सुलेट जेनरलक ओहिठाम पहुँचलहुँ, जाहिठाम झण्‍डोत्तोलन भेल आ भारतक राष्ट्रपति महोदयक संदेश पढ़ि कए सुनाएल गेल। तदुपरान्त मिष्ठान भोजन भेल एवम् आपसी गप्प सभ सेहो। कार्यक्रमक समापनक बाद नगर भ्रमण करैत हम सभ सल्जवर्गक हेतु प्रस्थान केलहुँ।

सल्‍जवर्ग आस्‍ट्रीयाक चारिम सभसँ पैघ शहर अछि। द्वितीय विश्वयुद्धक दौरान कतेको घर घ्‍वस्त भए  गेल ओ सैकड़ो लोक मारल गेलाह। शहरक अधिकांश घर घ्‍वस्त भए  गेल। द्वितीय विश्वयुद्धक बाद सल्‍जवर्ग राज्यक राजधानी बनल/विश्वप्रसिद्ध गायक मोजार्टक जन्म अही शहरमे भेल छल। २७ जनवरी २००६क मोजार्टक २५० मा जन्म समारोह धूम-धामसँ मनाओल गेल छल। हम सभ मोजार्टक घर देखए गेलहुँ। ओहि घरकेँ अजबरूपसँ सुरक्षित राखल गेल अछि। घरमे माजार्ट द्वारा प्रयुक्त किछु वाद्य यंत्र सभ लोकक दर्शनार्थ राखल अछि। मोजार्टक देहान्त मात्र ३५ वर्षक आयुमे भए  गेल परन्तु एतबे कम समयमे ६०० सँ अधिक संगीतक रचना केला आ पाश्चात्य कलात्मक संगीतपर अमिट छाप छोड़ि गेलाह।

१५ अगस्त २००९ क ८ बजे रातिमे थाकल, झमारल हमरा लोकनि लुवियाना आपस अएलहुँ आ संस्थानक छात्रावासमे रात्रिक भोजन कए विश्राम केलहुँ।

१६ अगस्त २००९ केँ भोरे सात बजे हम सभ बससँ बेनिस देखबाक हेतु विदा भेलहुँ। इटलीक पूर्वोत्तर भागमे ११७ छोट-छोट टापूसँ आच्छादित बेनिस शहर पूल द्वारा एक-दोसरसँ जोड़ल अछि। वेनिसक अवादी लगभग ५५ हजार छल। लुवियानासँ वेनिस जाइत काल १८ किलोमीटरक आवा-जाहीमे लगभग ३००० गुफा सभसँ गुजरय पड़ल। बीचमे र्ओ स्थान अछि जतए द्वितीय विश्वयुद्धक दौरान ११५ सैनिककेँ गाड़ि देल गेल छल। असलमे द्वितीय विश्वयुद्ध ओहिठामक लोकक मोनमे गड़ि गेल अछि। चाहेअनचाहे लोक ओहि युद्धसँ जुड़ल घटनाक गप्‍प करए लगैत छल।

दच्‍छिन दिस आल्‍प्‍स पहाड़ी क्षेत्र देखाइत छल। शहरमे प्रवेश हेतु बसकेँ ४०० यूरो आ पार्किंग हेतु ४० यूरो देबए पड़ल। रस्‍तामे मकईजौअंगुरक खेती देखलहुँ। जतए धरि दृष्टि जाइतहरियर कंचन देखाइत।

वेनिस शहर तँ  जेना पानिमे डुबि रहल अछि। एक घरसँ दोसर घर जेबाक हेतु पूलक मदति लेबए पड़ैत। जतए पूल नहि अछि ओतए नाओसँ लोक एकठामसँ दोसरठाम जाइत अछि। जेना अपना सभहक ओतए साइकिल रहैत अछि, तहिना ओहिठाम लोक सभ नाओ रखैत अछि।

वेनिसक कलात्मकता एवम् शिल्‍पकारी विलक्षण अछि। आश्‍चर्य होइत अछि जे ई शहर पानिमे डुबि किएक ने जाइत अछि। मध्यकालीन समयमे वैनिस आर्थिक एवम् सामुहिक प्रतिनिधिक केन्द्र छल। रेशम, मसाला एवम् अनाजक प्रचुर मात्रामे व्‍यापार होइत छल। ९ वीं सँ १७वीं शताब्‍दी धरि वेनिस प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक केन्द्र छल जाहि कारणसँ ई शहर सदिखन आर्थिक रूपसँ समृद्ध रहल।

तेरहम शताब्दीमे एहिठाम ३७ हजार नाविक ३००० जहाजकेँ चलबैत छलाह। वेनिस अपन स्वतंत्र अवधिक दौरान गणराज्य बनल रहल। हलाँकि बेनिसक लोक आमतौरपर रूढिवादी रोमन कैथेलिक रहए मुदा धार्मिक कट्टरता एवम् पाखण्‍डक ओतए चलन नहि रहए। १३४८सँ १६३०क बीचमे कतेको बेर प्लेग फैल गेल जाहिसँ भयंकर मृत्‍यु भेल। नेपोलियन बोनापार्ट संगे युद्धक बाद वेनिसक स्‍थितिमे कएक बेर उठा-पटक होइत रहल।

वेनिसकेँ महल सभक नीव लकड़ीक बनल अछि। ई लकड़ी सभ सैकड़ो वर्षसँ पानिमे डुबल रहलाक बादो खराप नहि भेल अछि।

वेनिसमे दुपहरक भोजन एकटा भारतीय भोजनालयमे छल। ओहूठाम पहुँचक हेतु हमरा सभकेँ नाओक मदति लेबए पड़ल रहए। भोजनक पछाइत हमरा लोकनि जहाजमे बैसि कए मुरानो, वुरानो एवम् टार्सोका द्वीप घुमए गेलहुँ। मुरानोमे शीशा बनेबाक पुरान परम्‍परा अछि। वुरानोमे रंग-विरंगीघर एवम् हथकरघाक सामानक प्रचूरता बुझाएल। टार्सोका द्वीपपर ऐतिहासिक एवम् कलात्मक महत्वक कतेको उदाहरणक संग अत्‍याधुनिकताक प्रभाव देखबामे आएल। जहाजपर बैसल अनगिनित संख्यामे लोककेँ जल-क्रीड़ा करैत देखि, ओहिठामक लोक सभकेँ जीबाक अन्दाज अजब छल। दिन भरि घुमि-फिर हम सभ एक बेर फेर ९ बजे रातिमे लुबिआना स्‍थित संस्थानक छात्रावासमे रात्रि विश्रामक हेतु पहुँचलहुँ।

एवम् प्रकारेण वियाना, म्युनिख एवम् वेनिस सहित लगपासक प्रमुख स्थान देखि-सुनि लेलाक बाद १७ अगस्तसँ २१ अगस्त २००९ धरि संस्थानमे सार्वजनिक महत्वक अनेकानेक विषय सभपर भाषण भेल जाहिमे सम्बन्‍धित विषयक शीर्षस्‍थ विद्वान सभ भाग लेलाह। संगहि लुवियानाक नगरपालिका, ब्‍लेड झील एवम् कुन्‍जक भ्रमण सेहो भेल। स्‍लोवेनियाँ स्‍थित विश्व व्यापार केन्द्र सेहो देखबाक हेतु हमरा लोकनि गेलहुँ। २१ अगस्त २००९ क प्रशिक्षण कार्यक्रमक समाप्‍तिक संग सभगोटेकेँ प्रमाण पत्र देल गेल। रातिमे संस्थानक महानिदेशक द्वारा विदाइ-भोज देल गेल। ओहिमे संगीत (ऑकेस्‍ट्रा)क कार्यक्रम सेहो छल। किछु गोटे अपनो गीत गओलनि। अजब महौल छल। कतेक हृदयसँ हमरा लोकनिक विदाइ भेल, तकर वर्णन करब कठिन।

२२ अगस्त २००९क शनि दिनक गप्प छी। संस्थानक क्रिया-कलाप सम्पन्न भए  गेल छल। आपसी यात्रा २३ अगस्त २००९क छल। तैँ ओहि दिनक उपयोग घुमबा-फिरबामे भेल। हम सभगोटे विश्व प्रसिद्ध पाल्‍टोजना गुफा घुमए गेलहुँ। जमीनक अन्दर बनल ई गुफाकेँ पछिला २०० सालक दौरान ३६ करोड़ लोक देखि चुकल अछि। एहि गुफाक यात्रामे डेढ़ घन्टा समय लगैत अछि। सुरंगमे बनल रस्‍ता, दीर्घा एवम् हॉल सभहक श्रृखला देखैत बनैत छल। गुफाक अन्दर घुमबाक हेतु छोट सन रेलपर चढ़लहुँ जे छुक-छुक करैत हमरा सभकेँ गुफाक आरामसँ भ्रमण करा देलक। उपरोक्‍त भ्रमणक मार्गदर्शन विश्वक अनेकानेक भाखामे उपलब्ध छल। ओहि गुफाकेँ देखला, घुमलाक बाद जे मोनपर छाप पड़ल से अखनो अमिट अछि। कला एवम् पुरषार्थक विलक्षण संगम अछि ओ गुफा..!

२२ अगस्त २००९क भोरे हम सभ लुबिआना हवाई अड्डापर रही। ओहिठाम वायुयानमे संवार भए  पेरिसक हेतु विदा भेलहुँ। रस्‍तामे सभ यात्रीकेँ जलखै देल गेल। घन्टा भरिक ई लघु यात्रा देखैत-देखैतमे बीत गेल। फेर हम सभ पेरिस हवाई अड्डापर उतरलहुँ। वारंवार  चेतौनी देल गेल जे अपन समानक सावधानीसँ रक्षा कएल जाए कारण ओहिठाम उचक्का सभ तुरन्त समान गाएब कए दैत अछि।

हवाई अड्डासँ बाहर हमरा लोकनिक बस तैयार रहए। सभ अपन-अपन समान रखलक आ बस द्वारा नगर भ्रमणपर विदा भेल। संगमे एकटा मार्गदर्शक सेहो छल जे ठाम-ठाम आबएबला प्रमुख वस्तु आ स्थान सभहक परिचय करबैत रहल।

फ्रांसक राजधानी पेरिसक इफेल टावर विश्व प्रसिद्ध अछि। हमरा लोकनि ओहि टावरपर चढ़लहुँ आ बेरा-बेरी पेरिस शहरक विभिन्न भागक चित्र टावरपरसँ खिचलहुँ। टावरक ऊपर धरि चढ़बाक हेतु लिफ्टक व्यबस्था अछि किंवा पएरो सिढ़ीक माध्यमसँ ओहिपर चढ़ि सकै छी। इफेल टावरक नाम ओकर निर्माता अभियंताक नामपर पड़ल अछि।

११८७-८९ ई.क बीच निर्मित एक इफेल टावरक ऊँचाइ ३२४ मीटर अछि। एहि टावरपर चढ़ि, घुमि हमरा लोकनिकेँ पेरिस शहरक विहंगम दृष्टि भेटल। विलक्षण शहर अछि, जाहिमे लगभग एक्के रंग ऊँचाइक महल सभहक भरमार अछि। इफेल टावरक निच्‍चाँमे कएटा भारतीय सभ छोट-मोट समान सभ बेचैत भेटलाह।

परिसक सीन नदीपर ३७ टा पूल पेरिसमे अन्दर बनल अछि। ई नदी पेरिसक मुख्‍य व्यापारीक जलमार्ग अछि। पेरिस शहरमे प्रयुक्त पानिक आधा भाग अही नदीसँ अबैत अछि। गर्मीक समयमे एतए यात्रीगण विश्राम कए असीम आनन्दक अनुभव करैत अछि।

हमर एकटा संगी साल भरि पेरिसमे रहल रहथि, तैओ कतेको चीज नहि देखि पाएल रहथि। हम सभ तँ  मोसकिलसँ बारह घन्टामे पेरिसकेँ देखए चलल रही। जाहिर छै, कतेक देखि सकितहुँ? तथापि मोटा-मोटी प्रमुख स्थान सभ लग बस रोकैत छल आ हमरा लोकनिक मार्गदर्शक यथा साध्य ओहि विषय वस्तुक इतिहास एवम् वर्तमानसँ परिचित करबैत छलाह।

नेपोलियनक घर सेहो हम सभ देखलहुँ जे आइ-काल्हि स्‍मारक भए  गेल अछि। दिनमे भोजनक हेतु एकटा पाकिस्‍तानी भोजनालयमे व्यबस्था छल, मोन छह-पाँच करैत रहैत जे खाइ ,कि नहि खाइ, मुदा भूख बहुत लागि गेल छल। अस्तु, भोजनमे सामिल भेलहुँ। पूर्णत: भारतीय शाकाहारी एवम् अति स्‍वादिष्ट भोजन कए मोनमे जे सन्तुष्टि भेल तकर वर्णन नहि।

भोजनोपरान्त हम सभ पुन: घुमए गेलहुँ। पेरिसक मेट्रो देखलहुँ। दुनिआक सर्बोत्तम मेट्रोमे सँ एक पेरिस मेट्रो रेल मानल जाइत अछि। ३०० कि.मी. लम्‍बा ट्रैकपर करीब-करीब ३०० स्‍टेशनपर ई ठाढ़ होइत अछि।

मेट्रोक अलावा बस, टैक्‍सी एवम् नाओ द्वारा शहरक यातायातक उत्तम प्रबन्ध होइत अछि। शहरमे किरायापर साइकिल देबाक सेहो व्यबस्था अछि, जाहि लेल मामूली शुल्क लेल जाइत अछि।

सायंकाल हमरा लोकनि आपस पेरिस हवाई अड्डापर पहुँचि गेल रही। ओहिठाम सूर्यास्त आठ बजे तक नहि भेल रहए। तखने हम हवाई जहाजपर अपन देशक हेतु उड़ि गेलहुँ। आकाशमे लटकल सूर्य भगवानकेँ बड़ीकाल धरि देखैत रहलहुँ...। 






















रविवार, 19 फ़रवरी 2017

भोजक परम्‍परा   



भोजक परम्‍परा

अथर्वेदक अनुसार वेद-मंत्रोच्‍चारणक संग जे भोजन बनैत अछि, तेकरा यज्ञशेष अमृतम् कहल जाइत अछि। तइ अमृत स्‍वरुप भोजनकेँ वेदक ज्ञाता व्राह्मण खाथि तँ व्राह्मण-भोजन मानल जाएत। यदि वेदक ज्ञाता व्राह्मण नहि भेटैथ तँ कुमारि कन्‍याकेँ खुआएल जाए, अन्‍यथा व्रह्मदान कएल जाए। यज्ञक प्रत्‍येक आहुतिक संग रूपैआ-पैसा दान कएल जाए आ ओइ पैसासँ युग निर्माण हेतु सत्‍ साहित्‍य कीनि कऽ समाजमे सुयोग्‍य लोकक बीच वितरित कएल जाए।
ऐ विषयमे गुरु नानक केर एकटा कथा बहुत प्रचलित अछि। ओ ई जे अपन यात्राक क्रममे गुरु नानक एकबेर पाकिस्‍तानक सैदपुर गाममे रहनिहार भाइ लालोक ओहिठाम तीन दिन रहला। भाइ लालो हुनकर बहुत सेवा केलक। ओही समयमे ओइ क्षेत्रक मालिक, भागो नामक मुसलमान जमीन्‍दार भोज केलक। ओइमे सभ साधु-सन्‍तकेँ आमंत्रित कएल गेल। मुदा गुरु नानक ओतए नहि गेला। जखन भाइ भागोकेँ ई बात पता लागल, तँ ओ बहुत तमसाएल। तमसाइते गुरु नानक लग आबि पुछलकैन-
अहाँ हमर भोज किए नहि खेलौं? की ऐ दरिद्रक भोज हमरा ओइठामसँ बढ़ियाँ अछि?”
गुरु नानक बजला तँ किछु नहि मुदा दुनू गोटाक ओइठाम बनल रोटीकेँ हाथमे लेला आ दुनू गोटाक समक्षे, भाय लालोक ओइठाम बनल रोटीकेँ दबौलाह तँ ओइसँ दूध निकलए लागल, जखन कि मालिक भागोक ओइठाम बनल स्‍वादिष्‍ट पकवानसँ खून टपकए लागल..! ..तात्‍पर्य, मिहनत ओ इमान्‍दारीक कमाइसँ अर्जित धनसँ बनौल भोजने सही मानेमे खाद्य भऽ सकैत अछि। अर्थात्‍ जेना-तेना धनोपार्जन कए मात्र अहंकारक प्रदर्शन एवं अहंतुष्‍टिक हेतु कएल गेल भोजमे कोनो धर्मिकता नहि भऽ सकैत अछि अपितु पितरक मुक्तिक तँ प्रश्‍ने नहि उठैत अछि...। समस्‍त यज्ञक तात्‍पर्य समाजमे शुभ कर्मक प्रचार थिक। जँ कर्मे ठीक नहि अछि, अन्‍याय द्वारा धनोपार्जित कए धर्मक उपार्जनक प्रयास व्‍यर्थ थिक।
जन्‍मसँ लऽ कऽ मृत्‍युपर्यन्‍त अनेकानेक अवसरपर व्राह्मण भोजन करेबाक प्रचलन अछि। उपनायन, एकादशी यज्ञ, पितृपक्ष, एवं श्राद्ध सन यज्ञ कार्य सेहो व्राह्मण-भोजनक बिना अधूरा मानल जाइत अछि। पितृपक्षक दौरान व्राह्मण भोजन पूर्वजक आत्‍माक शान्‍ति एवं संतुष्‍टिक हेतु कएल जाइत अछि। जइ पूर्वजक मृत्‍यु जइ तिथि-के भेल रहै छैन, तिनका निमित्ते ओइ तिथि-के व्राह्मण-भोजन करौल जाइत अछि। असलमे पितृपक्षक आयोजन पूर्वज लोकनिक प्रति श्रद्धा ज्ञापित करबाक हेतु कएल जाइत अछि। कहल जाइत अछि जे पूर्वज सभ ऐ समयमे अपन सन्‍तानक ओइठाम अबै छैथ एवं हुनका स्‍मरणमे कएल गेल व्राह्म्‍ण-भोजन, दान-पुण्‍य आदि करैत देख बहुत प्रसन्न होइ छैथ, खुशी होइ छैथ एवं अपन सन्‍तानकेँ असिरवाद दइ छथिन।
कहल जाइत अछि जे कर्ण जखन मृत्‍योपरान्‍त स्‍वर्ग गेला तँ ओइठाम हुनका नाना प्रकारक वस्‍तु सभ भेटल। चूँकि ओ महादानी छला, अस्‍तु हुनका द्वारा दान कएल गेल वस्‍तु सभकेँ ओतए जाइते कएक गुणा बेसी कए हुनका आपस कऽ देलकैन। मुदा अन्न, पानि किछु ने भेटलैन, जइसँ ओ बहुत परेशानीमे रहैथ। पछाइत ओ धर्मराजसँ चौदह दिनक हेतु पृथ्‍वीपर पठाबक आग्रह केलखिन। से बात धर्मराज मानि लेलखिन। कर्ण १४ दिनक लेल मृत्‍युलोक आबि कऽ पर्याप्‍त मात्रामे अन्न दान केलैन, जल दान केलैन आ १४ दिनक बाद जखन ओ आपस स्‍वर्ग गेला तँ हुनका पर्याप्‍त मात्रामे अन्न आ जल प्राप्‍त भेलैन। तहिए-सँ आसिन कृष्‍ण-पक्षमे पितृपक्षक आयोजन होइत आबि रहल अछि।
श्राद्धक मूल उद्देश्‍य पूर्वजक प्रति श्रद्धाक अभिव्‍यक्‍ति थिक। एकरा तरह-तरहसँ लोक व्‍यक्‍त करैत अछि मुदा कोनो-ने-कोनो तरीकासँ सौंसे दुनियाँमे लोक अपन पूर्वजक प्रति सम्‍मानक अभिव्‍यक्‍ति हेतु प्रार्थना किंवा आन-आन तरहक आयोजन करै छैथ। कहल जाइत अछि जे पितृ-ऋृणसँ उद्धारक लेल श्राद्ध, तर्पण, व्राह्मण-भोजन आदि बहुत सहायक होइत अछि। यदि सन्‍तान नीक काज करै छैथ, वंशक कीर्तिकेँ बढ़बै छैथ तँ पितर हुनकासँ प्रसन्न होइ छथिन एवं हुनकर शुभ कार्यक सफलतामे सभ प्रकारसँ सहयोग सेहो करै छथिन।
मनुख मरि कऽ, केतए जाइत अछि, फेर जन्‍म लैत अछि की नहि, जन्‍म लैत अछि तँ केतए, केना आ कोन-कोन रूपमे..? ऐ सभ विषयपर हजारो सालसँ चर्चा होइत रहल अछि मुदा अखनो धरि कोनो तेहेन सटीक जवाब नहि ताकल जा सकल जे सभ गोटेपर माने सभ बेकतीपर लागू भऽ सकए किंवा सभकेँ संतुष्‍ट कऽ सकए। एतावत ई तँइ अछि जे मुइला बाद मनुखक वर्तमान शरीर नष्‍ट भऽ जाइत अछि। ओकर चेतना समाप्‍त भऽ जाइ छै आ शरीरकेँ व्‍यर्थ भऽ जेबाक कारण ओकरा अपन-अपन रीति-रिवाजक अनुसार जरा देल जाइत अछि, किंवा गाड़ि देल जाइत अछि। किछु गोटेक धारणा छैन जे मृत्‍युपरान्‍त शरीर नष्‍ट भऽ जाइत अछि, मुदा आत्‍मा अजर-अमर थिक, आत्‍मा नष्‍ट नहि होइत अछि। आत्‍माक पुनर्जन्‍म होइ छै, ओकरा नवीन शरीर भेट जाइत छइ। शरीर भेटिते ओकर आकार-प्रकार मनुखक पूर्व कर्मपर निर्भर करैत अछि।
गीतामे कहल अछि जे जइ भावकेँ धियानमे राखि लोक मरैत अछि, तद्दनुसार ओकरा ऐगला जन्‍म भेटै छइ। गरुण पुराणक अनुसार मृत्‍युक १३ दिनक पछाइत यमलोकक यात्रा प्रारम्‍भ होइत अछि, जइ यात्रामे १७ दिन लगै छइ। तेकर बाद ११ मासक धरि ओ यमलोकमे कनैत रहला बाद यमराजक दरबारमे पहुँचैत अछि। ओइ क्रममे ओकरा भोजनक एकमात्र साधन सन्‍तान द्वारा देल गेल पिण्‍डदान होइत अछि। अस्‍तु, मृत्‍युक उपरान्‍त साल भरिक श्राद्धकर्म बहुत महत्‍वपूर्ण होइत अछि।
मुदा प्रश्‍न अछि जे जीवनक आ जीवनक पछाइत ई प्रक्रिया की आनो धर्मक लोक सभपर लागू होइत अछि? पारसी, मुसलमान वा क्रिश्चनक धार्मिक विश्‍वास अलग-अलग अछि। की ओकरा सभपर जीवन-मृत्‍युक विधान अलग-अलग हएत? की ओकर सबहक मृतात्‍माकेँ शान्‍ति नहि हेतइ? की ओकरो यमलोक जाए पड़तै किंवा मृत्‍युक बादो धर्मानुसार अलग-अलग बेवस्‍था हएत? मनुखसँ हटि कऽ श्रृष्‍टिमे विद्यमान अनेकानेक जीव-जन्‍तु सेहो अछि, ओहो जीवन-मृत्‍युसँ जुड़ल अछि, ओकरो मृत्‍यु होइ छै। मृत्‍युक बाद ओकरा की हेतइ?
अस्‍तु ई सोचैमे अबैत अछि जे जीवनक अन्‍त केतौ-ने-केतौ होइते अछि। समस्‍त जीवक शरीर नष्‍ट भऽ जाइत अछि। तेकर बाद की होइ अछि? खाएर जे होइत अछि से होइत अछि मुदा हम सभ ऐपर विचारे किए करै छी? एही लेल ने जे मृत्‍युसँ हमर भावुक लगाव रहैत अछि। मुदा नित्‍य प्रति जे हजारोक संख्‍यामे लोक मरैत अछि, तेकरा प्रति हम कोनो संवेदनशीलता कहाँ राखि रहल छी? लोक मरि जाइत अछि तद्दुपरान्‍त ओकर स्‍मृति शेष रहि जाइत अछि। ओकरा प्रति लोकक माने अपन लोकक अनुराग बनल रहि जाइ छै, ओकरा द्वारा कएल गल उपकारक प्रति कृतज्ञताक भाव मोनमे उमरैत रहै छइ, आ ओइ भावक अभिव्‍यक्‍तिक माध्‍यम श्राद्ध भऽ सकैत अछि। मुदा ओकरा कर्मकाण्‍डसँ जोड़ब, नाना प्रकारक विध-विधानसँ जोड़ब किंवा ओइ निमित्ते गाम-गामक भोज करब ई समाजिक परम्‍पराक अंग भऽ सकैत अछि, जएह कालक्रमे एकटा नियम बनि गेल अछि।
स्‍वेच्‍छासँ जे बेकती श्रद्धा पूर्वक एकर निर्वाह करै छैथ, तिनका लेल तँ ओकर औचित्‍य भऽ सकैत अछि, मुदा कोनो परम्‍परा विशेषकेँ अनिवार्यताक हदतक आनि देब, वैज्ञानिक सोचक अनुकूल नहि कहल जा सकैत अछि। जीवन, मृत्‍युक समस्‍त सिद्धान्‍त सभ जाति आ सभ धर्मक लोकपर समान रूपसँ लागू होइत अछि।
आया है सो जाएगा, राजा रंग फकीर
एक सिंहासन चढ़ चले, एक वधें जंजीर।
राजा हो, रंक हो, कोनो जातिक हो, कोनो धर्मावलंवी हो, सभ बच्‍चासँ युवक, प्रोढावस्‍ता, वृद्धावस्‍थाक उपरान्‍त क्रमश: मृत्‍युकेँ ग्रहण करबे करै छैथ।
तात्‍पर्य हमर ई अछि जे जीवनक समस्‍त क्रिया जखन एक्के रंग अछि, तँ जीवनक बादोक क्रियामे वैज्ञानिकता, समानता हेबे करतै। हमरा लगैत अछि जे ऐ सभ प्रश्‍नक वस्‍तुनिष्‍ठ उत्तर कठिन अछि, कारण ई लोकक भावनासँ जुड़ल अछि। निश्चय लोक अपन धार्मिक विश्वासक अनुरूप चलैत अपन लोकक मृत्‍युक बादक स्‍थितिक हेतु प्रयत्न कऽ सकैत अछि, मुदा ऐमे वैज्ञानिक सोचक समावेशसँ कोनो अहितक सम्‍भावना नहि अछि।
मनुख अपन-अपन कर्मानुसार जीवन किंवा ओकर बादो सुख-सुविधा प्राप्‍त करैत अछि। नीक काज केनिहार लोक चाहे ओ कोनो धर्मक होथि, मृत्‍युक बादो बेहतर स्‍वरुपमे रहत तेकर अनुमान कएल जा सकैत अछि। धार्मिक अनुष्‍ठान किंवा कर्मकाण्‍डक एतबा महत्‍व तँ निश्चित अछि जे ओ मृतक परिवारक लोककेँ श्रर्द्धांजलिक अभिव्‍यक्‍तिक अवसर प्रदान करैत अछि।
ऐ सभ विषयमे लोकक मान्‍यता सामान्‍यत: लीकसँ हटि कऽ चलैसँ मनाही करैत अछि। एक केलक, दोसर केलक, गाममे सभ केलक, आ करिते चल गेल। परन्‍तु शास्‍त्रमे जे बात सभ नहि अछि, सेहो लोक श्रद्धापूर्वक अपनौने रहैत अछि। आ कालक्रमे ओ एकटा समाजिक कानूनक रूप धऽ लैत अछि। श्राद्धक भोजमे सेहो सएह भऽ रहल अछि। जेतेक गामक भोज हेतैक तेतेक बेसी मृतककेँ पैठ हेतैन, हुनका स्‍वर्गमे बेसी सुख हेतैन। एहेन केतेको लोक छैथ जे दवाबमे किंवा भावनाक आवेशमे गामक-गाम भोज करैत गेला, खेत-पथार बेचि-बेचि कऽ भोज केलाह आ तेकर बाद वर्षक वर्ष कर्जा सधबैत रहला इत्‍यादि...। निश्चित रूपसँ ऐ सभ विषयपर विचार करबाक प्रयोजन बुझाइत अछि, मुदा विलाड़िक गारामे घण्‍टी बान्‍हत के?
हमरा एकबेर एकटा सरदारजी भेटला। ओ कोनो सरकारी विभागमे उच्‍च अधिकारी छला। भेँट होइते जखन गप-सप्‍प भेल तँ ओ कहला जे हुनका सभमे विवाहक अलगसँ शुभ दिन नहि ताकल जाइत अछि। रबि दिनक दिनेमे गुरुद्वारामे विवाह भऽ जाइत अछि। जँ ओ दिन ग्रहक हिसाबे होइत तँ कोनो सरदार जीवित नहि रहितैथ। मुदा देखते हेबै जे सरदारजी सभ केहेन हृष्‍ट-पुष्‍ट होइ छैथ। कहक माने जे नीक काज करैत रहू, सभ ग्रह अहाँक अनुकूले रहत। अपना सभमे कनिक्कोटा किछु होइए कि लोक भदवा, दीर्घशूल ,नीक दिनक विचार करए लगैत अछि। सरदारजी कहला जँ दिनक हिसाबे होइतै तँ कियो सरदार जीबैत नहि, कारण ओकरा सभमे दिन तका कऽ काज करबाक चलैन नइ अछि।
अपना ऐठाम श्राद्धक अलावा उपनायन एक-भुक्‍त एकादशी यज्ञ आदि-आदि अनेको अवसरपर सेहो भोज करबाक परम्‍परा अछि। अपनायनमे दू वा तीन दिन भोज होइत अछि। असलमे यज्ञोपवितक मूल उद्देश्‍य तँ पाछू रहि जाइत अछि। आर-आर तरहक आडंवरपूर्ण तरीकासँ एकरा मना कऽ लोक संतुष्‍ट भऽ जाइत अछि। उपनायनक मूल उद्देश्‍य बच्‍चामे नीक संस्‍कार देव थिक। मुदा आब तँ ओ एकटा उत्‍सवक रूप लऽ लेने अछि। ऐ अवसरपर लोक भोज-भात, गाना-बजौना करैए। जेकरा जेतेक आडंवर पार लगलै से केलक आ भऽ गेल उपनायन। केकरो कियो कहबो की करत? ओना, जे तरहेँ लोक जहाँ-तहाँ पसैर गेल अछि, माने गाम-घरसँ जे दूर रहैत अछि। हुनका सभकेँ ऐ सभ तरहक अवसर भेटने अपन लोक-वेदसँ आपसमे भेँट-घाँट होइ छैन। सबहक मनमे रहिते अछि गाम जाइ किंवा अपन लोक-वेदसँ भेंटे-घाँट करी। जँ तइ हिसाबे ऐ सबहक समाजिक महत तँ अछिए। मुदा आब तँ बिआह-दान, उपनायन आदि आनो-आन काज सभ लोक शहरेमे सम्‍पन्न कऽ लइ छैथ, कारण ओइठाम बेवस्‍था करब असान रहैत अछि। गाम-घरसँ क्रमश: सम्‍पर्क कम भेल जा रहल अछि। गाम जा कऽ काज करब तँ खर्चा ओ झंझट दुनू बेसी भऽ जाइत अछि, तँए लोक सभ ऐसँ बँचबाक प्रयास करैत रहै छैथ।
प्रचुर मात्रामे भोज आनन्‍दक अभिव्‍यक्‍तिक प्रमुख साधन अछि। तौर-तरीका चाहे जे हो, मुदा भरिपोख भोजन करब ओ कराएब सभ दिनसँ सुखद रहल अछि। आखिर हमरा लोकनि जे एतेक परिश्रम करै छी, नौकरी करि धनोपार्जन करै छी, किंवा तरह-तरहक व्‍यवसाय करै छी, से किए? अही लेल ने जे नीकसँ जीबी, प्रतिष्‍ठा अर्जित करी आ जे अभिलाषा अछि तेकर पूर्ति करी। भोजन करब जीवन रक्षाक हेतु अनिवार्य अछि। जेकरा बहुत छै ओतरह-तरहक भोजन कऽ सकैत अछि आ जे गरीब, कम साधनबला लोक अछि, ओकरो भोजन अनिवार्य। जेकरा किछु नइ छै सेहो कहुना-ने-कहुना, किछु-ने-किछु खेबे करत। नहि खाएत तँ मरि जाएत। सही मानेमे भोजन जीवनक पर्याय थिक। यएह कारण थिक जे जँ किछु मौका भेटै छै तँ लोक सभ भोजन विन्‍यासमे लागि जाइत अछि। 
बच्‍चामे भोज खेबाक जबरदस्‍त जिज्ञासा रहैत छल। एक दिन पहिनहिसँ गाममे गर्द पड़ि जाइत छल जे फल्‍लाँ बाबूक ओइठाम सभजाना भोज छइ। भोर भेने घरे-घर नौत देल जाइक। बच्‍चा सभक उत्‍सुकता बढ़ल जाइक। दिन बितैत-बितैत बिझो होइत आ लोक सभ भोज खा विदा भऽ जाइत। ओइ समयमे पूरी-जिलेबीक भोज चर्चाक विषय भऽ जाइत छल। कियो-कियो खाजा वा मुंगबा सेहो जोड़ि दैथ।से तँ थैहर-थैहर भऽ जाइत छल।
हम सभ जखन हाइ स्‍कूलमे रही तँ गामे पुरी-जिलेबीक भोज रहइ। मास्‍टर साहैबकेँ कहि कऽ सबेरे स्‍कूलसँ छुट्टी लऽ लेने रही। अपना गामक चारि-पाँचटा विद्यार्थी सभ उत्‍साह पूर्वक स्‍कूलसँ गाम विदा भेल रही- भोज खेबाक हेतु। भोजमे विझो भेल। हम सभ सही समयपर गाम आबि गेल रही। उत्‍साह पूर्वक अपन संगी सबहक संगे भोजमे बैसलौं। आँजुर भरि-भरि जिलेबी परसल जाइत देख जे आनन्‍द होइत छल से की कहूँ...। जिलेबी खाइत-खाइत जखन लोक थाकि जाइक तँ खाजा, मुंगबा उठौल जाइक। भूख बाँचल रहैत नहि, तथापि अपना भरि लोक परियास करए। कियो-कियो भोज खाइमे माहिर होइ छला, से अन्‍तिम लेल भूख बँचा कऽ राखैथ, जइसँ कोनो नीक अवसर हाथसँ नहि निकैल जाए। सभसँ अन्‍तमे दही, चीनी, नोन, आदि-आदि। खाइत-खाइत लोक नकसका जाइ छल। जेतेक लोक खाइत छल, ओइसँ बेसी पातपर छुता जाइत छल। ऐकात-सँ-ओइकात धरि पात सभपर केतेको मधुर, दही, तरकारी, पुरी सभ ऐंठमे पड़ल रहि जाइत छल। लगैत जेना कोनो भयानक युद्ध कऽ दुखद अन्‍त भेल हो। जे होइक, से होइक मुदा अपव्‍यय तँ होइते छल। जाधैर समान छुटा नहि जाइ ताधैर जेना खेनिहारकेँ सन्‍तोषे ने होनि। आब तँ बिना रसगुल्‍लाक गाममे कोनो भोज होइते ने अछि। गाममे लोकक अभाव भऽ गेल अछि। सभ गाम छोड़ि शहर धऽ लेलक तँए भोजक पाँतिमे एकछाहा बुढ़ वा बच्‍चा भेटत। मुदा भोज चलिए रहल अछि। जबार भोज करब आब आम बात भऽ गेल अछि।
गाम सभमे अखनौं नाना प्रकारसँ भोजक आयोजनमे निरन्‍तर खर्चा होइत रहैत अदि। यद्यपि ऐ तरहक आयोजनक तात्‍कालिक प्रभाव भऽ सकैत अछि। लोकमे चर्चा भऽ सकैत अछि, मुदा एकर कोनो दीर्घकालीन प्रभाव नहि होइत अछि। ऐतरहेँ व्‍यय होइत धनशक्तिक उपयोग जँ गामक कल्‍याणमे कएल जाए तँ गामक नक्‍शा बदैल सकैत अछि। गाममे सार्वजनिक महत्‍वक अनेकानेक काज जेना बेहतर चिकित्‍सा बेवस्‍था, वृद्ध लोकनिक सेवा केन्‍द्र, बच्‍चा सबहक हेतु उत्तम शिक्षा बेवस्‍था कएल जा सकैत अछि। हम ई कदापि नहि कहि रहल छी जे मान्‍य परम्‍परामे एकदमसँ ब्रेक लगा दियौ, से सम्‍भवो नहि अछि, मुदा क्रमश: ओकर रूपान्‍तरण कएल जाए। भोजोकेँ अपना जगहपर अपन महत छै, मुदा गामक-गाम नौतल जाए, ऐ चक्करमे जे हम केकरोसँ कम.., से बात आब बहुत प्राशंगिक नहि रहि गेल।
फेर जखन गाममे सभजाना भोज होइ छै तँ स्‍त्रीगणकेँ किएक ने निमंत्रित कएल जाए? ओना, केतौ-केतौ हुनको सभक हेतु खाएक पठेबाक चलन अछि ओ ओ पर्याप्‍त नहि अछि। केतेक बेर तँ खाएक पहुँचैत-पहुँचैत १२-१ राति भऽ जाइत अछि। सोचल जा सकैत अछि जे ओइ खाएकक बाट तकैत रहत? ओहो फेकाइते अछि। कहक माने जे जखन भोज करिते छी तँ अपन गामक आधा जनसंख्‍याकेँ किएक छोड़ि दइ छिऐ? आब युग बदैल रहल अछि, बदलियो गेल अछि। महिला सशक्तिकरणक युगमे हमरा लोकनि केतेक दिन पछुआइत रहब। जखन गाममे सभजाना होइते अछि, तँ स्‍त्रीगण सभकेँ सेहो आमंत्रित कएल जाए। हुनका सभकेँ अलग पाँतिमे बैसा सकै छी वा पहिने स्‍त्रीगणे सभ खा लैथ तेकर बाद दोसर खेपमे शेष लोक खा सकैत अछि, मुदा स्‍त्रीगणकेँ गामक सभजाना भोजमे कात कऽ देब अनुचित थिक आ ऐ विषयपर  विचार अपेक्षित अछि। अपन गामक लोक छुटि जाइत अछि आ आन-आन गामक लोककेँ जबारक चक्करमे नौतल जाइत अछि। अपन समाजमे अनेकानेक विकार सभ अछि जइमे भोज-भातक वर्तमान परम्‍परापर अबिलंब धियान देब जरूरी अछि। 
देशमे करोड़ो लोककेँ अखनो दुनू साँझ भोजन नहि भेटैत छइ। बच्‍चा सभ पौष्‍टिक अहारसँ बंचित रहि कुपोषणक शिकार अछि! विद्यालय जेबाक तँ  बाते छोड़ू जे सरकारक निरन्‍तर प्रयत्नक अछैत आवासक सुविधा नहि छइ। शहरी गरीबक हालत तँ आरो दयनीय अछि। सवाल अछि जे एक तरफ सम्‍पन्न वर्ग जश्न मना रहल अछि, कोनो मौकाटा हेबाक चाही, तरह-तरहसँ पंच सितारा होटलमे पाटी करैत रहैत अछि, साधारणो परिवेशक लोक समाजिक परम्‍पराक निर्वाहक हेतु भोज-भात करैत रहैत अछि, दोसर दिस ओइ आसपासक गरीब-गुरबा जीवनक समस्‍त सुख सुविधासँ वंचित महा कष्‍टमे जीब रहल अछि। अपन छोट-छोट सन्‍तानक रक्षामे असमर्थ अछि। पढ़ाइ-लिखाइ आ चिकित्‍सा सभ किछु नदारद छइ। आखिर ऐपर हमर सबहक धियान किएक ने जाइत अछि? अपने समाजक वंचित बेकतीक उचित सहायता कऽ ओकर जीवन यात्राकेँ सुगम ओ आनन्‍दमय बनाबक सहयोगी भऽ जे आन्‍तरिक संतुष्‍टि भेट सकैत अछि, से प्राय: अन्‍यथा सम्‍भव नहि। यद्यपि भोज करबाक परम्‍परा अति प्राचीन अछि एवं नाना प्रकारसँ लोकक धर्मिक भावनासँ जुड़ल अछि, मुदा वर्तमान समाजिक, आर्थिक परिवेशमे एकर पुनरावलोकन जरूरी अछि। धार्मिक एवं समाजिक पक्षक संग एकर आर्थिक प्रभाव सेहो विचारणीय अछि। यद्यपि गामो-घरमे लोकक आर्थिक स्‍थिति सुधरल अछि, फूसक घरक स्‍थान पक्का मकान सभ लेने जा रहल अछि, तथापि अखनो बहुत रास लोक जीवनक तमाम सुख सुविधासँ वंचित छैथ। सम्‍पन्नो घरक विधवा, बुढ़ किंवा स्‍त्रीगण सभ-तरहेँ सम्‍पन्न, सुखी नहि रहि पबैत छैथ। केतेको कुशाग्र, प्रतिभाशाली बच्‍चा अखनो उचित सुविधाक मोहताज रहि जाइत अछि आ हुनकर भविस वर्तमानक संघर्षमे नष्‍ट भऽ जाइत अछि।
हम सभ जँ जनकल्‍याणक भावनासँ प्रेरित भऽ अपनो समाज, अपनो गामक ओहन उपेक्षित लोकक कल्‍याणमे अपनाकेँ जोड़ि सकी तँ निश्चय समाजक स्‍वरुप बदैल जाएत। धार्मिक अनुष्‍ठानकेँ धियान रखैत समाजक वर्तमान परिस्‍थितिक अनुरूप मान्‍य परम्‍परामे रचनात्‍क सुधार भऽ सकैत अछि आ हेबाको चाही। समाजिक समरसता एवं पारस्‍परिक सहयोगक भावनाक निरन्‍तर विकास होइत रहए एवं जनशक्ति, धनशक्ति एवं राजशक्तिक उपयोग जनकल्‍याण हेतु भऽ सकए ऐसँ नीक धर्मिकता की भऽ सकैत अछि?
अष्‍टादश पुराणेषु व्‍यासस्‍य वचनद्वयं
परोपकाराय पुण्‍याय पापाय परपीड़नम्।
बड़का-बड़का सन्‍त महात्‍मा लंगर करै छैथ जइमे गरीब-गुरबा, सन्‍त-फकीर सभ भोजन कए अपन प्राण रक्षा करै छैथ। जीवन रक्षार्थ कएल गेल एहेन प्रयास स्‍तुत्‍य अछि, परन्‍तु वाह्य आडंवर किंवा अहंकारक प्रदर्शनक उद्देश्‍यसँ कएल गेल जबार भोज सभमे जनकल्‍याणक भावना गौण भऽ जाइत अछि। अस्‍तु समाजमे धन एवं जनशक्‍तिक उपयोग जन कल्‍याण हेतु भऽ सकए, तद्दनुकूल प्रयास हेबाक चाही।

Life is an opportunity

Life is an opportunity   Millions of people have come and gone but nobody remembers them. Only a few persons like Vyas, Shankarachary,Vi...