रविवार, 12 जुलाई 2020

माएक नाम पत्र




(गामपर पानिक टंकीक उद्घाटन करैत  July 2014)

माएक नाम पत्र

 

परम पूजनीया माए,                             

सादर प्रणाम।

कतेको दिनसँ मोन होइत छल जे अहाँकेँ चिठ्ठी लिखी । अपन मोनक बातसभ कही । जहिआसँ अहाँ हमरा लोकनिकेँ छोड़ि कए चलि गेलहुँ तहिआसँ हमर मोनमे जे शून्यता आएल तकरा पत्र लिखि किछु कम करबाक प्रयास करी । मुदा अपने मोनक अंतरद्वंदक कारण  कलम आगु नहि बढ़ि पबैत छल । जहिना हाथमे ली तहिना राखि दी । मोन स्थिर हेबे नहि करए । ई किएक होअए? कहि नहि मोन कतए सँ कतए पहुँचि जाइत छल । ओना तँ मोनक गति अपार होइत अछि । क्षणेमे  कतए सँ कतए पहुँचि जाइत अछि । हमरा अहाँकेँ जतए पहुँचएमे मासो लागि सकैत अछि ताहिठाम मोन क्षणभरिमे पहुँचिएटा नहि जाइत अछि,अपन क्रिया-प्रतिक्रिया धरि दए दैत अछि । तेँ अहाँकेँ एहि दुनिआसँ चलि गेलाक बादो हमरा साहस भेल जे अहाँकेँ चिठ्ठी लिखी । हमरा ई विश्वास भेल जे हमर मोन एकरा अहाँ जतए कतहु होएब अवश्य पहुँचा देत । ततबे नहि अहाँक कुशल-क्षेम सेहो कहत । चिठ्ठी उतारा सेहो आनि देत । एतेक बाद सोचलाक बादो अहाँक गेलाक तीन सालसँ बेसिए बिति गेल । मुदा हम अहाँकेँ चिट्ठी नहि पठा सकलहुँ । जखन कखनो  असगर होइतहुँ कि मोन दौड़ए लगैत छल । माथमे तरह-तरहक विचार भरि जाइत छल । हमरा मोनमे रहि-रहि कए ई बात उठैत रहैत अछि जे अहाँक जेबाक अखन समय नहि भेल छल । उचित प्रयाससँ अहाँकेँ एहि संसारकेँ छोड़बासँ रोकल जा सकैत छल । मुदा ई बात ध्यानमे अबितहि जेना मोन स्वयंमे फँसि जाइत छल । एहि तरहेँ कतेको बेर प्रयास कएल । मुदा बात जस-के-तस रहि गेल ।

हमरा मोने अछि जे अहाँ केना चारिए बजे भोरसँ भानसक ओरिआनमे लागि जाइत छलहुँ जाहिसँ गामसँ कतहु जेबासँ पहिने  हम भोजन कए ली । जखन हम गामेपर रहि परीक्षासभक तैयारी करैत छलहुँ तँ अहाँ हमरा लगीचमे बैसलि औंघाइत रहैत  छलहुँ । भरिदिनक थाकल -ठेहिआएलि अहाँकेँ विश्राम जरूरी रहैत छल । मुदा जाबे हम पढ़ैत रही,ताबे अहाँ हमर प्रतीक्षा करैत रही । दूपहर रातिमे हम दुनूगोटे भोजन करी । ताबे घरमे सभगोटे सुति गेल रहथि । सौंसे गाम निःशव्द भए गेल रहैत छल । जखन हम परीक्षा देबए गामसँ दरभंगा बिदा होइत छलहुँ तँ लोटामे पानि भरने अहाँ हमरा आगुमे ठाढ़ भए जाइत छलहुँ जाहिसँ हमर यात्रा बनए,परीक्षा खूब नीख होअए । गोर लगलापर एक पथिआ आशीर्वाद दैत छलहुँ।

हमरा मोन पड़ैत अछि जे जखन हम गामसँ वापस दिल्ली बिदा होइ तँ केना अहाँ बहुत दूर धरि अरिआति दैत छलहुँ । केना जाइत-जाइत पेन,कागज,पता लिखल लिफाफासभकेँ जोगा कए रखबा लैत छलहुँ जाहिसँ हमरा चिठ्ठी लिखल करब । चिठ्ठी अहाँ लिखबो करी । कैक बेर अपने हाथे ,कैकबेर केओ आन लिखि दैत छल । सभ चिठ्ठीमे आशीर्वादक वर्षा केने रहैत छलहुँ । हम कड़ोरपति भए जाइ,हमर बच्चासभ खूब सुखी रहए,हमरा सभ तरहेँ बरक्कति हओए ।

हमरा मोने अछि जे जखन हम नेना रही तँ अहाँ हमरा हेतु कतेको बेर कैकगोटेसँ झगड़ा केने रही । जँ केओ हमरा किछु कहि देलक तँ  ओकर भगवाने मालिक । हमरा मोन अछि जे नानी एकबेर कहने रहए-बौआक पैर नाना सन छैक ।एहि बातसँ अहाँ कतेक दुखी भेल रही । कारण नाना तँ बहुत पहिने मरि गेल रहथि। तेँ हुनकर पैरसँ तुलना करब अशुभ छल ।

अगस्त २०१३मे कोनो बात लए कए अहाँकेँ गाममे रहि रहल पुतहुसँ झगड़ा भए गेल । पुतहुसँ झगड़ा कोनो नवबात नहि छैक। सभठाम होइते रहैत छैक । मुदा अहाँकेँ कोनो बात गड़ि गेल। अहाँ घरसँ माधबीक ओहिठाम चलि गेल रही । ओहिठाम दसदिन रहि गेलहुँ । ओसभ अहाँकेँ बहुत मानलथि,बहुत आदर केलथि । मुदा घरबैआ अहाँकेँ बजबए नहि गेलथि । एहि बातसँ अहाँकेँ बहुत दुख भेल रहए। हम ई समाचार सुनि दिल्लीसँ गाम गेल रही । बेतिआसँ राधे बहिन सेहो आएल रहथि । माहौल ठीक नहि देखि हम आ राधे बहिन बहुत आग्रह कए अहाँकेँ दरभंगा स्थित अनुजक डेरापर दए आएल रही । अहाँकेँ दरभंगा जेबाक एक्को पाइ इच्छा नहि रहए । मुदा हमही जोर देलहुँ कारण हमरा अनुमान रहए  जे अहाकेँ ओतए आराम होएत । दरभंगा पहुँचि कए किछुदिन अहाँ बहुत प्रसन्न रही । कही जे लगैत अछि जेना स्वर्गमे आबि गेल छी। मुदा थोड़बे दिनक बाद अहाँकेँ ओतहु मोन उचटि गेल , वापस गाम जेबाक इच्छा होबए लागल ।  जेना-तेना छओमास ओतए रहि अहाँ गाम वापस  आबि गेलहुँ । गाम अएलाक बाद हमरासँ फोनपर गप्प भेल छल । एहिबातसँ अहाँ बहुत प्रसन्न भेल रही जे अहाँक सभटा व्यवस्था गामेमे कएल जाएत जाहिसँ अहाँ नीकसँ ओतए रहि सकी । ...एहिबातसँ प्रसन्न भए अहाँ कतेक काल धरि गीत गबैत रहि गेल रही  तकर बाद हम गाम गेलो रही । ककरा-ककरा ने कहने रहिऐक जाहिसँ अहाँक सेवाक हतु केओ सेवक भेटि जाए। जकरे कहिऐक से कहैत - करितहुँ किएक नहि  । मुदा डर लगैत अछि।

फरबरी २०१४मे जखन अहाँ दरभंगासँ गाम वापस अएलहुँ तँ नङराइत रही । अहाँकेँ दरभंगामे ठंढ लागि गेल रहए । तकरबाद कनी-कनी नङराइते रहि गेलहुँ । अहाँक डांर क्रमशः झुकैत गेल । देह कमजोर होइत गेल । तैओ अहाँ अपने हाथे सभ काज करी । अपन चाह,जलखै,भोजन स्वयं बनाबी । ककरोपर आश्रित होएब अहाँकेँ पसिंद नहि रहए । नब्बे वर्षक आयुधरि अहाँक इएह दिनचर्या रहए । तकरबाद अहाँक शरीर कमजोर होइत चलि गेल। तथापि अहाँक इच्छा रहैत छल जे फराके रही,गाममे रहि रहल अपन पुत्रक आश्रममे साझी नहि होइ । जखन कखनो हम गाम जाइ एतबे बात अहाँ कहैत रहैत छलहुँ । हम प्रयासो करी जे केओ आदमी तेहन भेटि जाइत जे अहाँकेँ नियमित सेवा करैत । कैकगोटे जँ तैयारो होइत तँ तकर विरोध घरेमे होबए लगैत । पारिवारिक परिस्थिति विषम होइत गेल आ अहाँक कष्ट बढ़ैत गेल । एहिसभ कारणसँ अहाँक सेवा नीकसँ नहि भए पबैत छल ।

अक्टूबर २०१४मे गामपर एकदिन अहाँकेँ बहुत जोरसँ चक्कर आएल रहए । अहाँ बारीमे खसि गेल रही । हमरा तुरंत फोन आएल । ओहि समय हम वैशाली मेट्रो टीसनपर ठाढ़ मेट्रोरेलक प्रतीक्षा करैत रही । अहाँ बहुत परेसान रही । कोनो निराकरण नहि बुझाइत छल । तकरबादे फेरसँ अहाँकेँ दरभंगा अनुजक डेरापर पठेबाक ब्योंत केने रही । बहुत अछता-पछता कए अहाँ दरभंगा जेबाक हेतु तैयार भेल रही। रोहिनी बहिन सतलखासँ आबि-आबि अहाँक चीज-वस्तुसभकेँ सम्हारने रहथि । एक-एकटा सामानक पूरा हिसाब अहाँकेँ मोन रहैत छल । हमरा आग्रहपर अहाँ दरभंगा गेलाक बाद बहुत आफियतमे रही । मुदा ई प्रसन्नता बेसीदिन नहि रहल । अक्टूबर २०१४मे हम ट्रेनसँ साढ़ूक आकस्मिक निधनक बाद नागपुर जाइत रही । ट्रेनेमे दरभंगासँ हमर भातिज फोन केलथि-

दाइ भोरे खसि पड़लैक ।  ओकर जांघमे बहुत दर्द भए रहल छैक । ओएहसभ कहलाह जे हुनकर पिता बैंक जा चुकल छथि। तकरबाद  जीवानंद(हमर भागिन)केँ फोन केलिअनि । ओ एक हजार टाका देलखिन जाहिसँ अहाँकेँ  लगीचेमे कोनो नर्सिंग होममे भर्ती कराओल गेल । ओहीदिन साँझमे अनुज सपरिवार छठि करबाक हेतु राँचीसँ दरभंगा अपन सासुर पहुँचल रहथि । हुनका सभकेँ ई समाचार पता लगलनि । तकरबाद ओ सभ जी-जानसँ अहाँक सेवामे जुटि गेल रहथि । हमर चिंता किछु कम भेल रहए ।  नागपुरसँ दिल्ली लौटितहि हुनका फोन केने रहिअनि । किछु टाका सेहो पठओलिअनि  आ अपने दोसरे दिन दरभंगा ट्रेनसँ बिदा भए गेल रही ।

दरभंगाक नर्सिंग होममे माएकेँ एकसप्ताहक बाद घर जेबाक अनुमति भेटि गेल रहनि । मुदा दरभंगामे हमर भतीजीक बिआह किछुए दिनक बाद हेबाक छल । तेँ हुनका लोकनिक सुविधाक ध्यान रखैत माए बीसदिन आओर नर्सिंग होममे रहलीह।दरभंगा नर्सिंग होममे मासदिन रहलाक बाद दिसम्बर २०१४मे अहाँ अनुजक शुभंकरपुर(दरभंगा) स्थित घरपर चलि गेल रही । अहाँक स्वास्थ बहुत सुधरि गेल रहए। मुदा टांग सभदिन हेतु विकलांग भए गेल रहए । अपनेसँ चलि-फिरि नहि पाबी । ई एकटा बड़का संकट भए गेल। तकरबाद तँ अहाँक जिनगी नर्क भए गेल रहए । केओ नहि चाहए जे अहाँकेँ अपना संगे राखी ।

अहाँकेँ एहिबेरक दरभंगाक यात्रा नहि धारलक । हमरा बहुत अफसोच होअए जे किएक हम अहाँकेँ दरभंगा जेबाक हेतु कहलहुँ। गामपर ओ सभ बहुत रोकैत रहथि । दिल्लीसँ हमर भातिज सेहो रोकलथि । मुदा हमरा भेल जे दरभंगामे अहाँ बेसी आरामसँ रहि सकब। मुदा भावी प्रवल । आइधरि हमरा मोनमे एहि निर्णयक कारण क्षोभ अछि,दुख अछि । दरभंगा डेरासँ धीया-पुतासभ अहाँकेँ रिक्सासँ लगीचेक नर्सींग होमे भर्ती करा देलथि । ओ डाक्टर काय चिकित्सक (फीजीसिअन) रहथि,हुनका हड्डीक मामिला नहि देखबाक चाहैत छल । मुदा ओ हमरा लोकनिकेँ आश्वस्त करैत रहलाह जे अहाँकेँ ठीक कए देताह । शल्यक्रिया करब एहि बएसमे ठीक नहि होएत । तेँ ट्रैक्सनपर राखि हड्डीकेँ जोड़ि लेताह। दुनूपैर कनी-मनी छोट-पैघ रहतैक । हमरो ई व्यवस्था सुगम बुझाएल । यद्यपि दिल्लीक डाक्टर फोनपर कहने रहथि जे शल्यक्रिया जरूरी अछि । बादमे तँ जे भेल से सभ जनिते अछि । अहाँक हड्डी  बहुत छोट-पैघ भए गेल । ततबे नहि , ओ उल्टा से जोड़ा गेल ।

फरबरी २०१५मे गाममे हमर भतीजीक बिआह रहैक । ओहिमे अहाँ गाम गेलहुँ । मुदा गाममे की भेल की नहि, पनरह दिनक भीतरे अहाँ अंतिम हालतपर पहुँचि गेलहुँ । धन्य कही दरभंगाबला अनुजकेँ जे गाममे सभक विरोधक अछैत असगरे अहाँकेँ दरभंगा ओही नर्सिंग होममे भर्ती करा देलथि । गाममे केओ नहि चाहलक जे अहाँ इलाजक हेतु दरभंगा जाइ ।

आब हिनकर की इलाज हेतनि । केहन बढ़िआ अपन डीहपर मरतीह ।

 हम जखन दूपहर रातिमे दिल्लीसँ दरभंगा ओहि नर्सिंग होममे पहुँचलहुँ तँ अहाँ नहि चिन्हाइत रही । आक्सीजन लागल रहए । मुँह-कान सभ भयावह लागि रहल छल । हम अबिते अनुजकेँ पुछलिअनि-

माए कहाँ छथि?”

ओ इसारासँ देखेलथि । अहाँक हालत देखि गुम्म पड़ि गेल रही । दरभंगाक डाक्टर सेहो आश्चर्यचकित रहथि

पनरह दिनक भीतर हिनकर एहन हाल कोना भए गेलनि?”

अपना भरि ओ बहुत प्रयास केलाह । महग-महग जीवनरक्षक सूइआसभ देल गेलनि । भोरे-भोर  अहाँ आँखि खोलि देलहुँ । ततबे नहि बजनाइओ शुरु कए देलहुँ । अहाँ बहुत अबल भए गेल रही । तथापि बेर-बेर कही-

हमरा रातिमे भगवती दर्शन देलनि अछि । लाल टुह-टुह नुआ पहिरने छलीह ।

अहाँ हमरा भोरे श्यामा मंदिरमे भगवतीकेँ प्रसाद चढ़बए पठओने रही । हम प्रसाद चढ़ा कए वापस मंदिर परिसरसँ बाहर निकलैत रही कि दू-तीनटा बुढ़बा बानर हमर प्रसाद लुटि लेलक। आब की करी? बिना प्रसाद लेने कोना वापस जइतहुँ । अहाँ प्रसाद मंगितहुँ तँ की करितहुँ? फेरसँ प्रसाद किनि श्यामा माइकेँ चढ़ओलहुँ। एहिबेर बहुत सावधानीसँ प्रसादकेँ नुका लेने रही । प्रसाद लए कए वापस भेल रही तँ अहाँ कतेक प्रसन्न भेल रही । लगबे नहि करैत जे रातिमे अहीं मृतमान बेडपर पड़ल रही । सभ किछु ठीक-ठाक भेल जाइत छल । तेँ हम अनुजक शुभंकरपुरक घरपर जाए स्नान केलहुँ ,भोजन केलहुँ आ फेर अहीं लग वापस आबि गेलहुँ । ताबे तँ अहाँ बहुत फरहर भए गेल रही ।

मार्च-अप्रैल २०१५मे दरभंगा नर्सिंग होममे अहाँ मास दिनसँ बेसी पड़ल रही ।  डाक्टरक बिल बढ़ल जाए ।  केओ अहाँकेँ अपना ओहिठाम लए जेबाक हेतु तैयार नहि रहए । तखन हम अनुजकेँ गाम फोन केलिअनि । टिकट पठा देलिअनि। डाक्टरक बिलक भूगतान आनलाइन केलहुँ । ओ अहाँकेँ बहुत गंजनि सहि इन्दिरापुरम स्थित हमर डेरा लेने आएल रहथि। अहाँ बेर-बेर कही-

रस्तामे ओ बहुत सेवा केलक,बहुत कष्ट सहि हमरा एतए धरि अनलक । ओकरसभ गलती माफ ।

हमर डेरापर अएलाक बाद अहाँ बहुत प्रसन्न रही । देह रोगा कए काँट-काँट भए गेल छल । पेशाबक मार्गमे नली लागल छल जाहि कारण वारंबार संक्रमण भए जाइत छल । धन्यवाद अछि डाक्टर एस.के जैन केँ जे राम मनोहर लोहिआ अस्पतालमे बहुत ध्यानसँ इलाज केलथि जाहिसँ अहाँक स्वास्थमे बहुत सुधार भेल । हमरा डेरापर अहाँ सातमास रहलहुँ । दिन-राति सेवा करैत करैत हमर श्रीमतीजी परेसान रहथि । कैकबेर  हमरा अनुपस्थितिमे पैखाना लए जाए पड़ैत छलनि । ताहिसँ हुनकर डांरक हड्डीमे दर्द शुरु भए गेल रहनि । सभसँ मोसकिल होइत छल जखन अहाँ पानि गिजनाइ शुरु करी आ पानि लगसँ हटबे नहि करी । कैक बेर हमरो कना जाइत छल । तेहन विकट परिस्थिति भए जाइत छल जे ककरो तामस भए जइतैक । मुदा अहाँ तँ लाचार रही । पानि छुबाक अहाँकेँ मनोवैज्ञानिक विमारी छल ।

हमरा संगे इंदिरापुरमक फ्लैटमे सातमास रहबाक समयमे अहाँक स्वास्थ्यमे बहुत सुधार भेल रहए।  कैकटा बेडसोर क्रमशः ठीक भए गेल । अहाँ वाकरक सहयोगसँ थोड़ बहुत चलिओ लैत छलहुँ। भोर-साँझ  घुमाओल जाइत तँ अहाँ बहुत प्रसन्न होइत छलहुँ । सोसाइटीक मंदिरमे साँझमे हनुमान चालीसाक पाठ करैत छलहुँ । कैकटा वयोवृद्धसभ अहाँक हाल-चाल पुछथि । अहाँ इन्दिरापुरामसँ चलिओ गेलहुँ तखनो हुनका लोकनिक अहाँक जिज्ञासा बनल रहनि । ओ सभ अहाँक बारेमे पुछैत रहैत छलाह । अहाँकेँ दिल्ली घुमबाक बहुत इच्छा रहैत छल । मुदा शारीरिक असमर्थताक कारण से नहि भए पाबए । तथापि,हमरा संगे अहाँ अक्षरधाम,योगमाया मंदिर आ कुतुब मिनार देखिकए बहुत प्रसन्न भेल रही ।

अहाँ हमरासंगे इंदिरापुरमक डेरापर रही जरूर मुदा अहाँक मोन सदिखन गामेमे लटकल रहैत छल । कखनो कहितहुँ जुलीसँ गप्प करा दएह । कखनो कहितहुँ राधेसँ गप्प करा दएह। कखनो रोहिनी बहिनसँ गप्प करबाक मोन होइत । रहि-रहि कए गामक गप्प-सप्प करितहुँ । जखन चंद्रधर काकाक देहांतक समाचार सुनने रही तँ अहाँकेँ बहुत दुखी देखने रही । हुनकासभक बारेमे कतेको बात कहने रही । ओसभ पहिने अपनेसभक आङनमे रहथि । हुनकर माएसँ हमरासभकेँ बहुत नीक संबंध छल । जखन हुनकर माए दुखित रहथिन तँ कैकदिन अहाँ हुनका ओतहि रहिकए सेवा केने रहिअनि ।

अहाँकेँ इच्छा रहए जे गुरुग्राम स्थित हमर बहिनक ओतए किछु दिन रही । हमरा कहल करी-

ओकरा ओहिठाम बहुत सुख होएत । तोरा ओतेक साधन नहि छह। ओहिठाम दूमास रहब । माए-बेटी भरि मोन गप्प करब । माए-बेटीकेँ आपसी बहुत सिनेह होइत छैक ।

मुदा अहाँकेँ ओ अपन डेरा नहि लए गेलथि । संभवतः साहस नहि भेलनि । जखन हुनकासभकेँ नीकसँ बुझा गेलनि जे अहाँकेँ  गाम जेबाक टिकट कटि गेल अछि तखन हमरा भागिन फोन केलथि-

दो दिन के लिए नानीजी को हमारे यहाँ भेज दीजिए । हम एम्बुलेंस भेज देंगे । उनको कोई दिक्कत नहीं होगी ।

हम तुरंत मना कए देलिऐक । आब जखन जेबाक समय छल तखन दू दिन लेल कतहु की करए जैतहुँ । जातिओ गमेलहुँ आ स्वादो नहि पेलहुँ । तकरबाद ओसभ हमर आग्रहपर हमर डेरापर आबि कए भेंट कए गेल रहथि । अहाँ खुशीसँ नाचए लागल रही ।

अक्टूबर २०१५मे हम अहाँक संगे असगरे बिहार संपर्क क्रांतिक प्रथम श्रेणी एसी कोचसँ दरभंगा बिदा भेल रही । ओ टैक्सीबला कमाल आदमी छल । जखन कखनो हमरा अहाँक संगे कतहु जेबाक होइत छल तँ हम ओकरे टैक्सी लैत छलहुँ । ओ एकटा समांग जकाँ काज अबैत छल । नीकसँ अहाँकेँ सीटपर सुता दैत छल । फेर अहाँक ह्वीलचेएर रखैत छल । गंतव्यपर पहुँचलाक बाद इतमिनानसँ अहाँकेँ उतारि दैत छल । एहिबेर सेहो ओ हमरा संगे रहए । अजमेरी गेट दिस हमरासभकेँ उतारि देलक । कूलीकेँ दोबर दाम दए अहाँकेँ ट्रेनमे बैसबाक ओरिआन केने रही । रस्ताभरि अहाँ बहुत प्रसन्न रही । हमरो आश्चर्य लागए जे असगरे हम कोना अहाँकेँ सम्हारने जा रहल छी । मुदा सहयात्रीसभ बहुत सहयोग केने रहथि । जेना-तेना दोसर दिन करीब पाँच बजे हमसभ दरभंगा टीसन पहुँचल रही । दरभंगा टीसनपर  राधे बहिन आ अहाँक पुतहु अपन जेठका बेटाकसंगे आएल रहथि । ओ सभ अहाँकेँ शुभंकरपुर(दरभंगा) अपन घरपर लए जाए चाहैत रहथि । परंतु,अहाँ अड़ि गेल रही जे गामे जाएब , आब गामेमे रहब , कतहु नहि जाएब । जखन अहाँक मोन औनाइत छल तँ अहाँक कहलापर कैकबेर हम फोन लगबैत छलहुँ । मुदा घंटी बजिते रहि जाइत छल। अहाँ एहि बातसँ बहुत दुखी भए जाइत छलहुँ । ताहि बातसभसँ अहाँ कहने रही-आब कतहु नहि जाएब  गाममे रहब। संभवतःसएह बातसभ अहाँक मोनमे घुरिआ रहल छल ।

 ओहि दिन विहार विधान सभाक हेतु मतदान होइत रहए। गामक हेतु टैक्सी नहि भेटैत रहए । हम जखन अहाँकेँ ई बात कहलहुँ तँ अहाँ रातिभरि दरभंगा (अनुजक घरपर) रहबाक हेतु मानि गेल रही। मुदा ताबे एकटा टैक्सीक जोगार भए गेल । हम दिल्ली अपन श्रीमतीजीकेँ फोन कए पुछलिअनि-

गाम फोन कए दिऐक की?”

नहि, नहि ,कदापि नहि । ओ सभ गाम छोड़ि कए कतहु चलि जाएत ।

हमरा हँसी लागि गेल रहए ।

एहनो कतहु होइ जे गाम छोड़ि कए चलि जाएत ।

तकर बाद राधे बहिनक संगे टैक्सीसँ गाम बिदा भेलहुँ । बेला मोर लग टैक्सी रोकि कए दू किलो मधुर किनलहुँ । कपिलेश्वर पहुँचलापर महादेवकेँ प्रणाम केलिअनि । तकर थोड़बे कालमे हमसभ गाम पहुँचि गेल रही ।

गाम पहुँचि तँ गेलहुँ मुदा ओ तँ हमरासभकेँ देखितहि साइकिलपर चढ़ि चौकपर घसकि गेलाह । हाल-चाल के पुछैत अछि? घंटाभरि अहाँ ह्वील चेअरपर बैसल रहि गेलहुँ । के पानि देत,के पटिआ ओछाओत? आखिर,राधे बहिन चाह बनओलथि । अहाँ चाह पीबए लगलहुँ आ हम मंदिरपर  बैसि सुस्ताए लगलहुँ । ताबे नरेन्द्रजी मोटर साइकलसँ मतदान करए जाइत रहथि । हमरा देखि मोटर साइकिल रोकि हमरो ओहिपर बैसा लेलाह । हम मतदान केन्द्रपर फटकिए ठाढ़ भेल रही । हमर नाम गामक मतदाता सूचीमे नहि छल । नरेन्द्रजी मतदान कए अएलाह । फेर हुनके संगे चौकपर गेलहुँ । ओ दस-बारह गोटे संगे बैसल छलाह । हम पुछलिअनि-

"किएक तमसाएल छी?"

एतबा बात बजितहि लागल जेना बम फूटि गेल । तकरबाद जे ओ तमासा केलाह से लिखबाक जोग नहि अछि । गामोपर दूपहर रातिधरि ओ हंगामा करैत रहलाह। कहुना कए राति बिता भोरे मधुबनी आबि गेल रही। जेना-तेना किछु दिनमे मामिला शांत भेल । अहाँ  गामसँ दरभंगा पठा देल गेलहुँ आ हम दिल्ली वापस चलि गेलहुँ । (ई बात नवंबर २०१५क थिक)

अप्रैल २०१६मे हम दिल्लीसँ गाम गेल रही । अहूँ दरभंगासँ गाम आबि गेल रही । मुदा अहाँकेँ गाममे बहुत दिक्कत भेल। अहाँ वापस दरभंगा जाए चाहैत रही । मोसकिलसँ चारि मास बितल होएत । अहाँक स्वास्थ गड़बड़ाए लागल । अगस्त २०१६मे हम फेर गाम गेल रही । अहाँक प्रवल इच्छा छल जे दरभंगा अनुजक ओहिठाम जाइ। मुदा से नहि भए सकल । अंततोगत्वा,हम दिल्ली वापस चलि अएलहुँ ।

नवम्बर २०१६ छठिक पावनि लग-पासमे अहाँक हाल बहुत खराप भए गेल रहए । लोककेँ पावनि  संकटमे पड़ि गेल रहैक। मुदा से अहाँ बँचा देलिऐक । लोक छठिक पाबनि केलक ।  तकर बाद अहाँक हाल कखनो नीक,कखनो बेजाए होइत रहल । हमरा अनुमान भए गेल जे आब अहाँ नहि रहब । हमरा नहि रहल गेल । तुरंते हवाइ जहाजक टिकटक ओरिआन कए दोसर दिन भोरे हवाइ जहाजसँ पटना पहुँचलहुँ । पाँच बजैत-बजैत गाममे रही । मुदा अहाँकेँ तँ होश नहि रहए । हम गोर लगलहुँ । अहाँ जेना तमसा गेल रही । किछु जबाब नहि देलहुँ। जोर-जोरसँ अहाँकेँ साँस लैत देखि डर होइत छल । देहक दुर्दशा देखि तँ अबाक रही । कहुना कए राति बितल , भोर भेल । भरि दिन ओहिना समय बितल  आ साँझ होइत-होइत अहाँ हमरासभकेँ छोड़ि कए चलि गेलहुँ । अहाँ एहि संसारक मोह वंधनसँ मुक्त भए गेलहुँ ।

दोसर दिन दूपहरमे गाजा-बाजाक संगे अहाँक अंतिम यात्रा बहार भेल छल । करीब एक सएगोटे कलममे अंतिम संस्कारक समयमे रहथि । चौरानवे वर्षक बएसमे एकटा महान आत्मा एहि संसारकेँ छोड़ि कए चलि गेल रहथि । हमर कष्टक अंत नहि रहए । एकटा अहीं रही जे जीवन भरि दिन-राति आशीर्वादक वर्षा करैत रहलहुँ ,  हमर कल्याणक हेतु सदति सचेष्ट रहलहुँ । मुदा कखनो-ने कखनो तँ अहाँ थकितहुँ। नओ वर्षक रही तखने बिआहक बाद अहाँ अड़ेर डीह आएल रही आ पचासी वर्ष एहि गाममे रहलहुँ । जीवन भरि अनवरत संपूर्ण परिवारक सेवा करैत रहलहुँ । नओटा बेटा-बेटी आ तकर सभक  एकटा बृहद परिवारकेँ सुखी -संपन्न छोड़ि गेलहुँ ।

चारि दिनक बाद जखन हमसभ अहाँक सारापर गेल रही तँ साराक आगि मिझा गेल छल । ओहिमेसँ बाँचल-खुचल हड्डीकेँ चुनि सिमरिआमे गंगामे प्रवाहित कएल गेल छल ।  पाँचमदिन सौंसे गामक बैसारमे हमर भातिज छओगाम जबार भोज हेबाक घोषणा केने छलाह । दिन-राति एक कए छओ गामक भोज भेबो कएल । महापात्र लोकनिकेँ नीकसँ नीक वर्तनसभ दान देल गेलनि। कुल मिला कए सात लाखसँ ऊपरे खर्च कएल गेल । मुदा हमरा ई सभ व्यर्थ लगैत रहए । ई बात हम कैकबेर बजबो करी । एहि खर्चक आधो जँ अहाँक सेवामे लगा देल गेल रहैत तँ बाते दोसर रहैत । मुदा ताहि समयमे तँ जे हाल छल से कहिए चुकल छी । भोज-भात भेलैक । बारहदिन धरि निरंतर कर्म भेलैक । सभ किछु भेलैक जे अपनासभक ओहिठाम एहि समयमे होइत छैक । मुदा तकर की फएदा? मरलाक बाद केओ घुरि नहि आएल,ने कहलक जे ओकरा हेतु कएल गेल दान-पूण्य ओकरा पैठ भेलैक कि नहि । मुदा से सभ केलासँ इलाकामे यश-प्रतिष्ठाक संभावना तँ बनिए जाइत छैक ।

हमरा मोन पड़ैत अछि जे जखन मधुबनीक मकान बनओने रही तँ अहाँकेँ बहुत आग्रहपूर्वक ओतए लए गेल रही । रातिभरि अहाँ ओतए रहलहुँ । रातिमे सुतबा काल अहाँ कहने रही- ओकरो एहने मकान भए जइतैक ।

तकरबाद फेर अहाँ कहिओ मधुबनीक हमर घरपर नहि जा सकलहुँ। ओ गाममे अहाँक रहिते मकान बना लेने रहथि । मुदा अहाँ ओहि मकानमे कहिओ नहि रहि सकलहुँ । अहाँ अपन घरमे बेसी सुखी छलहुँ। मुदा आब अहाँक ओ घर तोड़ि देल गेल अछि। आब ओहूठाम कोठा बनि गेल अछि। घरे-घर भए गेल छैक । हमरा लगैत अछि जे एहिबातसँ अहाँ बहुत प्रसन्न होएब । मुदा आब जौँ अहाँ गाम अएबो करब आ ओहिठाम तकबो करब तँ अहाँक कोनो आन  बेटा ओतए नहि भेटताह। संभवतः इएह नियति छल ।

चिठ्ठी लिखैत-लिखैत कैकबेर हम  भावनाक अन्हरमे सुन्नभए जाइत छी। कलम रुकि जाइत अछि । आँखिसँ नोर बहब रुकिते नहि अछि ।  तेँ तँ हम अहाँकेँ चिठ्ठी लिखबासँ बचैत छलहुँ। कहीं  एहि चिठ्ठीक चर्च सुनि कए अपने लोकसभ अहाँक शांति ने भंग कए देथि ? कहीं आबो अहाँपर पक्षपातक आरोप नहि लगा देथि ? कहीं इहो ने कहि देथि जे मरलाक बादो ई बुढ़िआ जेठके बेटेक पक्ष लए रहल अछि । मुदा तै सभक डरे कतेक दिन गुम्म रहितहुँ । ओहुना तँ बातसभ मोनमे घुरआइते रहैत अछि । फेर अहाँसँ मोनक बात नहि कहब तँ कहबैक ककरा? अहाँ हमर माए,जन्मदात्री तँ छीहे,गुरु सेहो छी । अहाँकेँ नीकसँ बूझल अछि जे हम आओर ककरो गुरु नहि बना सकलहुँ । एहि संसारक प्रपंचसँ मुक्त करबाक भारो हम अहींकेँ दए देलहुँ। अपना भरि अहाँ हमर बहुत संग देलहुँ। हम दिल्लीमे रहैत  छलहुँ आ अहाँ गाममे -एक हजार किलोमीटरसँ बेसिए दूर । तथापि सदति अहाँ न्यायार्थ हमर पक्ष लैत रहलहुँ जाहि कारणसँ अहाँकेँ ओतेक तंग कएल गेल । से सभ सोचि हमरा मोनमे बहुत क्षोभ होइत छल । अहाँ किएक हमर बात रखैत छलहुँ? किएक ने ओकरासभकेँ हमरा खिलाफ बाजए दिऐक,जतेक मोन होतैक हमरा श्राप दैत,जे करैत । मुदा अहाँ तँ चैनसँ रहितहुँ ।

हम से कोना करितहुँ । हम तँ माए छलहुँ । अहूँक आओर ओकरोसभक । सही बात किएक नहि बजितहुँ ।

हम जनैत छी जे अहाँ इएहसभ कहितहुँ ।

चिठ्ठी बड़ीटा भए गेल । असलमे पुरान घावकेँ ई चिठ्ठी जेना फेरसँ हरिआ देलक । रहि-रहि कए हाथ ठाढ़ भए जाइत अछि। हमरा होइत रहैत अछि जे अहाँकेँ अपना लगसँ गाम नहि लए जेबाक छल । दरभंगाक डाक्टरक बात नहि मानक छल । दिल्ली आनि शल्यक्रिया कए अहाँक हड्डी जोड़ेबाक छल । मुदा दरभंगाक डाक्टरक बात सुगम बुझाएल छल । सभक सएह इच्छा रहैक । परिणाम जे भेल से जनिते छी । सभ -सभक मुँह तकैत रहल । अंततोगत्वा, अहाँ  चलि जाइत रहलहुँ । तकर बाद हम बहुत दिनधरि दुखी रही। रहि-रहि कए अहींक बारेमे सोचैत रही । फेर गीता पढ़नाइ शुरु केलहुँ जे आइधरि नियमित चलि रहल अछि। ओहीसँ मोनमे शांति भेल । जकरा जखन जतए मरबाक होइत छैक तखने मरैत अछि , से बात बुझलहुँ ।

हम नहि बूझि सकलहुँ जे अहाँकेँ श्राद्धमे एतेक खर्चा भेलासँ किछुओ फएदा भेल कि नहि? स्वर्ग भेटल कि नहि? अगिला जन्म नीकठाम हेबामे किछुओ मदति केलक कि नहि ? भए सकैत अछि जे अहाँक जबाब प्राप्त भेलाक बाद एहि बातसभक किछु निराकरण होअए ।

ओना अहाँ तँ जीवन भरि तपस्या केने छी । दिन-राति परिश्रम कए एतेकटा परिवारक रक्षा केने छी । कोनो व्रत-उपवास नहि छल जे अहाँ नहि करैत रही । एकादशी,चतुर्दशी ,रवि,मंगल आ कहि ने की-की । अपन नओ संतानक पालन तँ केनहि रही,अपन नाति,नातिन,पौत्र-पौत्रीसभक सालों पालन-पोषण केने छी। गाम-घरमे जकरा जे पार लागल से मदति करैत रहलहुँ । एहन पवित्र आत्माकेँ  मरणोपरांत कर्मकाण्डक मदतिक काज नहि भए सकैत अछि । आशा अछि जे हमर अनुमान सही होएत आ अहाँकेँ नीक सँ नीक स्वर्ग भेटल होएत ।

अहाँकेँ आब की हाल अछि,अगिला जन्म केहन की भेल? की मुक्ति भए गेल?स्वर्गक की हिसाब रहल?कहीं हमरासभक मोह अहाँकेँ अखनो तंग तँ नहि केने अछि?ई बातसभ जानबाक जिज्ञासा हमरा मोनमे बनल अछि । आशा अछि जे चिठ्ठीक जबाब दैत काल एहि बातसभक ध्यान राखब।

एकराति सपनामे देखलहुँ जे अहाँ खूब संपन्न घरमे जन्म लेलहुँ । अहाँक पिता अहाँकेँ बहुत मानैत छथि । अहाँकेँ बहुत नीक इसकूल-कालेजमे पढ़ओलथि । पढ़ि-लिखि कए अहाँ बहुत पैघ विद्वान भए गेल छी । मिथिलाक  नारीसभकेँ सम्मान आ अधिकारक हेतु अहाँ आगु भए काज कए रहल छी ।  जँ से सभ ठीके होइक तँ सेहो अपन चिठ्ठीमे जरूरसँ लिखि देब ।

ऐकटा आओर बात । अहाँक पिता अहाँक जन्मसँ किछु दिन पूर्वे मरि गेल रहथि । अहाँ हुनकर मुँहो नहि देखि सकल रही,ने ओ अपन पहिल संतानकेँ देखि सकल रहथि । भए सकैत अछि जे स्वर्गलोकमे अहाँकेँ अपन पितासँ भेंट भेल होअए । जँ से भेल होइक तँ अपन चिठ्ठीमे सभबात फरिछा कए लिखब । ओ केहन छथि ? अहाँकेँ देखितहि ओ केना की कहलथि? भए सकैत  अछि जे पिताक पहिल बेर भेल  भेंटसँ अहाँ ततेक अह्लादित भेल होइ जे हमरा सन-सन अज्ञानी ,मूर्ख पुत्रक अपराधसभ बिसरा गेल होअए। से भेल होअए तँ बुझू हमरा मुक्ति भेटि गेल । मुदा हम से सभ बुझबैक कोना? ओ तँ अहाँ चिठ्ठी लिखब तखने ने । तेँ बिसरब नहि, चिठ्ठी जल्दिए लिखब ।

एकटा बात तँ बिसरले जाइत छलहुँ । बाबूसँ भेंट भेल कि नहि ? ओ तँ अहाँ सँ २६साल पहिने चलि गेल रहथि । जँ भेल तँ हुनकर समाचार जरूर लिखब ।

चिठ्ठी  कनी पैघ भए गेल । मुदा रोकने नहि रोकाइत छल। संकोचवश, अखनो बहुत रास बातसभ लिखब छुटि गेल । अस्तु, क्षमा करब।

पत्रोत्रक अभिलाषी,

अहाँक पुत्र,

 रबीन्द्र

12.7.2020


 [91]


दरभंगा रेलवे टीसनपर

दिल्लीसँ गाम पहुँचलाक बाद


गामक कालीपूजा देखए गेलथि
गामसँ दरभंगा 






दरभंगा सुरेन्द्रक  घरपर


शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

संतुष्टि


संतुष्टि



छोटे सी खोपड़ी में

रहता है फकीर

सुखी और शांत

न चोरी का डर

 न लुट जाने की चिंता

न ही कुछ भी पाने का दुराग्रह

परंतु,

अट्टालिकाओं में रहकर भी

कुछ और पाने के चक्कर में

 हम रहते हैं परेशान,

यह हुआ ,वह भी होना चाहिए

के चक्कर में

 रहते हैं अस्तव्यस्त

और किसी दिन

हाय- हाय करते

दुनिया छोड़ जाते हैं

हक मारकर दूसरों का

बढ़ा लेते हैं

संपन्नता और प्रभुत्व

फिर भी,

स्वनिर्मित अंतरविरोधों में

फँस सुखी हो नहीं पाते  

इसलिए जरूरी है

जीवन को समझना

सकून चाहिए तो छोड़िए

यह सब

त्याग को अपनाइए

सही मान में वही हैं संपन्न

जो आश्रित नहीं

सम्मान की चाहत नहीं

और  स्वयं संतुष्ट हैं ।


10.7.2020

बुधवार, 8 जुलाई 2020

एहनो होइत छैक






एहनो होइत छैक



हम अङनेमे रही कि एकटा अधबएसू गलामे कंठी पहिरने उतरबरिआ घरबैआक ओहिठाम दूध देबए आएल रहए । ओकरा हम पहिनो देखने रहिऐक । मुदा एहिबेर बहुत दिनक बाद आएल छल । आङनमे लोकसभ किछु -किछु फुसफुसाएल । ओकरा गेलाक बाद बात परिछबैत केओ कहलकैक-

जहल काटि कए आबि गेलैक ।

चौदह साल धरि आजन्म कारावास कटलाक बाद ओ गाम घुरि आएल छल । ओकरा संगे दूटा आओर जहल काटि रहल अपराधीसभ सेहो अपन घर घुरि आएल छल । तकर बाद तीनूगोटे अपन उजरल-उपटल दुनिआकेँ फेरसँ सोझ करबामे लागि गेल । समाजो आब ओकरासभकेँ स्वीकार कए लेलकैक । मालिकसभक खेतमे ओसभ बोनि करैत छल । एक टोलसँ दोसर टोल निर्वाध अबैत जाइत छल। समय लोकक मोनक घावकेँ भरि देने रहैक । जे फेर कहिओ घुरि नहि आएलि से आब लोककेँ बिसरा गेलि । लोककेँ इहो मोन नहि रहलैक जे ई तीनू निर्दयी कोना ओकरा गछारि कए कलममे एकसरि पाबि अत्याचार केने रहैक आ अपन जान बचाबए लेल ओकरा मारिओ देने रहैक । कोना ने लोक बिसरि जइतैक? ओ कोनो दिल्लीक समाज नहि छलैक जकरा टेलीवीजन फेर-फेर मोन पाड़ितैक । जतए बेर-बेर जुलुस निकलितैक । जतए न्यायालयमे न्यायक फरिआदीक पक्षमे हजारों लोक ठाढ़ भए जइतैक । ई तँ एकटा छोटसन गामक बात छलैक। कहि नहि पहिनो एहन घटनासभ होइत रहल होइक आ लोक गब्धी लादि देने रहल होअए ।

ई घटना कम सँ कम अड़तालीस वर्षक थिक । हमर गाम लगक टोलक एकटा युवती अपना घरसँ दू माइल फटकी दोसर टोलपर बैन पहुँचाबए गेल रहथि । रस्ताक बीचमे कलम पड़ैत छलैक । ओहिठाम तँ गाम-घरक लोकसभ घास काटए किंवा आन-आन काजे अबिते रहैत छल । ओहुना गामक लगीचेक बात रहैक । तेँ ओ युवती निधोख ओहीबाटे बैन पहुँचा कए वापस होइत रहए । कलममे दूटा छौंडा़क ध्यान ओकरापर पड़लैक । ओहोसभ ओकरे टोलक रहैक । तेँ सामने आबि गेलाक बादो ओहि युवतीकेँ मोनमे कोनो अंदेशा नहि भेल होएतैक । मुदा ओकरासभक मोनमे तँ दुष्टता आबि गेल रहैक । ओ सभ ओकर रस्ता रोकलक । कहि नहि की-की कहलक ? अपना भरि ओ युवती बहुत विरोध केलकैक । खुरपी लए कए कैक बेर ओकरा सभपर आक्रमणो केलकैक । मुदा ताबे ओ अधबएसू सेहो कतहुसँ पहुँचि गेल । ओहो दुनूगोटेक संग भए गेल । युवती असगरि पड़ि गेलि । तीनूगोटे ओकरासंगे गलत काज केलक । ततबे नहि । कहाँदनि ओ तकर बाद अधबएसू कहलकैक-

एना जँ एकरा वापस जाए देबही तँ ककरो जानो बँचतौक?”

तखन की कएल जाए?”

एकरा खतम कर । तखने बँचि सकैत छैं ।

यौ बाबू!  तीनूगोटे मिलि कए ओही खुरपीसँ ओकर नरेठी काटि देलक  आ भागि गेल ।

जखन बहुत काल धरि ओ युवती घर वापस नहि गेल तँ ओकर माता-पिताकेँ चिंता भेलैक । सौंसे लालटेन लेने तकने फिरए । कतहुँ कोनो भाँज नहि लगैक । बैन तँ ओ सही समयपर पहुँचा देने छलि । तकर बाद वापसो चलि गेल छलि । तखन गेल कतए?

राति भरि ओकर माए-बाप आ गौंवासभ ओकरा तकैत रहि गेल । मुदा ओकर किछु पता नहि चलि सकल । भोरे अन्हरोखे किछु चरबाहसभ महीष चराबए निकलल । महीष चरबैत-चरबैत ओहिमे सँ केओ कलम दिस गेल कि एकटा महिलाक अर्धनग्न रक्तरंजित लास पड़ल देखि चिचिआ उठल । ओकरा चिचिआइत देखि आओर चरबाहसभ दौड़ल ।  देखिते-देखिते ई बात चारूकात पसरि गेल । केओ ई बात ओकर  पिताकेँ सेहो कहलकैक । ओ किछुगोटेक संगे दौरल ओहिठाम आएल । बेटीक लास ओहि हालतिमे देखि ओ ठामहि बेहोश भए गेल । लग-पासमे ठाढ़ लोकसभ ओकरा हवा केलक,पानि पिओलक । होश अबितहि ओ भोकासी पाड़ि कए कानए लागल । एतबेमे ओकर माए सेहो दौड़ल आबि गेलैक । तकर बाद जे दृश्य उपस्थित भेल,जाहि तरहसँ ओ दुनू बेकती कन्ना-रोहटि केलक से ककरो हृदयकेँ विदीर्ण कए सकैत छल । सोचल जा सकैत अछि जे एकटा माता-पिताकेँ एहन परिस्थितिमे कतेक कष्ट भए सकैत छैक । ओहो तखन जखन हत्यारा तीनूगोटे ओकरसभक पूर्वपरिचित रहैक । ओ अधबएसू तँ मृत महिलाक पिताक घनिष्ट लोक छलैक । मुदा मनुक्ख जखन राक्षस भए जाइत अछि तखन आओर की उमीद कएल जा सकैत अछि? थोड़बे कालमे पुलिस आएल ।  लग-पासमे रहैत लोकसभसँ भेल पूछताछक आधारपर दोषी तीनू व्यक्ति पकड़ल गेल । ओकरासभकेँ अड़ेर उच्च विद्यालयक दछिनबरिआ कोठलीमे बंद कए देल गेल । चारूकात लोकक करमान लागि गेल । गाम-गामसँ आबि कए लोकसभ अबैत रहल आ दोषीसभकेँ देखैत रहल । जकरा जे मोनमे अबैक से बजैत रहल । लासकेँ पुलिस मधुबनी लए गेल । तीनू अपराधीसभकेँ पुलिस पकड़ि कए बेनीपट्टी थाना लेने चलि गेल । क्रमशः लोकक भीड़ सेहो  छटि गेल । मुदा मृत महिलाक माता-पिता बड़ीकाल धरि छाती पिटि-पिटि कनैत रहि गेल ।

 हे भगवान! एहन अन्याय किएक भेल?”

मृत महिलाक पिताकेँ हमसभ नेनेसँ जनैत छलिऐक । ओ हमर लालबाबा(बाबाक छोटभाए)क ओहिठाम काज करैत छल । उघारेदेहे ,ठेहुन धरि धोती पहिरने ,कनी-कनी दाढ़ी बढ़ल माथमे आधासँ बेसी केस पाकल -इएह छल ओकर बगए । भोरे बरद लए खेतपर जाइत । दुपहरिआमे वापस भेलाक बाद केराक पातपर आङनक मुहथरिपर भोजन करैत । गमछामे बोनि बान्हैत आ अपन घर वापस चलि जाइत ।  बीचमे जलखै लए कए लालबाबा खेतपर जाइत छलाह । थाकल ठेहिआएल ओ जखन काज खतमकए दनानपर अबैत तँ सभसँ पहिने बरदसभकेँ पानि पिआबैत ।  ओकरासभकेँ खेबाकजोगार करैत । तकरबादे अपने भोजन करैत । हमसभ  कतेको बेर ओकर कोरामे चढ़ल रही । ऐतेक परिश्रमक बादो ओ सदति प्रसन्न देखाइति छल । मुदा एहि दिर्घटनाक बाद ओ कहिओ हँसैत नहि देखाएल । काजपर जाएब तँ ओकर मजबूरी छलैक । मुदा ओकरामे ओ रोहानी फेर कहिओ नहि वापस आएल । कतेको बेर ओकरा रहि-रहि कए बेटीकसंग भेल अत्याचारक कारणकनैत देखिऐक । अफसोचक बात थिक जे अपरोधीमेसँ एकटाक पिता हमरे ओहिठाम काज करैत छल । ओ अधबएसू अपराधी तँ हमर काकाक ओहिठाम दूध देबाक हेतु अबैत-जाइत रहैत छल । जाहिर बात छैक जे ओ सभ एक-दोसरकेँ जनैत रहल होएत । तखनो एहन काज कए गेल । संभवतः ओकरासभकेँ भेलैक जे जान-पहिचानक बात छैक । जँ ओकरा जीबैत छोड़ि देबैक तँ फँसि जाएब । अपनाकेँ बचाबक चक्करमे ओहि निर्दोष महिलाक ओ सभ हत्या कए देलक ।

आखिर मामिला न्यायालयमे गेल । तीनू दोषी साबित भेल आ सभकेँ आजन्म जेलक दंड देल गेल । जेलमे  रहितो ओ सभ कहिओ-कहिओ पेरोलपर गाम अबैत छल । लोकसभ ओहिबातसभकेँ ताधरि बिसरि गेल छल ।

अपराधीमेसँ दूगोटे बहुत गरीब परिवारक छल । ओकरासभकमोछक पम्ह निकलिए रहल छल । भए सकैत अछि जे जबानीक जोशमे आबि गेल । मुदा ई अधबएसू? एकरा की कहबैक । चालीससँ बेसिए बएस रहल हेतैक । गलामे कंठी बन्हने छल । आर्थिक रूपसँ सेहो ठीक-ठाक छल । केओ सोचिओ नहि सकैत छल जे एहि तीनूगोटेमेसँ सँ केओ एहन जघन्य अपराध कए बैसत । मुदा सभसँ सातिर साबित भेल ओ अधबएसू । कहाँ दनि ओएह दुनू युवककेँ कुकर्म केलाक बाद महिलाकेँ मारि देबाक हेतु प्रेरित केने छल । किछु नहि कहल जा सकैत अछि जे ककरा हाथे की कलंक भए जाएत? कम सँ कम एहि घटनाक बाद तँ सएह सोचाइत छल । कारण ओ सभ अपराधिक प्रवृतिक नहि छल । मात्र संयोगवश एहन कुचक्रमे फँसि गेल छल । जे छल मुदा काज तँ बहुत खराप कए गेल छल ।

ग्रामीण समाजमे अपने लोकसभ द्वारा संभवतः अनचोकेमे कएल गेल ई जघन्य अपराध हमरा अंदरसँ मर्माहत कए देने रहए । ओकर किछुए दिनक बाद हमरसभक मैट्रिकक परीक्षा भेल रहए । परीक्षाक तैयारीक बीचमे रहि-रहि कए ओ बातसभ हमरा मोनमे प्रकट भए जाइत छल । मृत महिलाक पिताक आँखिसँ बहैत नोर  कैकबेर हमरो आँखिसँ निकलि जाइत छल । भए सकैत अछि जे जँ ओ कोनो सशक्त व्यक्ति रहैत तँ एहन घटना हेबे नहि करैत,ओ एसगरि पैरे बैन देबए दोसर टोलपर जेबे नहि करैत । मुदा ओ की जाने गेलैक जे आइ केओ ओकरा गौंवा राक्षस बनल कलम लग ठाढ़ रहतैक । ओ तँ ओहिठाम निरंतर जाइते-अबैत रहैत छलि ।  ओकर नैहरक गाछ- बृच्छ,घास-पात सभ ओकर रखबार छलैक ।  ओकर अपन छलैक । तखनो केओ ओकरा बँचा नहि सकल । भए सकैत अछि जे जँ ई घटना दिल्लीसन  महानगरमे भेल रहैत तँ ओकर पिताकेँ पर्याप्त मदति होइतैक,सरकारी आश्रय भेटितैक । मुदा ओ बात तँ एकटा सुदूर देहातमे भेल रहैक । के सुनैत,ककरा कहतैक? मृत महिलाक पिता ओहिना हरबाही करैत -करैत हृदयमे   दारूण दु सहैत एकदिन चुपचाप एहि दुनिआसँ चलि गेल । ओ तँ चलि गेल मुदा हमर मोनमे सभदिनक हेतु अथाह कष्ट भरि गेल । नेनामे ओकर सिनेहकेँ हम नहि बिसरि सकलहुँ ,ने बिसरि सकलहुँ ओकर दुखद अंतकेँ । मुदा ई समय थिक । कतए सँ कतए पहुँचि गेल । ओहि घटनाक लगभग पाँच दसक भए गेल । मुदा हमर मोन अखनो कखनो काल कए व्याकुल भए जाइत अछि । कहि उठैत अछि-एना नहि हेबाक चाहैत छल । बहुत गलत भेल ,आदि,आदि ।

एहने घटना दिल्लीमे सेहो घटल रहैक । लेडी हार्डींग मेडिकल कालेज नई दिल्लीक एकटा कर्मचारी अपने बेटीक संगे वलात्कार कए देने रहैक । चौदह वर्षक आजन्म कारावास काटि ओ नहि आएल छल । ओ कोट-कचहरीमे तिकरिम कए जेना-तेना छुटि गेल छल । तकर बाद लेडी हार्डींग मेडिकल कालेज दिल्लीमे कर्मचारी युनिअनक समर्थनसँ फेरसँ  काज करए आएल छल । नौकरीमे ओ फेरसँ बहालो भए गेल छल । मुदा ओहिठामक सजग समाज ,विद्यार्थी, आध्यापक सभ आंदोलन कए देलक । प्रशासनकेँ साफ-साफ कहि देलक जे जँ ई काज करत तँ हमसभ काज छोड़ि देब । कैकटा विभागमे ओकरा समयोजित करबाक प्रयास भेल मुदा सभठाम ओकरा खिलाफ ओएह आबाज ओहिना आंदोलन शुरु भए जाइक । हारि कए ओ प्रशासनमे कोनो ठाम खपाओल गेल । बेसक ओ कोर्ट-कचहरीसँ अपनाकेँ बचा लेलक मुदा समाज ओकरा माफ नहि केलकैक । ओहि समयमे हम ओतए उप निदेशक (प्रशासन)क काज देखैत रही । हमरा नीकसँ मोन अछि जे कालेज प्रशासनकेँ कतेक मोसकिल भेल रहैक । मुदा गामक समाजमे से संवेदनशीलता नहि देखाएल । आएल पानि गेल पानि बाटे बिलाएल पानि । जे भेलैक जकरा भेलैक । बात अएलैक,गेलैक आब तकर कोन हिसाब छैक? फेर गाम॒घरक सामंती व्यवस्थामे  तँ एहन बातसभ होइते रहैत छल । ककर-ककर के हिसाब करैत फिरत? की पता कहीं दुनू पक्षक घालमेल होइक । तरह-तरहक गप्प-सप्प सुनबामे अबैत रह भोगि । अपराधीकेँ कानून दंड देलकैक । ओ दंड भोगि कए बेस मोट-सोट भए कए अपन घर वापस भए गेल । आओर कएले की जएतैक?

किछुसाल पूर्व एकदिन भोरे अखबार पढ़ैत रही । एकटा आइएएस अधिकारीक बेटीकेँ मुम्बइमे ओकरे फ्लैटमे पैसि कए सोसाइटीक सुरक्षामे लागल गार्ड बलात्कारक बाद हत्या कए देबाक समाचार मुख्यपृष्ठेपर छपल छल । ओहि अधिकारीजीकेँ हम जनैत छलिअनि । गृह मंत्रालयमे हमसभ संगे काज केने रही । ओ बहुत प्रबावशाली व्यक्ति छलाह । बेटी उच्च शिक्षाप्राप्त केलाक बाद मुम्बइमे काज करैत छलखिन । एतेक अछैत ओकरा अकारण हत्या भए गेल । एकबेर फेर हमर गामक घटना मोनमे नाचि गेल । की गाम की मुम्बई,की हरबाह की आइएएस सभक बेटीक जान-माल असुरक्षित भेल अछि । लोक एहन पैशाचिक किएक भए गेल ? हम सोचए लगैत छी तँ सोचिते रहि जाइत छी - जे मनुक्ख एहनो होइत छैक । 

8.7.2020

शनिवार, 4 जुलाई 2020

रेलक डायरी

रेलक डायरी

 

पहिने यातायातक प्रमुख साधन बस वा रेल छल । हवाइ जहाज तँ सुनबाक वस्तु छल । पैघ लोकसभ ओकर उपयोग करथि । साधारण आदमीकेँ तँ बस,ट्रेन ,रिक्सा नहि तँ पैरे चलबाक जोगार करए पड़ैक । कतहु -कतहु टैक्सी सेहो चलैक । मुदा ततेक महग रहैक जे आपवादिक परिस्थितिएमे लोक ओकर उपयोग करए । टैक्सीक एकटा दोसर रूप अएलैक टेकर माने जीप जाहिमे यात्रीसभ बसे जकाँ कोचल जाथि आ भाड़ा सेहो कमे लगैक । मुदा टेकरक उपयोगिता दस-बीस माइल धरि छलैक । बेसी दूर जँ जेबाक अछि तखन तँ ट्रेनेक टिकट लेबए पड़ैक । ट्रेनेक टिकट लेब आइ-काल्हि जकाँ आसान नहि रहैक । ओहि लेल स्वयं वा कोनो अपन लोककेँ टीसनक खिड़कीपर घंटों पाँतिमे ठाढ़ होबए पड़ैक । ओहि बीचमे कैकबेर धकमधुक्कामे जेबी कटि जाइत छलैक । हारि कए हुनका बिना टिकट लेने वापस होबए पड़नि । जँ गर्मीक छुट्टीसँ पहिने यात्रा करबाक अछि तखन तँ टिकट भेटनाइ बहुत मोसकिल होइत छल । कैकगोटे चारिबजे भोरेसँ टीसनक खिड़कीपर पाँति मे लागि जाइत छलाह । ओहि बीचमे कैकबेर नेटवर्क खराप भए जाइत छलैक । आब ठाढ़ भेल रहू । कहि नहि कखन जा कए फेरसँ नेटवर्क वापस आएत आ टिकट कटनाइ शुरु होएत । एहि तरहे घंटोक  तपस्याक बाद टिकट भेटैक । कैकबेर टिकट खिड़की धरि पहुँचलाक बाद ट्रेनमे जगह भरि जाइत छलैक तखन । जएह-सएह टिकट लोक लए लैत छल । एतेक प्रयासक बाद टिकट लेलाक उपरांत जखन लोक घर वापस आबए तँ लगैक जेना पहाड़ तोड़ि लेलहुँ। मुदा आब समय बदललैक । घरे बैसल आनलाइन टिकट कटि जाइत छैक,बदलि जाइत छैक आ आवश्यक भेलापर रद्दो भए जाइत छैक ।

रेलक पहिल यात्रा हम बाबूकसंगे  दरभंगासँ मुहम्मदपुर टीसन जेबाक हेतु केने रही । हम पहिलबेर अपन मामागाम(सिंघिआ ड्योढ़ी) जाइत रही । ओहि समयमे टेकटारिटीसन नहि बनल रहैक । तेँ मुहम्मदपुर  उतरि कए पैरे पिंडारुछ बाटे सिंघिआ जेबाक रहए । पसिंजर ट्रेन रहैक । दरभंगासँ सीतामढ़ी जाएबला यात्रीसभ ठसा-ठस भरल रहैक । रेलमे बैसलाक बाद लागए जेना सौंसे दुनिआ हिलि रहल छैक । नीचा काठक फट्टाक बीचमे बड़का-बड़का उरीससभ भरल छल । रहि-रहि कए काटैक । गर्मीक समय रहैक । पंखा बंद पड़ल छल । सभ यात्री घामे-पसीने बेहाल रहथि । मुहम्मदपुर टीसन थोड़बे कालक बाद आबि गेल छल । बहुत मोसकिलसँ यात्रा संपन्न भेल। हम प्रसन्नतापूर्वक मामागाम दिस पैरे बाबूक संगे बिदा भए गेल रही । एकर बाद तँ कतेको बेर ट्रेनपर चढ़लहुँ । कतए-कतए ने गेलहुँ। एहिमेसँ रेल यात्राक अनुभवक वर्णन कए रहलहुँ अछि ।

एकबेर हम पटनासँ दिल्ली मगध एक्सप्रेससँ दिल्ली जाइत रही । हमर आरक्षण स्लीपरमे रहए । हमरा संगे हमर श्रीमतीजी सेहो रहथि । जौँ-जौँ रेल पटनासँ आगा बढ़ल बिना आरक्षणबला यात्रीसभक संख्यामे इजाफा होबए लागल । मुगलसराय अबैत-अबैत तँ टस सँ मस हेबाक जगह नहि बाँचल। सौचालय धरिमे यात्री बैसल रहए । गर्मीक मौसम रहैक । ताहिपरसँ ठसाठस भरल यात्री । के ककरा सम्हारत ।  पटनामे बहुत मोसकिलसँ अपन शायिका पर काबिज भेल रही । मुदा रहि-रहि कए केओ-ने-केओ कनीक घुसकबाक आग्रहक संग लगीचमे आबि जइतथि आ जाबे किछु बजितहुँ ताबे ओ अपन जगह बना चुकल रहितथि । तकर बाद हम झगड़ा केनाइ शुरु करितहुँ। बहुत मोसकिलसँ शायिकाकेँ खाली करओलहुँ आ चतरि कए सुति रहलहुँ जाहिसँ केओ फेरसँ नहि बैसि जाए । थोड़े कालक बाद किछु नव यात्रीसभ डिब्बामे पैसलाह आ बैसबाक जोगारमे एमहर-ओमहर घुमए लगलाह । हमरा फेर कान ठाढ़ भेल । अपना भरि साकंछ भेलहुँ । हमर श्रीमतीजीक शायिका तँ ताधरि यात्रीसँ भरि चुकल छल । हम निरंतर प्रयाससँ अपन शायिका बचओने रही ।  दू-तीनटा यात्री हमर शायिका दिस बढ़ल । हमहु विरोध केनाइ शुरु केलहुँ । बाताबाती सेहो होबए लागल ।  ओही बीचमे एकटा यात्री कहैत छथि –लगत है कि ढोढ़ चराबत है । दोसर यात्री सेहो किछु बाजल । तेसर से अपन टीप देलथि । हम असगर हुनका सभसँ शास्त्रार्थ करैत रहलहुँ । ताबत ओहीमेसँ केओ बुधिआर यात्री बाजल

एहि लगारी संगे के जीतत? दोसरठाम चलैत चल ।

आ ओ सभ दोसर डिब्बा दिस बढ़ि गेलि ।

रेलगाड़ी मुगलसरायसँ आगु बढ़ल । मोनमे सोचलहुँ जे आब चैनसँ सुति सकैत छी । कनिके कालक बाद एकटा मोछिअल पुलिसके गलामे बंदुक लटकेने पैर लग ठाढ़ देखलिऐल । जाबे किछु बुझितहुँ,किछु बजितहुँ ताबे तँ ओ अपन काज कए चुकल छल । ओ ससरि कए पैर दिस बैसि गेल रहए । हमरा संतोख दिआबक हेतु कहलक-

अलीगढ़मे उतरि जाएब । ताबे कनी पैर सोझ कए लैत छी ।

ओकर ढब देखि किछु प्रतिवाद करबाक साहस नहि भेल । चुप्पे रहि गेलहुँ । रेल आगु बढ़ि रहल छल । थोड़बे कालक बाद एकटा फौजी माथा लग ठाढ़ देखेलाह । हम करोट बदलबाक प्रयास कए जगह छेकबाक प्रयास करितहुँ ताहिसँ पहिने ओ हमर सिरमा लग बैसि गेलाह । ओ फौजी भेखमे रहथि । मुँहसँ कनी-कनी दारु भभकि रहल छल । की करितहुँ? जान बचबैत  रहि गेलहुँ । शायिकाक दुनू दिस दूगोटे तेना बैसि गेल रहथि जे हमरा सुतल रहब संभव नहि छल । अस्तु,हमहु उठि कए बैसि गेलहुँ । रेल आगु बढ़ैत रहल । आगरा अबैत-अबैत दुनूगोटे उतरि गेल रहथि । शायिका खाली भए गेल रहए । बाहर फरीछ भए रहल छलैक। श्रीमतीजी सेहो उठि गेल रहथि । चाहक अमल जोर पकड़लक । ताबे केओ आबाज देलक-चाह चाह । हम चिकरि कए ओकरा दू कप चाह देबाक आग्रह केलिऐक । कनी कालक बाद चाह बला दूकप चाह देलक । चाह की छल लागल जेना माँर पीबि रहल छी । मुदा उपाय की छल ? जौँ-जौँ परीछ होइत गेल तँ तँ ट्रेनमे बिना आरक्षणबला दैनिक यात्रीसभ पैसैति गेलाह । थोड़े कालक बाद तँ किछु एहन यात्रीसभ पैसलाह जे ट्रेनमे तास खेलाइत जाथि । ई हुनकर सभक नित्यक कार्यक्रम छल । तकैत-तकैत ओ सभ हमरे शायिकाक लग-पासमे बैसि गेलाह । हमरा आग्रह केलाह जे कातक शायिकापर चलि जाइ । उपाय की छल? हम ओतहि चलि गेलहुँ । ओ सभ तास खेलाइत रहलाह । ट्रेन आगु बढ़ैत रहल । अंततोगत्वा,हमसभ नईदिल्ली टीसन पहुँचलहुँ । जाइत-जाइत ओ सभ माफी सेहो मांगि लेलनि । पढ़ल-लिखल लोक जे रहथि । थाकल-ठेहिआएल हमसभ प्लेटफार्मपर उतरलहुँ ।

एकबेर हमर श्रीमतीजी पटना राजधानीसँ दिल्ली आबि रहल छलीह । संगमे हमर पुत्र क्षितिज सेहो रहथि । हम नई दिल्ली टीसनपर हुनकर प्रतीक्षा कए रहल छलहुँ ।  रेलक आगमन समय भए गेल छल । तथापि ओ आबि नहि रहल छल । पता लागल जे रेल गाजिआबादमे अड़कल अछि ।  बहुत कालक बाद अजमेरी गेट दिस ओहि रेलक आगमनक सूचना प्रसारित होबए लागल । हम गेटे लग ठाढ़ रही जाहिसँ हुनका लोकनिकेँ कोनो दिक्कति नहि होनि । मोनमे सोची जे राजधानीसँ आबि रहल छथि तेँ कोनो परेसानी नहि भेल हेतनि । नीकसँ खेने हेतीह । थोड़बे कालमे हमर एहि आशापर पानि फिरि गेल । दुनूगोटे बहुत थाकल लागि रहल छलाह । बुझेबे नहि करए जे बात की भेलैक? एतेक परेसान किएक लागि रहल छथि?  सामानसभ गाड़ीमे रखलाक बाद पुछलिअनि-

एतेक थाकलि किएक लागि रहल छी?”

कहए लगलीह- ट्रेनमे भोजन बहुत दिक्कति भए गेलैक । यात्रीसभ पैंट्रीकारक सभटा सामान लुटि लेलकैक ।  जकरा जे हाथ लगलैक से लए कए निकलि गेल ।

एना भेलैक कोना? ”

बैरासभ किछु बोगीमे तँ नीकसँ भोजन करओलक । तकर बाद जेना अंठा देलकैक । ककरो भेटलैक केओ मुँहे देखैत रहि गेल। एही बातपर यात्रीसभ तमसा गेल । बड़ीकाल धरि हल्ला होइत रहल । तेँ गाजिआबाद टीसनपर आबि कए ट्रेन ठाढ़ भए गेल रहैक। बहुत कालक बाद कोना-ने-कोना ट्रेन खुजल ।

आखिर ओ सभ डेरा पहुँचलथि आ जल्दीसँ चाह-पान केलथि । तखन जान-मे-जान अएलनि ।

एकबेर हमरा श्रीमतीजी आ सासुक संगे गरीबरथसँ दिल्लीसँ मधुबनी जेबाक रहए । आनंद विहार टीसनपर पहुँचलाक बाद लगबे नहि करए जे इहो टीसन दिल्लिएमे छैक ।  यात्रीसभक बगए-बानिसँ लगैत जेना दरभंगा टीसनक प्लेटफार्मपर ठाढ़ छी । लोकसभ अपन-अपन गोल बनाकए समानक रक्षा करैत गप्प-सप्पमे लागल छलाह ।  ट्रेन अएबामे अनावश्यक विलंब भए रहल छल जखन कि ओकरा ओतहिसँ बनि कए चलबाक रहैक । ओहि समयमे आनंदविहार टीसन बनले रहए । ओतेक घेर-बेर नहि रहैक । मुदा यात्रीसभ ठसाठस भरल छल। ट्रेनक आगमनमे विलंब देखि हमसभ प्लेटफार्मेपर गर देखि कए बैसि गेलहुँ । कनीके हटि कए पचीस-तीस गोटेक एकटा गुट छल । ओहिमे किछुगोटे बैसल तँ किछु गोटे ठाढ़े रहथि ।  ककरो हाथमे झोड़ा तँ ककरो हाथमे मोटा छल । केओ अपन दुधपीबा नेनाकेँ दूध पिआ रहल छलि । माने ओकरासभकेँ देखलाक बाद कोनो तरहें नहि लागल जे ओ सभ यात्री नहि छथि । किछुकालक बाद ट्रेन प्लेटफार्मपर आएल। चारूकातसँ यात्रीसभ ट्रेन दिस दौड़ल । कनीके कालमे हालति एहन भए गेलैक जे ट्रेनक कोनो डिब्बामे पैसि नहि सकैत छलहुँ । सभ डिब्बाक गेटपर यात्री जेना-तेना लटकल रहए । आबकी कएल जाए? हमरसभक डिब्बा लगीचेमे रहए । मुदा ताहिसँ की? गेटपर हालति देखि ओहिमे पैसबाक साहस नहि होअए । मुदा ट्रेनमे चढ़बाक तँ छलहे । आखिर श्रीमतीजीकेँ सामानसभक रखबारी हतु प्लेटफार्मपर छोड़ि सासुक संगे गेट दिस बढ़लहुँ । गेटकेँ किछुगोटे तेनाक गछारने छल जे ओहिमे पैसले नहि होअए । हमर सासुक हाथमे डाली रहनि ।  जखन गेटसँ आगा बढ़ल नहि भेल तँ वापस प्लेटफार्मपर आबि हुनकर डाली राखि देलहुँ । हम दुनूगोटे गेट फेरसँ पहुँचलहुँ। ताबे तँ डिब्बा ठसाठस भरि गेल छल । गेटक कोनपर एकटा  नवालिग छौंड़ा लटकल छल । ओकरा लाख कोशिश केलहुँ जे कनी हटए से कथी लेल हटत । जेना-तेना आगु बढ़बाक प्रयासमे हम दुनूगोटे आगु-पाछु भए गेलहुँ । ओ अपन शायिका धरि चलि गेलीह। हम वापस प्लेटफार्मपर श्रीमतीजीकेँ आनए गेलहुँ । सामानसभक संगे जेना-तेना गेटसँ अंदर पैसलहुँ । श्रीमतीजी आगु आ हम हुनकर पाछु रही कि किछु गोटे धकमधुक्का करए लागल । हमर पैरमे केओ जोरसँ धक्का मारलक जाहिसँ सामान लेने हम धराम धए खसलहुँ। हाथक सामानसभ सौंसे डिब्बामे पसरि गेल । एहनो हालतिमे एकटा यात्री मदति करए नहि आएल । ताबे हमर सासुकेँ चिकरैत देखलिअनि-काटि लेलक,काटि लेलक ।ओ एतबा बजले हेतीह कि डिब्बाक दोसर गेटसँ पचीस-तीसगोटे धराम-धराम कुदि गेल । ट्रेन ससरए लागल छल । हमर सासुक डाँरमे बान्हल बटुआमेसँ टाका,गहनासभ पाकेटमारीमे चलि गेल छलनि । ततेक सफाइ सँ काज केने छल जे हिनका किछु पता नहि चललनि। जखन अपन शायिकापर बैसि स्थिर भेलीह तँ देखैत छथि जे बटुआ तँ अछिए नहि । मुदा जे हेबाक छल से भए गेल छल । ट्रेन क्रमशः गति पकड़लक आ हमसभ अफसोच करैत रहलहुँ जे बेकारे एहि ट्रेनमे चढ़लहुँ ।

ई बात सन्  २०१० क थिक । हम श्रीमतीजीक संगे ट्रेनसँ अमृतसर जाइत रही । स्लीपर किलासमे हमरा दुनूगोटेक नीचाक शायिका आरक्षित रहए । टीसनपर टेम्पुबलाकेँ भाड़ा देबाक हेतु ओ अपन झोड़ामेसँ टाका निकाललीह । टेम्पुबलाकेँ भाड़ा देलिऐक आ ओ चलि गेल । ओ बाबू ओतहिसँ किछु बदमाससभ हमरासभक पाछा लागि गेल । हमसभ ई बात तँ तखन बुझलिऐक जखन अमृतसर अतिथि घरमे पहुँचि गेलहुँ । ताबे की सभ भेल से कहि रहल छी । ट्रेन खालिए जकाँ रहैक । हमसभ अपन-अपन शायिकापर बैसि गेलहुँ। रतुका समय रहैक । भोर होइतहि ट्रेन अमृतसर पहुँचि जइतैक । से एहि ट्रेनक खुबी छल । थोड़बे कालमे डिब्बा भरि गेल । हमसभ निचैन अपन-अपन जगहपर रही । बीच-बीचमे देखिऐक जे तरह-तरहक यात्रीसभ अबैत अछि,किछु काल रहैत अछि आ चलि जाइत अछि । किछु टीसन बितलाक बाद यात्रीक एकटा दोसर गुट आएल । ओहिमेसँ किछुगोटे हमरे लग-पासमे शायिकाक आरक्षण टीटीबाबूसँ कहि कए करा लेलक । किछुगोटे ऊपर तँ किछु गोटे नीचाक शायिकापर चढ़ि गेल । हमसभ जखन भोजन करए लगलहुँ तँ ओहीमेसँ एकटा ऊपर बैसल यात्रसँ किछु लेबाक उपक्रम करैत हमर श्रीमतीजीक भोजनमे कोनो पाउडर खसा देलकनि । भोजनक बाद जखन ओ हाथ धोबाक हेतु ट्रेनक वास बेसीन दिस बढ़लीह तखनो ओ सभ किछु पाउडर एमहर-ओमहर छिड़िऔलक । किछुए कालक बाद हुनका ततेक निन लगलनि जे सुति रहलीह । मुदा हम जगले रही । हमरा निन्न हेबे नहि करए । भोरे ट्रेन अमृतसर टीसनक प्लेटफार्मपर पहुँचि रहल छल । हमसभ उठि गेल रही । ताबतेमे ओहीमेसँ एकटा यात्री हमर नाम लए कहैत अछि-

मिश्राजी! यह चाभी का गुच्छा आपका है क्या?”

कहि ने के एकटा कुंजीक झाबा शायिकाक नीचा लटका देने रहैक । हम ओकरा दिस ध्यानसँ देखलिऐक तँ ई स्पष्ट बुझाएल जे हमर नहि अछि । अस्तु,हम मना कए देलिऐक । मुदा एहि बातसँ माथा ठनकल जे ईसभ हमर नाम कोना बुझलक?खैर! चु्प्पे रहि गेलहुँ। ई बात अखनो नहि सोचाएल जे ओसभ लफुआ अछि ।ओ सभ चाहैक जे कहुना हमर ध्यान कनीको काल लेल एमहर-ओमहर होअए जाहिसँ ओ सभ बैगमे सँ टाका निकालि सकए । थोड़ेकालक बाद ओहीमेसँ एकगोटे कहैत अछि-

सीट ऊपर कर लीजिए । स्टेसन आने ही बाला है ।

हम श्रीमतीजीक सामान नीचा राखि सीट ऊपर करए लगलहुँ । ताबतेमेसँ केओ हमर बैगमे हथोरिआ देबए लागल । मुदा ओ किछु करितए ताहिसँ पहिनहि हमर श्रीमतीजी ओतहि ठाढ़ि भए गेलि । हम अपन शायिकापर बैसि गेलहुँ ।  एतबेमे फेर केओ चिचिआइत अछि-

जल्दी उतरिए। स्टेसन आ गया । ताबे हमसभ गेट लग सामान लए कए आबि गेल रही । ओकरसभक प्रयास रहैक जे धक्का दी जाहिसँ हम खसी आ बैग लए ओसभ भागि जाए । मुदा बँचबाक रहए । हम ओकरसभक बातमे नहि अएलहुँ । ओकरा कहलिऐक-

आपको जल्दी है तो आगे बढ़ जाइए ।

मुदा तखनो ई नहि बूझि सकलिऐक जे ई सभ असलमे बदमास  अछि । ओतँ जखन अतिथि गृह पहुँचि श्रीमतीजी बेग खोललथि तँ देखैत छथि जे सभटा टाका निकालि लेने अछि । आओर कोनो सामान नहि छुने छलनि । मुदा हमर बैग बाँचि गेल छल । रातिमे भोजनमे जे पाउडर मिला देने रहनि तकर असर आब जोर पकड़ि रहल छलनि । थोड़बे कालक बाद हुनका अस्पताल लए जाए पड़ल ।  तखन बुझाएल जे ओ सभ सामान्य यात्री नहि अपितु एकटा गैंगक हिस्सा छल आ रस्ता भरि हमरा लोकनिक टाका आ मुल्यवान सामान चोरेबाक फिराकमे लागल छल । बहुत मोसकिलसँ श्रीमतीजीकेँ डाक्टरसभ ठीक केलक । एतबे संतोख भेल जे जान बाँचि गेलनि । घुमनाइ तँ  नहिए भए सकल ।

एकबेर हम जरूरी सरकारी काजसँ ट्रेनसँ जाइत रही । यात्राक कार्यक्रम आकस्मिक बनल आ हम रेलमे बिना आरक्षण चढ़ि गेल रही । मेरठक लगीचमे केओ अकस्मात पैर छुबि गोर लगैत छथि आ आग्रह करैत छथि -

सर! अहाँ हमर शायिकापर बैसि जाउ ।

हम पुछलिअनि-अहाँ के छी? हमरा लेल अपन जगह किएक छोड़ि रहल छी?”

ओ जबाब देलाह-सर! अहींक कृपासँ हमरा नौकरी भेल ।

से कोना? ”

हमरा तँ किछु नहि मोन अछि?”

हम एसएससीक परीक्षा पास कए गेल रही । मुदा हमर कागज कोनो कारणसँ आपत्तिमे पड़ि गेल छल । संयोगसँ अहाँसँ एसएससी इलाहाबादमे भेंट भेल । अहाँ हमर ताकि कए सभटा काज कए देलहुँ जाहिसँ हमरा थोड़बे दिनमे नियुक्तिपत्र भेटि गेल ।

हम हुनकर बात सुनि अबाक रहि गेलहुँ । नौकरीक क्रममे एहन कतेक गोटेक काज होइते रहैत छैक । मुदा ओ युवक एहिबातक संज्ञान लैत हमरा आदरे नहि केलाह अपितु ओहन भीड़मे अपन सीट दए देलाह,ताहि बातसँ हम बहुत आश्चर्यचकित रही ।

एकबेर हम इलाहाबाद(आब प्रयागराज)सँ पटना ट्रेनसँ जाइत रही । हमरा स्लीपरमे आरक्षण रहए । हम अपन शायिकापर बैसले रही कि ढाक्टर जयकान्त मिश्रजीकेँ देखलिअनि । हुनका हाथमे एकटा झोड़ा रहनि आ ओ सीट तकैत एमहर-ओमहर बौआइति रहथि । हुनका आरक्षण नहि रहनि । कहलाह- अकस्मात पटनामे एकटा कार्यक्रममे जेबाक हेतु बिदा भए गेलहुँ । आरक्षण नहि करा सकलहुँ । हम आग्रहपुर्वक अपन शायिका हुनका दए देलिअनि । बहुत कालधरि ओ मना करैत रहलाह । परंतु,हमर आग्रह देखि मानि गेलाह । बादमे हमरो एकटा शायिका भेटि गेल ।

रेल यात्रामे कैकबेर एहन लोकसँ भेंट भए जाइत अछि जकरा बिसरल नहि जा सकैत अछि । जिनकर बातक प्रभाव बहुत दूरगामी होइत अछि । एहने एकटा सहयात्री भेटि गेलाह दरभंगासँ दिल्लीक यात्रामे । ओ मुजफ्फरपुरमे हमरा सामने बला एसी शायिकापर रहथि । दिनक समय रहैक तेँ यात्रीसभ बैसले रहथि । केओ किछु तँ केओ किछु करबामे व्यस्त रहथि । क्रमश: गप्प-सप्प प्रारंभ भेल । ओ अपन पैतृक संपत्तिक बटबाराक प्रसंगमे गप्प करैत-करैत कैकबेर भावुक भए जाथि । कहए लगलाह-

जखन कखनो गाम गेलाक बाद बटबाराक चर्चा करितहुँ तँ भाए सासुर चलि जाइत छलाह । हुनका बूझल रहनि जे किछु दिनक बाद हम वापस भए जाएब । तेँ दस दिनक बाद अबितथि आ तरह-तरहक कबाइत पढ़ए लगितथि । आपसी झंझटिक डरसँ सहर वापस चलि आबी । एहिना कैकबेर होइत रहल ।  अंतमे,एहि विषयक चर्चे छोड़ि देलहुँ । तकर बाद तँ गाम गेलाक बाद पाहुन जकाँ स्वागत होइत छल ।  भाएक हाथमे किछु टाका दए दिअनि । ओ सपरिवार खूब सेवा करथि। नीकसँ गप्प-सप्प करथि । हमहु प्रसन्नतासँ समय बीताबी आ ओहोसभ । कतेक तरहक व्यक्तिगत अनुभवसभ कहैत रहलाह जे सुनि बहुत जानकारी भेटल । दिल्लीमे ट्रेनसँ उतरबासँ पहिने ओ अपन मोबाइल नंबर सेहो देलनि । मुदा तकर बाद फेर कहओ गप्प नहि भए सकल । मुदा हुनकर बातसभ मोनपड़िते रहैत अछि।

एकबेर हम गरीबरथ ट्रेनसँ मधुबनीसँ दिल्ली जाइत रही । सामनेक शायिकापर एकटा महात्माजी आ तकर ऊपर हुनकर चेला शंकर रहथि । हमरा संगे हमर श्रीमतीजी सेहो रहथि । शंकर  महात्माजीक सेवामे लागल रहैत छल । जखन तमाकुलक काज भेल तँ से चुना कए देलक । पानिक काज भेल तँ बोतलमेसँ पानि निकालि कए देलक । भोजनक समय झोड़ामे सँ भोजन निकालि कए देलक । तकरबाद तरह-तरहक दबाइसभ देलक । सभ किछु खेलाक बाद निन्नक गोटी सेहो देलकनि । तखन कहलखिन जे कनी मोटका कंबल निकाल । शंकर मोटका कंबल ओढ़ा देलकनि । तखन प्रसन्न भए महात्माजी बजैत छथि-आब जतेक एसी धुकबाक होइक से धुकओ । हम तँ पड़लिअनि । ताहिसँ पूर्व महात्माजी  रहि-रहि कए दिल्ली स्थित अपन आश्रममे चेलासभकेँ फोन कए हाल-चाल लैत रहलाह । ओहीक्रममे पता लगलनि जे केओ भक्त पचीस हजार टाका दए गेलैक अछि । आब तँ महात्माजी बेस चिंतामे पड़लाह । होनि जे कहीं चेलासभ टाका एमहर-ओमहर ने कए देथि । तेँ रहि-रहि कए फोनपर वारंबार कहैत रहलखिन जे ओहि टाकाकेँ सम्हारि कए राखल जाए आ हुनका दिल्ली अएलापर देल जाए । गप्प-सप्पक क्रममे ओ कहलाह जे हरिद्वारमे हुनका बड़ीटा आश्रम छनि । हमरासभकेँ हरिद्वार आश्रमपर अएबाक आग्रहस सेहो केलाह । दोसरदिन भोर होइतहि ओ चेलासभकेँ फोन करए लगलाह ।  कोन प्लेटफार्मपर ट्रेन अड़कतैक तकर जानकारी लेलथि । केओ भक्त कार लए टीसनपर हुनकर स्वागत करबाक हेतु भोरेसँ ठाढ़ छलाह । मुदा ट्रेन तीन घंटा विलंब चलि रहल छल । मुदा हुनकर भक्त टस सँ मस नहि भेल । कार लेने प्रतीक्षा करैत रहल । आनंद विहार टीसनपर ट्रेन पहुँचि गेल छल । हुनकर भक्तसभ डिब्बामे पैसि गेल । बहुत आग्रहपुर्वक हुनका बाहर लए गेल । मुदा हुनकर ध्यान निरंतर पचीस हजार टाका पर छल । ओ सभसँ पहिने अपन चेलासभसँ तकरे जिज्ञासा केलथि आ सभ तरहें आश्वस्त भेलाक बादे आगु बढ़लाह । हमहुसभ ट्रेनसँ उतरि गेलहुँ । महात्माजीक ठाठ-बाट भरि रस्ता मोन पड़ैत रहल ।

रेल यात्राक एकटा  मनोरंजक अनुभव भेल रहए जखन हम गरीबरथमे आनंद विहारसँ मधुबनी जाइत रही । ई ट्रेन सोझे गाम पहुँचा दैत छलैक,सामान्यतः विलंब नहि होइत छलैक, टिकट अपेक्षाकृत आसानीसँ आ एसी सेहो रहैक तेँ गाम जेबा काल एहि ट्रेनमे यात्रा होइते रहैत छल । हम जेना-तेना अपन-अपन शायिकापर बैसि गेलहुँ । थोड़े कालक बाद ट्रेन अपन गति पकड़लक । डिब्बामे दिल्लीसँ गाम लौटि रहल कतेको  युवक सभ छलाह । सभक हाथमे मोबाइल आ ताहिमे चलैत भोजपुरी गाना । जकरा जतेक जोरसँ मोन होइक ततेक जोरसँ बजा रहल अछि सौंसे डिब्बामे तरह-तरहक संगीत बाजि रहल संगीत चलि रहल छल । कुलमिला कए ओ संगीत नहि एकटा कोलाहलक रूप धए लेलक । लगैत छल जे कान फाटि जाएत । जहन बर्दास्तसँ बाहर भए गेल तँ एकगोटेकेँ टोकलिऐक-

कनी आबाज कम कए दहक । कानमे झर पड़ि रहल अछि ।

से किएक?  हम कोनो टिकट नहि लेने छी । हम अपना सीटपर बजा रहल छी । एहिमे अहाँक आपत्ति करबाक कोन अधिकार?”

चारूकात ओकरेसन लोक भरल रहैक । तेँ बेसी बजनाइ ठीक नहि बुझाएल । चुप्प भए गेलहुँ । बहुत मोसकिलसँ समय कटल। घंटा भरिक बाद जखन टिकट चेकर अएलाह तँ हुनका सभटा बात कहलिअनि । ओ ओकरापर बहुत जोरसँ तमसेलखिन तखन जा कए मोबाइलक नाच-गानसभ बंद भेल । जानमे -जान आएल । एहि यात्राक बाद गरीबरथसँ यात्रा केनाइ छोड़ि देलहुँ ।

एकबेर हम  नई दिल्लीसँ मधुबनी प्रथम श्रेणी एसीमे जाइत रही छपरामे एकटा यात्री ओहि मे हमरासभ लग पहुँचलाह । ओहिसँ पहिने ओहि कुपेमे हमही असगरे रही । मुजफ्फरपुरसँ निकललाक बाद ट्रेनक गति बहुत मंद होबए लागल । एक- एक टीसनपर ठाढ़ भए जाइत छल आ आगु घुसकबाक नामे नहि लैत रहैत छल । मुजफ्फरपुरसँ दरभंगा पहुँचबामे ओहि ट्रेनकेँ सात घंटा समय लागि गेलैक । बीचमे ओहि यात्रीसँ गप्प होइत रहल । ओ छपरामे पुलिस विभागमे डीएसपी छलाह । एतेक भारी अधिकारी छलाह ओहो पुलिसमे तखन टिकट लेबाक कोन काज? ओ कहलाह जे छपरामे काज करैत छथि आ डेरा छनि दरभंगामे । तेँ ओ बेसी काल ओहि ट्रेन सँ जाइत-अबैत रहैत छथि । प्रथम श्रेणी एसी खाली रहैथ छैक तेँ ओही डिब्बामे यात्रा करैत छथि । से तँ बुझलहुँ । मुदा आश्चर्य भेल जे जखन साल-डेढ़ सालक बाद फेर ओही ट्रेनसँ हम जाइत रही तँ प्रथम श्रेणी एसीक कुपमे छपरामे ओ हमरा फेर भेटि गेलाह । हम हुनका चिन्हि गेलिअनि आ कहबो केलिअनि जे पछिला बेर अहाँ एही ट्रेनमे हमरा भेटल रही । एहि बातपर ओ हँसैत कहलाह जे आब ओ सेवानिवृत्त भए गेल छथि आ किछुदिनक बाद ओ दरभंगे रहए लगताह । तखन हुनका ओहि ट्रेनक चक्कर छुटि जेतनि ।

एहन साइते केओ होएत जकरा रेलयात्रासँ जुड़ल रोमांचकारी अनुभव नहि भेल होइक । चाहे रेलक टिकट लेबा काल ,वा रेलमे चढ़बा काल वा चढ़ि गेलाक बाद मुदा कतहु-ने-कतहु किछु -ने- किछु अविस्मरणीय घटित होइते रहैत अछि । गोटैक बेर तेहन सहयात्री भेटि जेताह जे रस्ता भरि हँसति-हँसति पेट फुलि जाएत । कहिओ एहनो सहयात्रीसँ भेंट भए जाइत अछि जे एको क्षण बिना झगड़ाक नहि बितैत अछि । रेल यात्रा करबाक उद्येश्य सभक सभरंग होइत छैक । केओ विद्यार्थी छुट्टीक बाद अपन कालेज जा रहल छथि तँ केओ इलाज करबाक हेतु सहरक अस्पताल जेताह । ककरो बिआहक बरिआती जेबाक रहैत छैक तँ ककरो तीर्थ यात्रा करबाक रहैत छैक । अस्तु,नानाप्रकारक उद्येश्यक लोकसभ एकहि रेलसँ यात्रा करैत रहैत छथि । मुदा सभक उद्येश्यमे ई समानता रहैत छैक जे यात्रा सुगम होइक,रेल समयपर गंतव्य स्थानपर पहुँचि जाइक ,रस्तामे कोनो कष्ट नहि होइक । आब ई तँ एकटा संयोगे होइत छैक जे ककर यात्रा केहन होइत छैक । ओना आब तँ रेलसभक हिसाब-किताब बहुत सुधरि गेल छैक,बहुत रास रेलसभ समयपर  चलैत अछि,दुर्घटना कम सँ कम होइत छैक । मुदा छैक तँ अले-कलक विन्यास । तेँ लाख प्रयत्नक अछैतो कैकबेर लोक संकटमे पड़ि जाइत अछि । कैकबेर तँ जान बचेनाइओ पराभव भए जाइत छैक । से जे होउक मुदा तेँ लोक रेल यात्रा छोड़ि देत से तँ संभव नहि छैक । जीवन छैक तँ नीक बेजाए लगले रहतैक । तेँ लोक  अपना भरि संभव  प्रयत्न करैत अछि जे यात्रा मंगलमय होइक । यात्रा चाहे कोनो ट्रेनमे करैत होइ ,कोनो किलासमे करैत होइ मुदा ई बात ध्यान राखब जरूरी थिक जे यात्रा कए रहल छी,ट्रेनमे बैसल छी ,घरमे नहि छी । बेसक अहाँकेँ आरक्षण होबए मुदा आनो यात्रीसभक यात्रा ओतबे महत्वपूर्ण रहैत अछि जतेक अपन । तेँ आपसी सहमति आ सहयोगक भाव रहलासँ यात्रा बेसी सुखकर भए सकैत अछि ।

सुबिधा-असुबिधाक गप्प जौँ छोड़ि देल जाए तँ कुल मिला कए ट्रेन यात्रा बहुत शिक्षाप्रद भए सकैत अछि । बहुत किछु सिखबाक,जानबाक स्वतः आ स्वभाविक अवसर भेटैत अछि। एहिक्रममे स्वर्गीय संत प्रभुदत्त व्रह्मचारीजीक रेलयात्राक चर्च बहुत प्रासंगिक अछि । एकबेर ओ ट्रेनसँ किछु संतसभक संगे दक्षिण भारतक यात्रापर जाइत रहथि । ओहि समयमे ओ मौन लेने रहथि । तेँ सहयात्रीसभसँ गप्प नहि कए पाबथि । संयोगसँ किछु सहयात्रीसभक संगे सीटक हेतु विवाद भए गेल । व्रह्मचारीजी मौनमे हेबाक कारण किछु बाजथि नहि । मुदा ओ सभ अंट-संट बजैत रहल । व्रह्मचारीजीक संगीसभ अपना भरि हुनका सभके बहुत बुझओलखिन मुदा तकर कोनो असर नहि भेल । सहयात्रीसभक आक्रमकता बढ़िते गेल । ओ सभ व्रह्मचारीजीक माथक केस पकड़ि कए खीचए लगलाह । कैकटा केस उखरि गेलनि । एहि कारणसँ हुनका माथमे बहुत दर्द होबए लगलनि । मुदा व्रह्मचारीजी अवाक भेल सभटा सहैत रहलाह । किछु कालक बाद हुनकर गंतव्य टीसनपर रेल ठाढ़ भेल । हुनकर स्वागत हेतु बहुत रास लोकसभ टीसनपर आएल छल । आब हुनकर सहयात्रीसभकेँ हुनकर असली परिचय पता लगलनि । ओसभ बहुत दुखी भेलाह । वारंबार हुनकासँ क्षमा मागि रहल छलाह । मुदा आब अफसोच केलासँ की होइत? जे हेबाक छल से भए गेल छल । व्रह्मचारीजी बिना किछु बजने रेलसँ उतरि अपन शिष्यसभक संगे आगु बढ़ि गेलाह । ओ तँ पहुँचल संत चलाह,सभकिछु बिसरि गेल हेताह । मुदा सामान्य आदमी रहैत तँ एहन घटनाक बाद मोकदमा करैत, थाना -पुलिस लग जाइत । अपनो परेसान होइत आ सहयात्रियोकेँ करैत  

असल मानेमे ई जीवनो एकटा रेल यात्रा सन थिक । रंग-विरंगक लोक, नाना प्रकारक स्थानसँ जाइत हमसभ अंतमे अंतिम टीसनपर पहुँचि जाइत छी आ तकर बाद सभकिछु एतहि छोड़ि जाइत अछि । इएह थिक जीवन ।


4.7.2020

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Life is an opportunity   Millions of people have come and gone but nobody remembers them. Only a few persons like Vyas, Shankarachary,Vi...