शनिवार, 29 जुलाई 2017

भूमिका





 


भूमिका



१२ नवम्‍बर २०१६ कार्तिक शुक्ल त्रयोदशीक सायंकाल पू. माता दयाकाशी देवीक देहावशानक बाद मोन तेतेक दुखी ओ अशान्‍त भऽ गेल जेकर वर्णन असम्‍भव। लगभग चारि मास धरि राति-राति भरि निन्न नहि भेल। कहियो काल भोरुपहरमे आँखि लगैत छल, ओहो थोड़बे कालक लेल। सगर राति ओहिना माने टकटकीए-मे...। सम्‍पूर्ण दिनचर्या अस्‍तव्‍यस्‍त भऽ गेल। एहेन मानसिक स्‍थितिसँ उवरबामे ऐ आलेख सबहक सहारा भेटल। ई आलेख सभ हमर जीवनक बेकतीगत अनुभव ओ सोचपर आधारित अछि। भऽ सकैए हम जे अनुभव कएल वा तेकरा लिखबाक जे प्रयास कएल, बहुतो गोटे ताहिसँ ओही क्षेत्रमे, ओही विषयपर श्रेष्‍टतर होइथ।

गाम-घरसँ लऽ कऽ भारतक राजधानी–दिल्‍ली–धरिक प्रवासक क्रममे अनेकानेक तरहक घटना घटल, अनेकानेक बेकती सभसँ मदैत भेटल, अनेको लोकक सहयोगसँ जीवनमे बढ़बाक अवसर प्राप्‍त भेल। ऐ क्रममे केतेको बेकतीक चर्च प्रस्‍तुत पोथीमे भेलो अछि, आ केतेको गोटे छुटबो केलाह। जीवनक यात्रामे जे जेतए आ जइ रूपे भेटला हम हुनकासँ किछु-ने-किछु सीखबाक प्रयास कएल। एहेन अनेको लोक छैथ जे एकतरफा अपन विचार तथा काजसँ मदैत करैत रहला, हम ओइ सभ बेकतीक प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्‍यक्त करैत स्‍पष्‍ट कऽ रहल छी जे ऐ पोथीमे बहुत रास बात छुटि गेल अछि। भऽ सकैए आगाँ ओइ छुटल प्रसंग सबहक वर्णन करबाक सौभाग्‍य भेटए आ हम ओइ सभ प्रसंगकेँ क्रमश: समावेश कऽ सकी।

शुरूक २५-२६ वर्ष हम गामेमे वा गामक आसेपासमे रहलौं। पछाति भारत सरकारक केन्‍द्रीय सचिवालय सेवामे नौकरी भेलाक बाद दिल्ली ओ गामक बीच तारतम्‍य बैसाएब ओ बनौने रहब, क्रमश: कठिन होइत चल गेल। यद्यपि गामपर पू. मायकेँ रहबाक कारण गामक आबा-जाही निरन्‍तर बनल रहल। कालक्रमे हमर तमाम मित्रमण्‍डलीक मत छल जे सेवा निवृत्तिक बाद दिल्‍ली वा दिल्‍लीक आसे-पास रहब बेसी नीक। परिवारोमे सभ बेकतीक एकमतसँ यएह राय छल। ओना, लगभग चालीस बर्खक बाद आब दिल्ली घर जकाँ भऽ गेल अछि। बच्‍चा सभ अहीठाम छैथ। सभ सुविधा अहीठाम अछि, सेवा निवृत्तिक पछातियो ओहिना व्‍यस्‍तता बनले अछि। दिल्‍लीमे एतेक दिन रहलाक बादो गाम-घरक उद्वेग तँ अबिते अछि। रहि-रहि कऽ घटित घटना क्रम सभ बिजलोका जकाँ माथमे चमैक जाइत अछि। चमकबो केना ने करत, आखिर अपन लोक तँ अपने होइत अछि किने, अपन गाम अपने होइत छै किने। आ एकर कोनो विकल्‍पो तँ नहियेँ होइ छइ।

ऐ पुस्‍तकक विभिन्न आलेखमे यथासाध्‍य बिना किनको कष्‍ट देने अनेको घटना-क्रमकेँ प्रेषित करबाक प्रयास कएल अछि। तथापि जँ केतौ कोनो रूपे किनको कनिक्को मनमे आक्षेप बुझबामे आबए तँ ओ मात्र संयोग भऽ सकैत अछि, तथापि क्षमा चाहब।

हमर समस्‍त आलेखक प्रथम पाठक हमर पत्नी श्रीमती आशा मिश्रक निष्पक्ष राय सँ बहुत मदति भेटल । प्रत्येक आलेखके ओ धियानसँ पढलथि एवम् ओहिमे   गुणात्मक सुधार केलथि, जइसँ ऐ आलेख सभकेँ सही दिशा भेटल ।हुनकर अभूतपूर्व योगदान अछि ।ऐ पोथीक Forward लिखनिहार डॉ. विनय कुमार चौधरीजी आर.एम.कॉलेज सहरसाक समाजशास्‍त्र विभागक प्रोफेसर छैथ, हमर अभिन्न मित्र, शुभचिन्‍तक छैथ। ओ स्‍वयंमे एकटा संस्‍था छैथ। सहरसामे रहि केतेको समाजिक काजसँ जुड़ल छैथ। अनेको पोथीक लेखक छैथ। हुनका प्रति आभार जे ओ Forward लिखबाक कष्‍ट केलैन। हम मैथिलीमे लिखी ऐ लेल डॉ. जयकान्‍त मिश्रजी बहुत बेर कहैत रहै छला। हलॉंकि प्रसंगवश ई बात कएकटा आलेख सभमे विस्‍तारसँ आएलो अछि। वर्तमानमे हमर ग्रामीण ओ मित्र डॉ. कमला कान्‍त भण्‍डारी तथा डॉ. कैलास कुमार मिश्र निरन्‍तर उत्साहित करैत रहलाह। ऐ पोथीक कल्‍पना किन्नौं साकार नहि होइत जँ श्री उमेश मण्‍डलजी (बेरमा, निर्मली) धनधोर परिश्रमक संग हमर हस्‍तलिखित पाण्‍डुलिपि सभकेँ स्‍वच्‍छ प्रति प्रस्‍तुत करबामे सुलभ नहि भऽ सकितैथ। मैथिली भाषाक हुनकर गहन ज्ञानक लाभ ऐ आलेख सभकेँ परिस्‍कृत करबामे भेटल, ऐ लेल  हम हृदयसँ धन्‍यवाद एवम्‍ आशीर्वाद दइ छिऐन।

अन्‍तमे माता-पिता एवम्‍ समस्‍त श्रेष्‍ठ जनकेँ सादर प्रणाम करैत ई पोथी अपने लोकनिक सम्मुख प्रस्‍तुत करैत अपार हर्ष भऽ रहल अछि।


सादर...।




  रबीन्द्र नारायण मिश्र

ग्रेटर नोएडा, २५ जुलाई २०१७























पू. स्वर्गीय माता दयाकाशी देवीक

स्‍मरणमे ई पोथी सादर ससिनेह समर्पित



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