ग्राम यात्रा मार्च २०२६
कहि
सकैत छी जे गाम जाएब कोन बात भेलैक जे बेर-बेर ओही विषयपर लिखल जाए।से अहाँ सोचि
सकैत छी।मुदा जीवन सभक लेल एक रंग नहि होइत छैक।कोनो बात ककरो लेल बहुत मामुली भए
सकैत छैक,मुदा ओएह घटना ककरो लेल जानलेबा बनि जाइत छैक।तखन? कहबाक बात ई जे हमरा
लेल गामक यात्रा सभ दिनसँ विशेष अनुभव दैत रहल अछि।सन् १९७७मे पहिल बेर दिल्लीमे
नौकरी शुरू करबाक समयसँ आइ धरि ई क्रम कोनो-ने-कोनो रूपमे चलिते रहल अछि। एहि
बीचमे हम युवकसँ बृद्ध भए गेलहुँ।बच्चासभ प्रौढ़ भए गेलाह।पोता-पोती सभ से आबि
गेलथि। मुदा समय? ओ तँ अपना हिसाबे चलिते रहल।की गाम आब ओएह अछि जे पहिने रहए जखन
हम नेना रही,जखन युवक भए गेल रही आ आब? ई संभव नहि छैक। दुनिआ परिवर्तनशील अछि,सभ
किछु निरंतर बदलि रहल अछि।परिस्थिति,मानव स्वभाव,सामाजिक परिवेश सभ किछु बदलि रहल
अछि तखन मनुक्ख कोना पाथर जकाँ अटल रहि सकत?
सबाल
ई नहि अछि जे गाम गेलासँ के भेटताह,के नहि
भेटताह? पहिने ओहिठाम चली तँ। यात्राक आनन्दे अपना आपमे बहुत महत्वपूर्ण होइत
अछि।यदि से प्राप्त भए गेल तँ आर जे होएत ,नहि होएत से भेल ऊपरी,बोनस।पछिला बेर
जखन हमसभ गाम गेल रही तखन दिआबातीक समय रहैक।गाममे अपन नवनिर्मित घरमे दीप जरेबाक
रहैक। ताहि लेल हमसभ पूरा तैयारी कए लेने रही। थोड़बे दिनक बाद छठि पाबनि रहैक।
अपना ओहिठामक लोकसभ छठिमे गाम अबैत रहथि।
मुदा हमसभ ओही समयमे वापस भए गेल रही। कैक गोटे टोकबो केलथि। दरभंगा टीसनपर सरकार
आगन्तुकलोकनिक लेल बड़काटा सामियाना लगओने छल। विशेष ट्रेनसभ चलाओल गेल छल। मुदा
हमसभ गाममे पन्द्रह दिनरहलाक बाद वापसी ट्रेनसँ दिल्ली चलि आएल रही। मुदा तखनहि
सोचि लेने रही जे अगिला बेर गाम जाएब तँ एकमास रहब। असलमे पाबनिमे गामसँ बेसी
ग्रेटर नोएडामे अपन घरमे रहब बेसी नीक लगैत अछि।कारण एहिठाम बच्चासभ संगमे रहैत
छथि। हुनका लोकनिकेँ कुदैत,फनैत देखि मोनमे आनन्द होइत अछि।से बात आब गाममे नहि
रहि गेल छैक।अस्तु, हमसभ फगुआक बाद १०
मार्च २०२६क बिहार संपर्क क्रान्ति एक्सप्रेससँ बिदा भेल रही।
नओ
मार्च २०२६क विहार संपर्क क्रान्तिसँ हमरासभकेँ जेबाक छल। ताहि लेल हमसभ दू मास
पहिने टिकट कटा लेने रही। हमरा दुनू बेकतीक द्वितीयश्रेणी एसीमे नीचाँक शायिका
आरक्षित छल।हमसभ ओहि दिन सही समयपर
ट्रेनमे बैसि गेल रही।ट्रेन सही समयपर खुजिओ गेलैक। असलमे एहि ट्रेनक इएह विशेषता
छैक जे ई समय पर चलैत छैक आ समयपर भोरे साढ़े नओ बजेक आसपास दरभंगा पहुँचा दैत छैक।
ओहिठामसँ घंटा भरिक भीतरे गाम पहुँचि सकैत छी।ओना दिल्लीसँ दरभंगाक लेल हबाइ जहाजक
सुविधा सेहो आब भए गेल छैक। मुदा ट्रेन यात्राक आनन्द अलग होइत छैक। ई बात हमर
सहयात्री सेहो बजैत रहथि। ओ रोसड़ाक वासी छलाह। ओहिठाम हुनकर दूटा नामी होटल चलैत
छनि। एकटा दोसर सहयात्री समस्तीपुरक आसपासक गामक छलाह। एहि तरहेँ हमसभ चारि गोटे ओहि
ठाम बैसल रही। हुनका लोकनिक शायिका ऊपरका छलनि। तथापि,दिनुका समयमे तँ सभ गोटे
बैसले रही।आपसमे गप्प-सप्प करैत समय नीकसँ बीति रहल छल।
जेना-जेना
समय बीति रहल छल,ट्रेनक गति बढ़िते जा रहल छल।लागि रहल छेना ओ रेल लाइनपर सँ छड़पि
कए उड़ए लागत।खिड़कीसँ बाहर देखू तँ गजबकेँ दृश्य देखाइत। चारू कात,खेतसभमे गहुमक पाकल-पाकल
झाबासभ।कतहु-कतहु नील गाएसभक झूंड सेहो देखा जाइत।आब युरोप जकाँ पवनचक्कीसभ सेहो
अपनासभक बाधमे देखाइत। ट्रेनक भीतरक वातावरण कम मनोरंजक नहि छल। रहि-रहि कए तरह-तरहक
सामानसभ बेचैत फेरीबलासभ। दही,चाह,काफी,पानि,बिस्कुट,नमकीन
बेरा-बेरी आबि रहल छल,जा रहल छल। हमसभ दही बलाक अबाज सुनि कए ओकरा रोकलिऐक-
“की
रेट छै?”
“चालीस
रूपया।”
हम
हुनका इसारासँ पुछलिअनि-
“अहूँ
लेबै?”
ओ
मना कए देलथि।हम एकटा दहीक कप देबाक लेल कहलिऐक।ओकरा एक सए रूपयाक नोट देलिऐक।ओ
साठि टाका वापस कए देलक।तकर बाद ओ चलि गेल।हम दहीक कपपर लिखल दाम पढ़लिऐक। लिखल रहैक-
“अधिकतम
मूल्य-पैंतीस रूपया।”
हमरा
भेल जे ओ पाँच रूपया बेसी लए लेलक। बात पाँच रूपयाक नहि छलैक।यदि ओ एहिना आरो
यात्रीसभकेँ बेसी लैत रहत तँ कतेको गोटेकेँ क्षति हेतैक।कनी कालक बाद ओ दोबारा
देखाएल।ओकरा देखिते हम कहलिऐक-
“दहीक
दाम पैंतीस रूपया लिखल छैक।तखन तूँ हमरासँ चालीस रूपया किएक लेलह?”
ओ
हमर बात सुनलक आ आगू बढ़ि गेल जेना किछु सुनबे नहि केने होअए।
कनी
कालक बाद टिकट चेकर अएलाह।हम हुनका टिकट देखेलाक बाद दहीक दाम बला गप्प कहलिअनि। मुदा ओहो ई बात सुनि
लेलाह।तकर बाद हम अपन मोबाइल फोनक रेलवन ऐपपर सिकाइत केलहुँ। तकर बाद तँ धराधर
ठेकेदार पहूँचल। ओ गप्प कइए रहल छल कि दही बला सेहो आबि गेल।कहलक-
“हम
तँ कहने रही चाचा।खुदरा पाइ नहि छै।की करिऐ?कनी कालक बाद हम अपने दए जाएब।अहाँ
कहलिऐक-“कोनो बात ने बेटा।”
ठीकेदार
ओकर बातक सहमतिमे बुझाएल।हम कहलिऐक-
“गलत
बाजि रहल छह।ने तूँ हमरा चचा कहलह,ने हम तोरा बेटा कहलिअह।तूँ तँ हमर बात सुनि कए
सोझे चलि गेल छलह।”
दही
बला हमरा दस रूपया देलक।हम ओकरा पाँच रूपया वापस कए देलिऐक। तकर बाद ओ बेर बेर
एतबे कहए जे कागजपर फीडबैक लिखि दिऔक।एही बीचमे एकटा फोनो आएल-
“अहाँक
सिकाइति निपटि गेल ने।कनी फीडबेक नीक दए देबैक।”
“किछु
नहि भेलै।हम तँ तखनसँ खाली एतबे सुनि रहल
छी जे फीडबैक नीक दए देबैक।”
से
कहि हम फोन काटि देलिऐक।दही बला माहौल देखि खसकि गेल।
ठेकेदार
फेर नुरिआइत आएल।
“फीडबैक
दए दितिऐक ने।”
हम
जखन गाम पहुँचि जाएब,तखन सभ बातक ध्यान राखि फीडबैक पठा देबह।ताहिसँ पहिने किछु
नहि।यदि तणग करबह तँ ओहि फीडबैकमे ईहो बात लीखि देबह जे सिकाइत केलाक बाद सभ गोटे
मिलि कए खाली फीडबैक,फीडबैक चिचिआ रहल अछि।
आखिर
ओ चलि गेल।
कनी
कालक बाद ठेकेदार ओकरा फेर पुछलकैक-
“फीडबेक
देलकौ कि नहि?”
“जाए
ददहक।बड्ड रद्दी आदमी बुझाइत छै।”
हम
अपने कानसँ ओकर वक्तव्य सुनि दंग रही।
कनी
कालक बाद चाह बला आएल।ओकरा लगमे कैक तरहक चाह रहैक। हम ओकरा दू कप आद बला चाह
देबाक लेल कहलिऐक।
“चाहक
दाम कतेक छैक?”
“बीस
रूपयामे एक कप।दू कपक चालीस रूपया।”
हम
ओकरा चालीस रूपया दए देलिऐक।ओ चलि गेल।हमसभ चाह पीबि लेलहुँ। तकर बाद मोन भेल जे
रेलवेक रेटलिस्टमे एकर दाम देखिऐक।बहुत रास सामानसभक भाओ देल रहैक। मुदा आदबला
चाहक दाम देले नहि रहैक।चाह बला जखन फेर आएल तँ हम पुछलिऐक-
“रेलवेक
सूचीमे तँ चाहक दाम मात्र दस रूपया लिखल छैक?”
“जेहन
चाह लेबैक तेहने दाम लागत ने।”
“मुदा
तूँ चाहक पर्ची किएक ने दैत छहक?”
“किएक
ने देबै।जे मंगै छै तकरा दै छिऐ।ओना कतेक के दैत रहबै।”
ओ
जेबीमे हाथ देलक आ दूटा छापल परची हमरा लग खसा देलक।
“मुदा
ई कहह जे चाह आधे कप किएक दैत छहक?दामो बेसी आ चाहो आधा?”
एहि
बातक हमर सहयात्री लोकनि सेहो समर्थन केलनि। ओ कहलक-
“बेसी
पानि देबै तँ चाहक स्वाद बेकार भए जाएत।ओना
अहाँक मरजी।”
आगूसँ
ओ भरि कप चाह देनाइ शुरू केलक। सहयात्री लोकनिकेँ सेहो तकर फएदा भेलनि। एहि तरहेँ
समय बीति रहल छल।क्रमशः जेना-जेना सहयात्री लोकनि आपसमे गप्प-सप्प करए
लगलथि,यात्रा आर मनोरम होइत गेल।
नीचाँक
दुनू शायिका हमरा दुनू बेकतीक छल। मुदा दिनक समयमे ऊपरको यात्रीसभ नीचे बैसल रहलाह।
ओहिमे सँ एकटा रोसड़ाक प्रसिद्ध होटल व्यवसायी छलाह। हुनकर खिस्सा बहुत रमनगर अछि।
ओ अपन परिचय दैत कहालह जे ओ पहिने ओ कोनो निजी नौकरी करैत छलाह। हुनकर पटिदार
सरकारमे कोनो पैघ अधिकारी रहथिन।दियादी कुन्नहक कारण हुनका नौकरीसँ निकलबा देलखिन। तकर बाद ओ गाम वापस आबि गेलाह।
जेना-तेना किछु टाकाक जोगार केलाह आ एकटा भोजनालय शुरू केलाह। ओहिठाम शुद्ध घीमे
बहुत उत्तम भोजनक व्यवस्था रहैत छल। गुणात्मक दृष्टिए बहुत उत्तम रहबाक कारण ओ भोजनालय
जल्दीए प्रसिद्ध भए गेल। ओहिठाम लोकसभक पाँति लागल रहैत छल। देखाउसमे अगल-बगल
कैकटा भोजनालय खुजल।मुदा ककरो चललैक नहि। जल्दीए ओ एकटा आर भोजनालय खोलि लेलनि।
दुनू भओजनालय इलाकामे प्रसिद्ध भए गेल। क्रमशः ओ आर जमीन कीनि कए रहबाक लेल होटल
सेहो खोलि लेलनि। आब तँ ई हाल छनि जे ओहिठाम लोककेँ भोजन करबाक लेल आ रहबाक लेल
जगह नहि भेटैत छैक। समय-समयपर ओ दिल्ली आ दोसरो ठाम जाइत रहैत छथि। मुदा हुनका
हबाइ जहाजसँ यात्रा करब पसिंद नहि छनि। ओ ट्रेनेसँ बेसी यात्रा करैत छथि।
“हबाइ
जहाजमे किछुओ देखबाक अवसर नहि भेटैत छैक। बैसू आ उतरि जाउ।ट्रेनक यात्रा बेस
मनोरंजक होइत अछि। एक सँ एक लोकसँ भेंट-घाँट होइत छैक। समय नीकसँ कटि जाइत छैक।
गप्प-सप्पमे ओ बहुत जानकारी देलनि। हुनकर कहबाक रहनि जे होटलक भोजन स्वास्थवर्धक
नहि होइत अछि। यद्यपि ओ स्वयं दूटा होटलक मालिक छथि,मुदा होटलक भोजन साइते कहिओ
करैत होएताह। होटलक पनीरक बनल तरकारी तँ जहर होइत अछि। कदापि नहि खएबाक चाही।”हुनकर
कहबाक रहनि जे बजारमे उपलब्ध पनीर सही भइए नहि सकैत अछि। कारण ओकरा सस्ता करबाक लेल
ओहिमे बहुत तरहक मिलाबट कएल जाइत अछि। अस्तु,होटलक ,अथवा बाहरक पनीर नहि कीनबाक
चाही,ने खेबाक चाही।
हमरासभक
संगे दोसर सहयात्री छलाह समस्तीपुर लगक कोनो गामक। ओ दिल्ली अबैत-जाइत रहैत छथि।
हुनकर काजे तेहने छनि। ओ अपन इलाकासँ मजदूरसभकेँ दिल्लीमे काज दैत छथिन। दिल्लीक ठीकेदारसभ हुनकर संपर्कमे
रहैत छनि। जखन जतेक,जाहि प्रकारक लोकक काज भेलनि,तखन ओकर व्यवस्था ओ कए दैत
छथिन।तकर इबजमे हुनका कमीशन भेटैत छनि।एहने किछु काजसँ ओ दिल्ली गेल रहथि आ आब गाम
वापस भए रहल छथि। मुदा रस्तेमे एकटा तेहन समाचार भेटलनि जे मोन व्याकुल कए देने
छनि। गाममे घरसँ श्रीमतीजी फोन केने छलखिन।केओ कैक कठ्ठा गहुन काटि लेलकनि अछि।
हुनका अपन दिआदेपर सक छलनि।खिछु झंझटि चलि रहल छलनि।मौका देखि कए जखन ओ गामसँ बाहर
छलाह,ओ सभ बिदति कए देलकनि। आब की करताह? ताहिपर मंथन कए रहल छलाह। श्रीमतीजीकेँ
आवश्यक समाद दए चुकल छथिन।गाम पहुँचबाक देरी छनि। तकर बाद हिसाब-किताब सभ चुकता कए
देथिन। ओ वारंबार इएहसभ बाजि रहल छलाह।
हमसभ
रातिमे भोजनक लेल आनलाइन व्यवस्था केने रही। हुनको सएह करबाक मोन भेलनि।मुदा से
केना हेतनि,तकर जनतब नहि छलनि।तेँ हमरा आग्रह केलाह।हम अपन मोबाइलसँ रेलवन एपक
मदतिसँ हुनकर भोजन बुक कए देलिअनि। रातिमे सही समयपर हुनकर पसिंदक भोजन आबि गेलनि।एहि
बातसँ ओ बहुत प्रसन्न रहथि।एहिसँ पूर्व किछु यात्री ट्रेनक भीतरेमे उपलब्ध भोजन
कीननने रहथि। मुदा ओ सभ भोजनक गुणवेत्तासँ
संतुष्ट नहि रहथि।तकर बादे हम हुनका बाहरसँ भोजनक जोगार बतओने रहिअनि जे सफल
रहलनि।
जेना-जेना
राती बीतैत गेल,यात्रीसभ फोंफ काटि रहल छलाह आ ट्रेन भयाओन गतिसँ आगू बढ़िते जा
रहल छल।हमरा निन्न नहि भए रहल छल। हम राति भरि करोट बदलैत रहलहुँ। आब ट्रेन
अन्हरोखे समस्तीपुर पहुँचि रहल छल। दुनू सहयात्री अपन गंतव्यपर पहुँचि गेल छलाह।हमरा लोकनिक आपसी संपर्क सेहो
ओतहि समाप्त भए रहल छल। ओ सभ अपन-अपन सामान सहित ट्रेनसँ उतरि गेलाह। हमहूँसभ आब
एहि बातसँ खुस रही जे दरभंगा आबहि बला अछि। भेल जे एहि बीचमे शौचसँ निवृत भए जाइ।
मुदा शौचालय निरंतर भरले रहैत छल,चाहे एहि कात जाउ कि ओहि कात।आखिर बड़ी कालक बाद
हमरोलोकनिकेँ अवसर भेटल।शौचालयक हाल बेहाल छल। चारूकात पानि छप-छप करैत छल।पानिक
फ्लसकेँ बड़ी जोरसँ दबाउ तँ पानि फुच दए निकलत,से कखन केमहर खसि पड़त कोनो ठेकान
नहि। बेरा-बेरी शौचसँ निवृत भए हमसभ चाह
पीलहुँ।आब थोड़बे कालमे लहेरिआसराय टीसन
आबि जाएत।तेँ हमसभ अपन सामान नीचाँ ऊपर शायिकापर राखि लेलहुँ।पानिक बोतलमे आधा
पानि रहि गेल छल।ओकरा ओतहि छोड़ि देलिऐक। देखिते-देखिते ट्रेन लहेरिआसरायसँ आगू बढ़ि गेल।ट्रेन
लहेरियासराय गुमती टपि गेल। मोन पड़लाह आदरणीय डाक्टर योगानन्द झाजी। हुनकर घर
एमहरे छनि।
“ई
तँ बलभद्रपुर मोहल्ला अछि।हमसभ एहिठाम अबैत-जाइत रही।हमर ससुरक डेरा एतहि छलनि।”
ट्रेन
सीटी दैत-दैत दरभंगा जंक्सनपर पहुँचि गेल।हमरसभक यात्राक अंत भए रहल छल।हमसभ अपन
सामानक संग आब बाहर भए रहल छलहुँ। गाम जेबाक लेल आटो ठीक करबाक क्रममे कैकटा आटो
बला घरि लेलक।आब की करी? पहिने बाहर तँ निकली। सएह केलहुँ।आटोबलासभ जकरा जे मोन
होइक से दाम बता रहल छल।
“हौ,हम
कोनो आनठामक नहि छी। एना किएक कए रहल छह?जे उचित किराया छैक से बाजह।”
आखिर
एकटा आटोबला सात सएमे अड़ेर डीहटोल धरिक लेल तैयार भए गेल।हमसभ ओहिपर बैसि गेलहुँ।आटो
कनीके आगू बढ़ल छल कि एकटा युवक आटोबलाकेँ इसारासँ कटमनी देबाक आग्रह केलकैक। ओ
चालीस टाका देबाक लेल तैयारो भेलैक। मुदा ओकरा एक सए चाही।बस विवाद शुरू भेल। आखिर
ओकरा एक सए देबहि पड़लैक।आटोबला अपन दुखनामा सुनबैत आटोकेँ आगू बढ़ा देलक।
आटो
बला दरभंगा हबाइ अड्डा बाटे हमर गामक रस्ता धेने छल। कतेक सालसँ हमसभ एहि रस्तापर
अबैत-जाइत रहलहुँ अछि। बीचमे तँ ई सड़क बहुत खराप भए गेल रहए।मुदा आब बहुत नीक
स्थितिमे अछि। बीचमे कपिलेश्वर महादेव स्थान आएल। हुनका प्रणाम करैत हमसभ आगू बढ़ि
गेलहुँ। आब आटो रहिका आबि गेल छल। ओतए उतरि सुधाक दूध,दही,चूरा,पेरा,चाहक पत्ती आ
चिन्नी कीनलहुँ जाहिसँ गाम पहुँचलाक बाद चाह पीबाक आनन्द उठा सकब आ जलखैमे
चूरा-दही ।आटो फेर बिदा भेल। आटो बला बेर-बेर दरभंगामे दलाल द्वारा एक सए लेबाक
चर्चा करैत रहैत छल। ओकर इच्छा रहल हेतैक जे हम ओतेक किराया बढ़ा दिऐक। गाम
पहुँचलाक बादो ओ एकर चर्चा केबे केलक।मुदा हम तय किराया दए ओकरासँ फारकत भेलहुँ। कैक
मासक बाद एक बेर फेर हम अपन घर पहुँचि गेल रही।दिन भरि सफाइ चलैत रहल,तहन जा कए ओ
घर रहए जोगर भेल।एहि बीच हमसभ नित्यकर्म
कए आश्वस्त भए अपन घरक चाह पीलहुँ।मोन बहुत हल्लुक लागि रहल छल। यद्यपि ट्रेन यात्रा
कुल मिला कए सुखदे छल,तथापि यात्रामे समय तँ लागिए जाइत छैक,दिनचर्या अस्त-व्यस्त
भइए जाइत छैक।हबाइ जहाजसँ समय कम लगैत छैक ,मुदा ओहूमे कैक बेर अनिश्चितता भए जाइत
छैक,जेना कि पछिला बेर हमरासभकेँ भेल रहए।जे से। आब तँ गाम पहुँचिए गेल रही।
गाम पहुँचलहुँ।
एहिसँ
पूर्व हमसभ अक्टूबर २०२५मे दिआबातीक समयमे गाम गेल रही आ छठिसँ पहिने चलि आएल रही।बीचमे
करीब चारि मास समय बीति गेल। मकानक ऊपरी भागमे काज चलिए रहल छल।नीचाँक भागमे भीतरी
काज भए गेल रहए।तकर बाद मई २०२५मे हमसभ गृहप्रवेश कए लेले रही। ऊपरी भागमे भए रहल काजक कारण नीचाँ पानि टपकैत रहबाक कारण देबालसभ भीजल-भीजल लगैत
छल। सभसँ खराप हालति तँ भनसाघरक छल। लागि रहल छल जेना पानिक पाइप कतहु टूटि गेल होइ।मुदा
हमर भातिज,चंदन,कहलक जे पाइप नहि टूटल अछि।देबाल बहुत भिजि गेल छैक। हबा,रौद लगतैक
तँ अपने सुखा जाएत।नीचाँक टाइलसभ सेहो पानिसँ भीजल छल। घर बंद रहबाक कारण एहन
स्थिति बनल छल। हमसभ जल्दी-जल्दी खिड़की केबाड़ खोललहुँ। पलंग,केबाड़,खिड़कीसभमे
कैकठाम फुफुंद लागि गेल छल। ओकरासभकेँ साफ करओलहुँ।ओछाओनसभ बाहर केलहुँ। ओकरासभकेँ
झाड़ि-पोछि ओछाओल गेल। दिनभरिक प्रयासक बाद घर एहि स्थितिमे आबि गेल जे हमसभ
रातिविश्राम नीकसँ कए सकब।घरमे भोजनो बनेबाक जोगार भए गेल। ताहि लेल जरूरी सामानसभ
चंदन हाटपरसँ आनि देलक।काजबाली यथासाध्य खैत रहल। तथापि,ओकरा अखन बहुत किछु करबाक
रहैक। जे ओ क्रमशः करत। खिड़की,केबाड़,ग्रीलसभमे बाहरी देबालमे प्लास्टर होएबाक कारण सीमेंट लागि गेल छल। ओकरा कैक
दिन धरि साफ कराओल गेल।ताहि लेल चंदन पेंटरक जोगार केलक।मधुबनीसँ लाल मिस्त्री
अबैत -जाइत रहलाह। तखन जा कए घरक काजसभ सही भेल। शुरूक पन्द्रह दिन एहीसभमे बीति
गेल।पन्द्रह दिन आओर रहबाक छल। हमसभ सोचलहुँ जे आब आर बिदति नहि करी।आब किछु
आनन्दो उठाबी।तेँ काजक आर असार-पसार नहि कएल गेल। ओना नव मकानमे तँ काज लगले रहैत
छैक।
एहि
बीच गामेमे ठेलापर तरकारी बेचनिहारसँ संपर्क भए गेल। ओ तेसर दिनक टटका तरकारी दैत
रहताह।हाटपरसँ सुधाक दूध-दही आनि लैत छलहुँ।किछु जरूरी लटगेनासभ सेहो भोरे टहलि कए वापस अबैत काल कीनि
ली।एहि तरहेँ हमरा लोकनिक ग्राम-प्रवास आब सुखद भए गेल छल।
हमसभ
एहि बेर सोचि कए आएल रही जे गाममे एक मास रहब जाहिसँ किछुओ गोटेसँ संपर्क भए
सकए,किछु पुरान लोकसभ जे गाममे रहैत छथि,तिनकासभसँ भेंट-घाँट भए सकए। घरमे जे किछु
विकास काज करब जरूरी छल से करबा सकब। ओना आब जरूरीक सभ सामान हमसभ अपन गामक घरमे
जोगार कए चुकल छी।पहिने सोचने रही जे एसी लगाएब,मुदा आब तत्काल से जरूरी नहि बुझा
रहल अछि। किछु आर सुविधासभक जोगार कालक्रमे जेना-जेना आवश्यक लागत,करैत रहब से
सोचने छी। आगू ईश्वरक इच्छा।
प्रात
भेने भोरे पाँच बजे उठलाक बाद चारूकात अन्हारे छल।कनी कालक बाद टहलबाक लेल बिदा
भेलहुँ।कनीके आगू गेलहुँ तँ प्रबोधजी भेटि गेलाह। दुनूगोटे सड़कक काते-काते थोड़े
काल टहललहुँ।मुदा हमरा सड़कपर टहलबामे डर भए रहल छल। हम ई बात हुनका
कहलिअनि।दुनूगोटे निर्णय केलहुँ जे काल्हिसँ लक्ष्मीपुर बाधमे टहलल करब।
दोसर
दिनसँ हमसभ अपन टहलबाक रस्ता बदलि लेलहुँ। कुटीसँ आगू बढ़ैत लक्ष्मीपुर टोलसँ आगू
जाइत-जाइत हमसभ नागदहक पूलक आसपास पहुँचि जाइत छलहुँ। भोरक समय ,चारू कात खेत,गाछ-बिरिछ
बहुत रमनगर लगैत छल। बाधमे तीनू कातसँ तरह-तरहक लाउडस्पीकरक अबाज सुनबामे
अबैत।नागदह दिससँ संस्कृतक श्लोकसभक प्रसारण होइत रहैत छल। जमुआरी दिससँ भजनसभ
सुनाइत। रस्तामे हमरा टोलक कैकगोटे टहलैत भेटि जइतथि। कैक दिन नागेन्द्र यादबजी
सेहो भेटितथि। नागदह दिससँ कैक गोटे भेटि जइतथि। हम तँ किनको चिन्हि नहि
सकिअनि।प्रबोधजी हुनका लोकनिक बारमे बादमे बतबितथि। बच्चामे हम कैक दिन बाबा संगे
लक्ष्मीपर बाधमे मकइक रखबारी करए,कहिओ धान कटबए जाइत रही। कैकटा पुरान बातसभ मोन
पड़ैत रहैत छल।
चैती दुर्गापूजा
किछु दिनक बाद चैती दुर्गापूजा शुरू भेलैक।पहिने
अपनसभक ओहिठाम चैती दूर्गापूजा बहुत कम ठाम होइत छलैक।धकजरीमे बाबू साहेबसभक कोठीपर
होइत छलनि। एकाध बेर हमहूँ ओतए गेल रही। मुदा आब लक्ष्मीपुर टोलमे भटमाना इसकुल लग
सेहो ई पूजा होइत अछि। नागदहमे तँ होइते अछि। एहि अवसरपर दस दिन धरि माहौल भक्तिमय बनल रहल। लाउडस्पीकरसभपर
भजन-कीर्तन जोर-सोरसँ सुनाइत रहैत छल।अपना ओहिठाम लाउडस्पीकर बजाएब आम बात छैक।
मुदा एहिसँ भए रहल ध्वनि प्रदूषणपर ककरो ध्यान नहि जाइत छैक। भोरक नीरव वातावरणकेँ
अनेरे दुषित करैत चारूकात बजैत लाउडस्पीकरसभ प्रकृति प्दत्त प्राकृतिक सौंदर्यकेँ
नष्ट कए रहल छल। मुदा से के बुझत? बाजा
बजबाक चाही ,ओहो सस्तासँ सस्ता।जकरा जे होएबाक हेतेक से हेतैक।
केओ
कहलक जे भटमाना इसकुल प्रांगणमे भए रहल चैतीपूजाक मेलामे कैकटा गड़बड़ घटनासभ सेहो
घटित होइत रहैत अछि।एहने किछु बात हालेमे भेल रहैक।आसपासक दू टोलक दू भिन्न जातिक
लड़का-लड़की आपसमे गप्प केलक आ गामसँ भागि
गेल।सुनबामे आएल जे बादमे ओ सभ कानूनी रूपसँ बिआहो कए लेलक। इलाकामे एहि लेल किछु
दिन बहुत तनाओ छल। ई होएबाक चाही,ई नहि होएबाक चाही ,होइत रहल।
कोट-कचहरी,थाना-पुलिस पर्यन्तक परिस्थिति उत्पन्न भए गेल। कहाँ दनि ओ सभ बेनीपट्टी
न्यायालयमे सहमतिसँ बिआह करबाक घोषणा केलक आ ईहो प्रमाणित केलक जे ओ सभ वालिग अछि
,समाजक किछु गोटे ओकरासभकेँ प्रताड़ित कए रहल छथि आ हुनकासभकेँ बचाओक लेल पुलिस
सुरक्षा देल जाए।सोचबाक बात अछि जे समाजमे एहन परिस्थिति उत्पन्न किएक भेल? कानून
आ समाज एक धरातलपर नहि चलि रहल अछि,तकरे ई कुपरिणाम बुझना जाइत अछि।
काम क्रोध मद लोभ की जौ लौं मन में खान ।
तौ लौं पण्डित मूरखौं तुलसी एक समान ।।
एहि
बेरक ग्राम यात्राक अंतिम चरणमे हमसभ भोरमे टहलबाक लेल दक्षिण दिसक रस्ता
पकड़लहुँ। तकर एकटा प्रमुख कारण ई छल जे गामक धारक माटि काटि-काटि कए बान्हपर रखि
देने रहैक। तेँ रस्ता तँ बंद भइए गेल रहैक,माटि बहुत महकबो कए रहल छलैक।लोक नाक
मुनि कए ओकरा टपैत छल। मुदा जखन महादेव मंदिर दिस बिदा भेलहुँ तँ बहुत नीक लागल।
कनीके आगू बढ़लापर पुरंदरजीक घर छनि। ओ हमरासभकेँ सामनेसँ जाइत देखि चिचिआ उठलाह।
ततेक आग्रह केलाह जे हमरासभकेँ हुनकर चाह पीबए पड़ल। सिनेहसँ सिक्त ओहि चाहक
स्वादक वर्णन असंभव। चाह पीलाक बाद हमसभ तीनूगटे टहलबाक लेल आगू बढ़लहुँ। कलमे-कलम
रस्ता छल। एक दिस नवनिर्मित घरसभ आ दोसर दिस आमक गाछसभ। ओहमे कैकटा सारासभ सेहो
देखाएल। कलममे केओ बरजिस कए रहल छलाह तँ केओ प्रातः भ्रमण। आगू बढ़लापर महादेव
मंदिर आबि गेल। बहुत पहिने बच्चामे बाबाक
संगे हम ओहिठाम कैक बेर गेल छी। ओहि इसकूलक व्यवस्था समितिसँ ओ जुड़ल छलाह आ तकरे
बैसार होइत छलैक। पौना बला पंडितजी प्रधानाचार्य छलाह।सिमरीक ज्योतिषी सेहो ओतए
कार्यरत छलाह।हमरे गामक डाक्टर सच्चिदानन्द झाजी एहि मंदिरक जीर्णोद्धार करओलनि
,से बात ओतए लिखल देखाएल। आब सूर्योदय भए गेल रहैक। लोकसभ जागि गेल छल। तेँ
टहलबामे एकांतक आनन्द नहि आबि रहल छल। वापसीमे विवेकाजी ( स्वर्गीय घूरन बाबूक पुत्र) सेहो भेटलाह। एकांतक संग-संग प्राकृतिक
दृश्यक बहुलताक कारण एमहर टहलनाइ बहुत सुखद बुझाएल।
भास्करक ग्रामयात्रा
एहि
बेर हमरा लोकनिक गाम गेलाक बाद हमर दुनू
पुत्र सपरिवार गाम जएबाक कार्यक्रम बनओने रहथि। हमर ज्येष्ठ पुत्र,भास्कर २१
मार्चह २०२६क हबाइ जहाजसँ दरभंगा होइत गाम पहुँचलाह। मुदा कोनो कारणवश मोनू(क्षितिज
मिश्र) नहि बि सकलाह। एहिसँ पूर्व ओ सोलह
साल पहिने मायक एकादशी यज्ञमे गाम आएल रहथि। माए बहुत खुस भेल रहए।यज्ञक लेल गाए ओ
कीनि देने रहथिन। ताहि बातसँ माएक प्रसन्नताक अंत नहि छल। फेर सोलह सालक बाद अपन
नवनिर्मित घरमे आबि सोनू (भास्कर मिश्र)
बहुत खुस भेलथि। गाममे बहुत पानि भेल रहैक।रस्तासभमे पानि लागि गेल
छलैक।तथापि,हमसभ गामक ब्रह्मस्थान आ अन्य प्रमुख स्थानसभ हुनका संगे घुमलहुँ। प्रात
भेने उच्चैठ भगवती,भवानीपुर आ पण्डौल सेहो हुनका संगे घुमलहुँ। गाममे किछु बच्चाक दोस्तसभसँ सेहो
हुनका भेंट भेलनि।एक्के दिनक बाद हुनका वापसो जएबाक रहनि। मुदा एतबे समयमे हमरा
लोकनि बहुत रास गप्प-सप्प केलहुँ। हुनको मोन बहुत हल्लुक लागि रहल छलनि। तेसर दिन
भेने ओ हबाइ जहाजसँ वापस दिल्ली चलि गेलाह। निस्सन्देह हुनकर ग्राम यात्रा बहुत
दिनक बाद ओहो बहुत कम समय लेल छलनि,मुदा हमरा सभकेँ बहुत नीक लागल।गाममे घर बनाएब
सफल भेल,से बात हमसभ दुनू बेकती आपसमे बतिआइत रहलहुँ।
लालक योगदान
गाममे
गृहनिर्माणमे मधुबनीक बढ़इ,लालक बहुत योगदान
रहल छल। हुनका बारेमे हम पहिनहु लिखि चुकल छी।मकान बनि गेलाक बादो ओ निरंतर
संपर्कमे रहलथि आ घरक छोट-पैघ काजसभ हमर
अनुपस्थितियोमे करैत रहलथि। एहू बेर हुनका फोन केलिअनि। फोन करिते ओ गाम आबि
गेलाह। तखनसँ जा धरि हम गाममे रहलहुँ ओ अबिते रहलथि आ कैकटा जरूरी काजसभ केलथि।घर
बंद रहलासँ पलंग,केबार,चौकठिसभमे फुफुंद लागि गेल रहैक। तकरा ओ बेरा-बेरी साफ
केलनि आ फेरसँ रंगबो केलनि।बाहरी ओसारापर ऊपर दिस किताव रखबाक लेल रैक
बनओलथि।अंत-अंत धरि ओ अपन योगदान दैत
रहलथि। आजुक समयमे एहन लोक निश्चय बहुत दुर्लभ अछि।
श्रीनारायणजीसँ भेंट
जखन
गामपर व्यवस्था किछु ठीक भए गेल तखन बीस
मार्च २०२६क हमसभ दुनू बेकती श्रीनारायणजीक मधुबनी स्थित घरपर हुनकासभसँ भेंट
करबाक लेल पहुँचलहुँ। एहि बीचमे श्रीनारायणजी अपन बारीमे उपजल तरह-तरहक साग-सब्जी,फलसभ सेहो देखोलनि।
हुनकर दोसर घराड़ीपर नव गेट लागि गेल
छनि,ओहिमे केराक बड़ीटा धर लटकल छै। आर-आर कैक
तरहक चीज-वस्तुसभ ओहिमे रोपल छै,सभ किछु ओ देखओलथि। श्रीनारायणजी आब पूर्ण स्वस्थ
भए गेल छथि। हुनकर श्रीमतीजीसँ सेहो हुनका खूब गप्प भेलनि। हमसभ भरि दिन ओहिठाम
रहलहुँ,गप्प-सप्प केलहुँ,भोजन केलहुँ आ चारि बजे ओहिठाम छोटूआटो बलाक आटोसँ गाम
बिदा भए गेलहुँ। जाइत-जाइत श्रीनारायणजीकेँ सपरिवार अपना ओहिठाम अएबाक आग्रह केलिअनि जे ओ स्वीकार
कए लेलनि।
तीस
मार्च २०२६क श्रीनारायणजी सपरिवार हमरा ओहिठाम ( अड़ेर डीह) अएलथि। हुनकर आगमनक कैकदिनसँ प्रतीक्षा भए रहल
छल। बीचमे हुनका ओहिठाम काजसभ चलि रहल छलनि। हमर घरे लग उपनयन से रहैक। से सभ
देखैत आइ अएबाक हुनकर कार्यक्रम बनलनि।एहिसँ पूर्व ओ गामक घरक गृहप्रवेश
कार्यक्रममे आएल रहथि। भरि दिन गप्पसप्प चलैत रहलैक। बादमे ओसभ बरहाबाली भौजीसँ
भेंट करबाक लेल गेलथि आ ओहीठामसँ मधुबनी चलि जाइत रहलाह।श्रीनारायणजीसँ भेंट
होएब,हुनका ओहिठाम जाएब,हुनकर हमरा ओहिठाम आएब ई सभ कतेक आनन्ददायी छल,तकर वर्णन
करब मोसकिल।चौसठिवर्षसँ लगातार हुनकासँ
एहिना जीवंत संपर्क बनल अछि से मामुली बात नहि थिक। जगदंबा हुनका स्वस्थ रखथुन आ
हमरा लोकनिक सिनेह,संपर्क एहिना बनल रहल से हुनकासँ प्रार्थना।
डाक्टर कीर्तिनाथझा
पछिला
साल जखन हम गाममे मकान बनबैत रही तखने डाक्टर कीर्तिनाथ झाजीसँ कैकबेर संपर्क भेल
छल।ओहो अपन गाममे घर बनबैत छलाह।बीचमे गाम दिस आएलो रहथि । हमरा लोकनिक इच्छा रहए
जे भेंट-घाँट होअए। मुदा से नहि भए सकल। कीर्तिनाथ बाबूसँ पछिला कैकसालसँ संप्रकमे
छी। हुनकर कैकटा यात्रा प्रसंगसभ कोलकातासँ प्रकाशित मैथिली मासिक पत्रिका,मिथिला
दर्शन,मे छपैत रहलनि अछि।से सभ पढ़बाक अवसर भेटल छल। हुनकर व्लागपर समय-समयपर बहुत
ज्ञानवर्धक लेखसभ अबैत रहैत अछि। ओहोसभ हम पढ़ैत रहलहुँ अछि। हमरो कैकटा रचनासभ ओ
पढ़ने छथि आ समय-समयपर अपन मंतव्य दैत रहलाह अछि।स्वाभाविक रूपसँ हुनकासँ भेंट
करबाक जिज्ञासा बढ़िते जा रहल छल। हमसभ मार्चमे एकमास लेल गाम जाएब से जानकारी
हुनका देने रहिअनि।तखने ओ कहने रहथि जे एहि बेर अबस्स भेंट होएत। से सही साबित
भेल। एहि बेर फेर ओ गामक मकानक काजसँ अबाम आएल रहथि।यद्यपि मकानक रंगाइ-पोताइक
काजमे ओ बाझल रहथि,तथापि पलखति भेटितहि ओ एक मार्च २०२६क तीन बजेक आसपास अएलाह। हुनका
अपना ओहिठाम देखि बहुत प्रसन्नता भेल।हमर गामक नवनिर्मित घरक ओ पहिल साहित्यकार
पाहुन छलाह। हमसभ बड़ीकाल धरि समसायिक साहित्यिक विषयपर चर्चा जरैत रहलहुँ। एही
बीच ओ हमर छोटसन साक्षात्कारो अपन मोबाइए फोनपर लेलथि। हुनकर एहि अपनत्व भाओ देखि दंग रहि गेलहुँ। लगभग
डेढ़घंटा धरि हमसभ बतिआइत रहलहुँ। आब हुनका जएबाक छलनि। यद्यपि एहन पाहुनसँ फराक
होएब निश्चित कष्टकर छल,तथापि जतबे काल ओ रहलथि,बहुत सुखद अनुभूति दए गेलथि। हुनकर आगमन आ बिदाइ दुनू बहुत आनन्ददायी आ
स्मरणीय रहल। हुनकर सहृदयताक जतेक प्रशंसा कएल जाए से कमे पड़त।
डाक्टर
कीर्तिनाथ झा आँखिक बड़का डाक्टर छथि। फौजमे कर्नल पदसँ सेवानिवृत्तिक बाद
पांडिचेरी स्थित मेडिकल कालेजमे नेत्र विभागमे प्रोफेसर रहथि। आब बंगलोरमे रहैत
छथि। चिकित्सा क्षेत्रमे व्यस्त रहितो ओ मैथिलीमे निरंतर लिखैत रहैत छथि। चाहे
गामक विषयमे होइक,कोनो यात्रा प्रसंग होइक किंवा मैथिली
साहित्यसँ जुड़ल कोनो समस्या होइक,डाक्टर साहेब निधोख लिखैत
छथि। हुनकर कोनो रचना पढ़ि लिअ ,लागत जेना ओकर एक-एक शब्द
बजैत अछि,खन-खन करैत अछि,मौलिकता आ
विद्वतासँ परिपूर्ण अछि।
हुनकर
प्रमुख प्रकाशित कृति छनि-
१ जड़ि(कविता संग्रह) २००१ ई०
२
किछु पुरान गप्प,किछु नव गप्प(कथा संग्रह) २००५ई०
३
टूटल पाँखि(खलील जिब्रानक अरबी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) -२०१६
४
तुरुवल्लवर कृत कुरलक मैथिली भावानुवाद २०१७ई०
५
गोरैया आ गई (बाल उपन्यास) २०२२ ई०
6.देखल-परेखल (निवंध संग्रह) २०२२ई०
७
लोहना रोडसँ लास वेगस (यात्रा प्रसंग) २०२०ई०
८
कन्नगीक काड़ाक कथा
उपरोक्त
प्रकाशित पोथीक अतिरिक्त कीर्तिनाथजीक अनेक आलेख,संस्मरण,यात्रा प्रसंग,कथा हुनकर ब्लाग फेसबुकपर पढ़ल जा
सकैत अछि।
डाक्टर
कीर्तिनाथ झाक आत्मालाप नामसँ ब्लाग पर ( https://kirtinath.blogspot.com/) डाक्टर
साहेब निरंतर लिखैत रहैत छथि। ओहि ब्लागक परिचयमे डाक्टर साहेब लिखैत
छथि-“कीर्तिनाथक आत्मालाप, आत्ममंथनक क्षणमें हमर मनक दर्पण
थिक ।“स्पष्टतः ब्लागमे ओ समसायिक विषयसभपर अपन बात बहुत स्पष्टतासँ रखैत छथि।
डाक्टर
कीर्तिनाथ झाजी मैथिली भाषा आ साहित्यक अमूल्य योगदान अछि । एहन ओजस्वी आ
प्रतिभाशाली मैथिली लेखकक सम्मान हेबाक चाही।
https://www.facebook.com/photo?fbid=4126002767674703&set=pcb.4126003351007978
कन्नगीक
काड़ाक कथा: पाठकीय प्रतिक्रिया।)
सगर राति दीप जरए
सगर
राति दीप जरए कार्यक्रम २८ मार्च २०२६ कए मधुबनी जिलाक लौकही प्रखण्ड अन्तर्गत नरहियामे
सगर राति दीप जरय कार्यक्रमक आयोजन छल। एहिमे हमरो कथा संग्रह,गाछ बजैत छैक,क
विमोचन होएबाक छल। हमसभ बहुत पहिनहिसँ एहि कार्यक्रममे सामिल होएबाक लेल तैयारी
करैत रही। ताहि लेल टैक्सी ठीक कए लेने रही। ओहि दिन करीब अढ़ाए बजे हमसभ गामसँ
बिदा भेलहुँ। मधुबनी,रामपट्टी होइत झंझारपुर लग अड़रिया संग्राम स्थित मिथिला हाट
पहुँचलहुँ। ओहिठाम भीतर गेलाक बाद ग्रामीण आ सहरक वातावरणक अद्भुत समन्वय देखबामे
अबैत अछि।मिथिला हाटक बीचमे बड़ीटा पोखरि अछि। ओहिमे छोटछीन नाओ सेहो चलैत
देखाएल।पोखरिक चारूकात तरह-तरहक दोकानसभ देखाएल।कैकटा भोजनालय सेहो अछि जाहिमे
मिथिलाक प्रसिद्ध भोजन,जलखैसभ उपलब्ध रहैत अछि। हमसभ तँ भोजन केने रही,तेँ मात्र
लस्सी पीबि सकलहुँ। एकटा दोकानपर मधुबनी पेंटिंग कीनलहुँ। थोड़े काल एमहर-ओमहर
घुमलहुँ आ वापस नरहियाक लेल बिदा भए गेलहुँ।
नरहिया
दिस कार बढ़ले छल कि उमेश जीक फोन आएल।पता लागल जे ओहो जगदीश बाबूक संग जल्दीये नरहिया
पहुँचि रहल छथि। नरहिया पहुँचि कए हमरासभकेँ कार्यक्रम स्थाल तकबामे किछु देरी भेल । ताबत ओ सभ ओतए पहुँचि गेल रहथि।
हमहुँसभ पीठेपर ओहिठाम पहुँचि गेलहुँ।कार्यक्रमस्थानपर किछु परिचितसभ बाहरेमे भेटि
गेलथि। कनीके आगू गेलापर उमेशजी सेहो भेटि गेलथि। जगदीश बाबू सामनेमे बैसल भेटि
गेलथि। अस्तु, हमसभ बहुत जल्दीए ओहिठाम आश्वस्त भए गेलहुँ। कार्यक्रम प्रारंभ
होएबामे किछु देरी भए रहल छल ।कारण मुख्य अतिथि(जे स्थानीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
रहथि) आ हुनकर सहयोगी लोकनि नहि आएल
रहथि।एक बेर जखन कार्यक्रम शुरू भए गेल तँ चलिते रहल। सभागार लोकसभसँ भरल छल।
https://www.facebook.com/photo/?fbid=4123609864580660&set=a.1388340294774311
हमर
मैथिली कथा संग्रह,गाछ बजैत छैक,क
लोकार्पण संपन्न भेल।लोकार्पणक समय संगमे वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय जगदीश प्रसाद
मंडलजी,श्री सत्य नारायण साहुजी(सेवानिवृत्त महाप्रवंधक) ,प्रसिद्ध साहित्यकार आदरणीय श्री राज कुमार मिश्रजी एवम् कार्यक्रमक
संचालक डाक्टर श्री उमेश मंडलजी ,(व्याख्याता मैथिली )सेहो
उपस्थित रहथि।
हमसभ साढ़े दस बजे राति धरि ओहिठाम रहलहुँ। एहि
बीचमे जगदीश प्रसाद मण्डलजीसँ गप्प करबाक सेहो अवसर भेटल। अतिशय सरल आ सहज
व्यक्तित्वक लोक छथि ओ। विनम्रताक प्रतिमूर्ति जगदीश बाबूसँ भेंट एहि कार्यक्रमक सभसँ
पैघ उपलब्धि छल।श्री राज कुमार मिश्रजी आ डाक्टर विनीत कुमार लाल दासजीसँ पहिल बेर
एहीठाम भेंट भेल।श्री लालदेव कामतजीसँ सेहो भेंट भेल। पहिनहु हुनकासँ भेंट भेल छल।ओ
अपन नवका पोथी देलनि।ओ हमर कैकटा पोथीसभक समीक्षा लिखने छथि। तेँ हुनकासँ
गप्प-सप्प कए बहुत आनन्द भेल।एहि कार्यक्रमक प्रथम सत्रक अंतमे मांगेलाल हनुमानमल
चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा हमरा साहित्यकार सम्मानपत्र सेहो प्रदान कएल गेल।
ओना हमरा एहिठाम भरि राति रहबाक कार्यक्रम
छल।एकटा कथा पाठ सेहो करबाक योजना छल,मुदा से नहि भए सकल। श्रीमतीजी बहुत थाकि गेल रहथि आ बेर-बेर जल्दी वापस जएबाक आग्रह केलथि।
आखिर हमसभ उद्घाटन सत्रक समापनक बाद
ओहिठामसँ प्रस्थान कए गेलहुँ। रातिक समय रहैक, सड़क एकदम खाली छलैक।
कार दनादन चलैत रहल। ठीक बारह बजे हमसभ अपन गामपर पहुँचि गेलहुँ।
गैस सिलिंडरक मारामारी
युद्ध
भए रहल छलैक अमेरिका आ इरानक बीचमे,मुदा ओकर परिणाम अपनो देशमे गामे-गाम सद्यः देखा रहल छल।हमरा गाममे चौकपर
गैस सिलिंडरक वितरण केन्द्रपर भोरेसँ लोकसभक पाँति लागि जाइत छल। लोकसभ भरि-भरि
दिन प्रतीक्षा कए एकटा सिलिंडर प्राप्त कए आह्लादित भए जाइत छलाह जेना कि कतेक
मूल्यवान वस्तु भेटि गेल होनि।यद्यपि सरकार वारंबार घोषणा करैत रहल जे गैस
सिलिंडरक कोनो कमी नहि छैक,मुदा लोक मानबाक लेल तैयार नहि बुझाइत छल । एहि युद्धक
परिणाम गिलेसन बजारमे मखानक दामोपर बुझाएल। एक सप्ताहक भीतरे एकर दाममे प्रतिकीलो चारिसए
सँ बेसीएक अंतर भए गेल छल। सड़कक काते-काते अपेक्षाकृत कम दामपर मखान बिका रहल छल।कालांतरमे
एहि स्थितिमे सुधार भेल। ताधरि हम ग्रेटर नोएडा वापस आबि गेल रही।
अड़ेरमे की नहि भेटैत छैक?
हम
गाम गेल रही तखन आमक गाछसभमे मज्जर भरल छल। लागि रहल छल जे एहि बेर आम खूब फरत।
मुदा एगारह मार्च २०२६क रातिमे बड़ी जोरक अन्हड़ अएलैक।सभटा मज्जर झरि गेलैक।
साइते कोनो गाछ बाँचि सकल। गाम-घरमे मकान बनबाक क्रम अवाध रूपसँ चलिए रहल अछि।
जेम्हरे नजरि देबैक,दूमहला चमकैत देखाएत। भवन निर्माण आ यातायातक क्षेत्रमे बहुत
रास लोकसभकेँ जीविकाक जोगार भए गेल छैक।अड़ेर चौक तँ आब बेस समृद्ध बजार भए गेल
अछि। कहि सकैत छी जे अड़ेरमे की नहि भेटैत
छैक।
गाममे
रहलासँ तरह-तरहक सामाजिक कार्यक्रममे सामिल होएबाक अवसर भेटैत छैक। हमरासभकेँ गाम
पहुँचलाक किछुए दिनक बाद हमर घरे लग उपनयन छल। ओहिमे आठ-नओ दिन धरि लाउज़स्पीकर
बजैत रहल छल। ओहो जोर-सोरसँ। बहुत मोसकिलसँ बादमे ओकर अबाज कम कराओल गेल छल। आखिर
उपनयन संपन्न भेल आ लाउडस्पीकर सेहो शांत भेल। भोज तँ होइते रहैत छल। हमरो कैकठाम
भोजमे सामिल होएबाक अवसर भेटल। सबजाना भोजमे अखनहु परुषे सामिल होइत छथि।
स्त्रीगणक लेल खैक जाइत छनि,मुदा ओहो संतोषप्रद नहि बुझाइत छल। समय-साल जखन एतेक
बदलि गेलैक,तखनहि स्त्रीगणकेँ सबजाना नोतमे सामिल किएक नहि कएल जाइत छनि? किएक ने
ओहोसभ भोजस्थलीमे सभक संगे बैसि कए भोजन कए सकैत छथि?बेसक हुनका लोकनिक लेल अलग
पाँति रहए।मुदा चर्चा केलोपर एहि विचारक समर्थक लोकक बहुत अभाव बुझाएल।आन-आन गामसँ
आबि पुरुषवर्ग भोजमे सामिल होइत छथि,मुदा अपने टोलक स्त्रीगण खैक अएबाक प्रतीक्षा
करैत रहैत छथि,जे कैक बेर बारह बजे रातिमे पहुँचैत अछि,केक बेर सामानसभ घटि गेल
रहैत छैक। जे से।
एहि
बेरक ग्राम यात्राक आब अंत भए रहल छल।हमसभ ठीक एकमास गाममे बहुत सुखसँ रहलहुँ।
एहिमे हमर भातिज ,चंदन,क बहुत योगदान रहलनि। हमरा लेल अंग्रेजी,हिन्दी अखबारक
जोगार,बजारसँ समय-समयपर आवश्यक सामानसभक व्यवस्था ,मकानमे सफाइ काजक लेल मजदूरसँ
पेंटर धरिक ओरिआन,एहन -एहन बहुत रास काजसभ ओ बहुत सहृदयतासँ करैत रहलाह।हुनकर बच्चा
ख्याति,बहुत आनन्द दैत रहल। ओ सदिखन अबैत-जाइत रहैत छलि जाहिसँ हमरा लोकनिकेँ अपनत्वक
भाओ बुझाइत छल,बच्चा संगे खेलैत-बजैत समय बहुत नीकसँ बीति जाइत छल।पछिले बेर जकाँ
एहू बेर हमसभ कपिलेश्वरक दहीक आनन्द लए सकलहुँ। ताहि लेल चंदन बहुत प्रयाससँ
कपिलेश्वरक ओहि दोकानबलासँ कैक दिन पहिने दहीक आर्डर देलखिन ।तकर बाद आटोसँ बहुत
प्रयत्नपुर्वक दहीकेँ गाम अनलनि।प्रयासक अछैत ओहिठामक नामी पेरा एहि बेर नहि भेटि
सकलनि।हमसभ गोटे दही-चूरा भोजनक आनन्द उठओलहुँ।
गाममे
एकमास रहलाक बाद दस अप्रैल २०२६क बिहार संपर्क क्रान्तिसँ गामक सुखद यात्राक स्मृतिक
संग हमसभ वापस दिल्ली बिदा भए गेल रही।
रबीन्द्र नारायण मिश्र
२९।०६।२०२६
