शनिवार, 17 मार्च 2018

गया गेल रही






बहुत दिन सँ माएक बारंबार सपना अबैत रहैत छल।एहि सपना सभक रहस्य नहि बुझा रहल छल।तथापि मोनमे भेल जे गया चली,पिणडदानक बड़ महत्व सुनैत छी।ओहिठाम पिणडदान केला पर पितरसभ मुक्त भए जाइत छथि।मुक्त भेल पितरसभ अपन वंशजकें आशीर्वाद दैत छथि जाहिसँ सभक कल्याण होइत अछि।पंडितजीसँ गप्प कए गया जेबाक दिन तकौलहुँ। विचार विमर्षक बाद फरबरीक अन्तमे ,२५ फरबरीकेँ जेबाक कार्यक्रम बनल,आपसी २८ फरबरीक। तिन मास पूर्बे रेल टिकटक आरक्षण करौलहुँ।

क्रमशः गया जेबाक समय लगीच आबि रहल छल। चिन्ता रहए जे कोना की करी। कखनो काल होइत जे एखन स्थगित कए दी। फेर भेल जे जखन कार्यक्रम बना लेने छी तँ ई काज कइए लेल जाए। पण्डितजीसँ परामर्श कए चीज-वस्तुक ओरिआनमे लागि गेलहुँ। मुदा सभसँ चिन्ता छल पणडासभसँ कोना निपटल जाएत ? सुनैत रही जे ओहिठाम टीशनेपरसँ पणडाक आदमीसभ घेर-बार शुरु कए दैत अछि। गयामे रहबाक चिंता सेहो होइत छल। संयोगसँ ओहि दिन हमर मित्र मिसरजी भेटि गेलाह । ओ पहिने गया पिंडदान हेतु गेल रहथि। हुनकर परिचित पंडा आ एकटा महापात्रजीक फोन नंबर भेटल। ओ अपनो स्तरसँ पंडाजीसँ एवम् महापात्रजीसँ गप्प कए हमर काज हल्लुक कए देलाह।

महापात्रजीसँ गप्प भेल तँ सभसँ पहिने ओ कहलाह जे दिन उपयुक्त नहि अछि,पितृपक्षक समय फगुआक बाद हेतैक,तकरबाद कोनो दिनक टिकट लए सुचित करु। हम कहलिअनि जे हम तँ चारि माससँ दिन तकौने छी।

"के दिन तकलाह अछि? हमरा गप्प कराउ।

आब कि करी? दिन तकनिहार पंडितजी विद्वान छथि,समय दए दिन तकलथि,ताहि हिसाबे टिकट लेने छी।आब जखन जेबाक समय लगीच आबि गेल तँ दोसरे बात सुनि रहल छी। पंडितजीसँ फेर गप्प कए सभ बात कहलिअनि। ओ अपन निर्णय पर दृढ़ छलाह,दिन सही अछि, महापात्र की कहताह। हमरा हुनकर बातमे दम बुजाएल। ओ निश्चय सही दिन तकने हेताह। महापात्रजीकेँ फोन कए कहलिअनि जे हमर कार्यक्रम तय अछि,दिन सही छैक,अपने ओहि दिनक हिसाबसँ उपलव्ध भए सकब कि नहि से कहू। असलमे हुनका पहिने सँ किछु काज गछल रहनि, ओ ई अवसर सेहो नहि जाए देवए चाहथि। जखन बुझा गेलनि जे हम अपन कार्यक्रम पर अड़ि गेल छी,तँ ओ तैयार भए गेलाह। कहलाह जे हुनका २६ फरबरीक उपनायन करेबाक छनि,तें २६क रातिमे गयेमे रहताह आ सभटा काज नीकसँ करा देताह। कहलाह :

चिन्ता नहि करु।सभटा भए जेतैक ।

समान सभक सूची ओ लिखा देलाह। ओहि सूचीमे ततेक तरहक अंट-बंट सभ चीज-बस्तुक नाम छल जे एकट्ठा करब बहुत कठिन बूझाएल। तैँ समानसभ आनबाक भार हुनके दए हम निश्चिन्त भेलहुँ। समान सभक वाजिब दाम देबाक आश्वासन हम देलिहनि।ओ सहर्ष ताहि हेतु तैयार भए गेलाह। तकरबाद हम अपन तैयारीक अनुसार बिदा भए गेलहुँ। ओहिसँ पहिने महापात्रजी कैबेर फोन कए आश्वस्त होइत रहलाह जे हमर कार्यक्रम पक्का अछि, ओहिमे कोनो परिवर्तन नहि भेल अछि,जे निश्चित तिथिक हमसभ ओतए पहुँचि रहल छी,जे हुनकासँ भोरे भेँट होएत।

गयासँ पंडाजीक सेहो फोन आएल। ओ हमर कार्यक्रमक बारेमे आश्वस्त होमए चाहैत छलाह। हम कतए ठहरब सेहो जानए चाहैत छलाह। इहो कहलाह जे रहबाक व्यवस्था हुनके ओहिठम भए सकैत अछि। मुदा जखन ओ एहि बातसँ आश्वस्त भए गेलाहजे हम हुनकेसँ संपर्क करब तखन निश्चिन्त भए गेलाह। संगहि कहलाह जे टीशनपर पहुँचते हुनकासँ संपर्क कएल जाएत जाहिसँ कोनो आओर पंडाक आदमी तंग नहि करत आओर हुनकर आदमी ओतहिसँ हमरा होटल लए आनत। हम अपन रहबाक व्यवस्था होटलमे केने रही। ताहि हेतु पहिनहिसँ  आनलाइन आरक्षण करौने रही। हम पंडाजी ओहिठाम नहि रहए चाहैत रही कारण ओतए पता ने केहन की होएत,से मोनमे शंका रहए।

२५ फरबरी २०१८क साँझमे भुवनेश्वर राजधानीसँ  हम आ हमर श्रीमतीजी गया विदा भेलहुँ।ओहिसँ पूर्व होटलमे फोनकए सूचना दए देल जे हमसभ भोरे पाँच बजे होटल पहुँचब। तदनुकूल हमरा सभलेल व्यवस्था कएल जाए। रस्ता भरि खाइत-पिबैत हमसभ यात्राक आनंन्द लैत रहलहुँ। सासारामक लगमे ट्रेन छलैक कि एकटा सहयात्री चिचिआ उटलाह जे गया आबयबला अछि। कैटा यात्री हुनक डाक सुनि उठि कए समान लए गेट पर आबि गेलाह। रातिक समय छलैक,क्यो जोखिम नहि उठाबए चाहए, कारण गयामे ट्रेन चारि बाजि कए बीस मिनटपर पहुँचक छल,आ जौँ राति मे सुता गेल,सुतले रहि गेलहुँ,तहन तँ गेल महिष पानिेमे परड़ु समेत। एहि चक्करमे चारि-पाँचबेर गेट धरि गेलहुँ आ आपस सीट पर अएलहुँ।अन्ततोगत्वा लगभग एक घंटा बाद ट्रेन गया टीशनपर पहुँचल।

हम सभ भोरे गया टीशनपर पहुँच गेल रही। होटल ग्रैंड पैलेस टिशनसँ सटले छल। ततबे लग रहैक जे टीशनपर होइत उद्घोषणा होटलमे सुनाइत छल। होटलमे पहुँचि हमरा लोकनि थोरेकाल विश्राम कएल । नित्यक्रमसँ निवृत भए बैसले छलहुँ कि पंडाजीक फोन आएल। होटलक पता पुछलाह। थोरे कालक बाद ओ होटल पहुँचि हमरसभक हाल-चाल लेलाह,आ सभ तरहे निश्चिंत रहबाक हेतु कहलाह। महापात्रजीके रातिमे अएबाक कार्यक्रम रहनि ।महापात्रजी बारंबार फोनपर कहेत रहलाह जे एकभुक्त कए लेब। केस कटा लेब। हमसभ समान लए रातिए पहुँच जाएब। काल्हिसँ पिण्डदान होएत।

ओहिदिन,माने २६ फरबरीक उपयोग हमरा लोकनि वोधगया देखएमे केलहुँ। गयासँ बोधगया जेबाक हेतु टेम्पू 200 टाकामे भेटल। गयासँ बोधगयाक दूरी करीब-करीब १३ किलोमीटर अछि। रस्ताक हालत खस्ता अछि। लगबे नहि करत जे अन्तर्राष्ट्रीय महत्वक तीर्थस्थान जा रहल छी। गया शहरक हाल मधुबनी,दड़िभंगे जकाँ अछि। नाला सभ नर्कक प्रतिरूप भेल,वातावरण दुर्गंधसँ भरल। होइत जे कतए आबि गेलहुँ। करीब आधाघंटामे टेम्पु बोधगया मंदिरलग पहुँच गेल। कनिके काल पैरे चलि हमसभ मंदिर लग बनल मालखानामे पहुँच गेलहुँ। ओहिठाम मोबाइल फोन सभ जमा करब अनिवार्य,कारण से सभ लए मंदिरक अन्दर नहि जा सकैत छी। मोबाइल फोन जमा कए हम सभ कनिके आगू बढ़लहुँ कि एकटा टेम्पूबला सौंसे बोधगया घूमाबक प्रस्ताव देलक,२०० टाकामे। हम सभ मानि गेलहुँ आ ओहि टेम्पूसँ आस-पासक वोध मंदिर सभ देखए निकललहुँ।

भूटान,तिब्बत,चीन,बर्मा,श्रीलंका,वियतनाम,थाइलैंड,जापान,थाइलैण्ड आदि अनेको देश,बुद्धक अनुयायी संगठन सभ अपन-अपन बुद्धक मठ बनौने छथि। ओहिमे भव्य बुद्धक प्रतिमा स्थापित अछि। कैटा  मंदिर तँ अत्यंत शोभनीय थीक। मुदा बाहर ढाकक तीन पात। सड़क सभ खण्डहर भए रहल अछि। लगबे नहि करत जे एतेक प्रमुख स्थानमे घुमि रहल छी। आश्चर्यक बात जे एतेक महत्वक स्थानक एहन उपेक्षा भेल अछि ? टेम्पोबला काते-काते सभठाम घुमा-फिरा हमरासभकेँ महाबोधि मंदिर लग उतारि देलक। मोबाइल पहिने जमा कए देने रहिऐक,तेँ फोटो नहि खीचि सकलहुँ।

महाबोधि मंदिरमे जाइत काल हाथक बैगक जाँच भेल। ओहिमे चार्जर,हेडफोन छलैक। कतबो कहलिऐक जे ओकरासबकेँ रहए दैक,मुदा नहि मानलक,गेट पर असबार सिपाही अड़ि गेल। हारि कए दोबारा ई बस्तुसभ जमा करए गेलहुँ। तकरबादे मंदिरक परिसरमे प्रवेश भए सकलहुँ । मंदिरक मुहथर लग एक गोटा नवका दसटकही,बीसटकही,नोटसभक गड्डी बेसी पैसा लए कए विदेशी सभके दैत देखलहुँ। आगा बढ़ला पर विदेशी तीर्थयात्री सभक भरमार देखाएल। आगन्तुक वौद्धसभक हेतु प्रसाद भिक्षापात्रमे देबाक ओरिआन भए रहल छल। अन्दर मंदिर मे ठाम -ठाम विदेशी वौद्धसभ ध्यान कए रहल छलाह। मंदिरमे अपूर्व शांति छल। एकटा गोर-नार विदेशी महिला सूतल वा ध्यानस्थ छलीह। लगैत छल जेना कोनो मुरूत पड़ल अछि। गर्भगृहमे अपार शान्ति छल। अगल-बगलमे वौद्धसभ माला फेरि रहल छलाह। ओहिठाम दर्शनकए हमसभ आपस आबि गेलहुँ। मोबाइल छोड़ौलहुँ । फेर टेम्पो पकड़लहुँ,आ आपस गया टीशन लग स्थित होटलमे आबि गेलहुँ।

प्रातःकाल नित्यकर्मसँ निवृत भए महापात्रजीकेँ फोन लगाओल। हमरा उमीद चल जे ओ रातिएमे आबि कए पंडाजी ओतए ठहरल हेताह,जेनाकि पहिने कहने रहथि। मुदा ओ तँ ट्रेनेमे छलाह।

"जहनाबाद पहुँचि गेल छी। ट्रेन लेट भए गेलैक, नहि तँ पहुँचि गेल रहितहुँ। दू घंटामे   आबि जाएब। चिंता नहि करब। हम सभ समान लए कए आबि रहल छी।"

महापात्रजीकेँ विलंब होइत देखि दू-तिनबेर फोन केलिअनि। ओ तँ ट्रेनमे बैसल रहथि,बेर-बेर कहथि:

  आब लगे अछि। सभटा भए जेतैक।चिंता नहि करब। दू दिनमे सभटा काज भए जेतैक। "

आखिर ओ दूटा झोरामे समान सभ लए ९ बजे सोझे हमर होटल पहुँच गेलाह। मोन आश्वस्त भेल जे आब काज भए जाएत। नित्यकर्मसँ निवृत भए महापात्रजी हमरासभक संगे पंडाजीक ओतए बिदा भेलाह। पंडाजीक ओतए हेतु टेम्पु कएल। सड़कपर उतरि पाँच मिनट पैरे चललाक बाद हुनकर घर आएल। मधुबनी,दड़िभंगा जिलाक लोकसभक इएह पंडा छथि,से ओ कहलाह। निसान झंडापर माछक,दड़िभंगा महराजक देल। गलीक एक तरफ पुरना घर छैक,जे दड़िभंगा महाराज बनौने रहथि। तकर ठीक सामने नव पक्का घर बनल अछि,जाहि मे यात्री लोकनिक ठहरबाक इंतजाम अछि। नीकसँ बनल ओ सुविधापूर्ण कोठरीसभ अछि। से देखि भेल जे एतहुँ रहि सकैत छलहुँ। मुदा मुख्य रस्तासँ बहुत चलए पड़ैत छैक,फेर ओही वातावरणमे दिन-राति रहू। होटलमे चलि गेलाक बाद एकटा नवीनताक अनुभव होइत छल।

सभसँ पहिने पंडाजीसँ आज्ञा लेल गेल। ताहि हेतु हुनकर पैर पूजल जाइत अछि। किछु संकल्प कएल जाइत अछि,जे एतेक ने एतेक दान,दक्षिणा करब। तखन ओ आशीर्वाद दैत काज करबाक स्वीकृति दैत छथि। हमसभ आगा बढ़ैत छी। पंडाजी बएसमे हमरासँ बहुत छोट छलाह,तेँ कनी कोनादनि लागल। बादमे महापात्रजीकेँ ई गप्प कहलिअनि। कहलाह जे एहिठामक अधिकारी इएह थिकाह,हिनके चलत,आदि,आदि।

पंडाजीसँ आज्ञा लए हमरा लोकनि फल्गु नदीक कछारपर पहुँचैत छी। ओतए छोटसन महादवक मंदिर छल। सामनेमे खालि स्थान  देखि कर्म शुरु भेल। पिण्डदान हेतु हमर श्रीमतीजी गोल- गोल पिण्ड बनौलथि जतेक पुरखासभ ज्ञात,अज्ञात मोन पड़ैत गेलाह सभकेँ लेल पिण्डदान देलहुँ। जतेक काल हम पिण्डदान करैत रहलहुँ ततेक काल एकटा बुढ़िया आ दूटा छौड़ा मिलि ओतए हल्ला करैत रहल। ओकरा लेल धनि-सन। ततेक हल्ला करैत गेल जे मंत्रो सूनब पराभव रहैत छल। महापात्रजी कहलाह :

अहिसबपर ध्यान नहि दिऔक, काजमे लागल रहू। ई सभ एहीठामक वासी छैक।

 पिण्डदानक बाद पिण्डकेँ फल्गु नदीमे पानि देखि कए फेखबाक हेतु हमर श्रीमतीजी आगु बढ़लीह। कहल गेलनि जे फल्गु नदी मे चलल एक-एक डेग आश्वमेध यज्ञक बरोबरि होइत आछि। फल्गु नदी तँ रेतसँ भरल अछि। कहि नहि एकरा नदी किएक कहल जा रहल अछि। कोनो समयमे भए सकैत हछि ई नदी रहल होएत,मुदा आब तँ निट्ठाह रेतसँ भरल अछि। बहुत आगु गेलाक बाद कनिक पानि छल जे बालुमे खधिआ कए निकलल छल,ओतहि पिण्ड फेकि ओ लौटि गेलीह। अगल-बगल ठाढ़ छौड़ासभ आओर ओ बुढ़िआ पैसा मांगए लागल आ जाबत लेलक नहि चुप्प नहि भेल। महापात्रजी आपना छोरि ककरो पैसा देल जाए ताहि हेतु तैयार नहि छलाह,मुदा कोनो उपाय नहि छल,ओकरा सभके किछु,किछु दए जान छोरा हमसभ ओतएसँ आगु बढ़ि सकलहुँ।

ओहिठामसँ आगा जएबाक हेतु भरिदिनक बास्ते २५० टाकामे एकटा टेम्पू महापात्रजी ठीक केलाह। टेम्पूबला बेस जोसिला आदमी छल। बीच-बीचमे  बेस मनोरंजक मुद्रा बनाए तरह-तरहक गप्प-सप्प करैत बढ़ैत रहल। कनीकालमे हमसभ प्रेतशिला पर आबि गेल रही। ओतए पहिने घाटपर पिण्डदान भेल।ओहिसँ सटल पोखरि कही,ताल कही ,जे कही, छल जे नर्कक दोसर रूप लगैत छल। ओहिमे सँ जल लए पिण्डदान होएत से सोचिएक रोँआ ठाढ़ भए गेल। खैर! जे करबाक छल से छल । ओहिमे सँ जल आनल गेल। कतेको गोटे आस-पास  पिण्डदान करैत छलाह। हुनका स्थानीय लोकसभ पैसा लेल कोनो कर्म बाँकी नहि रखने छल। पाई नहि देबै आ पिण्डदान करब,भए नहि सकैत अछि। हमसभ जखन ओतए पिण्डदान कए लेलहुँ तँ एकटा बेस मजगूतगर,कारी भुसुंड लोक आबि पैसा देबाक आग्रह करए लागल जे महापात्रजीकेँ पसिन्न नहि रहनि। ओहिबातसँ ओ व्यक्ति महापात्रजीकेँ गरिआबए लागल,बात बढ़ए लागल,महापात्रजी सेहो किछु कहलखिन।ओहो चुप्प नहि रहल।महापात्रजीक गट्टा धेलक आ गरजए लागलः

"आब तूँ अबिअह झाजी! अगिलाबेर सँ टपए नहि देबह।आदि, आदि।

बात बिगड़ैत देखि हमसभ जल्दीसँ ओकरा एकसए टाका दए जान छोड़ौलहुँ। हमसभ तँ पहिनेसँ ओकरा पैसा देबए हेतु मोन बनौने रही,कारण ओकरा दोसर सभक संगे  फसाद करैत हम देखैत रही मुदा महापात्रजी रोकैत रहलाह,तकर फलो ओ भोगलाह। कनी-मनी धक्का-मुक्की तँ भेबे केलनि।ओहो पाछा नहि रहल रहथि।

तकरबाद हम सभ प्रेत शिला दिस बढ़लहुँ। चारि सए सीढ़ी चढ़ए पड़त,ताहि हेतु पालकी सेहो उपलव्ध छल। दोसर विकल्प छल जे बीस सीढ़ीक बाद एकटा छोटसन स्थान छल। ओतए महादेवक मंदिर सेहो बनल छल। ओतए कै गोटा पिण्डदान करैत छल। महापात्रजीक सलाहपर हमसभ दोसर विकल्प चुनि ओतहिँ पिण्डदान करबाक निर्णय कएल। जगह साफ चल। बैसबाक हेतु आसनी सेहो भेटि गेल। ओहिठामक पण्डाजी सरल व्यक्ति बुझेलाह। चैनसँ पिण्डदान भेल। कनिके हटिकए एकटा परिवारकेँ हवन करैत देखलहुँ। महापात्रजी कहलाह जे ओहि महिलाकेँ प्रेतबाधासँ मुक्ति दिआबक हेतु होम भए रहल छल़ ।

पिण्डकेँ फेकबाक हेतु तए स्थानपर पहिने सँ एकटा बंगाली अधबएसू लोक अपन बेटाक अकाल मृत्युक बाद ओकर फोटोके ओतए राखि किछु- किछु कए रहल छलाह। पण्डाजी दूसए टाका देबाक आग्रह पर अड़ल छलाह,जेकर बाद ओहि मृत व्यक्तिकेँ प्रेतयोनिसँ मुक्ति भए जएतेक। ओ अपन गरीबीक बारंबार हबाला दैत एकसए टाकासँ आगा नहि बढ़ रहल छलाह,अन्तमे डेढ़सए टाकामे बात तए बेल। मंत्र पढ़ि ओहि फोटो पर फूल चढ़ौलथि। कतेक क्रूड़ छल ओ दृश्य,की कहू ? तकर बादे हमसभ ओतए पिण्ड रखलहुँ। टाका दए जल्दीए ओतएसँ खसकलहुँ। लगेमे पीपड़क गाछक जड़मे बहुत रास मृत व्यक्तिसभक फोटो टांगल छल। महापात्रजी चिकरलाहः

"जल्दी बिना पाछा तकने आगा निकलि जाउ 

सएह कएल। प्रेतशिलासँ उतरि हमरा लोकनि नीचामे भोजनालयमे बैसलहुँ। महापात्रजीकेँ भूख लागि गेल छलनि । ओ भोजन करताह। हमसभ राबरी खाएब। सभगोटे चाह पीब। से सभ बिचारि हमसभ ओतए बैसलहुँ। महापात्रजी भरिपोख भोजन केलाह,फेर पावभरि खोआ सेहो देलखिन। हमहुँसभ खोआ खेबामे पाछा नहि रहलहुँ,कारण भूख जोर मारि रहल छल। भोजन तँ नहि कए सकैत छलहुँ कारण अखन आओर ठाम पिण्डदान देबाक छल। महापात्रजीके गया महात्म्यपर एकटा पोथी किनबाक हेतु एकटा बच्चा कतेक गोहरौलक,मुदा ओ नहि मानथि। हारिकए ओ एकसएसँ दाम घटबैत-घतबैत बीसटका पर आनि देलक , तैओ ओ अपन बातपर अड़ल रहथि।

" धुर्र, ई की लेब, बेकार थीक।"

अन्तमे हमरे दया आबि गेल आ हुनकासँ नुकाकए बीसटकामे गया महात्म्य कीनि लेलहुँ। भोजन करितहिँ महापात्रजीकेँ फुर्ती आबि गेल। हमसभ तुरंत टेम्पूसँ रामशिलाक हेतु विदा भए गेलहुँ। पहिने रामशिला घाटपर आ तकरबाद उपरमे बनल मंदिरमे पिणडदान भेल। तालाबक हालत पर नहिए चर्च करी सएह नीक। उपर मंदिरपर कनिके चढ़लाक बाद पिण्डदेबाक स्थान भेटि गेल आ ओतहिँ पिन्डदान देल गेल।

एकरबाद काकबलिकेँ पिण्ड दैत हमसभ गोटे टीशन रोड स्थित होटल पहुँच गेलहुँ। महापात्रजी संगमे छलाह। ओ जे समानसभ अनने रहथि तकेर गोट-गोटक दाम जोड़ि दए हुनकासँ ओहि दिनक हेतु छुट्टी लेल। ओ पंडाजी ओहिठाम रहए हेतु चलि गेलाह। काल्हि अंतमे ब्राह्मण भोजन हेतु पंडाजीकेँ कहलिअनि। कहल जाइत अछि जे गयामे एकटा ब्राह्मण भोजन करेलापर एक हजारक फल होइत आछि। हम एगारहटा ब्राह्मण भोजनक व्यवस्ता करबाक भार हुनका देलहुँ,तकर खर्चा प्रात भेने  हम हुनका देलिअनि।

प्रेतशिला लगक होटलमे जे खोआ खेने रही,से डेरा अएलाक बाद रंग देखबए लागल। ताबरतोर  पेट झड़ए लागल। संगमे दबाइ छल,से खेलहुँ। कहुनाक मामला सम्हरल। दिनभरिक धमाचौकड़ीक बाद आब आराम जरूरी छल,से कएल।

प्रातभेने हमसभ विष्णुपाद मंदिर विदा भेलहुँ। महापात्रजी ओतए पहिने पहुँचि गेल रहथि।

पहिने घाटपर पिण्ड पड़त, तकर बादे विष्णुपाद मंदिरमे

महापात्रजी बजलाह।हमसभ ओतए पहुँचलहुँ। पोखरिक कातमे बैसि पिण्डदानक काज शुरु भेल। एक-दूटा युवक ओतए ठाढ़ रहथि। जहन पोखरिमे पिण्ड फेकि हमसभ जेबाक हेतु उठलहुँ कि ओ तीन गोटे भए गेल रहथि आ पैसाक मांग भेल।

ओकरासभकेँ किछु नहि देबाक छैक"

महापात्रजी कहैत रहलाह। से सुनि ओ सभ हुनका गरिआबए लागल,मारि करए पर उतारू भए गेल। महापात्रजी सेहो गरमाए लगलाह। तावत एकटा क्यो स्थानीय व्यक्ति अएलाह। ओ हमरासभकेँ ओतएसँ घसकबामे मदति केलाह। ओ युवकसभ महापात्रकेँ गाढ़ि पढ़ैत रहल।

तकरबाद पैरे-पैरे हमसभ विष्णुपाद मंदिर पहुँचलहुँ। ओतए बेस गहमा-गहमी छल। बड़काटा मंदिर,ततबे पैघ ओकर प्रागण। निचा उतरब तँ बालुसँ भड़ल फल्गु नदी। बालुए-बालुए हमसभ फल्गु नदीकेँ टपि गेलहुँ। ओकर दोसर छोड़पर सीताकुंड थीक। कहबी छैक जे भगवान राम अपन पिता दसरथके पिंडदान हेतु ओतहि आएल रहथि। पिण्डदानक चीज-वस्तुक ओरिआओन हेतु गेल रहथि कि सीताजी मंत्र पढ़ि दसरथकेँ बजा लेलखिन। सीताजी की करितथि? कहलखिन जे राम तँ पिण्डदानक चीज-वस्तुक ओरिआओन हेतु गेल छथि। मुदा दसरथ कहलखिन जे आबतँ हम आबि गेल छी। तखन सीताजी स्वयं बालुएसँ पिण्डदान केलीह। ओहिठाम सीताजीक नाम पर छोटसन मंदिर अछि जाहिमे दसरथक हाथ बनल अछि। फल्गु नदीमे ओहिठाम कैगोटे पिण्डदान करैत रहथि। ओतए दूटा पंडितमे दक्षिणा हेतु झगड़ा होइत रहलनि। हमसभ पिण्डदानमे लागल रहलहुँ। महापात्रजी हमर श्रीमतीजीकेँ चीज-वस्तु,गहना,टाका दान करबाक हेतु प्ररित केलाह। से सब यथासाध्य भेलनि। हुनकर कहबाक हिसाबे हमसभ समान सभ लए गेल रही। पिन्डदानक बाद उपर मंदिरमे दर्शनकए ,पिण्ड चढ़ाए हमसभ फेर बालुए- बालुए विष्णुपाद मंदिर लग पहुँच गेलहुँ।

फल्गु नदीमे पानि नहि अछि। मुदा जँ तीन-चारि हाथ गहीँर कएल जाए तँ पानि भेटि जाइत छैक। तेहन कूप दू-तीन ठाम बनाओल देखाएल। यत्र-तत्र लोकसभ पिण्डदान करैत छलाह। उपर अएलाक बाद महापात्रजीकेँ चाहक तलब अएलनि। चाह आनए हमसभ उपर गेलहुँ। ताबते एकटा मुर्दाके"राम नाम सत्य है"  कहैत लोकसभ ओहिठाम रखलक। किछु विध-विधान सभ केलक। तकरबाद ओकरा अन्तिम संस्कार हेतु फल्गुक कछारपर लए गेल। हमसभ चाह पिबैत ई सभ देखैत रहलहुँ। तकरबाद एक कप चाह महापात्रजीक हेतु अनलहुँ। चाह पीवि ओ टनगर भेलाह। हमसभ आगाक काज हेतु विष्णुपाद मंदिरमे  पहुँचलहुँ।

विष्णुपाद मंदिरमे  देशक विभिन्न भागसँ तीर्थयात्रीसभ आएल रहथि। करीब पचास गोटे तँ आंध्र प्रदेशक रहथि। ओहिना बहुत रास वंगालीसभ सेहो देखेलाह। सभ गोटे पिण्डदानमे लागल रहथि। स्थानीय पंडा जोर-सोरसँ मंत्र पढ़बएमे लागल रहथि। आंध्रासँ आएल तीर्थयात्रीसभ बहुत अनुशासित रहथि। मंदिरमे ओकर द्वार पर ठाढ़भए बड़ीकाल हुनकासभके मंदिरक पंडाजी मंत्र पढ़बैत रहलनि,ओसभ पढ़ैत रहलाह। तकरबाद सभ दस-दस टका दैत गेलाह आ पंडाजी बेरा-बेरी सभकेँ मंदिरमे प्रवेश करबैत रहलाह। बिना टाका देने एक्को गोटे अन्दर नहि जा सकैत छल। ओ मंदिरक मुहथर छेकने ठाढ़ छलाह। ओहिठाम ततेक हल्ला होइत रहल जे हमरा महापात्रजीक कहल मंत्रसभ सुनबामे आ सुनि बजबामे बहुत दिक्कति होइत रहल कहुना-कहुना कए पिण्डदान समाप्त भेल।

मंदिर बंद भए जाएत, जल्दी करू।"

महापात्रजी बारंबार चेतावथि। हमसभ धरफराइत मंदिरक गर्भगृहमे पहुँचलहुँ। मंदिरक गर्भगृहमे बहुत लोक छल। अन्दर जाएब, आ मुर्तिलग जाएब पराभव छल। कहुना कए ठेलमठेला करैत ओतए पहुँचलहुँ। ओहिठाम एकटा पंडाजी पहिनेसँ एकगोटेसँ पैसा लए झंझट कए रहल छलाह। ओकरासँ जखन बात फरिछाएल तखन हमरा पर ध्यान गेलनि। ओ पींड चढ़एबाक हमर प्रयासपर हुंकार भरैत महापात्रपर बिगड़लाह।

 एतए तोहर नहि चलतह। ई हमर जगह अछि।

ओ पैसा तए करए चाहैत छलाह,महापात्र किछु मामुली रकम देबाक हेतु कहैत छलाह। एहि बातसँ ओ बहुत तामसमे छलाह कि कोनो दोसर जजमानक फोन आबि गेल, ओ एकदमसँ फोन करैत बाहर भगलाह,कारण ओहिठाम ततेक हल्ला होइत रहैक जे किछु नहि सुनाइ पड़ि रहल छल। बाहर मंदिरक गेटपर ओ गप्प करैत रहलाह आ हमसभ पिंड चढ़ाए ओतएसँ,हुनका सामनेसँ,निकलि गेलहुँ। हुनका किछु नहि हाथ लागल। ओहिठामसँ हमसभ दक्षिणाग्निपद पहुँचलहुँ। ओतए पिंडदान दए हमसभ वैतरणी पहुँचलहुँ। ओहिठामक पोखरि आने पोखरिसभ जेना नर्क लगैत छल। ओतहुँ ओहिना पिंडदान भेल। सभसँ अन्तमे पिंडदान भेल अक्षयवटपर।

अक्षयबटपरबैसि पैघ बरक गाछ अछि।ओहि गाछक जड़िमे बहुतरास लालडोरा,पीअर कपड़ा,सभक गेँठी कएल अछि। ओहि गाछक छाहरिमे हम पिण्डदान केलहुँ। पिण्डकेँ गाछक जड़िमे फेकि ओहिठामसँ बिदा भेलहु। पंडाजीके पहिने फोनकए देने रहिअनि जे आब हमसभ घंटाभरिमे पहुँचि रहल छी। ओहिठामसँ हमसभ मंगला भगवतीक दर्शन कएल। मंगला भगवतीक दर्शनकए बाहर निकलल रही की बहुत रास भीखमंगासभ पैसा मांगए लागल। हम किछु दसटकिआ निकालि देबए लगलिऐक। एतबेमे भिखमंगाक पथार लागि गेल। एक डेग आगा बढ़ब मोसकिल भए रहल छल। कनिक आगा बढी आ जोरसँ किछु टाका फेकि दिऐक जाहिसँ फेर कनिक आगा बढी । बहुत मोसकिलसँ टेम्पूधरि पहुँच सकलहुँ। तैओ ओ सभ घेरने छल। फेर जूमाकए किछु दसटकही एहि हिसाबसँ फेकलहुँ जाहिसँ टाका लुझबाक चक्करमे ओसभ कनी फटकी होमए आ टेम्पू आगा बढ़ि सकए। टेम्पू आगा बढ़ैत अछि,तथापि किछु वच्चा बहुत दूर धरि पछोड़ धेने अछि :

"बाबा ! हमरा किछु नहि भेल।

फेर किछु टाका निकालैत छी,ओकरासभकेँ किछु- किछु कए दैत छिऐक। ताबे टेम्पूबला आगा बढ़ि गेल।तकरबाद ठोकले पंडाजीक ओतए पहुँचलहुँ। भरिदिन मंत्र पढैत,पढैत मुँहमे सपटी लगैत छल। भूख से लागि गेल छल। मुदा अखन एकटा महत्वपूर्ण प्रकरण बाँचल छल। तकरा पुरा करबाक हेतु हमसभ पंडाजीक ओतए पहुँचि गेल रही।

पंडाजीक ओतए पहुँचैत छी। ओहिठाम पहिनेसँ सभटा इंतजाम भेल अछि। सज्जादानक हेतु सभटा बस्तु एकटा कोठरीमे राखल अछि। पंडाजी अपने एहि काजक हेतु अबैत छथि। हम पहिने गछल टाका देबाक गप्प दोहरबैत छी। तकरबाद सज्जा दान कएल गेल। एहिठाम एकटा गप्प कहब जरुरी बुझा रहल अछि जे सभ समानकेँ एकहिबेरमे मंत्र पढ़ि दान कए देल गेल। श्राद्धमे एक-एक बस्तुक हेतु अलग-अलग मंत्र पढ़ाओल जाइत छल। ओ बहुत श्रमसाध्य एवम् उबाउ तरीका छल। सज्जा दानकबाद पंडाजी कहला जे गयामे एकटा ब्राहमण आनठामक एक हजारक बरोबरि फलदायी होइत अछि,से कहू कतेक ब्राहमणक भोजन हेतु दान करब। एकटा ब्राहमण हेतु यथोचित टाका अलगसँ गछलिअनि। अन्तमे फूलक मालासँ हमर दूनू व्यक्तिक हाथ बान्हैत कहलाह जे एकर तोड़ाइ हेतु किछु अलगसँ कहिऔक,सेहो गछलिऐक,तखने ओहिठामक विधसभ पूरा भेल। हुनका प्रणाम कए चैनसँ बैसलहुँ। पण्डाजीक ओहिठाम आगन्तुकसभक बहुत नीकसँ हिसाब राखल जाइत अछि। सभक नाम-गाम,पता,गया अएबाक तिथि लिखल जाइत अछि। गाम-गामक अलग-अलग पृष्ठ अछि। हमरा गाम पछिला सए सालमे गया गेनिहारक सूची ओ देखेलाह। बहुत नीक लागल।ओहिमे अपन गामक कतेको गोटेक नाम देखल। ई अपना-आपमे एकटा इतिहास  छल।

ताबत ब्राहमणसभ आबि गेल छलाह। पंडाजी कहलाह जे संयोग नीक अछिजे एगारहटा ब्राहमण पुरि गेल अन्यथा एहिठाम से कठिन रहैत अछि। भोजनक सामग्री तैयार छल। भरिपोख ब्राहमणसभ भोजन केलाह। तकरबाद सभ गोटेकेँ किछु कए दक्षिणा देल गेल। एहि प्रकारे गयामे पिणडदानक कार्यक्रम विधिवत संपन्न भेल। पंडाजी के गछल टाका देलहुँ। ब्राहमण भोजनमे भेल खर्चाक हिसाब भेल,से गोट- गोट कए चुकता केलहुँ। महापात्रजीकेँ दक्षिणा देलहुँ। हुनकर आपसीक हेतु यात्रा व्यय अलगसँ देलहुँ। ओसभ प्रशन्न देखेलाह।

मोनमे एकटा बरका संतोख भेल। मूलतः माताक स्वर्गवाससँ व्याकुल हृदयकेँ कनि शान्ति भेटल। प्रेतशिलापर जखन तरह -तरहसँ मातृ ऋणसँ उरिन हेबाक हेतु पिण्डदान देल जाइत छल तँ कानबाक मोन भए रहल छल। की कोनो पिण्डदानसँ माताक ऋणसँ उरिन भए सकैत छी ? नहि भए सकैत छी। तथापि ई अपन धर्मक विधान छैक। गयामे पिणडदानसँ पूर्वजक आत्मा मुक्त भए जाइत छथि। एहि विश्वास ओ श्रद्धासँ हम ओतए गेल रही आ दू दिन धरि ठाम- ठाम घुमि -घुमि पिण्डदान करैत रहलहुँ। प्रार्थना करैत रहलहुँ जे माता सहित हमर सभ पूर्वजक आत्माकेँ मुक्ति होनि।

अपन धर्ममे आस्था रखनिहार विश्व भरिसँ लोकसभ एतए पिण्डदान करए अबैत छथि। मुदा ओहिठामक व्यवस्था खासकए पोखरिसभक खास्ता हाल देखि कए निराशा होइत छैक। अन्तर्राष्ट्रीय महत्वक एहि स्थानक उचित देख-भाल नहि भए रहल अछि। ओहुसँ चिन्ताक बात थीक सबठाम पैसाक वर्चस्व। जे से पैसाक खातिर तंग करैत अछि। शुरुसँ अन्तधरि ई समस्या बनल रहल। एकर की समाधान होएत? एतबा जरूरी लगैत अछि जे शान्तिपूर्ण महौलमे लोक श्रद्धापूर्वक अपन पूर्वजक आराधना कए सकथि,से व्यवस्था होइक । मुदा बिलाड़िक गरामे घण्टी बान्हत के??







रबीन्द्र नारायण मिश्र





नाम : रबीन्द्र नारायण मिश्र

पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र

माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी

बएस : ६५ बर्ख

पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह

मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी

वृति : योजना आयोगक उप सचिवक पदसँ सेवा निवृत्त भेलाक बाद वर्तमानमे दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट

शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकी विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक

प्रकाशित कृति : . भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा),. प्रसंगवश (निवंध), . स्वर्ग एतहि अछि (यात्रा प्रसंग),. फसाद (कथा संग्रह)



सम्पर्क : फोन ०१२० २३४३५६३

इमेल : mishrarn@gmail.com

ब्लोग : mishrarn.blogspot.com

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