सोमवार, 4 मई 2020

सौराठ सभा


सौराठ सभा

 

सौराठ सभा हमरासभक ओहिठाम पाबनि जकाँ मनाओल जाइत छल । सामान्यतः सभा मइ-जूनक महिनामे  लगैत छल । ओहि मासमे वर्षाक बहुत संभावना रहैत छल । तेँ सभाक लग-पासक गामक लोकसभ पहिनेसँ सभाक पाहुन हेतु तैयारी केने रहैत छलाह । दरबाजासभपर जारनि सुखा कए राखल रहैत छल । घरमे दनौरी,तिलौरी,सँ लए कए अनेकानेक प्रकारक अँचारसभ तैयार रहैत छल जाहिसँ मौसमक कुप्रभाव भेलापर पाहुनकेँ कोनो दिक्कति नहि होनि । सभाक पँचकोसीमे बसल गामसभक कोनो घर एहन नहि रहैत छल जतए सभैती पाहुन नहि आबथि । सौंसे गाम पाहुनसँ गजल रहैत छल । दसबजे भोरे धरि पाहुनसभ भोजन भात कए तैयार भए जाइत छलाह । तकरबाद सभाागाछी बिदा होइतथि । अधिकांश लोकसभ पैरे जाइत छलाह कारण बससभ लदालद भरल रहैत छल । ओना सरकारक तरफसँ अतिरिक्त बससभ देल जाइत छल मुदा सभाक भीड़क आगु ओ कम पड़ि जाइत छल । अड़ेर पुरबारि टोलसँ कनेक आगु जा कए एकपेरिआ रस्ता छलैक जे बाधै-बाधे सोझे पोखरौनी चौकपर ऊपर होइत छल । पोखरौनी चौकसँ मोसकिलसँ एक माइल सभागाछी अछि । ओतए जाइते सभाक गहमा-गहमी शुरु भए जाइत छल । रहिका दिससँ बस-जीप-रिक्सासभ धरा-धर आबि रहल अछि । ओमहर जयनगर दिससँ सेहो सएह हाल अछि । कनीके आगु बढ़ब तँ मधुबनी दिससँ से यात्रीसभक करमान लागल अछि। कहि नहि सकैत छी जे सभगाछी पहुँचैत देरी केहन मनोरम दृश्य देखाइत छल ।

सौराठ सभाक विशेषतामेसँ एकटा प्रमुख छल सोमनाथ महादेव। कहल जाइत अछि जे  गुजरातक सोमनाथक मंदिरसँ आनि शिवलिंग एतए राखल गेल रहथि जाहिसँ मलेच्छक आक्रमणसँ हुनका बचाओल जा सकए । सभागाछीमेसोमनाथ महादेवक मंदिर जाए भक्तलोकनि हुनकासँ नीक कथा पटि जेबाक गोहार लगबैत छलाह । महादेवक दर्शन बाद लोकसभ सभसँ पहिने अपन गामक अड्डापर पहुँचि हाल-चाल लैत छलाह । तकरबाद शुरु होइत सभा घुमनाइ आ ओहीक्रममे घटकैती । सभ समाप्त हेबाक जखन दू-तीन दिन बाँचल रहैत तखन तँ सभाक भीड़ बेकाबू भए जाइत छल । जेम्हरे देखू तेम्हरे लोके-लोक । लगैत जेना चारूकात मानवक समुद्र पसरि गेल अछि। तेहनोमे लोकसभ सभामे घुमिते रहैत छलाह । एहि गामसँ ओहि गामक डेराक बीचमे कथासभक जानकारी लैत रहैत छलाह । ई क्रम साँझ धरि चलैत रहैत छल । कन्यागतसभ वरसभक अभिवावकसँ गप्प-सप्प करितथि। वरसँ ओकर परिचय लितथि। वरक योग्यता आ उपलव्धिक विषयमे जानकारी प्राप्त करबाक हेतु तरह-तरहक प्रश्न-प्रतिप्रश्न कएल जाइत । मुदासभ किछुक बाद बात बजरि जाइत दहेजपर । कतेक टाका लेब आ कतेक देब । यद्यपि सभागाछीमे ठाम-ठाम  बैनर लटकओने लोकसभ दहेजक विरोध करितथि मुदा व्यवहारमे बात किछु आओरे छल । एहन साइते कोनो कथा होइत जाहिमे टकाक लेन-देन नहि होइत । एहिबातसँ सभागाछी बदनाम भए गेल । लोकसभ ओकरा मेलाक संज्ञा देबए लागल । ततबे नहि कैकबेर लोक ठका सेहो जाइत छलाह । वर आ कन्या पक्ष दुनू  गलत जानकारी देथि जाहिसँ कैकबेर जीवनमे बहुत दुखद प्रसंगसभ होबए लागल । क्रमशः लोकसभक सभागाछीसँ विश्वास भंग होबए लागल । बिआह हेतु लोक घरकथापर निर्भर होबए लागल । सभा आबि कए जानकारी लितथि मुदा निर्णय बादमे होइत ।

सौराठसभामे बाहर अएनिहारक हेतु रहबाक हेतु व्यवस्था सेहो छल । मंदिरसँ सटले चारूकात धर्मशाला छल । ओहिठाम रहनिहार लोकसभ अपनसभटा ओरिआन करैत छलाह । कैकगोटे गामसँ अपन भनसिआआ बर्तन-बासन लेने अबैत छलाह । ओछाओन-बिछाओन तँ रहिते छलनि । एकगामक लोकक डेरा एकहिठाम रहैत छल । ओसभ भोर-साँझ डेरापर विश्राम करैत छलाह आ दिनभरि सभागाछीमे रहैत छलाह । असलमे ओहि समयमे लोकसभ सभागाछीकेँ बहुत गंभीरतसँ लैत छलाह । जँ ककरो घरमे बिआहयोग्य वर-कनिआ अछि तँ ओ सभागाछी जेबे करताह । आओरनहि किछु तँ कम सँ कम किछु जानकारिए भेट जेतनि । किछु परिचित,निकट संबंधीसभसँ भेंटे भए जेतनि । अस्तु,जँ सभा लागल अछि तँ लोक ओतए जेबे करथि ।

हमसभ नेना रही । तखनेसँ सालमे एकबेर होबए बला एहि सभाक प्रतीक्षा रहैत छल । हमसभ चारि-पाँचगोटे सभा पहुँचि जाइत छलहुँ । कहिओ काल बाबूजीक संगे सेहो जाइत छलहुँ । उद्येश्य रहैत छल सभागाछीमे  बानरसी पान खाएब,नानाप्रकारक लाल-पिअर रंगक सरबतसभ पीबाक आनंद लेब,आदि,आदि ।

जहिना लोक तरह-तरहक पाबनिसभ मनबैत छल तहिना सालमे एकबेर सौराठसभाक सेहो स्थान अबैत छल । लग-पासक गाममे रहनिहार धीया-पुतासभक हेतु ओ मनोरंजनक एकटा जबरदस्त अवसर रहैत छल । सभाक समय दुपहरिआमे जेम्हरेसँ देखू लोकक हुजुम सौराठ सभादिस जाइत देखाइत । किछुगोटे बससँ जाइत छलाह । मुदा बससभक दशा ततेक खराप रहैत छल जे अधिकांश लोक पैरे जाएब पसिंद करैत छलाह । ओहि समयमे टेकर ओतेक नहि चलैत छलैक । हमरा लोकनि बाधे-बाध पैरे चलैत-चलैत पोखरौनी चौक लग ऊपर होइत छलहुँ । ओहिठामसँ तँ सभा लगे छलैक । दस मिनट आओर पैरे चलू आ पहुँचि जाउ सभागाछी ।

सभागाछी पहुँचतहि हम महादेवक दर्शन करैत छलहुँ । तकरबाद बनारसी पानक दोकान लग पहुँचितहुँ । ओहिठाम अगल-बगलमे कैकटा दोकान एकपाँतिसँ लागल रहैक । कोनोमे आइसक्रीम बिका रहल अछि तँ कोनोमे किछु । से सभ केलाक बाद पहुँचितहुँ अपन गामक डेरापर । सभामे बैसबाक व्यवस्था बहुत वैज्ञानिक छल । सभ गामक आ कैकबेर एकहि गामक कैकटा टोलसभक डेरासभक स्थान नियत छल । सभसाल लोक ओतहि रहैत । एहिसँ सभामे ककरो ताकब आ भेंट करब बहुत आसान भए जाइत छल ।

सभागाछीमे एकबेर बिहारक तत्कालीन मुख्यमंत्री आएल रहथि । भाषणक क्रममे ओ सौराठसभाकेँ मेला कहि कए संवोधित केलनि । औ बाबू! तकरबाद जे हंगामा भेल से की कहू? चारूकातसँ लोकसभ मंच दिस बढ़ल। लोकसभ जोर-सोरसँ हुनका खिलाफमे नारा लगा रहल छल । कनिके कालमे लगलैक जेना उजाहि उठि गेल होइ ।पुलिससभ बहुत मोसकिलसँ मुख्यमंत्रीजीकेँ ओहिठामसँ बाहर केलक । हुनकर काफिला इएह-ले ओएह-ले ओहिठामसँ घसकल ।

सभासँ बिआह अनचोके होइत छल । कैकबेर तँ एहन होइत छल जे अभिवावक लोकनि रस्तेमे रहि जाइत छलाह आ बिआह भए जाइत छल । राति-बिराति सबारी नहि भेटबाक कारण बरिआतीसभ कैकबेर पछुआ जाइत छलाह । वरकेँ जेना-तेना लए कए कन्यागतसभ आगु बढ़ि जाइत छलाह । जखन बरिआती पहुँचथि ताबे तँ बिआह संपन्न भेल रहैत छल । एकबेर सभासँ हमरा गाममे बिआह ठीक भेलैक । दस हजार व्यवस्था तय भेल रहैक । बरिआती दरबाजा पर पहुँचि गेल । मुदा केओ स्वागत केनिहार नहि छल । कन्याक पिताक कोनो पता नहि छल । लगपासक लोकसभ हुनका ताकए लगलाह । लोकसभ हुनकर आङन गेलाह तँ देखैत छथि जे कन्याक पिताकेँ दाँती लागल छनि,ओ बेहोश पड़ल छथि। घरमे कोनो जोगार नहि छल । वरपक्षकेँ देबाक हेतु गछल गेल दस हजारक कोनो जोगार नहि भए सकल । घरबैआक ई हालति देखि गौंवासभ वरपक्षसँ गप्प कए सभटा बात कहलखिन । जेना-तेना बरिआतीसभक भोजनक व्यवस्था भेल । वरपक्ष वस्तु स्थिति केँ बुझैत टाकाक मांग छोड़ि देलनि आ बिआह संपन्न होइतहि भोरे वापस भए गेलाह ।

एकटा वर बिआहक हेतु सभागाछी गेल रहथि । सौंसे शुद्ध बिति गेल मुदा हुनकर बिआह कतहु ठीक नहि भए सकल । अंततोगत्वा, सभगोटे वापस गाम जाइत रहथि । रस्तामे गप्प-सप्पक क्रममे बरकेँ उदास देखि वरक पिता हुनका कहलखिन-

जखन भाग्यमे हेतह तँ बिआह भए जेतह ।

वर बजलाह -हौ! भाग्य तँ तोहर हाथमे अछि । तूँ ओकरा खुजए देबहक तखन ने? ”

कहक माने जे पिता द्वारा बिआहक प्रस्तावकेँ नीकसँ नहि सम्हारल गेल अन्यथा हुनकर बिआह भए गेल रहितनि । एहिना कतेको वर-कनियाक अभिवावकसभ सभा बिति गेलाक बाद निराश भए वापस भए जाइत छलाह।

पहिने सौराठ सभाक बहुत महत्व छल । देश-विदेश सँ मैथिल व्राह्मण  एक सप्ताह वा दस दिनक हेतु एकठाम एकट्ठा होइत छलाह । ओहिसँ एकहिठाम कतेको तरहक वर-कनिआक जानकारी संबधित  पक्षकेँ भेटि जाइत छलनि । यद्यपि सभागाछीमे कनिआ नहि जाइत छलीह मुदा हुनका बारेमे बहुत रास जानकारी अप्रत्यक्ष रूपसँ भेंटि जाइत छल । सभामे एकटा सभसँ पैघ फएदा ई होइत छल जे एकहिठाम बहुत रास इष्ट-मित्रसभसँ भेंट भए जाइत छल । संगहि बिआहक बहुत रास सूचना बहुत आसानीसँ एकहिठाम भेटि जाइत छल ।

सभामे पीपरक गाछक पातसभ मौला गेल अछि ।

एकर माने जे आइ सभागाछीमे एकलाखसँ बेसी लोक जमा भए गेल छथि ।

-से कहबी रहैक सौराठ सभाक ।

सौराठसभाक समय सरकारी बस एवम् अन्य सुविधासभ रहैत छल । बादमे जातीय आधारपर गठित सरकारसभ सौराठसभाकेँ जाति विशेषक संगठन बूझि उचित सहयोग नहि देलक । आब तँ जे हालत अछि से सभ जनिते छी । मोसकिलसँ सए लोक सभामे भेटताह । लाख आदमीक जमा होएब आ पीपरक पातकेँ मौलाएबाक बात तँ दूरक बात भेल । सौराठ सभा क महत्व क्रमशः झूस होइत गेल आ आबतँ ओ नष्टप्राय भए गेल अछि ।

कालक्रमे एहि व्यवस्थामेमे ह्रास होइत गेल । सभागाछीमे दहेजक मांग हाबी भए गेल । लोकसभ झूठ बाजि-बाजि बिआह-दान करबए लगलाह । एहिसँ कतेको वर-कन्याक जीवन तबाह भए गेल। सौराठ सभामे कैकबेर  लोक ठका जाइत छल । वर वा कनिआ पक्षक लोक  सही जानकारी नहि देथि । परिणामतः कैकटा वर वा कनिआक जीवन तबाह भए गेल । कैकटा नीक परिवारक कन्याक बिआह दरिद्र वरसँ करा देल गेलनि । कैकटा बहुत सुंदर  वरकेँ कारी खुट-खुट कनिआसँ बिआह भए गेलनि । एहि तरहक समस्यामे लगातार बृद्धि हेबाक कारणे लोकसभ घरकथेसँ बिआह करए लागल । क्रमशः सभागाछी गेनिहार लोकसभक संख्या घटैत गेल ।  कालांतरमे सभा जाएब कोनो वर हेतु अप्रतिष्ठाक बात भए गेल । सभा ओएह वर जाइत छलाह जिनका बिआहमे दिक्कत रहैत छल । सामान्यतः संभ्रांत परिवारक वरसभ सभा गेनाइ छोड़ि देलाह । घरकथासँ बिआह होबए लागल ।

बादमे की भेल की नहि, सभागाछीमे देल जा रहल सरकारी सुबिधासभ हटा लेल गेल । सरकारी बससभक संख्या क्रमशः कम होइत गेल । पहिने सभा गाछीमे बिआह ठीक भेलापर सिद्धांत पत्र देखेलापर चीनी आ अन्य समानसभ भेटि जाइत छलैक,बादमे ओहोसभ समाप्त भए गेल । निश्चित रूपसँ एहिमे राजनीति सेहो सन्हिआ गेल। जाति विशेषक संस्था बूझि सरकार आ राजनेतासभ एकरा वक्र दृष्टिसँ देखए लगलाह । मुदा सभसँ क्षति भेल अपने लोकसभसँ । सभामे नीक वरसभ गेनाइ छोड़ि देलनि । छल-प्रपंच द्वारा कतेको गलत-सलत बिआह करा देल गेल । जाहि वरकेँ कोनो औकात नहि रहैक तकरो धनिक बना कए नीक परिवारक कन्यासँ बिआह करा देल गेल । एहि तरहें कतेको परननीक कन्यासभक जीवन बरबाद भए गेल । परिणाम भेल जे लोकक सभासँ विश्वास उठि गेल । लोक सभा अएनाइ छोड़ि देलक । जखन लोके नहि रहत तँ सभा कथीक । से कालक्रमे सभागाछी निठ्ठाह बैसि गेल । आब तँ ओ मात्र इतिहासक वस्तु भए गेल अछि ।

सौराठसभा आइ-काल्हिक एकल खिड़की बला व्यवस्थाक परिचायक छल । वर-कनिआ पक्षक लोक एकठाम आठ-दस दिन उपस्थित रहैत छलाह । आपसमे वर-कनिआक परिचयक आदान-प्रदान करैत छलाह । गाम-घरक लोकसभसँ गप्प-सप्प कए कथाक विषयमे जरूरी जानकारीक संपूष्टि करैत छलाह । ततबे नहि ,लगेमे बैसल पंचकार लोकनिसँ आपसी संबंधक निर्णय लैत छलाह जाहिसँ  बिआह भए सकैत अछि कि नहि से स्पष्ट होइत छल । पंजी व्यवस्था एहन सटीक छल जे पुस्त-दर-पुस्त जानकारी एकहिठाम भेटि जाइत छल ।  सभकिछु होइतहु दहेजक समस्या ओहिसमय बहुत प्रवल छल ।  एहि कारणसँ कतेको नीक कन्याक अनुकूल बिआह नहि होइत छलनि । कैकबेर वर पक्षक लोक अपन आर्थिक परिस्थितिक गलत सूचना दए नीक घरक कन्यासँ मोट दहेज लए बिआह कए लैत छलाह । बादमे कन्याकेँ जीवनभरि कष्टक सामना करए पड़ैत छलैक । तहिना कैकबेर  सुंदरसँ सुंदर वरक बिआह कुरूप कनिआसँ करा देल जाइत छलनि । ओहि समयमे कनिआ देखबाक परंपरा नहि छल । लोक एक-दोसरपर विश्वास कए लैत छल आ ठका जाइत छल । एहिसभक प्रतिकूल परिणाम सभागाछीपर पड़ल । लोकसभाक अपेक्षा घरकथासँ बिआह करए लगलाह । सभा गेनाइ छोड़ि देलनि ।

जहिआ कहिओ सभागाछी जाइ ओतए दहेज विरोधी बैनर मंदिरक देबालसँ लटकल देखाइत । किछुगोटे गुट बना कए दहेजक विरोधमे मिटिंग से करथि । सभागाछीमे घुमि-घुमि कए पर्चा सेहो बाँटथि । मुदा तकर किछु प्रभाव नहि पड़ैक । दहेज लेनिहारसभ डंकाक चोटपर टाका गनबैत छल । जखन कखनो कोनो वरकेँ बेसी टाका गनल जाइत तँ सौंसे सभागाछीमे गर्द पड़ि जाइत । वरक पितासभ मोंछ फेरैत कहितथि-जखन ओहन वरकेँ एतेक टाका गनाएल तँ सोचल जा सकैत अछि जे हमर पुत्रक की मांग हेबाक चाहिअनि? हमरो बेटा पढ़ल लिखल,तैपर चासो बास छैक। अहीं कहू एकर की बजा छै? ई गीत एहि परिस्थितिक सद्यः वर्णन करैत अछि । एहि तरहें एक हिसाबे सभागाछीमे वरसभक बोली लागि जाइत छल । क्रमशः ई विमारी बढ़िते गेल । घरकथो सँ तय होबएबला बिआहसभमे टाका प्रमुख विषय बनि गेल । निश्चय एहिमे किछु परिवर्तन आब आएल अछि । बेटीसभकेँ शिक्षा आ आर्थिक आत्मनिर्भर्तासँ दहेजक मांग कमल अछि । मुदा ग्रामीण क्षेत्रमे अखनो कमोवेश ओएह हाल अछि । कहि नहि अपन समाज कखन एहि दुर्गुणसँ पार पाओत ।

सभ वस्तुक अपन आयु होइत अछि । सएह बात सभागाछीपर सेहो लागू भेल । एक समयमे समस्त मिथिलाक मिलन विंदु साबित होबए बला सौराठ सभा आब अपन समस्त गौरब गरिमाकेँ बिसरि गेल अछि । मुदा मिथिलाक इतिहाससँ बहुत नीकसँ जुड़ल एकर योगदान तँ बनले अछि आ बनले रहत ।

 

शुक्रवार, 1 मई 2020

चलें प्रकृति के द्वार


चलें प्रकृति के द्वार 



आज कल लोग

घरों में बंद रहकर

 खुद को तलाश रहे हैं ।

अभी तक

 शहर के नामी-गिनामी रेस्तराओं  में

सकुन ढूंरते थे,

काफी हाउस में दिनभर

दोस्तों के साथ समय बिताते थे ।

पंचसितारा होटलों में

जन्मदिन का उत्सव और

सादियों का वर्षगांठ मनाते थे ।

अब तो व्यर्थ लग रहा है यह सब

क्यों कि

सामाजिक दुरी बढ़ाने में व्यस्त हैं सभी

यह दूरी पहले ही  क्या कम थी?

क्यों हो गई ऐसी मजबूरी ?

जो कुछ थे सुख-सुविधा के साधन

विषाणु से

सभी संक्रमित हो रहे है ।

आखिर ये विषाणु आए कहाँ से?

 कैसे बने इतना शक्ति संपन्न?

 कि

सारे वैज्ञानिक अविष्कार

व्यर्थ  हो गए

कर नहीं पा रहे इसका प्रतिरोध ।

मानवता पर इतना बड़ा संकट

हमने ही

अपने ही कुप्रयासों से

खड़ा किया है 

कदाचित हम समय रहते जग जाते

जीते और जीने देते

सभी जीव-जन्तुओं को,

रहने देते प्रकृति को

उसी तरह जैसे वे थे

तो संभवतः

यह दिन हमें नहीं देखना पड़ता

आज सब कुछ इतना बीरान नहीं हो जाता ।

आज सब खोजने लगे हैं

प्राचीन परंपराओं में निहित संयमी होने का अर्थ,

क्यों कि

 सारे आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं में भी

 नहीं मिल रहा है जीवन मंत्र ।

विभीषिका इतनी जबरदस्त है

कि शहर के शहर

हो रहे  त्रस्त,

कर रहे त्राहि माम्!

तथाकथित विकसित देश भी

अविकसतों की कतार में प्रतीक्षारत हैं ।

 जिस से कि

 कहीं भी मिल जाए

 जीवन बचाने का कोई समाधान ।

परंतु ,

जीवन जो ईश्वर का है सद्यः वरदान

 कौन दे सकता है?

कोई और कैसे बचा सकता है ?

 यही तो सच्चाई है

जिसे समझने में देरी का अंजाम

 भुगत रहे हैं सभी 

सभी विकसित और अविकसित देश

हाथ फैलाए ऊपर बाले से

 दुआ कर रहे हैं ।

आइए

हमसब मिलकर  करें

पूर्वजों से प्राप्त मंत्रों का

फिर से आवाहन ।

शांत हो अग्नि,शांत हो वायु

शांत हो समस्त पृथ्वी!

  ओम्  !शांतिः! शांतिः!

इसी में है जगत का कल्याण

रुक जाएगा कोरोना

बच जाएगा शृष्टि का संहार

अगर हम पुनश्च

चलें प्रकृति के द्वार ।



रबीन्द्र नारायण मिश्र



01.05.2020


सोमवार, 27 अप्रैल 2020

स्वामी आनंद वैराग्य ( फेकनजी)





स्वामी आनंद वैराग्य ( फेकनजी)



गोर-नार,नमगर,गुलाबक फूलसन सदिखन प्रफुल्लित  हम अपन ओहि मित्रसँ जखन कखनो भेंट करए जाइ तँ माहौले बदलि जाइत छल । सभटा काज ओ छोड़ि दितथि । लग-पासमे जे केओ रहितथि तिनका छुट्टी कए दितथि । आ एकटा तेहन अपूर्व मुस्कीक संगे स्वागत करितथि जकर वर्णन करब बहुत मोसकिल । जखन कखनो हम मधुबनी जइतहुँ तँ हुनकासँ अवश्य भेंट करितहुँ । कैकबेर तँ ओ मधुबनीक रस्तेपर देखा जइतथि । मधुबनी छैहे कतेक टापनरह मिनटमे एहिपारसँ ओहि पार। ओना आब आवासीय क्षेत्र यत्र-तत्र पसरि गेल अछि आ तकर हिसाब केलासँ मधुबनी  बहुत नमरि गेल अछि । मुदा ओहि समयमे तँ खादी भंडार सँ किशोरीलाल चौक,ओतएसँ आगू बढ़ब तँ शंकर टाकीज आ कनीक आओर आगू बढ़ जाएब तँ रेलवे टीसन । ओमहरेसँ आगू बढ़ैत जाएब तँ थाना मोड़ । बस खेल खतम ।

शंकर टाकीजक चर्च भेल तँ मोन पड़ि गेल गाइड सीनेमा । शंकर टाकीजमे गाइड सीनेमा हमर जीवनक पहिल सीनेमा छल जे हम मैट्रिकक परीक्षा समाप्त भए जेबाक उत्साहमे देखने रही । मैट्रिकक परीक्षाक हेतु एकतारा उच्च विद्यालयक विद्यार्थीसभक परीक्षा केन्द्र वाटसन इसकूल मधुबनीमे छल । विद्यार्थीसभ अलग-अलग गुटमे यत्र-तत्र डेरा लेने रहथि । मुदा परीक्षा केन्द्रपर सभक भेंट भए जाइत छल । मैट्रिकक परीक्षा पास केलाक बादो ओ हमरसभक संगे आर.के.कालेज मधुबनीमे नाम लिखओने रहथि । अस्तु,कुल मिला कए पाँचसाल हमसभ इसकूलसँ कालेज धरि संगे पढ़ने रही । तकरबाद ओ लंगट सिंह कालेज मुजफ्फरपुर चलि गेलाह आ हम सी.एम.कालेज दरभंगामे नाम लिखओलहुँ । मुदा हमरा लोकनिक संपर्क बरोबरि बनल रहल । सभ तरहें सुबिधा संपन्न होइतहुँ ओ पढ़ाइमे बहुत आगा नहि गेलाह । असलमे हुनकर साहित्यिक आ कलाक पक्ष नेनेसँ बहुत मजगूत छल । जौं ओ ओही लाइनमे गेल रहितथि तँ निश्चय बहुत किछु केने रहितथि । मुदा ई अफसोचक बात नहि रहि गेल कारण ओ किछु अद्भुत तँ कइए गेलाह ।

हुनकर घर मधुबनीमे नीलम टाकीजसँ आगू उतरबारि कात बनल बाल्मिकी कालोनीमे छलनि । ओ ओहि कालोनीक स्थापकमे सँ छलाह । तकर बाद तँ हमर कैकटा मित्र ,परिचित आ संबंधी ओहि कालोनीमे घर बनओलथि। हमर ससुर(स्वर्गीय गणेश झा-पण्डौल डीह) सेहो ओतहि जमीन कीनि कए घर बनओलथि । तेँ ओहिठाम हमर अबरजात बहुत दिनधरि बनल रहल आ ताहि क्रममे अपन पुरानसंगीसभसँ भेंट-घाँट सेहो होइत रहल । श्रीनारायणजी सेहो ओतहि घर बनओलथि। श्रीनारायणजी (ग्राम -नगवास) ओही दिन आठमामे एकतारा उच्च विद्यालयमे नाम लिखओने रहथि जहिआ हम लिखओने रही । हमर बाबूजी आ हुनकर पित्ती हमरा लोकनिक संगे रहथि । ओ दृष्य अखनो हमरा मोन अछि । केना इसकूलक ओसारापर हमसभ बेंच लग ठाढ़ रही आ बूचनबाबू कागजी कार्रवाइ करैत छलाह । ई बात सन् १९६३ई.क थिक । तहिआसँ आइधरि ४७ वर्ष बित गेल मुदा हमरा लोकनिक संपर्क ओहिना टटका बनल अछि जेना इसकूलक समयमे छल । नेनाक दोस्ती बहुत गहींर होइत अछि जकर प्रभाव मोनपर अमिट भए जाइत अछि । ओ इसकूलिआ संगी आ हुनका लोकनिक संगे बिताओल गेल आनंदमय समय नहि बिसरल जा सकैत अछि ।

मधुबनी डेरापर हम एकबेर हुनकासँ भेंट करए गेल रही । हमर ससुरक घर सेहो ओही कालोनीमे रहनि । ओतहिसँ प्रातःकाल दस बजेक करीब हम हुनका ओतए पहुँचल रही । ओहि समय ओ ओतए नेनासभक हेतु आवासीय विद्यालय चला रहल छलाह । ओकर अलाबा मधुबनीमे दू-तीनटा आओर इसकूलसभ ओ चलबैत छलाह। बादमे ओ अपन पैतृक ग्रममे सेहो इसकूल स्थापित केलाह । डेरापर पहुँचलापर ओ हमर जोरदार स्वागत केलाह । नाना-प्रकारक मेवा,फल,मधुर राखल छल,खाइत रहू जे खाएब,जतेक खाएब । मुदा ओ अपने किछु नहि खाथि । हम पुछबो केलिअनि तँ कहए लगलाह जे ओ यात्राक क्रममे ततेक मिठ्ठ खा लेने रहथि जे हुनकर सुगर तीनसए सँ बेसी भए गेल छनि । तेँ डाक्टरक परामर्शपर सभकिछु बंद भए गेल छनि ।

हुनकर ज्येष्ठ पुत्र किछुसाल पूर्व घर छोड़ि भागि गेलखिन आ कतेको प्रयासक बादो हुनकर किछु अता-पता नहि लागि सकल । हुनकर श्रीमतीजी एहि घटनासँ बहुत आहत भेलीह । ओ निरंतर एहिबातसँ दुखी रहैत छलीह । मुदा ओ स्वयं एहिबातकेँ पचा गेल रहथि आ व्यवहारमे  कखनो प्रकट नहि होबए देथि । कारण जे रहल होअए मुदा हुनकर पारिवारिक जीवन सहज नहि छलनि । मुदा हुनका एहिबातसभक चिंता नहि देखिअनि । असलमे नेनेसँ हुनका जीवनमे अंतर्विरोधक साक्षात्कार होइत रहलनि । हुनकर माएक देहावसान बहुत कमे बएसमे भए गेलनि । पिता दोसर बिआह कए लेलखिन । तकरबाद की भैलक की नहिओ बहुत दिन धरि अपन पितासँ फराक नाना(स्वर्गीय यदु नंदन मौआर)क संगे एकतारामे रहलथि । जखन हुनका नाना एकतारा लए अनलखिन तँ हुनकर पिता संगे नानाकेँ कोट-कचहरीक चक्कर पड़ि गेलनि। अंततोगत्वा,नानाकेँ पक्षमे कोर्टक फैसला भेल । नाना हुनकर पालन-पोषण केलखिन । हुनकर नाना बहुत संपन्न लोक छलाह । हमरा कैकबेर हुनका ओहिठाम जेबाक अवसर भेटल छल । हुनकर दनानपर गगनचुंबी पुआरक टालसभ देखितहुँ तँ देखितहि रहि जइतहुँ। सुनबामे आएल जे ओ फेकनजीकेँ किछु जमीन-जायदाद सेहो देने रहथिन जे बादमे नानाक मृत्युक बाद मामासभ हथिआ लेलखिन जखन कि ओसभगोटे बहुत संपन्न छलाह । नानाक मृत्युक बाद हुनकर पिता (स्वर्गीय राम नंदन रायआग्रहपूर्वक हुनका अपना संगे राखि लेलखिन आ एकबेर फेर ओ अपन पैतृक गाम मधेपुरा (पण्डौल टीसन लगपहुँचि गेलाह। बादमे हुनकर पितासँ हमरो भेंट भेल आ दुनू पिता-पुत्रक अनुराग देखि हम बहुत प्रभावित भेल रही ।

 हमरा हुनकासँ भेंट एकतारा उच्च विद्यालयमे भेल जतए ओहो हमरे किलासमे पढ़ैत छलाह । हुनका इसकूलमे हमसभ हुनका फेकनजी कहिअनि । हुनकर असली नाम छलनि चन्द्र भूषण राय ।  हुनकर फेकन नाम कोना पड़लनि सेहो रहस्ये थिक । आठमासँ एगारहमा धरि हमसभ एकहि किलासमे पढ़लहुँ । हमरासभक गणितक शिक्षक डुमरा गामक जटाधर बाबू छलाह। ओ हुनके ओहिठाम रहैत छलाह । ई सुनि कए आश्चर्य लागि सकैथ अछि जे हुनकर व्यक्तिगत ट्युटर होइतहुँ ओ नंबर देबा काल हुनका कोनो पक्षपात नहि करथि । कैकबेर तँ हुनकर विषयमे ओ बहुत खराब करैत छलाह । तथापि केओ शिक्षकपर आङुर नहि उठओलक । आइ-काल्हिक समय रहैत तँ संभवतः सभसँ एहिने ओ शिक्षक हटा देल जइतथि । एकतारा उच्च विद्यालयक सचिव हुनके मामा छलाह । तथापि शिक्षक अपन निष्पक्षता बनओने रहथि से काबिले तारीफ  छल ।

ई बात सन् १९६९ ई०क थिक । हम सी.एम.कालेज दरभंगामे पढ़ैत रही । ओहि समयमे कैकटा बाबासभ ऊपर भेल रहथि । ताहि समयमे ओशोक सेहो हवा बहि गेल छल । किछु बात हुनकामे जरूर छल जे तत्कालीन युवावर्ग बहुत जोर-सोरसँ हुनकासँ प्रभावित भेल । बहुत रास लोकसभ हुनकर चेला सेहो बनलथि । गेरुआ वस्त्र पहिरने,गर्दनिमे एकटा लाकेट लटकओने आ घर-गृहस्थीक सभकाज करितहुँ सन्यास लेने । बाह रे विधानरुचिगर विषयसभकेँ तेनाक घोंटि देल रहैक जे जकरा जे नीक लागए से तहिना करथु,कोनो धर्म -अधर्मक बात नहि होएत। जे-से । ओहि समयमे फेकनजी सेहो ५ अगस्त १९७३ क दिन ओशोक शिष्य भए गेलाह । अपने तँ भेबे केलाह,संगहि अपन समस्त परिवार,इष्ट-मित्रकेँ सेहो हुनकर शिष्य बनबाक हेतु प्रेरित केलाह ।हम नहि कहि सकैत छी किएक,मुदा हमरा एहन कहिओ नहि बुझाएल जे हम ओशोक चेला भए जाइ यद्यपि हमर कैकटा मित्र एहिमार्गक अनुयायी छलाह। असलमे हमर स्वभावमे चेला बनब नहि अछि । अखनो धरि हम माता छोड़ि ककरो चेला नहि भए सकल छी । कौलिक मंत्र हम स्वर्गीया मातासँ लेने रही । बस ततबे । मुदा तकर माने ई नहि जे ओशोक विद्वतासँ हम प्रभावित नहि रही । ओहि समयमे हुनकर कैकटा किताब कीनि कए पढ़ने रही । रेडिओ,टेलेवीजनपर हुनकर भाषणसभ सुनैत रही ।

मधुबनीक छोट-छीन,दुर्वलकाय सड़कसभ पर पैरे वा रिक्सासँ गेरुआ वस्त्र पहिरने हुनकर एकटा तेहन पहिचान भए गेल छल जे ककरो कहिऔक सोझे हुनका लग पहुँचा देत । ओहि समयमे जे ओ ओशो भक्त भेलाह से बनले रहि गेलाह । ओहि काजमे रमि गेलाह । सौंसे देशमे सालभरि हुनकर कार्यक्रम होइत रहैत छल । सालभरि पहिनहि हुनकर यात्रासभक कार्यक्रम बनैत छल । तकरा तमाम ओशो भक्त लोकनिक संस्थासभमे प्रचारित कएल जाइत छल । ततबे नहि,एक समयमे तँ पूना स्थित ओशो आश्रममे ओ प्रतिस्पर्धाक कारण भए गेल छलाह । 

सन् १९७७ई.मे नौकरीक क्रममे हम दिल्ली चलि अएलहुँ । गाम-घरसँ बहुत फटकी चलि गेल रही । तथापि हुनकासँ संपर्क बनल रहल । ओ गाहे-बगाहे दिल्ली अबैत रहैत छलाह । कैकबेर ओ हमर डेरापर चलि अबैत छलाह आ देशभरिमे  अपन आध्यात्मिक भ्रमणक चर्चा करैत छलाह। एतेक व्यस्तताक बाबजूद ओ साहित्यिक काजमे सेहो लागल रहैत छलाह । अपन लिखल कैकटा कविता,नाटक  आ लेखसभ ओ हमरा देखबैत रहैत छलाह ।हुनका संगे कैकटा हुनकर सहयोगी आ मित्र लोकनि रहैत छलाह । कैकबेर तँ ओ हुनकालोकनिकेँ पाछुए छोड़ि हमरा लग आबि जाइत छलाह । हुनका एहि तरहें असगर अएबाक तात्पर्य निश्चिंत भए हमरासँ भरिपोख गप्प-सप्प करब रहैत छलनि ,ओहिना जेना नेनामे रहल होएतनि। किछु कालक हेतु हमसभ वाल्यावस्थामे पहुँचि जाइत छलहुँ । बेसक हम नौकरी करए दिल्ली  आबि गेलहुँ आ ओ मधुबनीमे रहि गेलाह मुदा हमरा लोकनिक भेंट-घाँट निरंतर होइत रहल । एकबेर दिल्लीक श्रीराम सेंटरमे हुनकर लिखल नाटक- ‘’वुद्धम् शरणं गच्छामि’’क मंचन भए रहल छल । ओकर कलाकारसभ मूलतः हुनकर शिष्य वा सहकर्मी लोकनि छलाह । हमरा ओ रामकृष्णपुरम स्थित सरकारी डेरापर स्वयं आबि कए ओहि नाटककेँ देखाबक हेतु आग्रह कए गेल रहथि । हम ओ नाटक देखए गेबो केलहुँ । सभागार खचाखच भरल छल । ओ सभागार मे प्रथम पाँतिमे बैसल छलाह । मुदा हमर चिंता हुनका रहनि । हमरा देखितहि ओ तुरंत उठि कए अत्यंत भावुकताक संग भेंट केलाह । उठि कए ठाढ़ भए गेलाह आ हमरा नीकसँ बैसेबाक जोगारमे लागि गेलाह । से देखि लग-पासमे बैसल लोकसभ छगुन्तामे रहथि जे आखिर ई के छथि जिनकासँ स्वामीजी एतेक आदर आ भावुकतासँ भेंट कए रहल छथि । फेर हुनकर अनुज सत्यार्थजी हमरा अपनासंगे बैसबाक प्रवंध केलाह । हुनका संगे बैजू महराज दीप प्रज्ज्वलित कए नाटकक उद्घाटन केलाह । वुद्धक जीवनीपर आधारित ओ नाटक निश्चय बहुत मार्मिक छल । नाटक समाप्त भेलाक बाद ओ हमर हाल-चाल लैत रहलाह जाहिसँ हमरा घर वापस जेबामे कोनो परेसानी नहि होअए।

हम सन् १९८८ ई०मे मधुबनीमे मकान बनबैत रही । मकानक काज शुरु करबासँ पूर्व फेकनजी हमरा संगे ओहि स्थानपर गेलाह आ मकानक नक्सासँ हटि कए ओ किछु परामर्श देलथि जकर समावेश करैत मकानक निर्माण कएल गेल । मकानक निर्माणक क्रममे ओ कैकबेर निर्माणस्थलपर जा कए मार्गदर्शन करैत रहलाह । ओहिक्रममे श्रीनारायणजी सेहो कैकबेर ओतए जाइत-अबैत रहलाह । मकानक काजमे शुरुसँ अंतधरि श्रीनारायणजीक ततेक योगदान रहल जकर वर्णन करब बहुत मोसकिल । कतेको साल धरि ओ कोनो-ने-कोनो रूपमे मकानक काजसँ जुड़ल रहलाह। हुनका लोकनिक एहि अमूल्य योगदानकेँ नहि बिसरल जा सकैत अछि ।

अपन मंडलीमे ओ स्वामी आनंद वैराग्यजीक नामसँ जानल जाइत छलाह । ओशोक शिक्षाक प्रचार-प्रसारमे ओ सालों लागल रहलाह । कालक्रममे ओ हरिद्वारमे एकटा पैघ संस्थान बनबएमे लागल रहथि जकर उद्देश्य आध्यात्मिक एवम् सांस्कृतिक क्षेत्रमे समाजक विकास करब छल । मुदा ओ काज पूर्णता दिस बढ़ैत ताहिसँ पहिनहि ओ अस्वस्थ भए गेलाह । एकाएक पता लागल जे हुनका आंतमे कैंसर भए गेल छनि । इलाजक क्रममे ओ लेडी हार्डींग मेडिकल कालेज सेहो आएल रहथि । हुनका संगे हुनकर अनुज स्वामीसिद्धार्थजी रहथिन ।ओहि समयमे हम ओतए उप-निदेशक(प्रशासन)क काज देखैत रही। डाक्टरसभ हुनका देखबो केलकनि मुदा केओ उत्साहवर्धक समाधान नहि बता सकल रहथि । बादमे ओ काशी चलि गेलाह आ ओहीठाम करीब छओ मास धरि देसी इलाजसभ केलथि । आकस्मिक एहन अस्वस्थ भए गेलासँ ओ बहुत दुखी रहथि। कहथि -

हमरा तँ अखन पचपने वर्ष भेल अछि । अखन बहुत काज करबाक छल । ”

मुदा कालक आगा ककर चलैत अछि । सन् २००५ई०मे एकदिन हुनकर अनुज शिद्धार्थजीक फोन आएल-स्वामीजी नहि रहलाह ।बहुत दुख भेल। एकटा बहुत प्रिय बचपनक दोस्त आ शुभचिंतक असमयमे हमरासभकेँ छोड़ि कए सदा-सर्वदाक लेल एहि दुनियासँ चलि गेलाह । बेसक आब ओ नहि छथि ,मुदा कतेको बेर जखन हम अपन वाल्याबस्था दिस घुमैत छी तँ अखनहुँ हुनकर तेजस्वी छवि सद्दः प्रस्तुत भए जाइत अछि,जेना ओ पुछि रहल होथि –

रबीन्द्रजीकोना छी?”

रबीन्द्र नारायण मिश्र

२७.४.२०२०

mishrarn@gmail.com



गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

भारतवर्ष महान है !


भारतवर्ष महान है !





गाँव-गाँव और शहर-शहर में,

गुंजित होता गान है ।

आओ हमसब मिलकर  गाएं,

भारतवर्ष महान है ।



आसेतु-हिमाचल तक विस्तृत

तेजस्वी वीरों से रक्षित,

राम कृष्ण की पावन धरती,

उत्कर्ष ज्ञान-विज्ञान है ।



भारत माता तेरी जय हो,

जय हो तेरे संतान की,

विश्व विजेता बने सभी

रक्षक तेरे सम्मान की ।



जीते जी और मरकर भी,

जयगान तुम्हारा गाएंगे ।

सर्वस्व समर्पित कर तुझको

नूतन इतिहास बनाएंगे।



त्याग,तपस्या करुणा का

संदेश हमेशा देते है ।

वंधुत्व,प्रेम के संवाहक

हम विश्वमित्र कहलाते हैं ।



औरों के सुख के खातिर,

सर्वस्व त्याग कर देते है ।

अपना सब कुछ दे कर भी,

कल्याण जगत का करते हैं ।



क्रोटि-क्रोटि जन के प्रतिपालक

त्याग तपस्या के अनुपालक

अखिल शृष्टि मंगलमय हो

मन में यह अरमान है ।



विविध धर्म भाषा अनेक

तद्यपि हम सबके हृदय एक

द्वेष रहित उन्नत विचार

मन में सब का सम्मान है ।

भारतवर्ष महान है ।



रबीन्द्र नारायण मिश्र

Email: mishrarn@gmail.com




















सोमवार, 20 अप्रैल 2020

लेखक परिचयः


छाप सरायकेला साहित्यिक महोत्सव 2024

आकाश का मौन

विमोचनःभोरसँ साँझ धरि

साहित्यिक कार्यक्रम नई दिल्ली

हमर पुस्तकसभ आनलाइन किनबाक लेल क्लिक करू 

कविता पाठ जीवनसंघर्षः




परिचय

 


लेखक परिचयः

नाम : रबीन्द्र नारायण मिश्र
पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र
माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी
जन्म तिथिःभादव शुक्ल चतुर्थी सन् ‍१३६० साल 

पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह
मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी
वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवानिवृत्त)/
स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवानिवृत्त)
शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक

श्री रबीन्द्र नारायण मिश्रक प्रकाशित कृति :मैथिलीमे:-

प्रकाशन वर्ष:2017
१. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा),    २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग),

प्रकाशन वर्ष:2018

 ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)

प्रकाशन वर्ष:2019

 ९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास) १२.स्वप्नलोक(उपन्यास)

प्रकाशन वर्ष:2020

१३.शंखनाद(उपन्यास) १४.इएह थिक जीवन(संस्मरण)

१५.ढहैत देबाल(उपन्यास) १६.पाथेय(संस्मरण)

प्रकाशन वर्ष:2021

१७.हम आबि रहल छी(उपन्यास) १८.प्रलयक परात(उपन्यास)

प्रकाशन वर्ष:2022

१९.बीति गेल समय(उपन्यास) २०.प्रतिबिम्ब(उपन्यास)२१.बदलि रहल अछि सभकिछु(उपन्यास)22. राष्ट्र मंदिर(उपन्यास) २३. संयोग(कथा संग्रह) २४.   नाचि रहल छलि वसुधा  ( उपन्यास)

प्रकाशन वर्षः2023

२५.दीप जरैत रहए(उपन्यास)        २६.ठेहा परक मौलायल गाछ(उपन्यास) २७.पटाक्षेप(उपन्यास)

 प्रकाशन वर्षः2024

 २८ माटि बजा रहल अछि(यात्रा प्रसंग) २९ जयतु जानकी(उपन्यास)

३० यज्ञसेनी(उपन्यास)

प्रकाशन वर्षः2025

३१. माटि बजा रहल अछि(संस्मरण) ३२गाछ बजैत छैक(कथा संग्रह) ३३.सूर्यपुत्र(उपन्यास)

In English: -

Year of publication:2018
1. The Lost House (Collection of short stories)
2. Life is an art

3.The Ganges Whispers (English translation of my Maithili Novel,Ham Aabi Rahal Chhee (हम आबि रहल छी)

हिन्दी में

प्रकाशन वर्ष:2019
१.न्याय की गुहार

 

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                                                                    सन् ‍१९६६ ई०क फोटो,,,

 सन्‍१९७५ई०क फोटो

सन् ‍१९७५


सन् ‍१९९८ई०क फोटो
सन्२०२२ई०क फोटो(अहमदाबाद) 



जमशेदपुर(सन्२०२४ई) 


सगर राति दीप जरए,निर्मली(सन्२०२४ई०) 

मेघालय(सन्२०२४) 


पेरिस(सन्२००९ई०ऐ


भतिजीक बिआहःगाममे सन्२०‍१५ई०) 



पोर्टब्लेयरमे(सन्२०‍१२ई०) 








सेवानिवृत्ति

सेवानिवृत्ति
सेवानिवृत्ति
स्वर्गीय मोहन भारद्वाजजीक संग सन्२०‍१२ई० पटनामे