मैथिलीमे हमर प्रकाशित पोथी

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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

उपभोक्ता संरक्षण कानून २०१९

 

 

उपभोक्ता संरक्षण कानून २०१९

 

नव अधिनियम बनाएब किएक जरुरी भेल?

एकटा समय छल जे कोनो वस्तु किनबाक हेतु लोक कैक दिनसँ तैयारी करैत छल । मधुबनी,दरभंगा वा लगपासक कोनो हाट-बजार जाइत छल । तखन दोकाने-दोकाने घुमैत छल । अपन आवश्यकता आ सामर्थ्यक अनुसार वस्तुक चयन करैत छल । दामक मोलौअलि करैत छल । जँ सौदा पटि गेलैक तँ ओकर दाम देलक  आ ओहि वस्तुकेँ लेने चलि अबैत छल । आब समय बहुत बदलि गेल । इंटरनेटक युगमे लोकसभ घरे बैसल अपन स्मार्टफोनपर एमजान,बिग बास्केट वा अन्य कोनो कंपनीक एप खोलि कए चीज-वस्तु पसिंद करैत छथि,ओकर आनलाइन भूगतान करैत छथि आ घरे बैसल एक-दू दिनक बाद ओहि वस्तुकेँ प्राप्त कए लैत छथि । जाहिर छैक जे एहि व्यवस्थामे ग्राहककेँ दोकानदारसँ भेंट नहि होइत छैक,ने ओ क्रय कएल गेल वस्तुकेँ सद्यः देखि सकैत अछि ,ओकर जाँच-पड़तालक अवसर तँ नहिए रहैत छैक । तेँ अधिकांश कंपनी एहन वस्तुकेँ एकटा तय समयक भीतर वापस करबाक नियम बनओने रहैत छथि । जँ कोनो दिक्कति भेल,तँ भूगतान कएल गेल टाका वापस कए दैत छथि। एहिसभ व्यवस्थाक अछैत कहिओ काल उपभोक्ताकेँ एहिसभमे परेसानी होएब स्वबाविक थिक । संगहि आनलाइन क्रय बिकरी केनिहार कंपनीसभकेँ कानूनी नियंत्रणमे रखनाइ एहू लेल जरूरी अछि जे ओ सभ मनमानी नहि करए,उपभोक्ताकेँ वाजिब दामपर सही वस्तु भेटैक आ बजारमे उचित प्रतिस्पर्धा बनल रहए, बजारपरकोनो कंपनीक एकाधिकार नहि भए जाइक ।

किनबाक कतेको विकल्प आ भूगतानक सुविधा बढ़बाक संगहि उपभोक्ताक अधिकारक संरक्षण सेहो कठिन भए गेल अछि । बिकरी हेतु वस्तु कतहु अछि,किननाहर कतहु छथि,भूगतान कोनो तेसर माध्यमसँ भए रहल अछि । ई सभ बात पहिने केओ सोचिओ नहि सकैत छल। एकहिठाम ग्राहक,विक्रेता आमने-सामने सभकिछु करैत छलाह । मुदा आब से नहि रहलैक । तेँ एहिसभ परिस्थितिकेँ ध्यानमे राखब सरकारक हेतु सेहो जरुरी भए गेल । पुरनका कानून झूस पड़ि गेल आ नव कानून बनाएब जरुरी भए गेल । एही बात सभकेँ  ध्यानमे रखैत उपभोक्ता संरक्षण कानून २०१९ संसद द्वारा स्वीकृत भेल जे माननीय राष्ट्रपति महोदयक स्वीकृतिक  बाद ९ अगस्त २०१९क सरकारी गजेटमे छपल । तकर बाद भारत सरकार द्वारा२० जुलाइ २०२०क एहि कानूनकेँ लागू कएल गेल।

उपभोक्ताक नव परिभाषा:

जे केओ अपन उपयोग हेतु कोनो वस्तु किनैत छथि वा कोनो प्रकारक सेवा प्राप्त करैत छथि से एहि कानूनक मोताबिक उपभोक्ता छथि । मुदा पुनर्विक्रय वा वाणिज्यिक उद्देश्यक हेतु कोनो व्यक्ति द्वारा कोनो वस्तु किनल जाइत अछि वा कोनो प्रकारक सेवा प्राप्त कएल जाइत अछि तँ ओ उपभोक्ता नहि मानल जएताह।

ई-कॉमर्स लेनदेन सेहो सामिल अछि:

केओ व्यक्ति जे कोनो  सामान किनैत अछि, चाहे ओ ऑफलाइन वा ऑनलाइन लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक साधन, टेलीशॉपिंग, डायरेक्ट सेलिंग वा मल्टी-लेवल मार्केटिंगक माध्यमसँ होइ सेहो उपभोक्ता मानल जएताह।

उपभोक्ताक अधिकार:

  अधिनियम उपभोक्ताकेँ निम्नलिखित प्रमुख अधिकार प्रदान करैत अछि;

हानिकारक वस्तु आओर सेवासँ  सुरक्षित राखब।

वस्तु वा सेवाक मात्रा, गुणवत्ता, शुद्धता, शक्ति, मूल्य आओर मानकक बारेमे जानकारी होएब।

प्रतिस्पर्धी मूल्यपर विभिन्न प्रकारक वस्तु वा सेवा उपलव्ध होएब ।

उपभोक्ताक हितक उचित विचार करबाक हेतु सुनबाइ करब आ आश्वस्त करब ।

अनुचित वा प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथासँ रक्षा करब ।

उपभोक्ता जागरूकताक अधिकार ।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) क स्थापना:

एहि अधिनियममे केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरणक स्थापनाक व्यवस्था अछि जे उपभोक्ताक अधिकारक रक्षा, संवर्धन आओर लागू करत । केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण  अनुचित व्यापार प्रथा, भ्रामक विज्ञापन आओर उपभोक्ता अधिकारक उल्लंघनसँ संबंधित मामिलाकेँ  सुनबाइ करत।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण  केँ उल्लंघन केनिहारपर जुर्माना लगाएब आओर वस्तु वा सेवाकेँ वापस लेब, अनुचित व्यापार प्रथाकेँ बंद करब आओर उपभोक्ता द्वारा भुगतान कएल गेल मूल्यक  प्रतिपूर्तिक आदेश पारित करबाक अधिकार होएत ।

गलत वा भ्रामक विज्ञापनक हेतु दंड:

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) केँ भ्रामक वा गलत विज्ञापन देलापर एंडोर्सर वा निर्मातापर दस लाख रुपयाक जुर्माना लगाबक अधिकार अछि । केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण  ओकरा एहि हेतु  दू साल धरि जहलक दंड सेहो दए सकैत अछि । दोबार  एहने अपराध केलापर जुर्माना पचास लाख रुपया आओर पाँच साल धरि जहल सेहो भए सकैत अछि ।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरणक पास एहन उल्लंघनक जांच आओर जांच करबाक हेतु जाँच-पड़ताल विभाग( investigation wing) होएत । केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण क अध्यक्षता महानिदेशक करताह।

उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (सीडीआरसी):

एहि अधिनियम मे राष्ट्रीय, राज्य आओर जिला स्तरपर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (सीडीआरसी) क स्थापनाक व्यवस्था अछि। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (सीडीआरसी) निम्नलिखित  तरहक सिकाइतक सुनबाइ करत;

अधिक वा भ्रामक शुल्क ओसूल करब ।

अनुचित वा प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथा ।

एहन वस्तु आओर सेवाक बिकरी जे जीवनक हेतु हानिकारक भए सकैत अछि।

दोषपूर्ण वस्तु वा सेवाक बिकरी

उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगक क्षेत्राधिकार:

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग दस करोड़ रुपयासँ बेसीक सिकाइतक सुनबाइ करत । वस्तु वा सेवाक मूल्य एक करोड़ रुपया सँ अधिक मुदा दस करोड़ रुपयासँ कम भेलापर राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग सिकाइतक सुनबाइ करत । जखन कि जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग वस्तु वा सेवाक मूल्य एक करोड़ रुपया तक भेलापर सिकाइतक सुनबाइ करत । पाँचलाख मूल्य धरिक वस्तु वा सेवासँ संवंधित सिकाइत केलापर कोनो फीस जमा नहि करए पड़त ।

ई-कॉमर्स लेनदेन सेहो सामिल अछि:

उपभोक्ता क अर्थ अछि केओ व्यक्ति जे कोनो  सामान किनैत अछि, चाहे ओ ऑफलाइन वा ऑनलाइन लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक साधन, टेलीशॉपिंग, डायरेक्ट सेलिंग वा मल्टी-लेवल मार्केटिंगक माध्यमसँ होइ ।

सिकाइतक ई-फाइलिंग:

नव कानूनक अनुसार उपभोक्ता इलेक्ट्रिनिक माध्यमसँ अपन सिकाइत संवंधित उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगक समक्ष अपन घर वा कार्यस्थानसँ कए सकैत छथि ।उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगक अधिकार क्षेत्रक निर्धारण उपभोक्ताक आवास वा कार्यालयक पताक आधारपर कएल जाएत । उपभोक्ता अपन आवेदनक सुनवाइमे भिडिओ कान्फ्रेमसींगक माध्यमसँ भाग लए सकैत छथि । ताहि हेतु हुनका ओकील राखब जरुरी नहि अछि ।

वैकल्पिक विवाद समाधान :

उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग सिकाइतकर्त्ताक सहमतिसँ मामिलाक त्वरित समाधान हेतु मध्यस्तता प्रकोष्ठकेँ पठा सकैत अछि । मध्यस्तता प्रकोष्ठ ओहि सिकाइतक समयवद्ध तरीकासँ समाधान करत । एहि प्रकोष्ठ द्वारा कएल गेल समाधानक खिलाफ अपील नहि भए सकैत अछि ।

उपभोक्ताक सिकाइत संवंधित बहुत रास मामिला देशक विभिन्न भागमे बहुत-बहुत दिन धरि लंवित चलि रहल छल । एहि कानूनमे समयवद्ध तरीकासँ एहन सिकाइत सभक समाधान करबाक प्रावधान भेलासँ उपभोक्ताकेँ समयसँ आ बिना विलंबकेँ न्याय भेटतनि । एहि कानून लागू भेलासँ जागू ग्राहक जागूक मंत्रवाक्यकेँ साकार करबाक रस्ता आओर सरल भए गेल अछि ।  वस्तुक निर्माता आ व्यापारी वर्गकेँ आब एहसास हेतैक जे सक्षम कानून बनि गेलाक बाद उपभोक्ताक अधिकारक क्षति पहुँचाएब मोसकिल अछि आ जँ से कएल गेल आ कोनो प्रकारसँ उपभोक्ताकेँ ठगल जेतनि वा अनुचित क्षति कएल जेतनि तँ  ओ सभ निचैन नहि रहि सकताह,कानून हुनकासभकेँ उचित दंड दिआबएमे सक्षम होएत । मुदा से तँ तखने होएत जखन संवंधित उपभोक्ता सही समयपर उचित फोरममे अपन सिकाइत करताह ।

 

3.2.2021

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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