गुरुवार, 4 मई 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशनक छठम खेपः



 

६

 

ओहि राति निशा भरि राति कुहरैत रहलि। रहि-रहि कए विचित्र अबाज निकालए लगैक। जेलर परेसान भए गेल। ओकरा कालू भगता ध्यानमे अएलैक। कालूक भगतै असरदार भेल रहैक। निशामे चमत्कारिक परिवर्तन ओ आनएमे सफल भेल रहए। मुदा आब तँ ओ चलि गेल छल। किछु पता-ठेकाना सेहो नहि देने छलैक। की केना करए से जेलर बाबूकेँ फुरेबे नहि करैक। पड़ोसमे एकटा बंगाली डाक्टर रहैक। ओकरासँ पूर्व परिचय रहैक। दौड़ल-दौड़ल ओ बंगाली डाक्टरकेँ बजा अनलक। बेरि-बेरि आला लगा कए ओ देखैक मुदा सभ चीज ठीके बुझाइक। रक्तचाप सामान्य छलैक, हृदयक धड़कन सेहो ठीक रहैक, होसोमे रहैक तखन समस्या की रहैक? ओहो भुतिआ गेल। किछु नहि बूझि सकल। कहलक-

“ई तँ बड़ ओझराएल मामिला लगैत अछि। एकर तँ सभ किछु सामान्य लगैत छैक, तखन एकर व्यवहार एहन किएक भए जाइत छैक?"

जेलर बाबू की कहितैक? बात-बातमे कालू भगताक चर्च भए गेलैक। बंगाली डाक्टरक माथा ठनकल। ओकरा भूत-प्रेतमे विश्वास नहि छलैक मुदा जे सद्यः देखि रहल छल तकर की समाधान दैत? ओकर सभटा ज्ञान हरा गेल छलैक। कहलकैक- “हम हारि गेलहुँ जेलर बाबू। एहन मरीज आइ धरि नहि देखने छलिऐक। एकरा कोनो बड़का डाक्टर लग लए जाउ। मामिला बहुत ओझराएल बुझा रहल अछि। “अपन ध्यान राखब ।" -से कहि ओ बिदा भए गेल।

जेलर बाबू माथ पकड़ि कए बैसि गेल। बंगाली डाक्टरकेँ जाइते निशाक चिकरब-भोकरब फेर जोर पकड़लकैक। जोर-जोरसँ मूड़ी हिलाबए लागलि। जेलरकेँ देखिते केकिआए लागैत छलि। जेलर चिंतासँ ततेक परेसान भए गेल जे लगैक जेना माथा फाटि जाएत। भोर होमए पर छल। कौआ डाक देलक। फरीच भए गेल रहैक। जेलर बाबूकेँ चाहक तलब धेलकैक। चाह के बना कए दितैक? घरनी बेसुध पड़ल रहैक। डाक्टरो किछु नहि कए सकल। आओर ओझरा कए चलि गेल। चाहक अमल ओ नहि रोकि सकल। अपनेसँ चुल्हा पजारलक। केदलीमे पानि,दुध,चाहक पत्ती,चिन्नी सभ एकहि बेर धए देलक आ आँचकेँ तेज कए देलक। दूइए मिनटमे चाह उफनाए लगलैक। जाबे साकंछ होइत-होइत ताबे आधा चाह उफनि कए खसि पड़लैक। कहुना कए बाँचल चाहकेँ कपमे धेलक आ पीबाक हेतु तत्पर भेल कि बाहर ककरो अबाज सुनेलैक।

"जय भवानी!जय भवानी!”

 जेलर बाबू चाह लेने घरक फटक खोलि कए बाहर भेलाह।

 "ई तँ कालू लागि रहल अछि? मुदा चिन्हा नहि रहल अछि। एकर चालि-ढ़ालि एकहि दिनमे एतेक कोना बदलि गेलैक?"

फेर सोचलक जे भए सकैत अछि जे धोखा भए रहल हो। राति भरिक जगरनाक कारण माथामे दुबिधा भए गेल हो। तेँ पुछलकैक-

"अहाँ के छी? ककरासँ भेंट करबाक अछि?"

 एतबा सुनतहि ओ चिकरए लागल-

"बूड़ि कहाँकेँ? एकहि दिनमे बिसरि गेलह। तेँ तँ तोहर ई हाल छौक।"

एतबा बाजि ओ अपन तृशूल झमकओलक आ कमंडलसँ जल निकालि जेलर बाबूक ऊपर फेकए लागल आ कहलक-

“अखने तोरा बुझेतह जे हम के छी।"

जेलर बाबू चाह पिनाइ छोड़ि दंडवत भए गेल।

“गलती भए गेल। हम अहाँकेँ नहि चिन्हि सकलहुँ। मुदा एकहि दिनमे अहाँक रूप एतेक बदलि गेल?"

“खबरदार! जे हमर रूप-रंग पर टोका-टाकी केलह। तोहर घरबालीक जान जा रहल छौक आ तूँ झौहर खेला रहल छैं?"

"झौहर? राति भरि जागल छी। डाक्टरकेँ सेहो बजओने रहिऐक। मुदा किछु फएदा नहि भेलैक उल्टे आओर मोन खराब भए गेलैक। डाक्टरो थाकि कए चलि गेल।"

"मोसकिलसँ ई बचलौक अछि। मखना यमपाश लए घुमि रहल छौक। सम्हरि जो।"

"की कहलिऐक? यमपाश..। बाप रे बाप...। आब की होएत? ई मुष्टंग के अछि?"

"सभटा तोही बूझि जेबही तँ भगता की करतैक?"

"कहुना कए एकर जान बचा दिऔक। जे कहब से करब।"

"बहुत देरी भए गेलौक। मोसकिल काज लागि रहल अछि।"

ई सभ दुनू गोटेमे गप्प भइए रहल छल कि जेलर बाबूक चारपर किछु बिचित्र सन अबाज भेलैक। ओ घर दिस दौड़ल। निशा बेहोस छलैक। छाती दिस तकलक। ऊपर-नीचाँ भए रहल छलैक। साँस चलि रहल छलैक। आब तँ ओ ठोहि पारि कए कानए लागल।

जेलर बाबूक कानब सुनि कए कालू भगता अन्दर आबि गेल आ ओकरा चार दिस इसारा केलकैक। मुदा जेलर बाबूकेँ किछु नहि देखा रहल छल। मुदा कालू साफे देखि रहल छल। मखना यमपाश फेकए हेतु तैयार छल मुदा ओकरा कोडवर्डे बिसरा गेल छलैक। यमपाश खुजिए नहि रहल छल। घामे-पसिने ओ परेसान छल। ओकर ई हाल देखि कालू भगताकेँ नहि रहल गेलैक। ओ चिचिआ उठल- “तोरा केओ आओर नहि भेटि रहल छह जे वारंबार एहीठामक चक्कर लगा रहल छह?"

"तूँ हमरा लोकनिक कारबारमे हस्तक्षेप केनिहार के?"

एतबामे मखनाकेँ फोनपर घंटी बाजए लागल। देखैत अछि जे फोनमे लिखल अछि- “यमराज"

ओकर सीटीपीटी गुम रहैक। कोडवर्ड बिसरा जेबाक कारण यमपाश चलि नहि सकलैक आ निशाक प्राण खिचबाक समय बीति गेल। आब की होएत? मखना घामे-पसीने भीजि गेल छल। ताबे ओकर मोबाइलक घंटी कैक बेरि बाजलैक। ओकरा ऊपर बजाहटि भए गेलैक। ओ लंक लागि कए भागल। ई सभ कालू भगता देखि रहल छल। आ भभा कए हँसए लागल।

"फेर ई बँचि गेल...।”

भेलैक ई जे कोडवर्ड बिसरि गेलाक बाद मखना गलत-सलत कोड लगाबए लागल जाहिसँ यमलोकक नेटवर्क जाम भए गेलैक। यमलोकमे आपत्तिकालीन घंटी घन-घनाए लागल। यमराज तँ पहिनेसँ ओकरासँ तमसाएल छलाहे। एहि बेरक घटनाक बाद तँ ओ किछु करएपर अड़ल रहथि। मुदा जहन घैलक पेनी फुटल होइक तँ पानि अटकत कोना? इएह हाल छलनि यमराजक। मखना छल फेरल लोक। ओ यमराजक पत्नीकेँ तेहनक पोटने छल जे यमराज फिस्स भए जाइत छलाह। एहू बेर इएह भेल। ओ सोझे यमपत्नी रेखा लग पहुँचल आ सिसकी भरए लागल।

की भेल?की भेल?" यमपत्नी रेखा पुछलखिन।

“की कहू? यमराजकेँ अहाँपर सक रहैत छनि। ताहि चलते हमरो जान लेबए पर लागल छथि। कोनो मौका बाम नहि जाए दैत छथि।"

"भेलैक की, से तँ बाजू?"

मखना सभटा बात नून-तेल लगाए कहि देलक आ इसारा पबतहि ओतएसँ घसकि गेल। यमराज पनपिआइ करए घर अएलाह तँ देखैत छथि जे यमपत्नी जमीनपर अखरेमे सुतल छथि। मुँह झपने छथि आ कानि रहल छथि। यमराजजी मोसकिलमे पड़ि गेलाह “आब की भेल?”

"रेखा! रेखा!" कैक बेर अबाज देलखिन मुदा कोनो उत्तर नहि भेटलनि। मामिला गड़बड़ाइत देखि ओ रेखाक सिरमामे बैसि हुनका मनबएमे लागि गेलाह। मखना घरक खिड़की लग नुका कए सभटा दृश्य देखि रहल छल आ मोने मोने प्रसन्न भए रहल छल।

"चललाह हमरे ठीक करए। आब सम्हारथु ..." बड़बड़ाइत छल कि यमराजक नजरि ओकरापर पड़ल। ओ चिकरि उठलाह-

"दुष्ट...सावधान...।"

ई सुनितहि मखना इएह-ले ओएह-ले भागल।q


 

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Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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https://pothi.com/pothi/node/195795

 

 


 

 

 

 


सोमवार, 1 मई 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशनक पाँचम खेपः

 


 

५

 

हमर मामा ककरा की बिगारने छलथिन जे हुनकर ई हाल कएलक?दिन-राति ओ अपन काजमे लागल रहैत छलाह। ककरोसँ कोनो मतलब नहि। एसगर छलाह। बिआह नहि केने रहथि। हमरे अपन संतान बूझि पालन-पोषण कए रहल छलाह। एहन निर्दोष आदमीकेँ के मारलक आ किएक? ई प्रश्न सभक माथामे घुमि रहल छल। पुलिस तँ दोसरे झंझटिमे फँसि गेल। लुच्चा-लफंगासभ थाना जरा देलक। ओकरसभक पुलिससँ कोनो कुन्नह रहल हेतैक मुदा फल भोगलक सौंसे गौँआ? तेहन-तेहन धारा लगा देने रहैक जे जमानति हेबाक बाटे नहि रहैक। अनेरे लोकसभ जहलमे बंद छल। कतेकोकेँ घर उजरए पर छलैक, कतेककेँ उजरि गेलैक कारण कमासुतसभ जहलमे सड़ि रहल छलैक। के-ककरा देखितैक? गरीबक टोल छल। नेतासभ अबैक,बोल भरोस दैक आ घसकि जाइक। केओ कोनो ठोस काज नहि कए सकल। एहन हालतिमे सौंसेगाम परेसानीमे पड़ि गेल छल। जे गाममे बाँचल छल से सभ अबाक छल, माथ-कपार नोचि रहल छल। समाधान किछु नहि फुराइत छल। एतेक गोटे जहलमे छल मुदा असली अपराधी के कोनो पता नहि छल। मास्टर साहेबकेँ के मारलक आ कथी लेल से अखन धरि पता नहि चलि सकल। प्रायः पुलिसोकेँ एहिसँ कोनो खास मतलब नहि रहैक। ओकरा तँ लोकसभसँ ओलि चुकेबाक रहैक आ तकर व्योंत सेहो भइए गेल छल। थाना जराएब बहुत महग पड़ल। एक-एक परिवारसँ कतेको गोटे बंद भए गेल छल। एकगोटेक तँ तीनपुस्त संगे जहलमे खिच्चरि खा रहल छल। समाधान ने पुलिसकेँ किछु फुराइक ने जहलमे बंद निर्दोष कैदीसभकेँ। कारण जखन एक बेर पुलिस लोकसभक विरुद्ध झुठो केस कए देलक तँ ओकरा वापस कोन आधार पर लैत? अपने आफत भए जइतैक। नौकरी बचेबाक फिराकमे कतेको निर्दोष प्राणी सालभरिसँ जहलमे सड़ि रहल छल।

कालू भगते किछु करत। सभक आश ओएह रहि गेल छल। जहलमे बंद सभ गौंवासभ ओकरा गोहरबैत रहैत छलैक। मुदा ओ तँ अपनेमे मस्त छल। जेलरकेँ डरा कए काबू कए लेने छल। दिन-राति रंग- रभस करैत बीति रहल छल। एहन आनंद तँ ओकरा गामोमे नहि छलैक। भगतै चलि रहल छलैक। कारनीसभकेँ फूँकि रहल छल आ सभसँ बड़का बात जे जेलरकेँ काबू कए लेने छल। जहाँ जेलर एमहर-ओमहर केलक कि ओकर घरबालीकेँ केना-ने-केना तेहन कए डरबैत छल जे जेलर उल्टे पैरे कालू लग दोड़ैत छल। खुसामद करए लगैत छल। बाह रे जेलर बाबू!

ऊपरका अधिकारी सभकेँ किछु- किछु पता लगैक मुदा ओसभ काजमे ततेक व्यस्त रहैत छल जे एकटा जेलक समस्या लए बैसि तँ नहि सकैत छल। मासिक बैसारमे जेलर केँ फज्झति कए दैक। जेलर सभ सुनि लिअए आ बात फेर ओतहि रहि जाए।

मुदा ई हालति कतेक दिन धरि चलितैक? विचाराधीन कैदीसभकेँ ऊपर न्यायालयमे सुनबाइ साल भरिसँ टलि रहल छल। मामिलामे कोनो प्रगति नहि होइक। अंतमे तंग भए जजसाहेब एसपीकेँ नोटिस कए देलथि। अगिला तारिखपर ओकरा न्यायालयमे अएबाक आदेश भेल। आब तँ जेलर बाबूक हालति बहुत खराब भए गेल ।। घर पहुँचि कए चौकीपर धराम दए खसलाह।

रघु आ निशा कलकत्तामे एकहि कालेजमे पढ़ैत छल। निशाक रूप-रंग देखि कए रघु प्रभावित होइत गेल। निशाकेँ सेहो रघु पसिंद रहैक। दुनूगोटे बिआह करए चाहए मुदा परिवारक लोक नहि मानै। ताबते रघुकेँ राजपुरामे जेलरक नौकरी लागि गेलैक। ओ निशाकेँ लेने ओतए चलि आएल आ कालीमंदिरमे बिआह कए लेलक। निशाक पढ़ाइ-लिखाइक संगे संगीतमे बहुत महारत रहैक। कहिओ-कहिओ राजपुरामे आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रममे ओ गबैत छलीह। हुनकर गायनक प्रशंसक महराजो छलाह। कैक बेर महराजक संगीत सभामे सेहो ओ आमंत्रित भेलीह। महराज तहिएसँ हुनकर प्रशंसक रहथि। ओ चाहथि जे कहुना निशाकेँ राजेक हातामे राखि ली मुदा ताहि हेतु रघु तैयार नहि होथि। अपना भरि जेलर बाबू निशापर बहुत ध्यान दैक मुदा जहिआसँ ई कांड भेलैक ओकर सुधि-बुधि हराएल रहैक।

ओमहर कैदीसभ अपने तंग छल। मुदा असली मजा तँ कालू भगता लए रहल छल। मजेदार गप्प तँ तखन भेल जखन साँझमे कारनीक पाँतिमे जेलर स्वयं आबि कए ठाढ़ भए गेल। जेलरकेँ एना एकटंग्गा देने ठाढ़ देखि जहलक पुलिससभ गुम छल। मुदा बाजति की? अपन अधिकारीक हाल पर गुम छल।

साँझमे भगतै होइत रहैक। जेलर बाबूकेँ एकटंगा देने देखि सभसँ पहिने ओकरे गोहार लगओलक। पुछलकैक- “की भेलौक?

"हमर जान खतरामे अछि। किछु करिऔक, नहि तँ हमर घरबाली बिलटि जाएत।"

"भेलौ की? -भगता बाजल।

“अहाँसँ की छिपल अछि? हमरा बचा लिअ।"

कालू भगता छाउर छिटलकैक आ कहलकै जे तोहर समस्या बहुत गंभीर  छौक। असगरमे झड़बए पड़तौक। बहुत खतरनाक जोगिन पाछू पड़ि गेल छौक।

जेलर सष्टांग दंडबत भए गेल। सौंसे जेलमे हरकंप मचि गेल। जहलक पुलिससभ जेलरकेँ मोने- मोन गरिआबैत छल। कैदीसभक सेहो चकबिदरो लागल छल। सभ मोने मोन कहैत छल- “एहन तमासा नहि देखलिऐक। धन कहीं कालू भगताकेँ जे जेलरोकेँ हबा निकालि देलक।"

जेलरक हेतु अलगसँ भगतै करबाक ओरिआन ओकरे घरमे दूपहर रातिक भेलैक। जहलसँ जेलरक कारसँ कालू भगता जेलरक सरकारी डेरा पहुँचल। ओतए जेलरक घरबालीकेँ देखितहि छगुन्तामे पड़ि गेल। एहन सुन्दरि..!

जेलरक घरबाली छलहो हजारमे एक। गोर-नार ,६ फुट नाम, हरिअर-हरिअर आँखि,चाकर माथ, सभ मिलि लगैक जेना स्वर्गक परी होइक। कालू एकटक ओकरे देखैत रहि गेल। जेलर भगतैक समानसभक जोगारमे लागल छल आ कालू भगता दोसरे दुनिआमे मगन छल। जेलर पूजाकसभ वस्तु लए आएल। ओकरा देखिते कालू भगल शुरु केलक।

"मोसकिल छौक एकरा बचेनाइ। पिशाच लागि गेल छैक।"

"जे करबै से अहीं करबैक। हम तँ अहाँक शरणमे छी।"

"पहिने की करैत रहलह? आब तँ मामिला हाथसँ निकलि गेल अछि।"

"की भेलैक?"

"हम की कहबौक, इएह ले, अपने बकतौक।"

आओर ओ बकए लगलीह-

"हमरा केओ आओर नहि बचा सकैत अछि। भगते हमर जान बचाओत...।"

ई बाजि कए ओ बेहोस भए गेलि। भगता की केलकै, कोन मंत्र पढ़लकैक जे ओकर बाद निशा ओकरे बात बूझैक। जेलर बहुत चिकरल- “निशा! निशा! "

कोनो उत्तर नहि आएल। निशा निःशब्द ओहीठाम भूलंठित भए गेलि। जेलर बाबूक परेसानीक अंते नहि छल। एमहर घरबाली बेहोस छलैक ओमहर केओ एसपी साहेबकेँ सिकाइत कए देलकैक जे जेलसँ कालू भगत बिला गेल। जेलमे छापा पड़ि गेल। “आब की होएत?”-से सोचि-सोचि कए जेलर परेसान छल, ताबे एसपी साहेबक फोन आबि गेलैक। जेलर इएह-ले ओएह-ले ओतएसँ जेल बिदा भए गेल। आ भगता...?

जेलरकेँ देखिते एसपी साहेब चिचिआ उठलैक- “रघु। ई की भए रहल अछि?तूँ जेलक माहौलकेँ चौपट कए देलह अछि। आब तोहर नौकरी भगवानो नहि बचा सकैत अछि।"

"माफ कएल जाए सरकार!"

"तोहर गलती अक्षम्य छह। तोरा जेलर राखि कए हम अपन नौकरी अपने खा जाउ। ई नहि भए सकैत अछि। तोरा वारंबार चेतौनी दैत रहलिअह, मुदा तूँ सुधरबाक बजाए उल्टे रस्ता धेने छह। तखन जे हेबाक से हेबे करत। भए सकैत अछि तोरा जहलो जाए पड़ए।"

जेलरक हालति देखए जोकर छल। ओकरा मुँहसँ बकार नहि निकलि रहल छल। तथापि प्रयास कए ओ बाजल- “सरकार देखि नहि रहल छिऐक?"

" कथी देखबैक? एहिठाम की छैक जे देखबैक।"एसपी साहेब एतबा बाजल छलाह कि जेलर बेहोस भए ठामहि खसल। ऐसपीक सामने कालू भगता सद्यः ठाढ़ छल।

"तूँ कतए चलि गेल रही? -एसपी साहेब बजलाह।

"हम तँ सदरिकाल एतहि छी सरकार।"

"झूठ, झूठ।" -एसपी साहेब चिचिआ उठलाह।

"अहाँकेँ जकरेपर विश्वास होअए तकरे सँ पुछारी कए सकैत छी, मुदा एहि हेतु जेलर बाबूकेँ प्रताड़ित नहि कएल जाए। ओ एकदम निर्दोष छथि। जाने भगवान।" -कालू भगता एसपी साहेबकेँ गोहरबैत बाजल। एसपी साहेब सौंसे जेल घुमि अएलाह, एकटा कैदी कालूक विरुद्ध नहि बाजल। एसपीकेँ ठकबिदरो लागि गेलनि। सोचए लगलाह- “आखिर सिकाइत के केलक? जौं सिकाइत झूठ छल तैओ किछु तँ कारण रहल हेतैक।“मुदा किछु प्रमाण नहि भेटि रहल छलैक। हारि मानि कए एसपी साहेब ओतएसँ अपन डेरापर आबि गेलाह।

जेलरकेँ कालू भगताकेँ जेलमे देखि छगुन्ता लागि गेलैक। सोचए लागल- “ई कोना एतए आबि गेल?" कालू ओकर मोनक बातकेँ तारि गेल आ जोरसँ ठहाका पाड़लक। जेलरक मुँह देखए वला छल।

ओ जहलसँ डेरा पहुँचल तँ कालू भगताकेँ बाहर निकलैत देखलक। ओकर माथामे किछु नहि सन्हिआ रहल छलैक। सत्य की अछि?जे ओ जहलमे देखलक से आ कि जे ओ अखन देखि रहल अछि? दुनू घटना प्रत्यक्ष देखलक। अचानक ओकरा चिचिआ गेलैक- “निशा!निशा!"

"की बात?”- निशा हँसि रहल छलि।

“कालू कतए छल?"

"जतए अहाँ छोड़ि गेल रहिऐक।"

निशाक मुँहे ई सुनि जेना ओकरा बकोर लागि गेलैक। मुदा आब की? जेलर बाबू निशा दिस टुकुर-टुकुर देखैत रहि गेलाह। जेलर केँ ओहि राति निन्न नहि भेलैक। भरि राति टुकुर-टुकुर तकैत रहि गेल। एहि करोटसँ ओहि करोट करैत रहल। मुदा निशा फोंफ काटि रहल छलि। एतेक गहीर निन्नमे ओ कैक दिनक बाद देखाइत छलीह। ताहि बातसँ रघुकेँ खने चिंता होइक,खने मोनमे चैनो लगैक। ओ सोचए लागल- “किछु बात तँ छैक एहि भगतामे जकर असरि सद्यः देखा रहल अछि। आइ कतेको दिनपर निशा चैन छथि, अन्यथा रातिभरि कछमछ करैत बीति जाइत छलनि। अपने तँ परेसान रहिते छलीह, हमरो बेचैन केने रहथि।“

भोर भेलैक। अखबार वला अखबार फेकलकैक। दूध वला दूध दए गेल, काजबाली काज करए आबि गेलि, मुदा निशाक निन्न नहि टुटलनि। बेचारे जेलर बाबूकेँ ड्युटी जेबाक रहनि। ऊपरसँ राति भरिक जगरना छलनि। अपने चाह बनेलाह। निशाकेँ पड़ले देखि नहि रहल भेलनि। बाजि उठलाह-

“ऐ सुनैत छी। हम आफिस जा रहल छी। घर बन्द कए लिअ।"

निशा करोट बदललीह, मुदा उठि नहि सकलीह। जेलरबाबू फेर किछु बजलाह। केबारकेँ अपनेसँ सटा देलखिन आ आगू बढ़ि गेलाह।

जहल जाइत काल जेलर बाबू केँ जेलसँ फोन आएल। कैदीसभकेँ आइ न्यायालयमे पेशी छलैक। अखन धरि पुलिसक गाड़ी नहि आएल छलैक। पछिलो तारिखपर देरीसँ न्यायालय पहुँचबाक कारण जेलरकेँ जज बहुत फज्झति केने रहैक। मुदा ओ की करैत?बिना पुलिस सुरक्षाकेँ कैदीसभकेँ जेलसँ बाहर तँ नहि लए जा सकैत छल। खैर!कनी कालमे पुलिस सदल-बल पहुँचि गेलैक।

थाना जरेबाक कांडक बिचाराधीन कैदीसभक जमानति अर्जीपर सुनबाइ भेलैक। सरकारी ओकील जमानतिक बिरोध करैत रहलक मुदा जज ककरो नहि सुनलकैक। एगारहो विचाराधीन कैदीकेँ जमानति दए देलक। कैदीसभक प्रसन्नताक ठेकान नहि छल। सालभरिसँ एहि दिनक प्रतीक्षा कए रहल छल। अनेरे जेलमे सड़ि रहल छल। कहबी छैक जे खसी मारि घरबैया खाए आ हत्या लेने वाभन जाए। सएह भए रहल छल। पुलिस प्रशासनपर उच्च अधिकारीसभक दवाव पड़ल रहैक आ ओसभ अपना-आपकेँ बचेबाक हेतु जे जतए जाहि हालतिमे भेटलैक तकरा पकड़ने चलि गेल। सभ चकित रहि गेल। ककरो कोनो सुनबाइ नहि भेलैक। थानाकेँ जराएब भारी परलैक। केलक केओ,भरलक केओ।

सालभरिक बाद सभगोटे गाम पहुँचल तँ सौंसेगाममे प्रसन्नताक वातावरण पसरि गेल। सभ नाच-गान करए लागल। सत्य नारायण भगवानक पूजा राखल गेल। ढ़ोल, हरमुनिआ, झालि, मृदंग समेत तमाम लोकसभ भगवानक भजन गाबैत पूजा-पाठ संपन्न केलाह। एतेक दिनक बाद लोटन साँझमे जखन पोखरि दिस गेल तँ संयोगसँ हमरे गाछीमे पहुँचि गेल। पुरनाबात सभ बिसरा गेल रहैक। पोखरि दिस बैसले छल कि गाछक फुनगीपरसँ ओहिना ककरो कानबाक अबाज सुनएमे अएलैक। लोटन इएह-ले ओएह-ले भागल। ढ़ेको बान्हबाक होस नहि रहलैक। लोटा कतए खसलैक सेहो नहि बूझि सकल।

लोटन बेसुध पड़ल छल। ओसारापर ओकरा लोकसभ घेरने छल। जकरा जे उपाय फुराइक से करैत छल। मुदा ओ टस सँ मस नहि होइत छल। देह बोखारसँ जरि रहल छल। मुँहसँ लार खसि रहल छल। ककरो किछु नहि बुझा रहल छलैक जे आखिर ओकरा भेलैक की? एहन परिस्थितिमे गाममे एकमात्र समाधान छल-कालू भगता। मुदा ओ गाममे नहि छल। ओहि दिन जमानति भेलाक बाद  सभगोटे वापस आबि गेल। कालू कहलकैक जे ओ सिमरिआ जा रहल अछि। गंगास्नान केलाक बादे गाममे टपत। तकरो आइ तीन दिन भए गेल मुदा ओ गाम नहि पहुँचल।

लोटनक हालति खराब भेल जा रहल छल। आङनमे लोक करमान लागल छल कि कतहुँसँ ढेपक वर्षा होमए लागल। की-कहाँ सभ खसए लागल। लोकसभ इएह-ले ओएह-ले भागल। सभक मुँहमे एकेटा गप्प रहैक- “भूतक प्रकोप छैक।" कनीकालमे जखन भीड़ कम भेल आ आङनमे हबा सिहकल तँ लोटन आँखि खोललक।

घरक ऊपरसँ मखना जा रहल छल। लोटनकेँ देखि कए हँसल आ मोने-मोने बड़बड़ाइत आगू बड़ि गेल- "बँचि गेलह।"

ओहि दिन मखना यमलोक खाली हाथ लौटि गेल। यमराजक ओतए पेसी भेलैक। मखना थर-थर कपैत ठाढ़ छल कि यम महराज बमकलाह-

" लोटन लग जेबाक की औचित्य छल?"

"गलती भए गेलैक सरकार!"

“की सरकार, सरकार कए रहल छैं? एहि तरहेँ तोहर काज नहि चलि सकैत छौक। सावधान भए जो।" यमराजक एहन सख्त रुखि देखि मखना काँपि गेल।

यमराज खतिआओन मंगओलाह तँ स्पष्ट भेल जे एखन तँ निशाक प्राण खिचबाक रहैक। एहन भारी गलती आखिर भेल कोना? ई सभ विचार-विमर्श चलिए रहल छल कि मखना भागल-भागल यमराजक दोसर पत्नी रेखा लग चलि गेल। ओकरा एना अफसिआँत देखि ओ पुछलखिन- “बात की अछि? एना किएक हाँफि रहल छह?"

मखना हाथ जोरि यमराज दिस इसारा केलक। ताबते यमराजजी ओतहि आबि गेल छलाह।q




 

 

 

Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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रविवार, 30 अप्रैल 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशनक चारिम खेपः

 


४

 

आइ ओहि घटनाक पाँच साल भए गेल। माएक पाँचम बरखी भए रहल छल। हमर मामा विधि-विधानसँ बरखीक व्यवस्था केने रहथि। सौंसे गामक ब्राह्मण भोजनक हेतु आमंत्रित रहथि। खूब नीक जकाँ काज भेल। थैह-थैह भए गेल। मुदा हमर मोन भोरेसँ उदास छल। काज करैत-करैत आँखि लागि गेल। सपना देखए लगलहुँ। लागल जेना माए आबि कए ठाढ़ छथि, कहि रहल छथि- “श्रीकांत कथुक चिंता नहि करह। हम सदरिकाल तोरे लग छी।

एतेक बाजि ओ हमर हाथ धए लेलीह। लाल टुह-टुह भगवती सन हुनकर आकृति देखैत बनैत छल। हम हुनका साष्टांग प्रणाम करए उठलहुँ कि मामाकेँ माथसँ हमर हाथ टकरा गेल। ओ हमरे लग सुतल छलाह। मामा अकचकाक उठलाह- “की भेल?”

 "माए…!" -एतबा बाजि हम बेसुध भए गेल रही। बैद बजाओल गेलाह। ओझा गुनी सेहो भेल। हम क्रमशः सामान्य होइत गेलहुँ। मुदा रहि-रहि कए माएक कहब मोन पड़ैत रहैत छल।

ओहि दिन इसकूलसँ आएल रही। दसमाक परिणाम आएल छल। हम प्रथम श्रेणीमे उतीर्ण केने रही । सौंसे मामागाममे हल्ला भए गेल छल। मामाक सभ प्रशंसा कए रहल छल। हम असारापर बैसल अखबार देखैत रही। ताबे माएक अबाज सुनाइ पड़ल, जेना कहि रहल छथि- “श्रीकांत! हरि कतए अछि?"ताबते जोरकेँ हल्ला भेलैक। गाममे मारि भए गेल छलैक। कनीके कालमे मामा लहु-लुहान भेल पड़ल छलाह। हरि कोनो काजसँ बजार गेल छलाह। काज कए लौटि रहल छलाह। गामक लगीच आबि गेल छलाह कि चओरमे चारि-पाँचटा लठैतसभ घेरि लेलकनि आ दे दनादन,दे दनादन,लाठीक वर्षा कए देलक। ओ तँ रच्छ भेल जे कनीके कालक बाद इसकूलमे छुट्टी भेल आ चटिआसभकेँ अबैत देखि ओ सभ हरिकेँ ओही हालतिमे छोड़ि कए भागि गेल। मास्टर साहेबकेँ रक्तरंजित देखि चटिआसभ चिकरए-भोकरए लागल। लग-पास बहुत लोकक करमान लागि गेल। इसकूलसँ मास्टरसभ दौड़ल अएलाह। सभ छगुन्तामे छल। हरि सन निर्विवाद लोकपर एहन घातक प्रहार ! एना किएक भेल? के केलक?

हरिक बहुतरास जथा-पात महराजक सिपहसलारसभ नीलाम कए बेचि देने छल। रहि-रहि कए ओकरा ई बात ध्यान अबैत रहैत छल। एहि प्रकारसँ दरिद्र भेनिहार कोनो ओ एसगरे नहि छल। गाम-गाम एहन लोकसभ भरल छल जकर एहने इतिहास छल। गाहे-बगाहे ओ अपन आक्रोश व्यक्त करैत रहैत छलाह। एहिबातसँ कुपित भए जमींदारक लठैतसभ हुनकापर आक्रमण कए देलक।

हरिकेँ मारि कए तिनू बदमास लंक लागि कए भागि रहल छल। बीचमे धार छलैक। भादव मास छल। धारमे पानि भरल छल। धारमे कुदि गेल। ऊपरसँ मेघ बरसए लगलैक। तथापि ओसभ हेलि गेल आ पता नहि कतए जाए ऊपर भेल। पुलिस बहुत प्रयास केलकैक मुदा केओ नहि पकड़ाएल। पुलिससभ सभ घुड़ल आ हरिकेँ ओही जीप पर लादि कए अस्पताल लेने चलि गेल।

हरिकेँ ऊपर कएल गेल एहि घातक प्रहारक समाचार केना-ने-केना पुलिस मोहकमामे ऊपर धरि पहुँचि गेल। कहाँदनि जासूसी खबरि भेटलैक जे एहि घटनामे जन विद्रोहक संभावना अछि। एसपी, कलक्टर सभ दन-दन कए घटनास्थल पर पहुँचल। लोकसभकेँ पूछ-ताछ होमए लागल। केओ कोनो निजगुति बात नहि कहैक। एसपी तमसा गेल आ जएह सामने अबैक तकरे पकड़ि कए थाना लेने चलि गेल।

एहिबातसँ लोकमे आक्रोश आओर बढ़ि गेल जे पुलिसक उच्च अधिकारी निर्दोष लोकसभकेँ पकड़ि कए थानामे बंद कए देने अछि। गाम-गामसँ लोकसभ जुटए लागल। सभ मिलि कए थानाकेँ घेरि लेलक। ओहि भीड़मे कैकटा अगिमुत्तूसभ छल। ओसभ गोली-बारुदसँ लएस छल। दना-दन फटक्का फुटबाक अबाज भेलैक आ पुलिससभ लंक लागि कए भागल। थाना धू-धू कए जरए लागल। एसपी, कलक्टर सभ फेल भए गेलाह। किछु काल लेल एहन लगलैक जेना गुंडासभक राज भए गेल। पुलिस लगमे कमे लोक छलैक। केओ ई नहि सोचि सकल जे एकटा मामुली घटना एहन रुखि लए लेत। मुदा जे हेबाक से भए गेल रहैक।

एहि हंगामाक खबरि महराजक ओहिठाम धरि गेल। एहि घटनाक्रमसभसँ ओ बहुत विचलित छलाह। की पता काल्हि जा कए ई सभ राज-काजमे संकट ने ठाढ़ करए" -महराज सोचथि। अस्तु, ओ अपन सिपहसलारसभकेँ सरकारक उच्च अधिकारीसभ लग पठओलथि जाहिसँ एकरा नीकसँ दबा देल जाए। महराजक प्रयास कारगर भेल। महराज आओर हुनकर सिपहसलारक सह पाबि सरकारी महकमाक रुखि बहुत आक्रामक भए गेल। दूपहर राति धरि पुलिसक उच्च अधिकारीसभक बैसार होइत रहल। निर्णय भेल जे गौआँसभकेँ सबक सिखाओल जाए। रते-राती पुलिसबलकेँ गामपर छापामारीक हेतु पठाओल गेल। दूपहर रातिमे पुलिस सभ दन-दन करैत गाममे प्रवेश केलक। लुच्चा,लफंगासभ तँ पहिने घर धए लेने छल। मुदा पुलिसकेँ तँ लोकसभकेँ सबक सिखेबाक रहैक से जतए जे भेटलैक तकरा पकड़ने चलि गेल। दूटा पुलिसक जीपमे एगारह गोटेकेँ पकड़ि कए सोझे एसपी लग लेने चलि गेल। एसपी साहेब प्रसन्न भेलाह। सभकेँ रातिभरि राजपुरामे पुलिस हाजतमे राखल गेल। ओकरासभ पर दुनियाँ भरिक धारा लगा देल गेल। देशद्रोहसँ लए हत्याक प्रयासक धारा लगाओल गेल। पुलिसक क्रोधक क्रूड़तम प्रतिफल सामने छल।

हालति तेहन छल जे केओ- ककरो सुधि लेनहार नहि रहलैक। गाममे जे केओ बाँचल छल सभ भागल। मात्र स्त्रीगण, बच्चा ओ वयोबृद्ध लोकसभ गाममे रहि गेलाह। कालू भगता सेहो अन्दर छल। गाममे लोक सभ फुसफुसेबो करैक जे कहाँ गेलैक ओकर भगतै?तेहन छल तँ रोकि लैत पुलिसकेँ। बँचा लैत अपनोकेँ तखन ने?

मुदा कालू तँ जहलोमे अपन रस्ता पकड़ि लेलक। जहलक अधिकारीसभकेँ कोना-ने-कोना जाइते देरी मिला लेलक। साँझक नित्य ओकर भगतै होमए लागल। ओहूठाम कारनीसभक पाँति लागि गेल। की जहल, की गाम, कालू भगत अपन भगतैसँ सभकेँ गुम केने छल।

ई बात एसपी साहेबकेँ कान धरि पहुँचल। पहुँचैक रहैक । एसपी जेलरकेँ बजओलक। ओहि समयमे आओर केओ नहि छल।

"जहलमे की सभ भए रहल अछि?" -एसपी पुछलकैक।

"सरकार! झूठ नहि कहब। जहिआसँ ई भगता जहलमे आएल रोज रातिकँ हमर डेरामे भूत-प्रेत चक्कर लगा रहल अछि। काल्हि तँ हद्दे भए गेलैक?” -जेलर बाजल।

"की भेलैक? तोरा एहिना सभठाम भूते देखाइत रहैत छह? जहन नौकरी जेतह तखनसभ भूत झड़ि जेतह। अपन भाभटि जल्दी समटह।" -एतबा कहि एसपी साहेब जेलरकेँ ओतएसँ भगा देलकैक।

एसपी साहेबसँ डाँट खा कए जेलर अपन डेरा पहुँचले छल कि ओकर घरबाली सरकारी डेराक बाहरे ठाढ़ छलि।

"बाहर किएक ठाढ़ छी?" -जेलर बाजल।

"घर रहए जोकर नहि अछि"।

"की भेल?"

"अपने जा कए देखि लिअ।"

अन्दर जाइत जेलरकेँ माथा घुमए लगलैक। सौँसे घरमे अक्कर-बक्कर भड़ल छलैक। ओछाएन पर की- की ने फेकल छलैक। ततबे नहि भानस धरि नहि छोड़ने छलैक। मुँहथरे पर मरल कौआ खसल छलैक। ई सभ देखि कए जेलरक माथा सुन्न भए गेलैक।

जेलर बाबूकेँ किछु नहि फुराइक। ओमहर एसपी साहेबक ठेङा तँ एमहर भूत-प्रेतक आतंक। ओकरा तँ लगैक जे चिंतासँ हृदयाघात भए जेतैक। डेरामे घरबाली असगरे रहैत छलैक। जेलर बाबू अपने जेलक समस्यासभमे व्यस्त रहैत छलाह। जहिआसँ कालू भगता जहल आएल नित्य नव-नव फसाद होमए लागल। पुलिसक उच्च अधिकारी सेहो किंकर्तव्यविमूढ़ भए गेल रहथि। हुनकोसभकेँ मोनमे ई बात घुमए लागल- “किछु बात तँ छैक अन्यथा जेलर बाबू एतेक परेसान किएक रहितैक?" मुदा सामना-सामनी जखन जेलर होथि तँ ओसभ ओकरे डाँटि देथि, कोनो आओर रस्तो नहि छलनि। सरकारी काज तँ चलेबाक छलनि। मुदा कालू भगत एसगरे सभपर भारी पड़ि रहल छल। सभसँ खराब हालति तँ जेलरबाबूक रहैक। जेलमे कालू भगताक डर,घरमे घरनी परेसान आ बाहर अधिकारीसभ कस्तन केने। कखनोक तँ मोन ततेक उचटि जाइक जे होइक जे फाँसी झूलि  जाए। फेर सम्हरए। डर होइक जे कहीं भूत-प्रेतक असरि तँ नहि भए रहल अछि।

जेलरक कमजोरी कालू भगता बूझि गेल। ओ तँ लोकक मोन तारि लेबामे माहिर छल। रहि-रहि कए ओ जेलर बाबूकेँ डराबए लागल। हद तँ तखन भए गेल जखन जेलरक सामनेमे कालू भगता महिला वार्डक कैदीसभकेँ झाड़-फूक शुरु कए देलक आ ओ मूकदर्शक बनल रहल। कालू भगता नीकसँ ओकरा अपन चांगुरमे लए लेलकैक। कालक्रमे कालूक प्रभावमे पूरा जहलक कैदी सभ आबि गेल। महिला कैदीसभ तँ आगूए-आगूए रहैत छल। ककरो साहस नहि होइक जे कालू भगतकेँ टोक देत। के अनेरे अनिष्ट बेसाहति? जेलरबाबू रोज कालीमाताकेँ प्रार्थना करथि जे ई कैदीसभ छुटि जाए। ओकीलोसभकेँ यथासाध्य उत्साहित करथि, मुदा तेहन-तेहन धारासभ लागल छल जे ककरो जमानति नहि होइक। जेलर माथ ठोकि लिअए?

घरबालीकेँ साहस दैक। हनुमान चालीसाक कैटा किताबसभ आनि कए सिरमामे राखि देलकैक। मुदा जेलरक घरबाली कोंढ़केँ कमजोर रहैक। ताहीबातक जेलरकेँ चिंता रहैक। कहीं एहन ने होइक जे ओ ड्युटी करैत रहए आ घरबालीक संगे किछु अनिष्ट भए जाइक। तेँ ओ सोचलक जे कालू भगताकेँ मिला कए राखल जाए। ओकर घरबाली केँ किछु भए गेलैक तँ के काज देत? q




 

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