रविवार, 7 मई 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशन(सातम, आठम आ नवम भाग):

 



 

मास्टर साहेबक संग भेल मारि-पीटक कए साल बीति गेल मुदा पुलिस ककरो पकड़ि नहि सकल। असलमे थानाकांडमे सभ तेना ने ओझरा गेल जे ककरो एहि मामिलाक सुधि नहि रहलैक। फेर मास्टर छलाह मामूली आदमी। आगू नाथ ने पाछू पगहा। ककरा की कहितथि? जान बाँचि गेलनि सएह बहुत। फेर अपन काजमे लागि गेलाह। इसकूल जाथि आ विद्यार्थीसभकेँ खूब मेहनतिसँ पढ़ाबथि। हुनका ताहिबातसँ इलाकामे यश रहनि। गाम-गामक विद्यार्थीसभ पढ़बाक हेतु हुनकर डेरा पर आएल करथि। ककरोसँ पाइ नहि लैत छलखिन।

हम मैट्रिकक परीक्षा प्रथम श्रेणीमे पास भए गेल रही। मुदा आगू की कएल जाए से फुरेबे नहि करए। भितर इच्छा रहए जे आगू पढ़ी मुदा तकर कोनो जोगारे नहि छल। घरक हालति तेहने छल तहन तँ रहि गेलाह मामा। ओहो सालभरि इलाजक चक्करमे परेसान छलाह। आब किछु स्थिर भेलाह। गामक लोक सभ से जमानति पर छुटि कए आबि गेल छल।

एकदिन अहिना बैसल रही की मामा कहलाह- श्रीकांत़ हमरा मोन होइत अछि जे तूँ आगू पढ़ाइ करह। सालभरि समय तँ तोहर बर्वादे भए गेलह। मुदा आब हालति ठीक अछि। हमरा जे पार लागत से मदति करबे करबाह। संगे गामोसँ किछु मदतिक जोगार करबाक प्रयास करब।"

"हम तँ स्वयं पढ़बाक इच्छुक छी मुदा अहाँक हालति देखि कए साहस नहि भेल।" -हम कहलिअनि।

"कोनो बात नहि। जे बीति गेलैक से बीति गेलैक। आगूक सोचल जाए। काल्हि हम दुनू गोटे पुबारिगाम चलब। देखैत छी, ओतए की हाल अछि।"

"ठीक छै।"q

 

 

मामा संगे हम अपन गाम पुबारि टोल पहुँचलहुँ। हमर मामागाम पछबारि टोल हमर गामसँ सटले छल। पैरे दस मिनटक रस्ता छलैक तथापि ओतए कतेको सालक बाद जा रहल छलहुँ। माता-पिता नहि रहलासँ गामक कोनो आकर्षण नहि रहि गेल छल। हमर जथा-पात दिआदसभ हथिआ चुकल रहथि। ओसभ निश्चिन्त रहथि जे भने ई चलि गेल। गाम पहुँचि कए अपन फूसक घरकेँ ताकए लगलहुँ। नामो निसान खतम छल।

घराड़ीकेँ चारूकातसँ घेरि कए तरकारी रोपि देल गेल छल। मामा संगे हमरा देखि हमर काका मुँह घुमा लेलाह। जेना कोनो मतलब नहि होनि। हमर घरक लगीचमे नव-नव घर बनि गेल छल। कहि नहि के सभ ओतए आबि कए बसि गेल छलाह आ कि पुरने घरकेँ फेरसँ बनाओल गेल छल? तरह-तरहकेँ बातसभ मोनमे अबैत रहल। जखन काका नहिए टोकलाह तँ हमही आगू बढ़लहुँ- "काका गोर लगैत छी"

"के छी?"

"अहाँक भातीज, श्रीकान्त।"

"एतेक दिन पर कतएसँ ऊपर भेलह?"

से कहि तेना ने मुँह घुमओलथि जेना हमरासँ कोनो बहुत पैघ अपराध भए गेल हो। मामा सभटा बात देखि-सुनि रहल छलाह। हुनका तँ काका टोकबो नहि केलखिन। एहन हालतिमे की उमीद राखल जा सकैत छल? तथापि हमर मामा कहलखिन- "हमरा नहि चिन्हलहुँ? हम छी हरि, श्रीकान्तक मामा।"

"चिन्हव किएक नहि, मुदा अहाँ तँ आएब-जाएब बंद कए देलहुँ, कतेक साल पर आइ कोना मोन पड़लहुँ?"

हमर काका महराजक जेठरैयत रहथि। महराजक सिपहसलारसभसँ जान-पहिचान रहनि। पुलिसमे सेहो जान-पहिचान छलनि। ताहिबातक बहुत घमंड रहनि। जकरे -तकरे पुलिस, थानाक धमकी दैत रहितथि। हुनकर नाम छलनि देवीकान्त मुदा गौंवासभ देबू कहनि। ओना ओ गाममे चर्चित छलाह तकर प्रमुख कारण रहैत जे ओ किछु झार-फूक सेहो करथि आ कालू भगतासँ बहुत गहींर दोस्ती रहनि। हमर पिता तँ कमे बएसमे मरि गेलाह। हम नेने रही। जे किछु चास-बास छल सभ  हमर काका दखल कए लेलाह आ तेहनक निश्चिन्त भए गेलाह जेना हम जीविते नहि होइ।

कनी काल हम आ मामा अहिना ठाढ़े रही की कालूभगता कतहुँ सँ आएल।

"मामा गोर लगैत छी।"

"नीके रहह। कतएसँ आबि रहल छह?"

"अहाँकेँ तँ सभ बात बूझले होएत।"

"की बात?"

"साल भरिसँ जहलमे बंद छलहुँ। मोसकिलसँ छुटलहुँ अछि।"

"बहुत दिनपर भेंट भेल अछि।"

आउ ने, चैन सँ बतिआएब।” -से कहि कालू भगता अपन घर दिस बढ़ि गेल। हम आ मामा ठाढ़े रही। काका बैसबो लेल नहि कहलाह। उल्टे मोनमे तामस रहनि जे हमसभ किएक अएलहुँ? जतए छलहुँ ततए छलहुँ,एहिठाम आबए के कोन काज?

जखन काका अपने किछु नहिए पुछलाह तँ हमहि कहलिअनि-

मैट्रिक पास कए गेलहुँ। सालभरिसँ बैसल छी। सोचि रहल छी जे आगू पढ़ाइ हेतु नाम लिखाबी। मुदा टाकाक जोगार नहि भए रहल अछि।"

एतेक बात सुनितहि ओ पाछू घुमलाह आ लोटा उठओने कलम दिस बिदा भए गेलाह। कोनो उत्तर नहि देलाह। किछु आश्वासन नहि। हमर मामाकेँ नहि रहल गेलनि। ओ तमसा कए बजलाह-

"अहाँक भातिज किछु कहि रहल छथि।"

"से की?"

"ओकर हिस्साक खेत छैक तकरा बेचि कए ओकरा मदति कए दिऔक।"

"कोन खेतक गप्प कए रहल छी?"

"पैत्रिक खेत-पथारमे आधाक ओहो हकदार अछि। एखन ओकरा जरुरत छैक, पढ़ाइ करक छैक। अहाँकेँ स्वयं सोचबाक चाही। "

एतेक बात ओ बजने छलाह कि हमर काका हाथसँ लोटा हुनकापर फेकलाह। रच्छ भेल जे ओ माथ छिप लेलाह नहि तँ पता नहि की होइत? मामाकेँ नहि रहल गेलनि। चिकरए-भोकरए लगलाह। ताबते हमर पितिऔत लोटन सेहो आबि गेल आ मामाकेँ गट्टा धए दरबाजा परसँ बाहर जेबाक हेतु संकेत केलक। ओहिठाम कतेको गोटे जमा भए गेल छलाह, मुदा केओ किछु नहि बाजल। हालति काबूसँ बाहर होइत देखि हमहीं मामाकेँ शांत केलहुँ आ वापस मामागाम बिदा भए गेलहुँ।

गामसँ बहराइत अपन गाछी बाटे जाइत रही की माएक सारा देखाएल। पैर थकमका गेल। आँखिसँ नोर झर-झर खसए लागल। मामा बूझि गेलाह। हमर हाथ पकड़ि लेलथि आ कहए लगलाह॒-

"चिंता नहि करह। तोरा भगवान मदति करथुन। "

एतबा बात ओ कहने छलाह कि सिनुरिआ गाछ हिलए लागल आ धप्प दए हमर दहिना पैर लग किछु खसल। मामा रुकए कहलाह-ताबे तँ हम ओकरा उठा चुकल छलहुँ। पोटरी कसि कए बान्हल छल। ऊपरसँ अबाज भेल-

"एहि पोटरीकेँ मामागाम पहुँचि कए खोलिअह।"q

 

 

हम दुनू गोटे पोटरीकेँ कान्हतर दबने डेगारि कए अपन टोल दिस जाइत छलहुँ कि फटकिएसँ कालू भगता अबाज देलकनि-

"मामा! मामा! बिना भेंट केनहि चलि अएलहुँ।"

मुदा मामा अन्ठा देलखिन आ आगू बढ़ैत रहलाह। कनीके कालमे अपन दरबाजापर पहुँचलाह। ओहि पोटरीकेँ अन्दर लए गेलाह। दुनू गोटे मिलि कए ओकरा खोलए लगलहुँ। पोटरि खोलितहि चम-चम करैत कैटा सोनाक सिक्कासभ देखाएल। मामा तँ डरा गेलाह जे ई सभ आएल कतए सँ मुदा हमही हुनका बुझा-सुझा कए ओहि सिक्कासभकेँ सम्हारि कए रखलहुँ। बीसटा सोनाक सिक्का-सोचिए कए मोनमे आश्चर्य होइत छल। हम कहलिअनि-

"ई माएक आशीर्वाद थिक।"

 आब किछु सोचबाक काज नहि। तुरंत अपन नाम कालेजमे लिखा लएह।"

मामाक बात हमरो पसिन्द भेल। ई गप्प-सप्प करिते छलहुँ कि कालू भगता मामाक ओहिठाम पहुँचि गेल। मामा मोने-मोन सोचए लगलाह- "ई किएक पछोड़ केने अछि?"

दरबाजापर कालू जोर-जोरसँ अबाज लगा रहल छल-

"बिना भेंट केनहि चलि अएलहुँ। एतेक दिनपर भेंट भेल छल। बहुत रास गप्प-सप्प करबाक छल।"

"की कहैत छी? देबु ततेक हल्ला करए लगलाह जे ओहिठामसँ जल्दीए चलि अएलहुँ।"

"बात की छैक?"

बात की रहतैक? कहलिअनि जे श्रीकांत पढ़ए चाहैत छथि। ताहि हेतु किछु टाकाक जोगार करक छैक से हुनकर हिस्साक जमीन बेचए चाहैत छी। एतबा सुनितहि ओ हमरा ऊपर लोटा फेकि देलाह। संयोगसँ बँचि गेलहुँ नहि तँ कपार दू टूक भए जाइत।

"एहि मामिलामे अहाँ एसगर नहि छी। हमसभ अहाँक संग छी।"

कालू भगताकेँ बैसबाक आग्रह केलहुँ। ताबे चाह बनि गेल छल। चाह पीबैत-पीबैत ओ अपन खिस्सासभ कहए लागल।

कालू गप्प-सप्प शुरुए केने छल कि ओकर मोबाइल बाजए लगलैक।

"के छी?'

"जेलर बाबू।"

" सभ ठीक अछि ने?"

"ठीक कहाँ अछि? निशाकेँ रहि-रहि कए चक्कर आबि जाइत छैक। कोनो इलाज असरि नहि कए रहल छैक।"

"हम तँ गाम आबि गेल छी।"

"किछु करिऔक, नहि तँ ओकर जान नहि बाँचत।"

"मुदा हमर अखन गाम छोड़ब संभव नहि अछि कारण दशमीक समय आबि रहल छैक। भगवतीकेँ जगेबाक छैक।"

"कोनो उपाय करिऔक।"

जेलर बाबूक हालति बहुत पातर भए गेल छल। कोनो रस्ता नहि देखि कालू कहलकैक- "एकहिटा उपाय बुझा रहल अछि।"

"की?"

"हुनका संगे अहाँ हमरा ओतए चलि आउ।"

"ठीक छैक। हम आइए साँझ धरि पहुँचि रहल छी।"

यद्यपि कालूक छिज्जा जेलर बाबूकेँ नीकसँ बूझल रहैक तथापि ओ पत्नीक संगे कालू भगताक ओतए बिदा भए गेलाह। रस्तामे बिलाड़ि रस्ता काटि देलकनि। आब की हएत?

निशाक हालति खराबे भेल जाइत रहनि। वर्षाक समय छल। लोकसभ अपन-अपन घर धेने छल। जकरा तेहने अनिवार्य रहैक सएह बाटपर चलबाक साहस काए रहल छल। पानिक झट्टक बंद हेबाक नामे नहि लए रहल छल। ओहन हालतिमे ओ बससँ पुबारिगामक हेतु बिदा भेलाह। सौंसे बसमे मात्र पाँच गोटे छल। दू गोटे ईसभ एकटा आओर यात्री आ बस चालकक संग खलासी। कनीके काल बस चलल होएत की ओकर इंजन घुर्र-घुर्रक अबाज करए लागल। बाहन चालक कतबो प्रयास केलक मुदा ओ टस-सँ-मस नहि भेल।

सड़कपर भरि-भरि डाँर पानि बहि रहल छल। एहन हालतिमे की होइत? जे हेबाक से भेल। बसक इंजन जाम भए गेल। बस चालक पों-पों कए सीटी बजबैत रहल मुदा केओ कतहुँ मदति हेतु आगू नहि आएल। आब की होएत?

जेलर बाबू भगवान !भगवान! करैत रहलाह।रच्छ एतबे भेलैक जे निशाकेँ ठंड हबा लगलैक। ओ कने-मने सुधरल। जेलर बाबू कालू भगताकेँ फोन लगेलाह। कतबो प्रयास करथि, वारंबार एतबे संवाद आबए-

"नेटवर्क जाम अछि,एखन गप्प नहि भए सकैत अछि।"

 रातिक साढ़े न बाजि रहल छल। लोकसभ अपन-अपन घरमे सुतए चलि गेल। वर्षा रुकबाक नामे नहि लए रहल छल। बाहन चालक हाथ बारि देलक जे आब गाड़ी कतहुँ नहि जा सकैत अछि। यात्री चाहथि तँ उतरि जाथि। जेलर बाबू माथ ठोकि लेलाह।

एतबेमे बड़ी जोरसँ ठनका खसल। ततेक इजोत भेल जे लगैक जेना दिन भए गेल हो। ओही प्रकाशमे बससँ सटले एकटा फूसक घर देखेलनि। ओ निशा संगे उतरि कए ओहि खोपड़ी दिस बढ़लाह। मुदा कतबो प्रयास करथि केओ घरक फट्टक नहि खोलए। बससँ नीचाँ भए गेल रहथि। पानिसँ दुनू गोटे भिज गेल रहथि। घुरि कए बस दिस तकैत छथि तँ बस एकदम खाली। ने बाहन चालक छल,ने खलासी ने ओ तेसर यात्री। असलमे ओसभ महराजक आदमी छल जे महराजक इसारापर निशाक पछोड़ केने रहैत छल। ऐन मौकापर बस खराब कए ठाढ़ कए देलक आ चंपत भए गेल। आब तँ जेलर बाबू डरे थर-थर काँपए लगलाह। हुनका एना डराइत देखि निशा सेहो परेसान भए गेलीह। हारि कए ओ घरक दिस बढ़लाह। घरक अन्दर किछु-किछु अबाज सुनेलनि।

कनी घर खोलब।"

"के छी?

'हमसभ यात्री छी वर्षामे भीजि रहल छी। कनी केबार खोलू, जाहिसँ हमसभ आश्वस्त होइ।"

मुदा अन्दरसँ किछु उत्तर नहि अएलैक। वर्षा रुकबाक नामे नहि लए रहल छल। दुनूगोटे नीकसँ भीजि गेल रहथि। निशाक मोन खराब भए रहल छलनि। जाड़सँ थर-थर कपैत छलीह। ई सभ देखि कए जेलर बाबूकेँ नहि रहल गेलैक। ओ जोरसँ केबारमे धक्का मारलक। केबार खुजितहि ओ दुनू व्यक्ति की देखलाह की नहि जे बेहोस भए ठामहि खसि गेलाह ।q

 

 

 

 

Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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गुरुवार, 4 मई 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशनक छठम खेपः



 

 

ओहि राति निशा भरि राति कुहरैत रहलि। रहि-रहि कए विचित्र अबाज निकालए लगैक। जेलर परेसान भए गेल। ओकरा कालू भगता ध्यानमे अएलैक। कालूक भगतै असरदार भेल रहैक। निशामे चमत्कारिक परिवर्तन ओ आनएमे सफल भेल रहए। मुदा आब तँ ओ चलि गेल छल। किछु पता-ठेकाना सेहो नहि देने छलैक। की केना करए से जेलर बाबूकेँ फुरेबे नहि करैक। पड़ोसमे एकटा बंगाली डाक्टर रहैक। ओकरासँ पूर्व परिचय रहैक। दौड़ल-दौड़ल ओ बंगाली डाक्टरकेँ बजा अनलक। बेरि-बेरि आला लगा कए ओ देखैक मुदा सभ चीज ठीके बुझाइक। रक्तचाप सामान्य छलैक, हृदयक धड़कन सेहो ठीक रहैक, होसोमे रहैक तखन समस्या की रहैक? ओहो भुतिआ गेल। किछु नहि बूझि सकल। कहलक-

ई तँ बड़ ओझराएल मामिला लगैत अछि। एकर तँ सभ किछु सामान्य लगैत छैक, तखन एकर व्यवहार एहन किएक भए जाइत छैक?"

जेलर बाबू की कहितैक? बात-बातमे कालू भगताक चर्च भए गेलैक। बंगाली डाक्टरक माथा ठनकल। ओकरा भूत-प्रेतमे विश्वास नहि छलैक मुदा जे सद्यः देखि रहल छल तकर की समाधान दैत? ओकर सभटा ज्ञान हरा गेल छलैक। कहलकैक- हम हारि गेलहुँ जेलर बाबू। एहन मरीज आइ धरि नहि देखने छलिऐक। एकरा कोनो बड़का डाक्टर लग लए जाउ। मामिला बहुत ओझराएल बुझा रहल अछि। अपन ध्यान राखब ।" -से कहि ओ बिदा भए गेल।

जेलर बाबू माथ पकड़ि कए बैसि गेल। बंगाली डाक्टरकेँ जाइते निशाक चिकरब-भोकरब फेर जोर पकड़लकैक। जोर-जोरसँ मूड़ी हिलाबए लागलि। जेलरकेँ देखिते केकिआए लागैत छलि। जेलर चिंतासँ ततेक परेसान भए गेल जे लगैक जेना माथा फाटि जाएत। भोर होमए पर छल। कौआ डाक देलक। फरीच भए गेल रहैक। जेलर बाबूकेँ चाहक तलब धेलकैक। चाह के बना कए दितैक? घरनी बेसुध पड़ल रहैक। डाक्टरो किछु नहि कए सकल। आओर ओझरा कए चलि गेल। चाहक अमल ओ नहि रोकि सकल। अपनेसँ चुल्हा पजारलक। केदलीमे पानि,दुध,चाहक पत्ती,चिन्नी सभ एकहि बेर धए देलक आ आँचकेँ तेज कए देलक। दूइए मिनटमे चाह उफनाए लगलैक। जाबे साकंछ होइत-होइत ताबे आधा चाह उफनि कए खसि पड़लैक। कहुना कए बाँचल चाहकेँ कपमे धेलक आ पीबाक हेतु तत्पर भेल कि बाहर ककरो अबाज सुनेलैक।

"जय भवानी!जय भवानी!”

 जेलर बाबू चाह लेने घरक फटक खोलि कए बाहर भेलाह।

 "ई तँ कालू लागि रहल अछि? मुदा चिन्हा नहि रहल अछि। एकर चालि-ढ़ालि एकहि दिनमे एतेक कोना बदलि गेलैक?"

फेर सोचलक जे भए सकैत अछि जे धोखा भए रहल हो। राति भरिक जगरनाक कारण माथामे दुबिधा भए गेल हो। तेँ पुछलकैक-

"अहाँ के छी? ककरासँ भेंट करबाक अछि?"

 एतबा सुनतहि ओ चिकरए लागल-

"बूड़ि कहाँकेँ? एकहि दिनमे बिसरि गेलह। तेँ तँ तोहर ई हाल छौक।"

एतबा बाजि ओ अपन तृशूल झमकओलक आ कमंडलसँ जल निकालि जेलर बाबूक ऊपर फेकए लागल आ कहलक-

अखने तोरा बुझेतह जे हम के छी।"

जेलर बाबू चाह पिनाइ छोड़ि दंडवत भए गेल।

गलती भए गेल। हम अहाँकेँ नहि चिन्हि सकलहुँ। मुदा एकहि दिनमे अहाँक रूप एतेक बदलि गेल?"

खबरदार! जे हमर रूप-रंग पर टोका-टाकी केलह। तोहर घरबालीक जान जा रहल छौक आ तूँ झौहर खेला रहल छैं?"

"झौहर? राति भरि जागल छी। डाक्टरकेँ सेहो बजओने रहिऐक। मुदा किछु फएदा नहि भेलैक उल्टे आओर मोन खराब भए गेलैक। डाक्टरो थाकि कए चलि गेल।"

"मोसकिलसँ ई बचलौक अछि। मखना यमपाश लए घुमि रहल छौक। सम्हरि जो।"

"की कहलिऐक? यमपाश..। बाप रे बाप...। आब की होएत? ई मुष्टंग के अछि?"

"सभटा तोही बूझि जेबही तँ भगता की करतैक?"

"कहुना कए एकर जान बचा दिऔक। जे कहब से करब।"

"बहुत देरी भए गेलौक। मोसकिल काज लागि रहल अछि।"

ई सभ दुनू गोटेमे गप्प भइए रहल छल कि जेलर बाबूक चारपर किछु बिचित्र सन अबाज भेलैक। ओ घर दिस दौड़ल। निशा बेहोस छलैक। छाती दिस तकलक। ऊपर-नीचाँ भए रहल छलैक। साँस चलि रहल छलैक। आब तँ ओ ठोहि पारि कए कानए लागल।

जेलर बाबूक कानब सुनि कए कालू भगता अन्दर आबि गेल आ ओकरा चार दिस इसारा केलकैक। मुदा जेलर बाबूकेँ किछु नहि देखा रहल छल। मुदा कालू साफे देखि रहल छल। मखना यमपाश फेकए हेतु तैयार छल मुदा ओकरा कोडवर्डे बिसरा गेल छलैक। यमपाश खुजिए नहि रहल छल। घामे-पसिने ओ परेसान छल। ओकर ई हाल देखि कालू भगताकेँ नहि रहल गेलैक। ओ चिचिआ उठल- तोरा केओ आओर नहि भेटि रहल छह जे वारंबार एहीठामक चक्कर लगा रहल छह?"

"तूँ हमरा लोकनिक कारबारमे हस्तक्षेप केनिहार के?"

एतबामे मखनाकेँ फोनपर घंटी बाजए लागल। देखैत अछि जे फोनमे लिखल अछि- यमराज"

ओकर सीटीपीटी गुम रहैक। कोडवर्ड बिसरा जेबाक कारण यमपाश चलि नहि सकलैक आ निशाक प्राण खिचबाक समय बीति गेल। आब की होएत? मखना घामे-पसीने भीजि गेल छल। ताबे ओकर मोबाइलक घंटी कैक बेरि बाजलैक। ओकरा ऊपर बजाहटि भए गेलैक। ओ लंक लागि कए भागल। ई सभ कालू भगता देखि रहल छल। आ भभा कए हँसए लागल।

"फेर ई बँचि गेल...।

भेलैक ई जे कोडवर्ड बिसरि गेलाक बाद मखना गलत-सलत कोड लगाबए लागल जाहिसँ यमलोकक नेटवर्क जाम भए गेलैक। यमलोकमे आपत्तिकालीन घंटी घन-घनाए लागल। यमराज तँ पहिनेसँ ओकरासँ तमसाएल छलाहे। एहि बेरक घटनाक बाद तँ ओ किछु करएपर अड़ल रहथि। मुदा जहन घैलक पेनी फुटल होइक तँ पानि अटकत कोना? इएह हाल छलनि यमराजक। मखना छल फेरल लोक। ओ यमराजक पत्नीकेँ तेहनक पोटने छल जे यमराज फिस्स भए जाइत छलाह। एहू बेर इएह भेल। ओ सोझे यमपत्नी रेखा लग पहुँचल आ सिसकी भरए लागल।

की भेल?की भेल?" यमपत्नी रेखा पुछलखिन।

की कहू? यमराजकेँ अहाँपर सक रहैत छनि। ताहि चलते हमरो जान लेबए पर लागल छथि। कोनो मौका बाम नहि जाए दैत छथि।"

"भेलैक की, से तँ बाजू?"

मखना सभटा बात नून-तेल लगाए कहि देलक आ इसारा पबतहि ओतएसँ घसकि गेल। यमराज पनपिआइ करए घर अएलाह तँ देखैत छथि जे यमपत्नी जमीनपर अखरेमे सुतल छथि। मुँह झपने छथि आ कानि रहल छथि। यमराजजी मोसकिलमे पड़ि गेलाहआब की भेल?”

"रेखा! रेखा!" कैक बेर अबाज देलखिन मुदा कोनो उत्तर नहि भेटलनि। मामिला गड़बड़ाइत देखि ओ रेखाक सिरमामे बैसि हुनका मनबएमे लागि गेलाह। मखना घरक खिड़की लग नुका कए सभटा दृश्य देखि रहल छल आ मोने मोने प्रसन्न भए रहल छल।

"चललाह हमरे ठीक करए। आब सम्हारथु ..." बड़बड़ाइत छल कि यमराजक नजरि ओकरापर पड़ल। ओ चिकरि उठलाह-

"दुष्ट...सावधान...।"

ई सुनितहि मखना इएह-ले ओएह-ले भागल।q


 

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Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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सोमवार, 1 मई 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशनक पाँचम खेपः

 


 

 

हमर मामा ककरा की बिगारने छलथिन जे हुनकर ई हाल कएलक?दिन-राति ओ अपन काजमे लागल रहैत छलाह। ककरोसँ कोनो मतलब नहि। एसगर छलाह। बिआह नहि केने रहथि। हमरे अपन संतान बूझि पालन-पोषण कए रहल छलाह। एहन निर्दोष आदमीकेँ के मारलक आ किएक? ई प्रश्न सभक माथामे घुमि रहल छल। पुलिस तँ दोसरे झंझटिमे फँसि गेल। लुच्चा-लफंगासभ थाना जरा देलक। ओकरसभक पुलिससँ कोनो कुन्नह रहल हेतैक मुदा फल भोगलक सौंसे गौँआ? तेहन-तेहन धारा लगा देने रहैक जे जमानति हेबाक बाटे नहि रहैक। अनेरे लोकसभ जहलमे बंद छल। कतेकोकेँ घर उजरए पर छलैक, कतेककेँ उजरि गेलैक कारण कमासुतसभ जहलमे सड़ि रहल छलैक। के-ककरा देखितैक? गरीबक टोल छल। नेतासभ अबैक,बोल भरोस दैक आ घसकि जाइक। केओ कोनो ठोस काज नहि कए सकल। एहन हालतिमे सौंसेगाम परेसानीमे पड़ि गेल छल। जे गाममे बाँचल छल से सभ अबाक छल, माथ-कपार नोचि रहल छल। समाधान किछु नहि फुराइत छल। एतेक गोटे जहलमे छल मुदा असली अपराधी के कोनो पता नहि छल। मास्टर साहेबकेँ के मारलक आ कथी लेल से अखन धरि पता नहि चलि सकल। प्रायः पुलिसोकेँ एहिसँ कोनो खास मतलब नहि रहैक। ओकरा तँ लोकसभसँ ओलि चुकेबाक रहैक आ तकर व्योंत सेहो भइए गेल छल। थाना जराएब बहुत महग पड़ल। एक-एक परिवारसँ कतेको गोटे बंद भए गेल छल। एकगोटेक तँ तीनपुस्त संगे जहलमे खिच्चरि खा रहल छल। समाधान ने पुलिसकेँ किछु फुराइक ने जहलमे बंद निर्दोष कैदीसभकेँ। कारण जखन एक बेर पुलिस लोकसभक विरुद्ध झुठो केस कए देलक तँ ओकरा वापस कोन आधार पर लैत? अपने आफत भए जइतैक। नौकरी बचेबाक फिराकमे कतेको निर्दोष प्राणी सालभरिसँ जहलमे सड़ि रहल छल।

कालू भगते किछु करत। सभक आश ओएह रहि गेल छल। जहलमे बंद सभ गौंवासभ ओकरा गोहरबैत रहैत छलैक। मुदा ओ तँ अपनेमे मस्त छल। जेलरकेँ डरा कए काबू कए लेने छल। दिन-राति रंग- रभस करैत बीति रहल छल। एहन आनंद तँ ओकरा गामोमे नहि छलैक। भगतै चलि रहल छलैक। कारनीसभकेँ फूँकि रहल छल आ सभसँ बड़का बात जे जेलरकेँ काबू कए लेने छल। जहाँ जेलर एमहर-ओमहर केलक कि ओकर घरबालीकेँ केना-ने-केना तेहन कए डरबैत छल जे जेलर उल्टे पैरे कालू लग दोड़ैत छल। खुसामद करए लगैत छल। बाह रे जेलर बाबू!

ऊपरका अधिकारी सभकेँ किछु- किछु पता लगैक मुदा ओसभ काजमे ततेक व्यस्त रहैत छल जे एकटा जेलक समस्या लए बैसि तँ नहि सकैत छल। मासिक बैसारमे जेलर केँ फज्झति कए दैक। जेलर सभ सुनि लिअए आ बात फेर ओतहि रहि जाए।

मुदा ई हालति कतेक दिन धरि चलितैक? विचाराधीन कैदीसभकेँ ऊपर न्यायालयमे सुनबाइ साल भरिसँ टलि रहल छल। मामिलामे कोनो प्रगति नहि होइक। अंतमे तंग भए जजसाहेब एसपीकेँ नोटिस कए देलथि। अगिला तारिखपर ओकरा न्यायालयमे अएबाक आदेश भेल। आब तँ जेलर बाबूक हालति बहुत खराब भए गेल ।। घर पहुँचि कए चौकीपर धराम दए खसलाह।

रघु आ निशा कलकत्तामे एकहि कालेजमे पढ़ैत छल। निशाक रूप-रंग देखि कए रघु प्रभावित होइत गेल। निशाकेँ सेहो रघु पसिंद रहैक। दुनूगोटे बिआह करए चाहए मुदा परिवारक लोक नहि मानै। ताबते रघुकेँ राजपुरामे जेलरक नौकरी लागि गेलैक। ओ निशाकेँ लेने ओतए चलि आएल आ कालीमंदिरमे बिआह कए लेलक। निशाक पढ़ाइ-लिखाइक संगे संगीतमे बहुत महारत रहैक। कहिओ-कहिओ राजपुरामे आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रममे ओ गबैत छलीह। हुनकर गायनक प्रशंसक महराजो छलाह। कैक बेर महराजक संगीत सभामे सेहो ओ आमंत्रित भेलीह। महराज तहिएसँ हुनकर प्रशंसक रहथि। ओ चाहथि जे कहुना निशाकेँ राजेक हातामे राखि ली मुदा ताहि हेतु रघु तैयार नहि होथि। अपना भरि जेलर बाबू निशापर बहुत ध्यान दैक मुदा जहिआसँ ई कांड भेलैक ओकर सुधि-बुधि हराएल रहैक।

ओमहर कैदीसभ अपने तंग छल। मुदा असली मजा तँ कालू भगता लए रहल छल। मजेदार गप्प तँ तखन भेल जखन साँझमे कारनीक पाँतिमे जेलर स्वयं आबि कए ठाढ़ भए गेल। जेलरकेँ एना एकटंग्गा देने ठाढ़ देखि जहलक पुलिससभ गुम छल। मुदा बाजति की? अपन अधिकारीक हाल पर गुम छल।

साँझमे भगतै होइत रहैक। जेलर बाबूकेँ एकटंगा देने देखि सभसँ पहिने ओकरे गोहार लगओलक। पुछलकैक- की भेलौक?

"हमर जान खतरामे अछि। किछु करिऔक, नहि तँ हमर घरबाली बिलटि जाएत।"

"भेलौ की? -भगता बाजल।

अहाँसँ की छिपल अछि? हमरा बचा लिअ।"

कालू भगता छाउर छिटलकैक आ कहलकै जे तोहर समस्या बहुत गंभीर  छौक। असगरमे झड़बए पड़तौक। बहुत खतरनाक जोगिन पाछू पड़ि गेल छौक।

जेलर सष्टांग दंडबत भए गेल। सौंसे जेलमे हरकंप मचि गेल। जहलक पुलिससभ जेलरकेँ मोने- मोन गरिआबैत छल। कैदीसभक सेहो चकबिदरो लागल छल। सभ मोने मोन कहैत छल- एहन तमासा नहि देखलिऐक। धन कहीं कालू भगताकेँ जे जेलरोकेँ हबा निकालि देलक।"

जेलरक हेतु अलगसँ भगतै करबाक ओरिआन ओकरे घरमे दूपहर रातिक भेलैक। जहलसँ जेलरक कारसँ कालू भगता जेलरक सरकारी डेरा पहुँचल। ओतए जेलरक घरबालीकेँ देखितहि छगुन्तामे पड़ि गेल। एहन सुन्दरि..!

जेलरक घरबाली छलहो हजारमे एक। गोर-नार ,६ फुट नाम, हरिअर-हरिअर आँखि,चाकर माथ, सभ मिलि लगैक जेना स्वर्गक परी होइक। कालू एकटक ओकरे देखैत रहि गेल। जेलर भगतैक समानसभक जोगारमे लागल छल आ कालू भगता दोसरे दुनिआमे मगन छल। जेलर पूजाकसभ वस्तु लए आएल। ओकरा देखिते कालू भगल शुरु केलक।

"मोसकिल छौक एकरा बचेनाइ। पिशाच लागि गेल छैक।"

"जे करबै से अहीं करबैक। हम तँ अहाँक शरणमे छी।"

"पहिने की करैत रहलह? आब तँ मामिला हाथसँ निकलि गेल अछि।"

"की भेलैक?"

"हम की कहबौक, इएह ले, अपने बकतौक।"

आओर ओ बकए लगलीह-

"हमरा केओ आओर नहि बचा सकैत अछि। भगते हमर जान बचाओत...।"

ई बाजि कए ओ बेहोस भए गेलि। भगता की केलकै, कोन मंत्र पढ़लकैक जे ओकर बाद निशा ओकरे बात बूझैक। जेलर बहुत चिकरल- निशा! निशा! "

कोनो उत्तर नहि आएल। निशा निःशब्द ओहीठाम भूलंठित भए गेलि। जेलर बाबूक परेसानीक अंते नहि छल। एमहर घरबाली बेहोस छलैक ओमहर केओ एसपी साहेबकेँ सिकाइत कए देलकैक जे जेलसँ कालू भगत बिला गेल। जेलमे छापा पड़ि गेलआब की होएत?”-से सोचि-सोचि कए जेलर परेसान छल, ताबे एसपी साहेबक फोन आबि गेलैक। जेलर इएह-ले ओएह-ले ओतएसँ जेल बिदा भए गेल। आ भगता...?

जेलरकेँ देखिते एसपी साहेब चिचिआ उठलैक- रघु। ई की भए रहल अछि?तूँ जेलक माहौलकेँ चौपट कए देलह अछि। आब तोहर नौकरी भगवानो नहि बचा सकैत अछि।"

"माफ कएल जाए सरकार!"

"तोहर गलती अक्षम्य छह। तोरा जेलर राखि कए हम अपन नौकरी अपने खा जाउ। ई नहि भए सकैत अछि। तोरा वारंबार चेतौनी दैत रहलिअह, मुदा तूँ सुधरबाक बजाए उल्टे रस्ता धेने छह। तखन जे हेबाक से हेबे करत। भए सकैत अछि तोरा जहलो जाए पड़ए।"

जेलरक हालति देखए जोकर छल। ओकरा मुँहसँ बकार नहि निकलि रहल छल। तथापि प्रयास कए ओ बाजल- सरकार देखि नहि रहल छिऐक?"

" कथी देखबैक? एहिठाम की छैक जे देखबैक।"एसपी साहेब एतबा बाजल छलाह कि जेलर बेहोस भए ठामहि खसल। ऐसपीक सामने कालू भगता सद्यः ठाढ़ छल।

"तूँ कतए चलि गेल रही? -एसपी साहेब बजलाह।

"हम तँ सदरिकाल एतहि छी सरकार।"

"झूठ, झूठ।" -एसपी साहेब चिचिआ उठलाह।

"अहाँकेँ जकरेपर विश्वास होअए तकरे सँ पुछारी कए सकैत छी, मुदा एहि हेतु जेलर बाबूकेँ प्रताड़ित नहि कएल जाए। ओ एकदम निर्दोष छथि। जाने भगवान।" -कालू भगता एसपी साहेबकेँ गोहरबैत बाजल। एसपी साहेब सौंसे जेल घुमि अएलाह, एकटा कैदी कालूक विरुद्ध नहि बाजल। एसपीकेँ ठकबिदरो लागि गेलनि। सोचए लगलाह- आखिर सिकाइत के केलक? जौं सिकाइत झूठ छल तैओ किछु तँ कारण रहल हेतैक।मुदा किछु प्रमाण नहि भेटि रहल छलैक। हारि मानि कए एसपी साहेब ओतएसँ अपन डेरापर आबि गेलाह।

जेलरकेँ कालू भगताकेँ जेलमे देखि छगुन्ता लागि गेलैक। सोचए लागल- ई कोना एतए आबि गेल?" कालू ओकर मोनक बातकेँ तारि गेल आ जोरसँ ठहाका पाड़लक। जेलरक मुँह देखए वला छल।

ओ जहलसँ डेरा पहुँचल तँ कालू भगताकेँ बाहर निकलैत देखलक। ओकर माथामे किछु नहि सन्हिआ रहल छलैक। सत्य की अछि?जे ओ जहलमे देखलक से आ कि जे ओ अखन देखि रहल अछि? दुनू घटना प्रत्यक्ष देखलक। अचानक ओकरा चिचिआ गेलैक- निशा!निशा!"

"की बात?”- निशा हँसि रहल छलि।

कालू कतए छल?"

"जतए अहाँ छोड़ि गेल रहिऐक।"

निशाक मुँहे ई सुनि जेना ओकरा बकोर लागि गेलैक। मुदा आब की? जेलर बाबू निशा दिस टुकुर-टुकुर देखैत रहि गेलाह। जेलर केँ ओहि राति निन्न नहि भेलैक। भरि राति टुकुर-टुकुर तकैत रहि गेल। एहि करोटसँ ओहि करोट करैत रहल। मुदा निशा फोंफ काटि रहल छलि। एतेक गहीर निन्नमे ओ कैक दिनक बाद देखाइत छलीह। ताहि बातसँ रघुकेँ खने चिंता होइक,खने मोनमे चैनो लगैक। ओ सोचए लागल- किछु बात तँ छैक एहि भगतामे जकर असरि सद्यः देखा रहल अछि। आइ कतेको दिनपर निशा चैन छथि, अन्यथा रातिभरि कछमछ करैत बीति जाइत छलनि। अपने तँ परेसान रहिते छलीह, हमरो बेचैन केने रहथि।

भोर भेलैक। अखबार वला अखबार फेकलकैक। दूध वला दूध दए गेल, काजबाली काज करए आबि गेलि, मुदा निशाक निन्न नहि टुटलनि। बेचारे जेलर बाबूकेँ ड्युटी जेबाक रहनि। ऊपरसँ राति भरिक जगरना छलनि। अपने चाह बनेलाह। निशाकेँ पड़ले देखि नहि रहल भेलनि। बाजि उठलाह-

ऐ सुनैत छी। हम आफिस जा रहल छी। घर बन्द कए लिअ।"

निशा करोट बदललीह, मुदा उठि नहि सकलीह। जेलरबाबू फेर किछु बजलाह। केबारकेँ अपनेसँ सटा देलखिन आ आगू बढ़ि गेलाह।

जहल जाइत काल जेलर बाबू केँ जेलसँ फोन आएल। कैदीसभकेँ आइ न्यायालयमे पेशी छलैक। अखन धरि पुलिसक गाड़ी नहि आएल छलैक। पछिलो तारिखपर देरीसँ न्यायालय पहुँचबाक कारण जेलरकेँ जज बहुत फज्झति केने रहैक। मुदा ओ की करैत?बिना पुलिस सुरक्षाकेँ कैदीसभकेँ जेलसँ बाहर तँ नहि लए जा सकैत छल। खैर!कनी कालमे पुलिस सदल-बल पहुँचि गेलैक।

थाना जरेबाक कांडक बिचाराधीन कैदीसभक जमानति अर्जीपर सुनबाइ भेलैक। सरकारी ओकील जमानतिक बिरोध करैत रहलक मुदा जज ककरो नहि सुनलकैक। एगारहो विचाराधीन कैदीकेँ जमानति दए देलक। कैदीसभक प्रसन्नताक ठेकान नहि छल। सालभरिसँ एहि दिनक प्रतीक्षा कए रहल छल। अनेरे जेलमे सड़ि रहल छल। कहबी छैक जे खसी मारि घरबैया खाए आ हत्या लेने वाभन जाए। सएह भए रहल छल। पुलिस प्रशासनपर उच्च अधिकारीसभक दवाव पड़ल रहैक आ ओसभ अपना-आपकेँ बचेबाक हेतु जे जतए जाहि हालतिमे भेटलैक तकरा पकड़ने चलि गेल। सभ चकित रहि गेल। ककरो कोनो सुनबाइ नहि भेलैक। थानाकेँ जराएब भारी परलैक। केलक केओ,भरलक केओ।

सालभरिक बाद सभगोटे गाम पहुँचल तँ सौंसेगाममे प्रसन्नताक वातावरण पसरि गेल। सभ नाच-गान करए लागल। सत्य नारायण भगवानक पूजा राखल गेल। ढ़ोल, हरमुनिआ, झालि, मृदंग समेत तमाम लोकसभ भगवानक भजन गाबैत पूजा-पाठ संपन्न केलाह। एतेक दिनक बाद लोटन साँझमे जखन पोखरि दिस गेल तँ संयोगसँ हमरे गाछीमे पहुँचि गेल। पुरनाबात सभ बिसरा गेल रहैक। पोखरि दिस बैसले छल कि गाछक फुनगीपरसँ ओहिना ककरो कानबाक अबाज सुनएमे अएलैक। लोटन इएह-ले ओएह-ले भागल। ढ़ेको बान्हबाक होस नहि रहलैक। लोटा कतए खसलैक सेहो नहि बूझि सकल।

लोटन बेसुध पड़ल छल। ओसारापर ओकरा लोकसभ घेरने छल। जकरा जे उपाय फुराइक से करैत छल। मुदा ओ टस सँ मस नहि होइत छल। देह बोखारसँ जरि रहल छल। मुँहसँ लार खसि रहल छल। ककरो किछु नहि बुझा रहल छलैक जे आखिर ओकरा भेलैक की? एहन परिस्थितिमे गाममे एकमात्र समाधान छल-कालू भगता। मुदा ओ गाममे नहि छल। ओहि दिन जमानति भेलाक बाद  सभगोटे वापस आबि गेल। कालू कहलकैक जे ओ सिमरिआ जा रहल अछि। गंगास्नान केलाक बादे गाममे टपत। तकरो आइ तीन दिन भए गेल मुदा ओ गाम नहि पहुँचल।

लोटनक हालति खराब भेल जा रहल छल। आङनमे लोक करमान लागल छल कि कतहुँसँ ढेपक वर्षा होमए लागल। की-कहाँ सभ खसए लागल। लोकसभ इएह-ले ओएह-ले भागल। सभक मुँहमे एकेटा गप्प रहैक- भूतक प्रकोप छैक।" कनीकालमे जखन भीड़ कम भेल आ आङनमे हबा सिहकल तँ लोटन आँखि खोललक।

घरक ऊपरसँ मखना जा रहल छल। लोटनकेँ देखि कए हँसल आ मोने-मोने बड़बड़ाइत आगू बड़ि गेल- "बँचि गेलह।"

ओहि दिन मखना यमलोक खाली हाथ लौटि गेल। यमराजक ओतए पेसी भेलैक। मखना थर-थर कपैत ठाढ़ छल कि यम महराज बमकलाह-

" लोटन लग जेबाक की औचित्य छल?"

"गलती भए गेलैक सरकार!"

की सरकार, सरकार कए रहल छैं? एहि तरहेँ तोहर काज नहि चलि सकैत छौक। सावधान भए जो।" यमराजक एहन सख्त रुखि देखि मखना काँपि गेल।

यमराज खतिआओन मंगओलाह तँ स्पष्ट भेल जे एखन तँ निशाक प्राण खिचबाक रहैक। एहन भारी गलती आखिर भेल कोना? ई सभ विचार-विमर्श चलिए रहल छल कि मखना भागल-भागल यमराजक दोसर पत्नी रेखा लग चलि गेल। ओकरा एना अफसिआँत देखि ओ पुछलखिन- बात की अछि? एना किएक हाँफि रहल छह?"

मखना हाथ जोरि यमराज दिस इसारा केलक। ताबते यमराजजी ओतहि आबि गेल छलाह।q




 

 

 

Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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