रविवार, 16 अगस्त 2020

चिंता

 

चिंता

अनिष्ट की आशंका से,

अज्ञात के प्रति अविश्वास

अपरिचित से भय

प्राप्त के खो जाने से

हम रहते हैं त्रस्त

डरते हैं खुद से ,परिवेश से

बाँटते नहीं सुख-दुख

और रहते हैं

दुखी और  संतप्त ।

मन के अनुकूल न होने पर

स्वीकार कर नहीं पाते

प्रतिकूलता में सहज रह नहीं पाते

जो प्राप्त है सो पसंद नहीं

और जो पसंद है वह पा नहीं सकते

अकसर समय पर सही निर्णय ले नहीं पाते

फिर भाग्य को कोसते रह जाते हैं।

जो मेरा है ही नहीं

या जो चला ही जाना है

उसपर क्या सोचना है?

इन व्यर्थ की बातों में उलझकर ही

हम रहते हैं चिंताग्रस्त

हम इस से  हों मुक्त

मन हो स्वच्छंद

प्रभु में विश्वास कर

कर्तव्य पथ पर चल पड़े

जो कर सकते हैं सो करें

शेष उनपर छोड़े देना चाहिए।

व्यर्थ चिंता छोड़कर

निश्चिंत जीना चाहिए ।


गुरुवार, 6 अगस्त 2020

उच्च विद्यालय एकतारा

 

उच्च विद्यालय एकतारा

 

देहातक इसकूलमे नामी छल उच्चाङल विद्यालय एकतारा । ओहि समयमे स्वर्गीय युगेश्वर झा(हरिपुर वक्सी टोल) प्रधानाध्यापक छलाह आ बेलौंजाक स्वर्गीय कृष्ण कुमार झा उपप्रधानाचार्य । इसकूलक सभ शिक्षक कोनो-ने-कोनो मामिलामे उत्कृष्ट छलाह । विद्यार्थीसभक हुजूममे सभ किलासमे चारि-पाँचटा उत्तम कोटिक विद्यार्थी होइत छलाह । किछु मध्यम कोटिक विद्यार्थी आ शेष दिनकट्टु सभ छलाह जे कोनो-ने-कोनो तात्कालिक उद्येश्यक पूर्ति होइतहि इसकूलसँ फराक भए जाइत छलाह आ जँ इसकूल अएबो करथि तँ नामे मात्र । बेसीकाल शिक्षक लोकनिक लप-लप करैत छड़ीसँ हुनका लोकनिक स्वागत होइत छल ।

ओहि समयमे हमर गाम(अड़ेर डीह)मे  उच्च विद्यालय नहि रहैक । एहिठामक अधिकांश विद्यार्थी लोहा उच्च विद्यालयसँ मैट्रिक करैत छलाह । किछुगोटे रहिका आ एकतारा उच्च विद्यालयमे सेहो पढ़ैत छलाह । एकाध संपन्न परिवारक विद्यार्थी बेनीपट्टी वा मधुबनीमे पढ़ैत छलाह । हमर बाबुक दोस्तसभ एकतारामे रहथिन । तेँ हमर नाम एकतारा उच्च विद्यालयमे लिखाओल गेल । गामसँ उत्तर दिस तीन माइलपर एकताराक इसकूल छल । एकतारा उच्च विद्यालयमे १९६३ ई०मे नामांकनक समय हमर बएस एगारह वर्ष मात्र छल । बेलौजा गामक स्वर्गीय कृष्ण कुमार बाबू एकतारा उच्च विद्यालयमे शिक्षक रहथि । तेँ हुनका गामक कैकटा विद्यार्थी एकतारामे पढ़ैत छलाह । सिनुआरा,विष्णुपुर,अड़ेर डीहटोल,जमुआरी,कुशमौल,बिचखाना,नवकरही,करही,नगवास,चंपा परजुआरि गामसभसँ विद्यार्थीसभ ओतए पढ़बाक हेतु अबैत छलाह ।

ओहि समयमे इसकूलक पढ़ाइक माने भेल परीक्षामे नीकसँ नीक नंबर अननाइ । ताहि हेतु विद्यार्थीसभ जान लगओने रहैत छलाह । किताबक-किताब घोखि जाइत छलाह । किताबक अतिरिक्तो किछु होइत छैक तकर बोध नहि रहैक। बहुत तँ कहिओ काल स्काउटक परेड होइत छल । ताहूमे ओकर ड्रेस बनेबाक हेतु विद्यार्थीसभकेँ बेस संघर्ष करए पड़ैत छलनि । हमहु बाबूकेँ स्काउटक ड्रेस बनेबाक हेतु कतेक खुशामद केने रही । तखन जा कए ड्रेस बनल । ओकरा पहिरने गामसँ एकतारा धरि गेल रही । कहि नहि सकैत छी जे हम एहि बातसँ कतेक खुश भेल रही ।

 कहिओ काल इसकूलक ओसारापर बैसकमे गीत-नाद होइत छल । कोनो विशेष अवसरपर परिचर्चा सेहो भए जाइत छल जाहिमे विद्यार्थीसभ बजबाक हेतु भाषणकेँ रटने रहैत छलाह । दिक्कत तखन होइक जखन बजैत-बजैत बीचेमे भाषण बिसरा जाइत छल। विद्यार्थी अबाक भेल ठाढ़ रहि जाइत छलाह, जेना कि एकाएक बिजली चलि गेल होइक । बहुत मोसकिलसँ शिक्षकलोकनि ओहि विद्यार्थीकेँ वापस अपन सीटपर पठबैत छलाह । किछु विद्यार्थी तँ संगीत कार्यक्रममे अरबधि कए एकहिटा गीत गबैत छलाह । प्रायः हुनका दोसर गीत अबिते नहि छलनि । सालमे एकाधटा एहन कार्यक्रमकेँ जँ छोड़ि देल जाए तँ इसकूलक कार्यक्रममे कोनो परिवर्तन नहि होइत छल । एकघंटीसँ दोसर,दोसरसँ तेसर आ अंतमे छुट्टी । एहि तरहें सालक-साल बिति जाइत छल । विद्यार्थीक प्रतिभाकेँ जे होइक से होउ मुदा इसकूल अपन निर्लिप्त भावसँ चलैत रहैत छल । एहन माहौलमे प्रतिभाशाली विद्यार्थीसभ तँ बढ़ि जाइत छलाह मुदा सामान्य कोटिक विद्यार्थी कोनो जोगर नहि रहि जाइत छलाह ।

हमसभ जखन नेना रही तँ नीक  आ खराप इसकूल नहि बुझिऐक । इसकूल माने इसकूल । ओना किछु इसकूलक बहुत नाम रहैक जेना वाटसन इसकूल मधुबनी,खिरहर उच्च विद्यालय । लोहाक उच्च विद्यालयक सेहो नीक नाम रहैक । ओकर प्रधानाध्यापक रामकृष्ण बाबू बहुत सफल शिक्षक छलाह । हुनका शिक्षकक हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार सेहो भेटल रहनि । कहाँदनि ओ बहुत  सख्त छलाह। मुदा उच्च विद्यालय एकतारा सेहो कोनो मामिलामे  खराप नहि रहए । नीक-नीक विद्यार्थीसभ ओतहुसँ शिक्षा प्राप्त केलाह आ जीवनमे  सफल रहलाह,उच्चस्थान प्राप्त केलाह । मुदा आब जखन सोचैत छिऐक तँ लगैत अछि जे किछु सुधार तँ बहुत जरूरी रहैक ,जेना कि पुस्तकालय ,प्रयोगशाला नीक होएब बहुत आवश्यक छल। मनोरंजनक नामपर फोकला छल इसकूल । कहिओ काल कबड्डी  होइत छल,कहिओ काल इसकूलक ओसारापर बैसारमे गीतनाद होइत छल । बस एतबे । मुदा पढ़ाइ-लिखाइक अतिरिक्त आओर तरहक प्रतिभाक विकासक कोनो व्यवस्था तँ छोड़ू विचारो नहि रहैत छलैक । परिणाम ई होइत छल जे किलास पाछू पाँच-सातटा विद्यार्थी छोड़ि कए शेष विद्यार्थीकेँ तरह-तरहक अशोभनीय उपाधिसँ सुशोभित कए देल जाइत चल,जखन-तखन ओकरा शारिरिक दंड देल जाइत छल। हुथनाइ तँ आम बात रहैत छल । किछु एहनो शिक्षक छलाह जे विद्यार्थिक सुसुप्त प्रतिभाकेँ चमका दैत छलाह । ओहने शिक्षकमे छलाह डुमराक जटाशंकर बाबू । ओ एकतारामे स्वर्गीय स्वर्गीय यदुनंदन मौआरक ओहिठाम रहैत छलाह , हुनकर नातिकेँ पढ़बैत छलाह। मुदा इसकूलमे ओ एकदम निष्पक्ष रहैत छलाह , भरिदिन जी-जानसँ उच्च गणित विषय विद्यार्थीसभकेँ पढ़बैत छलाह । हमर गणित नीक बनबएमे हुनकर गंभीर योगदान छल । ततेक सहजतासँ विद्यार्थीसभक समस्याकेँ सोझरा दैत छलाह जे हुनकर किलास करब एकटा आनंदक विषय रहैत छल । मुदा किछुगोटे जबरदस्ती गणित लेने छलाह । हुनकासभकेँ गणितमे रूचि नहि रहनि । तेँ ओसभ बेर-बेर असफल होइत छलाह आ मैट्रिकक परीक्षा पास करब हुनकासभक हेतु मोसकिल भए जाइत छल । असलमे एहि लेल अभिवावक सेहो दोषी छलाह कारण ओ अपन संतानकेँ कोनो हालतिमे इंजिनीयर बनबाक सपना देखैत रहैत छलाह । एहन कैकटा विद्यार्थी छलाह जे सात-सात बेर मैट्रिकक परीक्षामे एही कारणसँ फेल होइत रहलाह । एक हिसाबे हुनकर जीवने बरबाद भए गेलनि । एहन अधिकांश लोक पढ़ाइ छोड़ि देलनि आ खेती-बारीमे लागि गेलाह ।

ई बात कोनो एक इसकूल धरि सीमित नहि छल । अपितुअखनो अपना ओहिठाम अभिभावकक इच्छा रहैत छनि जे हुनकर संतान डाक्टर वा इंजीनियर बनथि । हम एकटा विद्यार्थीकेँ जनैत छिअनि जे डाक्ज़र बनबाक फिराकमे अपन सात-आठ साल समय बरबाद कए लेलनि । हारि कए आर्ट्स लेलथि आ कानूनमे डिग्री कए कोनो बड़का कंपनीमे विधि अधिकारी भए गेलाह । आब ओ ओहि विषयमे आगु बढ़ैत गेलाह आ बहुत नीक पदपर पहुँचि गेलाह । कहबाक माने जे विद्यार्थीकेँ अपन रुचि आ क्षमताक अनुसार विषय चुनबाक अधिकार हेबाक चाही । अभिवावक अपन महत्वाकांक्षा ओकरापर नहि लादथि । से जँ हेतेक तँ कोनो-ने-कोनो विषयमे ओ आगु बढ़ि जाएत आ इज्जतिसँ अपन जीविका चला सकत ।

एकतारा इसकूलमे हमर प्रगतिमे बाबूक बहुत योगदान छलनि । ओ निरंतर हमरा उत्साहित करैत रहैत छलाह । परीक्षामे नीक करी,सभसँ बेसी नंबर आनी ताहि लेल बहुत ध्यान रखैत छलाह । हुनका एहिबातक बहुत अभिलाषा रहैत छलनि जे गणितमे हम सए मे  सए नंबर आनी । ताहिबातसँ उत्साहित भए हम गणितपर बहुत मेहनति करी । हमरा तकर फएदो भेल आ सभ परीक्षामे गणितमे बढ़िआ नंबर अबैत रहल । आठमासँ एगारहमा धरि इसकूलक परीक्षासभमे  हमर नंबरमे निरंतर इजाफा होइत रहल । एहिलेल गामपर हमर पिता आ इसकूलमे जटाशंकर बाबू बहुत अधिक प्रेरित करैत रहलाह ।

कहल जाइत अछि जे परिवार मनुक्खक प्रथम पाठशाला होइत अछि । ई बात एकदम सही अछि । पारिवारिक वातावरणमे स्वतः स्वभाविक रूपसँ नेनाक अंतर्मनपर अनेकानेक प्रकारक घटनासभ अपन प्रभाव छोड़ैत रहैत अछि । एहिक्रममे महाभारतमे वर्णित अभिमन्युक कथा बहुत प्रसंगिक अछि । गर्भहिमे ओ पितासँ चक्रव्युह तोड़बाक शिक्षा प्राप्त कए लेने छलाह । मुदा ई शिक्षा अपूर्ण रहि गेल छल । परिणाम भेल जे ओ चक्रव्युह तोड़ि ओहिमे पैसि तँ गेलाह मुदा ओहिमेसँ निकलि नहि सकलाह । कहबाक तात्पर्य ई अछि जे नेनाकेँ शरुएसँ सुसंस्कार देबाक काज रहैत अछि । तखने ओ जीवनमे नीक कए सकैत अछि । तेँ माता-पिताक बड़ पैघ दायित्व रहैत अछि । आइ-काल्हि से नहि भए सकबाक कारण नीक-नीक इसकूलमे पढ़ननिहार विद्यार्थीसभ  पिस्तौल लेने घुमैत रहैत छथि आ जँ शिक्षक टोकलखिन तँ जानोसँ हाथ धोइत छथि । तेँ कोनो इसकूल विद्यार्थीक अंदरमे विद्यमान संस्कारकेँ  जगाबक काज करैत अछि । इएह कारण छल जे देहातक वातावरणमे सुविधाहीन ओहि इसकूलसँ किछु बहुत नीक विद्यार्थीसभक निर्माण भेल जे जीवनमे कतेको क्षेत्रमे उत्कृष्टता प्राप्त केलाह, दुनिआमे नाम कए गेलाह । मुदा किछु एहनो विद्यार्थीसभ भेलाह जे मैट्रिको नहि पास कए सकलाह आ जहाँ-तहाँ भसिआ गेलाह । ओएह इसकूल,ओएह शिक्षक मुदा परिणाममे एतेक अंतर किएक होइत छल? ई सोचबाक बात थिक । असलमे जेहने लोहा रहतैक तेहने हथिआर बनतैक ने । कतबो धिपेबैक मुदा ओकर असलिअत तँ अपन काज करबे करत ।  बहुत रास विद्यार्थीसभ परिवारमे  अनुकूल वातावरण नहि रहबाक कारण आगु नहि बढ़ि पबैत छलाह । हुनकासभकेँ जँ व्यवहारिक शिक्षा देल जाइत तँ साइत बेसी सुखी रहितथि मुदा तकर व्यवस्था ओहि समयक इसकूलसभमे नहि रहैत छल । परिणामस्वरूप, चारि-पाँचटा विद्यार्थी नीक करैत छलाह ,शेष विद्यार्थीसभ टपले खाइत रहि जाइत छलाह ।

जहाँ इसकूलमे पैर रखितहुँ कि लगैत जेना एकटा नव दुनिआमे पहुँचि गेलहुँ। चारूकातसँ विद्यार्थीसभ इसकूल दिस बढ़ि रहल अछि । शिक्षक लोकनि सेहो इसकूल पहुँचि रहल छथि । केओ-केओ पहिने पहुँचि चुकल छथि । हमसभ अपन गामसँ पैरे-पैरे इसकूल नियत समयपर पहुँचि जाइत छलहुँ । हमरा मोन नहि पड़ैत अछि जे कहिओ कोनो मौसममे हम इसकूल विलंबसँ पहुँचल होइ । इसकूल पहुँचितहुँ,झोरा रखितहुँ,तकर बादे प्रार्थनाक घंटी बजैत । भोरुका इसकूलमे तँ हमसभ जमुआरीसँ आगा होइतहुँ तखन सूर्योदय होइत रहैत । रस्ता भरि विद्यार्थीसभ भेटैत जइतथि । एकतारा उच्च विद्यालयक सीमानमे पहुँचैत-पहुँचैत  चारूकातसँ आबि रहल विद्यार्थीक हुजूम देखाइत ।

कोनो विद्यार्थीक व्यक्तित्व निर्माणमे शिक्षकक आ विद्यालयक वातावरणक बहुत योगदान होइत अछि । ताहि संगे इसकूलिआ संगीसभक सेहो बहुत योगदान रहैत अछि । एकतारा उच्च विद्यालय चारूकातसँ खुजल वातावरणमे बनल छल । कोनो प्रकारक लंफ-लंफाक गुंजाइस नहि छल । दोकान- दौरीक नामो निसान नहि छल । कहिओ काल बंबइ मिठाइ वा चुनिआ बदाम बेचबाक हेतु केओ आबि जाइत चल । बस एतबे । तेँ विद्यार्थीलोकनिक ध्यान भुतिएबाक संभावना नहि छल । शिक्षक लोकनि अपना भरि विद्यार्थीसभक बहुत ध्यान करैत छलाह खास कए तेजगर विद्यार्थीसभपर । परिणाम होइत छल जे सभसाल किछु-ने-किछु विद्यार्थी उच्चस्तरीय महाविद्यालयसभमे नामांकन करबैत छलाह आ ओतएसँ जीवनक विभिन्न क्षेत्रमे नाम करैत छलाह ।

इसकूलक वातावरण बहुत सात्विक छल । एकतारा गामसँ हटि कए एकांत बाधमे इसकूल बनल छल । इसकूलक लग-पासमे एकहुटा एहन किछु नहि छल जाहिसँ विद्यार्थीसभक ध्यान एमहर-ओमहर होइत ,ककरो कोनो प्रकारक गलत आदति लागैक । उच्च विद्यालयसँ थोड़बे दूरपर मिडिल इसकूल छल । ओहि मिडिल इसकूलसँ बहुत रास विद्यार्थीसभ उच्च विद्यालय आएल छलाह । हुनकासभकेँ ओ वातावरण पचि गेल छल । तेँ कोनो सुविधा-असुविधाक गप्प नहि होइत छलनि । मुदा हमरा सन-सन कैकटा विद्यार्थी छलाह जे आठमामे एकताराक उच्च विद्यालयमे नाम लेखओने छलाह ।  हम अड़ेर मिडिल इसकूलसँ सातमा पास केलाक बाद एकतारा गेल रही । छओ मास धरि किलासमे गुमसुम समय बिताबी । आठमाक छमाही परीक्षामे कोनो स्थान हमरा नहि भेटल छल । अनिल प्रथम आएल छलाह । ओ ओहीठामक मिडिल इसकूलक विद्यार्थी छलाह आ हुनकर पिता ओही इसकूलमे शिक्षक सेहो रहथि । संभवतःओकर बाद ओ कहिओ प्रथम नहि केलाह । बादमे तँ हुनकर नंबर कमे होइत गेल ।  जखन परीक्षाक परिणाम अबैक तँ बाबू एक-एक विषयक नंबरपर घमरथन करैत छलाह । दोसर नीक विद्यार्थीसभक नंबरपर सेहो विचार करैत छलाह । मुदा हमरा कहिओ हुतथि नहि,अपितु निरंतर प्रेरित करथि जे हम आओर नीक करी । हुनके प्रेरणाक परिणाम भेल जे हम निरंतर नीक करैत गेलहुँ आ एगारहमाक सभ परीक्षामे प्रथम स्थान प्राप्त केलहुँ । संयोगसँ हमरासभक किलासमे चारि-पाँचटा विद्यार्थी बहुत परिश्रमी आ प्रतिभाशाली छलाह आ तकरे परिणाम छल जे आपसमे एकटा सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बनल रहैत छल ,जकर बहुत अनुकूल परिणाम भेल । अंततः, बोर्डक परीक्षामे चारिगोटेकेँ प्रथम श्रेणी भेलनि -हमरा,नारायणजी (नवकरही),श्रीनारायणजी (नगवास) आ विजयजी (नवकरही) ।

देहातक इसकूल होइतहु ओहिठाम पढ़ाइ बढ़िआ होइत छल । प्रधानाध्यापक स्वर्गीय युगेश्वर झाक बहुत आदर रहनि । ओ मैथिली व्याकरणसँ संबंधित कैकटा किताब लिखने रहथि । हमरासभकेँ ओ सामान्य  गणित पढ़बैत छलाह । तकर अतिरिक्त जे कोनो किलास खाली रहल,जकर शिक्षक कोनो कारणसँ अनुपस्थित रहथि ,तकरा ओएह  सम्हारैत छलाह । हुनकर गाम हरिपुर (मजरही टोल) छलनि । एकबेर हम हुनका ओहिठाम  गेलो रही । ओ भगवतीक परम भक्त छलाह । हम संघ लोक सेवा आयोगक एससीआरए परीक्षाक साक्षात्कारक हेतु दिल्ली जाइत रही । ओ हमरा अपना ओहिठाम बजओलाह आ भगवतीसँ हमर सफलताक हेतु प्रार्थना केलथि आ हमरा एकटा यंत्र सेहो देलथि ।  अपन विद्यार्थीक प्रति एतेक कल्याणक भावना रहैत छलनि ओहि समयक शिक्षकमे तकर ई उदाहरण थिक।

इसकूलमे वार्षिक परीक्षाक परिणाम घोषित करबाक हेतु सभ विद्यार्थिकेँ इसकूलक सामनेक आङनमे ठाढ़ कएल जाइत छल । शिक्षक लोकनि ओसारापर ठाढ़ होइत छलाह । प्रधानाचार्यजीक हाथमे परिणाम तालिका रहैत छल । सभसँ पहिने आठमा किलासक परिणाम घोषित होइत छल । प्रथम,द्वितीय ,त्रितीय आ चतुर्थ स्थान पओनिहार विद्यार्थीक नाम बाजल जाइत छल । सभसँ पहिने प्रथम आबएबला विद्यार्थीक नाम लेल जाइत छल । ओ प्रशन्नतापूर्वक अपन नव किलासमे सभसँ पहिने जा कए बैसि जाइत छलाह । तकर बाद दोसर,तेसर आ चारिम स्थान पओनिहार विद्यार्थीक नाम क्रमशः घोषित होइत छल । सभसँ अंतमे दसमाक परीक्षाफलक घोषणा कएल जाइत छल । एगारहमामे तँ बोर्ड परीक्षा होइत छल । एहि तरहसँ सफल विद्यार्थीसभ अपन-अपन नव किलासमे पहुँचि गर्वक अनुभव करैत छलाह । एक हिसाबे प्रतिभा आ उपलव्धिकेँ सम्मान दए विद्यार्थीसभकेँ नीक सँ नीक करबाक हेतु प्रेरित कएल जाइत छल।

तत्कालीन विज्ञान शिक्षक स्वर्गीयरामनरेश ठाकुरसँ विद्यार्थीसभ बहुत डराइत छल । कारण जँ व्यवहारिक परीक्षामे फेल कए गेलहुँ तँ मैट्रिकक परीक्षामे विद्यार्थी पास नहि भए पबैत छल चाहे ओकरा आन विषयसभमे कतबो नीक नंबर आबैक । अस्तु,लोक हुनकासँ बहुत बँचि कए रहैत छल । व्यवहारिक किलासक हेतु एकटा कोठरी छल जाहिमे पाँच-छओटा आलमारीमे नाना प्रकारक औजार,रसायनिक द्रव्य आदि राखल रहैत छल । हमसभ तँ एतबेसँ प्रसन्न भए जाइत छलहुँ जे प्रयोगशाला खुजल आ हमरा लोकनिकेँ किछु करबाक अवसर भेटल । जँ प्रयोगशालाक डिबिआमे स्पीरीट रहल तँ काँच नली के मोड़नाइ सिखाओल जाइत , नहि तँ एमहर-ओमहरक किछु- किछु कए विद्यार्थीसभ संतोख कए लैत छल ।

उच्च विद्यालय एकतारा हमरा लोकनिक शिक्षाक आधारशिला छल । हमहीटा नहि,अपितु,ओहि समयक कतेको विद्यार्थीक जीवनक दिशा ओतए बदलि गेल । मामूली खर्चामे एतेक सुबिधाजन्य शिक्षा भेटब भाग्यकक बात छल । एकाध अपवाद छोड़िकए अधिकांश शिक्षक बहुत परिश्रम आ निष्ठासँ अपन कर्तव्यक निष्पादन करैत छलाह । यद्यपि किछु शिक्षक प्राइभेट ट्युसन करैत छलाह मुदा तकर माने ई नहि होइत छल जे ट्युसन नहि पढ़निहार विद्यार्थीक संगे कोनो भेदभाव कएल जाइत । इसकूलक पढ़ाइमे कोनो कोताही नहि होइत छलैक । अधिकांश विद्यार्थी अंग्रेजीसँ परेसान रहैत छलाह । अंग्रेजीमे पास करब कैकबेर बहुत मोसकिल भए जाइत छलनि। एहि हेतु किछु विद्यार्थीसभ प्राइभेट ट्युसन सेहो करैत छलाह । गणित विषयमे सेहो अधिकांश विद्यार्थीकेँ समस्या रहैत छलनि । ओहि समयमे सामान्य गणित  आ उच्च गणितक फराक-फराक पत्र होइत छल । कैकटा विद्यार्थी विज्ञान पढ़बाक चक्करमे गणित रखैत छलाह आ सालक साल फेल करैत रहि जाइत छलाह । कैकटा विद्यार्थी बादमे विज्ञान छोड़ि कए कला संकायमे चलि जाइत छलाह ।  असलमे अपनासभक ओहिठाम विज्ञानक विषय पढ़नाइ उज्ज्वल भविष्यक हेतु अनिवार्य बूझल जाइत छल । भविष्य उज्ज्वल तँ जखन होइत तखन मुदा तत्कालमे तँ ओसभ मैट्रिकेमे लटपटा जाइत छलाह । हमरा लगैत अछि जे पढ़ाइक तत्कालीन रूप-रेखा आ विषयक चुनाव सही नहि छल जाहि कारणसँ कतेको विद्यार्थीक जीवन बरबाद भए गेल ।

उच्च विद्यालय एकतारामे बिताओल गेल ओ चारिसाल(सन् १९६३-१९६६) हमरा लोकनिक जीवन निर्माणमे बहुत सहायक सिद्ध भेल । ई बात अलग अछि जे जँ शिक्षाक पद्धति आ प्रकार जँ आओर वैज्ञानिक रहैत तँ बहुत रास विद्यार्थी बेसी सफल होइत आ इसकूलसँ निकललाक बाद आत्मसम्मानसँ जीवन-यापन कए सकितथि । मुदा ई बात तँ ओहि समयक सर्वव्यापी समस्या छल आ कमो-बेस अखनहु अछिए ।  तमाम असुबिधाक अछैत ओहि इसकूलसँ सभसाल किछु एहन विद्यार्थीसभक निर्माण करैत रहल जे आगु जा कए अपना-अपना कार्यक्षेत्रमे बहुत नाम केलनि । निश्चित रूपसँ देहातमे रचल-बसल ओहि इसकूलक संस्थापक लोकनि एहि हेतु धन्यवादक पात्र छथि ।

 

6/8/20206/8/2020


रविवार, 12 जुलाई 2020

माएक नाम पत्र




(गामपर पानिक टंकीक उद्घाटन करैत  July 2014)

माएक नाम पत्र

 

परम पूजनीया माए,                             

सादर प्रणाम।

कतेको दिनसँ मोन होइत छल जे अहाँकेँ चिठ्ठी लिखी । अपन मोनक बातसभ कही । जहिआसँ अहाँ हमरा लोकनिकेँ छोड़ि कए चलि गेलहुँ तहिआसँ हमर मोनमे जे शून्यता आएल तकरा पत्र लिखि किछु कम करबाक प्रयास करी । मुदा अपने मोनक अंतरद्वंदक कारण  कलम आगु नहि बढ़ि पबैत छल । जहिना हाथमे ली तहिना राखि दी । मोन स्थिर हेबे नहि करए । ई किएक होअए? कहि नहि मोन कतए सँ कतए पहुँचि जाइत छल । ओना तँ मोनक गति अपार होइत अछि । क्षणेमे  कतए सँ कतए पहुँचि जाइत अछि । हमरा अहाँकेँ जतए पहुँचएमे मासो लागि सकैत अछि ताहिठाम मोन क्षणभरिमे पहुँचिएटा नहि जाइत अछि,अपन क्रिया-प्रतिक्रिया धरि दए दैत अछि । तेँ अहाँकेँ एहि दुनिआसँ चलि गेलाक बादो हमरा साहस भेल जे अहाँकेँ चिठ्ठी लिखी । हमरा ई विश्वास भेल जे हमर मोन एकरा अहाँ जतए कतहु होएब अवश्य पहुँचा देत । ततबे नहि अहाँक कुशल-क्षेम सेहो कहत । चिठ्ठी उतारा सेहो आनि देत । एतेक बाद सोचलाक बादो अहाँक गेलाक तीन सालसँ बेसिए बिति गेल । मुदा हम अहाँकेँ चिट्ठी नहि पठा सकलहुँ । जखन कखनो  असगर होइतहुँ कि मोन दौड़ए लगैत छल । माथमे तरह-तरहक विचार भरि जाइत छल । हमरा मोनमे रहि-रहि कए ई बात उठैत रहैत अछि जे अहाँक जेबाक अखन समय नहि भेल छल । उचित प्रयाससँ अहाँकेँ एहि संसारकेँ छोड़बासँ रोकल जा सकैत छल । मुदा ई बात ध्यानमे अबितहि जेना मोन स्वयंमे फँसि जाइत छल । एहि तरहेँ कतेको बेर प्रयास कएल । मुदा बात जस-के-तस रहि गेल ।

हमरा मोने अछि जे अहाँ केना चारिए बजे भोरसँ भानसक ओरिआनमे लागि जाइत छलहुँ जाहिसँ गामसँ कतहु जेबासँ पहिने  हम भोजन कए ली । जखन हम गामेपर रहि परीक्षासभक तैयारी करैत छलहुँ तँ अहाँ हमरा लगीचमे बैसलि औंघाइत रहैत  छलहुँ । भरिदिनक थाकल -ठेहिआएलि अहाँकेँ विश्राम जरूरी रहैत छल । मुदा जाबे हम पढ़ैत रही,ताबे अहाँ हमर प्रतीक्षा करैत रही । दूपहर रातिमे हम दुनूगोटे भोजन करी । ताबे घरमे सभगोटे सुति गेल रहथि । सौंसे गाम निःशव्द भए गेल रहैत छल । जखन हम परीक्षा देबए गामसँ दरभंगा बिदा होइत छलहुँ तँ लोटामे पानि भरने अहाँ हमरा आगुमे ठाढ़ भए जाइत छलहुँ जाहिसँ हमर यात्रा बनए,परीक्षा खूब नीख होअए । गोर लगलापर एक पथिआ आशीर्वाद दैत छलहुँ।

हमरा मोन पड़ैत अछि जे जखन हम गामसँ वापस दिल्ली बिदा होइ तँ केना अहाँ बहुत दूर धरि अरिआति दैत छलहुँ । केना जाइत-जाइत पेन,कागज,पता लिखल लिफाफासभकेँ जोगा कए रखबा लैत छलहुँ जाहिसँ हमरा चिठ्ठी लिखल करब । चिठ्ठी अहाँ लिखबो करी । कैक बेर अपने हाथे ,कैकबेर केओ आन लिखि दैत छल । सभ चिठ्ठीमे आशीर्वादक वर्षा केने रहैत छलहुँ । हम कड़ोरपति भए जाइ,हमर बच्चासभ खूब सुखी रहए,हमरा सभ तरहेँ बरक्कति हओए ।

हमरा मोने अछि जे जखन हम नेना रही तँ अहाँ हमरा हेतु कतेको बेर कैकगोटेसँ झगड़ा केने रही । जँ केओ हमरा किछु कहि देलक तँ  ओकर भगवाने मालिक । हमरा मोन अछि जे नानी एकबेर कहने रहए-बौआक पैर नाना सन छैक ।एहि बातसँ अहाँ कतेक दुखी भेल रही । कारण नाना तँ बहुत पहिने मरि गेल रहथि। तेँ हुनकर पैरसँ तुलना करब अशुभ छल ।

अगस्त २०१३मे कोनो बात लए कए अहाँकेँ गाममे रहि रहल पुतहुसँ झगड़ा भए गेल । पुतहुसँ झगड़ा कोनो नवबात नहि छैक। सभठाम होइते रहैत छैक । मुदा अहाँकेँ कोनो बात गड़ि गेल। अहाँ घरसँ माधबीक ओहिठाम चलि गेल रही । ओहिठाम दसदिन रहि गेलहुँ । ओसभ अहाँकेँ बहुत मानलथि,बहुत आदर केलथि । मुदा घरबैआ अहाँकेँ बजबए नहि गेलथि । एहि बातसँ अहाँकेँ बहुत दुख भेल रहए। हम ई समाचार सुनि दिल्लीसँ गाम गेल रही । बेतिआसँ राधे बहिन सेहो आएल रहथि । माहौल ठीक नहि देखि हम आ राधे बहिन बहुत आग्रह कए अहाँकेँ दरभंगा स्थित अनुजक डेरापर दए आएल रही । अहाँकेँ दरभंगा जेबाक एक्को पाइ इच्छा नहि रहए । मुदा हमही जोर देलहुँ कारण हमरा अनुमान रहए  जे अहाकेँ ओतए आराम होएत । दरभंगा पहुँचि कए किछुदिन अहाँ बहुत प्रसन्न रही । कही जे लगैत अछि जेना स्वर्गमे आबि गेल छी। मुदा थोड़बे दिनक बाद अहाँकेँ ओतहु मोन उचटि गेल , वापस गाम जेबाक इच्छा होबए लागल ।  जेना-तेना छओमास ओतए रहि अहाँ गाम वापस  आबि गेलहुँ । गाम अएलाक बाद हमरासँ फोनपर गप्प भेल छल । एहिबातसँ अहाँ बहुत प्रसन्न भेल रही जे अहाँक सभटा व्यवस्था गामेमे कएल जाएत जाहिसँ अहाँ नीकसँ ओतए रहि सकी । ...एहिबातसँ प्रसन्न भए अहाँ कतेक काल धरि गीत गबैत रहि गेल रही  तकर बाद हम गाम गेलो रही । ककरा-ककरा ने कहने रहिऐक जाहिसँ अहाँक सेवाक हतु केओ सेवक भेटि जाए। जकरे कहिऐक से कहैत - करितहुँ किएक नहि  । मुदा डर लगैत अछि।

फरबरी २०१४मे जखन अहाँ दरभंगासँ गाम वापस अएलहुँ तँ नङराइत रही । अहाँकेँ दरभंगामे ठंढ लागि गेल रहए । तकरबाद कनी-कनी नङराइते रहि गेलहुँ । अहाँक डांर क्रमशः झुकैत गेल । देह कमजोर होइत गेल । तैओ अहाँ अपने हाथे सभ काज करी । अपन चाह,जलखै,भोजन स्वयं बनाबी । ककरोपर आश्रित होएब अहाँकेँ पसिंद नहि रहए । नब्बे वर्षक आयुधरि अहाँक इएह दिनचर्या रहए । तकरबाद अहाँक शरीर कमजोर होइत चलि गेल। तथापि अहाँक इच्छा रहैत छल जे फराके रही,गाममे रहि रहल अपन पुत्रक आश्रममे साझी नहि होइ । जखन कखनो हम गाम जाइ एतबे बात अहाँ कहैत रहैत छलहुँ । हम प्रयासो करी जे केओ आदमी तेहन भेटि जाइत जे अहाँकेँ नियमित सेवा करैत । कैकगोटे जँ तैयारो होइत तँ तकर विरोध घरेमे होबए लगैत । पारिवारिक परिस्थिति विषम होइत गेल आ अहाँक कष्ट बढ़ैत गेल । एहिसभ कारणसँ अहाँक सेवा नीकसँ नहि भए पबैत छल ।

अक्टूबर २०१४मे गामपर एकदिन अहाँकेँ बहुत जोरसँ चक्कर आएल रहए । अहाँ बारीमे खसि गेल रही । हमरा तुरंत फोन आएल । ओहि समय हम वैशाली मेट्रो टीसनपर ठाढ़ मेट्रोरेलक प्रतीक्षा करैत रही । अहाँ बहुत परेसान रही । कोनो निराकरण नहि बुझाइत छल । तकरबादे फेरसँ अहाँकेँ दरभंगा अनुजक डेरापर पठेबाक ब्योंत केने रही । बहुत अछता-पछता कए अहाँ दरभंगा जेबाक हेतु तैयार भेल रही। रोहिनी बहिन सतलखासँ आबि-आबि अहाँक चीज-वस्तुसभकेँ सम्हारने रहथि । एक-एकटा सामानक पूरा हिसाब अहाँकेँ मोन रहैत छल । हमरा आग्रहपर अहाँ दरभंगा गेलाक बाद बहुत आफियतमे रही । मुदा ई प्रसन्नता बेसीदिन नहि रहल । अक्टूबर २०१४मे हम ट्रेनसँ साढ़ूक आकस्मिक निधनक बाद नागपुर जाइत रही । ट्रेनेमे दरभंगासँ हमर भातिज फोन केलथि-

दाइ भोरे खसि पड़लैक ।  ओकर जांघमे बहुत दर्द भए रहल छैक । ओएहसभ कहलाह जे हुनकर पिता बैंक जा चुकल छथि। तकरबाद  जीवानंद(हमर भागिन)केँ फोन केलिअनि । ओ एक हजार टाका देलखिन जाहिसँ अहाँकेँ  लगीचेमे कोनो नर्सिंग होममे भर्ती कराओल गेल । ओहीदिन साँझमे अनुज सपरिवार छठि करबाक हेतु राँचीसँ दरभंगा अपन सासुर पहुँचल रहथि । हुनका सभकेँ ई समाचार पता लगलनि । तकरबाद ओ सभ जी-जानसँ अहाँक सेवामे जुटि गेल रहथि । हमर चिंता किछु कम भेल रहए ।  नागपुरसँ दिल्ली लौटितहि हुनका फोन केने रहिअनि । किछु टाका सेहो पठओलिअनि  आ अपने दोसरे दिन दरभंगा ट्रेनसँ बिदा भए गेल रही ।

दरभंगाक नर्सिंग होममे माएकेँ एकसप्ताहक बाद घर जेबाक अनुमति भेटि गेल रहनि । मुदा दरभंगामे हमर भतीजीक बिआह किछुए दिनक बाद हेबाक छल । तेँ हुनका लोकनिक सुविधाक ध्यान रखैत माए बीसदिन आओर नर्सिंग होममे रहलीह।दरभंगा नर्सिंग होममे मासदिन रहलाक बाद दिसम्बर २०१४मे अहाँ अनुजक शुभंकरपुर(दरभंगा) स्थित घरपर चलि गेल रही । अहाँक स्वास्थ बहुत सुधरि गेल रहए। मुदा टांग सभदिन हेतु विकलांग भए गेल रहए । अपनेसँ चलि-फिरि नहि पाबी । ई एकटा बड़का संकट भए गेल। तकरबाद तँ अहाँक जिनगी नर्क भए गेल रहए । केओ नहि चाहए जे अहाँकेँ अपना संगे राखी ।

अहाँकेँ एहिबेरक दरभंगाक यात्रा नहि धारलक । हमरा बहुत अफसोच होअए जे किएक हम अहाँकेँ दरभंगा जेबाक हेतु कहलहुँ। गामपर ओ सभ बहुत रोकैत रहथि । दिल्लीसँ हमर भातिज सेहो रोकलथि । मुदा हमरा भेल जे दरभंगामे अहाँ बेसी आरामसँ रहि सकब। मुदा भावी प्रवल । आइधरि हमरा मोनमे एहि निर्णयक कारण क्षोभ अछि,दुख अछि । दरभंगा डेरासँ धीया-पुतासभ अहाँकेँ रिक्सासँ लगीचेक नर्सींग होमे भर्ती करा देलथि । ओ डाक्टर काय चिकित्सक (फीजीसिअन) रहथि,हुनका हड्डीक मामिला नहि देखबाक चाहैत छल । मुदा ओ हमरा लोकनिकेँ आश्वस्त करैत रहलाह जे अहाँकेँ ठीक कए देताह । शल्यक्रिया करब एहि बएसमे ठीक नहि होएत । तेँ ट्रैक्सनपर राखि हड्डीकेँ जोड़ि लेताह। दुनूपैर कनी-मनी छोट-पैघ रहतैक । हमरो ई व्यवस्था सुगम बुझाएल । यद्यपि दिल्लीक डाक्टर फोनपर कहने रहथि जे शल्यक्रिया जरूरी अछि । बादमे तँ जे भेल से सभ जनिते अछि । अहाँक हड्डी  बहुत छोट-पैघ भए गेल । ततबे नहि , ओ उल्टा से जोड़ा गेल ।

फरबरी २०१५मे गाममे हमर भतीजीक बिआह रहैक । ओहिमे अहाँ गाम गेलहुँ । मुदा गाममे की भेल की नहि, पनरह दिनक भीतरे अहाँ अंतिम हालतपर पहुँचि गेलहुँ । धन्य कही दरभंगाबला अनुजकेँ जे गाममे सभक विरोधक अछैत असगरे अहाँकेँ दरभंगा ओही नर्सिंग होममे भर्ती करा देलथि । गाममे केओ नहि चाहलक जे अहाँ इलाजक हेतु दरभंगा जाइ ।

आब हिनकर की इलाज हेतनि । केहन बढ़िआ अपन डीहपर मरतीह ।

 हम जखन दूपहर रातिमे दिल्लीसँ दरभंगा ओहि नर्सिंग होममे पहुँचलहुँ तँ अहाँ नहि चिन्हाइत रही । आक्सीजन लागल रहए । मुँह-कान सभ भयावह लागि रहल छल । हम अबिते अनुजकेँ पुछलिअनि-

माए कहाँ छथि?”

ओ इसारासँ देखेलथि । अहाँक हालत देखि गुम्म पड़ि गेल रही । दरभंगाक डाक्टर सेहो आश्चर्यचकित रहथि

पनरह दिनक भीतर हिनकर एहन हाल कोना भए गेलनि?”

अपना भरि ओ बहुत प्रयास केलाह । महग-महग जीवनरक्षक सूइआसभ देल गेलनि । भोरे-भोर  अहाँ आँखि खोलि देलहुँ । ततबे नहि बजनाइओ शुरु कए देलहुँ । अहाँ बहुत अबल भए गेल रही । तथापि बेर-बेर कही-

हमरा रातिमे भगवती दर्शन देलनि अछि । लाल टुह-टुह नुआ पहिरने छलीह ।

अहाँ हमरा भोरे श्यामा मंदिरमे भगवतीकेँ प्रसाद चढ़बए पठओने रही । हम प्रसाद चढ़ा कए वापस मंदिर परिसरसँ बाहर निकलैत रही कि दू-तीनटा बुढ़बा बानर हमर प्रसाद लुटि लेलक। आब की करी? बिना प्रसाद लेने कोना वापस जइतहुँ । अहाँ प्रसाद मंगितहुँ तँ की करितहुँ? फेरसँ प्रसाद किनि श्यामा माइकेँ चढ़ओलहुँ। एहिबेर बहुत सावधानीसँ प्रसादकेँ नुका लेने रही । प्रसाद लए कए वापस भेल रही तँ अहाँ कतेक प्रसन्न भेल रही । लगबे नहि करैत जे रातिमे अहीं मृतमान बेडपर पड़ल रही । सभ किछु ठीक-ठाक भेल जाइत छल । तेँ हम अनुजक शुभंकरपुरक घरपर जाए स्नान केलहुँ ,भोजन केलहुँ आ फेर अहीं लग वापस आबि गेलहुँ । ताबे तँ अहाँ बहुत फरहर भए गेल रही ।

मार्च-अप्रैल २०१५मे दरभंगा नर्सिंग होममे अहाँ मास दिनसँ बेसी पड़ल रही ।  डाक्टरक बिल बढ़ल जाए ।  केओ अहाँकेँ अपना ओहिठाम लए जेबाक हेतु तैयार नहि रहए । तखन हम अनुजकेँ गाम फोन केलिअनि । टिकट पठा देलिअनि। डाक्टरक बिलक भूगतान आनलाइन केलहुँ । ओ अहाँकेँ बहुत गंजनि सहि इन्दिरापुरम स्थित हमर डेरा लेने आएल रहथि। अहाँ बेर-बेर कही-

रस्तामे ओ बहुत सेवा केलक,बहुत कष्ट सहि हमरा एतए धरि अनलक । ओकरसभ गलती माफ ।

हमर डेरापर अएलाक बाद अहाँ बहुत प्रसन्न रही । देह रोगा कए काँट-काँट भए गेल छल । पेशाबक मार्गमे नली लागल छल जाहि कारण वारंबार संक्रमण भए जाइत छल । धन्यवाद अछि डाक्टर एस.के जैन केँ जे राम मनोहर लोहिआ अस्पतालमे बहुत ध्यानसँ इलाज केलथि जाहिसँ अहाँक स्वास्थमे बहुत सुधार भेल । हमरा डेरापर अहाँ सातमास रहलहुँ । दिन-राति सेवा करैत करैत हमर श्रीमतीजी परेसान रहथि । कैकबेर  हमरा अनुपस्थितिमे पैखाना लए जाए पड़ैत छलनि । ताहिसँ हुनकर डांरक हड्डीमे दर्द शुरु भए गेल रहनि । सभसँ मोसकिल होइत छल जखन अहाँ पानि गिजनाइ शुरु करी आ पानि लगसँ हटबे नहि करी । कैक बेर हमरो कना जाइत छल । तेहन विकट परिस्थिति भए जाइत छल जे ककरो तामस भए जइतैक । मुदा अहाँ तँ लाचार रही । पानि छुबाक अहाँकेँ मनोवैज्ञानिक विमारी छल ।

हमरा संगे इंदिरापुरमक फ्लैटमे सातमास रहबाक समयमे अहाँक स्वास्थ्यमे बहुत सुधार भेल रहए।  कैकटा बेडसोर क्रमशः ठीक भए गेल । अहाँ वाकरक सहयोगसँ थोड़ बहुत चलिओ लैत छलहुँ। भोर-साँझ  घुमाओल जाइत तँ अहाँ बहुत प्रसन्न होइत छलहुँ । सोसाइटीक मंदिरमे साँझमे हनुमान चालीसाक पाठ करैत छलहुँ । कैकटा वयोवृद्धसभ अहाँक हाल-चाल पुछथि । अहाँ इन्दिरापुरामसँ चलिओ गेलहुँ तखनो हुनका लोकनिक अहाँक जिज्ञासा बनल रहनि । ओ सभ अहाँक बारेमे पुछैत रहैत छलाह । अहाँकेँ दिल्ली घुमबाक बहुत इच्छा रहैत छल । मुदा शारीरिक असमर्थताक कारण से नहि भए पाबए । तथापि,हमरा संगे अहाँ अक्षरधाम,योगमाया मंदिर आ कुतुब मिनार देखिकए बहुत प्रसन्न भेल रही ।

अहाँ हमरासंगे इंदिरापुरमक डेरापर रही जरूर मुदा अहाँक मोन सदिखन गामेमे लटकल रहैत छल । कखनो कहितहुँ जुलीसँ गप्प करा दएह । कखनो कहितहुँ राधेसँ गप्प करा दएह। कखनो रोहिनी बहिनसँ गप्प करबाक मोन होइत । रहि-रहि कए गामक गप्प-सप्प करितहुँ । जखन चंद्रधर काकाक देहांतक समाचार सुनने रही तँ अहाँकेँ बहुत दुखी देखने रही । हुनकासभक बारेमे कतेको बात कहने रही । ओसभ पहिने अपनेसभक आङनमे रहथि । हुनकर माएसँ हमरासभकेँ बहुत नीक संबंध छल । जखन हुनकर माए दुखित रहथिन तँ कैकदिन अहाँ हुनका ओतहि रहिकए सेवा केने रहिअनि ।

अहाँकेँ इच्छा रहए जे गुरुग्राम स्थित हमर बहिनक ओतए किछु दिन रही । हमरा कहल करी-

ओकरा ओहिठाम बहुत सुख होएत । तोरा ओतेक साधन नहि छह। ओहिठाम दूमास रहब । माए-बेटी भरि मोन गप्प करब । माए-बेटीकेँ आपसी बहुत सिनेह होइत छैक ।

मुदा अहाँकेँ ओ अपन डेरा नहि लए गेलथि । संभवतः साहस नहि भेलनि । जखन हुनकासभकेँ नीकसँ बुझा गेलनि जे अहाँकेँ  गाम जेबाक टिकट कटि गेल अछि तखन हमरा भागिन फोन केलथि-

दो दिन के लिए नानीजी को हमारे यहाँ भेज दीजिए । हम एम्बुलेंस भेज देंगे । उनको कोई दिक्कत नहीं होगी ।

हम तुरंत मना कए देलिऐक । आब जखन जेबाक समय छल तखन दू दिन लेल कतहु की करए जैतहुँ । जातिओ गमेलहुँ आ स्वादो नहि पेलहुँ । तकरबाद ओसभ हमर आग्रहपर हमर डेरापर आबि कए भेंट कए गेल रहथि । अहाँ खुशीसँ नाचए लागल रही ।

अक्टूबर २०१५मे हम अहाँक संगे असगरे बिहार संपर्क क्रांतिक प्रथम श्रेणी एसी कोचसँ दरभंगा बिदा भेल रही । ओ टैक्सीबला कमाल आदमी छल । जखन कखनो हमरा अहाँक संगे कतहु जेबाक होइत छल तँ हम ओकरे टैक्सी लैत छलहुँ । ओ एकटा समांग जकाँ काज अबैत छल । नीकसँ अहाँकेँ सीटपर सुता दैत छल । फेर अहाँक ह्वीलचेएर रखैत छल । गंतव्यपर पहुँचलाक बाद इतमिनानसँ अहाँकेँ उतारि दैत छल । एहिबेर सेहो ओ हमरा संगे रहए । अजमेरी गेट दिस हमरासभकेँ उतारि देलक । कूलीकेँ दोबर दाम दए अहाँकेँ ट्रेनमे बैसबाक ओरिआन केने रही । रस्ताभरि अहाँ बहुत प्रसन्न रही । हमरो आश्चर्य लागए जे असगरे हम कोना अहाँकेँ सम्हारने जा रहल छी । मुदा सहयात्रीसभ बहुत सहयोग केने रहथि । जेना-तेना दोसर दिन करीब पाँच बजे हमसभ दरभंगा टीसन पहुँचल रही । दरभंगा टीसनपर  राधे बहिन आ अहाँक पुतहु अपन जेठका बेटाकसंगे आएल रहथि । ओ सभ अहाँकेँ शुभंकरपुर(दरभंगा) अपन घरपर लए जाए चाहैत रहथि । परंतु,अहाँ अड़ि गेल रही जे गामे जाएब , आब गामेमे रहब , कतहु नहि जाएब । जखन अहाँक मोन औनाइत छल तँ अहाँक कहलापर कैकबेर हम फोन लगबैत छलहुँ । मुदा घंटी बजिते रहि जाइत छल। अहाँ एहि बातसँ बहुत दुखी भए जाइत छलहुँ । ताहि बातसभसँ अहाँ कहने रही-आब कतहु नहि जाएब  गाममे रहब। संभवतःसएह बातसभ अहाँक मोनमे घुरिआ रहल छल ।

 ओहि दिन विहार विधान सभाक हेतु मतदान होइत रहए। गामक हेतु टैक्सी नहि भेटैत रहए । हम जखन अहाँकेँ ई बात कहलहुँ तँ अहाँ रातिभरि दरभंगा (अनुजक घरपर) रहबाक हेतु मानि गेल रही। मुदा ताबे एकटा टैक्सीक जोगार भए गेल । हम दिल्ली अपन श्रीमतीजीकेँ फोन कए पुछलिअनि-

गाम फोन कए दिऐक की?”

नहि, नहि ,कदापि नहि । ओ सभ गाम छोड़ि कए कतहु चलि जाएत ।

हमरा हँसी लागि गेल रहए ।

एहनो कतहु होइ जे गाम छोड़ि कए चलि जाएत ।

तकर बाद राधे बहिनक संगे टैक्सीसँ गाम बिदा भेलहुँ । बेला मोर लग टैक्सी रोकि कए दू किलो मधुर किनलहुँ । कपिलेश्वर पहुँचलापर महादेवकेँ प्रणाम केलिअनि । तकर थोड़बे कालमे हमसभ गाम पहुँचि गेल रही ।

गाम पहुँचि तँ गेलहुँ मुदा ओ तँ हमरासभकेँ देखितहि साइकिलपर चढ़ि चौकपर घसकि गेलाह । हाल-चाल के पुछैत अछि? घंटाभरि अहाँ ह्वील चेअरपर बैसल रहि गेलहुँ । के पानि देत,के पटिआ ओछाओत? आखिर,राधे बहिन चाह बनओलथि । अहाँ चाह पीबए लगलहुँ आ हम मंदिरपर  बैसि सुस्ताए लगलहुँ । ताबे नरेन्द्रजी मोटर साइकलसँ मतदान करए जाइत रहथि । हमरा देखि मोटर साइकिल रोकि हमरो ओहिपर बैसा लेलाह । हम मतदान केन्द्रपर फटकिए ठाढ़ भेल रही । हमर नाम गामक मतदाता सूचीमे नहि छल । नरेन्द्रजी मतदान कए अएलाह । फेर हुनके संगे चौकपर गेलहुँ । ओ दस-बारह गोटे संगे बैसल छलाह । हम पुछलिअनि-

"किएक तमसाएल छी?"

एतबा बात बजितहि लागल जेना बम फूटि गेल । तकरबाद जे ओ तमासा केलाह से लिखबाक जोग नहि अछि । गामोपर दूपहर रातिधरि ओ हंगामा करैत रहलाह। कहुना कए राति बिता भोरे मधुबनी आबि गेल रही। जेना-तेना किछु दिनमे मामिला शांत भेल । अहाँ  गामसँ दरभंगा पठा देल गेलहुँ आ हम दिल्ली वापस चलि गेलहुँ । (ई बात नवंबर २०१५क थिक)

अप्रैल २०१६मे हम दिल्लीसँ गाम गेल रही । अहूँ दरभंगासँ गाम आबि गेल रही । मुदा अहाँकेँ गाममे बहुत दिक्कत भेल। अहाँ वापस दरभंगा जाए चाहैत रही । मोसकिलसँ चारि मास बितल होएत । अहाँक स्वास्थ गड़बड़ाए लागल । अगस्त २०१६मे हम फेर गाम गेल रही । अहाँक प्रवल इच्छा छल जे दरभंगा अनुजक ओहिठाम जाइ। मुदा से नहि भए सकल । अंततोगत्वा,हम दिल्ली वापस चलि अएलहुँ ।

नवम्बर २०१६ छठिक पावनि लग-पासमे अहाँक हाल बहुत खराप भए गेल रहए । लोककेँ पावनि  संकटमे पड़ि गेल रहैक। मुदा से अहाँ बँचा देलिऐक । लोक छठिक पाबनि केलक ।  तकर बाद अहाँक हाल कखनो नीक,कखनो बेजाए होइत रहल । हमरा अनुमान भए गेल जे आब अहाँ नहि रहब । हमरा नहि रहल गेल । तुरंते हवाइ जहाजक टिकटक ओरिआन कए दोसर दिन भोरे हवाइ जहाजसँ पटना पहुँचलहुँ । पाँच बजैत-बजैत गाममे रही । मुदा अहाँकेँ तँ होश नहि रहए । हम गोर लगलहुँ । अहाँ जेना तमसा गेल रही । किछु जबाब नहि देलहुँ। जोर-जोरसँ अहाँकेँ साँस लैत देखि डर होइत छल । देहक दुर्दशा देखि तँ अबाक रही । कहुना कए राति बितल , भोर भेल । भरि दिन ओहिना समय बितल  आ साँझ होइत-होइत अहाँ हमरासभकेँ छोड़ि कए चलि गेलहुँ । अहाँ एहि संसारक मोह वंधनसँ मुक्त भए गेलहुँ ।

दोसर दिन दूपहरमे गाजा-बाजाक संगे अहाँक अंतिम यात्रा बहार भेल छल । करीब एक सएगोटे कलममे अंतिम संस्कारक समयमे रहथि । चौरानवे वर्षक बएसमे एकटा महान आत्मा एहि संसारकेँ छोड़ि कए चलि गेल रहथि । हमर कष्टक अंत नहि रहए । एकटा अहीं रही जे जीवन भरि दिन-राति आशीर्वादक वर्षा करैत रहलहुँ ,  हमर कल्याणक हेतु सदति सचेष्ट रहलहुँ । मुदा कखनो-ने कखनो तँ अहाँ थकितहुँ। नओ वर्षक रही तखने बिआहक बाद अहाँ अड़ेर डीह आएल रही आ पचासी वर्ष एहि गाममे रहलहुँ । जीवन भरि अनवरत संपूर्ण परिवारक सेवा करैत रहलहुँ । नओटा बेटा-बेटी आ तकर सभक  एकटा बृहद परिवारकेँ सुखी -संपन्न छोड़ि गेलहुँ ।

चारि दिनक बाद जखन हमसभ अहाँक सारापर गेल रही तँ साराक आगि मिझा गेल छल । ओहिमेसँ बाँचल-खुचल हड्डीकेँ चुनि सिमरिआमे गंगामे प्रवाहित कएल गेल छल ।  पाँचमदिन सौंसे गामक बैसारमे हमर भातिज छओगाम जबार भोज हेबाक घोषणा केने छलाह । दिन-राति एक कए छओ गामक भोज भेबो कएल । महापात्र लोकनिकेँ नीकसँ नीक वर्तनसभ दान देल गेलनि। कुल मिला कए सात लाखसँ ऊपरे खर्च कएल गेल । मुदा हमरा ई सभ व्यर्थ लगैत रहए । ई बात हम कैकबेर बजबो करी । एहि खर्चक आधो जँ अहाँक सेवामे लगा देल गेल रहैत तँ बाते दोसर रहैत । मुदा ताहि समयमे तँ जे हाल छल से कहिए चुकल छी । भोज-भात भेलैक । बारहदिन धरि निरंतर कर्म भेलैक । सभ किछु भेलैक जे अपनासभक ओहिठाम एहि समयमे होइत छैक । मुदा तकर की फएदा? मरलाक बाद केओ घुरि नहि आएल,ने कहलक जे ओकरा हेतु कएल गेल दान-पूण्य ओकरा पैठ भेलैक कि नहि । मुदा से सभ केलासँ इलाकामे यश-प्रतिष्ठाक संभावना तँ बनिए जाइत छैक ।

हमरा मोन पड़ैत अछि जे जखन मधुबनीक मकान बनओने रही तँ अहाँकेँ बहुत आग्रहपूर्वक ओतए लए गेल रही । रातिभरि अहाँ ओतए रहलहुँ । रातिमे सुतबा काल अहाँ कहने रही- ओकरो एहने मकान भए जइतैक ।

तकरबाद फेर अहाँ कहिओ मधुबनीक हमर घरपर नहि जा सकलहुँ। ओ गाममे अहाँक रहिते मकान बना लेने रहथि । मुदा अहाँ ओहि मकानमे कहिओ नहि रहि सकलहुँ । अहाँ अपन घरमे बेसी सुखी छलहुँ। मुदा आब अहाँक ओ घर तोड़ि देल गेल अछि। आब ओहूठाम कोठा बनि गेल अछि। घरे-घर भए गेल छैक । हमरा लगैत अछि जे एहिबातसँ अहाँ बहुत प्रसन्न होएब । मुदा आब जौँ अहाँ गाम अएबो करब आ ओहिठाम तकबो करब तँ अहाँक कोनो आन  बेटा ओतए नहि भेटताह। संभवतः इएह नियति छल ।

चिठ्ठी लिखैत-लिखैत कैकबेर हम  भावनाक अन्हरमे सुन्नभए जाइत छी। कलम रुकि जाइत अछि । आँखिसँ नोर बहब रुकिते नहि अछि ।  तेँ तँ हम अहाँकेँ चिठ्ठी लिखबासँ बचैत छलहुँ। कहीं  एहि चिठ्ठीक चर्च सुनि कए अपने लोकसभ अहाँक शांति ने भंग कए देथि ? कहीं आबो अहाँपर पक्षपातक आरोप नहि लगा देथि ? कहीं इहो ने कहि देथि जे मरलाक बादो ई बुढ़िआ जेठके बेटेक पक्ष लए रहल अछि । मुदा तै सभक डरे कतेक दिन गुम्म रहितहुँ । ओहुना तँ बातसभ मोनमे घुरआइते रहैत अछि । फेर अहाँसँ मोनक बात नहि कहब तँ कहबैक ककरा? अहाँ हमर माए,जन्मदात्री तँ छीहे,गुरु सेहो छी । अहाँकेँ नीकसँ बूझल अछि जे हम आओर ककरो गुरु नहि बना सकलहुँ । एहि संसारक प्रपंचसँ मुक्त करबाक भारो हम अहींकेँ दए देलहुँ। अपना भरि अहाँ हमर बहुत संग देलहुँ। हम दिल्लीमे रहैत  छलहुँ आ अहाँ गाममे -एक हजार किलोमीटरसँ बेसिए दूर । तथापि सदति अहाँ न्यायार्थ हमर पक्ष लैत रहलहुँ जाहि कारणसँ अहाँकेँ ओतेक तंग कएल गेल । से सभ सोचि हमरा मोनमे बहुत क्षोभ होइत छल । अहाँ किएक हमर बात रखैत छलहुँ? किएक ने ओकरासभकेँ हमरा खिलाफ बाजए दिऐक,जतेक मोन होतैक हमरा श्राप दैत,जे करैत । मुदा अहाँ तँ चैनसँ रहितहुँ ।

हम से कोना करितहुँ । हम तँ माए छलहुँ । अहूँक आओर ओकरोसभक । सही बात किएक नहि बजितहुँ ।

हम जनैत छी जे अहाँ इएहसभ कहितहुँ ।

चिठ्ठी बड़ीटा भए गेल । असलमे पुरान घावकेँ ई चिठ्ठी जेना फेरसँ हरिआ देलक । रहि-रहि कए हाथ ठाढ़ भए जाइत अछि। हमरा होइत रहैत अछि जे अहाँकेँ अपना लगसँ गाम नहि लए जेबाक छल । दरभंगाक डाक्टरक बात नहि मानक छल । दिल्ली आनि शल्यक्रिया कए अहाँक हड्डी जोड़ेबाक छल । मुदा दरभंगाक डाक्टरक बात सुगम बुझाएल छल । सभक सएह इच्छा रहैक । परिणाम जे भेल से जनिते छी । सभ -सभक मुँह तकैत रहल । अंततोगत्वा, अहाँ  चलि जाइत रहलहुँ । तकर बाद हम बहुत दिनधरि दुखी रही। रहि-रहि कए अहींक बारेमे सोचैत रही । फेर गीता पढ़नाइ शुरु केलहुँ जे आइधरि नियमित चलि रहल अछि। ओहीसँ मोनमे शांति भेल । जकरा जखन जतए मरबाक होइत छैक तखने मरैत अछि , से बात बुझलहुँ ।

हम नहि बूझि सकलहुँ जे अहाँकेँ श्राद्धमे एतेक खर्चा भेलासँ किछुओ फएदा भेल कि नहि? स्वर्ग भेटल कि नहि? अगिला जन्म नीकठाम हेबामे किछुओ मदति केलक कि नहि ? भए सकैत अछि जे अहाँक जबाब प्राप्त भेलाक बाद एहि बातसभक किछु निराकरण होअए ।

ओना अहाँ तँ जीवन भरि तपस्या केने छी । दिन-राति परिश्रम कए एतेकटा परिवारक रक्षा केने छी । कोनो व्रत-उपवास नहि छल जे अहाँ नहि करैत रही । एकादशी,चतुर्दशी ,रवि,मंगल आ कहि ने की-की । अपन नओ संतानक पालन तँ केनहि रही,अपन नाति,नातिन,पौत्र-पौत्रीसभक सालों पालन-पोषण केने छी। गाम-घरमे जकरा जे पार लागल से मदति करैत रहलहुँ । एहन पवित्र आत्माकेँ  मरणोपरांत कर्मकाण्डक मदतिक काज नहि भए सकैत अछि । आशा अछि जे हमर अनुमान सही होएत आ अहाँकेँ नीक सँ नीक स्वर्ग भेटल होएत ।

अहाँकेँ आब की हाल अछि,अगिला जन्म केहन की भेल? की मुक्ति भए गेल?स्वर्गक की हिसाब रहल?कहीं हमरासभक मोह अहाँकेँ अखनो तंग तँ नहि केने अछि?ई बातसभ जानबाक जिज्ञासा हमरा मोनमे बनल अछि । आशा अछि जे चिठ्ठीक जबाब दैत काल एहि बातसभक ध्यान राखब।

एकराति सपनामे देखलहुँ जे अहाँ खूब संपन्न घरमे जन्म लेलहुँ । अहाँक पिता अहाँकेँ बहुत मानैत छथि । अहाँकेँ बहुत नीक इसकूल-कालेजमे पढ़ओलथि । पढ़ि-लिखि कए अहाँ बहुत पैघ विद्वान भए गेल छी । मिथिलाक  नारीसभकेँ सम्मान आ अधिकारक हेतु अहाँ आगु भए काज कए रहल छी ।  जँ से सभ ठीके होइक तँ सेहो अपन चिठ्ठीमे जरूरसँ लिखि देब ।

ऐकटा आओर बात । अहाँक पिता अहाँक जन्मसँ किछु दिन पूर्वे मरि गेल रहथि । अहाँ हुनकर मुँहो नहि देखि सकल रही,ने ओ अपन पहिल संतानकेँ देखि सकल रहथि । भए सकैत अछि जे स्वर्गलोकमे अहाँकेँ अपन पितासँ भेंट भेल होअए । जँ से भेल होइक तँ अपन चिठ्ठीमे सभबात फरिछा कए लिखब । ओ केहन छथि ? अहाँकेँ देखितहि ओ केना की कहलथि? भए सकैत  अछि जे पिताक पहिल बेर भेल  भेंटसँ अहाँ ततेक अह्लादित भेल होइ जे हमरा सन-सन अज्ञानी ,मूर्ख पुत्रक अपराधसभ बिसरा गेल होअए। से भेल होअए तँ बुझू हमरा मुक्ति भेटि गेल । मुदा हम से सभ बुझबैक कोना? ओ तँ अहाँ चिठ्ठी लिखब तखने ने । तेँ बिसरब नहि, चिठ्ठी जल्दिए लिखब ।

एकटा बात तँ बिसरले जाइत छलहुँ । बाबूसँ भेंट भेल कि नहि ? ओ तँ अहाँ सँ २६साल पहिने चलि गेल रहथि । जँ भेल तँ हुनकर समाचार जरूर लिखब ।

चिठ्ठी  कनी पैघ भए गेल । मुदा रोकने नहि रोकाइत छल। संकोचवश, अखनो बहुत रास बातसभ लिखब छुटि गेल । अस्तु, क्षमा करब।

पत्रोत्रक अभिलाषी,

अहाँक पुत्र,

 रबीन्द्र

12.7.2020


 [91]


दरभंगा रेलवे टीसनपर

दिल्लीसँ गाम पहुँचलाक बाद


गामक कालीपूजा देखए गेलथि
गामसँ दरभंगा 






दरभंगा सुरेन्द्रक  घरपर


शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

संतुष्टि


संतुष्टि



छोटे सी खोपड़ी में

रहता है फकीर

सुखी और शांत

न चोरी का डर

 न लुट जाने की चिंता

न ही कुछ भी पाने का दुराग्रह

परंतु,

अट्टालिकाओं में रहकर भी

कुछ और पाने के चक्कर में

 हम रहते हैं परेशान,

यह हुआ ,वह भी होना चाहिए

के चक्कर में

 रहते हैं अस्तव्यस्त

और किसी दिन

हाय- हाय करते

दुनिया छोड़ जाते हैं

हक मारकर दूसरों का

बढ़ा लेते हैं

संपन्नता और प्रभुत्व

फिर भी,

स्वनिर्मित अंतरविरोधों में

फँस सुखी हो नहीं पाते  

इसलिए जरूरी है

जीवन को समझना

सकून चाहिए तो छोड़िए

यह सब

त्याग को अपनाइए

सही मान में वही हैं संपन्न

जो आश्रित नहीं

सम्मान की चाहत नहीं

और  स्वयं संतुष्ट हैं ।


10.7.2020