गुरुवार, 18 मई 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशन (भाग तेरह,चौदह आ पन्द्रह):

 

१३

 

मखनाक गतिविधिपर यमराजकेँ सक भए गेलनि। ओ अपन जासूससभकेँ ओकरापर विशेष ध्यान रखबाक हेतु कहलखिन संगहि ईहो कहलखिन जे कोनो बात होइक तँ हुनका तुरंत खबरि कएल जाए। सएह होमए लागल। जासूससभ ओकर आगू-पाछू करए लागल। ओ जतहि जाइत किछु गोटे आगू तँ किछु गोटे पाछू चलैत रहैत छलैक। एहि बातसँ मखनाकेँ सेहो सक भए गेलैक। सोचए लागल जे आखिर ई सभ के अछि आ हमरा किएक पछोड़ करैत रहैत अछि?

मखनाक संचिकाकेँ यमराज स्वयं पढ़लथि। ओ ओकर पारिवारिक पृष्ठभूमिक जानकारी चाहैत छलाह। पढ़ैत-पढ़ैत हुनका पता लागल जे ओ तँ राजपुराक रहए  वला अछि। मृत्युक बाद ओ यमलोक आनल जा रहल छल की रस्तेमे हेराफेरी कए अपनसभटा संचिका बदलि देलक।

ई सभ बूझलाक बाद यमराजकेँ बहुत चिंता भेलनि। मोने-मोन सोचथि- "ई आदमी शुरुएसँ गड़बड़ लगैत छल। सभसँ दुखद बात अछि जे हमर श्रीमतीजी एकरापर बहुत भरोस करैत छथि। पहिने तँ हुनका बुझाबी। फेर देखल जएतैक। एकरा रस्ता लगाएब कोन भारी बात छैक?"

यमराजक कारक टायर पंचर भए गेल रहनि। हुनका फेर मखनेपर सक भेलनि जे कहीं ई एकरे काज ने होइक। सोझासँ एकटा एक्का जा रहल छल। ओ एक्का वलाकेँ रुकबाक इसारा केलाह। आहि रे बा !ओ तँ यमराजक इसारा देखितहि फटकी भागए लागल। प्राणक डर ककरा नहि हेतैक?सएह भेलैक।

यमराज तमसा कए एक्का वलाक पाछू दौड़ रहल छलाह कि मखना देखलकनि।

"सरकार अपने किएक दौर रहल छी?"

"पकड़ एकरा" -एक्का वला दिस इसारा केलखिन। मुदा ओहो तँ फेरल छल। एक्का वलाकेँ इसारा केलक जे भागि जो। एक्का वला आओर जोर-सोरसँ एक्काकेँ दोड़बए लागल। यमराज आओर तमसाइत ओकरा खिहारि रहल छलाह। यमलोकमे बेस मनोरंजक दृश्य भए गेल छल। एहि दौर-बरहामे यमराजक हाथसँ मखनाक संचिका खसि पड़ल। यमराजकेँ से अखिआस तखन भेलनि जखन सामनेमे रेखा आबि कए दौरबाक कारण पुछए लगलखिन-

"की बात छैक? एना किएक दौरि रहल छी?"

"की कहु?-से कहि हाथक संचिकाकेँ ताकए लगलाह।

"संचिका कतए गेल।"

"कोन संचिका?"

ताबते एकटा यमसिपाही एकटा संचिका लेने दौरल आएल। यमराजकेँ जानमे जान आएल। ओ एहि संचिकाकेँ पढ़बाक हेतु रेखाकेँ देलखिन।

"एकरा पढ़ू। सभबात अपने बूझि जेबैक।" -से कहि संचिका रेखाक हाथमे धए देलनि।

रेखा बहुत ध्यानसँ ओहि संचिकाकेँ पढ़ए लगलीह। ओहिमे सौंसे मखनाक प्रशंसा भरल छल। हुनकर मोन आनंदसँ गद-गद छल। फेर बजलीह-

"हम तँ ई बात बुझिते रही। मखना बहुत नीक खानदानक लोक अछि आ बहुत योग्यो अछि, मुदा अहाँकेँ के बुझाएत?"

"की बात कहि रहल छी? अहाँ एहि संचिकाकेँ नीकसँ नहि पढ़लिऐक की?"

"हम नीकसँ पढ़ि लेलहुँ। अहाँक चश्मा लगैत अछि खराब भए गेल अछि। फेरसँ पढ़ि लिअ। आ हे! चश्मा ठीक करा लेब।"

पत्नीक एहन व्यंगात्मक गप्प सुनि यमराजक मोन जरि गेलनि। भेलनि जे अखने एहि दुनूगोटेक प्राण घीचि ली। से तँ ओ कइए सकैत छलाह मुदा ब्रह्माजीक डर भेलनि। फेर ओ संचिका रेखाक हाथसँ लए पढ़ए लगलाह।"आहि रे बा! एकर तँ पाँति- पाँति बदलि देल गेल अछि। मखना मामूली धोखेबाज नहि थिक।" -यमराज बजलाह।

"अहाँकेँ तँ एहिना रहैत अछि। हमरा लगीचमे केओ रहए से अहाँकेँ पसिंद किएक होएत? असली बात तँ से अछि।"

दुनू बेकतीमे एहि बातपर बेस घोंघाउज होमए लागल। से देखि मखना बहुत प्रसन्न भेल। मोने-मोन सोचलक-

"हमर पाछू पड़ल छलाह। आब लेथु।"

यमराजकेँ व्यग्र देखि मखना कहए लागल-

"सरकार अपने किएक परेसान छी? घरबालीक बातपर चिरौरी नहि करू। आइ-काल्हि बहुत खराब कानून आबि गेल छैक। सिकाइत भए जाएत तँ जमानतो नहि होएत।

"चुप रह। ई राजपुरा नहि थिकैक। यमलोक छै। तोरा तँ हम जल्दीए ठेकाना लगेबौक। देखै छी तूँ कतेक दिन बचैत छैँ। तोहर खेल जल्दीए खतम हेतौक।"

से कहि यमराज मोछ पिजाबए लगलाह। मुदा मखनाक लेल धनिसन। मखनाकेँ तँ मोन होइक जे यमराजकेँ ठामहि उठा कए पटकि दिअए।

यमराज अपन मंत्रीमंडलक आपत्तिकालीन बैसक बजओलथि। ओकर मुख्य विषय छल-मखनाक कदाचारकेँ ध्यानमे रखैत ओकरापर दंडात्मक कारवाइ। ओ ई कहिओ ने सोचने हेताह जे छोट सन एहि मामिलामे हुनके मंत्रीमंडलक सदस्यगण हुनकर विरुद्ध चलि जेताह। मुदा भेल सएह। बैसकमे हड़बिड़रो मचि गेल गेल। “काबीनामंत्री धरिमे मखनाक एहन गहींर पहुँचि केना भेल?-ई सोचि-सोचि यमराजक चकरी गुम छल।“जरूर कोनो खास आदमी षड़यंत्र कए रहल अछि।" -यमराज मोनेमोन सोचए लगलाह। बैसारक क्रममे मंत्रीगण सबूतक मांग कए देलाह। कहए लगलाह जे अहाँक मखना संग मतभेद व्यक्तिगत कारणसँ अछि,एहिमे यमलोककेँ ओझराएबाक कोन औचित्य?" यमराज गुम पड़ि गेलाह आ आग्रह केलाह जे मूल संचिका तकबाक हेतु हुनका किछु समय देल जाए।

"एवमस्तु!" -मंत्रीगण बजलाह। बैसार खतम भेल। मंत्रीसभ अपनामे चुप-चाप गप्प करथि- "यमराजो सठिआ गेल अछि। एकरा एहि बएसमे अपन पत्नी छोड़ि रेखाक चक्करमे पड़बेक नहि छल। एकर आब एहिसभ काजक बएस छैक? व्यर्थकेँ चस्का लगेने अछि। मखनाक कोन दोष। ओ नहि तँ केओ आओर? की ने?"

“सत्य वचन" एकरा वशक किछु छैक नहि तखन किएक लफड़ामे पड़ल रहैत अछि।" -से बजैत सभ ठठा कए हँसि देलक।q

 

१४

 

मखना अपन मौलिक संचिकाकेँ यमलोकसँ लदने-लदने राजपुराक लगीचमे पहुँचल। ओ कालू भगताकेँ ताकि रहल छल। कालू ओकर सहोदर भाए छल। मखनाक देहसँ प्राण निकलि रहल छलैक कि यमदूत सभकेँ पैर पकड़ि गोहराबए लागल। ओकरा कनैत-कलपैत देखि यमदूतसभकेँ दया आबि गेलैक। पुछलकैक- "किएक कानि रहल छह?"

"हमर प्राण वापस कए दएह।"

 "एकहिटा उपाय छैक?" यमदूत बाजल।

"कहह ने, जे कहबह सएह करब, मुदा हमरा बचा लएह।"

तकर बाद  पता नहि दुनू गोटे की-की बतिओलक? किछु लेब-देब भेलैक आ मामिला पटि गेलैक। यमलोक जइतहिँ यमदूतसभमे मिझरा गेल। ओकर संचिका बदलि देल गेल। एहि तरहेँ ओ यमराजक दरबारमे पैस बनओलक। कोना-ने-कोना यमपाश सेहो भेटि गेलैक। आओर तँ जे भेलैक से भेलैक, यमराजक घर धरि घुसिआ गेल। ततबेपर नहि रुकल, रेखाक संगे रमि गेल। किछु तँ ओकरामे छलैक जे एतेक आगू बढ़ि गेल।

मखना अपन गामक ऊपर कैक बेर चक्कर लगओलक मुदा कालू कतहुँ नहि देखेलैक?हारि कए ओ वापस होइत रहए। फरीच भए गेल छल। ताबे ओ राजपुरा लग पहुँचि गेल छल कि एकटा नान्हिटा घरक फट्टक खुजल।

"ई तँ कालू लागि रहल अछि। मुदा एकरा संगे एहन सुन्दरि के छथि?" -ओ मोने-मोन सोचैत छल।

कालू कुर्सी निकालि कए बाहर बैसल आ निशा भपाइत चाहक कप लए हाथमे देलखिन। दुनू गोटे चाह पीबए लगलाह संगे गप्प-सप्प सेहो चलि रहल छल। दुनूक संतुष्टिभाव केओ पढ़ि सकैत छल। ताबतेमे मखना कनीक आओर लगीच आबि गेल। किछु छल तँ कालू भगता छल, मंत्र-तंत्र किछु ज्ञान छलैक। ओकरा यमदूतक आगमनक आभास भेलैक। नहूँ, नहूँ बाजल- "शिव! शिव! निशाक ध्यान कालूपर पड़लैक।

“कथि लेल चिंतित छी?"

कालू ऊपर दिस इसारा केलक मुदा किछु बाजल नहि। मखना लाख बुझेबाक चेष्टा कएलक मुदा कालू आओर डराइत रहल। ओकरा बहुत परेसान देखि मखना ओकरा दुनूकेँ ठामहि उठा लेलक आ उड़ि गेल।

"एहनो जबरदस्ती भेलैक अछि?" -कालू बाजल।

मखना भभा कए हँसल। मखना राजपुरा पहुँचि महराजी पोखरिपर उतरि गेल। कालू भगता आ निशाक जान-मे-जान आएल। ओ भरि रस्ता हनुमान चलीसा पढ़ैत रहल आ मखना हँसैत रहल।

“तूँ के छह?” -कालू बाजल।

“तोहर छोट भाए।”

मखना बाजल।

"से केना भए सकैत छैक? ओ तँ साल भरि पहिने मरि गेल।"

"से बात ठीक छै मुदा जे हम कहि रहल छी सेहो ठीक अछि।"

"से कोना भेल?"

"तूँ शांत रहह। हम सभटा बात कहबह।"

"ठीक छैक, कहह।"

कालू कनीक आश्वस्त भेले छल कि मखना निशा दिस इसारा केलक।

"ई तोरा संग कोना भए गेलह?"

"पहिने तूँ अपन खिस्सा कहह? बातकेँ एमहर- ओमहर घुमाबह नहि।"

“ठीक छैक, तँ सुनि लएह।"

 मखना कहलकैक जे हमर बात पर ध्यान दएह। फेर अपन खिस्सा शुरु केलक-

"हमर प्राण खिचने यमदूत लए जाइत रहए। रस्तेमे एकटा मैथिल यमदूत भेटल। ओ अपन बात कहए लागल जे केना ओ यमराजकेँ चकमा दए नरकक यातनासँ बँचि गेल, ततबे नहि यमदूतो बनि गेल। ओकर बताओल पद्धति हमहु दोहरओलहुँ। हम तँ आश्चर्यमे पड़ि गेलहुँ जे लोक खामखाह अपना ओहिठामकेँ बदनाम केने छैक। यमपुरीक हालति तँ ओहूसँ चौपट छैक। हमर सभटा संचिका बदलि देलकैक। परिणाम भेल जे यमराज लग जाइते हमर जोरदार स्वागत भेल आ बिना कोनो देरी केने यमदूतमे बहाल कए लेल गेल। यमपाश भेटि गेल आ विशेष कोडवर्ड सेहो भेटिगेल।"

"कोडवर्ड की भेलैक से नहि बूझलिऐक?"

"तोरा ई सभ बुझबाक कोन काज छह? सारांशमे बुझहक जे दोषी जज भए गेल" -से कहि ओ ठहाका पारि कए हँसए लागल।

"मुदा तोहर सकल-सूरति केना बदलि गेलह?" -कालू पुछलकैक।

"नहि बुझलहक, जेहने काज करबैक तेहने बगए चाही ने। यमपुरीमे जबरदस्त ड्रेसकोड छैक।

तीनूगोटेमे गप्प-सप्प भइए रहल छल कि हरि अपन चेला-चाटीसभक संगे महराजी पोखरिक निरीक्षण करए पहुँचलाह। जहिआसँ ओ राजमंत्री भेलाह,हुनकर रोबदाब देखए वला छल। महराज ओ महरानीक खासम-खास भए गेल छलाह। बहुत गोटे भितरे-भितर जरैत छल मुदा ताहिसँ की?

महराजी पोखरिक घाटपर कालूकेँ देखिते ओ चिचिआ उठलाह-

"कालू, कोना छह? "

"गोर लगै छी? “

“नीके रहह। ई के छथि?”

एहिसँ आगू ओकरा किछु नहि फुरेलैक। दुनूगोटेमे गप्प होइते रहैक कि मखना निपत्ता भए गेल। धरफरीमे ओकर संचिका कालू लग खसि पड़लैक। हरिक ध्यान ओहिपर पड़लनि। हुनकर सिपाही ओहि संचिकाकेँ उठा कए हुनकर हाथमे थम्हा देलक। मुदा ओ ओहि संचिकाक एको आखर पढ़ि नहि सकलाह। “पता नहि की अण्ट-सण्ट लिखल छैक?”-ओ मोनहि-मोन सोचैत रहथि। ओ ओहि संचिकाकेँ मुंसीकेँ धरा देलखिन आ कालू संगे गप्प करए लगलाह। कालू तँ हिनकर ठाट-बाट देखि कए छगुन्तामे रहए। किछु फुरेबे नहि करैक। हरि ई बात तारि गेलाह आ कहए लगलखिन-

"नहि बुझलहक, ई सभ हनुमानजीक चमत्कार अछि, नहि तँ हम तँ खतम छलहुँ"।

से की?" चलह ने हमरे ओहिठाम। दुनूगोटे चैनसँ बतिआएब। कालूक संगे निशा सेहो छलखिन, तेँ चिन्तित भए गेल जे पता नहि कतए लेने जा रहल अछि। हरिक माथा तुरंत काज केलक। कोनो बातक चिंता नहि करह। हम संगे छिअह ने। हिनको लेने चलह।"

आ तीनू गोटे बिदा भेल। हरिक पाछू-पाछू ओकर सिपहसलारसभ चलि रहल छल। कालू ओ निशाक संगे हरि अपन महलमे पहुँचलाह। घर देखिते कालू छगुन्तामे पड़ि गेल। हरि पुछलखिन॒-

"चिंतित बुझा रहल छह?"

"किछु नहि।"

"किछु तँ तोरा मोनमे छह। अपने सभटा बूझि जेबहक। ई सभ हनुमानजीक कृपा छनि।" ई बाजि हरि बैसले छलाह कि महराजी भगता प्रातःभ्रमणसँ वापस आबि रहल छलाह। हरिक घर लग अबितहि हुनका पुछलखिन॒-

"अहाँक घरमे के अछि?"

"ई छथि कालू भगत। हमर गामे लग पुबारिगाममे रहैत छथि।"

"आओर के अछि?"

"हिनके संगी छथिन-निशा।"

महराजी भगताकेँ लगीच अबैत देखि कालू सकपका गेल। मुदा ओ तँ आओर लगमे सहटल आबि रहल छलखिन। निशा सेहो परेसान छलीह। ई सभ देखि हरि बाजि उठलाह-

"अहाँसभ एतेक परेसान किएक छी?ई केओ आन नहि छथि। "

मुदा कालू जे चुप भेलाह से बकारे नहि खुजनि। हरि महराजी भगताकेँ ओ संचिका दैत कहलखिन- "कनी एकरा देखबैक। पता नहि की,की लिखल अछि।" महराजी भगता संचिका लए आगू बढ़ि गेलाह।q

 

१५

 

मखना कतहु गेल नहि छल। लगेपास नुकाएल छल। जाइत कतए? यमराज ओकर यमपुरीक कोडवर्ड जप्त कए लेने रहथि जाहिसँ ओकर यमपाश काज केनाइ बंद कए देलक। ओकर संचिकाक हेराफेरी पकडा़ गेल छल। पक्का सबूत प्राप्त करबाक हेतु मखनाक गतिविधि पर दिन-राति नजरि राखल जा रहल छल। हेरा-फेरी तँ ओ केने रहैक, आब पकड़ेबाक समय आबि रहल छलैक। तेँ ओ अपन भाए कालू लग पहुँचल छल जे कोनो रस्ता निकलत मुदा ओ तँ अपने चक्करमे मस्त छल। यमराजक चेलासभ ओकरा देखि रहल छल। जखन ओ संचिका कालू लग खसओलक तखने यमराज ओकर फोटो खीचि लेलाह। यमराज मोने मोन सोचैत छलाह-

"आब कतए जाएत?पक्का सबूत हमरा हाथ लागि चुकल अछि।"

मखना बहुत फेरल आदमी छल। तेँ ने मरलाक बादो अपन संचिकामे हेराफेरी कए यमदूत बनि गेल। मुदा सभक खेल कखनो-ने-कखनो खतम होइत अछि। सएह मखना संगे भेलैक, कनी जल्दीए भए गेलैक। यमलोकोमे यमराजक दोसर पत्नीक चक्करमे पड़ि गेल। मामिला तेजीसँ चर्चाक विषय भए गेल। यमराजकेँ ओकरापर सक ओहीदिन भए गेलनि जखन गलत व्यक्तिक प्राण खिचबाक हेतु यमपाश लए पहुँचि गेल। जे हेबाक रहैक से भेलैक। यमराज ओकरासँ खिन्न भए गेलाह। ओकर सभटा शक्ति छिनि लेलथि। ओकर यमपाश निष्कृय भए गेल। तखनसँ ओ भागि रहल अछि,नुका रहल अछि मुदा कखन धरि?

यमराज फेर अपन काबीनाक बैसक बजओलथि। ओहिमे मात्र एकटा विषय छल- “मखनाक धोखाधड़ीक आ ओकरा विरुद्ध प्रभावशाली कारवाइ। यमलोकक काबीनाक बैसार प्रारंभ भेल। यमराज बजलाह- “वंधुवर! अहाँसभकेँ कुसमयमे आबय पड़ल ताहि हेतु हम क्षमाप्रार्थी छी। असलमे ई धूर्तराज मखना मोसकिल कए देलक अछि। पछिला बेरक बैसकमे किछु मंत्रीलोकनि ओकरा विरुद्ध सबूतक प्रयोजन कहलथि। से लिअ, सबूत हाजिर अछि।"

तकर बाद बड़काटा परदापर मखनाक गतिविधिक सद्यःप्रसारण प्रारंभ भेल। मंत्री लोकनि यमराज द्वारा आधुनिकतम तकनीकीक प्रयोग कए मखनाकेँ पकड़ि लेबामे सफल भेलासँ छगुन्तामे रहथि। ओसभ मखनाक एक-एक डेगकेँ सद्यः देखि-सुनि रहल छलाह। मखना अपन भाए कालू भगताकेँ कहि रहल छल-

“भाइ! नहि बूझलिऐक जे यमराजक आदमीसभ एतेक पक्का अछि। हमरा तँ यमपत्नी रेखासँ दोस्ती भए गेल आ से ततेक गहींर भेल चलि जा रहल छल जे ओ यमराजोकें ठेंगा देखा देलथि। तकर बाद  यमराज हाथ धो कए हमर पाछू पड़ि गेलाह।"

मखना बजने जा रहल छल आ एक-एकटा गप्प यमलोकक काबीनाक बैसारमे मंत्री लोकनि सद्यः सुनि रहल छलाह। मृत्युलोकसँ दूभाषिआ मरि कए यमलोक पहुँचल छल। ओएह मखनाक गप्प-सप्पकेँ मैथिलीसँ यमभाषामे अनुवाद कए रहल छलाह। काबीनाक सदस्य लोकनि यमराजक प्रस्तावसँ सहमत भए ओकरा ताजीवन जहलक स्वीकृति देलथि। तकर बाद  काबीनाक बैसार विसर्जित भए गेल। यमराजक काबीनाक फैसलाक क्रियान्वयन हेतु यमराजक पुलिस वारंट लए मृत्युलोक बिदा भेलाह।q

 

 

Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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https://pothi.com/pothi/node/195795

 

 

 

 

 

 

शुक्रवार, 12 मई 2023

सन् २०१८मे प्रकाशित हमर मैथिली उपन्यास महराज(ISBN: 978-93-5321-395-4)क हमर ब्लाग स्वान्तः सुखायपर धारावाहिक पुनर्प्रकाशनक भाग दस,एगारह, आ बारह:

 



१०

 

प्रात भेने जखन जेलरबाबूकेँ होस भेलनि तँ कोनो अज्ञात स्थानमे पड़ल छलाह। निशाकेँ कतहुँ पता नहि छल। लग-पास केओ छलहो नहि जकरासँ किछु मदति भेटितनि। रातिओमे किछु नहि खेने रहथि। पानिओ नहि पीवि सकल रहथि। भूख-पिआससँ छट-पट करैत छलाह। जखन बुझा गेलनि जे ओहुना मरिए जाएब तँ ओहिठामसँ आगू ससरलाह। कनीके आगू बढ़ल होएताह कि एकटा जुआएल गहुमन साँप छत्र काढ़ने बीच रस्तापर ठाढ़ छल। आब तँ जेलरबाबूक हालति सम्हारसँ बाहर भए गेल। जेलरबाबू छगुन्तामे छलाह। कोनो उपाय नहि सुझा रहल छलनि। ओ ओहिठामसँ वापस भेलाह। कनीके आगू गेल हेताह कि ऐकटा बड़ीटा महराजी सुरंग देखेलैक। एहि कात साँप, ओहि कात सुरंग। जाथि तँ केमहर? हारि कए सुरंगमे पैसि गेलाह।

महराजीसुरंगमे जौँ-जौँ आगू बढ़थि तँ- तँ रस्ता फरीछ होइत गेल। साहस कए ओ आगू बढ़लाह, कोनो आओर उपायो नहि रहैक। ओ आधा घंटा धरि चलैत रहलाह तकर बाद  आओर चलबाक साहस नहि भेलनि। देह थाकि कए चूर-चूर भए गेल छलनि। भूख-पिआससँ छटपटा रहल छलाह। ओ ठामहि बैसि गेलाह। ओहिठाम चारूकात मनोरम दृश्य छल। नाना प्रकारक फूल-फलहरीसँ वातावरण मह-मह करैत छल। हरिअर कंचन घास, ठाम-ठाम गुलाब जलसँ सिक्त पानिक फुहारा पड़ि रहल छल। काते-काते सुन्दर-सुन्दर महल बनल छल। दहिना दिस एकटा रमणीय उद्यान देखेलनि। ओ ओमहरे बढ़ल छलाह कि चौकीदार रोकि देलकनि।

“आब की कएल जाए?"

जेलरबाबूकेँ छगुन्तामे देखि ओ बाजल-

"घबड़ाउ नहि,"

"हम बूझि नहि पाबी रहल छी।"

"अगुताउ नहि। सभटा अपने बूझि जेबैक।"

जेलर बाबू अत्यंत विस्मय सँ ओकर बात सभ सुनैत रहलाह।

“ई के अछि? हम कतए आबि गेल छी?"

ई बात सभ हुनकर मोनमे वारंबार अबैत रहलनि। कनिक दूर आओर गेलापर एकटा बेस टनगर लोक देखाएल। पातर-छितर,गोर दप-दप आ बेस फुर्तिगर। जेलर बाबूकेँ देखिते ओ प्रसन्न भए गेल। हाथसँ बैसबाक इसारा केलकैक। लगैत छलैक जेना कोनो महराजक हबेली होइक। फेर ओ अपने बजलथि- "हमरा चिन्हलहुँ?"

जेलर बाबूकेँ गुम देखि फेर अपने कहलाह-

"हम छी महराजी भगता "।

ओ जेलरबाबूक जलखैक ओरिआन केलक। बहुत भूखल रहथि, धराधर सभटा चट कए गेलाह। थाकल छलाहे,भोजन करितहि हाफी आबए लगलनि आ कनीके कालमे निन्न पड़ि गेलाह।q

 

११

 

महराजक नजरि निशापर बहुत दिनसँ गरल छलनि। जहन जेलरबाबू महराजी हातामे रहब स्वीकार नहि केलाह तँ महराज ई भार महराजी भगताकेँ देलखिन जे ओ कोनो चालि चलए। महराजी भगता मंत्र-तंत्रक प्रयोग कए हुनका ओझरओलक। समाजमे पसरल अशिक्षा ओ अंधविश्वास आगिमे घीक काज करैत छल। गाम-गाम महराजी भगताक आदमीसभ पसरल छल। एक हिसाबे ओसभ महराजक कारपरदाज छल जे हुनक शोषणमे सहायक रहए। कालू भगतो सएह छल। गड़बड़ एतबे भेलैक जे निशा संगे ओ अपने ओझरा गेल।

फरीच भए गेल छल। वर्षा सेहो थम्हि गेल छल। गाममे लोकसभ अपन-अपन रोजी-रोटीमे लागि गेल छलाह। चिरै-चुनमुन अपन खोंता छोड़ि कए स्वछन्द भए आकाशमे उड़ि रहल छलाह। मुदा कालू भगताक मंत्र-तंत्र चलिए रहल छल। ओकर कोरामे निशा अखनो बेहोस पड़ल छलीह। कनीकालमे कालीकेँ गोहरबैत निशाकेँ भरि पाँज पकड़ने उठल। ताबतमे निशाक आँखि खुजलैक। अपनाकेँ एहि परिस्थितिमे देखि कए ओ आश्चर्यचकित छलि। हम एहिठाम कोना आबि गेलहुँ?"

"कालू भगत हँसए लागल। पुछलकैक- "मोन केहन अछि?"

"किएक, हमरा की भेलए? "

"छोड़ू ई गप्प-सप्प। चाह पिबैक?"

"किएक नहि।"

"ठीक छैक, तँ हम करिआ चाह बना रहल छी कारण अखन धरि दुध नहि आएल अछि आ भए सकैत अछि जे आइ अएबो नहि करए।"

"कोनो बात नहि।"

मंद-मंद बहैत हबाक झोंकासँ निशाक चेतना क्रमश: सक्रिय भए रहल छल। ओ अखिआसि रहल छलि जे कतए छथि?मुदा ओ ओहि स्थानकेँ चिन्हि नहि सकलीह। किछु-किछु मोन पड़ि रहल छलैक। ताबतमे कालू भगता भफाइत चाह लेने आएल। चाहक चुस्की संग जेना ओकर माथाक तेजी सेहो बढ़ैत गेलैक। ओकरा ध्यानमे अएलैक जे जेलर बाबू तँ ओकर संगे छलैक,फेर ओ कतए गेल?रातुक प्रलयंकारी दृश्य आ भिजल जेलरबाबू ओकरा मोन पड़ए लगलखिन।

"रघु कतए छथि?"

“अहाँ एहि चक्करमे किएक पड़ल छी? हम छी ने?"

निशाकेँ कालूक नेतपर सक होमए लगलैक। सोचए लागलि-

"कहीं इएह किछु गड़बड़ तँ नहि केलक?"

 मुदा किछु बाजलि नहि। ताबत चाह खतम भए गेल छल। कालू मुस्की देलकैक आ निशाकेँ हाथ पकड़ि भितरक कोठरीमे लेने चलि गेल।

कालू अपना भरि बहुत प्रयास केलक जे निशाक मोनसँ जेलर बाबू हटि जाइक। जखन निशाक चिंता बढ़िते गेल तँ कालू जोर-जोरसँ किछु-किछु बड़बड़ाए लागल। ओकर आँखि लाल-लाल ओ भयाओन भए गेलैक। निशा चेतनासून्य भए चौकीपर खसि पड़लि।q

 

१२

 

मामा हमरा संग कए सोनाक सिक्का वला पोटरीकेँ राजपुरा लेने चलि गेलाह आ नामी सोनार सभकेँ देखए देलखिन। ओसभ पोटरीमे राखल सोनाक सिक्का देखि कए दंग छल।

"मुदा तोरा ई सोनाक सिक्कासभ भेटलह कतए? ई तँ किछु दिन पहिने महराजक घरसँ हरा गेल छल। महराज एकरा तकने फिरि रहल छथि। सौंसे शहरमे डिगडिगिआ पिटाओल गेल अछि जे हराएल सोनाक सिक्काक भांज देनिहारकेँ महराज स्वयं पुरस्कार देथिन।"

"हम से सभ नहि जनैत छी। ई हमरा भगवान देलाह अछि।"

"मिथ्या खिस्सा गढ़ि रहल छह। एखने महराजक पुलिस पकड़ि लेतह तखन बूझिअहक।"

“तूँ हमर बात पर विश्वास करह। हम ककरो सोनाक सिक्का नहि जनैत छी। ई हमर अछि, एहिमे कोनो सक नहि हेबाक चाही।

"तँ थम्हह, हम महराजक सिपाहीकेँ खबरि कए दैत छिऐक। तोरा संगे फाँसीपर के चढ़त?”

सोनार महराजक कारपरदाजकेँ फोन कए देलक। औ बाबू! देखिते-देखिते सोड़हि महराजी पुलिस एकट्ठा भए गेल आ ओकरा संग प्रश्नोत्तर करए लागल।

"तोहर की नाम छह?"

"हरि"

"घर कतए छह"

"पछबारिगाम। “

बहुत घोंघाउज होइत देखि हम दोकान दिस बढ़लहुँ। देखैत छी जे सिपाहीसभ मामाकेँ टंगने जा रहल अछि। सोनाक सिक्का वला पोटरी सेहो हुनकासँ छिन लेलक अछि। हम बहुत चिकरलहुँ, मुदा ओसभ ठेङा देखा कए हमरा चुप करा देलक आ मामाकेँ लदने-फदने महराज लग लेने चलि गेल। पाछू-पाछू हमहुँ ओतए पहुँचलहुँ।

प्रात भेने मामाकेँ हथकड़ी लगाए महराजक दरबारमे आनल गेल। दसटा महराजी पुलिस आगू-पाछू घुमि रहल छल। लगैक जेना कतेक भारी अपराधीकेँ पकड़ल गेल अछि। महराजक दरबार लागल। बीचमे सिंघासनपर महराज सुशोभित भए रहल छलाह। दुनूकात नाना प्रकारक लोकसभ उत्सुकतासँ महराजक श्रीमुखसँ न्यायक प्रतीक्षा कए रहल छल। महराजाधिराजक स्वागत हेतुसभ केओ ठाढ़ भए गेलाह। दूटा भाँट मनोयोगपूर्वक महराजक जयगान करए लगलाह-

"जय हो ! जय हो !सरकार के जय हो...

दुश्मन के क्षय हो, सभ कियो निर्भय हो

सभकिछु मधुमय हो, सभगोटै सुखमय हो

अगबे जय-जय हो..!

बल बढ़ै, आयु बढ़ै,बुद्धि बढ़ै, विद्या बढ़ै

चौगुन्ना संपत्ति बढ़ै,विपक्षी के विपत्ति बढ़ै

खेतमे अन्न बढ़ै, तिजोरीमे धन बढ़ै

थपड़ी  वला जन बढ़ै,बात  वला मन बढ़ै

गौरव छन-छन बढ़ै, यात्रा हबाइ बढ़ै

यश के पतक्खा नभमे उड़ै...

जय हो! जय हो!

सरकार के जय हो!

अगबे जय जय हो..!

तकर बाद  महराजसँ न्यायसभाक कार्यक्रम प्रारंभ भेल। एकटा दरबान जोरसँ अबाज देलक-

"महराजाधिराजक जय हो! सरकारक आज्ञा हो तँ न्यायसभाक कारवाइ प्रारंभ हो।"

"आज्ञा अछि।"

तकरा बाद  सभसँ पहिने हमर मामाकेँ महराजक सामने उपस्थित कएल गेल। महराज ताबे पान खा रहल छलाह। पान थूकबाक हेतु पिकदानी लए एकटा कारपरदाज दौरल। ततेकटा पान छल जे महराजक मुँहसँ अबाजे नहि निकलि रहल छल। पानकेँ थुकरि ओ पुछलाह-

"ई के थिक आ एकर की अपराध अछि?"

ई सुनितहि पेसकार बाजए लागल- “श्री मान! ई महान चोर अछि। अहाँक रनिबाससँ सोनाक सिक्काक पोटरी चोरा लेलक। आइ कतेको दिनसँ ओहि पोटरीक खोज भए रहल छल आओर ई बदमास ओकरा सोनारक हाथे बेचबाक फिराकमे छल कि पकड़ल गेल। ओ तँ सोनार इमान्दारी केलक जे ई बदमास पकड़ल गेल आ सोनाक सिक्का सेहो वापस भए गेल नहि तँ सत्यानाश भए गेल रहैत। एकर अपराध अक्षम्य थिक ताहि हेतु एकरा मृत्युदंड देल जाए।"

महराज हमर मामा दिस तकलाह। फेर पुछैत छथि-

"की बात छैक से सच, सच बाजह।"

"सरकार अपनेसँ किएक किछु झूठ कहब। अपने देवता थिकहुँ। हम कोनो चोरी नहि केलहुँ। हमरा तँ ई पोटरी भूतहा गाछी लग भेटल। हम अपन भागिन संगे अबैत रही कि ई पोटरी पाकल आम जकाँ भट दए खसल। हम ओहि पोटरीकेँ उठा लेलहुँ। खोलैत छी तँ बीसटा सोनाक सिक्का भेटल। हम बहुत प्रसन्न भेलहुँ। भेल जे भगवान हमर भागिनक पढ़ाइ-लिखाइक खर्चाक व्योत कए देलाह अछि। हम अपन भागिन संगे एहि पोटरी लए राजपुराक सोनार ओतए गेल रही कि ओ सोनार महराजी पुलिसकेँ बजा अनलक आ तकर बाद  जे भेल से तँ अपनेकेँ बुझले अछि।"

महराज ई बात सुनितहि हमरा बजओलथि। हम नवालिग ठहरलहुँ। मामाक परेसानीसँ मोनमे बहुत दुख छल। महराजक सामने जाइते ठोहि पारि कए कानए लगलहुँ। महराजकेँ दया आबि गेलनि। ओ बजलाह-

"तूँ के छह बालक? एना किएक कानि रहल छह?"

हम महराजकेँ सभटा बात सच-सच कहि देलिअनि। प्रमाणस्वरुप अपन मैट्रिकक प्राप्तांको देखए देलिअनि। ई सभ देखि सुनि महराजकेँ मोन डोललनि। ओ न्याय पुरुष भए ठाढ़ भए गेलाह। हुकुम देलथि- "ई व्यक्ति एकदम निर्दोष अछि। एकरा तुरंत रिहा कएल जाए संगहि ई पोटरी सभटा सोनाक सिक्काक संगे एकरा वापस दए देल जाए। एहि बालककेँ राजकोषसँ पढ़ाइ-लिखाइक व्यवस्था कएल जाए। संगहि हिनका दुनू गोटेकेँ रहबाक हेतु घर सेहो राजक हातामे देल जाए।"

“महराजक आदेश सुनि सभ बाजि उठलाह-महराजक जय हो! अपने साक्षात अवतारी पुरुष छी!"

महराजक आज्ञा सुनि कए मामा अबाक भए गेलाह । ओ दंडवत भए गेलाह आ बजलाह- "श्री मानक जय हो! हे देवपुरुष! हमरा ई सोनाक सिक्का नहि चाही। हमरा नहि बुझल छल जे ई सिक्का रनिबासक अछि। हमरा एहि सिक्कासभकेँ वापस करबाक आज्ञा देल जाए। अपने हमर भागिनक शिक्षाक व्योंत कइए देलहुँ अछि। एकर अतिरिक्त हमरा किछु नहि चाही।"

ओहिठाम उपस्थित समस्त सभासद लोकनि हमर मामा दिस छगुन्तामे ताकए लगलाह। हमरा तँ बकोर लागि गेल। हमर मामाक बात सुनि महराज दंग रहि गेलाह आ बजलाह- "हम ई सोनाक सिक्का एकहि सर्तपर लेब जे अहाँ एहि राजक राजमंत्रीक पद स्वीकार करी।"

चारूकात महराजक जय-जय होमए लागल। मामा सहर्ष महराजक राजमंत्री बनए हेतु स्वीकृति दए देलथि। कहबी छैक - “जाको राखे साइयां मार सके न कोय ।” सएह भेल। कहाँ सिपहसलारसभ फाँसीक हेतु सोचि रहल छलाह, कहाँ ओ राजमंत्री भए गेलाह। इएह थिक नियति।

सभा विसर्जित भए गेल। चारूकात एहि घटनाक चर्चा होमए लागल। हमर मामाकेँ राजमंत्री बनओलासँ किछु सभासद बहुत परेसान रहथि। न्यायसभाक विसर्जनक बाद ओसभ बाहर निकलैत काल आपसमे चर्च करथि जे महराजपर भांगक निशा चढ़ि गेल छलनि नहि तँ एहन घाघ चोरकेँ कतहुँ राजमंत्री नहि बनबितथि। मुदा सामने के बाजत?

महारानी अपन हेराएल सोनाक सिक्कासभ पाबि गद-गद भए गेलीह आ महराजाकेँ बहुत मानलखिन। महराज दहो-बहो रहथि। आनन्दसँ गद-गद रहथि जे रानी एतेक प्रसन्न भेलीह। महराज सोचथि- "बाह रे हम।"

रानी कहलखिन- "हम ओहि आदमीसँ भेंट करए चाहब।"

"किएक ने। हे लिअ, ओ अहाँक द्वारपर ठाढ़ छथि।"

"से केना भेलैक?"

"हमरा अपने मोनमे रहए जे अहाँकेँ एहि आदमीसँ भेंट कराएब तेँ ओकरा पहिने समाद दए देने रहिऐक।"

महराज घंटी बजओलथि आ हमर मामा ओतए हाजिर भए गेलाह। मामाक देखिते जेना रानीकेँ करेंट लागि गेलनि। सोचए लगलीह- "ई आदमी कतेक सुन्दर अछि। कोनो नीक खानदानक व्यक्ति लागि रहल अछि।"

रानी हमर मामाकेँ बहुत धन्यवाद देलखिन आ राजाज्ञाक अनुसार राजमंत्रीपद शीघ्र ग्रहण करबाक आग्रह केलखिन। हमर मामाक प्रसन्नताक वर्णन करब मोसकिल। इलाकामे गर्द भए गेल जे हरि राजमंत्री भए गेलाह अछि।

महराजक आज्ञाक अनुसार हमरा लोकनिक रहबाक हेतु महराजक हातामे विशाल भवनक व्यवस्था भेल। सेवादारसभ सेहो नित्य अपन काजमे लगा देल गेलाह। देखिते-देखिते हमर मामाक प्रभाव राजमहलमे ततेक पसरि गेलनि जे पुरान-पुरान चापलूससभकेँ अपन भविष्यपर ग्रहण लगैत बुझाए लगलनि। मुदा कइए की सकैत छलाह?बहुत मोन हेतनि तँ दू कओर बेसी खा लेताह। बाह रे समय! की सँ की भए गेल। काल्हि धरि जे आदमी घोर संकटमे छल से आइ राजमहलक सहभागी भए गेल।

रानीकेँ जखन कोनो खास काज होइतनि तँ हमर मामाकेँ बजबितथि। देखए सुनएमे तँ ओ सुन्नर छलाहे। राज महलमे रहि नित्य नीक-निकुत खाइत-पीबैत आओर चमचम करए लगलाह। रानीकेँ हुनकासँ गप्प-सप्प करबामे नीक लागए लगलनि। कोनो-ने-कोनो बहन्ना ताकि हमर मामाकेँ बजा लितथि आ घंटो गप्पमे लसकल रहितथि। महराजक जासूससभ ई बात महराजकेँ पहुँचबैत रहैत छलनि मुदा हुनका कहाँ फुरसति रहनि जे एहिबात सभ पर ध्यान दितथि। फेर ओ तँ अपने तरह-तरहकेँ लफासोटीमे लागल रहैत छलाह। भने रानी कतहुँ व्यस्त छथि।"-ओ सोचथि आ जासूससभकेँ उल्टे डाँटि देथि। ओ बेचारासभ चुपचाप सहटि जाइत। मुदा मोनमे तामस तँ हेबे करैक।q

 

 

 

 

 

 

Maharaaj is a Maithili Novel dealing with the social and economic exploitation of the have-nots by the affluent headed by the local heads of that time. However, the have-nots ultimately succeed in controlling the resources and regain their lost assets by sustained struggle. Even the dead persons join together to fight against the Maharaaj and ensure that the poor gets their due.

 

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