छाप सरायकेला सहित्योत्सव २०२४( Please click to view)
छाप सरायकेला साहित्यिक महोत्सव 2024
एक
दिन दुपहरिआमे भोजनक बाद विश्राम करैत रही कि अचानक मोबाइलक घंटी टनटना उठल।फोनमे
अविचलजीक नाम उचरि रहल छल।भेल जे ओ जरूर कोनो शुभ समाचार देताह।बातो सएह रहैक। गप्प
शुरू होइतहि ओ कहलथि-
“जमशेदपुरमे
साहित्य कला परिषदक पहिल साहित्यिक आयोजन”छापक नामसँ अक्टूबरमे हेतैक।ओहिमे
अपनेक कोनो उपन्यासपर चर्चा करबाक योजना
अछि। से कोन किताबपर कएल जा सकैत अछि?”
“हम
आबि रहल छी।”-हम कहलिअनि।
“मुदा
अपनेकेँ आबए पड़त।”
“आबि
जेबैक।”
“ठीक
छै।अहाँकेँ मिश्राजी फोन कए कार्यक्रमक विवरण देताह।अहाँ हुनका किताबक पाँच प्रति
पठा देबनि,संगे अपन कार्यक्रमक बारेमे सेहो कहि देबनि।”
अविचलजीक
प्रस्ताव सुनि मोनमे स्वाभाविक बहुत रास उत्सुकता जागल।मिश्रजी के छथि?साहित्य कला
फाउन्डेशन,जमशेदपुर केहन संस्था अछि?एकर स्थापना के केलनि?आर-आर कतेको तरहक
जानकारीक इच्छा भेल।हम इन्टरनेटपर उपलब्ध जानकारी देखिए रहल छलहुँ कि साहित्य कला
फाउन्डेशनक ट्रस्टी आदरणीय डाक्टर ब्रजेश मिश्रजीक फोन आएल।ओ जमशेदपुरमे साहित्य
कला फाउन्डेशन,जमशेदपुर आ जिला प्रशासनक संयुक्त तत्वावधानमे छाप शिर्षकसँ अक्टूबरमे
आयोजित होमएबला साहित्यिक कार्यक्रमक जानकारी विस्तारसँ देलनि।ईहो कहलनि जे अपनेकेँ
एहि आयोजनमे सामिल होएबाक अछि।ताहि लेल अपनेक
मैथिली उपन्यास,हम आबि रहल छी,पर एकटा परिचर्चा सत्र आयोजित कएल जाएत।अपने
अपन कार्यक्रम सूचित करी जाहिसँ आवश्यक व्यवस्था कएल जा सकए।
“हम
जल्दीए आवश्यक सूचना पठाएब।किताब कोन पतापर पठाओल जाएत?”
“हमरे
पतापर पठा देबैक।”
“ठीक
छैक।”
फोन
कटि गेल।हम ई समाचारसभ सुनि बहुत प्रसन्न रही। मैथिलीमे हमर उपन्यास,हम आबि रहल
छी,पर एतेक पैघ आयोजनमे एकटा विशेष सत्रमे परिचर्चा होएत से जानि हमर प्रसन्नताक
अंते नहि छल। हम तुरंत ई समाचार श्रीमतीजीकेँ देलिअनि।तुरंत लैपटापपर बैसि
जमशेदपुर जएबाक कार्यक्रम बनओलहुँ आ अपन कार्यक्रमक जनतब ब्रजेशजीकेँ पठा देलिअनि।संगे
हुनका किताब पठेबाक लेल उचित व्यवस्थामे
लागि गेलहुँ।
ब्रजेशजी
आ त्रिपाठीजी जमशेदपुरक एहि छाप नामसँ भए रहल साहित्यिक आयोजनक प्रमुख कर्ता-धर्ता
रहथि।बादमे ब्रजेशजीसँ एहि कार्यक्रमक संदर्भमे कैक बेर गप्प भेल।ओ मीतभाषी आ बहुत
प्रभावशाली लोक बुझेलाह।हमर कार्यक्रम प्राप्त भए गेलाक बाद हमर पत्नी सहित दिल्लीसँ
जमशेदपुर आवागमन आ ओहिठाम रहबाक व्यवस्था सभटा ओएह केलनि।त्रिपाठीजी हमर परिचय
सहित चर्चाक लेल चयनित हमर मैथिली उपन्यास,हम आबि रहल छीक बारेमे हिन्दी आ
अंग्रेजीमे संक्षिप्त विवरण पठेबाक आग्रह केलनि।हम हुनका आवश्यक जानकारी जल्दीए
पठा देलिअनि।जखन एक सप्ताह समय बीति गेल आ टिकटक किछु जनतब नहि भेटल तँ बीचमे
अविचलजीसँ सेहो गप्प भेल।तकर बाद तुरंत ब्रजेशजीक फोन आएल। ओ हमर सपत्नीक जमशेदपुर जएबाक आ वापसी हबाइ यात्राक
टिकट पठा देलनि।रहबाक व्यबस्था सेहो सरकारी अतिथिगृहमे करबा देलनि।आब कथीक चिंता?
पहिने
तँ छापक आयोजन साहित्य कला ट्रस्ट जमशेदपुर
द्वारा जिला प्रशासनक सहयोगसँ आयोजित करबाक योजना छल। मुदा,बादमे स्थानीय
जिला प्रशासन एहि आयोजनकेँ पूर्णतः अपना हाथमे लए लेलक।कार्यक्रमक रूपरेखा आ ओहिमे
सामिल होमएबला अतिथिलोकनि ओएह रहि गेल। जिला प्रशासन एहि आयोजनकेँ भव्य बनाबएमे कोनो
कसरि नहि रखलक। हमरा सपत्नीक दुनू दिसका हबाइ यात्राक लेल टिकट पठा देलक।हमरासभकेँ
स्थानीय राजकीय अतिथिगृहमे रहबाक व्यवस्था कए देलक।ततबे नहि,जहिआ हमरासभकेँ राँची
जएबाक छल,ओहि दिन भोरेसँ कैकटा वरिष्ठ पदाधिकारीलोकनिक फोन आबि गेल। हम कखन राँची
पहुँचब,आगू जमशेदपुरक लेल कखन जाए चाहब,आदि,आदि।हमरा राँची पहुँचि ओहि दिन ओतहि ठहरबाक छल। दोसर दिन भेने राँचीसँ
जमशेदपुरक लेल जएबाक जनतब हुनकासभकेँ देलिअनि। हमरा द्वारा देल गेल जानकारीक
अनुसार दोसर दिन भोरे एकटा युवक राँची आबि गेलाह।हुनका संगे हमसभ जमशेदपुरक लेल
बिदा भेलहुँ।रस्तामे प्रमुख स्थानसभक जानकारी ओ हमरा दैत रहलाह। असलमे ओ स्थानीय
इंजिनियरिंग कालेजक विद्यार्थी छलाह आ एहि साहित्यिक कार्यक्रममे स्वेच्छासँ अपन
सेवा दए रहल छलाह।एहन-एहन बहुत रास विद्यार्थीसभ अतिथिलोकनिक स्वागत सहायताक लेल लागल छलाह। राँचीसँ जमशेदपुरक लेल
बिदा होएबाक कालसँ वापसी समय धरि ओ हमरा संगे रहलाह आ जरूरी मदति करैत रहलाह।एहि
काजक कारण हुनका कैक बेर व्यक्तिगत परेसानी सेहो भेलनि।मुदा,ओ से सभ
प्रसन्नतापूर्वक सहैत रहलाह। ओ बहुत प्रतिभाशाली विद्यार्थी रहथि आ साहित्यमे स्वाभाविक रुचि छलनि जाहि कारण ओ एहि
कार्यक्रममे सामिल भेल रहथि।
हमसभ
जमशेदपुरक रस्तेमे रही कि आदरणीय अविचलजीक फोन आएल। ओ हमरसभक स्वागतक लेल उत्सुक
छलाह।
“कतए
धरि पहुँचलहुँ?कोनो दिक्कति ने ने?अपनेसभकेँ रहबाक लेल अतिथिगृहमे व्यवस्था अछि।
सोझे ओहीठाम चलि जाएब।”
हम
हुनकर भावुक शब्द सुनि आह्लादित छलहुँ। लगैत छल जेना हम कतेक महत्वपूर्ण भए गेल
होइ।ई थिक हुनकर महानता।हमरासभकेँ अतिथिगृहक द्वारिपर पहुँचिते जबरदस्त स्वागत कएल
गेल। दूटा महिला आरती लेने ठाढ़ छलीह। ओतए
उपस्थित अधिकारीलोकनि माला पहरओलनि ।ओएहसभ हमरा लेल आरक्षित कोठरीमे हमर
सामानसभ पहुँचा देलनि।हमसभ पाछूए लागल ओतए पहुँचलहुँ। सभ तरहक आधुनिक सुविधासँ
परिपूर्ण ओ कोठरी बेस आरामदायक लागि रहल छल। आब की?हमसभ किछु काल विश्राम केलहुँ। आब
साँझ पड़ि रहल छल कि आदरणीय अविचलजीक फोन आएल।
“डेरेपर
छी ने?”
“हँ,हँ।”
“हमसभ
अपनेसँ भेंट करए आबि रहल छी।”
“आउ,आउ।हम
तँ बाटे ताकि रहल छी। भोजन संगे हेतैक।”
हमसभ
कनीके कालक बाद आमने-सामने छलहुँ। अविचलजी सपरिवार आबि गेल छलाह। हुनकर सपरिवार
एहि तरहेँ आएब आ एतेक समय देब बहुत नीक लागल। हमसभ बड़ीकाल धरि गप्प करैत रहलहुँ।
हम आबि रहल छी,उपन्यासपर चर्चा भेल।काल्हि एहि पुस्तकपर मंचपर चर्चा होएत। तेँ
हमरालोकनिकेँ स्वाभाविक उत्सुकता छल। किछु आर किताबसभ सेहो हुनका देलिअनि।हमसभ
संगे भोजन केलहुँ। तकर बाद ओ सभ अपन डेरापर वापस चलि गेलाह।हमसभ वापस अपन कोठरीमे
कनीकाल दूरदर्शन देखलहुँ आ कल्हुका कार्यक्रमक ध्यान करैत सुति रहलहुँ।
आइ
अठारह अक्टूबर २०२४ कए छाप साहित्यिक कार्यक्रमक प्रथम दिन छल। हम सभ कार्यक्रममे
जएबाक लेल तैयार छलहुँ।हमरा कार्यक्रमस्थल धरि लए जएबाक लेल कार संगे हमरसभक मार्गदर्शक आबि चुकल छथि। हमसभ तुरंत कारमे
बैसि कार्यक्रम स्थल दिस बिदा भए गेलहुँ।हमरालोकनिक अतिथिगृहसँ सटले छल ओ स्थान।दस
मिनटक भीतरे ओहिठाम पहुँचि गेलहुँ। अतिथिगृहसँ कार्यक्रमस्थलक बीचमे रस्ताक बिजली
खंभासभपर कार्यक्रममे सामिल होमए जा रहल लेखक,रचनाकारलोकनि आ हुनकर चयनित पुस्तकसभक पैघ-पैघ पोस्टर लगाओल
गेल छल। हमरा ई देखि बहुत प्रसन्नता भेल जे ओहि पोस्टरसभमे हमहूँ सामिल छलहुँ।हमर
पुस्तक,हम आबि रहल छी,क चित्र कार्यक्रम स्थलपर शुरूएमे लगाओल गेल छल। कार्यक्रम
स्थलक बाहर जिला प्रशासनक प्रमुख अधिकारी हमरालोकनिक स्वागत लेल उपस्थित छलाह।कार्यक्रम
एकटा विशाल हालमे आयोजित भए रहल छल। कनीके फटकी प्रतीक्षा रूममे हम प्रतीक्षारत आन
लेखकलोकनिक संग बैसलहुँ।हमर श्रीमतीजी सेहो हमरा संगे रहथि। स्थानीय जिलाधीश
माननीय श्री रविशंकर शुक्लजी व्यक्तिगत रूपसँ सभसँ भेंट केलनि।परिचय-पातक बाद
सभगोटे कार्यक्रम भवन दिस बढ़ि गेलहुँ।किछु गोटे मंचपर बैसबाक लेल आगू बाटे निकलि
गेलाह।मंच सजि गेल छल।हाल लोकसभसँ भरल छल। जिला प्रशासनक सक्रियताक कारण श्रोताक
कमी महि छल।जिला भरिक विद्यालय ,महाविद्यालयसँ विद्यार्थी एहिमे सामिल भए रहल
छलाह। उद्घाटन सत्रमे साहित्य आ सृजनक महत्वपर बहुत सफल चर्चा भेल। तकर बाद दिन
भरि पूर्वनियोजित कार्यक्रमक अनुसार अनेकलोकनि अपन पुस्तकक विषयमे आयोजित
परिचर्चामे सामिल होइत रहलाह।
आजुक
अंतिम सत्रमे हमर उपन्यास,हम आबि रहल
छी,पर चर्चा प्रारंभ भेल। आदरणीय प्रोफेसर अविचलजी कार्यक्रमक संचालन कए रहल छलाह।
हाल दर्शकसँ भरल छल। अविचलजीक प्रश्न पुछबाक क्रम
आ हमर उत्तरसँ लगभग एकघंटा धरि ओसभ मनोयोगपूर्वक सामिल रहलाह।अंतमे,एहि
उपन्यास आ परिचर्चासँ संवंधित श्रोता दिससँ प्रश्न सेहो कएल गेल जाहिमे श्रीमती नूतन
झाक प्रश्न बहुत सटीक आ मार्मिक छल। आब कार्यक्रम समाप्त होएबाक समय आबि गेल छल।
लोकसभ थाकि चुकल रहथि।मंचसँ कार्यक्रम समापनक घोषणा होइतहि लोकसभ हालसँ बाहर होमए
लगलाह।हमहूँसभ बाहर निकललहुँ।ओहिठाम जमशेदपुरक बहुत रास मैथिलसभ उपस्थित छलाह।ओसभ
हमरा हमरासँ भेंट करबाक लेल बहुत उत्सुक छलाह।हम किछुगोटेकेँ अपन किताबसभ सेहो
देलिअनि। आब बाहर निकलिए रहल छलहुँ कि अविचलजी भेटि गेलाह-
“काल्हि
समय होअए तँ एलबीएसएम कालेज जमशेदपुरमे समाजमे
बृद्धलोकनिक स्थितिपर कार्यक्रम आयोजित कएल जाइत ।”
“किएक
ने।कखन अएबाक हेतैक?”
“साढ़े
दस बजे आबि जाएब।इएह कार अहाँकेँ पहुँचा देत।संगमे मार्गदर्शक तँ रहबे करताह।”
१९
अक्टूबर २०२५
आइ
जमशेदपुर प्रवासक तेसर दिन अछि। हमसभ अविचलजीक कालेजमे आयोजित कार्यक्रममे जएबाक लेल तैयार छी। हमरसभक
मार्गदर्शक कार सहित आबि चुकल छथि। हमसभ कारसँ गंतव्य दिस बिदा छी। मुदा,रस्तामे
जाम छैक। तेँ देरी भए रहल अछि। ओमहर अविचलजी कालेजमे अपन मित्रलोकनिक संगे हमरसभक
प्रतीक्षा कए रहल छथि।हमरा हुनकर फोन आबि जाइत अछि।
“कतए
पहुँचलिऐक?”
“जाममे
फँसि गेलहुँ।आब दसमिनटमे पहुँचि जएबाक चाही।”
“आउ,आउ।हमसभ
अपनेसभक बाट ताकि रहल छी।”
हमसभ
एलबीएसएम कालेज जमशेदपुरक द्वारिपर पहुँचैत छी।अविचलजी रबीन्द्र चौधरीजीक संगे हमर सभक स्वागत करैत छथि। हमसभ कनीके आगू बढ़ैत छी कि एनसीसीक
कैडेटसभ सलामी दैत छथि। आदरणीय रबीन्द्रजी हुनकरसभक सलामीकेँ उचित जबाब दैत छथिन।
हम अविचलजीक व्यवस्थासँ चकित छी। भाषणमंडप विद्यार्थीसभसँ भरल छल। हमरा स्वागत
करबाक लेल एलबीएसएम कालेज जमशेदपुरक प्राचर्य सहित कालेजक अनेक गण-मान्य
प्राध्यापकलोकनि उपस्थित छलाह।फूल माला,पाग,आ शाल दए हमरा दुनूगोटेक स्वागत कएल
गेल।तकर बाद परिचर्चा प्रारंभ भेल। परिचर्चाक विषय छल-“समाजमे बूढ़क स्थिति आ तकर
समाधान।”हमर उपन्यास,हम आबि रहल छी आ ठेहापरक मौलायल गाछ एहि विषयसँ संवंधित अछि।
एहि विषयपर हम कैकटा आलेखो लिखने छी। संभवतः तेँ अविचलजी एहि विषयपर हमर विचार
सुनए चाहैत छलाह।
कार्यक्रमक
संचालन अविचलजी स्वयं कए रहल छलाह।अविचलजी एहि कालेजक बहुत दिन धरि प्रभारी
प्राचार्य रहि चुकल छथि।संप्रति मैथिली विभागाध्यक्ष छथि।ईहो सुनबामे आएल जे किछु
मासक बाद ओ फेर एलबीएसएम कालेज जमशेदपुरक प्राचार्य बनि जएताह। मंचपर तत्कालीन
प्राचार्यक अतिरिक्त आदरणीय प्रोफेसर डाक्टर रबीन्द्र कुमार चौधरीजी उपस्थित छलाह
आ ओएह एहि कार्यक्रममे शुरूमे बजबो केलथि।अविचलजी आ प्राचार्यजी सेहो अपन विचार
व्यक्त केलनि। हमरा तँ ओहि विषयेपर बजबाक
लेल बजाओल गेल छल। मुदा,काल्हि भेल छापमे हमर उपन्यास,हम आबि रहल छी,पर भेल चर्चाक
छाप एतहु पड़बे कएल।आजुक परिचर्चाक विषयसँ हटि कल्हुके परिचर्चापर चर्चा होमए
लागल।हम परिचर्चाक विषयसँ बेसी अपन उपरोक्त उपन्यासक बारेम बजैत रहि गेलहुँ।
मुदा,अविचलजी तँ सधल वक्ता संग-संग उत्कृष्ट मंच संचालक छथि। ओ अपन व्यक्तित्वक
गरिमा आ विद्वतासँ सभकेँ बहुत प्रभावित केलनि।हमरो उत्साहित करैत रहलाह। बादमे श्रोताक
पाँतिमे बैसलि एकटा महिला प्राध्यापक द्रोणाचार्यक एकलव्यक प्रतिए कएल गेल अन्यायक
चर्चा केलनि जे कनी बेसीए काल चलैत रहल। लगभग दू घंटा चलल ई कार्यक्रम बहुत सार्थक
छल।कार्यक्रमक समाप्तिक बाद हमसभ अपन डेरा आपस आबि गेलहुँ।भोजनपरांत हमसभ फेर छाप
कार्यक्रममे सामिल होएबाक लेल कार्यक्रम स्थालपर पहुँचि गेलहुँ।मुदा,हाल भरल छल।
कतहु बैसबाक जगह नहि छल। हमसभ किछुकाल प्रतीक्षा केलहुँ।तकर बादे भीतर जा सकलहुँ।
समापन कार्यक्रम
कार्यक्रमक समाप्ति आयोजकलोकनि
द्वारा ओहि आयोजनमे सामिल भेल समस्त लेखक,रचनाकार,कलाकारलोकनि सहित अनय
सहभागीलोकनिकेँ उपहार दए कएल गेल। जिलाक वरिष्ठअधिकारीलोकनि एहिमे उपस्थित छलाह।उपहारमे
खरसवाँ जिलाक प्रतीकचिन्ह छउ(मुखौटा) सामिल छल। कार्यक्रम समाप्तिक बाद साँझमे सामने
लागल सामियानामे विवेकानन्दक जीवनीपर आधारितनाट्य रुपांतरण प्रसिद्ध कलाकार द्वारा कएल गेल। हमहूँसभ ओहि कार्क्रमकेँ
थोड़ेकाल देखलहुँ। विवेकानन्दक जीवनीकेँ बहुत नीक जकाँ प्रदर्शित वर्णित कएल जा
रहल छल। एक्केटा कलाकार अनेक प्रकारक भाव भंगिमाक सृजन कए कार्यक्रमकेँ जीवंत आ
रोचक बना देने छलाह। कार्यक्रम बहुत नीक लागि रहल छल। बीचमेसँ उठबाक मोन नहि भए
रहल छल।तथापि,समयसँ डेरा पहुँचि जएबाक लेल हमसभ ओहिठामसँ बिदा भए गेलहुँ। अविचलजी, रबीन्द्र कुमार चौधरीजी पहिले पाँतिमे दहिना
दिस बैसल रहथि। हुनकासभसँ अनुमति लैत हमसभ सामिआनासँ बाहर भेलहुँ आ कारसँ अपन डेरा दिस बिदा भए गेलहुँ।
आइ हमरासभकेँ
जमशेदपुरसँ बिदा होएबाक छल।भोरे दस बजे हमरासभकेँ राँची धरि पहुँचएबाक लेल कार आबि
गेल छल। हमरसभक मार्गदर्शक फोन केलथि-
“सर! अपनेक आज्ञा होइक आ अहाँसभकेँ कोनो असुविधा नहि होअए तँ हम एतहिसँ अपनेसँ
बिदा ली।”
“अहाँ निश्चिन्त
रहू।हमसभ चलि जाएब।”
हम हुनका ईहो
पुछलिअनि जे अतिथिगृहकेँ हिसाब-किताब केना की हेतैक?ओ संबंधित अधिकारीसँ गप्प
केलाक बाद कहलनि-
“अपनेसभ तँ राजकीय
अतिथि छलिऐक ने।अहाँकेँ किछु नहि देबाक अछि।”
ई ने भेलैक बात।एहन
स्वागत बहुत दुर्लभ।हमसभ बहुत आनन्दमे रही। एतेक पैघ साहित्यिक कार्यक्रममे हमर मैथिली
उपन्यासपर चर्चा भेल से बहुत गर्वक बात तँ छलहे संगे एतेक नीक स्वागत,एतेक नीक
व्यवस्था।ऊपरसँ अविचलजीक निरंतर व्यक्तिगत ध्यान राखब कोनो मामुली बात नहि छल।आर
तँ आर,ओ अपना कालेजमे हमर विशेष कार्यक्रम सेहो करओलनि,सेहो ओतेक कम समयमे।रस्ताभरि
अविचलजी आ हुनकर श्रीमतीजीक स्नेहपूर्ण व्यवहार मोन पड़ैत रहल आ मोन पड़ैत रहलाह ओहिठामक कार्यक्रमक
आयोजकलोकनि जे कार्यक्रमक सफलताक लेल कोनो कसरि नहि छोड़लनि।






