बुधवार, 19 जुलाई 2017

इच्‍छा पत्र(Will)




 


इच्‍छा पत्र

मृत्‍यु अवश्‍यंभावी थिक। एक-ने-एक दिन सभ बेकती ऐ दुनियासँ सभ किछु छोड़ि कऽ चल जाइत अछि। जीवन भरिक स्‍वअर्जित एवम्‍ पैत्रिक सम्‍पैत अहीठाम रहि जाइत अछि। सवाल अछि जे ऐ तरहेँ छोड़ल गेल सम्‍पतिक की हएत? ओकर मलिकाना हक केकरा भेटत..?

केतेक बेर ऐ प्रश्नक उत्तर तकबामे वर्षो लागि जाइत अछि। लोक आपसेमे लड़ि जाइत अछि। भाइ-भाइक दुश्मन भऽ जाइत अछि। आब तँ भाइक अलाबा बहिनो सभ ऐ युद्धमे कुदि जाइत अछि, खास कऽ तखन जखन सम्‍पतिक मूल्‍य ज्‍यादा हो, शहरी सम्‍पैत किंवा गामो-घरक सड़कक कातक सम्‍पैत सभ फसादक जड़ि भऽ रहल अछि। केतेको ठाम छोट-छोट विवाद लऽ कऽ अहंक टकराव भऽ जाइत अछि। कोनो पक्ष सुनैले तैयार नहि। तखन की हएत? जँ मृत्त बेकती इच्‍छा पत्र (Will) कऽ गेल छैथ तँ विवाद नहि हएत, नहि तँ सालक-साल मोकदमा चलत, जइसँ कोट-कचहरीक चक्कर लगबैत रहू एवम्‍ वकीलकेँ फीस थम्‍बैत रहियौ...।

हमरा एकटा नामी वकील कहलैन जे एकटा छोट सन जमीन–जेकर मूल्‍य ७-८ लाख हेतइ–तैपर दू भैयारीमे विवाद छइ, अहंकारवश कियो हटए लेल तैयार नहि। जबकि एक भाँइ सात लाख टका फीसक रूपमे हमरा दऽ चूकल अछि। एतबे नहि, एक-आध लाख आरो भेटबे करत।

...कहक माने जे सम्‍पतिक जेतेक मूल्‍य होइत से वकील साहैब असूलि चूकल छैथ। तैयो लड़ाकू भैयारीमे सँ कियो पाछू हटैले तैयार नहि अछि..! ऐ तरहक लड़ाइमे कएक टा पुस्‍तैनी मकान खण्‍डहर भऽ जाइत अछि। अस्तु ई जरूरी ओ नितान्‍त आवश्‍यक अछि जे जिनका कोनो प्रकारक–माने चल वा अचल–सम्‍पैत अछि, से मृत्‍युक पूर्व इच्‍छा पत्र बना लेथि, कारण मृत्‍युक तारिखकेँ के जनैत अछि?

जँ कोनो बेकती मृत्‍युसँ पूर्व इच्‍छा पत्र (वसीयत) कऽ कऽ जाइ छैथ तँ हुनकर सम्‍पतिक हस्‍तान्‍तरण स्‍वत: ओइ बेकतीकेँ भऽ जाएत जेकरा सम्‍बन्‍धित इच्‍छा पत्रमे सम्‍पतिक अधिकारी बनौल गेल रहत। ओ बेकती माता, पिता, पुत्र, पुत्री, भाए, बहिन, भातिज, मित्र वा कियो अन्‍य भऽ सकैत छैथ। परन्‍तु जँ सम्‍पतिक मालिक बिना इच्‍छा पत्र बनौने मरि जाइ छैथ (Intestate) तखन ओइ सम्‍पतिक हस्‍तान्‍तरण आकि बँटबारा कानूनक अनुसार कोर्ट द्वारा होइत अछि। ऐ प्रक्रियामे सालो लागि सकैत अछि। खास कऽ जखन सम्‍बन्‍धित पक्ष परस्‍पतर विरोधी दाबा करैत हो। यदि सम्‍बन्‍धित पक्ष समझदार हुअए, आपसमे रजामन्‍दी होइक तखन ऐ तरह सम्‍पतिक निपटान असानीसँ भऽ जाएत। मुदा केतेको बेर सम्‍पतिकेँ मूल्‍यवान होइक कारणे बहिन वा बेटीक हक नहि देबाक कारण किंवा अहंक टकरावक कारण सम्‍पतिक बँटबारा/हस्‍तान्‍तरण परिवारिक कलह केर कारण भऽ जाइत अछि। अस्‍तु उचित ओ आवश्‍यक थिक जे जँ अहाँकेँ सम्‍पैत अछि तँ तेकर मृत्‍योपरान्‍त निस्‍तारण हेतु Will अबस्‍स करी।

वसीयत कोनो बेकती द्वारा मृत्‍युक बाद ओकर स्‍वअर्जित सम्पतिक उत्तराधिकारीक बारेमे कानूनी घोषणा अछि जे ओइ बेकतीक जीवनकालमे बदलल वा रद्द भऽ सकैत अछि। मृत्‍युक बाद ओ लागू भऽ जाइत अछि। पैतृक सम्‍पतिक बारेमे वसीयत नहि कएल जा सकैत अछि। अस्‍तु वसीयत द्वारा स्‍वअर्जित सम्‍पतिक उत्तराधिकारी तय कएल जा सकैत अछि।

भारतीय उत्तराधिकार कानून १९२५क धारा-२ (एच) मे वसीयतक कानूनी व्‍याख्‍या कएल गेल अछि। उपरोक्‍त कानूनक धारा ५क अनुसार वसीयत वा बिना वसीयतक स्‍वअर्जित सम्‍पितक बेवस्‍था कएल गेल अछि।

वसीयत केनिहारक उमर कम-सँ-कम २१ वर्ष हेबाक चाही। मानसिक रूपसँ स्‍वस्‍थ हेबाक चाही तथा बिना कोनो दबाबमे वसीयत करक चाही, ऐ सभ बातकेँ ओइमे उल्‍लेख करक चाही।

इच्‍छा पत्र वसीयत केनिहारक जीवन कालमे कखनो ओकरा द्वारा बदलल जा सकैत अछि, संशोधित कएल जा सकैत अछि। मुदा वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बाद ओ तुरन्‍त लागू भऽ जाइत अछि। वसीयतक हेतु जरूरी अछि जे वसीयतकर्त्ता दबाबसँ नहि, अपितु स्‍वेच्‍छासँ वसीयतमे अपन सम्‍पतिक वितरण करए। ओइ बेकतीकेँ मानसिक रूपसँ स्वस्थ होएब जरूरी अछि जइसँ ओ निर्णय लेबक स्‍थितिमे हो।

भारतमे इच्‍छा पत्र तैयार करबाक विधि बहुत असान अछि। सादा कागजपर बिना कोनो स्‍टाम्‍प पेपरक इच्‍छा पत्र टंकित कएल जा सकैत अछि। मुदा हस्‍तलिखित इच्‍छा पत्र केतेको कानूनी विवादमे लाभकारी भऽ सकैत अछि। वसीयतकर्त्ताकेँ इच्‍छा पत्रक प्रथम पैरामे स्‍पष्‍ट करक चाही जे ओ स्‍वेच्‍छासँ बिना कोनो दबाबक पूरा होशोहवासमे वसीयत कऽ रहल अछि। तेकर बाद समस्‍त सम्‍पतिक एक-एक कऽ फराक-फराक वर्णन हेबाक चाही। सम्‍पैत सबहक तत्‍कालीन मूल्‍य स्‍पष्‍टत: इच्‍छा पत्रमे लिखबाक चाही। तमाम बहुमूल्‍य कागजात रखबाक स्‍थान ओइमे स्‍पष्‍टतासँ लिखल जाए जइसँ समयपर ओ सभ ताकल जा सकए।

वसीयतक भाषा सरल हेबाक चाही। वसीयतकर्त्ताक पूरा नाम लिखबाक चाही। वसीयतक सम्‍पतिक स्‍पष्‍ट विवरण हेबाक चाही। प्रस्‍तावित कानूनी उत्तराधिकारीक पूरा नाम हेबाक चाही। अन्‍तमे दूटा गवाहक नाम व पताक संग ओकर हस्‍ताक्षर हेबाक चाही। गवाह सामान्‍यत: ओहन बेकतीकेँ बनाबक चाही जे वसीयतकर्त्तासँ उम्रमे छोट होथि। यदि गवाहक मृत्‍यु पहिने भऽ जाइत अछि तँ फेरसँ वसीयत बना कऽ नव गवाहक हस्‍ताक्षर कराबक चाही।

इच्‍छा पत्रमे हस्‍ताक्षरक संग तारिख अबस्‍स लिखबाक चाही। जँ एकसँ अधिक बेर इच्‍छा पत्र बनौल गेल तँ अन्‍तिम इच्‍छा पत्र लागू होइत अछि। बढ़िया हएत जे अन्‍तिम इच्‍छा पत्रमे पूर्व इच्‍छा पत्र सभकेँ निरस्‍त करबाक चर्च होइक। इच्‍छा पत्रकेँ जस-के-तस लागू करबाक हेतु बिसवासपात्र एवम्‍ जानकार बेकतीकेँ निष्‍पादक (Executor of will) बनाबक चाही जइसँ वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बाद वसीयतकेँ बिना लाइ-लपटक अमलीजामा देल जा सकए। वसीयतकर्त्ताकेँ चाही जे केकरो निष्‍पादक (Executor) नामित करैसँ पूर्व ओकर सहमति लऽ लेल जाए।

वसीयतकर्त्ताकेँ दूटा गवाहक समक्ष हस्‍ताक्षर करक चाही। गवाहक पूरा नाम, पता सहित ओकर हस्‍ताक्षर जरूरी अछि। गवाह जँ चिकित्‍सक होइ तँ बढ़ियाँ जइसँ ओ स्‍पष्‍ट करत जे वसीयतकर्त्ता दिमागी रूपसँ स्‍वस्‍थ अछि। गवाह ओ निष्‍पादक अलग-अलग बेकती हेबाक चाही। वसीयतमे सम्‍पतिक हकदार गवाह नहि भऽ सकै छैथ। वसीयतक प्रत्‍येक पृष्‍ठपर संख्‍या लिखल जेबाक चाही एवम्‍ गवाह एवम् वसीयतकर्त्ताक स्‍पष्‍ट हस्‍ताक्षर हेबाक चाही। अन्‍तमे कुल पृष्‍ठ संख्‍या लिखल हेबाक चाही।

ऐ प्रकारसँ तैयार वसीयतकेँ राखी केतए? कारण वसीयतक काज तँ ओइ बेकतीक मृत्‍युक बादे पड़ैत अछि आ तखन ओ ऐ विषयमे किछु कहक स्‍थितिमे नहि रहैत अछि। अस्‍तु वसीयतक दूटा मूल ओ हस्‍ताक्षरित प्रति बनाबी तँ बढ़ियाँ। एकटा प्रति बैंक लॉकरमे ओ दोसर प्रति निष्‍पादक वा तेहेन विश्वस्‍त बेकतीक संग रहक चाही। असलमे चाही तँ ई जे तमाम चीज, वस्‍तु, वसीयत, पासवर्ड आदिक जानकारी एकटा डायरीमे लिखि कऽ छोड़ि दी जइसँ मृत्‍युपरान्‍त अहाँक वारिसकेँ परेशानीसँ बँचौल जा सकए। एकबेर वसीयत केलाक बाद आवश्‍यकता भेलापर पूरक वसीयत द्वारा मूल वसीयतमे संधोधन कएल जा सकैत अछि। मुदा बेर-बेर एहेन केलासँ वसीयतकेँ बदैल कऽ नव वसीयत कऽ लेब ज्‍यादा बढ़ियाँ होइत अछि। वसीयतकेँ निबन्‍धित कराबक आवश्‍यकता नहि अछि, मुदा जँ वसीयत द्वारा कोनो समाजसेवी संस्‍था (Chariable Organisation) केँ धन देबाक हो तखन वसीयतकेँ निबन्‍धित कराएब जरूरी अछि।

जेना कि पहिने चर्च कऽ चूकल छी, वसीयत सम्‍बन्‍धित वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बादे लागू होइत अछि। जँ ओइमे स्‍पष्‍टता नहि रहत तँ मृत बेकती तेकर व्‍याख्‍या करक हेतु घुरि नहि औत। तँए वसीयतक भाषा सरल, स्‍पष्‍ट ओ बाध्‍यकारी हेबाक चाही। किन्‍तु-परन्‍तुसँ बँचबाक चाही। ओइ परिस्‍थितिक विचार हेबाक चाही जेकर घटित हेबाक संभावना जीवनमे बनल रहैत अछि। वसीयत केलाक बादो सम्‍पतिक मालिककेँ मृत्‍युसँ पूर्व ओकर निपटान करबाक अघिकार बनल रहैत अछि।

कोनो बेकती जे कानूनी रूपसँ सम्‍पैत रखबाक अधिकारी अछि, वसीयतमे सम्‍पैत पाबक अधिकारी भऽ सकैत अछि। ओ नवालिग, भगवानक मूर्ति, कोनो तरहक कानूनी बेकती (Junstic person) भऽ सकैत छैथ। यदि कोनो नवालिगकेँ वसीयत द्वारा सम्‍पतिक उत्तराधिकारी धोषित कएल जाइत अछि तखन वसीयतकर्त्ता द्वारा अभिवावक नियुक्‍ति जरूरी अछि जे ऐ तरहेँ देल गेल सम्‍पतिक ओकरा वालिग हेबाकाल धरि बवस्‍था करताह।

हिन्‍दू उत्तराधिकार कानून १९५६ क धारा ३०क अनुसार स्‍वअर्जित चल वा अचल सम्‍पतिक वसीयत द्वारा उत्तराधिकारी तय कएल जा सकैत अछि। वसीयतकर्त्ताक मृत्‍युक बाद वसीयतमे उल्‍लिखित उत्तराधिकारी सम्‍बन्‍धित न्‍यायालय द्वारा प्रोवेटक हेतु प्रार्थना कएल जाएत। प्रोवेट न्‍यायालय द्वारा आम प्रमाणित वसीयत थिक। प्रोवेट कोनो वसीयतक कानूनी रूपसँ पक्का हेबाक निर्णायक प्रमाण थिक। यदि कोनो उत्तराधिकारी द्वारा वसीयतकेँ कानूनी चुनौती देल जाइत अछि तँ सम्‍बन्‍धित पक्षकेँ नोटिस जारी हएत, सभ अपन पक्षमे न्‍यायालयमे राखि सकैत अछि। आ सबहक बातक विचारक बादे न्‍यायालय प्रोवेट जारी करत।

न्‍यायालय प्रोवेट जारी करबासँ पूर्व सुनिश्चित करैत अछि जे वसीयतपर दस्‍तखत वास्‍तवमे वसीयतकर्त्ताक अछि ओ गवाह सभ वसीयतक समय मौजूद छल। वसीयत द्वारा हस्‍तान्‍तरित सम्‍पतिक मालिकाना हकपर प्रोवेट कोर्ट विचार नहि करैत अछि। ओ तँ मात्र एतबे तय कऽ दैत अछि जे वसीयत (इच्‍छा पत्र) सही अछि कि नहि। वसीयतमे प्राप्‍त सम्‍पतिक मालिकाना हकपर सिविल न्‍यायालयमे सम्‍पतिक सम्‍बन्‍धित पक्षकार द्वारा चुनौती देल जा सकैत अछि। कहक माने जे जँ वसीयतमे देल गेल सम्‍पैतपर वसीयतकर्त्ता पूर्ण अधिकार नहि अछि, ओ सम्‍पैत ओकर स्‍वअर्जित नहि अछि आ तखनो ओकरा वसीयत द्वारा दऽ देल गेल अछि तखन ओकरा सम्‍बन्‍धित पक्षकार द्वारा सिविल न्‍यायालयमे चुनौती देल जा सकैत अछि।

सारांश जे इच्‍छा पत्र द्वारा सम्‍पतिक हस्‍तांतरण हेतु जरूरी अछि जे सम्‍बन्‍धित सम्‍पैत स्‍वअर्जित होइक। इच्‍छा पत्रक भाषामे कोनो ओझर नहि होइक। तइ लेल बढ़ियाँ होएत जे इच्‍छा पत्र (वसीयत) कोनो योग्‍य अधिवक्‍ता द्वारा तैयार करौल जाए, जइसँ इच्‍छाकर्त्ताक मृत्‍युक बाद ओइ सम्‍पतिक हस्‍तांतरणमे कोनो विवाद नहि होइक। विवादसँ बँचैक लेल तँ इच्‍छा पत्र बनौले जाइत अछि। तँए ओकरा स्‍पष्‍ट ओ कानूनी रूपसँ पक्का हएब बहुत जरूरी अछि।

समयक कोन ठेकान। भविसक झंझट तय कऽ जाउ। अपन अर्जित सम्‍पतिक वसीयत (इच्‍छा पत्र) बना कऽ राखि दियौ आ चैनक बंशी बजाउ।  


२३.०६.२०१७

बुधवार, 12 जुलाई 2017

नवका पोखरि


नवका पोखरि



“हर-हर महादेव।

जानह हे महादेव!

हमरा मोनमे किछु छ: पाँच नहि अछि।

तूँहीं जानह हे महादेव..!”

अहाँकेँ जे बुझाए मुदा हम तँ अपना भरि सभकेँ सभ दिन केलिऐ...।

आ हम केकरा नहि केलिऐ...?”

पंचमुखी महादेवपर जल ढारैतकाल महिला सभ आपसमे अहिना चिरौरी करैत रहैत छलीह...।

एक हाथ महादेवक निर्मालपर आ दोसर हाथे जल ढारि रहल महिला सभ बीच-बीचमे मौका पबिते फदका पढ़ए लागथि। जे किओ आएल, महादेवक ऊपरसँ जल ढारलक। जाड़ होइत आकि गरमी, सभ मौसममे जलढरी अनवरत चलैत रहैत छल। रच्छ छल जे दुपहरियामे ई भीड़ कम भए जाइत रहैक जाहिसँ महादेव चैनक अनुभव करैत हेताह। कम-सँ-कम घरेलू तथा पारिवारिक झमेल सभ सुनबासँ तँ मुक्ति होइते रहनि।

चारि बजे भोरेसँ नवका पोखरिपर स्‍नानार्थी सभ टपकए लगैत छल। ओहिमे नियमित पाँच गोटे टोलसँ अबैत छलाह जाहिमे तीन गोट महिला छलीह। टाइमक सोलहन्नी पाबन्द। भोरे-भोर हर-हर महादेव!’ किछु वृद्ध नवका पोखरिक कोनपर बसल परिवारमे सँ सेहो भोरे स्नान करएबला लोक सभमे सामिल रहिते छलाह।

स्नान, ध्यान आओर आराधनाक संग महादेवक अनवरत जलढरी चलैत रहैत छल, आ ताहिसंग गपाष्टक जे आनन्द छल, तकर वर्णन नहि कएल जा सकैत अछि। कहि नहि, महादेवकेँ ई सभ कतेक पसिन्न पड़ैत हेतनि! मुदा लोक सभ तँ तृप्त लगिते छलाह। सभ अपना-आपमे मगन, सभ अपने-आपमे आनन्दित।

ओहि समयमे पोखरि-इनार खुनाएब बहुत मान-मर्यादाक बात बुझल जाइत छलैक। ओना, गाममे पहिनेसँ कएटा पोखरि रहैक, जाहिमे तीनटा पोखरि तँ हमरा सबहक टोलेमे बुझू। तकर अलाबा कुट्टी लगक पोखरि सेहो। तथापि आओर पोखरि खुनाओल गेल, तकर तात्‍पर्य बुझल जा सकैत अछि...।

नवका पोखरि प्राय: सभसँ बादमे बनल छल तेँ ओकरा नवका पोखरि कहल जाइत अछि। पोखरिक दच्छिनबरिया महारपर मन्दिरक संग रंग-रंगक फूल सभ लगाओल गेल छल। जेना-चम्पा, भालसरी, कामिनी, करबीर, अड़हुल इत्यादि। चम्पा, करबीर आ अड़हुलक बड़का-बड़का गाछ छल।

हमर पित्ती–स्व. वंगट मिश्र– नवका पोखरिक दिन-राति देख-रेख करैत छलाह। नवका पोखरिक दच्छिनबरिया महारपर भगवान शिवक पंचमुखी मूर्तिबला मन्दिर छल। नवका पोखरि तथा ओहिठामक मन्दिरक निर्माण हमर सबहक समस्त दियाद सभ मिलि कए केने रहथि।

न्दिरक प्राण-प्रतिष्ठा हमर पितामह–स्व. श्रीशरण मिश्र–द्वारा भेल रहए। पोखरिक जाइठ देबएकालक खिस्सा सभ हम सभ बच्चामे सुनिऐ। सम्पूर्ण परिसरक सफाइ स्व. वंगट काका करैत छलाह। वंगट काका असगरे जीवन पर्यन्त ओहि काजकेँ पूर्ण भक्ति-भावसँ करैत रहलाह। कहिओ थाकैथ नहि। निस्वार्थ, स्वान्त: सुखाय एहि काजकेँ करैत ओ तत्‍कालिके समाजक नहि अपितु अखनो समाजक बीच दृष्टान्त छथि। माघक भयानक ठंढ हो आकि जेठक तप्त रौद ओ देहपर एकटा गमछा मात्र रखैत छलाह। अपना समयक नामी पहलमान सेहो रहथि। नवका पोखरिक उत्तरबरिया महारपर अखाड़ा छल। ओहिठाम युवक सभकेँ कुश्तीक प्रशिक्षण दैत छलाह, डंड बैसक करैत छलाह। किलोक- किलो आखाड़ाक माटि देहमे औंसने घामसँ तर-बत्तर भए जाइत छलाह। तकर बाद बड़का खर्ड़ासँ सम्पूर्ण परिसरकेँ अपने हाथे साफ करैत छलाह। प्रात: स्नान करएबला लोक सभकेँ तरह-तरह क हिदायत दैत रहैत छलखिन। पोखरिक पानि स्‍चच्छ बनल रहए, ताहि लेल सतत सतर्क रहैत छलाह। पोखरिमे साबुनसँ कपड़ा खिचनाइ मना छल, एहि लेल ऊपरमे ब्यवस्था छल। ओहि समयमे किओ-किओ पोखरिमे साबुनसँ कपड़ा खींच लेथि, मुदा जँ पकड़ल गेलाह तँ भगवाने मालिक।

नवका पोखरिक दिन-प्रति-दिनक देख-रेखक सम्पूर्ण दायित्व ताजीवन वंगट काका बिना कोनो स्वार्थक उठओने छलाह। घन्‍टो ओहि परिसरक विकासक हेतु काज करैत रहलाह। हुनका बाद ओहि स्थानक पूर्ति नहि भए सकल, भइयो नहि सकैत छल।

वंगट काकाक गाम भरिमे धाख रहनि। कोनो पर-पंचैतीमे हुनका अबस्स बजाओल जाइत रहनि। धिआ-पुता कुश्ती लड़ए, खेती-बाड़ी करए, माल-जालक सेवा करए, महींस राखए जाहिसँ डोलक-डोल शुद्ध दुधक सद्य: लाभ होइक–ताहि विचारक पोषक छलाह। कए दिन हुनका बाबूसँ विवाद भए जाइत छलनि। विवादक मुद्दा रहैत छल जे पढ़ाइ-लिखाइ करब सार्थक थिक आकि निरर्थक? आब किओ सुनत तँ हँसत। मुदा वंगट काका ऊत्साहसँ बाजथि-

पढ़ो पूत चण्‍डी, जासे चले हण्‍डी।

कहक सारांश- खेती-बाड़ी करू, एहिमे सद्य: लाभ अछि। पढ़ाइ-लिखाइमे कहिआ की होएत से के देखलक!

गाममे किओ लुंगी पहीरलक तँ ओ जोरदार विरोध करथि। समय बीतलाक बाद आब कहल जा सकैत अछि जे पढ़ाइ-लिखाइक समर्थन करब सही छल, विरोध गलत। गाममे वा कतहु जे पढ़लक-लिखलक से आगू भए गेल। ओहू समयमे किछु गोटे कहथि-

पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नबाब।

निश्चित रूपसँ ओ सभ अग्रसोची रहथि।

न्दिरक आगूमे धर्मशाला छल। फूसक दरबज्जानुमा घर जे चारूकातसँ खुजल छल। किओ थाकल-ठेहियाएल पथिक ओतए रहि सकैत छलाह। ओ समस्त परिवारक अतिथि होइत छलाह। हुनकर सभटा ब्यवस्था होइत छल। हमरा मोन पड़ैत अछि जे एकबेर एकटा महात्मा आएल रहथि। ओ बाजैथ नहि। सिलेटपर लिखि कए अपन इच्छा, अपन मन्तव्य प्रकट करथि। हुनकासँ भेँट करक हेतु लोकक करमान लागल रहैत छल। सौंसे देह विभुति रमौने, जौरक डोराडोरि पहिरने, जटा जूट धारी भेष हुनक आकर्षणक केन्द्र रहनि।

गाम-घरमे एहन साफ-सुथरा रमणीक पार्कनुमा स्थान भेटब कठिन। ओना तँ खेत-पथार सभ हरियर कंचन रहिते अछि, थाल-कादोक अपन स्वाद सेहो छइहे, मुदा ताहू माहौलमे जे अध्यात्मिक, सांस्कृतिक केन्द्रक रूपमे नवका पोखरिक ब्यवस्था छल आ बहुत दिन धरि जेना चलैत रहल ओ बेमिसाल कहल जा सकैत अछि।

नवका पोखरिक निर्माणमे हमरा लोकनिक परिवारक समस्त लोकक योगदान छल। नवका पोखरि परिवारक गौरवसँ जुड़ल छल। ककरो कुटुम्ब अबितथि तँ नवका पोखरिपर हुनका अबस्स आनल जाइत।

ओहिठाम स्नान, ध्यान होइत,गप्प-सराका चलैत। धर्मशालामे बैस कए आराम सेहो कएल जा सकैत छल। वंगट काका नित्य दुपहरियामे ओहिठाम धर्मग्रन्‍थ पढ़थि। सायंकाल भगवान शिवक आरती-पूजाक संग नाचारी सेहो गाओल जाइत छल। ओहिमे नियमित अनेको वृद्ध लोकनि भाग लेथि।

बादशाह बाबा शिव मन्दिरक पूजाक बहुत दिन धरि ब्यवस्था देखैत रहलाह। सायंकालक नाचारीमे ओ हमर बाबा आओर वंगट काका तँ रहिते छलाह जे हुनका संगे कएटा आओर वृद्ध सभ सेहो नाचारी गायनमे भाग लए सुर-मे-सुर मिलबैत छलाह। बाबा कतए सुतल छी औ! बालक वनमे कतए-सँअएला, किओ नहि हुनकर सथिया...। आदि नाचारीक स्वर अखनो हमर कानमे गुंजित होइत रहैत अछि।

नवका पोखरिक भालसरी गाछक छाहरिमे हम कतेको दिन बैस कए प्रतियोगिता परीक्षा-सबहक तैयारी करैत रही। कतेको दिन हम अपन मित्र सभक संग साँझक समयमे ओतए बैस गप्प-सप्प करी, भविष्यक योजना बनाबी। स्वच्छ, निर्मल वातावरणमे गाम-घरक झंझटिसँ दूर नवका पोखरिपर बैस कए एकटा स्वर्गीय आनन्द होइत छल। हम नियमित भोर-सॉंझ ओहिठाम जाइत रही।

प्राय:काल नित्यकर्म-स्नान, पूजा आओर व्यायाम आदि ओतहि होइत छल। नित्य सायंकाल गप्प-सप्प करबाक हेतु कएक गोटा भेट जाथि। पूजा-पाठ तँ होइते छल। संग-संग एकटा स्वस्थ मनोरंजनक तथा अध्यात्मिकताक अनुभूति सेहो ओहिठाम होइत छल।

गाममे हमरा फरिखमे जँ ककरो देहान्त होइत तँ ओकर श्राद्धक्रर्म ओहीठाम होइत छल। हमर बाबा आओर बाबूक श्राद्ध-कर्म सेहो ओहीठाम भेल छलनि। वैदिकी श्राद्ध-क्रर्ममे बछराकेँ दागल गेल। ओकर करूण क्रन्दन अखन धरि हमरा रोमांचित करैत रहैत अछि। हमरा विचारासँ ई अमानवीय प्रयोग अछि, एहिसँ स्वर्गक सीढ़ी किओ केना चढ़त से हमर समझसँ बहार अछि? आओर जे अछि से अछि, मुदा ई काज औअल दर्जाक क्रूड़ता अछि। एकटा जीवित प्राणीकेँ सरी धीपा कए दागि देब, कतहुसँ मनुष्‍यता नहि थिक। नहि चाही एहन स्वर्ग, जाहि हेतु एकटा निरीह, निर्दोष जीवक संग क्रूड़ताक पराकाष्ठा कएल जाए। ओहुना आब गाम-घरमे एकर विरोध भए रहल अछि, कारण साँढ़ द्वारा जजाति चरि गेलासँ क्षतिक संग अन्यान्य कारण सभ सेहो अछि।

नवका पोखरिसँ हमर बाबाकेँ बहुत सिनेह रहनि। जीवनक अन्तिम समय धरि ओ नवका पोखरि अबस्स जाइत छलाह। हाथमे छड़ी लेने रोडपर चलैत एक बेर हुनका एकटा साइकिलबला टक्कर मारि देने रहनि। ओहू अबस्थामे एक्के हाथे साइकिलकेँ घिसिएने-घिसिएने अपन दरबज्जापर लए आएल रहथि।

सम्भवत: १९६७-६८ इस्‍वीक गप्प थिक। हमरा लोकनि नवका पोखरिपर पुस्तकालय बनेबाक हेतु बैसार केलहुँ। गामक तमाम गणमान्य लोक सभ बैसारमे रहथि। ओहिसँ पूर्व गाममे एकटा पुस्तकालय बहुत पहिनेसँ छल, जे कोनो कारणसँ अव्यस्थित भए गेल छल। एक समयमे ओ पुस्तकालय गामक प्रतिष्ठित संस्थान छल। १९६२क चीन-भारत युद्धक समाचार सुनबाक हेतु ओहिठाम सौंसे गामक लोक जमा होइत छल। सटले खादी भण्डार छल ओ धिआ-पुताक खेल-धूपक सामग्री सेहो छल। मुदा की भेलैक जे सभ गतिविधि कमश: ठप्प जकाँ भए गेल। नव पुस्तकालय बनेबाक बैसारमे किछु प्रवुद्ध लोकक विचार रहनि जे ओही पुस्तकालयकेँ जीर्णोद्धार कएल जाए। यद्यपि हम सभ ओहि प्रस्तावक समर्थन नहि केने रही, मुदा आब लगैत अछि जे ओ सही बिचार छल। नवका पोखरिक धर्मशालामे पुस्तकालयक स्थापना हेतु प्रयासकेँ आगू बढ़बैत कएकटा बैसार आओर भेल। पुरान पुस्तक सभ घरे-घरसँ ताकि-हेरि कए आनल गेल। पुस्तक सभ रखबाक हेतु लकड़ीक रैक बनाओल गेल।

पुस्तकालयक उद्घाटन हेतु डा. सुभद्र झाजीकेँ आमंत्रित कएल गेल। ओहि समयमे सेवा निवृत भए ओ गामेमे रहए लागल रहथि। हाथमे बेंत लेने, मिरजई पहीरिने ओ पुस्तकालयक उद्धघाटन कार्यक्रममे आएल रहथि। हमरा लोकनि हुनकासँ किछु बजबाक आग्रह कएल। ओ कहलाह जे भाषण करब हुनका एकदम पसिन नहि अछि। तथापि ओ अपन बात कहैत पुस्तकालयक संचालनमे होबएबला व्यवहारिक असुविधा सबहक वर्णन करैत अपन जीवनक अनेकानेक अनुभवक चर्चा सेहो केलनि। ओ पुस्तकालय अल्‍पजीवी भेल। संसाधनक अभावमे किछुए दिनक बाद सभ किछु ठप्प पड़ि गेल।

नवका पोखरि अपना-आपमे एकटा संस्था छल। अध्यात्मिकताक संग ग्रामीण संस्कारकेँ सेहो प्रज्‍वलित केने रहैत छल। मुदा सभ खिस्साक कतहु-ने-कतहु आ कहुना-ने-कहुना अन्त होइते अछि। नवको पोखरिक संग सेहो सएह भेल। जहिना प्रत्येक मनुक्खक जीवनमे उत्था-पतन होइत अछि तहिना एहि संस्थाक संग सेहो भेल। जखन वंगट काका स्वर्गीय भए गेलाह तकर पश्चात किओ एहन व्यक्ति नहि भेल जे नवका पोखरिक संग हुनका जकॉं एकरुप भए सकए। ककरो ओ रूचियो नहियेँ रहए। जाहि फुलबाड़ीमे एकटा पात नहि खसल भेटैत छल से क्रमश: कूड़ा, कर्कटसँ भरल रहए लागल।

पोखरिक देख-रेख सेहो ढील भए गेल। ततेकटा परिवार एहि पोखरि आओर लगपासक परिसरक हिस्सेदार छथि जे एकर एक स्वरमे रक्षा ओ विकास करबाक बजाय आपसेमे कचर-बचर होइत रहल। ढनमनाइत, ढनमनाइत मन्दिर खसि पड़ल। पोखरि सबहक व्यापारीकरण भए गेल। पोखरिक पानि स्नान करए जोगर नहि रहि गेल। कालान्तरमे किछु युवक लोकनिकेँ एहिपर ध्यान गेलनि। जाहिसँ मन्दिरक जीर्णोद्धारक प्रयास भए रहल अछि। आओर-आओर सकारात्मक प्रयास भए रहल अछि।

न्दिर भगवानक घर थिक, जतए लोक अपन-अपन अहंकारक विसर्जन कए ईश्वरक शरणमे पहुँचैत अछि। अस्तु एकर पुनर्निर्माण ओ रखरखावमे जँ एहि बातक ध्यान राखल गेल जे ओ परिवार विशेषक नहि अपितु समस्तस्थावान लोकनिक वस्तु बनि सकए, तँ निश्चय ई कल्याणकारी होएत आ नवका पोखरि फेरसँ अपन गौरव प्राप्त कए सकत।





रविवार, 9 जुलाई 2017

कानूनी आतंकवाद (भारतीय दण्‍ड संहिता धारा- ४९८ ‘ए’, IPC 498 ‘A’)




 


कानूनी आतंकवाद
(भारतीय दण्‍ड संहिता धारा- ४९८ ’, IPC 498 ‘A’)



परंपरागत रूपसँ परिवारिक जीवनमे स्‍त्री अपन पति केर सहायकक रूपमे काज करैत छल। समस्‍या तखन बढ़ि गेल जखन पति-पत्नीक आपसी सम्‍बन्‍धक कटुता परिवारक चौकैठसँ आगू बढ़ल। सहैत-सहैत महिलाक जीवन व्‍यर्थ ओ दुष्‍कर हुअ लगल, आ ओइ परिस्‍थितिसँ मुक्‍तिक एकमात्र उपाय आत्‍म हत्‍या बुझि पड़ए लगलइ। केतेको महिला द्वारा ऐ तरहेँ आत्‍म हत्‍या केलाक बाद समाजक आत्‍मा आइपीसी- धारा- ४९८ सन हिंसक कानूनक जन्‍म देलक।

ऐ कानूनकेँ लागू भेलाक बाद गलत वा सही महिला द्वारा आरोपक एफआइआर थानामे दर्ज भेला  पछाइत पति एवम्‍ ओकर परिवार–अर्थात्‍ वयोवृद्ध माता, पिता एवम्‍ छोट-छोट बच्‍चा सभ सेहो–पुलिसक कृपापर ऐ हद तक निर्भर भऽ जाइ छला जे जखन हुनका पुलिस चाहत तँ जेलमे बन्‍द कऽ दैत।

सन्‍ १९८३ मे फौजदारी कानूनमे संशोधन कऽ भारतीय दण्‍ड संहिता (आई.पी.सी.)मे अनुच्‍छेद ४९८ जोड़ल गेल जइमे मूलत: निम्नलिखित प्रावधान छल-

१.      जखन कखनो पति वा ओकर सम्‍बन्‍धी महिलाक संग क्रुड़ता करत तँ अपराधीकेँ तीन साल तकक कैद हएत, संगे जुर्माना सेहो भऽ सकैत अछि। 

ऐ अनुच्‍छेद हेतु क्रुड़ताक अर्थ अछि-

(क)    जानि कऽ कएल गेल एहेन बेवहार, जइसँ सम्‍बन्‍धित महिला आत्‍म हत्‍या करबाक स्‍थितिमे पहुँच जाए किंवा महिलाकेँ शारीरिक वा मानसिक स्‍वास्‍थ्‍यकेँ गंभीर क्षति पहुँचैक।

(ख)   सम्‍बन्‍धित महिला वा ओकर निकट सम्‍बन्‍धितसँ सम्‍पैत वा कोनो मूल्‍यवान वस्‍तुक गैर कानूनी मांग करब आ एहेन मांग नहि पूरा भेलापर वा तइ हेतु प्रतारणा करब।

भारतीय दण्‍ड संहिताक धारा ४९८ संज्ञेय, गैर जमानती और गैर-संगठित अपराध थिक। अपराध संज्ञेय एवम्‍ असंज्ञेयमे विभाजित कएल गेल अछि। कानूनी तौरपर संज्ञेय अपराधक जॉंच करब एवम्‍ शिकायत दर्ज करब पुलिसक कर्तव्‍य थिक। ४९८ एकटा संज्ञेय अपराध थिक। अपराध जमानती वा गैर जमानती भऽ सकैत अछि। ४९८ गैर जमानती  अछि। एकर माने भेल जे न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी (मजिस्‍ट्रेट) केँ जमानत देबाक किंवा आरोपित बेकतीकेँ न्‍यायिक वा पुलिस हिरासतमे पठा देबाक अधिकार छइ। चूँकि ४९८ गैर संगठित अपराधक श्रेणीमे अबैत अछि, अस्‍तु याचिकाकर्त्ता एकरा आपस नहि लऽ सकै छैथ। (मुदा जँ सम्‍बन्‍धित पक्ष मामलाकेँ आपसमे सोझराबैले न्‍यायालयसँ आवेदन करै छैथ, तखन न्‍यायालय मामलाकेँ आपस लेबाक अनुमति प्रदान कऽ सकैत अछि।)

कानूनक उपरोक्त प्रावधानमे क्रुड़ताक प्रयोग निम्नलिखित प्ररिस्‍थितिमे कएल गेल अछि-

१.      एहेन बेवहार जइसँ महिला आत्‍म हत्‍या हेतु प्रेरित हो।

२.     एहेन बेवहार जइसँ महिलाक जीवन, शरीर वा स्‍वास्‍थ्‍यपर गंभीर समस्‍या उत्‍पन्न भऽ जाइक।

३.      महिला वा ओकर सम्‍बन्‍धीक सम्‍पैत लेबाक उद्देश्‍यसँ कएल गेल प्रतारणा।

४.     महिला वा ओकर सम्‍बन्‍धी द्वारा आर पैसा वा सम्पतिक हिस्‍साक मांग नहि मानबाक कारण प्रतारणा।

यद्यपि ऐ कानूनकेँ लागू करबाक उद्देश्‍य विवाहित महिलाकेँ दहेज-लोभी पति एवम्‍ ओकर परिवार द्वारा प्रतारणासँ रक्षा करब छल, मुदा बेवहारमे एकर तेतेक दुरुपयोग भेल जे उच्‍चतम न्‍यायालय सुशील कुमार शर्मा बनाम भारत सरकारक मामलामे आइपीसी- धारा ४९८ केँ कानूनी आतंकवादक रूपमे निन्‍दा केलक।

उपरोक्त कानूनसँ पुलिस द्वारा लोकक मौलिक  अधिकारक उल्‍लंघनक संभावना बढ़ल। ऐसँ निर्दोष लोक कानूनी धनचक्करक शिकार भेल एवम्‍ मजबूर भऽ कऽ वर्षो-वर्ष कोट-कचहरीक दरबज्‍जा खटखटबैत रहल । तेतबे नहि, ऊपरसँ पुलिसक धनबल, राजनीतिक हस्‍तक्षेप, किंवा समाजमे प्रभवशाली वर्गक लिप्‍तता सेहो तइ रूपे काज करए लगल जे ओइ पति एवम्‍ ओइ परिवारक बुझू भगवाने मालिक..!

केतेको मामलामे ऐ कानूनक दुरुपयोग विवाहित महिला द्वारा बर पक्षसँ अधिक-सँ-अधिक पैसा ओसलब, किंवा एहेन परिस्‍थिति निर्माण करब रहैत अछि जइसँ जान छोड़ेबाक लेल बर पक्षक लोक महिला पक्षक अनुचितो मांग मानैले बेवस भऽ जाइ छैथ।

दहेज निषेध अधिनियम १९६१क धारा २ केर अनुसार दहेज लऽ कऽ माने बिआहसँ पूर्व, बिआहक समय वा बिआहक बाद कहियो देल गेल सम्‍पैत या मूल्‍यवान धरोहरसँ अछि-

(१) जे बिआहक एक पक्ष द्वारा दोसरकेँ देल जाइत अछि।

(२) माता-पिता वा कोनो आन बेकती द्वारा देल गेल।

मुदा मुस्‍लिम विवाह कानूनक अधीन देल गेल मेहर वा (dower) ऐमे शामिल नहि अछि। विवाहक समय कोनो पक्ष द्वारा देल गेल नगदी, गहना, कपड़ा वा अन्‍य कोनो वस्‍तु दहेज नहि मानल वशर्ते ई वस्‍तु सभ विवाहक शर्तक अधिन नहि देल जाइत हो।

ऐमे मूल्‍यवान धरोहरक अर्थ भारतीय दण्‍ड संहिता (आइपीसी)क धारा ३०क अनुकूल अछि। 

आइपीसी- धारा ४९८ मात्र पत्नी, पुतोहु वा ओकर सम्‍बन्‍धी द्वारा लागू कएल जा सकैत अछि। उच्‍चतम/उच्‍च न्‍यायालय बारम्‍बार ई स्‍वीकार केलक अछि जे कानूनक उपरोक्‍त धाराक अधीन ज्‍यादातर मामला झूठ रहैत अछि। अधिकांश मामलामे एकर दुरुपयोग वैवाहिक जीवनमे विवादक स्‍थितिमे पत्नी वा ओकर निकट सम्‍बन्‍धी द्वारा पति वा ओकर निकट सम्‍बन्‍धीकेँ ब्‍लैकमेल करबाक हेतु कएल जाइत अछि। एहेन परिस्‍थितिमे शिकायतकर्त्ता प्रचुर मात्रामे पैसाक उगाहीक प्रयास करै छैथ। 

एहेन अनगिनित उदाहरण सामने आएल अछि जइमे बिना जाँच-पड़ताल केने पुलिस बुजुर्ग माता-पिता, अविवाहित बहिन, गर्भवती भौजी एवम्‍ छोट-छोट बच्‍चाकेँ गिरफ्तार कऽ लेलक। ऐ तरहक मामलामे निर्दोष लोक मानसिक यातना एवम्‍ उत्‍पीड़नक शिकार भऽ जाइ छैथ। सामान्‍यत: एहेन मोकदमा ५-६ साल चलैत अछि आ मात्र २० प्रतिशत लोककेँ सजा होइत अछि। एहनो भेलै जे जेलसँ छुटि कऽ पति वा आरोपित माता-पिता आत्‍महत्‍या कऽ लेलक।

चन्‍द्रभान बनाम राज्‍यक मामलामे दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय कहलक जे ऐमे कोनो संदेह नहि अछि जे अधिकांश एहेन शिकायत छोट-छोट बातपर आपसी अहं एवम्‍ टकरावक कारण तामसमे कएल जाइत अछि जेकर सभसँ गंभीर खामियाजा परिवारक छोट-छोट बच्‍चा सभ भोगैत अछि। अस्‍तु न्‍यायालय पुलिसकेँ निम्नलिखित आदेश देलक:-

(१)  एफआइआर रूटिनमे पंजीकृत नहि कएल जाए।

(२)  पुलिसक प्रयास हेबाक चाही जे मामलाकेँ गंभीर जॉंच-पड़तालक बादे एफआइआर दर्ज करए।

(३)  आइपीसी- धारा ४९८ /४०६ क अन्‍तर्गत कोनो मामला बिना डीसीपी (उपायुक्‍त पुलिस) एवम्‍ अतिरिक्‍त डीसीपीक आदेशक दर्ज नहि हएत।

(४)  एफआइआर (पंजीकृत करबासँ पूर्व आपसी समझौताक हर संभव प्रयास कएल जाए आ जौं समझौताक कोनो आश नहि रहि जाइक तँ सभसँ पहिने स्‍त्रीधन आ दहेजक वस्‍तुकेँ सम्‍बन्‍धित महिलाकेँ आपस करौल जाए।

(५)  मुख्‍य अभियुक्‍तक गिरफ्तारी एसीपी (सहायक आयुक्‍त) अथबा डीसीपी (उपायुक्‍त)क स्‍वीकृतिसँ मामलाकेँ पूरा जाँच-पड़तालक बादे कएल जाए।

(६)  संपार्श्‍वक अभियुक्‍त (जेना सासु-ससुर)क मामलामे मिसिल (लाइल)मे डीसीपीक स्‍वीकृति जरूरी अछि।

ऐ मामलामे न्‍यायालय ईहो आदेश देलक जे महिलाक उत्‍थान हेतु कार्यरत्‍ स्‍वयंसेवी संगठन एवम्‍ अन्‍य कानूनी संस्‍था सभ ऐ बातक पूरा प्रयास करए जे सम्‍बन्‍धित पक्ष सभकेँ आपसी सहमति बनि जाइक। मामलाकेँ न्‍यायालय पहुँचलाक बादो ऐ बातक लेल न्‍यायालय प्रयास करए। चाही तँ ई जे बिना बाहरी हस्‍तक्षेपक सम्‍बन्‍धित पक्ष मामलाकेँ आपसमे सोझरा लिअए। टी.आर. रमैयाक मामलामे मद्रास उच्‍च न्‍यायालसँ ऐ तरहक निर्देश दैत स्‍पष्‍ट केलक जे एहेन मामलामे पुलिसिया कार्रवाइ पयाप्‍त सावधानी एवम्‍ एहेन छान-बीनक बादे कएल जाएत।

ललिता कुमारी बनाम राज्‍यक मामलामे उच्‍चतम न्‍यायालय ऐ बातपर विचार कए रहल अछि जे एहेन मामला उपस्‍थित भेलापर पुलिस द्वारा एफआइआर दर्ज करब अनिवार्य अछि किंवा तइसँ पहिने प्राथमिक पूछताछ जरूरी अछि। चूँकि ई मामला विचराधीन अछि अस्‍तु विभिन्‍न उच्‍च्‍ न्‍यायालय द्वारा देल गेल आदेश/निर्णयक सन्‍दर्भमे पुलिस कार्रवाइ करैत अछि। उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा ऐ मामलाक निर्णयक बादे एहेन मामलामे एफआइआर करबाक दशा ओ दिसा अन्‍तिम रूखि लेत।

ऐ कानूनसँ भयक वातावरण तँ बनल मुदा एकर दुरुपयोग ज्‍यादा होमए लागल। कनेको निर्दोष लोककेँ लोभ, किंवा प्रतिशोधक आवेशमे फँसा देल गेल। कएक बेर तँ पति एवम्‍ ओकर परिवारकेँ ऐ लेल फँसा देल गेल जे सम्‍बन्‍धित विवाहित महिला ओइ वैवाहिक जीवनसँ हटि कऽ प्रेमीक संग विवाह करए चाहैत छेली।

केतेक बेर एहनो भेल जे पति-पत्नी बादमे मिलय चाहैत छल, अपन-अपन गलतीक अहसास करैत छल, मुदा ताधैर अपराधिक मोकदमाक जालवृत्तिमे फँसि चूकल छल, मुदा ओइसँ निकलत केना? कारण ई कानून Non Compoundable अछि माने शिकायतकर्त्ता स्‍वयं चाहियो कऽ एकरा आपस नहि लऽ सकैत अछि। ऐ सभ परिस्‍थितिमे मामला कतेको बेर उच्‍च न्‍यायालय एवम्‍ उच्‍चतम  न्‍यायालय पहुँचल जैठाम विचारणीय प्रश्‍न छल जे आखिर ऐ तरहक मामला चलबैत रहबाक की औचित्य अछि खास कऽ जखन कि पति-पत्नी आपसमे बातकेँ सलैट कऽ आपसी सहमति बना सुखी परिवारिक जीवन जीबए चाहैत होथि? आखिर एहेन मोकदमा जँ चलितो रहल तँ ऐमे सँ किछु निकलत नहि, कारण शिकायतकर्त्ता अपन बातसँ मुकैर जाएत। मामला कमजोर पड़ि जाएत, चाहे निरस्‍त निरस्‍त भऽ जाएत। मुदा एकर दोसरो पक्ष छल जे केतेको बेर समझौताक आडम्‍बर कऽ गरीब एवम्‍ कमजोर महिलाकेँ अपन शिकायत आपस लेबाक हेतु अनुचित दवाब बनौल जा सकैत अछि। मामला आपस लैतो पुनश्‍च यंत्रणाक नवीनीकरण भऽ सकैत अछि।

ऐ सभ प्रश्‍नपर विभिन्न न्‍यायालयमे बारंबार विचार भेल। विवाह सम्‍बन्‍ध विच्‍छेदक प्रक्रियामे लम्‍बित मामलामे दुनू पक्षकेँ मौका पबैत आपसी सहमति बनबैक अवसर न्‍यायालय प्रदान करैत अछि।

तहिना आइपीसी ४९८ सँ सम्‍बन्‍धित अपराधिक मामलामे यदि दुनू पक्ष आपसमे बातकेँ सोझराबए चाहैत अछि, सलैट लिअ चाहैत अछि तँ उच्‍च न्‍यायालय सीआरपीसीक धारा ४८२क अधीन अपन विशेषाधिकारक प्रयोग करैत मामलाकेँ रद्द कऽ देबाक आदेश दऽ सकैत अछि।

उपरोक्‍त विषयसँ सम्‍बन्‍धित मामला उच्‍चतम न्‍यायालयक समक्ष जीतेन्‍द्र रघुवंशी एवम्‍ अन्‍य बनाम बबीता रघुवंशी एवम्‍ अन्‍य आएल। (जइमे पूर्वमे उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा बी.आर. जोशी बनाम हरियाणा सरकारक निर्णयकेँ बहाल राखल गेल।) जइमे कहल गेल छल जे सीआरपीसीक धार ४८२ क अधीन उच्‍च न्‍यायालय न्‍यायक हितमे अपराधिक प्रक्रिया वा एफआइआर रद्द कऽ सकैत अछि आ सीआरपीसीक धारा ३२० ऐमे बाधक नहि हएत।

प्रीति गुप्‍ता बनाम झारखण्‍ड सरकारक मामलामे उच्‍चतम न्‍यायालय आइपीसी- धारा ४९८ केर अधीन कएल गेल शिकायतक दुरुपयोग एवम्‍ बढ़ैत ममलाकेँ धियानमे रखैत केन्‍द्र सरकारकेँ उपरोक्‍त कानूनक समीक्षा करबाक हेतु कहलक।

तदनुसार भारत सरकारक आग्रहपर विधि आयोग ऐ विषयमे गंभीरतासँ विचार करैत अपन २४३म प्रतिवेदनमे संस्‍तुति केलक जे ऐ अपराधकेँ न्‍यायालयक आज्ञासँ (Compoundable) बना देबाक चाही मुदा आयोग ऐ अपराधकेँ गैरजमानती बनौने राखए चाहलक ताकि समाजक दूरगामी कल्‍याणकेँ धियान रखैत ऐ कानूनक धार भोथ नहि होइक।

ओयोगक कहब जे गिरफ्तारी सम्‍बन्‍धी लागू कानूनी निर्देश एवम्‍ मामलाक गहन छानबीन केलासँ एवम्‍ हिंसा सन गंभीर परिस्‍थितियेमे गिरफ्तारी केलासँ ऐ कानूनक दुरुपरोगसँ बँचल जा सकैत अछि। 

जुलाइ २०१४ मे न्‍यायमुर्ति सीके प्रसाद एवम्‍ पी.सी. घोषक उच्‍चतम न्‍यायालयक बैच द्वारा देल गेल निर्णयमे स्‍पष्‍ट कएल गेल जे धारा ४९८ केर अधीन बिना मजिस्‍ट्रेटक आदेशक गिरफ्तारी नहि एहत। उच्‍चतम न्‍यायालयक कहब छल जे अधिकांश एहेन मामलामे महिला ऐ कानूनक दुरुपयोग करैत पति, सासु, ससुर आदिसँ बदला लइ छैथ। ऐ तरहक प्रकरणमे बहुत कम लोककेँ सजा धोषित हेबाक उद्धत करैत माननीय न्‍यायालय राज्‍य सरकार सभकेँ आदेश देलक जे पुलिस क्रीमिनल प्रोसीड्योर कोड (सीपीसी) क धारा ४१मे वर्णित मानकक अनुसरण करए एवम्‍ अपवादिक मामलामे अत्‍यावश्‍क भेने आरोपित बेकतीक गिरफ्तारी करए।

सम्‍बन्‍धित मजिस्‍ट्रेट सीपीसीक धारा ४१ क अधीन पुलिस द्वारा प्रेषित प्रतिवेदनक विवेचना करैत बेकतीगत रूपसँ संतुष्‍ट भेलाक बाद एवम्‍ तेकर औचित्‍यक लिखित आधार बनबैत गिरफ्तारीक स्‍वीकृति प्रदान करए।

उपरोक्‍त मामलामे फैसला दैत माननीय न्‍यायाधीशगण कहलैथ जे सन्‍ २०१२ मे दू लाख बेकती ऐ कानूनक अन्‍तर्गत गिरफ्तार भेला। जे सन्‍ २०११क संख्‍यासँ ९.४ प्रतिशत ज्‍यादा अछि। जइमे लगभग एक चौथाइ (४७९५१) महिला छेली। ऐसँ स्‍पष्‍ट होइत अछि जे आरोपित पतिक माए, बहिनकेँ सेहो काफी तादादमे गिरफ्तार कऽ लेल गेल। उपरोक्‍त कानूनक तहत आरोप पत्रक दर ९३.७ प्रतिशत अछि जखन कि मात्र १५ प्रतिशत लोककेँ अन्‍तत: दण्‍डित कएल जा सकल। विभिन्न ट्रायल कोर्टमे ३७२७०६ मामला लम्‍बित अछि जइमे सँ लगभग ३१७००० मामलामे आरोपितकेँ छुटि जेबाक संभावना अछि।

माननीय उच्‍चतम न्‍यायालयक कहब छल जे गिरफ्तारी बेकतीगत स्‍वतंत्रताक हनन तँ करिते अछि, संगे ई अपमान-जनक सेहो अछि। स्‍वतंत्रताक छह दशक बादो पुलिस अखन धरि उत्‍पीड़न, उत्‍पीड़नक साधनक रूपमे जानल जाइत अछि, जनताक मित्र तँ नहियेँ।

अतएव उच्‍चतम न्‍यायालय गिरफ्तारीमे सावधानीसँ निर्णय लेबाक हेतु मजिस्‍ट्रेट लोकनिकेँ अगाह केलक।

इन्‍दरराज मलिक एवम्‍ अन्‍य बनाम श्रीमती सुमिता मलिकमे दिल्ली उच्‍च न्‍यायालय बेवस्‍था केलक जे आइपीसी- धारा ४९८ दहेज निवारण कानूनक धारा ४ सँ एकदम अलग अछि, कारण दहेज कानूनमे मात्र दहेजक मांगसँ अपराध भऽ जाइत अछि। जखन कि आइपीसी- धारा ४९८ मे पति तथा पतिक परिवार द्वारा दहेजक मांग संगे-संग क्रुड़ताक बेवहार जरूरी अछि।

आधुनिकीकरण, शिक्षा, वित्तीय सुरक्षा एवम्‍ बेकतीगत स्‍वतंत्रतामे वृद्धिक संग कट्टरपंथी महिला सभ आइपीसी- धारा ४९८ केँ एकटा हथियारक रूपमे दुरुपयोग कऽ रहल छैथ। कानून बनलाक केतेको सालक बादो ऐ कानूनक उचित समीक्षा नहि भेल जइ कारणसँ एकर दुरुपयोगक मामलामे लगातार वृद्धि भेल आ निर्दोष एवम्‍ व्‍यर्थमे फँसौल गेल पति तथा ओकर सम्‍बन्‍धी त्राहिमाम कए रहल छैथ। विभिन्न न्‍यायालय, गैर सरकारी संगठन सभ ऐ विषयपर लगातार मंतव्‍य दऽ रहल छैथ, कानूनमे संशोधनक हेतु सेहो चर्चा होइत रहैत अछि। मुदा ऐठाम ईहो महत्‍वपूर्ण अछि जे एक पक्षीय संशोधनसँ कानून बनाबक मूल उद्देश्‍ये ने नष्‍ट भऽ जाए। ऐमे कोनो दू मत नहि जे केतेको मामलामे विवाहित महिलाकेँ जीवन ओ सम्‍मानपर संकट ओकर सासुरमे उत्पन्न भऽ जाइत अछि  आ ओ मजबुड़ीमे सभ किछु सहैत अछि। सहैत-सहैत केतेको महिला तंग भऽ आत्‍म हत्‍या लेल सेहो विवश भऽ जाइ छैथ। अस्‍तु, ऐ कानूनक दुरुपयोगसँ उत्‍पन्न समस्‍याक समाधान हेतु बीचक रस्‍ता निकालबाक चाही जइसँ निर्दोष लोककेँ फँसौल नहि जाइक आ दोषीकेँ उचित दण्‍डो होइक आ समाजमे सम्‍मानक संग महिलो जीबैथ।

अपन समाजमे कहबी छेलइ जे जेतए कनियॉंक डोली अबै ओतहिसँ अर्थी उठइ। मुदा आब युग बदैल गेल अछि। निष्‍ठाक समस्‍त जिम्‍मा मात्र महिलाक नहि भऽ सकैत अछि। लोक परिवर्तित परिस्‍थितिसँ जँ तालमेल नहि बैसोलक तँ जीवन भमरमे केतए जा कऽ थम्‍हत तेकर कोनो ठेकान नहि। शिक्षित बर-कनियॉं सभ रोजगार हेतु विश्व भरिमे पसैर गेल छैथ। गाम-घरक बात गामेमे सलटा लिअ से आब तथ्‍यपरक नहि रहि गेल। अपनो समाजमे विवाह विच्‍छेदक चलन बढ़ि गेल अछि। कानूनक रस्‍ता अख्‍तियार करैत केतेको परिवार नष्‍ट भऽ रहल अछि।

प्रेम ओ सिनेहपर आधारित सम्‍बन्‍धकेँ कानूनक कुरहैरसँ चोट देल जाएत तँ परिणाम की हएत? परिवारिक मर्यादाक रक्षाक हेतु सन्‍तानक भविस बँचबैक लेल एवम्‍ जीवनमे सुख-शान्‍तिक स्‍थापना हेतु आवश्‍यक अछि जे हम सभ भारतीय संस्‍कारकेँ कटकटा कऽ पकैड़ ली आ पकड़नहि रही। त्‍येन त्‍येक्‍तेन भुंजीथा:। त्‍यागक गरिमा जखन जीवनमे लक्षित हएत, सभ अपने ठीक भऽ जाएत।