गुरुवार, 17 अगस्त 2017

हमर गाम

हमर गाम
ई मोन बड़ा विचित्र चीज अछि। कहि नहि एकर कन्तोसरमे कतेक खल  होइत छै जे तरह-तरह केर गप्प-सप सालो-साल चौपेतल रहैत अछि। जखन कखनो असगर  होइत छी, गाम, गामक लोक, गामक घटना, दुर्घटना सभ मोन पडैत रहैत अछि। हमरा सबहक परबाबा तीन भाए रहथि। स्व. गुमानी मिश्र, स्व. माना मिश्र ओ स्व. तुफानी मिश्र। स्व. माना मिश्रक पुत्र स्व. कुमर मिश्र संस्कृतक प्रकाण्ड विद्वान छला। सुनैमे अबैत अछि जे दड़िभंगा महाराज हुनका अपन राज पण्‍डित बनबाक आग्रह केलखिन जे ओ अस्‍वीकार कऽ देलाह। ओ स्वयं एकटा पाठशाला चलबैत रहथि। ओहि पाठशालामे सैकड़ो विद्यार्थीकेँ नि:शुल्क भोजन आ आवासक संग विद्या दान देल जाइत छल। हुनकासँ पढ़ल सैकड़ो विद्यार्थी मिथिलांचलमे हुनकर गुणगान करैत छला।
गामक चर्चा होइते स्वर्गीय कका पण्डित चनद्रधर मिश्रक नाम सभसँ पहिने मोन पडैत अछि। ओ स्व. माना मिश्रक पुत्र छलाह।  प्रधानाध्यापक छलाह।  गाम अबितहि सभसँ पहिने हुनकासँ भेंट करी। अपन आध्यात्मिक स्वभाव एवम बिद्वतासँ निरन्तर प्रेरित करैत रहैत छलाह। गामक कतेको लोक कतेको रूपमे ध्यान रखलाह, मानलाह, मदति केलाह। आब ओ सभ एहि दुनियाँमे नहि छथि, मुदा हुनकर सभक अनुराग हम नहि बिसरि सकैत छी।ओ सभ हमरा लेल भगवाने छलाह…..
हमर गाम अड़ेर डीह। अड़रे डीह चौदह टोलक गाम अछि। पहिने एक्के पंचायतमे सभटा टोल छल। अड़ेर डीह टोल, अड़ेर पुबारी टोल, विष्‍णुपुर, जमुआरी  होइत विचरवाना तक एक्के पंचायत छल- अड़ेर। ओकर मुखिया बहुत दिन तक स्व. मार्कण्डेय भण्डारी छला आ हमर बाबूजी सरपंच रहथि।
ओहि समय ग्राम पंचायतकेँ आइ-काल्हि जकाँ अधिकार नहि रहै तथापि मुखिया-सरपंचक नाम तँ पंचायतमे विख्यात भइए जाइत छल। पंचायतक चुनाव ओहू समयमे गहमा-गहमीसँ भरल  होइत छल। हम सभ स्कूलमे पढ़ैत रही तँ चुनाव भेल रहइ। स्व. मार्कण्डेय भण्डारीजी मुखियाक चुनाव जीतल रहथि। सप्पत ग्रहण समारोहक क्रममे आयोजित उत्‍सवक प्रसंग अखनो मोनसँ मेटाएल नहि।
ओहि समयमे स्व. मार्कण्डेय भण्डारीजीक इलाकामे फूक चलैत छल। अड़ेरक सिनुआरा टोलमे हुनकर घर अछि। सभ तरहेँ सम्पन्नताक संग सामाजिक मान-सम्मान हुनका भरपूर भेटल छलनि। साँझकेँ अड़ेरक सड़कपर दल-बलक संगे हुनका टहलैत देखैत बनैत छल।
अड़ेर डीह टोलक इतिहास बहुत पुरान लगैत अछि। गाममे आब जनसंख्याक अनुपातमे आवासीय जमीन सीमित अछि। तँए घरेपर घरक दृश्य अछि। लोक सभ अगल-बगलमे घर बना रहल छथि। कलममे सेहो बास भऽ गेल अछि। सभसँ चमत्‍कारी विकास तँ चौकक लगपास भेल अछि। चौकक कातेकाते करीब-करीब दू साए दोकान खुजि गेल अछि। तरह-तरह केर थौक आपूर्ति करएबला दोकान सभ सेहो खुजि गेल अछि। असलमे अड़ेर चौकसँ चारूकात रोड बनि गेल अछि। तँए इलाकाक लोक क्रय-बिक्रयक लेल ओहिठाम पहुँचै छथि।
अड़ेरमे स्टेट बैंक ऑफ इण्‍डियाक शाखा अछि, ओकरे एटीएम सेहो अछि। थाना अछि, पोस्ट ऑफिस अछि, सरकारी डिसपेंसरी अछि। प्राइमरी स्कू, मिडिल स्कूल तथा हाइ सकूल अछि। संगे एकटा संस्कृत विद्यालय सेहो अछि जेतए सुनै छी जे विद्यार्थी सभ नदारद छथि मुदा सार्टिफिकेट भेट जाइत छैन।


गाममे तीनटा पोखरि कहि नहि कहियासँ अछि। ओकर अतिरिक्त गामक बाहर नवका पोखरि, कुट्टी लगक पोखरि सेहो अछि। गामक बीचमे पोखरि हेबाक कारण बासक जगहक दिक्कत छइ।
हम सभ जखन बच्चा रही तँ गाममे हाइ स्कूल नहि रहइ। गामक विद्यार्थी सभ पढ़बाक हेतु एकतारा, लोहा वा रहिका जाइत रहथि। एकाघ-टा विद्यार्थी मधुबनी किंवा बेनीपट्टी सेहो जाइत छला।
कहल जाइत अछि जे एकबेर अंग्रेज सभ गामक बाटे जाइत काल पहलमान सभकेँ सौरो करैत  देखलकै आ ठिठैक गेल। पुछलकै जे ई सभ डकैत छिऐ की? तँ कियो कहलकै जे नहि सरकार! ई सभ पहलमान छथि, सुखी सम्पन्न छथि आ खेती-बारी कऽ कऽ प्रतिष्ठा पूर्वक जीबैत छथि।
अड़ेरमे कमला नदीसँ जोड़ल नाला अछि जाहिमे पानि तखने अबैत अछि, जखन कि कमलामे बाढ़ि आबि जाइत अछि। कृषि काजमे ऐ नालाक योगदान नगण्य अछि। स्थानीय किसान सभ भगवानक कृपापर निर्भर छथि।
चिकित्साक मामलामे हमर गाम पिछड़ल अछि। कतहुँ-कतहुँसँ इलाज-बात  होइए। पहिने दड़िभंगामे इलाजक नीक ब्यवस्था छल। पैसा खर्च केलापर लोककेँ औरुदा रहलापर जान बाँचि जाइत छल, मुदा आब तँ भगवाने मालिक। बेमारी किछु, इलाज कथुक। हमर एकटा परिचितकेँ दड़िभंगामे ततेक करगर एन्‍टीवायोटिक देल गेल जे हुनकर दुनू किडनी फेल भऽ गेलनि। आब डयलिसिस करा कऽ कहुना जीबि रहला अछि। जतेक दिन ससरि जाइथ।
हमर गामक ब्रह्मस्थानमे सालमे एकबेर नवाह अबस्स  होइत अछि। ओहिठाम युवक सभ भव्यन्दिरक निर्माण केलथि। पहिने काली पूजामे मूर्तिक स्थापना  होइत छल जे पूजाक बाद भँसा देल जाइत छल। आब ओहिठाम स्थायी रूपसँ माँ कालीक भव्य मूर्ति स्थापित भऽ चुकल छथि। सालमे दियावातीक रातिमे भव्य आयोजन  होइत अछि जाहिमे अड़ेर चौकसँ काली मन्दिर धरि नाना प्रकारक बल्‍ब सभ जगमग करैत रहैत अछि। काली पूजामे नाच-गानक अतिरिक्त तरह-तरह केर मनोरंजनक ब्यवस्था रहैत अछि। पहिने हमरा गाममे काली पूजाक रेबाज नहि छल। लोक विष्णुपुर वा अङेर पुरवारी टोल मे । लगभग ४५ साल पूर्व किछु युवक सभ एकरा प्रारम्भ  जे तखनसँ एकटा परिपाटी भऽ गेल अछि।
अड़ेर बहुत साविक गाम अछि। मधुबनीसँ बेनीपट्टी जेबाक क्रममे ई गाम अबैत अछि। कहियासँ ई पक्का रोड बनल अछि से पता नहि। आब ओही रोडकेँ थोड़ेक चौड़गर सेहो कऽ देल गेल अछि। सीतामढ़ीक हेतु दड़िभंगा-पटनासँ जाइबला बस सभ हमरे गाम दऽ कऽ जाइत-अबैत अछि। कुल मिला कऽ देखल जाए तँ हमर गाम छोट-छीन शहरक रूप धऽ नेने अछि।
गाममे पढ़ल-लिखल लोकक कमी नहि, देशमे सर्वत्र हमरा गामक लोक भेट जेता। दिल्ली ओ मुम्बइमे तँ भरल छथि। हमरा लोकनि सोदरपुरिये मानिक मूलकक साण्‍डिल्य गोत्रीय मैथिल व्राह्मण छी। ७ पुस्त पूर्व हमरा लोकनिक पूर्वजक विवाह अड़रे डीह गाममे भेलनि आ हुनका ससुर गामेमे बसा देलखिन। पर्याप्त जमीन-जत्था देलखिन। क्रमश: ओ सभ उद्यमसँ प्रचूर धन-सम्पत्ति अर्जित कए इलाकाक प्रतिष्ठित धनीकमे मानल जाइत छला। क्रमश: परिवारक विकास होईत गेल।
जनसंख्या बढ़ैत गेल आ ओही क्रममे पारिवारिक सिरफुटौऐल सेहो बढ़ल। हम बच्चा रही तँ कए बेर कएक गोटाक आपसी मारि-पीटिमे कपार फुटैत देखिअनि। मोकदमावाजी तँ चलबे कएल। ओहि समयमे अड़ेरमे नामी पहलमान भेल रहथि स्व. बच्चा झा। हुनकर शक्तिसँ दड़िभंगा महाराज प्रभावित रहथि। सुनबामे आयल जे ओ लोहाक हथकड़ीकेँ जोर लगा कए तोरि देने छला।  
हमरा गाममे पूर्वकालमे मूलत: कृषि आधारित लोक क जीवन छल । अधिकांश लोककेँ जमीन-जत्था रहइ। गाम खुशहाल छल। दुपहरियाक समयमे बरोबरि अल्‍हा-रूदलक गीतमय कविता पाठक आयोजन ढोलकक तालपर  होइते रहै छल।
ऐ तरहकआयोजन आम छल। मुदा आब समय-साल बदलल अछि। शिक्षा दिस लोकक रूझान बढ़ल अछि। लोक अपन छोट-छोट बच्चाकेँ पढ़ाइक लेल मधुबनी पठा रहल छथि। पब्‍लिक स्कूलक चला-चलती बढ़ल अछि। शिक्षा ओ चिकित्साक समस्या हमरे गाम तक सीमित नहि अछि। ओ तँ पूरा बिहारक समस्या अछिए। तथापि लोक प्रयासरत अछि। आशा अछि, कालान्रमे हमरो गाममे चिकित्साक बेहतर ब्यवस्था भऽ सकत जाहिसँ स्थानीय लोककेँ पटना/दिल्ली नहि दौड़ए पड़तैन।
गाममे आब धनीक लोकक भरमार भऽ गेल अछि। कतेको बेकतीकेँ आर्थिक विकास बहुत भेल। गाममे जबार हएब आम बात भऽ गेल अछि। गाम लऽ कऽ भोज तँ  होइते रहैत अछि। लोक सभ कहैत रहै छथि जे ओ सभ भोज खाइत-खाइत तंग भऽ गेल छथि। कतेको गोटाकेँ ब्लड-सूगर बढ़ि जाइत छैन। रसगुल्ला-छेनाक बिना तँ कोनो भोज  होइते ने अछि।
पुरना जमानामे किलोक किलो भोजन चट केनिहार लोक सबहक खिस्सा सुनैत रहै छलहुँ मुदा आइयो-काल्हि एहन एकाध बेकती हमरा गाममे मौजूद छथि। जँ अपनेकेँ धैर्य जवाब नहि दऽ दिए तँ हुनकर भोजनक क्रममे कदमताल देख सकैत छी। हुनका द्वारा खाएळ गेल रसगुल्लाक गिनतीक हेतु जन लगबए पड़ि सकैत अछि। भोजनोपरान् लदबद चलैत अपन घर आपस जाइत हुनका देख छगुन्तामे पड़ि जाएब। आखिर ओ केना जीब रहल छथि? आश्चर्य..!
एतेक भोज  होइत रहैत अछि, मुदा सभजाना भोजमे अखनो स्‍त्रीगणकेँ शामिल नहि कएल जाइत अछि। जँ ब्यवस्थापक नीक छथि तँ घरे-घर खएक (पारस) पहुँचा दइ छथिन, मुदा ओहो दुपहर रातिमे जखन कि कियो स्‍त्रीगण भोजक प्रतीक्षा मजबुरियेमे कए सकैत छथि ।
हम गाहे-वगाहे ऐ ब्यवस्थामे सुधारक चर्च करै छी, मुदा ग्रामीण ब्यवस्थामे सुधारक गुनजाइश सहज नहि  होइत अछि। देखै छी, आगाँ की  होइत अछि।
हमरा गाममे हाइ स्कूलक स्थापना हेतु इलाकाक गणमान्य लोक सभ प्रयास केलाह। ओहिमे हमर बाबूजी सेहो अत्यन् सक्रिय रहथि। स्व. बच्चा झाक परिवारक लोक बहुत रास योगदान देलेथि। स्थानीय लोक सभ सेहो योगदान केलखिन जाहिसँ हाइ स्कूलक नाम- च्चा झा जनता उच्च विद्यालय- अड़ेर पड़ल। किछु दिन धरि ओ विद्यालय पंचायत भवनमे चलैत छल। क्रमश: विद्यालयक अपन पक्का मकान एवम्‍ आन-आन सुविधा भेल।
गेनखेलीक हेतु हमर गाम प्रसिद्ध छल। अंग्रेजी हुकुमतक लोक सभ हमरा गामक लोक सबहक गेनखलीमे अभिरुचि देख दंग रहथि। हमर बाबूजी सेहो ऐमे माहिर रहथि। कतेको मेडल हुनका भेटल छल। गेनखेलीसँ प्रभावित भऽ अंग्रेज अधिकारी सभ हमरा गामक कएक गोटाकेँ छोट-मोट नौकरी धरा देलखिन। अड़ेरक फुटबॉल टीमसँ बड़का-बड़का शहरक टीम सभ घबड़ाइत छला।
हम सभ जखन बच्चा रही तखनो विष्‍णुपुरक मैदानक गेनखेलीमे बाबूजीकेँ भाग लैत देखिअनि। कए दिन हुनका पैरमे चोट लागि जाइन। चोट सबहक देशी इलाज  होइत छल।
आब समय-साल बदलल अछि। गामोमे लोकक आपसी सम्पर्क क्षीण भऽ गेल अछि। फगुआ सन पाबैनमे लोक अपन दरबज्जा ओगरने रहैत अछि तथापि गाम तँ गामे अछि। 
 आशा करै छी जे कालान्रमे क्रमश: हमरा गाममे आर सभ सुविधा  होयत जकर कल्‍पना सुखद जीवनक हेतु कएल जाइत अछि। जाहि प्रकारक चौहद्दी हमर गामक अछि तइमे एकरा विकासक शिखर तक पहुँचनाइ एक सफल स्वपन्न भऽ सकैत अछि, वशर्ते गामक युवा शक्ति रचनात्मक रूख धरैत सही दिशामे अग्रसर  होइथ।


पहिल नौकरी


पहिल नौकरी


दड़िभंगामे हम पाँच सालसँ किछु बेसीए दिन रहलौं। तीन साल तँ सी.एम.कौलेजमे पढ़ैत विद्यार्थी रही। ओइ समय विज्ञान, कला, वाणिज्‍य सभ संकाय मिला कऽ एक्के कौलेज छल। सी.एम.कौलेज-दड़िभंगासँ हम बी.एस-सी. (भौतिकी प्रतिष्‍ठा) पास केलौं। बी.एस-सी केला बाद आगू की करी ई समस्‍या छल। पीक्षाफल बिलमसँ एबाक कारणे एम.एस-सी.क नामांकन सेहो बन्‍द भऽ गेल रहइ। ओहुना ओइ समैमे पढ़ाइ-लिखाइक क्षेत्रमे सम्‍पूर्ण बिहारमे अराजकता छल। परीक्षामे नकल करब तथा नकल कराएब दुनू गौरवक गप छल। विद्यार्थी सबहक अभिभावक सभ पुर्जी पहुँचबैले जान लगौने रहैथ। ऐ परिस्‍थितिमे बिहारक तेतेक बदनामी भऽ गेल छल जे सहियो विद्यार्थीक योग्‍यतापर प्रश्‍न चिन्‍ह लागि जाइत छल।

ओइ समयमे डाक-तार विभागमे दूरभाष निरीक्षकक पदक रिक्तिक विज्ञापन निकलल रहइ। हम मधुबनी पोस्‍ट ऑफिसमे आवेदन-पत्रक लेल एकटा आग्रह पोस्‍ट कार्डपर लिखि खसा देलिऐ। किछुए दिनमे आवेदन-पत्र प्राप्‍त भेल।

आवेदन-पत्र प्राप्‍त होइते भरि कऽ आइ.एस-सी.क अंक-पत्रक संग पठा देलिऐ।

आइ.एस-सी.क प्राप्‍तांकक आधारपर ओइ पदपर चयन हेबाक रहइ। हमरा आइ.एस-सी. परीक्षामे बहुत नीक प्राप्‍तांक छल। किछुए मासक बाद हमरा पटना टेलीफोन विभागसँ दूरभाष निरीक्षकक पदक हेतु नियुक्‍ति-पत्र भेटल।

नियुक्‍ति-पत्र भेटलाक बाद असमंजसक स्‍थिति बनि गेल, कारण हम बहुत महात्‍वाकांक्षी रही। पैघ पदपर जेबाक इच्‍छा रहए, तइ हेतु तैयारीक कार्यक्रम छल, मुदा हाथमे आएल लक्ष्‍मीकेँ लात मारब नीक नहि, ई बात केतेको गोटे कहैथ। अछताइत-पछताइत ओइ नियुक्‍तिकेँ स्‍वीकार करैत अगस्‍त १९७३मे राँची प्रशिक्षण हेतु चल गेलौं। 

राँची टेलीफोन एक्‍सचेंजक भूतलपर प्रशिक्षणक बेवस्‍था छल। ओइ प्रशिक्षणमे कएटा नीक-नीक विद्यार्थी सभ छला। कए गोटा एम.एस-सी. सेहो केने रहैथ। सरकारी नौकरीक बात छेलइ। सभ आँखि मूनि कऽ पकैड़ लेलक।

राँचीमे छह मासक प्रशिक्षणक बाद हमर तीन मासक बेवहारिक प्रशिक्षण-लहेरियासराय टेलीफोन एक्‍सचेंजमे भेल। ओइ क्रममे बलभद्रपुर, लहेरियासरायमे एकटा विद्यार्थीक संग डेरा रहए। एक दिन ओ विद्यार्थी गाम चलि गेला आ हमरा कोठरीक कुंजी नहि रहए। लातसँ तेतेक जोरसँ केबाड़मे धक्का मारलिऐ जे टुटि गेल। बादमे मकान मालिक नाराजगी व्‍यक्‍त केलाह, मुदा बात जेना-तेना शान्‍त भऽ गेल।

ओइ प्रशिक्षणक दौरान फगुआमे हम गाम एलौं आ २-३ दिन फाजिल रहि गेलौं। फोन विभागमे झाजी इन्‍जीनियरिंगक सुपरवाइजर रहैथ। वएह हमर हाकिम छला। हमरा डराबए लगला। की जे प्रशिक्षण अधूरा रहि गेल, ब्रेक लागि गेल। मुदा असलमे किछु नहि भेल। हमर प्रशिक्षण समयसँ पूरा भेल आ हम जमशेदपुरमे ३ मई १९७४ क पदभार ग्रहण कएल। ओहीठाम एकटा आर संगी पदभार ग्रहण केलैथ। सरकारी काज करबाक हमरा किछु अनुभव नहि छल। एसडीओ फोन्‍स बड़ा करगर अधिकारी रहैथ। अपन डाँटसँ अधीनस्‍थ सबहक सीटीपीटी गुम केने रहैत छला।

जमशेदपुर ओइ समयमे बिहारक सुव्‍यवस्‍थित एवम्‍ साफ-सुथरा शहरमे मानल जाइत छल। छुट्टीक दिन शहरमे केतौ-केतौ घुमबाक कार्यक्रम बरबैर बनबैत रही। साक्‍ची ओ विष्‍टुपुरमे तरह-तरहक दोकान सभ छेलइ। जुबली पार्कमे घुमब आनन्‍ददायी छल। ओइ पार्कमे टहलबसँ हम आनन्‍दक अनुभव करैत रही। एक दिन मौका पाबि कऽ हम टाटा स्‍टीलक अन्‍दरसँ देखबाक अवसर सेहो प्राप्‍त कएल। अति उच्‍च तापक्रमपर लोहाकेँ गला कऽ द्रव्‍य रूपेमे एकठाम-सँ-दोसरठाम जाइत देखलौं। भयानक रूपसँ लाल रहैत छल ओ तरल लोहा।

हमर रूमेट सिगरेट पीबैत छला। शुरूक एक मास तँ कहुना कऽ हुनका संग बितौल मुदा आगाँ बहुत दिन धरि हुनका संग चलब सम्‍भव नहि बुझाएल। एक दिन हम हुनका स्‍पष्‍ट कहलिऐन जे या तँ अहाँ सिगरेट छोड़ू नहि तँ अहॉंकेँ हम छोड़ि अलग डेरा लऽ लेब। ओ सिगरेट नहि, छोड़ि सकला आ हम अलग डेरा लऽ लेलौं। 

जमशेदपुरमे रहैत केन्‍द्रीय सिभिल सर्भिसेजक (संघ लोक सेवा आयोगक) परीक्षा हेतु छुट्टीक काज छल।  अधिकारीगण छुट्टी मना कऽ देला। अन्‍तमे हम बिना अनुमतियेक ओतए-सँ घसैक गेलौं आ करीब एक मासक बाद परीक्षा दऽ कऽ आपस एलौं।

एसडीओ फोन्‍सकेँ मोटर साइकिलपर अबैत देखलयैन, हुनका देखते देबाल फानि कऽ एकटा दोकानपर बैस गेलौं। मोनमे तरह-तरह केर आशंका रहए। हम बाटे तकैत रही कि हुनकर बुलाबा आबि गेल आ तरह-तरह केर उपदेश ओ देलाह।

एवम्‍-प्रकारेण लगभग आठ मास धरि ओतए नौकरी केलौं, पछाइत बाबूजीक प्रयाससँ हमर स्‍थानान्‍तरण जमशेदपुरसँ डीइटी दड़िभंगाक अधीन भऽ गेल। मुदा एसडीओ फोन्‍स कार्यमुक्‍त करैमे नाकर-नुकुर करैत छला। हम जल्‍दीसँ जल्‍दी दड़िभंगा आबि कार्यभार ग्रहण करए चाही। हमर सहकर्मीक सेहो स्‍थानान्‍तरण दड़िभंगे भेल रहैन। ओ पहिने कार्यमुक्‍त भऽ ओतए पहुँच गेल छला। एसडीओ फोन्‍स हमरा लटकौने छेलैथ।

प्रात:काल भोरे-भोर हम डीइटीक डेरापर पहुँचलौं। ओहीठाम लेखाधिकारी सेहो रहैत छला। हम हुनका सभटा बात कहलयैन। ओ बहुत सहृदय बेकती छला। हमरासँ पुछलैन जे आखिर अहाँक बदली केना भेल। तँ कहलयैन जे बाबूजी पटना जा कऽ किछु प्रयास केलैन जइसँ हमर स्‍थानान्‍तरण दड़िभंगा डिवीजन भेल अछि। हमरा दड़िभंगा जाएब बहुत जरूरी अछि। आदि-आदि। सभ बात सुनि ओ आश्वासन देला जे अहाँक आइ अबस्‍स कार्यमुक्‍ति कए देल जाएत। भेबो कएल सएह।

कार्यालय खुजिते ओ एसडीओ फोन्‍सकेँ फोनपर आदेश देलखिन जइसँ ओ तिलमिला गेला। मुदा हमरा ओइ दिन ओइठामसँ कार्यमुक्‍त कए देल गेल।

साँझमे बससँ दड़िभंगा विदा भेलौं। दड़िभंगा पहुँचलापर पता लागल जे दुइएटा जगह खाली छइ। एकटा जयनगरमे आ दोसर सुपौलमे। जयनगरक खाली पदपर हमर संगी अपन जोगार लगा लेलैन। आब रहि गेल सुपौल। कोनो दोसर उपाय नहि देख हम सुपौलक रस्‍ता पकड़लौं। सहरसा बाटे सुपौल ट्रेनसँ जाएब ओइ समयमे बेस टेढ़ काज छल। तथापि ओतए पहुँच कार्यभार ग्रहण कएल।

छोट-छीन टेलीफोन एक्‍सचेंज छल जइमे किछु ऑपरेटर, एकटा मेकेनिक पहिनेसँ कार्यरत छल। हम ओतए वरिष्‍ठतम बेकती छेलौं। सहरसामे उच्‍च अधिकारी बैसैत छला जे फोन द्वारा तरह-तरह केर आदेश पठबैत रहै छेलखिन।

सुपौल छोट-छीन नीक शहर बुझाएल। ओइठामक माड़वाड़ी बासाक उत्तम ओ स्‍वादिष्‍ट भोजनक स्‍मरण कए अखनो जीहमे पानि आबि जाइत अछि। ओइठाम रेलबे स्‍टेशनक ठीक सामने लाल कोठीक एकटा कोठरीमे हम आ पोस्‍टमास्‍टर डेरा लेने रही। पोस्‍ट मास्‍टर बहुत कर्मठ छला। भोरे जाथि तँ देर राति थाकल-झमारल अबैथ। हुनका संगे तेकर बाद हँसी-ठठा होइत छल।

ओही डेरामे रहैत हमरा पोसुआ कुकुर काटि लेलक आ दोसरे दिन ओ कुकुर मरि गेल। आब तँ बड़ चिन्‍तामे पड़ि गेलौं। नमगर-नमगर चौदहटा सूई पेटक अँतरीमे लगबए पड़ल। एक दिन सुई लगबिते काल एकटा घटक आबि गेला। सूई लगबैत देख लेला से चिन्‍तामे पड़ि गेलौं। ओना, कोनो कारणसँ ओ कथा नहि पटल। किछु दिन बाद हमर ससुर अपन अनुज ओ एकटा आर बेकतीक संग विवाहक क्रममे हमरासँ गप करए टेलीफोन एक्‍सचेंज- सुपौल आएल रहैथ। हुनका सभकेँ यथासम्‍भव स्‍वागत कएल। विवाहक आहटसँ मोनमे प्रसन्नता छल। जे जे पुछला, सभ उत्तर देलिऐन।

साँझमे हमर पितिया ससुर डेरापर सेहो एला। डेराक हालत तँ वर्णन जोग नहियेँ छल। ऊपरसँ हमरा गंजी मइल छल से बात हमर ससुरकेँ पता लगलैन। ओ चिन्‍तामे पड़ि गेला, कारण ओ स्‍वयं बहुत साफ-सुथरा रहैत छला।

सुपौलक दही आ पेरा बड़ नामी छल। ऒहिठिमक अति स्‍वादिष्‍ट पेरा खेबाक स्‍मरण होइते अखनौं मुँहमे पानि आबि जाइत अछि।

किछु दिनक बाद हमर स्‍थानान्‍तरण सुपौलसँ दड़िभंगा डीइटी ऑफिसमे भऽ गेल। ३ जून १९७४ क हम डीइटी दड़िभंगाक कार्यालयमे पदभार ग्रहण कए जखन गाम पहुँचलौं तँ दरबज्‍जापर अलगे प्रकारक गहमा-गहमी पसरल छल। हमर संगी एवम्‍ मित्र- लाल बच्‍चा (स्‍व. प्रो. विष्‍णु कान्‍त मिश्र) कहला जे हमर बिआह ठीक भऽ गेल अछि। क्रमश: सभटा जानकारी भेटल। प्रात भेने माने ४ जून १९७५ केँ हमर बिआह छल। कोनो जानकारी नहि हेबाक कारण हम ओही दिन कार्यालय जा एकाएक विवाहक हेतु छुट्टीक आवेदन देलिऐ आ तखन रातिमे आठ बजे दड़िभंगासँ गाम एलौं...।

कार्यालयमे ई समाचार बिजलौका जकाँ पसैर गेल। चारूकातसँ वधाइ दैत सहकर्मी लोकनि हमर आनन्‍दकेँ कएक गुना बढ़ा देला।

गाम पहुँचते विवाहक तैयारीमे लागि गेलौं। गाड़ी सभ लागल छल। बिरयाती तैयार छल आ बरक प्रतीक्षा छल। बरकेँ अबिते धराधर विध सभ पूरा कएल गेल।

हमर पितिया ससुर हथधरीक हेतु आएल रहैथ। ओ बिच्‍चे दरबज्‍जापर धोती-कुर्ता पहिरने हमर प्रतीक्षामे बैसल रहैथ। आर-आर लोक सभ दरबज्‍जापर मुस्‍तैद छला। हमर मित्रगण सभ सेहो मौजूद छल।

हथधरी भेल। बरियाती सभ चटपट गाड़ीमे बैसल। कुल १९ गोट बरियाती छल जे ओइ समयक हिसाबे बेसीए छल। नहि तँ पहिने पाँचटा-सातटा बरियाती पर्याप्‍त होइत छेलइ। बरियातीक संख्‍या लऽ कऽ जे अपना समाजमे रेबाज बदलल अछि से दुर्भाग्‍यपूर्ण, कारण सैकड़ोक तादादमे गाम-गामसँ बरियातीकेँ लादि कऽ कन्‍याक पिताक माथपर पटैक देब कोनो वुद्धिमानी नहि कहल जा सकैत अछि। व्‍यर्थक परेशानीक अलाबा आर्थिक क्षति सेहो होइत अछि, जेकर कोनो केकरो लाभ नहि।

..ओइ समयमे सीमित संख्‍यामे बरियाती जाइत छल तँ ओकर शोभे अलग रहै छेलइ। एक-एक बेकतीपर पर्याप्‍त धियान देल जाइत छल। बरियाती सबहक बेकतीगत परिचय होइत छल। आब तँ ढाकक ढाक बरियाती जाइ छैथ आ दुपहरिये-रातियेमे खुआ-पिआ कऽ विदा कए देल जाइत छैन।

हमरा लोकनि दस बजे रातिमे पण्‍डौल डीह टोल पहुँचलौं। गीत-नादक मनोरम वातावरणमे विवाहक प्रक्रिया सम्‍पन्न भेल। ऐसँ जीवन संगिनीक रूपमे आशा मिश्र भेटली जे ओइ समयमे मात्र १७ बर्खक छेली आ हमर उमेर २२ बर्ख छल। अद्यतन हमरा जिनगीमे ओ संगे सुख-दुखक सहभागी छैथ जइसँ हम नाना प्रकारक झंझावातसँ उवैर जीवनक ऐ पड़ावपर ठाढ़ छी।

लगभग दस दिनक अवकाश समाप्‍तिपर छल। विवाहोपरान्‍त हम गाम आएल रही। माय केतेक प्रसन्न भेल रहैथ तेकर वर्णन करब असम्‍भव अछि। हमर पितिआइन सभ सेहो उत्‍सुकतावश कनियाँ ओ ओकर परिवारक विषयमे पुछैत रहली...।

प्रात भेने कार्यालय गेलौं तँ सभ कियो हमरा उत्‍सुकतासँ हाल-चाल पुछैत, फाटो सभ देखैथ। ऐ तरहेँ केतेको दिन बीति गेल।

एक दिन कार्यालयसँ झटैक कऽ दड़िभंगा बस स्‍टेण्‍डपर बस पकड़ए जाइत रही कि पाछूसँ अबाज सुनबामे आएल-

मिसरजी! सासुर जा रहल छी की?”

डेगक गतिक अनुमान कए ओ हमर सासुरक यात्राक अन्‍दाज लगा लेला जे एकदम सही छल। दड़िभंगा कार्यालय लगमे रहबाक कारण ओइठामसँ पण्‍डौल जाएब असान रहै छल। छुट्टी नहि लेबए पड़ैत छल।

डीइटी दड़िभंगा कार्यालयमे हम करीब दू साल काज केलौं। काज तँ कोनो खास नहि छल। पुरान टेलीफोनक बकाया असूली करक रहै छेलइ जइ लेल हमरा लगभग पूरा उत्तर बिहार मुफ्त भ्रमण करबाक हेतु पास भेटल छल। ओना, ओइ पासक उपयोग कियो आन करैत छल आ हम अपन समय अपन समय प्रतियोगिता परीक्षा सबहक तैयारीमे लगबैत छेलौं।

पढ़ाइ-लिखाइ कखनो व्‍यर्थ नहि जाइत छइ। सन्‍ १९७६ क केन्‍द्रीय सचिवालय सेवा हेतु आयोजित संघ लोक सेवा आयोगक एसीसटेन्‍ट ग्रेडक परीक्षा हम पहिले प्रयासमे पास कऽ लेलौं। किछु दिनमे नियुक्‍ति-पत्र सेहो आबि गेल।

नियुक्‍ति-पत्र हाथमे अबिते मनमे उठल- कार्यालय, काज, स्‍थान सभ परिवर्तन भऽ जाएत। ई सोचि मोन आगू-पाछू करए लागल। अन्‍ततोगत्‍वा निर्णय कएल जे दिल्‍लीए जेबाक चाही। ओइठाम अपना तँ जे हएत से हएत मुदा बच्‍चा सभकेँ पढ़ै-लिखैक बेहतर अवसर भेटत। आदि-आदि।

सोच-विचारक बाद हम दड़िभंगाक दूरभाष निरीक्षकक पद छोड़ि दिल्ली स्‍थित केन्‍द्रीय सचिवालय सेवाक सहायकक पदभार ग्रहण करबाक निर्णय कएल। ई निर्णय केतेक सही रहल, केतेक नहि तेकर विचार-विमर्शक आब समय नहि रहल। जे भेल से नीके भेल। गतं न सोचामि कृतं न मन्‍येत। सही कहल गेल अछि जे विवाह भावी जीवनक दिशा दसा तय करैत अछि। यद्यपि हमरा लोकनिक विवाह अभिभावक गण तय केने रहैथ, मुदा हम आब निश्चय कहि सकैत छी जे ओ सभ बहुत वुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय केने छला। जीवन भरिमे हर समय हमर श्रीमती हमर संगे नहि देलैन अपितु जीवन मार्गकेँ अपेक्षाकृत सुगम सेहो करैत रहली। हुनकर रचनात्‍मक सोच एवम्‍ शान्‍त मस्‍तिष्‍कक लाभ हमरा भरपूर भेटैत रहल अछि। केतेको जटिल समस्‍या सभपर हुनकर राय बहुत कारगर होइत रहल अछि। बहुत सन्‍तोष पूर्वक सीमित आमदनीमे इमनदारीपूर्ण जिनगी केना जीबी तेकर ओ उदाहरण छैथ।

हमर सासुर पण्‍डौल डीह टोल रेलबे लाइनसँ थोड़बे दूरपर अछि। घरे बैसल अबैत-जाइत ट्रेन देखाइत रहैत अछि। जखन हम सभ दिल्‍लीसँ पण्‍डौल आबी तँ रेलक आगमनक सूचना घरे बैसल हमर सासुरमे भेट जाइक। भवानीपुरक महादेव मन्‍दिर सामने देखाइत रहैत अछि। केतेको गोटे नियमित भवानीपुर जाइत रहै छैथ आ महादेवक जलढरी करै छैथ, घुमै-फिरै छैथ। असलमे गाम-घरमे लोकक जीबाक अन्‍दाज अखनो अध्‍यात्‍मिकतासँ जुड़ल अछि। कोनो-ने-कोनो रूपे लोक उपवास, पूजा-पाठमे लगले रहै छैथ। शिवरातिकेँ भवानीपुरमे जबरदस्‍त मेला लगैत अछि। स्‍थानीय आकाशवाणीसँ सद्य: प्रशारण सेहो होइत अछि।

पण्‍डौल डीह बहुत ऊँचमे बसल अछि। टोलक सामनेक जमीन सेहो घराड़ीमे उपयोग कएल जा सकैत अछि। एहेन अइल-फइल ओ ऊँच घराड़ी कम गाममे देखल जाइत अछि।

पण्‍डौलमे आदम-जमानासँ रेलबे टीशन अछि। मुदा रेलबे टीशनसँ डीहटोल एबामे बहुत समय ओ संघर्ष रहैत अछि। पण्‍डौल बजार केतेक पुरान अछि से कहब कठिन। आवश्‍यकताक सभ वस्‍तु ओतए भेट जाइत अछि। उत्तम कोटिक धोती ओइ बजारसँ आनि हम वर्षोसँ पहिरैत छी।

पण्‍डौल डीह ओ भवानीपुरक बीचक एकपेरिया रस्‍तामे उरसामा डीह अबैत अछि। कहल जाइत अछि जे पाण्‍डव गुप्‍त बासमे ऐठाम रहल रहैथ।

निश्चित रूपसँ कहल जा सकैत अछि जे मनुखक जीवनमे विवाह एकटा निर्णायक बिन्‍दु होइत अछि। आइ-काल्‍हि तँ तरह-तरह केर लोक परिचय आ की की मिलान करैत अछि, तथापि विवाह विच्‍छेदक संख्‍यामे निरन्‍तर बढ़ोत्तरी भऽ रहल अछि। हम तँ किछु नहि देखलिऐ, मात्र कन्‍याँक एकटा छोट-छीन फोटो हमरा सासुरसँ आएल छल, ओहो विवाह तय भेलाक बाद। ई नहि कहल जा सकैत अछि जे आधुनिकतासँ प्रभावित वर्तमान विवाह सम्‍बन्‍धमे सभ किछु गड़बड़ीए अछि, मुदा ई बात तँ तय अछि जे केहनो नीक-सँ-नीक विवाहकेँ सफलतापूर्वक आगू चलेबाक हेतु दुनू पक्षकेँ समझदारी आ समझौता जरूरी अछि, अन्‍यथा संकट उत्‍पन्न हएब भारी बात नहि।

हमर ससुर (स्‍व. गणेश झा) ऐ बातसँ चिन्‍तित भऽ गेल रहैथ जे हम दड़िभंगाक नौकरी छोड़ि कए दिल्‍ली जा रहल छी मुदा किछुए दिनक बाद हम परिवारकेँ संगे लऽ अनलौं। जइसँ हुनका अतिशय प्रसन्नता भेलैन।

सोमवार, 14 अगस्त 2017

कन्‍याकुमारीक यात्रा




 


कन्‍याकुमारीक यात्रा


चारूकात अन्‍हार गुज्‍ज मात्र एकटा फोक्‍सीन आ पानिमे ठाढ़ एक मात्र शिला। देखिते देरी कियो बाजि उठल-

आबि गेल कन्‍याकुमारी..!”

दुपहर रातिमे हमरा लोकनि धङफङाक कऽ गाड़ीसँ उतरलौं। संयोगसँ कैमरा बसेमे छुटि गेल आ प्रात भेने ओइ कैमराक हेतु लाख छपटेलौं मुदा नहियेँ भेटल।

प्रात:काल भोरे नहा-सोना कऽ मोटरी-चोटरी तैयार कए हमरा लोकनि इलाहाबाद टीशनपर पहुँचलौं। गंगा-काबेरी एक्‍सप्रेस आएल। सभ यात्री सभ ओइमे सवार भेला। किछुए कालमे ओ गाड़ी धराक-धराक आगाँ बढ़ए लागल। फस्‍ट क्‍लासक यात्रीकेँ विशेषता तँ बुझले होएत। कियो केकरो जल्‍दी टोकत नहि, आ जँ बजबो करत तँ एकटा विशिष्‍ट औपचारिकताक संग। खास कऽ गंगा-काबेरी एक्‍सप्रेसमे बेसी दक्षिण भारतीय लोक रहबाक कारणेँ बेस गुम्‍मी पसरल छल। एतबामे हमरा लोकनिकेँ मैथिलीमे गप-सप्‍प करैत कियो बगलक डिब्‍बाक यात्री सुनला आ ओ स्‍वयं वोरे होइत छला। हिन्‍दी-भाषी छला आ बड़ी काल धरि ओ हमरा लोकनिक माथ चटैत रहला। कखनो किछु परामर्श दैथ तँ कखनो हाथ देखैत।

ओइ क्रममे ओ हाथ देखैत-देखैत एहेन गप कहला जाइ कारणसँ सहयात्री लोकनिसँ किछु गलफुलौऐल सेहो भऽ गेल।

गाड़ी सरपट बढ़ि रहल छल आ चारुकात गाम-घर ओहिना छल जेना कि अपना सभ दिस अछि। प्राय: २४ घन्‍टा धरि गाड़ीमे बैसल रहलाक बाद हरियर-हरियर पानिसँ खिलखिल करैत कृष्‍णा नदी। यात्राक क्रममे सभसँ पैघ समस्‍या भेल भाषाक आ भोजनक।

मुख्‍यत: दक्षिण-भारतीय भोजन सर्वत्र उपलब्‍ध होइत छल। दोसर दिन साँझमे हमरा लोकनि मद्रास पहुँचलौं।  टीशनपर थाकल-ठेहियाएल एवम्‍ झमाड़ल हमरा लोकनि एकटा उत्‍सुकतापूर्ण दृष्‍टि फेरैत रहलौं।

आब की करी? ओतेकटा शहर आ ओत्तौ ओहने रिक्‍शा सभ जेना कि हमरा लोकनिक गाममे अछि। मद्रासमे तीनटा मुख्‍य टीशन पड़ैए, पहिल- मद्रास बीच, दोसर- मद्रास सेण्‍ट्रल आ तेसर- मद्रास एगमोर।

गंगा-काबेरी मद्रास बीच टीशनपर रूकल। आ हमरा लोकनि रिक्‍शा पकैड़ मद्रास सेण्‍ट्रल टीशनपर एलौं। ऐठाम रेलबे रेस्‍ट रूमे आरक्षण नहि रहबाक कारणेँ हमरा लोकनिकेँ एकटा होटलक शरण लेबए पड़ल, कारण जे फस्‍टो क्‍लासक विश्रामालय ठसाठस भरल छेलैक आ हमरो लोकनिकेँ यात्राक तेतेक थकान छल जे ओइ भीड़मे प्रयाप्‍त विश्राम तँ नहियेँ भऽ सकैत छल। तँए एकटा साधारण होटलमे ठहरलौं।

प्रात:काल हमरा लोकनि मद्रासक मुख्‍य-मुख्‍य स्‍थान घुमलौं, जेना- गाँघीमण्‍डपम, राजाजी मण्‍डपम, समुद्रक किनार, अस्‍पताल इत्‍यादि।

साँझक गाड़ीसँ जे मद्रास एगमोरसँ खूजल आ हमरा लोकनि रामेश्‍वरम्‍ हेतु प्रस्‍थान केलौं। ऐ गाड़ीमे अपेक्षाकृत अधिक भीड़ छेलै आ आरक्षण नहि रहैत तँ की हाल होइत से तँ भगवाने जनितैथ।

मद्राससँ रामेश्‍वरम्-क यात्राक क्रममे लगभग १५-१६ घन्‍टा समय लागल। ज्‍योँ-ज्‍योँ रामेश्‍वरम्‍ समीप आबि रहल छल त्‍योँ-त्‍योँ समुद्रक धारी सभ देखाइत छल। आ मण्‍डपमक बादसँ समुद्रेमे बनल पूलपर गाड़ी चलैत अछि। चारूकात अथाह समुद्रकेँ चीरैत छल साए-साए गोट ट्राली सभ जे माछ मारबाक एकटा नीक साधनक रूपमे प्रयुक्त छल। तखन देखाएल बालूए-बाउलू आ आब रामेश्‍वरम् एकदम समीप छल।

गाड़ी आबि कऽ ठाढ़ भऽ गेल। लगभग २ माइल धरि एक्कापर चढ़ि कऽ हमरा लोकनि भगवान रामेश्‍वरम्‍-क मन्‍दिरक ठीक सामनेमे बनल रामनाथ धर्मशालामे अँटकलौं, जइमे नाममात्र शुल्‍क देबए पड़ल मुदा साफ-सवच्छ ओ सुन्‍दरताक दृष्‍टिकोणसँ ओकर मोल आँकब असम्‍भव अछि।

भारतवर्षमे रामश्‍वरम्‍ मन्‍दिरक चारुकात जे पसार अछि से सभसँ पैघ अछि आ ऐमे निरन्‍तर वृद्धिये भेल जाइत अछि। मन्‍दिरक बनाबट एकटा अपूर्व सौन्‍दर्य अछि आ एकर ऊपरमे निरन्‍तर भजन होइत रहैत अछि, जे लाउडस्‍पीकरक माध्‍यमसँ सबहक कान धरि पहुँचैत रहैत अछि। ओना, ओतए केतेको मन्‍दिर आ धर्मशाला अछि।

रामेश्‍वरम्‍-क मन्‍दिरक चारुकात टापूमे बसल रामेश्‍वरम्‍-क दोकान सभमे मात्र तीर्थयात्रीकेँ धियानमे रखैत समान सभ राखल जाइ छइ। रामेश्‍वरम्‍-क मन्‍दिरक काते-कात दक्षिण भारतीय भोजनबला होटल सभ अछि आ एक पाँतिसँ केतेको दोकान अछि जइमे मुख्‍यत: पूजाक सामग्री जेना- फूल, नारियल आ शंखक भरमार छल। एकटा गप तँ बुझले होएत जे रामेश्‍वरम्‍ भगवानपर गंगाजल चढ़ौलासँ मोक्षलाभक अधिकारी होबाक धार्मिक विश्वास अछि आ तँए ओतए ताम्र पात्रमे गंगाजल भरि-भरि कए लोक सभ चढ़बैत अछि। मन्‍दिरमे भीड़ तँ रहिते छै, मुदा सभसँ प्रसंशनीय अछि ओइठामक प्रशासकीय बेवस्‍था। पण्‍डा लोकनि सेहो अपेक्षाकृत अधिक परिश्रमी ओ इमानदार बुझेला। सभसँ आकर्षक छल ओइठामक चढ़ौआ चढ़ेबाक नियम। विभिन्न प्रकारक पूजनक विभिन्न शुल्‍क देबए पड़ैत जे एकटा विशेष काउण्‍टरपर लोक जमा करए आ ओइठाम टिकट भेट जाइत । बिना ओइ टिकटक लोक रामेश्‍वरम्‍ मन्‍दिरमे नइ जा सकैत अछि। आ जँ घुसिया कऽ लाइन तक लागियो जाए तँ ओकर प्रसाद व पूजनक सामग्री भगवानपर नहि चढ़तैन। यएह अछि पैसा देवीक प्रकोप। जेतेक पाइ तेतेक नीक पूजा।

मन्‍दिरमे भरि दिनमे कएक बेर पूजा होइ छै आ पहिल पूजा चारि बजे भोरे होइ छइ। आर जे किछु से तँ अछिए मुदा रामेश्‍वरम्‍-मे एकटा अपूर्व प्राकृतिक सौन्‍दर्य छै जे राम-झरौखापर बैसलासँ बुझाइ छइ। कहबी अछि जे भगवान राम लंकापर विजयक बाद ऐ पहाड़ीपर बैस अपन बानरी सेनाक संग विजयोत्‍सवक संग-संग विश्राम लाभ केलैन। ओ स्‍थान ऐछो विश्रामेक पात्र। चारुकात समुद्रक अपूर्व दृष्‍य दर्शनीय अछि। हजारक हजार नारियल-खजूरक गाछ सभ चारुकात पसरल अछि।

ओना तँ दक्षिण भारतमे सौंसे नारियरक गाछक भरमार अछिए, मुदा रामेश्‍वरम्‍-मे ई नारियरक गाछ सभ एकटा अपूर्व सौन्‍दर्यक निर्माण करैत अछि। ठाम-ठामपर अनेकानेक कुण्‍ड सभ अछि। स्‍वयं रामेश्‍वरम्‍ मन्‍दिरमे केतेको कुण्‍डमे स्‍नान करबाक हेतु लोक आठअना पाइ दए कऽ एक कुण्‍डसँ दोसर कुण्‍डपर नहाइत फिरैत छल। जेहो मन्‍दिरक बेवस्‍था आ देशक विभिन्न भागसँ आएल हजारो तीर्थ-यात्रीक उत्‍सुकता दर्शनीय छल। ठाम-ठामपर केतेको तीर्थ-यात्री द्वारा बनौल गेल धर्मशाला सभ लोकक धार्मिक भावनाकेँ प्रतिबिम्‍बित करैत छल। एवंप्रकारेण २ दिन धरि आनठाम जीवन बिताए हमरा लोकनि रामेश्‍वरम्‍-सँ प्रस्‍थान केलौं। ऐ बीच धर्मशालाक बेवस्‍थापक तगादा सेहो कए चुकल छल जे हमरा लोकनि कखन स्‍थान छोड़ब आ तँए कनेक आर धड़फड़ा कऽ ओइ स्‍थानसँ तेसरदिन प्रात: १० बजे प्रस्‍थान केलौं।

रामेश्‍वरम्‍ टीशनपर यात्री ठसम-ठस भरल छल आ बहुत चेष्‍टाक बाद महिला डिब्‍बामे हम सभ पैसलौं। आरक्षण नहि छल। कहुना काहि काटि रामेश्‍वरम्‍-सँ मण्‍डपम टीशनपर पहुँचलौं। ओइठामसँ बस कन्‍याकुमारीक लेल खुजैत अछि। ठाम-ठामपर तस्‍करीबला समान सभ बिकाइत छल।

मण्‍डपम टीशनसँ करीब एक माइल पैदल चलला बाद बस-स्‍टैण्‍ड भेटल आ ओतए करीब-करीब २ घन्‍टा प्रतीक्षाक कए हमरा लोकनि बसमे असवार भेलौं। बसमे चढ़बासँ पूर्वे लोककेँ गाड़ीक टीशन भेटैत छेलै जइसँ गाड़ीमे जगह सुरक्षित भऽ जाइत छेलइ। बस-स्‍टैण्‍डपर लोक टक-टकी लगा बसक प्रतीक्षा कए रहल छल। बसकेँ अबिते लोक सभ धड़फड़ाइत ओइमे पैसए लागल आ देखते-देखते पूरा बस ठसम-ठस भरि गेल। टोकन भेटिये गेल छल आ तँए हमरा लोकनिकेँ जगह सेहो भेटल। सनसनाइत बस रस्‍ताकेँ चीरैत आगू बढ़ए लागल आ हमरा लोकनि उत्‍सुकतासँ दक्षिण भारतक सौन्‍दर्यक अवलोकन करैत रहलौं। चारुकात केराक करजान आ नारियल-गाछक पाँति। ओइ सभमे नारियलक खेती ओहिना बुझाएल जेना अपना सभ ओइठाम आमक अछि अथबा ओहूसँ बेसी, कारण जेमहर नजैर दौड़ल तेम्‍हरे नारियरेक गाछ देखाइ।

रातिक समय छेलै तँए बहुत बेसी दृष्‍यावलोकन तँ नहि भऽ सकल मुदा जहाँ बस समुद्री इलाकासँ गुजरइ तँ बेंग सबहक कों-कॉंइ अनायासे सुनबामे आबए लगैत छल।

किछु कालक बाद हमरा लोकनि ट्युटीकोरन नामक बन्‍दरगाहक लग पहुँचलौं। ओतए बस किछु कालक हेतु अँटकल आ हमरा लोकनि कनी-मनी खेलौं। तेकर बाद फेर अन्‍हारे-अन्‍हारे बस भागए लागल आ रातुक करीब डेढ़ बजे हमरा लोकनिकेँ एकटा फोक्‍सीन देखाएल। बुझाएल जेना चारुकात पानिमे ढौंसा बेंग सभ हजारक-हजार संख्‍यामे हमरा लोकनिक स्‍वागतमे जय-जयकार करैत हो...।

धड़फड़ा कऽ हमरा लोकनि बससँ उतरए लगलौं। यएह थिक कन्‍याकुमारी। भारतक स्‍वर्ग आ हिन्‍द महासागर, अरब सागर ओ बंगालक खाड़ीक संगम स्‍थलपर ठाढ़ विवेकानन्‍दक अविस्‍मरणीय स्‍मारकक हेतु विख्यात कन्‍याकुमारीक दर्शन हेतु मोन छटपटाइत छल। मुदा राति बेसी छल आ हमरा लेाकनि लगभग १२ घन्‍टा बसक यात्रासँ थाकि गेल छेलौं।

थाकल-झमारल हमरा लोकनि विवेकानन्‍द स्‍मारक शिलासँ संबद्ध विवेकानन्‍द लॉजमे राता-राती पहुँचलौं। ओइठामक बेवस्‍था, कार्यकर्त्ता लोकनिक सेवाक भावना ओ स्‍वच्‍छताक सविस्‍तार वर्णन बिना केने आगाँ बढ़ब अनुचिते होएत।

विवेकानन्‍द (K.V.R.M.) स्‍मारक शिलाक बेवस्‍थाक हेतु एकटा समिति अछि जे ओइसँ सम्‍बन्‍धित ओना वस्‍तुक बेवस्‍था करैत अछि। विवेकानन्‍द लॉजमे रात्रीमे ठहरबाक उत्तम बेवस्‍था अछि। ओइठाम चौबीसो घन्‍टा स्‍वागत कक्ष खूजल रहैत अछि। आ दुपहरियो रातिमे ओतए असानीसँ मकानक आवन्‍टन कए देल जाइत अछि। भोजनालयमे उ. भारतीय ओ द. भारतीय दुनू प्रकारक भोजन देल जाइत अछि। ओइ भोजनालयक बेवस्‍था ओ स्‍वच्‍छता प्रसंशनीय अछि।

केतेको दिनक बाद हमरा लोकनिकेँ एकबेर पुन: उत्तर भारतीय भोजन करबाक अवसर भेटल आ विवेकानन्‍द लॉजमे विश्रामक बाद हमरा लोकनिक यात्राक थकान बहुत कम भऽ गेल छल।

भोरे उठि कऽ हमरा लोकनि सुर्योदयक मनोरम दृष्‍य देखबाक हेतु बंगालक खाड़ीबला समुद्री भागक आस-पास पहुँचलौं। रस्‍तामे केतेको लोक एहेन भेटला जे ओइ दृष्‍यावलोकनक हेतु दौड़ रहल छला। ओतए लगैत अछि जेना समुद्रक निच्‍चाँसँ सूर्यक आगमन होइत हो। तीनटा समुद्रक संगम स्‍थलीपर शक्‍ति सम्‍पन्न सूर्यक प्रात:कालीन आगमनक दृष्‍य केतेक मनोरम भऽ सकैत अछि ओ आखरमे नहि उतारल जा सकैत अछि।

शतीक शिवक प्राप्‍तिक हेतु तपस्‍या कन्‍याकुमारीक जइ शिलापर केलैन ओइ शिलापर एकटा उत्‍यन्‍त रमणीय मन्‍दिरक निर्माण भेल अछि। ओ मन्‍दिर बीच समुद्रमे अछि आ ओइठाम तक पहुँचैले कन्‍याकुमारी स्‍मारक समिति दिससँ जहाजक बेवस्‍था सेहो कएल गेल अछि।  जहाजक शुल्‍क प्रति बेकती एक टाका अछि। आ भरि दिनमे जहाज कएक बेर यात्री सभकेँ घाटपर सँ लऽ कऽ शिलाक विभिन्न भागमे ओ आपसीकाल धरि स्‍वयंसेवक लोकनि जे सेवा करै छैथ से प्रसंशनीय अछि।

विवेकानन्‍द स्‍मारक शिला मुख्‍यत: विवेकानन्‍दक स्‍मारक अछि। ओइठाम विवेकानन्‍द एकबेर समुद्रमे हेलि कऽ पहुँचला आ २दिन धरि लगातार तपस्‍या करैत रहला। विवेकानन्‍दक अपूर्व मूर्ति ओतए जेना सम्‍पूर्ण भारतवर्षकेँ उद्भोदन करैत हो। ओतए अछि एकटा ध्‍यान मन्‍दिर जइमे लोक सभ किछु काल बैस कऽ ध्‍यान कए सकैत अछि।

तेतबे नहि, ओइठाम सतीक पैरक निशान सेहो अछि ओ ओइपर एकटा पृथक मन्‍दिर निर्माण कएल गेल अछि। ओइ शिलापर घुमैतकाल चारुकात समुद्रक दृश्‍य ओइमे जलक लगातार हिलकोर आ यात्री सबहक आश्‍चर्य मिश्रित प्रतिक्रिया देखबा आ सुनवा योग छल।

आपसी-

विवेकानन्‍द स्‍मारक समिति जइ सौन्‍दर्यक रचना कन्‍याकुमारीमे कएल अछि तइ हेतु ओ लोकनि प्रशंसनीयेटा नहि अपितु स्‍तुत्‍य छैथ। भारतक गौरव गरिमा वा ओकर सांस्‍कृतिक महिमाकेँ संक्षेपमे प्रस्‍तुत केनिहार ओइ स्‍थानकेँ नमस्‍कार करैत हृदयमे एक अपार आनन्‍दक अनुभव करैत हमरा लोकनि बसमे असवार भऽ मदुराईक हेतु प्रस्‍थान कएल आ लगभग ७ घन्‍टाक यात्राक बाद सायंकाल मदुराई पहुँच, एकटा होटलमे हमरा लोकनि विश्राम कएल।

दोसर दिन भारतक प्रसिद्ध मन्‍दिर मीनाक्षी भगवतीक अद्वितीय श्रृंगार देखल ओ हजारक-हजार भक्‍तक अपूर्व भक्‍ति समन्‍वित पूजा-अर्चना वातावरणकेँ आनन्‍दमय बनौने छल। साँझमे हमरा लोकनि गाड़ीसँ मद्रास हेतु प्रस्‍थान कएल आ प्रात: काल मद्रास पहुँच भरि दिन मद्रासक शहरमे रपट लगाएल।

परात भेने प्रात:काल गंगा-काबेरीमे आरक्षण छल आ सबेर-सकाल गाड़ी पकैड़ हमरा लोकनि इलाहाबादक हेतु प्रस्‍थान कएल। फेर वएह रस्‍ता वएह दृष्‍य आ धराक-धराक चलैत गाड़ी। दोसर दिन थाकल-ठेहियाएल तथा झमाड़ल हमरा लोकनि इलाहाबाद पहुँच नि:साँस छोड़लौं।

एतबा तँ बुझाइते अछि जे हमरा लोकनिक यात्रा समयाभावक कारणेँ किछु कष्‍टकर भऽ गेल, मुदा ओइ समयमे जे आनन्‍द भारतक गौरवशालीक प्रतीक स्‍वरुप कन्‍याकुमारीक विवेकानन्‍द शिलाक दर्शनसँ भेल से अन्‍यत्र नहि भऽ सकैत अछि।

कन्‍याकुमारी सरिपहुँ भारतवर्षक गौरवक प्रतीक अछि।  

 (ई यात्रा वृतान्‍त ३९ बर्ख पूर्वक अछि।)

शनिवार, 29 जुलाई 2017

भूमिका





 


भूमिका



१२ नवम्‍बर २०१६ कार्तिक शुक्ल त्रयोदशीक सायंकाल पू. माता दयाकाशी देवीक देहावशानक बाद मोन तेतेक दुखी ओ अशान्‍त भऽ गेल जेकर वर्णन असम्‍भव। लगभग चारि मास धरि राति-राति भरि निन्न नहि भेल। कहियो काल भोरुपहरमे आँखि लगैत छल, ओहो थोड़बे कालक लेल। सगर राति ओहिना माने टकटकीए-मे...। सम्‍पूर्ण दिनचर्या अस्‍तव्‍यस्‍त भऽ गेल। एहेन मानसिक स्‍थितिसँ उवरबामे ऐ आलेख सबहक सहारा भेटल। ई आलेख सभ हमर जीवनक बेकतीगत अनुभव ओ सोचपर आधारित अछि। भऽ सकैए हम जे अनुभव कएल वा तेकरा लिखबाक जे प्रयास कएल, बहुतो गोटे ताहिसँ ओही क्षेत्रमे, ओही विषयपर श्रेष्‍टतर होइथ।

गाम-घरसँ लऽ कऽ भारतक राजधानी–दिल्‍ली–धरिक प्रवासक क्रममे अनेकानेक तरहक घटना घटल, अनेकानेक बेकती सभसँ मदैत भेटल, अनेको लोकक सहयोगसँ जीवनमे बढ़बाक अवसर प्राप्‍त भेल। ऐ क्रममे केतेको बेकतीक चर्च प्रस्‍तुत पोथीमे भेलो अछि, आ केतेको गोटे छुटबो केलाह। जीवनक यात्रामे जे जेतए आ जइ रूपे भेटला हम हुनकासँ किछु-ने-किछु सीखबाक प्रयास कएल। एहेन अनेको लोक छैथ जे एकतरफा अपन विचार तथा काजसँ मदैत करैत रहला, हम ओइ सभ बेकतीक प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्‍यक्त करैत स्‍पष्‍ट कऽ रहल छी जे ऐ पोथीमे बहुत रास बात छुटि गेल अछि। भऽ सकैए आगाँ ओइ छुटल प्रसंग सबहक वर्णन करबाक सौभाग्‍य भेटए आ हम ओइ सभ प्रसंगकेँ क्रमश: समावेश कऽ सकी।

शुरूक २५-२६ वर्ष हम गामेमे वा गामक आसेपासमे रहलौं। पछाति भारत सरकारक केन्‍द्रीय सचिवालय सेवामे नौकरी भेलाक बाद दिल्ली ओ गामक बीच तारतम्‍य बैसाएब ओ बनौने रहब, क्रमश: कठिन होइत चल गेल। यद्यपि गामपर पू. मायकेँ रहबाक कारण गामक आबा-जाही निरन्‍तर बनल रहल। कालक्रमे हमर तमाम मित्रमण्‍डलीक मत छल जे सेवा निवृत्तिक बाद दिल्‍ली वा दिल्‍लीक आसे-पास रहब बेसी नीक। परिवारोमे सभ बेकतीक एकमतसँ यएह राय छल। ओना, लगभग चालीस बर्खक बाद आब दिल्ली घर जकाँ भऽ गेल अछि। बच्‍चा सभ अहीठाम छैथ। सभ सुविधा अहीठाम अछि, सेवा निवृत्तिक पछातियो ओहिना व्‍यस्‍तता बनले अछि। दिल्‍लीमे एतेक दिन रहलाक बादो गाम-घरक उद्वेग तँ अबिते अछि। रहि-रहि कऽ घटित घटना क्रम सभ बिजलोका जकाँ माथमे चमैक जाइत अछि। चमकबो केना ने करत, आखिर अपन लोक तँ अपने होइत अछि किने, अपन गाम अपने होइत छै किने। आ एकर कोनो विकल्‍पो तँ नहियेँ होइ छइ।

ऐ पुस्‍तकक विभिन्न आलेखमे यथासाध्‍य बिना किनको कष्‍ट देने अनेको घटना-क्रमकेँ प्रेषित करबाक प्रयास कएल अछि। तथापि जँ केतौ कोनो रूपे किनको कनिक्को मनमे आक्षेप बुझबामे आबए तँ ओ मात्र संयोग भऽ सकैत अछि, तथापि क्षमा चाहब।

हमर समस्‍त आलेखक प्रथम पाठक हमर पत्नी श्रीमती आशा मिश्रक निष्पक्ष राय सँ बहुत मदति भेटल । प्रत्येक आलेखके ओ धियानसँ पढलथि एवम् ओहिमे   गुणात्मक सुधार केलथि, जइसँ ऐ आलेख सभकेँ सही दिशा भेटल ।हुनकर अभूतपूर्व योगदान अछि ।ऐ पोथीक Forward लिखनिहार डॉ. विनय कुमार चौधरीजी आर.एम.कॉलेज सहरसाक समाजशास्‍त्र विभागक प्रोफेसर छैथ, हमर अभिन्न मित्र, शुभचिन्‍तक छैथ। ओ स्‍वयंमे एकटा संस्‍था छैथ। सहरसामे रहि केतेको समाजिक काजसँ जुड़ल छैथ। अनेको पोथीक लेखक छैथ। हुनका प्रति आभार जे ओ Forward लिखबाक कष्‍ट केलैन। हम मैथिलीमे लिखी ऐ लेल डॉ. जयकान्‍त मिश्रजी बहुत बेर कहैत रहै छला। हलॉंकि प्रसंगवश ई बात कएकटा आलेख सभमे विस्‍तारसँ आएलो अछि। वर्तमानमे हमर ग्रामीण ओ मित्र डॉ. कमला कान्‍त भण्‍डारी तथा डॉ. कैलास कुमार मिश्र निरन्‍तर उत्साहित करैत रहलाह। ऐ पोथीक कल्‍पना किन्नौं साकार नहि होइत जँ श्री उमेश मण्‍डलजी (बेरमा, निर्मली) धनधोर परिश्रमक संग हमर हस्‍तलिखित पाण्‍डुलिपि सभकेँ स्‍वच्‍छ प्रति प्रस्‍तुत करबामे सुलभ नहि भऽ सकितैथ। मैथिली भाषाक हुनकर गहन ज्ञानक लाभ ऐ आलेख सभकेँ परिस्‍कृत करबामे भेटल, ऐ लेल  हम हृदयसँ धन्‍यवाद एवम्‍ आशीर्वाद दइ छिऐन।

अन्‍तमे माता-पिता एवम्‍ समस्‍त श्रेष्‍ठ जनकेँ सादर प्रणाम करैत ई पोथी अपने लोकनिक सम्मुख प्रस्‍तुत करैत अपार हर्ष भऽ रहल अछि।


सादर...।




  रबीन्द्र नारायण मिश्र

ग्रेटर नोएडा, २५ जुलाई २०१७























पू. स्वर्गीय माता दयाकाशी देवीक

स्‍मरणमे ई पोथी सादर ससिनेह समर्पित



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